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<title> &#45; : International</title>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:स्कॉटलैंड का 86 साल का टीचर यौन शोषण का दोषी करार, 35 साल बाद सजा मिलेगी</title>
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<description><![CDATA[ स्कॉटलैंड में 86 साल के पूर्व शिक्षक इयान वेयर्स को यौन शोषण के मामले में दोषी पाया गया है। इयान वेयर्स 1960 और 1970 के दशक में एडिनबर्ग के स्कूलों में पढ़ाते थे। उन पर अपने कई छात्रों के साथ गलत व्यवहार करने के आरोप लगे थे। इयान वेयर्स कई सालों से दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन रह रहे हैं। जहां की एक अदालत ने उन्हें 1980 के दशक में एक छात्र के साथ अश्लील हरकत करने का दोषी ठहराया। हालांकि अभी तक सजा का ऐलान नहीं हुआ है। इस मामले के पीड़ित ने कहा कि उसे करीब 35 साल बाद न्याय मिला है, लेकिन अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो न्याय का इंतजार कर रहे हैं। उसने यह भी कहा कि वह पूरी तरह खुश नहीं हो सकता, क्योंकि अन्य पीड़ितों को अभी भी न्याय नहीं मिला है। स्कॉटलैंड की सरकार ने 2018 में इयान वेयर्स को वापस लाने (प्रत्यर्पण) की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, कुछ कानूनी कारणों की वजह से यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है और मामला लंबा खिंच गया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ऑस्ट्रेलियाई न्यूज चैनल ABC में आज 24 घंटे की हड़ताल, AI इस्तेमाल का कर रहे विरोध ऑस्ट्रेलिया के सरकारी मीडिया संस्थान ABC के सैकड़ों पत्रकार बुधवार को हड़ताल पर जाएंगे। वे वेतन, काम के हालात और उनकी जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। यह पिछले 20 सालों में पहली बार है जब ABC के कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं। कर्मचारियों की यूनियन ने वेतन बढ़ोतरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, क्योंकि उनका कहना है कि यह महंगाई से भी कम है। इस हड़ताल का असर टीवी कार्यक्रमों पर भी पड़ेगा। 7.30 जैसे बड़े शो और गुरुवार सुबह के कार्यक्रम नहीं दिखाए जाएंगे। उनकी जगह पुराने शो और बीबीसी का कंटेंट चलाया जाएगा। ABC मैनेजमेंट का कहना है कि वे जितना वेतन बढ़ा सकते थे, उन्होंने उतना ही प्रस्ताव दिया है। लेकिन कर्मचारी ज्यादा नौकरी सुरक्षा और AI के इस्तेमाल पर रोक चाहते हैं। कर्मचारी बुधवार को सुबह 11 बजे से हड़ताल शुरू करेंगे, जो 24 घंटे चलेगी। सिडनी और मेलबर्न में ABC दफ्तरों के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होंगे। हड़ताल में शामिल लोग काले कपड़े पहनेंगे। ABC में 4,400 से ज्यादा कर्मचारी हैं, जिनमें करीब 2,000 लोग न्यूज डिपार्टमेंट में काम करते हैं। कर्मचारियों को तीन साल में कुल 10 प्रतिशत वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। इसमें पहले साल 3.5 प्रतिशत और अगले दो सालों में 3.25-3.25 प्रतिशत बढ़ोतरी शामिल थी। लेकिन जनवरी में ऑस्ट्रेलिया में महंगाई दर 3.8 प्रतिशत थी, इसलिए कर्मचारियों को यह प्रस्ताव कम लग रहा है। इसके अलावा 1,000 डॉलर का एक बार मिलने वाला बोनस भी देने की बात थी, लेकिन यह अस्थायी कर्मचारियों को नहीं मिलता। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:08:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कनाडा एडमोंटन हाईवे मर्डर केस में आरोपी अरेस्ट:पंजाबी मूल के युवक पर चलाई गोलियां, दोस्तों के साथ घूमने जा रहा था</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा के अल्बर्टा स्टेट में स्थित हाईवे-QEII पर पंजाबी मूल के युवक बीरइंदर सिंह की गोलियां मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस को सफलता मिली है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने इस मामले में 18 वर्षीय युवक जिमी गैसनर को गिरफ्तार किया है। RCMP के मुताबिक, आरोपी जिमी गैसनर को सस्केचेवान के कैनो लेक से गिरफ्तार किया गया। उस पर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया है। उसे वापस अल्बर्टा लाया गया है, जहां उसकी कोर्ट में पेशी होगी। पुलिस का मानना है कि ट्रक में एक से अधिक लोग सवार थे, जिनकी तलाश जारी है। 14 मार्च को हुई इस घटना में 22 वर्षीय बीरइंदर की गर्दन में गोली लग गई थी। वह अपनी कार पर बैठा था। हमलावरों ने ट्रक में आकर उस पर हमला किया था और उसके बाद फरार हो गए थे। बीरइंदर के साथ उसके साथी भी थे, जिन्होंने उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी मौत हो गई। 3 साल पहले कनाडा गया था बीरइंदर बीरइंदर सिंह 3 साल पहले कनाडा गया था और पिछले 5 महीनों से एडमोंटन में रह रहा था। वह वहां कंस्ट्रक्शन का काम करता था। बीरइंदर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की सोच रहा था। 14 मार्च को बीरइंदर अपने 2 बचपन के दोस्तों के साथ पहली बार बैनफ घूमने जा रहा था। पुलिस ने बताया कि दोपहर लगभग 2:50 बीरइंदर अपनी होंडा सिविक कार चला रहा था। तभी एक सफेद पिकअप ट्रक उनकी कार के बगल में आया। ट्रक सवार 2 लोगों ने पहले बीरइंदर की तरफ दोस्ती का इशारा किया। गर्दन में गोली लगने से हुई मौत गोली बीरइंदर की गर्दन में लगी। उनके दोस्तों ने कार पर नियंत्रण पाकर उसे सड़क किनारे रोका और मदद के लिए पुलिस को काल की, लेकिन ज्यादा खून बहने के कारण बीरइंदर की मौके पर ही मौत हो गई थी। हेट क्राइम के एंगल से जांच कर रही पुलिस वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन (WSO) के अल्बर्टा चैप्टर के अध्यक्ष जसकरण संधू ने बताया कि कार में सवार तीनों युवक पगड़ीधारी थे। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि वे &#039;हेट क्राइम&#039; के एंगल से भी जांच कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक हत्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन पुलिस ने यह साफ कर दिया है कि आरोपी और पीड़ित एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:08:54 +0530</pubDate>
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<title>किम जोंग बोले&#45; परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था:ईरान पर हमले ने हमें सच साबित किया, ताकत से ही सुरक्षा मिलती है</title>
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<description><![CDATA[ नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था। किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया। अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे, ताकि अमेरिका को रोका जा सके। किम जोंग बोले- और ज्यादा परमाणु हथियार बनाएंगे किम जोंग उन का यह भाषण मंगलवार को लिखित रूप में जारी हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था। किम ने देश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने, ज्यादा परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें बनाने पर जोर दिया। किम ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से नॉर्थ कोरिया अब ज्यादा सुरक्षित है और इसी वजह से वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए भी कर पा रहा है। किम जोंग उन के भाषण की अहम बातें… साउथ कोरिया को दुश्मन देश का दर्जा देंगे किम साउथ कोरिया को लेकर उन्होंने कहा कि वह उसे सबसे बड़ा दुश्मन मानेंगे और पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे। अगर साउथ कोरिया कोई भी कदम उठाता है जो उनके देश को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। कई दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रतिबंध और बातचीत के जरिए नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन अब तक सभी प्रयास असफल रहे हैं। व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद ट्रम्प ने किम से फिर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, किम का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे। नॉर्थ कोरिया लंबे समय से यह कहता रहा है कि अगर लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते, तो उनका अंत इस तरह नहीं होता। 2019 में अमेरिका-नॉर्थ कोरिया की बातचीत टूटी थी अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर साल 2018 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे लेकर जून 2018 में सिंगापुर में पहली बार ट्रम्प और किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन यहीं बातचीत टूट गई क्योंकि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए। इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सुरक्षा के लिए उसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी। इसी सोच के तहत उसने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नॉर्थ कोरिया का मानना है कि मजबूत परमाणु क्षमता ही उसे बाहरी हमलों से बचा सकती है। नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने धीरे-धीरे अपनी पुरानी रणनीति पर वापसी कर ली। उसने मिसाइल टेस्टिंग बढ़ा दी और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगा। कई बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया। फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों की टेस्टिंग की है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसका मतलब है कि ये अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी मानती हैं कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 50–100 के आसपास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन यह पक्का आंकड़ा नहीं है। किम जोंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… किम जोंग-उन की साउथ कोरिया को चेतावनी, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने साउथ कोरिया को कड़ी चेतावनी दी है। किम ने कहा है कि उनके देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो वे साउथ कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर सकते हैं। प्योंगयांग में सात दिन चली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस के समापन पर किम ने अगले पांच वर्षों के लिए परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज करने का खाका पेश किया। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:12:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>किम, जोंग, बोले-, परमाणु, हथियार, रखने, का, फैसला, सही, था:ईरान, पर, हमले, ने, हमें, सच, साबित, किया, ताकत, से, ही, सुरक्षा, मिलती, है</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका के टेक्सास में तेल रिफाइनरी में भीषण आग, हीटर में विस्फोट से हादसा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के टेक्सास राज्य के पोर्ट आर्थर शहर में स्थित वैलेरो ऑयल रिफाइनरी में सोमवार रात बड़ा धमाका हुआ, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई और आसमान में काला धुआं फैल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, आसपास के लोगों ने तेज धमाके की आवाज सुनी, जिससे उनके घर हिल गए। इसके बाद इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। यह रिफाइनरी रोजाना करीब 4.35 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल बनाती है। अधिकारियों के अनुसार, यह विस्फोट एक हीटर में खराबी के कारण हुआ। घटना के बाद शहर के पश्चिमी हिस्से में ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ आदेश जारी किया गया है। लोगों को घरों के अंदर रहने, दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। हालांकि, अब तक किसी के घायल होने की खबर नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:12:15 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प ने रक्षामंत्री के कहने पर ईरान पर हमला किया:उपराष्ट्रपति वेंस इससे खुश नहीं थे; ईरान को एटमी हथियार बनाने से रोकना था</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 25वां दिन हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कहने पर ईरान पर हमला का आदेश दिया था।  अल जजीरा के मुताबिक ट्रम्प ने कहा कि हेगसेथ सबसे पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थन में सबसे पहले आगे आए थे। हेगसेथ का मानना था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना जरूरी है, इसलिए कार्रवाई करनी चाहिए।  हालांकि ट्रम्प सरकार के अंदर भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं है। ट्रम्प ने माना कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं थे, लेकिन उन्होंने खुलकर विरोध भी नहीं किया।  वहीं पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना ताकत खत्म करना है। लेकिन यह युद्ध कब खत्म होगा, इस बारे में उन्होंने कुछ साफ नहीं कहा। ट्रम्प ने ईरान पर हमला 15 दिन के लिए टाला ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया बातचीत के बाद 15 मुद्दों पर सहमति बनी है। इन मुद्दों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट पर हमले 5 दिन के लिए टाल दिए, जबकि इससे पहले होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे की चेतावनी दी थी। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। वहीं, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के साथ मिलकर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत की। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:12:15 +0530</pubDate>
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<title>न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विमान और फायर ट्रक की टक्कर:एयर ट्रैफिक कंट्रोलर चिल्लाता रहा&#45; स्टॉप, स्टॉप; प्लेन का आगे का हिस्सा तबाह, 4 घायल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के न्यूयॉर्क में ला गार्डिया एयरपोर्ट पर रविवार रात (स्थानीय समयानुसार) एयर कनाडा एक्सप्रेस का एक विमान लैंडिंग के समय रनवे पर एक फायर ट्रक से टकरा गया। इससे विमान का आगे का हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। यह फ्लाइट मॉन्ट्रियल से आ रही थी। टक्कर के तुरंत बाद रनवे 4 को बंद कर दिया गया। एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लागू करते हुए सभी फ्लाइट ऑपरेशन रोक दिए गए और आने वाली उड़ानों को डायवर्ट किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ फायरफाइटर्स और विमान में 4 सवार यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। हालांकि अभी पूरी जानकारी साफ नहीं है। हादसे से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान और ग्राउंड वाहन दोनों को रुकने के लिए कहा था, लेकिन फिर भी टक्कर हो गई। इस घटना के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट्स रोक दीं और जांच शुरू कर दी गई है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने विमान को रोकने की कोशिश की थी लैंडिंग से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान को रोकने की कोशिश की थी। वायरल ऑडियो में कंट्रोलर लगातार “स्टॉप, स्टॉप, ट्रक 1” चिल्लाता रहा, लेकिन कुछ ही सेकंड में टक्कर हो गई। फ्लाइट लैंडिंग के बाद रनवे पर करीब 30 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में विमान के आगे के हिस्से में नुकसान और कॉकपिट उठा हुआ दिखाई दे रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रनवे पर फायर ट्रक कैसे पहुंचा। एयरपोर्ट पर आने वाले विमानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया था या उन्हें वापस भेज दिया गया। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें… महिला की लाश के साथ 13 घंटे उड़ता रहा विमान: हॉन्गकॉन्ग से लंदन उड़ान में टेकऑफ के बाद मौत हुई; रास्ते भर बदबू से परेशान रहे पैसेंजर ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में रविवार को एक महिला यात्री की टेकऑफ के करीब 1 घंटे बाद मौत हो गई। इसके बाद उनका शव पूरे 13 घंटे तक विमान में ही रखा रहा। शव को विमान के पीछे वाले हिस्से में रखा गया था, जहां फर्श गर्म था। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 12:21:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>न्यूयॉर्क, एयरपोर्ट, पर, विमान, और, फायर, ट्रक, की, टक्कर:एयर, ट्रैफिक, कंट्रोलर, चिल्लाता, रहा-, स्टॉप, स्टॉप, प्लेन, का, आगे, का, हिस्सा, तबाह, घायल</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:न्यूयॉर्क के एयरपोर्ट पर विमान और ट्रक की टक्कर, कई लोग घायल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के न्यूयॉर्क में ला गार्डिया एयरपोर्ट पर एक बड़ा हादसा हो गया, जिसके बाद एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एयर कनाडा एक्सप्रेस का एक विमान लैंडिंग के समय रनवे पर एक फायर ट्रक से टकरा गया। यह फ्लाइट मॉन्ट्रियल से आ रही थी। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कुछ फायरफाइटर्स और विमान में सवार यात्री घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। हालांकि अभी पूरी जानकारी साफ नहीं है। हादसे से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने विमान और ग्राउंड वाहन दोनों को रुकने के लिए कहा था, लेकिन फिर भी टक्कर हो गई। इस घटना के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट्स रोक दीं और जांच शुरू कर दी गई है। हादसे से जुड़ा वीडियो देखें… अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… युद्ध के बीच तेल-गैस से ईरान की रिकॉर्ड कमाई, खार्ग टर्मिनल से सप्लाई जारी अमेरिका-इजराइल के साथ जंग को ईरान ने एक मौके में बदल दिया है। अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन ग्लोबल ऑयल संकट के डर से तेल टर्मिनल को सीधे निशाना नहीं बनाया। इसी का फायदा उठाते हुए ईरान ने खार्ग टर्मिनल चालू रखा और ‘घोस्ट फ्लीट’ के जरिए चीन को सप्लाई जारी रखी है। इंटरनेशनलएनर्जी एजेंसी और SP ग्लोबल के मुताबिक, ईरान रोजाना 1.7 से 2 मिलियन (17 से 20 लाख) बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। देश के करीब 90% तेल का एक्सपोर्ट अभी भी खार्ग टर्मिनल से हो रहा है। साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई। रिपोर्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ईरान करीब 16.5 करोड़ रुपए प्रति जहाज ‘वॉर टैक्स’ भी वसूल रहा है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 12:21:11 +0530</pubDate>
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<title>दावा&#45; सीजफायर के लिए ईरान की 3 और शर्तें:कहा&#45; ईरान विरोधी पत्रकारों पर कार्रवाई हो, पहले मुआवजा और हमला न करने की गारंटी मांगी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का आज 24वां दिन हैं। ईरान ने सीजफायर के लिए 3 नई शर्तें रखीं हैं। ईरान के एक बड़े अधिकारी ने लेबनानी मीडिया अल मयादीन से रविवार को कहा कि उनका देश पहले से तय योजना के हिसाब से काम कर रहा है। ईरान की तीन नई शर्त-  जबकि इससे पहले ईरान कहा था कि सीजफायर के लिए भविष्य में दोबारा युद्ध न होने की गारंटी दी जाए, नुकसान का मुआवजा दिया जाए और पूरे क्षेत्र में चल रहे युद्ध खत्म किए जाएं। ईरानी अधिकारी का कहना है कि उनका देश तब तक कार्रवाई जारी रखेगा, जब तक दुश्मनों को सबक नहीं सिखा देता। ईरान जंग ग्लोबल से अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने ईरान जंग को दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कैनबरा में कहा कि अभी का हाल बहुत खराब है। यह ऐसा है जैसे एक साथ कई तेल और गैस का संकट एक साथ चल रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो दुनिया का कोई भी देश इससे बच नहीं पाएगा। इस लड़ाई में कई तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे सप्लाई पर असर पड़ा है। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<title>कुरुक्षेत्र के तीन युवक उज्बेकिस्तान में किडनैप:बंधक बनाकर रखा, टॉर्चर किया; 45 लाख की फिरौती लेकर छोड़े, एजेंट ने भेजना था स्पेन</title>
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<description><![CDATA[ कुरुक्षेत्र जिले में तीन युवक को स्पेन भेजने का झांसा देकर एजेंट ने उज्बेकिस्तान में किडनैप करवा दिया। यहां किडनैपर्स ने 3 दिन तक उनको हाथ-पांव बांधकर रखा और टॉर्चर किया। उन्होंने टॉर्चर की वीडियो दिखाकर परिवार से 45 लाख रुपए की फिरौती मांगी। किडनैपर्स ने परिवार को वीडियो कॉल पर धमकाया कि उन्होंने एजेंट से इन तीनों को खरीदा है। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उनके बच्चों को मार देंगे। परिवार से 45 लाख रुपए की फिरौती वसूलने के बाद अगले दिन तीनों को छोड़ा गया। एजेंट ने उज्बेकिस्तान से स्पेन का वीजा लगवाने का भरोसा दिया था। 15 लाख रुपए में बात तय सुनील कुमार का बेटा मोहन लाल, कुलदीप सिंह का बेटा बहादुर सिंह ओर सोमप्रकाश का बेटा मनदीप है। तीनों कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं। सुनील कुमार, कुलदीप सिंह और सोम प्रकाश ने बताया कि, मोहन लाल, बहादुर सिंह और मनदीप को स्पेन भेजने की बात हुई थी। आरोपी एजेंट प्रेम सैनी, उसकी पत्नी अनीता रानी और उनके साथी अकरम खान व अली ने उन तीनों से 15-15 लाख रुपए मांगे थे। इसमें 2-2 लाख एडवांस, बाकी पेमेंट स्पेन पहुंचने पर देना तय हुआ था। स्पेन की जगह उज्बेकिस्तान भेजा आरोपी एजेंट ने जनवरी 2026 में पासपोर्ट के साथ तीनों परिवार से 2-2 लाख रुपए एडवांस लिए। पैसे लेकर आरोपी एजेंट ने बच्चों को जाने का रूट बदल दिया। आरोपी ने आश्वासन दिया कि सीधे स्पेन नहीं जा सकते। इसलिए पहले उज्बेकिस्तान, फिर अजरबैजान, उसके बाद उनको स्पेन भेजा जाएगा। 16 फरवरी को करवाई फ्लाइट आरोपी ने 9 फरवरी को उज्बेकिस्तान का वीजा दिया और 16 फरवरी को फ्लाइट करवा दी। 15 फरवरी की शाम को परिवार तीनों को लेकर दिल्ली के महिपालपुर होटल पहुंचे। यहां अकरम खान और अली ने युवकों के पासपोर्ट-टिकट देखे और फोटो लेकर उज्बेकिस्तान में उनके लोग होने का दावा किया। साथ ही आश्वासन दिया कि उनके लोग तीनों युवकों को रिसीव कर लेंगे। 16 फरवरी शाम 4 बजे तीनों युवक उज्बेकिस्तान पहुंच गए। एयरपोर्ट पर अकबर खान और दानिश खान नाम के दो लोग आए। उन्होंने एजेंट प्रेम सैनी, अकरम और अली का हवाला दिया और अपने साथ लेकर चले गए। दो दिन बाद 18 फरवरी को युवकों का फोन उनके पास आया। हाथ-पैर बांध किया टॉर्चर किडनैपर्स ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर दिखाया कि उनके बच्चों के हाथ-पैर बांध रखे हैं और उनके साथ मारपीट की जा रही है। उसी दिन बाबा खान नाम के शख्स का फोन आया, जिसने धमकाया कि उसने तुम्हारे बच्चों को प्रेम सैनी, अकरम और अली से खरीद लिया है। 45 लाख रुपए मांगे उसने धमकाते हुए 45 लाख रुपए की फिरौती मांगी और कहा कि पैसे नहीं तो जान खतरे में। वे घबरा गए और प्रेम सैनी से बातचीत की। आरोपी एजेंट ने कहा कि उनको पैसे दे दो, हम बच्चों को छुड़वा लेंगे। 20 फरवरी उन्होंने 45 लाख रुपए आरोपियों को दे दिए। अगले ही दिन आरोपियों ने बच्चों को छोड़ दिया और टिकट करवाने की बात कही। पुलिस ने किया मामला दर्ज परिवार ने उसी दिन उनकी टिकट करवाई और अगले ही दिन तीनों बच्चे सुरक्षित घर वापस आ गए। उन्होंने आरोपी एजेंट से अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। अब शिकायत पर पुलिस ने थाना कृष्णा गेट में आरोपी एजेंट पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 12:42:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प का ईरान को अल्टीमेटम&#45; 48 घंटे में होर्मुज खोलें:नहीं तो पावर प्लांट तबाह करेंगे; ईरान बोला&#45; अमेरिका&#45;इजराइल के वाटर प्लांट उड़ा देंगे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होनें कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रविवार को लिखा, ‘अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज को नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा और उन्हें तबाह कर देगा और शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी।&#039; वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट को निशाना बनाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा। ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फाघारी ने कहा कि ईरान अमेरिका और इजराइल से जुड़े समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट (डिसेलिनेशन प्लांट) और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला करेगा। ईरान का इजराइली शहर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला ईरान ने शनिवार रात इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया, जिससे 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। डिमोना वही शहर है जहां इजराइल का न्यूक्लियर प्रोग्राम सेंटर है। डिमोना पर मिसाइल हमले का वीडियो… ईरान बोला- BRICS देश हमला रोकने में रोल निभाएं ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने शनिवार को पीएम मोदी से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि BRICS को ईरान पर हो रहे हमले रोकने में भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि BRICS को बिना किसी दबाव के, अपने दम पर काम करना चाहिए और इस मामले में आगे आना चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि मिडिल ईस्ट के देशों को मिलकर एक नया सुरक्षा सिस्टम बनाना चाहिए। इससे इलाके में शांति और स्थिरता बनी रहेगी और बाहर के देशों का दखल कम होगा। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 12:42:10 +0530</pubDate>
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<title>दावा&#45;ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F&#45;35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। F-35 फाइटर जेट को करीब दो दशकों से अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यह सबसे प्रीमियम फाइटर जेट है, जिसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि वह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम में भी बिना पकड़े घुसकर हमला कर सके। ईरान का दावा है कि उसने इस ‘अदृश्य’ माने जाने वाले जेट की कमजोरी पकड़ ली है। मजीद डिफेंस सिस्टम ने F-35 से निकली इंफ्रारेड यानी गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि F-35 भले ही रडार से बचने में सक्षम हो, लेकिन उसके इंजन से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह छिपाया नहीं जा सकता। वहीं, अमेरिकी वेबसाइट CNN ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि ईरान के हमलों की वजह से F-35 को मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है। दावा- सिर्फ 1 मिसाइल से गिराया F-35 ईरानी मीडिया के मुताबिक पहले यह माना जा रहा था कि F-35 को गिराने में ‘तलाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि मजीद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही F35 को गिराया है। मजीद डिफेंस सिस्टम रडार की बजाय इंफ्रारेड तकनीक पर काम करता है। ऐसे में F-35 के अंदर जो सेंसर और चेतावनी सिस्टम लगे होते हैं, वे इस खतरे को आसानी से पहचान नहीं पाते। F-35 के पास जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, वे आम तौर पर दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम कर देते हैं। लेकिन यहां यह पूरी तरह बेकार साबित हुए। ईरान की ओर से जारी वीडियो के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक मिसाइल ही काफी रही। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिस्टम कितना सटीक है और F-35 की गर्मी वाली कमजोरी कितनी बड़ी है। मजीद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है मजीद एयर डिफेंस सिस्टम को ईरान ने 2021 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया था। इसे खास तौर पर नजदीकी दूरी की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से ऐसे विमान जो रडार से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे भी इसकी नजर से बच नहीं पाते। मजीद सिस्टम आम तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इसकी मार करने की दूरी करीब 700 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक मानी जाती है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। इसे ‘पॉइंट डिफेंस’ सिस्टम कहा जाता है, यानी यह एयरबेस, सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन या किसी महत्वपूर्ण इमारत जैसी जगहों की सीधी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। रडार सिस्टम बंद कर अमेरिका को धोखे में रखा ईरान के मुताबिक वे पहले से ही इस तरह की स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। मसलन कब क्या करना है, कौन सा सिस्टम इस्तेमाल करना है, दुश्मन को कैसे धोखा देना है। ये सब पहले से तय था। बताया गया है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहला हमला शुरू किया, तब ईरान ने जानबूझकर अपने असली रडार सिस्टम को बंद कर दिया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर छिपा दिया। उनकी जगह नकली रडार सिस्टम लगा दिए गए। ये साधारण नकली ढांचे नहीं थे, बल्कि ऐसे डिकॉय थे जो असली रडार जैसी ही सिग्नल भेजते थे। हर एक डिकॉय बनाने में करीब 10 हजार डॉलर तक खर्च आता है। अमेरिका और इजराइल के ड्रोन, जो कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर से नुकसान का आकलन करते हैं, उन्हें लगा कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है। इन नकली ठिकानों के नष्ट होने और असली रडार के बंद रहने से अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो गया कि ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसी आधार पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इजराइली वायुसेना ने यह मान लिया कि अब उन्हें बढ़त मिल गई है। यहां तक कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च की सुबह दावा भी किया कि ईरान की हवाई सुरक्षा को खत्म कर दिया गया है। लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इस भरोसे में आकर अमेरिका और इजराइल ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट, जैसे F-35 को ईरान के अंदर गहराई तक भेजना शुरू कर दिया। 10 दिन बाद असली रडार सिस्टम स्टार्ट किए दूसरी तरफ, ईरान ने चुपचाप अपने असली रडार सिस्टम फिर से चालू कर दिए और मजीद जैसे इंफ्रारेड सिस्टम को उन जगहों पर तैनात कर दिया, जहां से अमेरिका-इजराइल के फाइटर जेट्स आने की संभावना थी। जैसे ही F-35 उस इलाके में पहुंचा, उसे कोई कमजोर या बंद पड़ा डिफेंस सिस्टम नहीं मिला। बल्कि उसे पूरी तरह तैयार और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का सामना करना पड़ा, जो पहले से ही उसी मौके का इंतजार कर रहा था। नोट- यह पूरी जानकारी ईरान के दावों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दुनियाभर में F-35 की छवि पर सवाल ईरान के F-35 गिराने के दावे ने दुनियाभर की सेनाओं और रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। अब तक कई देशों की रणनीति इस सोच पर आधारित थी कि F-35 लगभग अजेय है, लेकिन इस दावे के बाद इस धारणा पर सवाल उठने लगे हैं। इसका असर अब कई देशों के फैसलों में दिखने लगा है। स्पेन ने F-35 खरीदने की योजना छोड़ दी है और यूरोप के फाइटर जेट्स पर निवेश करने का फैसला किया है। भारत ने भी साफ संकेत दिया है कि वह F-35 नहीं खरीदेगा और अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देगा, स्विट्जरलैंड में इस सौदे को रद्द करने की मांग उठ रही है और कनाडा भी अतिरिक्त विमानों की खरीद पर फिर से विचार कर रहा है। फिलहाल अमेरिका के पास लगभग 450 से 500 F-35 जेट मौजूद हैं। F-35 को दुनिया का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम माना जाता है, जिसकी कुल लागत करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर बताई जाती है। दावा- अमेरिकी हवाई क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा ईरान मीडिया की की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल को इस पूरे संघर्ष में लगातार नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका-इजराइल के 125 से ज्यादा एडवांस ड्रोन मार गिराए हैं। इनमें कम से कम 10 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं। 9 ड्रोन उड़ान के दौरान गिराए गए, जबकि एक ड्रोन जॉर्डन के एयरबेस पर खड़ा था, जिसे बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया। MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका की निगरानी और हमले की क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है। इसकी कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) होती है। ईरान का दावा है कि उसके इंफ्रारेड सिस्टम ऐसे ड्रोन के खिलाफ खास तौर पर असरदार साबित हुए हैं, जैसा कि पहले यमन में भी देखा गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इराक में सक्रिय इस्लामिक रेजिस्टेंस ग्रुप ने पश्चिमी इराक के ऊपर एक KC-135 टैंकर विमान को मार गिराया, जिसमें सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, सऊदी अरब के एक एयरबेस पर खड़े 5 KC-135 टैंकर विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया। इन घटनाओं को अमेरिका की सैन्य योजना में गड़बड़ी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते अमेरिकी और इजराइली बलों को बार-बार अपनी पोजीशन बदलनी पड़ रही है, जिससे गलती की संभावना बढ़ जाती है। अगर तुलना करें, तो 2011 में लीबिया में अमेरिका के अभियान के दौरान 4 महीनों में सिर्फ 3 लड़ाकू नुकसान दर्ज किए गए थे। जबकि यहां एक महीने से भी कम समय में इतने बड़े नुकसान की बात कही जा रही है। ---------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प का ईरान को अल्टीमेटम- 48 घंटे में होर्मुज खोलें:नहीं तो पावर प्लांट तबाह करेंगे; ईरान बोला- अमेरिका-इजराइल के वाटर प्लांट उड़ा देंगे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होनें कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रविवार को लिखा, ‘अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज को नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा और उन्हें तबाह कर देगा और शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी।&#039; पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 12:42:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका की ईरानी तेल खरीद पर 30 दिन की छूट:ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल तेल आएगा; भारत में पेट्रोल&#45;डीजल के दाम स्थिर रहेंगे</title>
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<description><![CDATA[ ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया के लिए इस मौजूदा सप्लाई को अस्थायी रूप से खोलकर ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा। इससे दुनियाभर में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर जो अस्थायी दबाव बना है, उसे कम करने में मदद मिलेगी। रूसी तेल की खरीद पर दूसरी बार प्रतिबंध हटाया ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को एक नया &#039;जनरल लाइसेंस&#039; जारी किया, जिसके तहत उन रूसी टैंकरों से तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। नया लाइसेंस 12 मार्च को जारी किए गए पिछले 30 दिनों के &#039;सेंक्शंस वेवर&#039; की जगह लेगा। पुराने लाइसेंस में कुछ तकनीकी स्पष्टता की कमी थी। नए लाइसेंस के जरिए उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को इस छूट से बाहर कर दिया है। युद्ध के कारण 120 डॉलर तक पहुंच गई थी तेल की कीमतें अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड आज 112 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते दिनों ये 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। तेल की कीमतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी ईरान पर तेल प्रतिबंध मुख्य रूप से उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से लगाए गए थे। ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी, जब तेहरान में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया था। अब नीचे सवाल-जवाब में इस फैसले की वजह और असर… सवाल 1: अमेरिका ने अचानक ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील क्यों दी? जवाब: ईरान के साथ युद्ध शुरू हुए तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान मिडिल-ईस्ट में तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस &#039;एनर्जी क्राइसिस&#039; से निपटने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने यह कदम उठाया है। सवाल 2: क्या यह अमेरिका का ईरान के प्रति नरम रुख है? जवाब: बिल्कुल नहीं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने X पर लिखा, &quot;हम तेहरान के खिलाफ ही ईरानी बैरल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कीमतें कम रखी जा सकें।&quot; अमेरिका का तर्क है कि यह तेल वैसे भी चोरी-छिपे चीन को बेचा जाता, इससे बेहतर है कि इसे वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगी देश खरीद लें। सवाल 3: इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का ईरान क्या करेगा? जवाब: अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के लिए इस कमाई को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा ताकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल न कर सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतें 33% तक बढ़ चुकी हैं, ऐसे में ईरान को कुछ न कुछ आर्थिक फायदा तो जरूर होगा। सवाल 4: क्या 14 करोड़ बैरल तेल दुनिया की जरूरत के लिए काफी है? जवाब: यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की सिर्फ डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यूरेशिया ग्रुप के एनालिस्ट ग्रेगरी ब्रू का कहना है कि यह स्टॉक बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। इसके बाद अमेरिका के पास या तो ईरान पर से पूरी तरह बैन हटाने का विकल्प बचेगा या फिर कोई और कड़ा रास्ता चुनना होगा। सवाल 5: &#039;ऑपरेशन एपिक फ्यूरी&#039; क्या है और इसमें तेल का क्या रोल है? जवाब: यह ट्रम्प प्रशासन का ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक अभियान है। एक तरफ अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह नहीं चाहता कि इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाए। तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अहम हिस्सा है ताकि अमेरिकी वोटर्स और सहयोगी देशों पर महंगाई का बोझ न पड़े। सवाल 6: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का क्या स्टैंड है? जवाब: दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। ट्रम्प ने इसे लेकर कहा कि एक समय के बाद यह अपने आप खुल जाएगा। वह फिलहाल सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और तेल की कमी को अस्थायी दर्द मान रहे हैं। सवाल 7: आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स की क्या राय है? जवाब: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। पूर्व अधिकारी लैंडन डेरेंट्ज़ के मुताबिक, स्थिति बहुत गंभीर है। अब या तो अमेरिका को किसी भी तरह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज खुलवाना होगा या फिर और भी गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। नॉलेज बॉक्स: &#039;सेंक्शंस वेवर&#039; क्या होता है? जब एक देश दूसरे पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है, तो कुछ खास स्थितियों में व्यापार जारी रखने के लिए जो कानूनी छूट दी जाती है, उसे &#039;वेवर&#039; कहते हैं। अमेरिका अक्सर अपनी जरूरत और ग्लोबल मार्केट के संतुलन के लिए ऐसे अस्थायी वेवर जारी करता रहता है। भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। अगर ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल एक्स्ट्रा तेल आता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत: अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी; ईरान ने क्रूड ऑयल 200 डॉलर पहुंचने की चेतावनी दी थी ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी। पूरी खबर पढ़ें…
----------------- रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत:ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:40:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>60 साल में पहली बार अल&#45;अक्सा मस्जिद ईद में बंद:ईरान में बाजार सूने; UAE, कतर और कुवैत में खुले मैदान में नमाज पर रोक</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में ईद का जश्न शुरू हो चुका है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 22 दिनों से जंग चल रही है। ऐसे में 60 साल में पहली बार इजराइल के यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद कर दिया गया है। 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार है, जब अल-अक्सा को पूरी तरह बंद किया गया है। यह मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल है। ईरान में शुक्रवार को ईद मनाया गया। इस मौके पर बाजार वीरान नजर आए। वहीं कतर, UAE और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में आज ईद मनाया जा रहा है। जंग की वजह से इन देशों में खुले मैदानों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है। इजराइल: अल-अक्सा मस्जिद के पास बैलिस्टिक मिसाइल अटैक यरुशलम में आम लोगों की एंट्री बंद 28 फरवरी से अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ शुरू हुए युद्ध के बाद, सुरक्षा कारणों से इजराइली अधिकारियों ने यरुशलम में आम लोगों की एंट्री बंद कर रखी है। सिर्फ वहां रहने वाले लोग या दुकानदार ही अंदर जा सकते हैं। 6 मार्च से वेस्टर्न वॉल, अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपल्कर जैसे सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। पूरे देश में भीड़ पर भी पाबंदी है। मस्जिद के अंदर 100 और बाहर 50 लोगों तक ही इकट्ठा होने की अनुमति है। यरुशलम के पुराने शहर के गेट पर शुक्रवार को ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान सैकड़ों मुस्लिम नमाजियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। नमाजी ‘अल्लाहु अकबर’ और कलमा पढ़ते हुए गेट के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने सैकड़ों लोगों को जबरदस्ती हटाया। गाजा: तबाही के बीच ईद ईरान: इजराइली हमले में मारी गई बच्चों को श्रद्धांजलि ईरान में इस बार ईद उल फितर का त्योहार जंग और तनाव के साये में मनाया गया। रमजान खत्म होने के बाद देशभर में लोगों ने मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर नमाज अदा की। युद्ध और हमलों के कारण कई जगहों पर जश्न सादगी से मनाया गया। बाजारों में भी रौनक कम रही और कई दुकानें बंद दिखीं। UAE: ईद के मौके पर चहल-पहल में कमी दिखी UAE में ईद-उल-फितर के मौके पर शुक्रवार से सोमवार तक 4 दिन की छुट्टी का ऐलान किया गया है। पूरे देश में बाजार, मॉल और सार्वजनिक जगहों पर लाइटिंग और सजावट की गई और लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा कड़ी कर दी गई है। ईराक: लोगों ने खामेनेई को याद किया ईराक में इस बार ईद उल फितर डर और तनाव के माहौल में मनाई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर यहां के लोगों की भी जिंदगी पर हुआ है। बाहर का माहौल पहले जैसा नहीं है। बड़े आयोजन और भीड़-भाड़ वाले जश्न अब कम हो गए हैं। लोग भीड़ से बच रहे हैं और बाहर निकलने में सावधानी बरत रहे हैं। पहले जहां बच्चे मोहल्लों में घूमकर ईदी इकट्ठा करते थे, अब ऐसे नजारे कम दिखाई दे रहे हैं क्योंकि सुरक्षा चिंता ज्यादा है। लेबनान: शेल्टर के पास घूमते दिखे लोग लेबनान में ईद के मौके पर अलग-अलग माहौल है। उत्तरी लेबनान में जहां एक तरफ लोग ईद-उल-फितर की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दक्षिण लेबनान में हजारों शरणार्थी अपने घरों से दूर रहकर ईद मना रहे हैं। इजराइल ने ईरान पर हमला करने के बाद लेबनान के दक्षिणी शहरों में भी हमले तेज कर दिए हैं। अब तक यहां पर 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। तुर्किये: ईद की नमाज अदा करते लोग ब्रिटेन: बड़ी संख्या में नमाज अदा करते लोग ईद पर पाक-अफगान युद्ध 4 दिन के लिए रुका पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के अवसर पर जंग में अस्थायी विराम की घोषणा की। जंग को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है। यह कदम सऊदी अरब, तुर्किए और कतर की अपीलों के बाद उठाया गया है। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार नेप कहा कि यह सीजफायर 18/19 मार्च की रात से 23/24 मार्च की रात तक लागू रहेगा। हालांकि, किसी भी सीमा पार हमले, ड्रोन हमले या पाकिस्तान में आतंकवादी घटना होने पर ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा। ईद पर विशेष उड़ानें जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान के लिए नियमित और विशेष उड़ानें संचालित करेंगी। एयरलाइनों के मुताबिक, कुछ उड़ानें फिलहाल अस्थायी रूप से बंद हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। दोनों एयरलाइनों ने यह भी बताया कि जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए नियमित उड़ानें जारी रहेंगी। इसमें भारत और जेद्दा के बीच करीब 16 उड़ानें शामिल हैं। एयरलाइनों का कहना है कि हालात को देखते हुए आगे की योजना में जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा सकता है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 
ट्रम्प बोले- ईरान को तबाह कर रहे, सीजफायर नहीं करेंगे: मुझे लगता है हम जीत चुके, उनकी नेवी, एयरफोर्स, एयर डिफेंस सब खत्म अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सीजफायर नहीं करेगा। उन्होने कहा, ‘बातचीत हो सकती है, लेकिन लड़ाई रोकने का इरादा नहीं है।’ पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:40:44 +0530</pubDate>
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<title>ईरान और अमेरिका दोनों का दावा&#45; जंग हम जीते:ट्रम्प बोले&#45; दुश्मन की नेवी, एयरफोर्स, एयर डिफेंस खत्म; ईरान बोला&#45; दुश्मनों में फूट पड़ी</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग को 22 दिन हो गए हैं। इस बीच ईरान और अमेरिका दोनों जीत का दावा कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा, ‘मुझे लगता है हम जीत चुके हैं। हमने उनकी नेवी, एयरफोर्स, एयर डिफेंस सब खत्म कर दिए हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सीजफायर नहीं करेगा। उन्होने कहा, ‘बातचीत हो सकती है, लेकिन लड़ाई रोकने का इरादा नहीं है।’ ट्रम्प ने कहा, ‘जब आप दूसरे पक्ष को पूरी तरह तबाह कर रहे होते हैं, तब सीजफायर नहीं किया जाता।’ ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक खत्म कर दिया है। दूसरी ओर ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग में दुश्मन की हार हुई है। लिखित संदेश में खामेनेई ने कहा, ‘ईरानी जनता की एकता की वजह से दुश्मन अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया और उसके खेमे में ही दरार पड़ गई है।’ ट्रम्प ने NATO देशों को कायर बताया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान युद्ध में साथ न देने पर NATO सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई है। ट्रम्प ने कहा है कि NATO देश कायर हैं और अमेरिका के बिना यह गठबंधन सिर्फ कागजी शेर है। ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट का जिक्र करते हुए कहा कि इसे खुला रखने के लिए सैन्य मदद देना आसान है, लेकिन सहयोगी देश इसमें भी पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह बहुत आसान सैन्य कदम है, जिसमें बहुत कम जोखिम है, लेकिन वे मदद नहीं करना चाहते। कायर हैं, और हम इसे याद रखेंगे।” ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:40:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:लंदन में 2 भारतीयों ने सड़क पर पान थूका, डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना लगा</title>
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<description><![CDATA[ लंदन के ब्रेंट इलाके में सार्वजनिक जगह पर पान थूकने के मामले में भारतीय मूल के दो लोगों पर 1,391 पाउंड (करीब 1.45 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों लोगों को पहले मौके पर ही 100 पाउंड का जुर्माना भरने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे नहीं भरा। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया और जुर्माना कई गुना बढ़ गया। ब्रेंट सिटी काउंसिल ने पान थूकने के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सार्वजनिक जगहें गंदी होती हैं और सफाई पर काफी खर्च बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल को हर साल करीब 30,000 पाउंड (लगभग 30 लाख रुपये) सिर्फ पान के दाग साफ करने में खर्च करने पड़ते हैं। पहला मामला एडगवेयर इलाके के रहने वाले अक्षीतकुमार भद्रे पटेल का है। उन्होंने जून 2025 में किंग्सबरी रोड पर एक मेट्रो स्टेशन के पास पान थूका था। वे कोर्ट में पेश नहीं हुए, इसलिए उनके खिलाफ फैसला उनकी गैरमौजूदगी में ही सुनाया गया। समय पर जुर्माना न भरने के कारण उनकी रकम 10 गुना से ज्यादा बढ़ गई। दूसरा मामला रुइसलिप इलाके के रहने वाले हितेश पटेल का है। उन्होंने वेम्बली हिल रोड पर पान थूका था। वे भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और उनके खिलाफ भी गैरहाजिरी में ही फैसला हुआ, जिससे उन पर भी भारी जुर्माना लगा। उत्तर-पश्चिम लंदन के ब्रेंट और आसपास के इलाकों में पान थूकने की समस्या बढ़ रही है, जिस पर स्थानीय प्रशासन सख्त हो गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पान के दाग हटाना मुश्किल और महंगा होता है, इसके लिए खास तरीके से सफाई करनी पड़ती है। काउंसिल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत जगह-जगह चेतावनी वाले बैनर लगाए जा रहे हैं, अधिकारी गश्त कर रहे हैं और मौके पर ही 100 पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा पुलिस बोली- भारत से जुड़े अपराध का कोई सबूत नहीं, ट्रूडो सरकार के दावे से पलटे कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा है कि भारत सरकार से जुड़े किसी एजेंट से कनाडा के लोगों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। RCMP के कमिश्नर माइक डुहेम ने गुरुवार को CTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा जांच में किसी विदेशी सरकार से सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “2024 में मैंने जो कहा था, वह उस समय की जांच पर आधारित था। लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, उसमें हर मामले को किसी विदेशी संस्था से जोड़ना संभव नहीं है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा है।  इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एनआईए द्वारा घोषित आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़कर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। साल 2023 में पैदा हुए तनाव के बाद भारत और कनाडा अपने रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और हालिया कूटनीतिक प्रयासों से इसमें सुधार भी दिख रहा है। ट्रम्प ने जापानी पीएम की मौजूदगी में कहा- हमें भी पर्ल हार्बर हमले की जानकारी नहीं थी, वैसा ही हमने ईरान में किया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री को उस समय चौंका दिया, जब उन्होंने 1941 में हुए पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया। ट्रम्प ने यह बात हल्के अंदाज में कही, लेकिन यह टिप्पणी जापान के लिए असहज करने वाली मानी जा रही है। ट्रम्प ने PM साने ताकाइची के साथ एक बैठक के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। तब उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा- अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया। इस पर ट्रम्प ने कहा, “हमने किसी को नहीं बताया क्योंकि हम सरप्राइज देना चाहते थे। सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है?” उन्होंने एक जापानी पत्रकार से मजाकिया लहजे में कहा, “तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ताकाइची, जो ट्रांसलेटर के जरिए बात समझ रही थीं, उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन ऐसा लगा कि वह यह सुनकर असहज हो गई थीं। दरअसल, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के हवाई स्थित पर्ल हार्बर सैन्य अड्डे पर अचानक हमला किया था। इस हमले में 2400 से ज्यादा अमेरिकी मारे गए थे। इसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। नेपाल में बालेन शाह 27 मार्च को PM पद की शपथ ले सकते हैं, एक दिन पहले सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की बंपर जीत के बाद अब बालेंद्र (बालेन) शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। RSP ने 23 फरवरी को हुए चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इससे साफ हो गया है कि बालेन शाह के नेतृत्व में एक ही पार्टी की सरकार बनेगी। चुनाव से पहले ही पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और अब सरकार बनाने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। सांसदों का शपथ ग्रहण 26 मार्च को दोपहर 2 बजे होगा। इससे पहले उसी दिन सुबह 11:30 बजे सबसे वरिष्ठ सांसद को शपथ दिलाई जाएगी। 78 साल के अर्जुन नरसिंह केसी सबसे उम्रदराज चुने गए सांसद हैं, जो पहले खुद राष्ट्रपति से शपथ लेंगे और फिर बाकी सांसदों को शपथ दिलाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 13:08:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>रिपोर्ट&#45;ईरान ने होर्मुज से गुजरने के लिए 17 करोड़ वसूले:तेल टैंकर को समुद्र में दिया सुरक्षित रास्ता; भारत के 22 जहाज अभी भी फंसे</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति देने के बदले एक निजी तेल टैंकर कंपनी से 20 लाख डॉलर (17 करोड़ रुपए) लिए। हालांकि, ये जहाज किस देश का है इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। लॉयड्स लिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने समुद्री क्षेत्र में एक ‘सुरक्षित रास्ता’ बनाया है, जहां से केवल मंजूरी मिलने वाले जहाज ही गुजर सकते हैं। इसके बदले उनसे टैक्स लिया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, पाकिस्तान, इराक, मलेशिया और चीन जैसे कई देश अपने जहाजों के सुरक्षित गुजरने को लेकर सीधे ईरान से बात कर रहे हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐसे जहाजों के लिए एक खास रजिस्ट्रेशन सिस्टम भी शुरू किया है, जिन्हें ‘सुरक्षित मार्ग’ दिया जाएगा। भारत भी अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है। भारत के 22 जहाज होर्मुज और उसके आसपास के समुद्री इलाके में फंसे हैं। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के मुताबिक, भारत का एक गैस टैंकर ईरान के लारक द्वीप के आसपास से होते हुए ईरानी जलक्षेत्र के जरिए गुजरा, ताकि उसकी पहचान की जांच की जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक सभी देशों के मिलाकर 9 जहाज इस कॉरिडोर से गुजर चुके हैं। ईरान बोला- अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को नुकसान पहुंचाया जंग के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने अमेरिकी F-35 फाइटर जेट पर हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया। IRGC ने इस हमले का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें जेट को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। हालांकि इस वीडियो की पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया कि एक F-35 जेट को ईरान के ऊपर मिशन के दौरान इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। विमान को मिडिल-ईस्ट के किसी देश में उतारा गया है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 13:08:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कनाडा में फर्जी पंजाबी युवक अरेस्ट:झूठी बीमारी बता लेडी डॉक्टरों को प्राइवेट पार्ट दिखाता, टच करवा भाग जाता; ट्रोलिंग से सुर्खियों में आया</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में एक युवक के फर्जी पंजाबी नाम से लेडी डॉक्टरों के साथ अश्लील हरकतें करने के मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इस युवक को दिसंबर महीने में अरेस्ट किया था। मगर, वह सुर्खियों में तब आया, जब उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रोल किया जाने लगा। कनाडा की पील रीजनल पुलिस के मुताबिक आरोपी प्राइवेट पार्ट में बीमारी के बहाने अस्पताल में जाता। वहां लेडी डॉक्टर से मिलता और क्लिनिक जाकर सारे कपड़े उतार देता। फिर लेडी डॉक्टर को प्राइवेट पार्ट छूने को कहता। जिससे पता चलता कि उसे कोई बीमारी नहीं है। पोल खुलते ही वह वहां से भाग जाता। ऐसा एक-दो नहीं लेकिन उसने कई लेडी डॉक्टरों के साथ किया। तब किसी लेडी डॉक्टर ने उसकी शिकायत कर दी तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। अब वैभव से आकाशदीप सिंह बने आरोपी युवक को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस लेडी डॉक्टरों से सामने आने की अपील कर रही है। कनाडा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रूबी भसीन ने भी 15 मार्च को वीडियो पोस्ट कर डॉक्टरों से सामने आने की अपील की है। 5 पाइंट में जानें युवक के क्राइम की पूरी कहानी… गिरफ्तारी के बाद युवक पर क्या कार्रवाई हुई
पील रीजनल पुलिस के मुताबिक युवक वैभव 36 साल का है। वह मूल रूप से इंडिया का रहने वाला है। मगर, उसे कनाडा की नागरिकता मिली हुई है। वह अभी ब्रैम्पटन का स्थायी नागरिक (PR) है। पुलिस जांच में पता चला कि उसने मिसिसॉगा की कई लेडी डॉक्टर्स के साथ अश्लील हरकतें की है। पुलिस का कहना है कि एक डॉक्टर ने उसकी हरकत पर शक होने के चलते पुलिस को शिकायत कर दी। युवक के खिलाफ 3 महीने से स्थानीय कोर्ट में ट्रायल भी चला। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में कनाडा पुलिस ने क्या कहा
कनाडा की पील रीजनल पुलिस के पब्लिक रिलेशन अफसर (PRO) ने मीडिया रिलीज जारी कर कहा कि वैभव के खिलाफ जानबूझकर लेडी डॉक्टरों के साथ अश्लील हरकतें करने की शिकायतें आईं। जांच में पता चला कि वैभव ने पंजाबी ओरिजन के युवक का फेक नाम लेकर मिलने का चार्ज लगाया है। युवक ने कई महीनों तक मिसिसॉगा के विभिन्न मेडिकल क्लिनिक्स में फर्जी बीमारियां बताकर महिला डॉक्टरों के साथ अश्लील हरकतें कीं। पुलिस ने उस पर 4 गंभीर आरोप लगाए हैं। केस अभी ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस (OCJ) में चल रहा है। पुलिस ने कहा कि कोर्ट में केस होने के चलते आरोपी का इंडियन एड्रेस, डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। पुलिस ने कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल की प्रक्रिया लंबी चलती है। डॉक्टरों के कोर्ट में बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस की तरफ से युवक को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। चूकी वह कनाडाई नागरिक बन चुका है, इसलिए प्रक्रिया में वक्त लग सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 13:08:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कमजोर हो चुका ईरान जंग लंबी क्यों खींच रहा:सरेंडर से इनकार, युद्ध को महंगा बनाकर दुश्मन को झुकाने की कोशिश में जुटा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान इस समय अब तक के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इसके बावजूद वह अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष को लंबा खींचने में लगा हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान को भारी नुकसान हुआ है। उसके कई बड़े नेता और सैन्य कमांड ढांचे के अहम लोग मारे गए हैं। इससे उसकी नेतृत्व व्यवस्था को गंभीर झटका लगा है। ईरान के अंदर भी हालात अच्छे नहीं हैं। लोगों को जरूरी सामान की कमी, बुनियादी ढांचे के नुकसान और सख्त सुरक्षा माहौल झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद ईरान की बची हुई लीडरशिप लगातार आक्रामक बयान दे रही है। वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान लंबे समय तक संघर्ष झेल सकता है। उन्हें और नेताओं के मारे जाने की परवाह नहीं है और वे इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार हैं, चाहे इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया पर क्यों न पड़े। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान का मकसद इस युद्ध में जीत हासिल करना नहीं है। उसका असली मकसद है अपने अस्तित्व को बचाना, दुश्मनों को डराना और ऐसी स्थिति बनाना जिसमें वह युद्ध के बाद की शर्तें तय कर सके। वह संघर्ष बढ़ा रहा है ताकि बाकी देशों के लिए इसे जारी रखना बहुत महंगा हो जाए और वे समझौता करने पर मजबूर हो जाएं। जंग खत्म करने के लिए हर्जाना चाहता है ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान से सरेंडर करने को कहा है। लेकिन ईरान इसके उलट खुद को मजबूत स्थिति में दिखा रहा है। वह कह रहा है कि वह इस संघर्ष में टिके रहने में सफल रहा है और अब शांति के लिए अपनी शर्तें रख रहा है। ईरान चाहता है कि युद्ध खत्म होने के बाद क्षेत्र में नई व्यवस्था बनाई जाए। वह युद्ध के नुकसान की भरपाई (मुआवजा) भी मांग रहा है और खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों में बदलाव चाहता है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि युद्धविराम तभी संभव है जब यह सुनिश्चित हो जाए कि दुश्मन दोबारा हमला नहीं करेगा। उनका कहना है कि अगर युद्धविराम से दुश्मन को अपनी ताकत फिर से तैयार करने का मौका मिलता है, जैसे रडार ठीक करना या मिसाइल सिस्टम मजबूत करना, तो ऐसा युद्धविराम बेकार है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक दुश्मन अपने हमले पर पछतावा न करे और दुनिया और क्षेत्र में सही राजनीतिक और सुरक्षा हालात न बन जाएं। ईरानी विदेश मंत्री बोले- होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया नियम बनाया जाना चाहिए, जिसमें ईरान के हितों को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही कुछ खास शर्तों के तहत ही होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान आगे चलकर अपने विदेशों में फंसे पैसे को छुड़ाने की मांग कर सकता है या इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने वाले देशों से टैक्स भी ले सकता है। गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रहेगी। अब ‘युद्ध के बाद क्या होगा’ इस सवाल पर भी दबाव बढ़ रहा है। दो दशकों तक पश्चिमी देशों और ईरान के बीच बातचीत चलती रही, लेकिन पिछले महीने अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। इस हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई और देश की सैन्य व प्रशासनिक व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में ईरान ने तेज और लगातार हमले किए। उसने पूरे क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगियों पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे। इससे खाड़ी देशों के साथ उसके रिश्ते और खराब हो गए और ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर पड़ा। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण। दबाव को अपने फायदे में बदलना चाहता है ईरान मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों की एक्सपर्ट सिना तूस्सी ने CNN से कहा कि ईरान चाहता है कि अभी जो दबाव है, उसे बाद में अपने फायदे में बदल सके। वह ऐसी स्थिति चाहता है जहां उसे अलग-थलग या खत्म करने की कोशिश न हो, बल्कि उसे क्षेत्र की स्थिरता का जरूरी हिस्सा माना जाए। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा कि ईरान युद्ध हार रहा है। ट्रम्प ने भी कहा कि ईरान की सेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके नेता लगभग हर स्तर पर खत्म कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान फिर कभी अमेरिका, उसके सहयोगियों या दुनिया को धमकी न दे सके। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने 61वीं बार हमला किया, जिसमें इजराइल में एक दंपति की मौत हो गई। एक्सपर्ट बोले- ईरान जीत नहीं रहा, उसे जीतने की जरूरत भी नहीं जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नारगिस बाजोगली का कहना है कि पारंपरिक युद्ध के हिसाब से ईरान जीत नहीं रहा है, लेकिन उसे उसी तरह जीतने की जरूरत भी नहीं है। उसकी रणनीति अलग है। ईरान एक अलग रणनीति अपना रहा है, जिसमें वह युद्ध को इतना महंगा बना देना चाहता है कि सामने वाला देश उसे जारी न रख सके। उनका कहना है कि अमेरिका और खाड़ी देश लंबे समय तक तेल व्यापार में रुकावट और बढ़ती कीमतों को सहन नहीं कर सकते। किसी समय वे कहेंगे कि अब बहुत हो गया और यही दबाव ईरान बनाना चाहता है। ईरान ने पहले से ही ऐसी स्थिति के लिए तैयारी कर रखी थी। रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने ऐसे प्लान बनाए थे कि बड़े हमले होने पर छोटे-छोटे यूनिट्स अलग-अलग जगहों से काम कर सकें। पुराने अफसरों की मौत, नए अफसर फैसले ले रहे ईरान कहता है कि वह सिर्फ अमेरिकी हितों को निशाना बना रहा है, लेकिन उसके हमलों में ओमान, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, इराक और सऊदी अरब में होटल, एयरपोर्ट, ऊंची इमारतें और ऊर्जा फैसिलिटीज भी प्रभावित हुई हैं। इससे साफ है कि ईरान क्षेत्र में नई ताकत का संतुलन बनाना चाहता है और भविष्य में अपने खिलाफ हमलों को रोकने के लिए डर पैदा करना चाहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब IRGC में एक नई पीढ़ी के कमांडर सामने आए हैं, जो पहले के नेताओं के मारे जाने के बाद उभरे हैं। इन नए नेताओं ने इराक और सीरिया में ईरान की ताकत का इस्तेमाल होते देखा है और उसी आधार पर वे फैसले ले रहे हैं। ईरान की रणनीति अब यह है कि वह अपनी स्थिरता को पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जोड़ दे। मतलब अगर ईरान अस्थिर होगा, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र भी अस्थिर हो सकता है। हाल के दिनों में जहाजों पर हमले और तेल बाजार में उतार-चढ़ाव ने दिखाया है कि ईरान के पास दबाव बनाने के मजबूत साधन हैं। ईरान की सेना के प्रवक्ता ने दावा किया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी लीडरशिप वाली व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। ‘इजराइल के और करीब आ सकते हैं खाड़ी देश’ हालांकि यह साफ नहीं है कि ईरान की यह रणनीति सफल होगी या नहीं। अब तक ज्यादातर खाड़ी देश इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि उन पर हमले हुए हैं। ऐसे में कई देशों ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका और इजराइल के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करेंगे। UAE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CNN से कहा कि खाड़ी देशों में ईरान को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है और यह सोच आने वाले कई दशकों तक नहीं बदलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि UAE होर्मुज को खोलने के लिए किसी गठबंधन में शामिल हो सकता है। उनका मानना है कि ईरान की रणनीति गलतफहमी पर आधारित है और युद्ध के बाद खाड़ी देश इजराइल के और करीब आ सकते हैं। UAE की एक मंत्री ने कहा कि उनके देश पर हमला होने के बावजूद अमेरिका और इजराइल के साथ उनके रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ उनका रिश्ता लंबे समय से बना हुआ है और यह भरोसे पर टिका है, जो संकट के समय भी नहीं टूटेगा। ------------------------------------- ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरान के साथ जंग में अकेले पड़े ट्रम्प:NATO देश बोले- ये हमारी लड़ाई नहीं, होर्मुज का रास्ता खुलवाने से इनकार 
ईरान में खामेनेई समेत 40 से भी ज्यादा अधिकारियों के मारे जाने के बाद अमेरिका को यह जंग बड़ी कामयाबी नजर आ रही थी। लेकिन 17 दिन बाद हालात बदल चुके हैं। युद्ध का कोई साफ अंत नजर नहीं आ रहा है। ईरान ने जवाब में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति रोक दी, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। ट्रम्प अब अपने सहयोगी नाटो देशों से होर्मुज में रास्ता खुलवाने की अपील कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Mar 2026 15:31:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी विदेश&#45;रक्षा मंत्री के घर के ऊपर संदिग्ध ड्रोन दिखे:सिक्योरिटी को लेकर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई; दोनों लीडर्स को शिफ्ट करने पर विचार</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन में अमेरिकी सेना के एक अहम बेस के ऊपर संदिग्ध ड्रोन देखे गए हैं। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सैन्य बेस फोर्ट लेसली मैकनेयर के अंदर रह रहे हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने बताया कि इन ड्रोन की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और यह भी साफ नहीं है कि वे कहां से आए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के कारण सुरक्षा अलर्ट पहले से बढ़ा हुआ है। इसी वजह से सेना संभावित खतरों पर कड़ी नजर रख रही है। पिछले 10 दिनों में एक रात के दौरान फोर्ट लेसली मैकनेयर के ऊपर कई ड्रोन देखे गए, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई और व्हाइट हाउस में इस मुद्दे पर इमरजेंसी बैठक भी हुई। 
दुनियाभर में अमेरिकी दूतावासों के लिए चेतावनी जारी इसी बीच अमेरिका ने दुनियाभर में अपने दूतावासों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है और देश के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। न्यू जर्सी के जॉइंट बेस मैकग्वायर-डिक्स-लेकहर्स्ट और फ्लोरिडा के मैकडिल एयर फोर्स बेस पर सुरक्षा स्तर बढ़ाकर ‘चार्ली’ कर दिया गया है। इसका मतलब होता है कि किसी हमले या खतरे की आशंका है। इससे ऊपर केवल ‘डेल्टा’ स्तर होता है, जो तब लागू होता है जब हमला हो चुका हो या होने वाला हो। फोर्ट मैकनेयर के ऊपर ड्रोन दिखने के बाद अधिकारियों ने यह भी विचार किया कि क्या रुबियो और हेगसेथ को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। हालांकि, अभी तक उन्हें वहां से नहीं हटाया गया है। 6 महीने पहले लोकेशन का खुलासा हुआ अक्टूबर में कई मीडिया रिपोर्ट्स में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के वहां रहने की जानकारी सार्वजनिक हो चुकी थी। आमतौर पर इतने बड़े पदों पर बैठे लोग कहां रहते हैं, यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, क्योंकि इससे उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। डिटेल में और क्या सामने आया था यह खबर इसलिए अहम थी क्योंकि जब किसी बड़े अधिकारी का रहने का स्थान सार्वजनिक हो जाता है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। ड्रोन जैसे नए खतरे (जिनका पता लगाना मुश्किल होता है) इस जोखिम को और बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि अब जब उसी बेस के ऊपर अज्ञात ड्रोन दिखे, तो अधिकारियों ने उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट करने तक पर विचार किया। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इस मामले पर ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया और कहा कि सुरक्षा कारणों से मंत्रियों की गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। सुरक्षा वजहों से एयरबेस पर 2 बार लॉकडाउन लगा मैकडिल एयर फोर्स बेस, जहां से अमेरिका की सेंट्रल कमांड (जो ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन संभालती है) काम करती है, वहां भी इस हफ्ते दो बार सुरक्षा लॉकडाउन किया गया। सोमवार को एक संदिग्ध पैकेज मिलने के बाद विजिटर सेंटर कई घंटों तक बंद रहा और बुधवार को एक अन्य सुरक्षा घटना के कारण लोगों को कुछ घंटों तक वहीं रहने का आदेश दिया गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार को दुनियाभर में अपने दूतावासों को तुरंत सुरक्षा समीक्षा करने का आदेश दिया। इसका कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और उसके संभावित असर बताए गए। सुरक्षा वजहों से सैन्य बेस में रहने लगे हैं अमेरिकी अधिकारी फोर्ट मैकनेयर में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और पेंटागन के कई वरिष्ठ अधिकारी रहते हैं। आमतौर पर यह बेस राजनीतिक नेताओं के लिए नहीं होता, लेकिन हाल के समय में ट्रम्प प्रशासन के कई अधिकारी सुरक्षा कारणों से यहां रहने लगे हैं। यह बेस व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल के काफी करीब है, लेकिन इसकी सुरक्षा व्यवस्था दूसरे सैन्य ठिकानों जितनी मजबूत नहीं मानी जाती। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे ड्रोन खतरे पहले भी सामने आ चुके हैं। 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद ईरान के नेताओं ने बदले की धमकियां दी थीं, जिसके बाद ट्रम्प और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रम्प की सुरक्षा टीम को कई बार अज्ञात ड्रोन का सामना करना पड़ा था। उस समय अधिकारियों ने ट्रम्प को बताया था कि ईरान उन्हें निशाना बना सकता है और उसके कई “किल टीम” अमेरिका में मौजूद हैं। हालांकि, उस साल हुए हत्या के प्रयासों को सीधेतौर पर ईरान से जोड़ने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। ---------------------------------- अमेरिका से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला-ईरान के बाद क्यूबा पर हमला कर सकता है अमेरिका:ट्रम्प बोले- क्यूबा को हासिल करके रहूंगा; 65 साल से दोनों देशों में विवाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वह ‘क्यूबा को अपने कब्जे में लेने’ का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा, “किसी न किसी रूप में क्यूबा को लूंगा… चाहे मैं उसे आजाद करूं या अपने नियंत्रण में ले लूं। मैं उसके साथ कुछ भी कर सकता हूं।” न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प के इस बयान को काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपति क्यूबा के साथ तनावपूर्ण रिश्तों में रहे हैं, लेकिन किसी ने भी इस तरह खुलेतौर पर क्यूबा पर कब्जा करने की बात नहीं कही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<title>सऊदी में ऑयल रिफाइनरी पर हमला:UAE&#45;कतर के तेल&#45;गैस प्लांट पर भी ड्रोन अटैक; सऊदी बोला&#45; ईरान सब्र का इम्तिहान न ले</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 20वां दिन है। सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से अब ज्यादातर तेल यनबू पोर्ट से भेजा जा रहा है। इसके अलावा UAE और कतर के तेल-गैस प्लांट पर भी ड्रोन हमले हुए हैं। ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब, UAE और कतर के तेल ठिकानों को खाली करने की वॉर्निंग दी थी। सऊदी ने आज ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि हमारे देश के पास ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत है। ईरान के हमले पहले से प्लान किए गए लगते हैं और हमारे सब्र का इम्तिहान न लें। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Mar 2026 15:31:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>सऊदी, में, ऑयल, रिफाइनरी, पर, हमला:UAE-कतर, के, तेल-गैस, प्लांट, पर, भी, ड्रोन, अटैक, सऊदी, बोला-, ईरान, सब्र, का, इम्तिहान, न, ले</media:keywords>
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<title>कनाडा में पंजाबी युवक की गोलियां मारकर हत्या:स्टडी वीजा पर गया था, दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकला, परिवार का इकलौता बेटा</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में रह रहे पंजाबी मूल के एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। युवक के भाई पुनर सिंह ने इसकी पुष्टि की है। घटना 14 मार्च की दोपहर की है। एडमिंटन शहर के पास लेड्यूक इलाके में गोली मारी गई। अज्ञात हमलावरों ने हाईवे-2 पर एक कार को घेरकर उसमें सवार युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। मृतक की पहचान बीरइंदर सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था और स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। पुलिस के अनुसार, वह ओंटारियो में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद हाल ही में अल्बर्टा प्रांत में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहा था। दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकला घटना उस समय हुई जब बीरइंदर सिंह अपने कुछ दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकला था। बताया जा रहा है कि घटना के वक्त उसकी कार में एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था, हालांकि पुलिस ने अभी उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के मुताबिक, सफेद या ग्रे रंग के पिकअप ट्रक में सवार हमलावरों ने बीरइंदर की कार को रोककर उस पर गोलियां बरसाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस हत्यारों की जांच में जुटी फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हमलावर बीरइंदर सिंह को पहले से जानते थे या यह कोई अलग वारदात थी। अभी तक हत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए लेड्यूक आरसीएमपी (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) की मेजर क्राइम यूनिट ने जांच अपने हाथ में ले ली है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी या सीसीटीवी फुटेज हो तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। परिवार बोला- हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करे पुलिस बीरइंदर सिंह की हत्या की पुष्टि उसके भाई पुनर सिंह ने की है। परिवार ने मांग की है डेडबॉडी को भारत भेजा जाए। वहीं पुलिस हत्यारों को तुरंत अरेस्ट कर जेल में डाले। मौत की सूचना मिलते ही पंजाब में उसके परिजन में शोक है। परिवार वालों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और कनाडा सरकार से हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। विदेश मंत्रालय से भी इस मामले में हस्तक्षेप की उम्मीद जताई जा रही है। 3 साल पहले गया था कनाडा
22 वर्षीय बीरइंदर सिंह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था। वह 3 साल पहले कनाडा गया था और पिछले 5 महीनों से एडमॉन्टन में रह रहा था। वह वहां कंस्ट्रक्शन का काम करता था और अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना देख रहा था। 14 मार्च 2026 (शनिवार की) दोपहर लगभग 2:50 बजे उसे गोलियां मारी गईं। यह वारदात एडमॉन्टन के दक्षिण में स्थित हाईवे 2 पर हुई। बीरइंदर अपने 2 बचपन के दोस्तों के साथ पहली बार बैनफ घूमने जा रहे थे। पुलिस ने बताया कि बीरइंदर अपने दोस्तों के साथ अपनी होंडा सिविक कार चला रहे थे। तभी एक सफेद पिकअप ट्रक उनकी कार के बगल में आया। ट्रक सवार 2 लोगों ने पहले बीरइंदर की तरफ दोस्ती का इशारा किया। जब बीरइंदर ने जवाब में वैसा ही इशारा किया, तो ट्रक सवारों ने अपनी खिड़की नीचे की और बिना किसी उकसावे के बीरइंदर पर गोली चला दी। गर्दन में गोली लगने से हुई मौत
गोली बीरइंदर की गर्दन में लगी। उनके दोस्तों ने कार पर नियंत्रण पाकर उसे सड़क किनारे रोका और मदद के लिए पुलिस को काल की, लेकिन अत्यधिक खून बहने के कारण बीरइंदर की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस और बीरइंदर के दोस्तों के अनुसार, उनको नहीं पता कि हमला क्यों किया गया। उनके दोस्तों का मानना है कि यह नस्लभेद या नफरत के कारण हो सकता है, क्योंकि उनका किसी से कोई झगड़ा या रोड रेज जैसा मामला नहीं था। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने उस संदिग्ध पिकअप ट्रक और उसमें सवार 2 लोगों की पहचान के लिए लोगों से डैशकैम फुटेज मांगी है। माता-पिता का इकलौता बेटा था बीरइंदर अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके माता-पिता पंजाब में हैं और पिछले 3 सालों से उन्होंने अपने बेटे को नहीं देखा था। दोस्तों ने बीरइंद्र के पार्थिव शरीर को भारत भेजने के लिए गो फंड मी पेज बनाया था, जिसके जरिए जरूरी फंड जुटा लिया गया है ताकि उनके माता-पिता आखिरी बार अपने बेटे का चेहरा देख सकें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:46:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:नॉर्थ कोरिया में किम जोंग उन की पार्टी को 99.93% वोट मिले, सभी सीटें जीतीं; 70% सांसद बदले</title>
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<description><![CDATA[ नॉर्थ कोरिया के संसदीय चुनाव में किम जोंग उन की पार्टी ने जीत दर्ज की है। 15 मार्च को हुए चुनाव में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया और उसके सहयोगी दलों को 99.93% वोट मिले और सभी सीटों पर कब्जा किया गया। राज्य मीडिया के मुताबिक 99.99% प्रतिशत मतदान हुआ। सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के 687 डिप्टी चुने गए, जिसमें सिर्फ 0.07% वोट विरोध में बताए गए। नई संसद का पहला सत्र जल्द प्योंगयांग में होगा, जिसमें देश के शीर्ष नेतृत्व का चुनाव और संविधान में संशोधन पर चर्चा होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार संविधान में दक्षिण कोरिया को दुश्मन देश घोषित करने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है। इस सत्र में किम जोंग उन का फिर से सर्वोच्च नेता चुना जाना तय माना जा रहा है। चुनाव में 70% से ज्यादा सांसद बदले गए हैं, जिसे सत्ता को और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। नई सूची में किम यो-जोंग, विदेश मंत्री चोए सोन-हुई और किम के करीबी सहयोगी जो योंग-वोन शामिल हैं, जबकि पूर्व अध्यक्ष चोए र्योंग-हे को हटाया गया है। हालांकि उत्तर कोरिया की संसद को अक्सर औपचारिक माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:46:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका में खालिस्तान समर्थकों का भारत विरोधी प्रदर्शन:&amp;quot;किल मोदी पॉलिटिक&amp;quot; के नारे लगाए, इंडियन प्रोडक्ट का बायकॉट करने का ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ खालिस्तान समर्थक कनाडा और अमेरिका में भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं। अमेरिका में सिख फॉर जस्टिस से जुड़े समर्थकों ने अमेरिका में प्रदर्शन किया और भारत विरोधी नारे लगाए। खालिस्तान समर्थकों ने किल मोदी पॉलिटक के नारे लगाए। वहीं कुछ दिन पहले किए गए प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान समर्थकों ने इंडियन प्रोडक्ट के साथ-साथ इंडियन एयरलाइंस, शॉप्स व आउटलेट का बायकॉट करने का ऐलान भी किया। अमेरिका में इन दिनों खालिस्तान समर्थक खालिस्तान रेफरेंडम करवा रहे हैं और इसके लिए अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान वो भारत विरोधी नारे लगाकर लोगों को अपने रेफरेंडम (जनमत संग्रह) में शामिल होने की अपील भी कर रहे हैं। खालिस्तान समर्थक अमेरिका में भारत विरोधी प्रदर्शनों के वीडियो शेयर कर रहे हैं और लोगों को खालिस्तान मूवमेंट से जुड़ने को कह रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका में रहने वाले सिख समुदाय के लोग खालिस्तान समर्थकों की इन गतिविधियों का पाकिस्तान समर्थित बताकर विरोध भी कर रहे हैं। यह वीडियो खालिस्तान समर्थक हरनेक सिंह ने अपने X-अकाउंट पर पोस्ट किया है। इसके अलावा अन्य लोगों ने भी इस वीडियो को पोस्ट करके इसे पाकिस्तान का एजेंडा बताया है। प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान समर्थकों की अहम बातें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:46:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बीसीजी रिपोर्ट&#45;अंतिम: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम:सत्ता से दूर, अमेरिका के निचले सदन में 1%, सीनेट में कोई भारतवंशी नहीं</title>
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<description><![CDATA[ जहां पैसे और नॉलेज की बात आती है तो भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी जनसंख्या से कहीं आगे हैं, लेकिन जब सत्ता और प्रतिनिधित्व की बात होती है, तो वहां वे अपनी जनसंख्या के अनुपात तक भी नहीं पहुंचे हैं। यानी यह समुदाय अमेरिका को बनाने में तो बड़ी भूमिका निभा रहा है, लेकिन अमेरिका की दिशा तय करने में उसकी भूमिका अभी बहुत छोटी है। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के आखिरी हिस्से में पढ़िए, अमेरिका की सत्ता में भारतवंशियों का कितना वजन है? अमेरिका में भारतवंशियों की राजनीतिक यात्रा 1955 में एक सांसद से शुरू होकर 6 सांसदों तक ही पहुंच पाई है। मतलब अमेरिकी संसद में अब भी भारतवंशियों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उच्च सदन सीनेट में तो एक भी भारतवंशी नहीं है। 2024 के चुनावों के बाद निचले सदन में भारतवंशियों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने काश पटेल को एफबीआई डायरेक्टर बनाया है। डॉक्टर जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। श्रीराम कृष्णन को सरकार के लिए एआई नीति मार्गदर्शन के लिए अहम भूमिका सौंपी गई, जो भारतवंशियों की बढ़ती मौजूदगी दर्शाता है। संसद; 435 सीटों में 6 पर ही भारतवंशी - अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की कुल 435 सीटों में से केवल 6 सीटों (1.4%) पर भारतवंशी।
- 2012 से पहले केवल दो भारतवंशी पहुंचे थे। 1955 में दलीप सिंह सौंद और 2004 में बॉबी जिंदल। 2012 में अमी बेरा के बाद धीरे-धीरे यह संख्या अब आधा दर्जन हो पाई है।
- उच्च सदन यानी सीनेट में इस वक्त एक भी भारतवंशी नहीं है। 100 सीनेटर होते हैं, 50 राज्यों से 2-2, निचले सदन से पास बिल में सीनेट की मुहर जरूरी।
- कमला हैरिस 2016 में पहली भारतीय-अमेरिकी उच्च सदन की सदस्य बनीं। 2020 में उपराष्ट्रपति बनने के बाद उच्च सदन में कोई भारतवंशी नहीं है। शीर्ष सरकारी एजेंसियों में... सिर्फ 3% - हेल्थकेयर और साइंस के क्षेत्र में भारतवंशियों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (सीडीसी) और ‘नेशनल साइंस फाउंडेशन’ (एनएसएफ) जैसी अमेरिका की शीर्ष सरकारी एजेंसियों के उच्च पदों पर केवल 3% भारतवंशी।
- मतलब ये कि काम करने की जगह पर तो भारतवंशियों की हिस्सेदारी 10% है, पर फैसले लेने वाली जगह पर 3% ही है।
- किस शोध को पैसा मिले, किस विश्वविद्यालय को अनुदान मिले, किस तकनीक पर निवेश हो... ये सब यही संस्थान तय करते हैं।
- इन पदों पर भारतीय-अमेरिकी कम होने से उनके समुदाय की जरूरतें, उनके शोध के विषय व प्राथमिकताएं पीछे रह जाती हैं। जबकि चुनाव में ये बड़े गेम चेंजर हैं - अमेरिका के कुल योग्य वोटर्स में भारतवंशियों की हिस्सेदारी भले ही 1% है, लेकिन वे ‘स्विंग स्टेट्स’ (चुनावों में निर्णायक माने जाने वाले राज्य) में अपना खासा प्रभाव रखते हैं। ये वोटर अब इमिग्रेशन रिफॉर्म, नागरिक अधिकारों और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों जैसे मुद्दों पर मुखर होकर मतदान कर रहे हैं। - रिपोर्ट कहती है कि ये मतदाता करीबी मुकाबलों में परिणाम तय करने या पलटने में बहुत अहम।
- 2024 के रिपब्लिकन प्राथमिक चुनाव में निक्की हेली और विवेक रामास्वामी, दोनों भारतीय मूल के उम्मीदवार थे। डेमोक्रेट में कमला हैरिस राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी थीं। ये इस समुदाय की राजनीतिक अहमियत बताता है। आईएमएफ, डब्ल्यूएचओ और वर्ल्ड बैंक में अपनी छाप छोड़ी भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक संस्थानों में महत्वपूर्ण नेतृत्व निभा रहे हैं। आईएमएफ में गीता गोपीनाथ ने कोविड में आर्थिक पुनरुद्धार और टीकाकरण रणनीतियों को दिशा दी। आईएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने 2008 के वित्तीय संकट की पहले से चेतावनी देकर वैश्विक वित्तीय नीति को प्रभावित किया। विश्व बैंक में इंदरमीत गिल और ममता मूर्ति ने विकास नीतियों को नए विचारों के साथ मजबूत किया। 2023 से अध्यक्ष अजय बंगा जलवायु परियोजनाओं व गरीबी उन्मूलन पर ध्यान दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ में सौम्या स्वामीनाथन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक सहयोग मजबूत किया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:03:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>लंदन में सिख और पाकिस्तानियों में विवाद:पंजाबी रेस्टोरेंट मालिक ने हलाल मीट न बेचने का बोर्ड लगाया, 100 लोगों ने हमला किया</title>
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<description><![CDATA[ लंदन के हाई-प्रोफाइल इलाके हैमरस्मिथ में पंजाबी रेस्टोरेंट मालिक और पाकिस्तानी मुस्लिमों में हलाल मीट को लेकर विवाद हो गया। 16 साल से रेस्टोरेंट चला रहे हरमन कपूर ने कहा कि हलाल मीट बेचने से मना करने पर पाकिस्तानियों के 100 लोगों के ग्रुप ने हमला कर दिया। उन्होंने कहा- मुझे हलाल मीट बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अपने बिजनेस को बचाने के लिए मुझे दुनियाभर के सिखों से मदद मांगनी पड़ रही है। हरमन के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने 14 मार्च को रेस्टोरेंट पर एक बोर्ड लगा दिया। इस पर साफ लिख दिया कि उनके रंगरेज रेस्टोरेंट में हलाल मीट नहीं मिलेगा। हरमन के पोस्टर लगाने के बाद रेस्टोरेंट पर पाकिस्तानियों की भीड़ जमा हो गई। यहां तोड़फोड़ की कोशिश की गई। हरमन ने कहा कि उन पर हमला किया गया। उन्होंने गातरे से डिफेंस किया। उनके घर को भी कट्टरपंथियों ने निशाना बनाया। हरमन ने कहा कि पुलिस ने भी कट्टरपंथियों का साथ दिया। आरोपियों को अरेस्ट करने के बजाय उल्टा उन्हें ही अरेस्ट कर लिया। लेकिन पूछताछ के बाद छोड़ दिया। हरमन ने बताया कि 2010 में खोला उनका रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर है। उनका रेस्टोरेंट रंगरेज पंजाबी स्वाद के लिए मशहूर है। लेकिन उन्होंने कभी हलाल मीट नहीं बेचा। नॉन हलाल मीटअप पोस्ट से छिड़ा विवाद
14 मार्च 2026 को कपूर ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- नॉन हलाल मीटअप। दोपहर 2 बजे रंगरेज आओ, रिकॉर्डिंग उपकरण लेकर आओ। विवाद करने वालों को एक्सपोज करेंगे। पोस्ट वायरल होते ही मुस्लिम समुदाय के 100 से ज्यादा लोग रेस्टोरेंट के बाहर जमा हो गए। एंट्रेंस बंद होने पर नारे लगाने लगे। कपूर ने इसका वीडियो पोस्ट कर दिया और कहा कि उसे धमकियां आ रही हैं। हंगामा होने पर पुलिस ने गिरफ्तार किया
रंगरेज रेस्टोरेंट के बाहर हंगामा होने के बाद पुलिस फोर्स पहुंची। भीड़ को हटाया। पुलिस अंदर घुसी और हरमन सिंह कपूर को अरेस्ट कर ले गई। पुलिस ने गिरफ्तारी का कारण हमला करने वालों को गातरा दिखाना बताया। पुलिस ने कहा कि लंदन में हथियार दिखाना कानूनी जुर्म है। कपूर को बाद में बेल मिल गई। इसे लेकर मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। कपूर का दावा- मैंने तो अपने परिवार को बचाया
हंगामा होने और गातरा दिखाने पर कपूर ने कहा- सिख गुरुओं ने आत्मरक्षा के लिए कृपाण दी है। मैंने तो हमलावरों से अपने परिवार को बचाया है। किसी पर हमला नहीं किया। हरमन कपूर ने आरोप लगाया कि वह 2023 से खालिस्तानी और मुस्लिम समूहों का टारगेट है। पुलिस ने मुझे गिरफ्तार किया क्योंकि मेरा नाम खान नहीं है। यह दोतरफा पुलिसिंग है। विरोध करने वाले युवाओं ने कहा कि कपूर ने उन्हें हमला करने के लिए उकसाया, हेट स्पीच दी, मुस्लिम कम्युनिटी को ट्रोल किया और कृपाण दिखाकर धमकी दी। जानें कैसे शुरू हुआ और क्यों बढ़ा विवाद… --------- ये खबर भी पढ़ें… कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की चाकू मारकर हत्या:मां बोली- खालिस्तानियों ने मारा; हरियाणा में जन्मी, विवादित टिप्पणियां करती थी कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। कैनेडियन पुलिस के मुताबिक मंगलवार की रात करीब साढ़े 9 बजे हमलावर उसके घर में घुसे। उसे घर के भीतर ही चाकू मारे गए। जिसके बाद हमलावर उसे लहूलुहान हालत में छोड़कर फरार हो गए। नैन्सी कनाडा के विंडसर इलाके में रहती थी। (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:03:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>लंदन, में, सिख, और, पाकिस्तानियों, में, विवाद:पंजाबी, रेस्टोरेंट, मालिक, ने, हलाल, मीट, न, बेचने, का, बोर्ड, लगाया, 100, लोगों, ने, हमला, किया</media:keywords>
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<title>मिडिल ईस्ट का तेल दुनिया में सबसे महंगा:153 डॉलर प्रति बैरल हुआ; तेल बचाने के लिए श्रीलंका में सरकारी दफ्तर सिर्फ 4 दिन खुलेंगे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का आज 18वां दिन है। इस जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। तेल की कीमत बढ़कर 153 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो हाल के समय में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। इस बढ़ोतरी का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, खासकर उन देशों पर जो तेल के आयात पर निर्भर हैं। तेल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के चलते कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। परिवहन, बिजली और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी बीच, श्रीलंका ने घोषणा की है कि अब सरकारी दफ्तर हफ्ते में 4 दिन ही खुलेंगे। यह फैसला ईंधन बचाने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी और देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी। इससे पहले भी श्रीलंका आर्थिक संकट और ईंधन की कमी का सामना कर चुका है।
 आज दो भारतीय जहाज गुजरात पहुंचेंगे इस तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। भारत के दो जहाज आज गुजरात के कांडला पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाले हैं। ‘नंदा देवी’ जहाज करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर कांडला पहुंचेगा, जबकि ‘जग लाडकी’ जहाज करीब 81 हजार टन कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचेगा। ये दोनों जहाज होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस लेकर भारत आ रहे हैं। इससे पहले भारतीय जहाज शिवालिक सोमवार को LPG लेकर ‘मुंद्रा पोर्ट’ पहुंच चुका है। इस जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है। शिवालिक जहाज के भारत पहुंचने का वीडियो… भारत ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो वॉरशिप तैनात किए भारत ने ईरान के पास मौजूद दुनिया के अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट के पास अपने दो युद्धपोत तैनात किए हैं। ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारतीय नौसेना के ये टास्क फोर्स जहाज तेल और गैस लेकर भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों और टैंकरों को सुरक्षा देंगे। साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें हर तरह की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के बीच भारत अपने ऊर्जा सप्लाई मार्ग और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:03:15 +0530</pubDate>
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<title>हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था को टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स से चुनौती मिल रही है। ये कंपनियां डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लीनिक और एआई आधारित सुविधाओं के जरिये इलाज, जांच और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं मुहैया करा रही हैं। हेल्थकेयर की बढ़ती लागत के बीच मरीज भी अब इलाज के नए विकल्प तलाश रहे हैं। 
स्टार्टअप्स की फंडिंग भी बढ़ी है। 2025 में अमेरिका के डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स की वेंचर कैपिटल फंडिंग 35% बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपए हो गई। ये पब्लिक हेल्थ सिस्टम में बदलाव का संकेत है। हालांकि पहले ऐसे प्रयोग विफल हो चुके हैं। जेपी मॉर्गन चेज और बर्कशायर हैथवे ने मिलकर 2018 में ‘हेवन’ नाम की पहल शुरू की थी, जिसे 3 साल में ही बंद करना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं में टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स की पैठ बढ़ने के बड़े कारण 20% सरकारी खर्च स्वास्थ्य पर, फिर भी 33% लोग लागत नहीं उठा पा रहे अमेरिकी सरकार हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर करीब 463 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है। यह अमेरिका की जीडीपी का पांचवां हिस्सा यानी तकरीबन 20 फीसदी है। इलाज इतना महंगा है कि करीब एक तिहाई (33%) लोगों ने बीते एक साल में बेहिसाब खर्च के कारण या तो इलाज नहीं कराया या टाल दिया। खर्च बढ़ने का असर हेल्थ इंश्योरेंस पर भी दिख रहा है। अमेरिका में 65 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोग प्राइवेट बीमा पर निर्भर हैं। गैर-लाभकारी संस्था केएफएफ के मुताबिक, 2015 से परिवार के लिए सालाना इंश्योरेंस प्रीमियम (बीमे की लागत) 50% बढ़ गया है। 45 फीसदी अमेरिकियों को हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं, अब वे विकल्प तलाश रहे अमेरिकी जनता का हेल्थ सिस्टम पर भरोसा साल दर साल घट रहा है। गैलप की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी की शुरुआत में जहां मरीजों को डॉक्टरों पर 75% भरोसा था, वहीं 2025 में यह घटकर 55% रह गया। यानी 45% अमेरिकी हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं करते। डॉक्टर अपॉइंटमेंट से लेकर, बीमा कंपनी चुनने तक पूरी चेन डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म बदलाव ला रहे हैं। ‘सेसम’ और ‘वन मेडिकल’ जैसे प्लेटफॉर्म डॉक्टर से सस्ते ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में मदद कर रहे हैं। वीसी फर्म जनरल कैटलिस्ट ने हॉस्पिटल और हेल्थ केयर चेन सुम्मा हेल्थ का अधिग्रहण किया है। ये कंपनी बीमा चुनने से लेकर इलाज और बिल पेमेंट तक पूरे सिस्टम को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। अब वर्चुअल क्लिनिक; कंसल्टेशन, दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन भी दे रहे कई स्टार्टअप मरीजों को नई टेक्नोलॉजी के जरिये हेल्थ सर्विस दे रहे हैं। ‘हिम्स एंड हर्स’ और ‘रो’ जैसे वर्चुअल क्लीनिक ऑनलाइन कंसल्टेशन व दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन दे रहे हैं। ‘प्रीनुवो’ और ‘फंक्शन हेल्थ’ लगभग आधे खर्च 1,000 से 4,500 डॉलर (4 लाख रुपए तक) में पूरे शरीर का एमआरआई और ब्लड टेस्ट की सुविधा दे रहे हैं, ताकि बड़ी बीमारियां पकड़ में आ सकें। एआई - एक चौथाई यूजर कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछ रहे हेल्थ सेक्टर में जेनरेटिव एआई की भूमिका बढ़ी है। चैटजीपीटी के डेवलपर्स का कहना है कि उनके करीब 80 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स में से एक चौथाई से ज्यादा कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछते हैं। ओपनएआई में हेल्थ केयर लीड कर रहे डॉ. नेट ग्रॉस का कहना है कि जेनरेटिव एआई इंटरनेट स्क्रॉल करने के पुराने तरीके में बड़ा सुधार ला रहा है। अब यूजर्स ऐसे सॉफ्टवेयर से सीधे बातचीत कर सकते हैं जो उनके लक्षणों, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए उन्हें सलाह देता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:09:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट&#45;2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई</title>
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<description><![CDATA[ जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है... भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी
नोबेल पुरस्कार 2 बार
फील्ड्स मेडल 1 बार
ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार
स्पेलिंग बी विजेता 82%
पेटेंट में हिस्सेदारी 10%
कंप्यूटर पेटेंट 11%
वैज्ञानिक शोध पत्र 13%
फोर्ब्स 30 अंडर 30 11%
(स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा - टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर - 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं।
- हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य।
- अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। तकनीक - एआई की नींव रखने में भी अहम भूमिका जेनरेटिव एआई की नींव रखने वाला 2017 का शोध पत्र गूगल के आठ इंजीनियरों द्वारा लिखा गया था, जिनमें से दो भारतीय मूल के थे। इस शोध को लार्ज मॉडल्स की आधारशिला मानते हैं यानी आज जो चैटजीपीटी आदि चल रहे हैं, वे सब इसी पेपर की देन हैं यानी एआई की नींव रखने में भी बड़ा योगदान। सेहत - अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ - 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। - 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। - हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। - भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। - भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। - सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:09:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:केन्या में भारी बारिश से तबाही, बाढ़ से 66 लोगों की मौत, हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर</title>
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<description><![CDATA[ अफ्रीकी देश केन्या में तेज बारिश के बाद आई बाढ़ से हालात खराब हो गए हैं। पिछले एक हफ्ते में 66 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश से नदियां उफान पर आ गईं। कई घरों में पानी भर गया और सड़क, बिजली और पानी की लाइनें भी खराब हो गईं। कुछ पुल टूटने के कारण कई सड़कें बंद करनी पड़ीं और कई स्कूलों में भी पानी घुस गया। सरकार ने चेतावनी दी है कि देश के कई हिस्सों में अभी भी तेज बारिश जारी है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगह जाने को कहा गया है। अब तक 2000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर शरण लेने को मजबूर हुए हैं। पुलिस और राहत टीमें लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कहा है कि प्रभावित लोगों तक खाना और मेडिकल मदद पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य खबरें… पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कंधार में फिर एयर स्ट्राइक की, तालिबान ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप को निशाना बनाया पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में रविवार रातभर एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने यह कार्रवाई ऑपरेशन गजब-लिल-हक के तहत की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप पर हमला किया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, हमले में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठन सीमा पार हमलों की तैयारी के लिए करते थे। वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन दावों को खारिज किया है। प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हमलों में किसी आतंकी ठिकाने को नहीं, बल्कि कंधार के एक नशा मुक्ति केंद्र और खाली कंटेनरों को नुकसान हुआ। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात अफगानिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था, जिसका मलबा गिरने से क्वेटा में दो बच्चों समेत कुछ नागरिक घायल हो गए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:09:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>नेपाल में भारतीय तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरी:7 लोगों की मौत, 7 घायल; मनकामना मंदिर से दर्शन कर लौटते समय हादसा</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के गोरखा जिले में शनिवार रात भारतीय तीर्थयात्रियों से भरी एक बस खाई में गिर गई। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 घायल हैं। यात्री मनाकामना मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे। पुलिस के मुताबिक भारतीय तीर्थयात्रियों को लेकर जा रही इलेक्ट्रिक बस अचानक सड़क से फिसलकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में घायल सात यात्रियों को भरतपुर स्थित चितवन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भेजा गया है। पुलिस के अनुसार बस में एक दर्जन से ज्यादा यात्री सवार थे और घटना के बाद देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। प्रशासन के अनुसार बस मनकामना मंदिर से तनहुन जिले के अंबुखैरेनी इलाके की ओर जा रही थी। पुलिस ने बताया कि हादसे की दूसरे वजहों की जांच की जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:59:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 30% तक कटौती, नई गाड़ी खरीदने पर भी रोक</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में बढ़ते फ्यूल संकट के बीच सरकार ने खर्च कम करने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि सरकारी कंपनियों और सरकार के अधीन स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों की सैलरी में 5% से 30% तक कटौती की जाएगी। सरकार का कहना है कि इन कदमों से जो पैसा बचेगा, उसे लोगों को राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अगले दो महीनों तक सरकारी गाड़ियों के लिए फ्यूल का इस्तेमाल 50% तक कम किया जाएगा और करीब 60% सरकारी वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा नई सरकारी गाड़ियां खरीदने पर रोक लगा दी गई है। मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है और सरकारी मीटिंग में मिलने वाली फीस भी खत्म करने का फैसला किया गया है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 55 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। इसी वजह से सरकार फ्यूल की खपत कम करने और आर्थिक दबाव घटाने के लिए ये कदम उठा रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… वेनेजुएला में अमेरिकी दूतावास पर 7 साल बाद अमेरिकी झंडा लहराया, राजनयिक संबंध बिगड़ने की वजह से बंद था वेनेजुएला की राजधानी कराकस में अमेरिकी दूतावास पर 7 साल बाद फिर से अमेरिकी झंडा फहराया गया। अमेरिकी दूतावास ने बताया कि 12 मार्च 2019 को दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते खराब होने के कारण दूतावास बंद हो गया था। झंडा फहराने की यह घटना अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में हालिया नरमी का संकेत मानी जा रही है। दरअसल, इसी साल 4 जनवरी को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद डेल्सी रोड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया। झंडा फहराने के दौरान कई स्थानीय लोग वहां पहुंचे। कुछ लोगों ने इसे अच्छा कदम बताया और कहा कि इससे दूसरे देशों के साथ रिश्ते बेहतर हो सकते हैं। हालांकि देश में अब भी कुछ लोग अमेरिका के बढ़ते असर की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि मादुरो को जबरन सत्ता से हटाना और उन्हें उनकी पत्नी के साथ न्यूयॉर्क की जेल में रखना गलत था। साथ ही वेनेजुएला के तेल उद्योग में बढ़ते अमेरिकी प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:59:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान जंग के बीच लंदन में घर खोजना मुश्किल:एक हफ्ते का किराया 3&#45;4 लाख रुपए; लेबनान में 2 लाख बच्चे बेघर, 20 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 16वां दिन है। इस बीच मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण बड़ी संख्या में ब्रिटिश प्रवासी दुबई से वापस लौट रहे हैं। इसके चलते लंदन में किराए के घरों की मांग अचानक बढ़ गई है। डेली मेल के मुताबिक, कई लोग सुरक्षा के कारण जल्दी शिफ्ट होना चाहते हैं और एक हफ्ते के लिए 3 से 4 लाख रुपए तक देने को तैयार हैं। वहीं, हमलों के कारण ईरान में लगभग 20,000 नागरिक इमारतें प्रभावित हुईं, जिसमें 16,000 घर शामिल थे। 77 स्वास्थ्य सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई, 65 स्कूल तबाह हुए। लेबनान में भी इजराइली हमले जारी है, जिसके कारण करीब 8 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। अल जजीरा के मुताबिक इनमें 2 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। 20 तस्वीरों में जंग से बदहाल जिंदगी…. जंग के बीच बचपन हमले की तस्वीरें लंदन में किराया संकट अस्पताल पर हमला जंग में हजारों घर तबाह ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… ईरान बोला- नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पूरी तरह ठीक: उन्हें कोई चोट नहीं; ट्रम्प बोले- बाकी देश भी होर्मुज स्ट्रेट की जिम्मेदारी लें अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 16वां दिन है। इस बीच ईरान ने कहा है कि देश के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पूरी तरह ठीक हैं और उन्हें कोई चोट नहीं लगी है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 12:59:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में 11 भारतीयों पर वीजा फ्रॉड का आरोप, वीजा पाने के लिए फर्जी लूट करवाते थे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में 11 भारतीयों पर फर्जी लूट की घटनाएं करवाकर U-वीजा लेने की साजिश का आरोप लगा है। अमेरिका का U-वीजा उन लोगों को मिलता है जो किसी बड़े अपराध के शिकार होते हैं और जांच में पुलिस की मदद करते हैं। इससे उन्हें अमेरिका में रहने-काम करने की इजाजत मिलती है और बाद में ग्रीन कार्ड भी मिल सकता है। जांच में पता चला कि आरोपी दुकानों में नकली हथियार के साथ डकैती करवाते थे, ताकि कर्मचारी खुद को पीड़ित बताकर वीजा के लिए आवेदन कर सकें। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक 6 आरोपी बोस्टन की फेडरल कोर्ट में पेश हुए, जबकि बाकी को मैसाचुसेट्स, केंटकी और ओहायो से गिरफ्तार किया गया। एक आरोपी को पहले ही भारत भेजा जा चुका है। दोष साबित होने पर 5 साल तक जेल और 2.5 लाख डॉलर तक जुर्माना हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो ICU में भर्ती, निमोनिया से हालत गंभीर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को गंभीर हालत में अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया है। 70 साल के बोल्सोनारो निमोनिया से जूझ रहे हैं। ब्राजील के डीएफ स्टार अस्पताल ने बताया कि उन्हें तेज बुखार, ठंड लगने और ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद भर्ती किया गया। जांच में ब्रोंकोनिमोनिया (फेफड़ों का संक्रमण) की पुष्टि हुई है। बोल्सोनारो के डॉक्टर के मुताबिक 70 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों में निमोनिया खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे सेप्टीसीमिया (खून में संक्रमण) का खतरा बढ़ जाता है। अभी उन्हें ICU में एंटीबायोटिक्स और अन्य मेडिकल सपोर्ट दिया जा रहा है। बोल्सोनारो को 2022 के चुनाव के बाद तख्तापलट की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया था। उन्हें पिछले साल 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने चुनाव हारने के बाद ब्राजील की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पलटने की कोशिश की थी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:40:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>इराक में अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल अटैक:सऊदी में भी 5 US विमान तबाह होने की खबर; कल इराक में भी अमेरिकी प्लेन क्रैश हुआ</title>
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<description><![CDATA[ इराक की राजधानी बगदाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल हमला हुआ है। इराकी अधिकारियों के मुताबिक दूतावास परिसर के अंदर बने हेलिपैड पर एक मिसाइल आकर गिरी। न्यूज एजेंसी AP ने यह जानकारी दी है। इससे पहले सऊदी अरब के एक एयरबेस पर खड़े अमेरिकी एयर फोर्स के 5 विमान तबाह होने की खबर भी सामने आई है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ये ईंधन भरने वाले टैंकर विमान थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन विमानों को ईरान के हमले में नुकसान पहुंचा, हालांकि हमला कब हुआ यह नहीं बताया गया। इस मामले पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभी कोई बयान नहीं दिया है। कल इराक में अमेरिकी वायुसेना का बोइंग केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान भी क्रैश हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार सभी 6 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई। ईरान जंग में अब तक 11 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:40:34 +0530</pubDate>
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<title>दावा&#45; कनाडा में सिखों ने ₹25 करोड़ में गुरुद्वारा बेचा:खरीदने वाले भी सिख; पाठी बोला&#45; यहां बिजनेस होगा, संगत की आस्था से खिलवाड़</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में सिखों ने एक गुरुद्वारा बेच दिया। इसे बनाने, खरीदने और बेचने वाली तीनों पार्टियां सिख हैं। गुरुद्वारा बेचने का ये दावा पाठी ने 3-4 मार्च को श्री आनंदपुर साहिब में होला मोहल्ला समागम में किया। इस वीडियो के एक्स पर अपलोड होने से अब ये तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया है कि गुरुद्वारा 3 मिलियन डॉलर यानी 25 करोड़ रुपए में बेचा गया है। पाठी ने कहा कि सिख धर्म में आज क्या हो रहा है किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने सिख संगत से पूछा कि क्या कभी आपने सुना है कि कभी गुरुघर भी बिका है। ये पहला मामला है जब कनाडा में गुरुद्वारा बेचा गया है। पाठी के दावे के अनुसार गुरुद्वारा बनाने वाले भी सिख हैं और खरीदने वाले भी। वीडियो में कहा गुरुघर इसलिए खरीदा गया कि बिजनेस अच्छा होगा। क्योंकि इस गुरुघर में संगत बड़ी संख्या में माथा टेकने के लिए पहुंचती है। पाठी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से सिख समाज के प्रति गलत मैसेज जाता है। अगर गुरुघर नहीं संभाला जा रहा था तो प्रबंधन इसे संगत के हवाले कर देते। गुरु की संगत में इतनी हिम्मत है कि वह गुरुद्वारे का प्रबंधन संभाल सकती थी। हालांकि, दैनिक भास्कर किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो में पाठी ने कही अहम बातें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 11:40:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अफगान तालिबान का आरोप&#45; पाकिस्तान ने कंधार एयरपोर्ट के पास फ्यूल डिपो पर बमबारी की</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अफगान तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान ने कंधार एयरपोर्ट के पास एक एयरलाइन के फ्यूल डिपो पर बमबारी की है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के मुताबिक, यह हमला प्राइवेट एयरलाइन &#039;काम एयर&#039; के फ्यूल डिपो पर किया गया, जो सिविलियन विमानों और UN के विमानों को भी फ्यूल सप्लाई करता है। तालिबान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अन्य जगहों, जिनमें राजधानी काबुल भी शामिल है पर बमबारी की। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों के मारे जाने की भी बात कही गई है। दोनों देशों के बीच संघर्ष पिछले महीने शुरू हुआ था, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक की थी। पाकिस्तान का कहना था कि यह हमले आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए थे, जबकि अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें केन्या एयरपोर्ट पर 2,000 से ज्यादा ‘क्वीन चींटियां’ तस्करी करते पकड़ा गया चीनी नागरिक केन्या के एक एयरपोर्ट पर एक चीनी नागरिक को हजारों जिंदा &#039;क्वीन चींटियों&#039; की तस्करी करते हुए पकड़ा गया है। आरोपी के पास से 2,000 से ज्यादा चींटियां मिली हैं। जानकारी के मुताबिक आरोपी झांग केकुन को जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया। उसके बैग की तलाशी लेने पर बड़ी संख्या में जिंदा चींटियां बरामद हुईं, जिन्हें वह चीन ले जाने की कोशिश कर रहा था। अधिकारियों ने बताया कि करीब 1,948 क्वीन चींटियां टेस्ट ट्यूब में पैक की गई थीं, जबकि लगभग 300 चींटियां टिश्यू पेपर के रोल के अंदर छिपाकर रखी गई थीं। ये चींटियां ‘मेसर सेफालोट्स’ नाम की प्रजाति की हैं, जो अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता नियमों के तहत संरक्षित मानी जाती हैं। केन्या वेलफेयर सर्विस के मुताबिक यूरोप और एशिया के कुछ देशों में इन चींटियों को एक्सोटिक पालतू के रूप में रखने का चलन बढ़ रहा है, इसलिए इनकी तस्करी के मामले भी सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला किसी अंतरराष्ट्रीय चींटी तस्करी नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है। फिलहाल कोर्ट ने आरोपी को 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, ताकि उसके फोन और लैपटॉप की जांच की जा सके और पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को 835 साल तक की सजा, मेडिकल घोटाले में दोषी अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को धोखाधड़ी के मामले में 835 साल जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिका के पेनसिल्वेनिया के रहने वाले भास्कर सवानी और अरुण सवानी पर आरोप है कि उन्होंने हेल्थकेयर और H-1B वीजा से जुड़े कई घोटाले किए। मामले में उनकी सहयोगी अलेक्जेंड्रा ओला राडोमिक भी दोषी पाई गई हैं। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक दोनों भाइयों ने करीब 10 साल तक कंपनियों और डेंटल क्लीनिक का नेटवर्क बनाकर धोखाधड़ी की। उन्होंने ‘मेडिकेड’ से 3 करोड़ डॉलर (करीब 250 करोड़ रुपए) से ज्यादा की ठगी की और ऐसे इलाज के बिल भी लगाए जो किए ही नहीं गए थे। आरोप है कि उन्होंने बिना मंजूरी वाले डेंटल इम्प्लांट भी लगाए। साथ ही H-1B वीजा के जरिए विदेशों, खासकर भारत से कर्मचारियों को बुलाने के लिए फर्जी आवेदन किए और कई कर्मचारियों से सैलरी का हिस्सा वापस लेने के लिए दबाव डाला। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 12:02:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दावा&#45; अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर ईरान का मिसाइल अटैक:शिप को भारी नुकसान, अमेरिका लौट रहा; इराक में US मिलिट्री प्लेन क्रैश</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 14वां दिन है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में जहाज को भारी नुकसान हुआ है। यह फारस की खाड़ी में तैनात था। ईरानी सेना की स्पेशल यूनिट इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि हमले के बाद यह एयरक्राफ्ट कैरियर अब पीछे हट रहा है और अमेरिका की तरफ लौट रहा है। हालांकि अभी तक अमेरिकी सरकार या सेना की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं, अमेरिका का एक सैन्य विमान बोइंग KC‑135 इराक क्रैश हो गया है। इस घटना के बाद इराक के एक शिया विद्रोही गुट ने दावा किया है कि उसी ने इस विमान को मार गिराया। इससे पहले 2 मार्च को कुवैत में भी फ्रेंडली फायरिंग की घटना में अमेरिका के तीन सैन्य विमान क्रैश होने की खबर सामने आई थी। दावा- ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पैर काटना पड़ा कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं। ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत बेहद गंभीर है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले में चोट इतनी गहरी थी कि उनका एक पैर काटना पड़ा और लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के एक हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है। मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद 9 मार्च को देश का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। अली खामेनेई की 28 फरवरी को मौत हुई थी। पढ़ें पूरी खबर… इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 12:02:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका ने एच&#45;1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बदलाव किया:अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I&#45;129 लागू होगा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा। फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है। 70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है। गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। &#039;ट्रम्प गोल्ड कार्ड&#039;, &#039;ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड&#039; और &#039;कॉर्पोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड&#039; जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा। टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी संसद में H-1B वीजा खत्म करने वाला बिल पेश:2027 तक बंद करने का टारगेट; भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर होगा अमेरिकी संसद में H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक बिल लाया गया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबे ने इसे स्थानीय समयानुसार सोमवार को पेश किया। इस बिल को ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ यानी EXILE एक्ट नाम दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 12:02:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वॉशिंगटन में ट्रम्प&#45;एपस्टीन का 12 फीट ऊंचा स्टैच्यू लगा:टाइटैनिक के ‘किंग ऑफ द वर्ल्ड’ पोज में नजर आए; पहले भी बन चुका ऐसा स्टैच्यू</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का 12 फीट ऊंचा स्टैच्यू लगाया गया है। इसमें दोनों टाइटैनिक फिल्म के मशहूर ‘किंग ऑफ द वर्ल्ड’ पोज में खड़े नजर आ रहे हैं। इस स्टैच्यू को गुमनाम कलाकार समूह ‘द सीक्रेट हैंडशेक’ ने नेशनल मॉल के पास लगाया है। कुछ लोग इसे राजनीतिक कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इसे आपत्तिजनक बताया है। व्हाइट हाउस की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहले भी ट्रम्प और एपस्टीन का ऐसा स्टैच्यू लग चुका है। स्टैच्यू पर मेक अमेरिका सेफ अगेन लिखा स्टैच्यू के आसपास बैनर लगाए गए हैं, जिन पर दोनों की तस्वीरों के साथ ‘मेक अमेरिका सेफ अगेन’ जैसे नारे लिखे गए हैं। स्टैच्यू में एपस्टीन आगे खड़ा है और ट्रम्प उनके पीछे हाथ फैलाए दिखाई दे रहे हैं। यह पोज हॉलीवुड फिल्म ‘टाइटैनिक’ (1997) के मशहूर सीन से प्रेरित है। इस फिल्म में अभिनेता लियोनार्डो डिकैप्रियो ने जैक डॉसन का किरदार निभाया था, जबकि केट विंसलेट ने रोज के रोल में थीं। फिल्म के एक फेमस सीन में जैक जहाज के अगले हिस्से पर खड़ा होकर हाथ फैलाता है और कहता है- “आई एम द किंग ऑफ द वर्ल्ड” (मैं दुनिया का राजा हूं)। यह सीन हॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक सीन में गिना जाता है। पहले भी लग चुकी है ऐसी मूर्ति यह पहली बार नहीं है जब इस समूह ने ऐसा स्टैच्यू लगाया है। 2025 में इसी समूह ने बेस्ट फ्रेंड फारेवर नाम की मूर्ति लगाई थी, जिसमें ट्रम्प और एपस्टीन को हाथ पकड़कर खड़े दिखाया गया था। जेफ्री एपस्टीन कौन था? जेफ्री एपस्टीन अमेरिका का फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिग लड़कियों की सेक्स ट्रैफिकिंग और यौन शोषण का नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप लगे थे। 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसी साल न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। 1990 के दशक और शुरुआती 2000 के दौर में ट्रम्प और एपस्टीन को कुछ सामाजिक कार्यक्रमों और पार्टियों में साथ देखा गया था। हालांकि बाद में ट्रम्प ने कहा था कि उनका एपस्टीन से संबंध काफी पहले खत्म हो गया था और उन्होंने उसे अपने क्लब से बैन कर दिया था। एपस्टीन फाइलों में भारतीय नामों का जिक्र जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कुछ ईमेल में भारत और भारतीय मूल के कुछ लोगों के नामों का जिक्र सामने आया था। इनमें दीपक चोपड़ा, अनिल अंबानी, हरदीप सिंह पुरी, मीरा नायर और अनुराग कश्यप जैसे नाम शामिल बताए गए। हालांकि इन नामों का जिक्र केवल संपर्क या बातचीत के संदर्भ में सामने आया था। किसी के खिलाफ अपराध में शामिल होने का आरोप साबित नहीं हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 12:02:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>वॉशिंगटन, में, ट्रम्प-एपस्टीन, का, फीट, ऊंचा, स्टैच्यू, लगा:टाइटैनिक, के, ‘किंग, ऑफ, द, वर्ल्ड’, पोज, में, नजर, आए, पहले, भी, बन, चुका, ऐसा, स्टैच्यू</media:keywords>
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<title>ईरान का फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाज पर हमला:एक भारतीय की मौत; भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 13वां दिन हैं। ईरान ने बुधवार रात फारस की खाड़ी में &#039;सेफसी विष्णु&#039; नाम के एक अमेरिकी तेल टैंकर (जहाज) पर हमला किया। इसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमले में आत्मघाती नाव (सुसाइड बोट) का इस्तेमाल किया गया। जहाज पर मौजूद बाकी 27 लोग सुरक्षित बचा लिए गए। ये जहाज मार्शल आइलैंड के झंडे के तहत चल रहा था। फिलहाल मारे गए भारतीय नागरिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं न्यूज ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की इजाजत दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक वे जहाज जो अमेरिका-इजराइल के फायदे से जुड़े नहीं हैं, उन्हें इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा। इसी वजह से भारतीय जहाजों को फिलहाल सुरक्षित रास्ता दिया गया है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 12:02:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:चीन&#45;नॉर्थ कोरिया के बीच 6 साल बाद फिर शुरू होगी पैसेंजर ट्रेनें</title>
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<description><![CDATA[ चीन और नॉर्थ कोरिया के बीच पैसेंजर ट्रेन सेवा 6 साल बाद फिर शुरू होने जा रही है। चीन के रेल ऑपरेटर ने बताया कि यह सेवा कोविड-19 माहामारी के कारण बंद हो गई थी, जो गुरुवार से शुरू होगी। ट्रेन बीजिंग और प्योंगयांग के बीच हफ्ते में चार दिन चलेगी। वहीं चीन के बॉर्डर शहर डांडोंग और प्योंगयांग के बीच रोजाना चलेगी। चीन रेलवे ने कहा कि यह रेल सेवा दोनों देशों के बीच दोस्ती और लोगों के आपसी संपर्क को मजबूत करने वाला एक अहम कदम है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग-प्योंगयांग ट्रेन में कुछ डिब्बों में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को यात्रा की अनुमति होगी। हालांकि फिलहाल टिकट आम पर्यटकों या व्यापारियों के लिए उपलब्ध नहीं हैं। अभी वही लोग टिकट ले पा रहे हैं जिनके पास मान्य वीजा है, जैसे नॉर्थ कोरिया में काम या पढ़ाई करने वाले चीनी नागरिक और विदेश में रहने वाले उत्तर कोरियाई नागरिक। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिका में ट्रम्प और यौन अपराधी एपस्टीन की ‘टाइटैनिक पोज’ वाली मूर्ति लगाई गई अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल पार्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की मूर्ति लगाई गई है। इस मूर्ति को फिल्म टाइटैनिक के मशहूर “टाइटैनिक पोज” की तरह बनाया गया है। इसमें दोनों आकृतियां जहाज के आगे खड़े किरदारों की तरह पोज देती दिखाई गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह इंस्टॉलेशन कलाकारों के एक ग्रुप ‘सीक्रेट हैंडशेक’ ने लगाया है। इसे बिना किसी आधिकारिक घोषणा के इस हफ्ते अचानक लगा दिया गया। इस समूह ने पहले भी इसी तरह के विरोध से जुड़े आर्टवर्क लगाए हैं। हाल ही में फैरागट स्क्वायर में &#039;जेफ्री एपस्टीन वॉक ऑफ शेम&#039; नाम से एक और इंस्टॉलेशन लगाया गया था। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी को एपस्टीन केस से जुड़े कुछ नए रिकॉर्ड जारी किए थे। इनमें डोनाल्ड ट्रम्प का नाम सैकड़ों बार दर्ज है। अमेरिका में मानसिक स्थिति से जूझ रहे युवक को पुलिस ने गोली मारी, युवक ने खुद 911 पर कॉल किया था अमेरिका में एलेक्स लामोरी नाम के 25 वर्षीय ऑटिज्म नाम की मानसिक स्थिति से जूझ रहे युवक की मारीलैंड में पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई। बताया गया कि युवक ने मानसिक संकट के दौरान खुद 911 पर कॉल कर वेलनेस चेक के लिए मदद मांगी थी। परिवार के अनुसार, एलेक्स के पास मानसिक संकट की स्थिति के लिए एक सेफ्टी प्लान था, जिसमें जरूरत पड़ने पर पुलिस को कॉल करना शामिल था। उनकी मां ने भी पहले ही अधिकारियों को बताया था कि उनका बेटा ऑटिस्टिक है और आत्म-हानि के खतरे में हो सकता है। 28 फरवरी की रात पुलिस जब अपार्टमेंट परिसर में पहुंची तो शुरू में उन्हें एलेक्स नहीं मिला। बाद में पार्किंग लॉट की ओर से वह हाथ में चाकू लिए पुलिस की ओर आते दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें कई बार हथियार छोड़ने के लिए कहा, लेकिन वह आगे बढ़ते रहे। इसके बाद तीन अधिकारियों ने गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना में शामिल तीन पुलिस अधिकारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है और बॉडी-कैमरा फुटेज जल्द जारी की जा सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:28:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>मोहाली में ब्लैक ऑडी ने विदेशी युवती को उड़ाया:जीरकपुर VIP रोड पर 14 फीट हवा में उछलकर रोड पर गिरी; ज्यादा खून बहने से मौत</title>
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<description><![CDATA[ माहोली में ओवरस्पीड ऑडी कार ने पैदल जा रही एक विदेशी युवती को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही युवती करीब 14 फीट हवा में ऊपर उछलकर रोड के दूसरी ओर जा गिरी। जिससे ज्यादा खून बहने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा जीरकपुर की वीआईपी रोड पर एमकेयर अस्पताल के सामने मंगलवार देर रात करीब 12 बजे हुआ। मृतका की पहचान मावलूदा के नाम से हुई है। वह तुर्की की रहने वाली है। हादसे का पता चलते ही पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अब मृतका के परिवार से संपर्क किया गया है। तुर्की से उसकी बहन आ रही है। उसके बाद मृतका का पोस्टमॉर्टम होगा। वहीं ये पूरा हादसा वहां लगे CCTV कैमरे में कैद हुआ है। जिसमें दिख रहा है कि ऑडी की टक्कर लगते ही युवती उछलकर रोड पर गिर रही है। 4 PHOTOS में देखिए पूरा हादसा… 1. दोस्त के साथ रोड क्रॉस कर रही युवती
विदेशी युवती मावलूदा अपने दोस्त के साथ अस्पताल के बाहर रोड क्रॉस करते हुए नजर आ रही है। अभी उसने पूरा रोड क्रॉस नहीं किया था लेकिन रोड के किनारे पहुंचने वाले थे। तभी तेज रफ्तार ऑडी आ गई। फुटेज में वह रोड से आते हुए दिख रहे हैं। 2. ऑडी ने टक्कर मारी, युवती उछली
ओवरस्पीड ऑडी ने युवती को टक्कर मार दी। ऑडी की स्पीड इतनी तेज थी कि टक्कर लगते ही युवती हवा में उछलती हुई नजर आ रही है। 3. उछलने के बाद नीचे गिरी युवती
ऑडी टक्कर मारकर सीधे निकल जाती है, इसके बाद विदेशी युवती हवा में उछलते हुए धड़ाम से नीचे गिर रही है। रोड पर गिरते ही वह थोड़ी दूर तक घिसटती हुई थी जाती है। 4. हादसे के बाद पार्किंग में बैठे लोग देखने पहुंचे
हादसे का पता चलते ही वहां पार्किंग एरिया में बैठे कुछ लोग तुरंत वहां देखने के लिए जाते हैं। हालांकि युवती इतने झटके से नीचे गिरती है कि उसे बचाया नहीं जा सके। अब जानिए, पूरा हादसा कैसे हुआ… दोस्त की पत्नी को देखने अस्पताल जा रही थी
चश्मदीदों ने बताया कि विदेशी युवती मावलूदा (37) अपने दोस्त के साथ एमकेयर अस्पताल से पैदल जा रही थी। सड़क पार करते समय तेज रफ्तार ऑडी कार ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में युवती को गंभीर चोटें आईं और अत्यधिक खून बहने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। चंडीगढ़ का दोस्त भी साथ था, उसकी पत्नी को देखने आई थी
जिस वक्त ये हादसा हुआ, विदेशी युवती के साथ चंडीगढ़ के अभिषेक उर्फ अभी भी मौजूद था। अभी ने बताया कि मृतका उसकी दोस्त थी। वह मेरी गर्भवती पत्नी का ही हालचाल जानने के लिए एमकेयर अस्पताल आई थी। जैसे ही वह अस्पताल से बाहर निकले तो काले रंग की ऑडी तेज स्पीड से आई। जिसने उन दोनों को टक्कर मार दी। जिससे उसे भी हलकी चोटें आई हैं। एक घंटे बाद पहुंची पुलिस, लोगों में नाराजगी
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। हालांकि, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची, जिससे उनमें नाराजगी देखी गई। बाद में पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर डेराबस्सी के सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिया। बहन के आने के बाद होगा पोस्टमार्टम
जीरकपुर पुलिस के जांच अधिकारी राज कुमार ने बताया कि मृतका की पहचान विदेशी नागरिक मावलूदा के रूप में हुई है। उसकी बहन ने कहा है कि वह तुर्की से भारत आ रही है, जिसके आने के बाद पोस्टमार्टम सहित आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपी चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जा सके। मामले की जांच जारी है। वीआईपी रोड पर बढ़ रहा हादसों का खतरा
वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार वाहन आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय कई चालक तेज गति से गाड़ियां चलाते हैं, जिससे पैदल चलने वालों और दोपहिया चालकों की जान जोखिम में रहती है। लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर स्पीड कंट्रोल के लिए कड़े कदम उठाने और ट्रैफिक निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:28:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान जंग&#45; लोग पालतू कुत्ते&#45;बिल्ली छोड़कर भाग रहे:बिना खाना&#45;पानी दिए खंभे से बांधा, नोट लिखा&#45; सॉरी देश छोड़ रहा हूं; 23 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में बढ़ते इजराइल-ईरान तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लोग देश छोड़ने की तैयारी में अपने पालतू कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे जानवरों को सड़कों या शेल्टर में छोड़ रहे हैं। रेस्क्यू संगठनों के अनुसार, लोग जानवरों को बिना खाना-पानी के भीषण गर्मी में रास्ते में पोल से बांध कर छोड़ रहे हैं। एनिमल वेलफेयर वर्कर्स का कहना है कि उन्हें घरों या आश्रयों के बाहर पिंजरों में बंद बिल्लियां और पिल्ले भी मिले हैं। अबू धाबी के एनिमल वेलफेयर वर्कर ऐन्सो स्टैंडर ने इसे स्वार्थी और निर्दयी कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शेल्टर के पास इलाके में दो छोड़े गए कुत्तों को गोली मारने की खबर मिली है।  23 तस्वीरें देखें… जंग के बीच तड़पते बेजुबान ईरान जंग में कई बच्चे घायल इजराइली हमलों से उजड़े लेबनानी परिवार जंग से तबाही और पलायन अब जंग की शुरुआत की तस्वीरें देखें इजराइल का ईरान पर हमला --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… जंग मे अमेरिका के 140 सैनिक घायल, 7 की मौत: इजराइल में कई जगह बमबारी; ईरान में अब तक 8000 घरों पर हमला अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 12वां दिन है। इस युद्ध में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 12:28:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>खामेनेई की तस्वीर लेकर सड़कों पर रोती महिलाएं:ईरानी महिला फुटबॉलरों को बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शन; PHOTOS&#45;VIDEO में जंग के 10 दिन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का आज 11वां दिन है। युद्ध का असर अब मैदानों से लेकर आम लोगों की जिंदगी तक दिखने लगा है। इसी बीच एशियन कप से बाहर होने के बाद ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय आधार पर वीजा देकर अपने देश में रहने की अनुमति दे दी है। पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरानी टीम ने राष्ट्रगान नहीं गाया था। इसे सरकार के खिलाफ विरोध के तौर पर देखा गया, जिसके बाद खिलाड़ियों को गद्दार बताया जाने लगा और सख्त सजा देने की मांग उठने लगी। हालात बिगड़ते देख ऑस्ट्रेलिया ने पांच खिलाड़ियों को मानवीय वीजा देकर सुरक्षा देने का फैसला किया। रविवार को गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर सैकड़ों लोग खिलाड़ियों के समर्थन में जुटे। प्रदर्शनकारियों ने ‘हमारी बेटियों को बचाओ’ के नारे लगाए और खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने की मांग की। उधर, युद्ध का असर पूरे मिडिल ईस्ट और उससे जुड़े देशों में दिखाई दे रहा है। बीते 10 दिनों में इस संघर्ष ने 10 से ज्यादा देशों के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है, कहीं बमबारी, कहीं विरोध प्रदर्शन और कहीं भय का माहौल। ईरान जंग के 10 दिन 35 तस्वीरों में देखें… ऑस्ट्रेलिया में ईरानी महिला फुटबॉल टीम जंग की शुरुआत- इजराइल का ईरान पर हमला ईरान में मातम ईरान के जवाबी हमले ईरान से वापस लौटे ईरान ने अमेरिकी बेसों को बनाया टारगेट इजराइली हमलों से उजड़े लेबनानी परिवार मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि ईरान के तेहरान में काली बारिश ईरान में नए सुप्रीम लीडर चुने गए अमेरिका में प्रदर्शन ब्रिटेन में महिलाओं का मार्च -------------- यह खबर भी पढें… UAE, सऊदी, जॉर्डन में अमेरिकी THAAD डिफेंस-सिस्टम पर ईरानी हमला:जॉर्डन वाला सिस्टम तबाह, कीमत ₹22 हजार करोड़; अमेरिका के पास ऐसे सिर्फ 7 सिस्टम अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है। ईरान ने बीते एक हफ्ते में सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम को निशाना बनाया है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:21:33 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प ने ईरान जंग पर पुतिन से बात की:कहा&#45; रूस लड़ाई खत्म करने में मदद करना चाहता है, हमने 51 ईरानी जहाज डुबोए</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 11वां दिन हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार रात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ईरान जंग और यूक्रेन के हालात पर 1 घंटे फोन पर बात की। ट्रम्प ने बताया कि पुतिन ने कहा है कि रूस, ईरान जंग खत्म कराने में मदद करना चाहता है। हालांकि ट्रम्प ने उनसे कहा कि अगर वे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद करें तो वो ज्यादा बेहतर होगा। फ्लोरिडा में मीडिया से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी और पुतिन की पहली बातचीत थी। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा हुआ है। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 दिन में अमेरिका ने 51 ईरानी जहाज डुबो दिए हैं और हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। राष्ट्रगान न गाने वाली 5 ईरानी खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने शरण दी एशियन कप से बाहर होने के बाद ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय वीजा देकर अपने देश में रहने की इजाजत दे दी है। ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि इन खिलाड़ियों को पुलिस ने सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है। जिन खिलाड़ियों को वीजा मिला है उनके नाम फतेमेह पसंदिदेह, जहरा घनबारी, जहरा सरबली, अतेफे रमजानजादेह और मोना हमौदी हैं। सरकार ने कहा है कि अगर बाकी खिलाड़ी भी चाहें तो वे भी ऑस्ट्रेलिया में रह सकती हैं। दरअसल, पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले ईरान की टीम ने अपना राष्ट्रगान नहीं गाया था। इसके बाद ईरान में कुछ लोगों ने टीम की आलोचना की और उन्हें सख्त सजा देने की मांग भी की। इसी वजह से खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। रविवार को गोल्ड कोस्ट स्टेडियम के बाहर सैकड़ों लोगों ने टीम के समर्थन में “सेव अवर गर्ल्स” के नारे लगाए और खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने की मांग की। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी पुष्टि की कि इन पांच खिलाड़ियों को मानवीय वीजा दे दिया गया है। इस वीजा के तहत वे ऑस्ट्रेलिया में रह सकती हैं, काम कर सकती हैं और पढ़ाई भी कर सकती हैं। इसी मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो अमेरिका भी इन खिलाड़ियों को शरण देने के लिए तैयार है। ईरानी महिला खिलाड़ियों के राष्ट्रगान न गाने का वीडियो… इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:21:33 +0530</pubDate>
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<title>न्यूड फोटो देख सुसाइड करने लगी थी सरबजीत:पति बोला&#45; PAK से नासिर ने ब्लैकमेल किया, मैं इनके केस निपटारे के लिए पैसे कमाता रहा</title>
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<description><![CDATA[ भारत से पाकिस्तान जाकर एक मुस्लिम व्यक्ति नासिर हुसैन से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत कौर के पति करनैल सिंह ने हाल ही में एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कई अहम बातें शेयर कीं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 साल से इंग्लैंड में रह रहे हैं। सरबजीत कौर और बच्चों के खिलाफ भारत में कई केस दर्ज हैं। इन केसों के निपटारे के लिए उन्हें बहुत पैसे चाहिए थे। इसके लिए वह इंग्लैंड में रहकर पैसे कमाते रहे और वकीलों की फीस भरते रहे। यही कारण है कि वह सरबजीत और अपने बच्चों को समय नहीं दे सके। करनैल सिंह के मुताबिक, आज भी कई मामलों में जमानत और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, जिस पर लगातार खर्च हो रहा है। वह हर महीने ढाई से 3 लाख रुपए सरबजीत के खाते में डालते थे, जिनसे केस लड़े जा सके और पत्नी-बच्चे जेल से बाहर रहे। इंटरव्यू के दौरान करनैल सिंह ने यह भी कहा कि विदेश में रहने के बावजूद उनका परिवार से संपर्क कभी पूरी तरह नहीं टूटा। उनका कहना है कि वह सरबजीत से पहले भी रोजाना बात करते थे और आज भी कई बार बातचीत होती है। उन्होंने बताया कि सरबजीत कौर इस समय काफी दुखी है। सरबजीत ने उनसे कहा कि वह उन्हें इंग्लैंड अपने पास बुला लें। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि पहले वह भारत आ जाएं, उसके बाद वह उसे अपने पास इंग्लैंड बुला लेंगे। पढ़िए, करनैल सिंह ने सवालों के क्या जवाब दिए… सवाल: आपकी पत्नी सरबजीत कौर पाकिस्तान गईं। वहां नासिर हुसैन से शादी कर ली। आपको कैसे पता लगा कि नासिर के साथ सरबजीत के संबंध हैं?
जवाब: मुझे सरबजीत की अश्लील फोटो आई थीं। मुझे, उसके (सरबजीत के) भाई को और मेरे बच्चों को भी भेजी गई थीं। उसके बाद सरबजीत सुसाइड करने लगी थी, जिसे बहुत मुश्किल से बचाया गया था। यह बात पाकिस्तान जाने से 2 साल पहले की है। सवाल: फोटो भेजने के बाद आपकी नासिर से बात हुई? क्या बात हुई थी?
जवाब: उस समय हमने पाकिस्तान में वकील किया था कि इसे रोको। मगर वह रुका नहीं। बार-बार फोटो भेजता रहा था। वह सरबजीत को पाकिस्तान आने के लिए मजबूर करता था। सवाल: जब सुसाइड करने लगी थी तब आपकी वाइफ सरबजीत ने क्या कहा था?
जवाब: कहती थी कि नासिर ब्लैकमेल करता है, पैसे मांगता है। इसी कारण वह ठीक भी नहीं रहती थी। सरबजीत डिप्रेशन की मरीज है। सवाल: आपने एक इंटरव्यू सुना होगा जिसमें सरबजीत कह रही हैं कि मैं पाकिस्तान आई हूं, मुझे बहुत खुशी है, मेरा सपना पूरा हो गया, मैं बहुत खुश हूं?
जवाब: सरबजीत का वकील ही कहता है कि ऐसी वीडियो बनाओ। फिर तुम्हें पाकिस्तान की गवर्नमेंट नेशनलिटी दे देगी। सब कुछ वही करवा रहे हैं, लेकिन अंदर की बात यह है कि वह दुखी है। सवाल: आप कहते हैं कि वह दबाव में है। फिर वह आपको कॉल कैसे कर देती है?
जवाब: वह दुखी होकर, मरने के किनारे जैसी हालत में कॉल कर देती है। कहती है कि मैं दुखी हूं, मरने के किनारे हूं, पता नहीं मैं मर जाऊं। सरबजीत ने मुझे यह भी बताया कि उसका मोबाइल तोड़ दिया गया था। इसलिए, उसने नया फोन लिया। उसने अपनी सोने की चेन 6 लाख रुपए में बेची, डेढ़ लाख रुपए उसके पास हैं और 1 लाख 70 हजार रुपए का नया फोन लिया है। बाकी पैसे नासिर ने ले लिए। वह कहती है कि नासिर पैसे मांगता था। जब तक पैसे देती रहेगी, तब तक ठीक रहेगा। बाद में वह कुछ भी कर सकता है। सवाल: आप विदेश में 20 साल से हैं। पहले आपकी उससे बात होती थी?
जवाब: पहले मेरी उससे रोज तीन-चार बार बात होती थीं। अब भी कई बार बात हो चुकी हैं। सवाल: क्या सरबजीत आपसे कहती है कि वह वापस आना चाहती है?
जवाब: हां, वह कहती है कि उसे डराया-धमकाया जाता है और कहा जाता है कि भारत जाने पर भारतीय एजेंसियां उसे पकड़ लेंगी। सवाल: आपकी क्या मजबूरी थी कि आप 20 साल से भारत नहीं आए?
जवाब: देखिए, यहां परिवार पर बहुत सारे केस थे। करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। आप मेरे गांव जाकर भी पूछ सकते हैं। अगर मैं पैसे नहीं लगाता तो वे लोग शायद जिंदगी भर जेल से बाहर नहीं आ पाते। आज भी करोड़ों रुपये लग रहे हैं। पैसों के जरिए ही समझौते करवाए गए हैं। मेरे बेटों पर अभी भी केस हैं। भारत में पैसा नहीं बनता, इसलिए मजबूरी में मुझे विदेश में रहना पड़ा। यहां पैसे कमाकर भारत में अपने परिवार के केसों का निपटारा कर रहा हूं। सवाल: अगर सरबजीत वापस आती है तो क्या आप इंग्लैंड से भारत वापस आएंगे?
जवाब: जी, कुछ दिन पहले ही मेरी उससे बात हुई थी। वह कह रही थी कि मुझे इंग्लैंड बुला लो। मैंने कहा था कि मैं बुला लूंगा, लेकिन पहले भारत आ जाओ। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ सरबजीत कौर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… पाक गई पंजाबी महिला बोली- ब्लैकमेल कर निकाह किया:वकील से रोते हुए कहा- नासिर पर कार्रवाई कराना चाहती हूं, मुझे भारत भिजवा दो PAK गई पंजाबी महिला बोली- असीं लाहौरिए हां:इंडिया में हमारी 20 किले जमीन, पाकिस्तान में नंबरदार रहे; मुस्लिम से निकाह कर चुकी PAK गई पंजाबी महिला बोली- मेरा 8 साल पुराना प्यार:मुंह में दांत न रहते तो भी जरूर पाकिस्तान आती; मुस्लिम से निकाह रचाकर खुश हूं पाकिस्तान में निकाह करने वाली सरबजीत कौर की बढ़ी मुश्किलें:लाहौर हाईकोर्ट में याचिका- इसे गिरफ्तार करो, भारत वापस भेजो; सुरक्षा के लिए खतरा पाकिस्तान गई पंजाबी महिला का निकला क्रिमिनल रिकॉर्ड:वेश्यावृत्ति की भी FIR; हिसार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का इंटरव्यू करने वाले ने वेलकम किया ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 12:21:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>लुधियाना में सैक्स रैकेट का खुलासा, नाइजीरियन गैंग भड़का:भास्कर रिपोर्टर को विदेशी नंबर से धमकी, लिखा&#45; गोली मारेंगे; ADGP बोले&#45; सख्त एक्शन करेंगे</title>
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<description><![CDATA[ लुधियाना में नाइजीरियन युवतियों के सैक्स रैकेट का पर्दाफाश होने से गैंग बौखला गया है। उन्होंने इनकी इन्वेस्टिगेशन करने वाले भास्कर रिपोर्टर को धमकाना शुरू कर दिया है। 5 मार्च को स्टिंग ऑपरेशन की खबर पब्लिश होने के बाद 8 मार्च की रात अलग-अलग विदेशी नंबरों से वॉट्सएप कॉल और मैसेज किए जा रहे हैं। जिसमें रिपोर्टर को गोली मारने की धमकी दी गई। मैसेज में पत्रकार की फोटो होने का दावा करते हुए अफ्रीका और अन्य देशों में भारतीयों को नुकसान पहुंचाने की भी धमकी दी गई। धमकी देने वाले ने खुद को ‘सुप्रीम कल्ट’ से जुड़ा बताया। पत्रकार ने नंबर ब्लॉक किए तो आरोपियों ने अलग-अलग नंबरों से फिर मैसेज भेजे। मामले में ADGP सिक्योरिटी कौस्तुभ शर्मा ने कहा कि पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी और धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। बता दें कि भास्कर रिपोर्टर ने फर्जी कस्टमर बनकर नाइजीरियन युवतियों से बात की थी। जिसके बाद उन्होंने वॉट्सऐप पर डीलिंग की और अड्‌डे की लोकेशन भेजी। जिसके बाद पूरे धंधे को बेनकाब करने के लिए रिपोर्टर उनके अड्‌डे तक पहुंचा था। अब विस्तार से पढ़िए मैसेज में क्या लिखा… सेक्स रैकेट से जुड़ी खबर यहां पढ़ें… भास्कर इन्वेस्टिगेशन: लुधियाना में नाइजीरियन युवतियों का सेक्स रैकेट:फुल नाइट ₹7 हजार, शराब-चिकन हो तो सिर्फ ₹1500, रशियन भी अवेलेबल; अड्‌डे तक पहुंचा भास्कर

 लुधियाना में विदेशी युवतियां सेक्स रैकेट चला रही हैं। नाइजीरिया की रहने वाली युवतियां रात के अंधेरे में ये अपना मोबाइल नंबर देती हैं। फिर मोबाइल पर युवतियों की फोटो भेजकर रेट फिक्स करती हैं। इसके बाद लोकेशन भेजकर अपने फ्लैट पर बुलाती हैं। यहां तक कि वह दूसरी जगह जाने को भी तैयार रहती हैं। अगर नाइजीरियन पसंद नहीं आती तो रशियन लड़की तक उपलब्ध कराने का दावा करती हैं। (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:17:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान जंग से कच्चा तेल 2022 के बाद सबसे महंगा:115 डॉलर के पार निकला, एक्सपर्ट बोले&#45; 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं कीमत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम साढ़े तीन साल के हाई पर पहुंच गए हैं। आज यानी 9 मार्च को ये 25% बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार निकला था। 
 क्रूड ऑयल बढ़ने की दो वजहें 1. &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; का लगभग बंद होना क्रूड ऑयल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह &#039;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#039; का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। 
 2. ऑयल रिफाइनरियों पर हमले ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में, ईरान ने कतर, सऊदी अरब और कुवैत की ऑयल फैसिलिटीज पर ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण इन देशों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने धमकी दी है कि वे क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाएंगे। कच्चा तेल 10 दिन में 60% चढ़ा ब्रेंट क्रूड आज 25% से ज्यादा चढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से अब तक 10 दिन में कच्चा तेल करीब 60% महंगा हो चुका है। इससे पहले 2022 में रूस-यूक्रेन जंग के दौरान ये 100 डॉलर के पार निकला था। जानकारों का मानना है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। ये 5 से 6 रुपए लीटर तक महंगा हो सकता है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त तेल है। एक रिपोर्ट के अनुसार यह बैकअप इतना है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए तो भी देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक आसानी से चल सकती है। यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी की ज्यादा चिंता नहीं है। रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया था कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट दी जा रही है। इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था, लेकिन अमेरिका भारत पर इसकी खरीद रोकने का दबाव बनाता रहा है। पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। हालांकि, इस साल ट्रेड डील के ऐलान के बाद उन्होंने इस टैरिफ को हटा दिया । ट्रम्प ने कहा था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। 4 साल से स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें भारत में पिछले चार सालों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इसके उलट पाकिस्तान में पेट्रोल 55% और जर्मनी में 22% महंगा हुआ है। 
 घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़े इस बीच सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा किया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिल रहा है। पहले यह 853 रुपए की थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिल रहा है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:17:07 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:भारतीय मूल के युवक ने अमेरिका में नेशनल वॉर मेमोरियल के सामने डांस किया, अब डिपोर्ट किया जा सकता है</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के युवक मधु राजू को भारत डिपोर्ट किया जा सकता है। उनका वॉशिंगटन डीसी में ‘नेशनल वर्ल्ड वॉर टू मेमोरियल’ के सामने डांस करते हुए वीडियो वायरल हुआ था।  वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों और पूर्व सैनिक संगठनों ने इसे मेमोरियल का अपमान बताया। उनका कहना है कि ऐसी जगह पर डांस करना ठीक नहीं है। इस मेमोरियल को वर्ल्ड वॉर II में लड़ने वाले लाखों अमेरिकी सैनिकों की याद में बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मधु राजू अमेरिका में नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर रह रहे हैं। अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो पर कार्रवाई हो सकती है। अमेरिका की नेशनल पार्क सर्विस के नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय स्मारकों पर बिना अनुमति इस तरह की एक्टिविटी करना मना है। मधु राजू ने इस मामले पर माफी मांगते हुए कहा कि उनका किसी की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं था। फिलहाल अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिकी पॉप स्टार रिहाना के घर पर 10 राउंड फायरिंग, हमले के वक्त घर पर मौजूद थीं अमेरिकी पॉप स्टार रिहाना के घर के बाहर फायरिंग की घटना हुई है। यह घटना लॉस एंजिलिस के ब्रेबरी हिल्स में हुई। जहां एक महिला ने रिहाना के घर की ओर 10 राउंड गोलियां चलाईं। एक गोली घर की दीवार पर लगी है। हमले की जानकारी मिलते ही लास एंजिलिस पुलिस मौके पर पहुंची और 30 साल की एक महिला को हिरासत में लिया। रॉयटर्स के मुताबिक हमले के वक्त रिहाना घर पर मौजूद थीं, लेकिन इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक सड़क के उस पार खड़ी एक गाड़ी से करीब 10 गोलियां चलाई गईं। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अमेरिका में तूफान से 12 साल के बच्चे समेत 6 लोगों की मौत, कई घायल अमेरिका में रविवार को तूफान और बंबडर की वजह से 12 साल के बच्चे समेत 6 लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका के मिशिगन और ओक्लाहोमा में हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिणी मिशिगन में चार लोगों की मौत हुई। वहीं ओक्लाहोमा में दो लोगों की जान गई। इसके अलावा 12 लोगों के घायल होने की भी खबर है। अधिकारियों ने बताया कि कई घरों और इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। मिशिगन की गवर्नर ग्रेचैन विटमर ने इमरजेंसी घोषित कर दी है और कहा है कि प्रभावित लोगों की मदद के लिए रिसोर्स जुटाए जा रहे हैं। वहीं ओक्लाहोमा के गवर्नर केविन स्टीट्ट ने भी कई जिलों में इमरजेंसी घोषित कर दी है ताकि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से किए जा सकें। नेशनल वेदर सर्विस ने चेतावनी दी है कि ग्रेट प्लेन्स से लेकर टेक्सास तक वीकेंड तक भारी तूफान, आंधी और अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:17:07 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प बोले&#45; क्यूबाई सरकार जल्द गिर सकती है, समझौते के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री को भेजूंगा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि क्यूबा की सरकार जल्द गिर सकती है और अमेरिका उसके साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है। CNN को दिए फोन इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “क्यूबा का बहुत जल्द पतन होने वाला है। वे हमसे समझौता करना चाहते हैं, इसलिए मैं विदेश मंत्री मार्को रूबियो को वहां भेजूंगा और देखेंगे क्या होता है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता ईरान से जुड़ा मौजूदा संघर्ष है। ट्रम्प ने कहा कि क्यूबा पर ध्यान बाद में दिया जाएगा। ट्रम्प ने आगे बताया कि “मैं क्यूबा को 50 साल से देख रहा हूं और अब ये मेरी गोद में आ गिरा है।” अमेरिका और क्यूबा के बीच संबंध पिछले कई दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं, जिनमें राजनीतिक टकराव और आर्थिक प्रतिबंध शामिल रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:52:27 +0530</pubDate>
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<title>पाक गई पंजाबी महिला बोली&#45; ब्लैकमेल कर निकाह किया:वकील से रोते हुए कहा&#45; नासिर पर कार्रवाई कराना चाहती हूं, मुझे भारत भिजवा दो</title>
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<description><![CDATA[ भारत से पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत कौर ने पति करनैल सिंह और एडवोकेट अली चंगेजी संधू से संपर्क किया। उसने भारत वापस लौटने की इच्छा जताई। एडवोकेट संधू ने कहा कि सरबजीत कौर ने बताया है कि वह पाकिस्तान में बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रही है और नासिर हुसैन उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा है। बातचीत के दौरान वह भावुक हो गईं और रोते हुए अपनी आपबीती साझा की। सरबजीत कौर ने खुलासा किया कि वह पाकिस्तान इसलिए आई थी ताकि नासिर हुसैन के पास मौजूद उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो हटवाए जा सकें। लेकिन नासिर हुसैन ने उन तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया। उस पर जबरन धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। सरबजीत कौर ने कहा कि वह लाहौर हाईकोर्ट में चल रही एक याचिका की सुनवाई के दौरान अपना बयान दर्ज कराएगी। जब 6 मार्च की सुबह लगभग 7 बजे एक टैक्सी उसे लेने के लिए नासिर हुसैन के घर पहुंची, तो नासिर और उसके परिवार के सदस्यों ने उसे अदालत जाने से रोक दिया। परिवार ने कहा कि अगर वह अदालत गई तो इससे परेशानी खड़ी हो सकती है। सरबजीत कौर ने यह भी कहा कि वह नासिर हुसैन, उसकी पहली पत्नी और उसकी बेटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। सरबजीत कौर से बातचीत का वीडियो एडवोकेट अली ने जारी किया। 5 मार्च को दोनों के बीच बात हुई थी। लेकिन एडवोकेट ने वीडियो अब जारी किया। सरबजीत की पाकिस्तान के एडवोकेट अली चंगेजी संधू से बातचीत… वकील: क्या आप पाकिस्तान में रहना चाहती हैं या नहीं रहना चाहतीं?
सरबजीत: कोर्ट में 6 मार्च को सुनवाई है ना? वकील: हां।
सरबजीत: जी, 6 तारीख को मैं सुबह 10 बजे तक कोर्ट में मिलूंगी। मुझे वापस भेज दो, मैं यहां नहीं रहना चाहती। वकील: जो अब नंबर है, किसी को पता न चले कि आपकी मुझसे बात हुई।
सरबजीत: ठीक। वकील: जो नासिर ने आपके साथ शादी की है, वो जबरन की है।
जवाब: ये बात मैं वहां (कोर्ट में) कहूंगी। वकील: आप अकेली होंगी?
जवाब: हां, अकेली ही आऊंगी। बस, बसें वगैरह वहां उपलब्ध हैं। वकील: क्या नासिर आपको कोर्ट में लेकर आएगा। इंडिया आपको भेजने के लिए तैयार है?
जवाब: हां, वो कहता है कि तुम चली जाओ, तुम यहां ठीक नहीं रहती। वकील: आपको कोई कह रहा है कि अगर आप इंडिया जाओगी तो आपको नुकसान होगा, ऐसी कोई बात नहीं है। मेरी इंडिया वाले पति से भी बात हुई आप के बारे में।
सरबजीत: मुझे एजेंसियों से डर लगता है, मेरा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। वकील: आपको एजेंसियों से कुछ नहीं होगा।
सरबजीत: पाकिस्तान वाली एजेंसी मुझे कुछ नहीं करेगी। इंडिया वाली मुझे पकड़ लेंगी। वकील: इंडिया वाले भी आपको जबरदस्ती नहीं रोकेंगे। आप अपनी इच्छा से वापस जा सकती हैं। और हां आपके पति से मेरी भी बात हुई है। उन्होंने कहा कि मैं आज भी उसे प्यार करता हूं।
सरबजीत: मैं इनको सजा भी दिलवाना चाहती हूं। सवाल: आप सजा क्यों दिलवाना चाहती हैं?
जवाब: वो मैं कोर्ट में बताऊंगी। बाकी मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते ये लोग। वकील: आप मुझसे मिलिए, किसी को साथ लेकर मत आइए।
सरबजीत: ठीक। सरबजीत: बाकी आपको पता ही है कि मैं पाकिस्तान किस काम के लिए आई थी। बस मेरे साथ वादा करो कि जज साहब मुझे वहां नहीं रोकेंगे।
वकील: हां, मुझे पता है कि आप अपनी अश्लील फोटो हटवाने आई थीं। बाकी मैं वादा करता हूं कि जज साहब आपको वहां नहीं रोकेंगे, वापस जाना आपका हक है। सरबजीत: हां, अच्छा, मुझे बस इंडिया भेज दो।
वकील: ठीक है, हमारी बात हुई, किसी से इसका जिक्र न करें। सरबजीत: ठीक। ------------- ये खबर भी पढ़ें… PAK गई पंजाबी महिला का पति हाईकोर्ट पहुंचा:बोला- तलाक नहीं हुआ; मुस्लिम पति ने अश्लील फोटो-VIDEO से ब्लैकमेल कर रेप किया सिख जत्थे के साथ दर्शन के बहाने पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत का पति करनैल सिंह लाहौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। करनैल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरबजीत को पाकिस्तान से निकालने और भारत भेजने की मांग की है। करनैल ने दावा किया कि सरबजीत ने उससे तलाक नहीं लिया। (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:52:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जंग में मारी गई बच्ची को महिलाओं ने कंधा दिया:फूलों से सजी कब्र में दफनाया; अमेरिका&#45;इजराइल और ईरान जंग की 20 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का रविवार को नौवां दिन है। जंग की वजह से ईरान के कई शहरों में भंयकर तबाही हुई है और 1400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगह पर शरण लेने को मजबूर हैं। वहीं दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन किया जा रहा है। ईरान समर्थकों और अमेरिका समर्थकों ने शनिवार को एक ही दिन ब्रिटेन में मार्च निकाला। वहीं दूसरी तरफ लेबनान में भी इजराइल, ईरान समर्थक ग्रुप हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले कर रहा है। युद्ध की तबाही और डर के बीच आम नागरिकों की जिंदगी कैसे प्रभावित हो रही है, इन 20 तस्वीरों में देखिए। ईरान लेबनान ईरान समर्थक और विरोधियों का प्रदर्शन US-इजराइल vs ईरान की 7 तस्वीरें… ईरान के हमले अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमले -------------- यह खबर भी पढें… UAE, सऊदी, जॉर्डन में अमेरिकी THAAD डिफेंस-सिस्टम पर ईरानी हमला:जॉर्डन वाला सिस्टम तबाह, कीमत ₹22 हजार करोड़; अमेरिका के पास ऐसे सिर्फ 7 सिस्टम अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है। ईरान ने बीते एक हफ्ते में सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम को निशाना बनाया है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:52:27 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान में पेट्रोल&#45;डीजल 55 रुपए महंगा:पेट्रोल 336 और डीजल 321 रुपए लीटर हुआ, अमेरिका&#45;इजराइल और ईरान जंग का असर</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% की बढ़ोतरी की है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपए (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत अब 335.86 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल 321.17 रुपए प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का तर्क है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग व मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिसकी वजह से यह फैसला लेना पड़ा। पेट्रोल पंपों पर भीड़ जमा हुई
कीमतों में बढ़ोतरी की खबर आने के बाद होते ही पाकिस्तान के बड़े शहरों जैसे लाहौर और कराची में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में कहीं तेल की किल्लत न हो जाए। जमाखोरी करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई: पीएम शहबाज
पेट्रोल की कमी की अफवाहों और जमाखोरी की शिकायतों के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि जो भी लोग पेट्रोल का स्टॉक छिपाकर रख रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। मिडिल ईस्ट संकट कब खत्म होगा, कुछ पता नहीं
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वे मौजूदा पेट्रोल रिजर्व को लंबे समय तक खींचने की योजना बना रहे हैं। मंत्री ने कहा कि हमें नहीं पता कि मिडिल ईस्ट का यह संकट कब खत्म होगा। सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ सकता है, इसलिए हमें पहले से तैयारी रखनी होगी। भारत में भी LPG गैस सिलेंडर महंगा हुआ
भारत में भी केंद्र सरकार ने 7 मार्च से घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिलेगी। पहले यह 853 रुपए की थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिलेगा। सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी। सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को करनी होगी। सरकारी तेल कंपनियों में इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल है। इसका मकसद कंज्यूमर्स को बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई है। कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर पर पहुंचे
ईरान को लेकर ट्रम्प के दिए एक बयान ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। ट्रम्प ने ईरान से ‘बिना शर्त सरेंडर’ की मांग की है, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी जा रही है। शुक्रवार को क्रूड ऑयल WTI फ्यूचर्स 12.2% की बढ़त के साथ 90.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 12:36:57 +0530</pubDate>
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<media:keywords>पाकिस्तान, में, पेट्रोल-डीजल, रुपए, महंगा:पेट्रोल, 336, और, डीजल, 321, रुपए, लीटर, हुआ, अमेरिका-इजराइल, और, ईरान, जंग, का, असर</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका के AI कंपनियों के लिए नए नियम तैयार, सरकार को देना होगा ‘किसी भी वैध उपयोग’ का अधिकार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के लिए नए सख्त दिशानिर्देश तैयार किए हैं। इन नियमों के तहत जो कंपनियां अमेरिकी सरकार के साथ काम करना चाहेंगी, उन्हें अपने AI सिस्टम के किसी भी वैध उपयोग के लिए अमेरिकी सरकार को स्थायी लाइसेंस देना होगा। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नए दिशानिर्देश जनरल सर्विसिज एडमिनिस्ट्रेशन (GSA) द्वारा तैयार किए गए हैं और यह नागरिक (सिविलियन) सरकारी अनुबंधों पर लागू होंगे। इसका मकसद सरकारी संस्थाओं द्वारा AI सेवाओं की खरीद प्रक्रिया को अधिक सख्त और सुरक्षित बनाना है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी रक्षा विभाग और AI कंपनी एंथ्रोपिक के बीच तनाव बढ़ गया है। पेंटागन ने हाल ही में एंथ्रोपिक को सप्लाई-चेन जोखिम घोषित कर सरकारी ठेकेदारों को सैन्य कार्यों में उसकी तकनीक इस्तेमाल करने से रोक दिया था। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार: अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… कनाडा में भारतीय मूल की इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल की हत्या, मां का आरोप- 18 बार चाकू मारा, पुराने विवाद के कारण हमला भारतीय मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल की कनाडा में चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना मंगलवार शाम विंडसर के पास हुई। नैन्सी की मां शिंदर पाल ग्रेवाल का आरोप है कि हमलावरों ने उनकी बेटी पर 18 बार चाकू से हमला किया और उसकी हत्या कर दी। परिवार के अनुसार, यह हमला किसी पुराने विवाद के कारण किया गया। परिजनों का कहना है कि नैन्सी मूल रूप से लुधियाना जिले के नरंग गांव की रहने वाली थीं। वह कनाडा में एक मरीज से मिलने गई थीं। घर के बाहर निकलते ही कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। मां ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने ऐसी जगह पर वारदात को अंजाम दिया जहां CCTV कैमरे नहीं थे, जिससे साफ है कि हमला पहले से योजनाबद्ध था। परिवार के मुताबिक, नैन्सी का विवाद एक गुरुद्वारे से जुड़े कुछ लोगों के साथ चल रहा था। आरोप है कि उन्होंने गुरुद्वारे के राशन की चोरी का मुद्दा उठाया था और वहां कैमरे लगवाने में मदद की थी। उनकी मां का कहना है कि इसी विवाद के बाद उन्हें धमकियां मिलने लगी थीं। 45 वर्षीय नैन्सी ग्रेवाल पेशे से नर्स थीं और दो कंपनियों में काम करती थीं, जहां वे अक्सर 16 घंटे तक की शिफ्ट करती थीं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 12:36:57 +0530</pubDate>
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<title>ईरान ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं:हर मिसाइल में 20 क्लस्टर बम थे; बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी पर हमला किया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज सातवां दिन है। ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इन मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे। इजराइली सेना ने बताया कि जब ऐसी मिसाइल जमीन की ओर आती है तो उसका वारहेड हवा में ही खुल जाता है और करीब 20 छोटे बम अलग-अलग जगहों पर गिर जाते हैं। हर बम में लगभग 2.5 किलो विस्फोटक होता है और ये करीब 8 किलोमीटर के इलाके में फैल सकते हैं। ये छोटे बम सीधे जमीन पर गिरते हैं और टकराते ही फट जाते हैं। इससे एक बड़े इलाके को खतरा हो सकता है, हालांकि हर छोटे बम का धमाका सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जितना ताकतवर नहीं होता। यह साफ नहीं है कि ईरान ने ऐसी कुल कितनी मिसाइलें चलाई हैं, क्योंकि कई मिसाइलों को इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही गिरा दिया। वहीं ईरान ने गुरुवार को बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी BAPCO पर मिसाइल से हमला किया। इससे रिफाइनरी की एक यूनिट में आग लग गई। हालांकि बाद में आग काबू कर ली गई। बहरीन की रिफाइनरी पर ईरानी मिसाइल हमले का वीडियो…. इजराइल-ईरान जंग से जुड़े बड़े अपडेट्स ट्रम्प बोले- ईरान मेरे बिना सुप्रीम लीडर न चुने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान को उनके बिना नया सुप्रीम लीडर नहीं चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए नेता के चयन में अमेरिका की भूमिका जरूरी है और बिना अमेरिका की भागीदारी के ऐसा करना वक्त की बर्बादी होगी। एक्सिओस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि ईरान अगर अमेरिका को शामिल किए बिना नया सुप्रीम लीडर चुनता है तो इसका कोई मतलब नहीं होगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नया नेता भी पुराने नेतृत्व की नीतियां जारी रखता है तो अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले वर्षों में फिर टकराव हो सकता है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ऐसा नेता चाहता है जो ईरान में शांति और स्थिरता ला सके। भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया भारत ने पहली बार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया है। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना जताई। उन्होंने कंडोलेंस बुक (शोक पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि दी। खामेनेई के निधन के बाद दुनियाभर के कई देशों से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 10:34:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान, दुबई में बाजार खाली, जरूरी सामान लेने निकले लोग:इटली की संसद में ट्रम्प का विरोध, बेरूत से भाग रहे लोग...जंग की 13 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज सातवां दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने शुक्रवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान के इजराइल और गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ अन्य जगहों पर भी हमले जारी हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल तीन दिन में 5000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इससे ईरान में 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 13 फोटोज में देखें, हमलों के बाद के हालात… ईरान के हमले अमेरिका-इजराइल के हमले इजराइल के लेबबान में हमले दुबई में बाजार खाली इटली की संसद में ट्रंप का विरोध -------------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला: श्रीलंका के पास डूबा, 87 सैनिकों की मौत; 32 का रेस्क्यू किया अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 10:34:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>ईरान, दुबई, में, बाजार, खाली, जरूरी, सामान, लेने, निकले, लोग:इटली, की, संसद, में, ट्रम्प, का, विरोध, बेरूत, से, भाग, रहे, लोग...जंग, की, PHOTOS</media:keywords>
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<title>कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की हत्या:हमलावरों ने घर में घुसकर चाकू मारे; हरियाणा में जन्मी, लुधियाना में रही; विवादित टिप्पणियां करती थीं</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। कैनेडियन पुलिस के मुताबिक मंगलवार की रात करीब साढ़े 9 बजे हमलावर उसके घर में घुसे। उसे घर के भीतर ही चाकू मारे गए। जिसके बाद हमलावर उसे लहूलुहान हालत में छोड़कर फरार हो गए। नैन्सी कनाडा के विंडसर इलाके में रहती थी। इसका पता चलने के बाद पुलिस वहां पहुंची। जहां से नैन्सी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। वहां के डॉक्टरों के मुताबिक उसे काफी गंभीर चोटें लगी हुई थीं। जिस वजह से उसकी मौत हो गई। नैन्सी मूल रूप से लुधियाना के जोधा गांव की रहने वाली थी। हालांकि उसकी स्कूलिंग हरियाणा से हुई थी। नैन्सी अपने यूट्यूब वीडियो को लेकर सुर्खियों में रहती थी। जिसमें वह खुलकर खालिस्तानियों से लेकर अकाल तख्त जत्थेदार और डेरा ब्यास मुखी तक की आलोचना करती थी। नैन्सी ग्रेवाल के कत्ल पर पुलिस की 3 अहम बातें… कत्ल से पहले आखिरी पोस्ट, अकाल तख्त जत्थेदार पर विवादित टिप्पणी
नैन्सी ग्रेवाल के इंस्टाग्राम अकाउंट पर आखिरी पोस्ट में उसने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार पर विवादित टिप्पणी की थी। इसमें वह किसी सतनाम सिंह नाम के व्यक्ति के बयान का समर्थन करती है। वह अकाल तख्त जत्थेदार को चेतावनी देती हुई नजर आ रही थी कि जब अवाम इकट्‌ठा हो गई और सच्चे सिख साथ हो गए तो उन्हें नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा अकाल तख्त जत्थेदार के कपड़ों को लेकर भी कई किस्म की विवादित बातें कहीं थीं। यह वीडियो उसके कत्ल वाले दिन यानी 3 फरवरी से 6 दिन पहले का है। डेरा ब्यास मुखी पर भी उठाए थे सवाल
नैन्सी ग्रेवाल ने कुछ दिन पहले एक वीडियो के जरिए ब्यास स्थित राधा स्वामी डेरे के मुखी बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों पर भी वीडियो के जरिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। नैन्सी कह रही थी कि लोग कहते हैं कि उनके बाबा जी नशा छुड़ाते हैं। मगर, क्या उन्होंने कहीं नशा मुक्ति सेंटर खोला है और कहां पर खोला है मुझे बताएं। कितने बच्चों के नशे छुड़ा दिया। जो बच्चा नशा करता है उसके मां बाप भी कहते हैं कि नशा नहीं करना। ये भी डेरे में ऐसा ही कहते हैं। इन्होंने पंजाब में कितने भले काम किए हैं। नैन्सी ने कहा था कि बाबाओं के पीछे न जाएं बल्कि मेहनत करके खुद प्राप्त करो। सुखबीर बादल, मजीठिया व राजा वड़िंग पर की टिप्पणी
नैन्सी ग्रेवाल ने एक वीडियो में सुखबीर बादल पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि सिंगर केएस मक्खन को पार्टी में शामिल कर दिया। केएस मक्खन पर कथित ड्रग के केस हैं। उससे बचने के लिए वो राजनीति में आया। उसे किसी ने स्कीम दी है कि अगर तू इस रूप में राजनीति में आ गया तो सिख तेरे साथ खड़े हो जाएंगे और तुझे बचा देंगे। यहां पर भी लोग इस तरह की हरकतें करते हैं। इसने कुछ देर ढोंग किया और उसके बाद फिर पुराने रूप में आ गया। इसने बेअदबी की। एक बार मेरा शो था उसमें ये गेस्ट आया था। मैं स्टेज होस्ट कर रही थी। ये किसी बंदे को बंदा नहीं समझ रहा था। राजा वड़िंग को लेकर नैन्सी ने कहा था कि उन्हें पता नहीं चलता कि बोलना क्या है? कपिल शर्मा से अपील है है कि इन्हें अपने शो में बुला दें। तेरा शो खूब चलेगा। बादल अगर सीएम बन गया तो कभी नशा खत्म नहीं होगा। खालिस्तानियों पर टिप्पणी करती थी, फिर कहा- मैं खालिस्तान विरोधी नहीं
नैंसी ग्रेवाल ने खालिस्तानियों को लेकर भी टिप्पणी करती थी। उसने भारतीय झंडा जलाने जाने पर कहा था कि इस तरह से अलग देश मिल जाता तो अब तक मिल चुका होता। इसके अलावा भी उसने खालिस्तानियों पर कई तरह की टिप्पणी की थी। हालांकि हाल ही में 21 फरवरी को एक वीडियो पोस्ट में नैन्सी ने कहा था कि मेरे खिलाफ अफवाह फैलाई जा रही है कि मैं खालिस्तान के खिलाफ हूं। मैं खालिस्तान के खिलाफ नहीं हूं। तुम्हें खालिस्तान चाहिए तो तुम अपनी मांग रखो। मुझे कोई प्राॅब्लम नहीं है। लेकिन जो लोग सोशल मीडिया पर बैठकर खालिस्तान की बात करते हैं। लड़कियों को उठाने की बात करते हैं। खालिस्तान समर्थकों ने कनाडा में हिंदोस्तान का झंडा फाड़ दिया। ऐसे वीडियो मेरे पास आई हैं, मैं उन खालिस्तानियों के खिलाफ हूं। पीसफुली जो करना है वो करें। मेरे बोलने से न तो खालिस्तान न बनेगा, न बनने से रूकेगा। मेरे बारे में गलत न बोलें। मैं उन खालिस्तानियों के खिलाफ हूं, जो लोगों को जान से मारने की धमकी देते हैं। जो लोगों को मारते हैं। कनाडा में 12 खालिस्तानियों को पकड़ने की बात की जा रही है। मैं उसके खिलाफ हूं। मैं खालिस्तानियों को मारने वालों के भी खिलाफ हूं। भारत की एजेंसियां करवा रही हैं, इसके कोई प्रमाण नहीं हैं। अगर भारत की एजेंसियां गैंगस्टरों के जरिए कनाडा में हत्याएं करवा रही हैं तो मैं उसके भी खिलाफ हूं। भारत को कोई राइट नहीं किसी को उसके देश में मारने की। इंडिया ने ऐसे एजेंट छोड़े हैं तो ऐसा न करें इससे नफरत फैलेगी। खालिस्तानियों से भी अपील है कि भारत के झंडे को न फाड़ें। नैन्सी ग्रेवाल स्टेज शो करती थी, AAP से जुड़कर कनाडा चली गई
नैन्सी ग्रेवाल पहले स्टेज शो करती थी। वह रहने वाली लुधियाना के जोधा की रहने वाली थी लेकिन उसके ज्यादातर शो जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर सरीखे दोआबा एरिया में होते थे। उसने समाज सेवा से काम शुरू करने के बाद सिंगिंग शुरू कर दी थी। 2015 तक उसने स्टेज प्रोग्राम किए। इसके बाद वह आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ गई। फिर कुछ ही समय बाद वह कनाडा चली गईं। नैन्सी ने अपने फेसबुक पेज पर होमटाउन लुधियाना लिखा हुआ है। हालांकि उसने अपनी स्कूलिंग हरियाणा के सतलुज पब्लिक स्कूल का नाम लिखा है। इसके अलावा कॉलेज की पढ़ाई गवर्नमेंट कॉलेज सिरसा से बताई गई है। वहीं नर्सिंग की पढ़ाई यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो लिखा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:38:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>इजराइल&#45;ईरान जंग के बीच बंकर में शादी:अमेरिका ने पहली बार सबसे एडवांस मिसाइल दागी, 21 PHOTOS&#45;VIDEOS</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज छठा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने गुरुवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान के इजराइल और गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ अन्य जगहों पर भी हमले जारी हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल तीन दिन में 2000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इससे ईरान में 1,045 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 21 फोटोज में देखें, हमलों के बाद के हालात… जंग के बीच नई शुरुआत धमाकों के बीच उत्सव डर और मजबूरी जंग से बर्बादी ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमला पहली बार PrSM मिसाइल का इस्तेमाल कहीं समर्थन तो कहीं विरोध -------------------- ये खबर भी पढ़ें… भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला: श्रीलंका के पास डूबा, 87 सैनिकों की मौत; 32 का रेस्क्यू किया अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 12:38:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान&#45;इजराइल युद्ध से बासमती चावल एक्सपोर्ट अटका:फाजिल्का से भेजा लाखों टन चावल फंसा, शिपिंग एजेंसियां $2000 डालर प्रति कंटेनर मांग रहीं</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी देशों में हो रहे युद्ध के चलते इसका सीधा असर अब पंजाब के बासमती राइस एक्सपोर्टर पर पड़ा है। फाजिल्का जिले के जलालाबाद की बात करें तो यहां से एक्सपोर्ट किया गया लाखों टन बासमती चावल रास्ते में अटक गया है। मिलर्स का कहना है कि युद्ध के हालातों को देखते हुए शिपिंग के नाम पर अब शिपिंग एजेंसियां उनसे 2000 डॉलर प्रति कंटेनर की मांग रही हैं। जिसे वह अदा करने में असमर्थ हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से दखल देने की मांग करते हुए समस्या के समाधान की मांग की है। जलालाबाद से राइस एक्सपोर्टर कपिल देव गुंबर ने बताया कि फाजिल्का जिले में किसान बासमती चावल की खेती करते हैं। 1121 किस्म का बासमती चावल खाड़ी देशों में पसंद किया जाता है। वह पिछले 15 वर्षों से बासमती चावल एक्सपोर्ट का काम कर रहे हैं। लाखों टन चावल भारत से खाड़ी देशों को भेजा जा रहा है। युद्ध के चलते रास्ते में फंसा चावल उन्होंने बताया अब भी उनके द्वारा लाखों टन बासमती चावल दुबई, ईरान सहित गल्फ कंट्रियो में भेजा गया है, जो ईरान- इजराइल युद्ध के चलते रास्ते में फंस गया है। उन्होंने बताया कि उनके करीब 150 कंटेनर है जिसमें से कुछ शिप, समुंदर, बंदरगाह या फिर ट्रकों में है वो वहीं रुक गया है। सारा माल रास्ते में फंस गया है। हालांकि पहले से ही तय भाड़े के अनुसार उनके द्वारा चावल एक्सपोर्ट किया जा रहा है। अब हालात ये हो गए हैं कि युद्ध के चलते रास्ते में फंसे चावल के लिए उनसे शिपिंग एजेंसियों द्वारा वार चार्जेस के नाम पर 2000 डॉलर प्रति कंटेनर मांगा जा रहा है। जिससे चावल का भाव 800 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ जाएगा, लेकिन उन्हें इतना मार्जन नहीं है। एक-दो रुपए प्रति किलो का मार्जन : गुंबर वह एक- दो रुपए प्रति किलो मार्जन पर काम कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में दखल देने की मांग करते हुए समस्या के समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो राइस मिलर्स को भारी नुकसान होगा। जिसका सीधा असर पंजाब की किसानी पर भी पड़ेगा। ]]></description>
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<title>इजराइल ने ईरानी मिसाइल को मार गिराया, VIDEO:तेहरान के हमले से आजादी स्क्वायर में आग लगी; ईरान जंग की 21 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज पांचवा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने बुधवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान के इजराइल और गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ अन्य जगहों पर भी हमले जारी हैं। शनिवार को शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल तीन दिन में 2000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इससे ईरान में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 176 बच्चे शामिल हैं। 20 फोटोज में देखें, हमलों के बाद के हालात… न्याय की मांग 
 इजराइल ने ईरानी मिसाइल गिराई हमलों के बीच पर्व, प्रार्थना हमलों के बीच संदेश जंग के बीच मजबूरी हमलों में विरासत खत्म अपनों के लिए मातम जंग का विरोध मिसाइल अटैक इजराइल में हमले की फोटोज ईरान पर हमले की तस्वीरें ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 21:27:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला:श्रीलंका के पास डूबा, 87 सैनिकों की मौत; 32 का रेस्क्यू किया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। अमेरिका ने भारत से लौट रहे एक ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया है। हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं। यह जानकारी श्रीलंकाई सरकार ने दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबा दिया। श्रीलंका की नेवी ने 32 घायल नौसैनिकों का रेस्क्यू कर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है। जहाज पर लगभग 180 नौसैनिक सवार थे। लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। यह ईरानी युद्धपोत पिछले महीने भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेकर लौट रहा था। श्रीलंकाई अधिकारियों ने अल जजीरा को बताया कि बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच (भारतीय समय के मुताबिक) मदद के लिए मैसेज भेजा। यह जहाज दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से करीब 40 समुद्री मील (करीब 75 किलोमीटर) दूर था। ईरानी युद्धपोत पर हमले का वीडियो… इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 21:27:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान जंग की 25 PHOTOS:हमलों के बीच UAE के राष्ट्रपति दुबई के मॉल में घूमते दिखे; ईरान के 500 साल पुराने महल पर हमला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज चौथा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने सोमवार रात ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले किए। उसने गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्बाद करने का दावा भी किया। शनिवार को शुरू हुई इस जंग में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई की मौत हो चुकी है। अमेरिका-इजराइल तीन दिन में 2000 से ज्यादा बम गिरा चुके हैं। इसमें ईरान में करीब 600 लोग जान गंवा चुके हैं। 24 फोटोज में देखें, हमलों के बाद के हालात…
 कार्टूनिस्ट चंद्रशेखर हाड़ा की नजर में जंग गल्फ देशों में ईरान के हमले और असर की तस्वीरें... कुवैत ने गलती से अमेरिका के फाइटर जेट गिराए बेरूत में इजराइल के हमले की तस्वीरें इजराइल ने ईरान पर फिर मिसाइलें दागीं इजराइल में हमले की फोटोज 1 मार्च: अमेरिका-इजराइल की ईरान पर हमले की 3 तस्वीरें ------------------------- ये खबरें भी पढ़ें अमेरिका-इजराइल का ईरान पर हमला, 50 PHOTOS-VIDEO: एंकर ने रोते हुए खामेनेई की मौत की खबर पढ़ी अमेरिका-इजराइल के हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का शोक है। रविवार को खामेनेई समर्थकों ने सड़कों पर मातम मनाया। शोक सभाएं और विरोध-प्रदर्शन किया। उधर, कई शहरों से जश्न की खबरें भी आईं। अमेरिका-जापान में भी खामेनेई विरोधियों ने खुशी जताई। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:08:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद किया:कहा&#45; यहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करेंगे; भारत का 50% तेल इसी रास्ते आता है</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग का आज चौथा दिन है। इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण शिपिंग रुट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है।  IRGC के एक अधिकारी ने सरकारी टीवी पर कहा कि अगर कोई जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे रोका जाएगा और निशाना बनाया जा सकता है। भारत का करीब 50% तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आता है। दूसरी ओर, फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि ईरानी अधिकारियों के बयानों के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है। ईरान में अब तक 742 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें 176 बच्चे हैं। 750 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।  इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…  भास्कर कार्टूनिस्ट की नजर से ईरान-इजराइल और अमेरिका जंग… इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:08:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PM मोदी से मिले कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी:निवेश&#45;ट्रेड डील पर बातचीत होगी, खालिस्तानी चरमपंथियों पर लगाम लगाने पर भी चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई PM मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। कुछ ही देर में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी। इसमें दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने, ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने, व्यापार विस्तार और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। PM कार्नी के इस दौरे का सबसे बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है। बताया जा रहा है कि यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है। बीबीसी के मुताबिक अगर यह समझौता होता है, तो इसे कार्नी की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जाएगा। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए और अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। PM कार्नी के भारत दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते खराब हुए साल 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा ने निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए गए थे। कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं। जस्टिन ट्रूडो के पद से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है। भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 12:59:53 +0530</pubDate>
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<title>अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले&#45; हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा&#45; 400 अफगान लड़ाके मारे</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बीते चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी है। तालिबान सरकार का कहना है कि हमने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में है। इसके साथ ही तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की जमीन में घुस चुके हैं। तालिबान के मुताबिक, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं। ये कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि अब तक 400 से ज्यादा अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। तालिबान के अनुसार, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें शामिल हैं: पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को &#039;सही समय पर कड़ा जवाब&#039; दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया है और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक - पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया है कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया। वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए हैं। उसने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा। हमले के बाद की तस्वीरें… पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पास पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है। ]]></description>
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<title>दावा&#45;खामेनेई के बेटे बन सकते हैं ईरान के सुप्रीम लीडर:2 साल से सत्ता संभालने की ट्रेनिंग ले रहे थे; 88 मौलवियों की असेंबली करेगी आखिरी फैसला</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जगह कौन लेगा। यह सवाल इसलिए भी, क्योंकि ईरान का सुप्रीम लीडर राष्ट्रपति से भी ज्यादा ताकतवर होता है। ईरान की तरफ से नए सुप्रीम लीडर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके बेटे मोजतबा खामेनेई इस पद के लिए चुने जा सकते हैं। उन्हें पिछले 2 साल से सुप्रीम लीडर बनाने की तैयारियां चल रही थीं।  ईरान का सुप्रीम लीडर को ‘रहबर’ कहा जाता है। ‘रहबर’ का मतलब है, मार्गदर्शक या रास्ता दिखाने वाला। 88 मौलवियों की असेंबली सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। दुनिया में ईरान और वेटिकन सिटी ही ऐसे देश हैं जहां धार्मिक नेता सबसे ज्यादा ताकतवर हैं। ईरान में सुप्रीम लीडर का दर्जा ठीक वैसा ही है, जैसा वेटिकन में पोप को हासिल है। ईरान के संभावित नए सुप्रीम लीडर के बारे में जानने से पहले शनिवार को हुए हमले की तस्वीर, जिसमें खामेनेई की जान गई… खामेनेई ने बीमार होने पर मुजतबा को उत्तराधिकारी बनाया था ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अपने दूसरे बेटे मुजतबा खामेनेई को साल 2024 में उत्तराधिकारी बनाया था। खामेनेई ने बीमारी के चलते यह फैसला लिया था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की एक्सपर्ट असेंबली ने 26 सितंबर 2024 को ही नए सुप्रीम लीडर का चुनाव कर लिया था। खामेनेई ने असेंबली के 60 सदस्यों को बुलाकर गोपनीय तरीके से उत्तराधिकारी पर फैसला लेने कहा था।  खामेनेई की मौत के बाद अब मुजतबा सार्वजनिक रूप से सुप्रीम लीडर के दावेदार के तौर पर सामने आ सकते हैं। इस्लामिक मामलों के जानकार हैं मुजतबा खामेनेई मुजतबा अपने पिता की तरह ही इस्लामिक मामलों के जानकार हैं। वे पहली बार 2009 में दुनिया की नजरों में आए। उन्होंने ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से कुचला, जिसमें कई लोग मारे गए। तब राष्ट्रपति चुनाव में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद को सुधारवादी नेता मीर होसैन मौसवी पर जीत मिली थी। सुधारवादी नेताओं ने दावा किया कि चुनाव में भारी पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इसके बाद लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। इसे &#039;ईरानी ग्रीन मूवमेंट&#039; का नाम दिया गया। यह दो साल तक चला, लेकिन ईरानी सरकार ने इसे बल प्रयोग करके दबा दिया था। कहा गया था कि इसके पीछ मुजतबा खामेनेई का दिमाग है। किसी पद पर नहीं थे मुजतबा, भाषण भी नहीं देते मुजतबा के सरकार में किसी पद पर न होने के बाद भी जरूरी फैसलों में लगातार उनकी भागीदारी बढ़ती देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक मुजतबा एक रहस्यमयी शख्स हैं। वह बहुत कम अवसरों पर नजर आते हैं। वे पिता की तरह सार्वजनिक भाषण नहीं देते। कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और दूसरी सरकारी एजेंसियों में मुजतबा के लोग बैठे हुए हैं। ईरान में इब्राहिम रईसी के राष्ट्रपति बनने के बाद मुजतबा का कद काफी बढ़ गया। मुजतबा को रईसी के उत्तराधिकारी यानी कि ईरान के राष्ट्रपति पद के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन रईसी की मौत के बाद इसमें बदलाव आ गया। ईरान में 5 सबसे ताकतवर लोग और संस्थाएं i. रहबर: ईरान में रहबर देश की सरकार, सेना, समाज और विदेश नीति पर फैसला करते हैं। वे सभी सेनाओं के कमांडर‑इन‑चीफ भी होते हैं। अब तक सिर्फ दो लोग इस पद पर आए हैं। खामेनेई 37 साल से रहबर थे। ईरान में रहबर, असेंबली, गार्डियन काउंसिल, राष्ट्रपति और संसद मिलकर देश चलाते हैं। लेकिन असली ताकत हमेशा रहबर के पास रहती है। ii. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स: इसमें 88 धर्मगुरु होते हैं। जनता हर 8 साल में इनके सदस्यों का चुनाव करती है। यह असेंबली रहबर को चुनती है और उनके काम पर नजर रखती है। अगर रहबर ठीक से काम न करें, तो उन्हें हटा भी सकती है। iii. राष्ट्रपति: राष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे ताकतवर नेता होता है। वे सरकार चलाते हैं और विदेश नीति में मदद करते हैं, लेकिन आखिरी फैसला हमेशा रहबर का होता है। राष्ट्रपति बनने के लिए गार्डियन काउंसिल की मंजूरी जरूरी होती है। iv. गार्डियन काउंसिल: इसमें 6 धर्मगुरु और 6 जज होते हैं। हर 6 साल में रहबर इन्हें चुनते हैं। यह काउंसिल संसद के बनाए कानूनों को रोक भी सकती है। v. संसद: इसमें 290 सदस्य होते हैं, जिन्हें जनता हर 4 साल में चुनती है। संसद कानून बनाती है, बजट पास करती है और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति या मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में जानिए… अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे। 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे। 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया। 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं। खामेनेई की 3 तस्वीरें… 37 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज थे खामेनेई आयतुल्ला अली खामेनेई 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज थे। ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 1981 में राष्ट्रपति बनाया गया। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया था। अहमद वाहिदी ईरान के नए आर्मी चीफ होंगे मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमद वाहिदी ईरान के नए आर्मी चीफ होंगे। अहमद वाहिदी ईरान के बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े रहे हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे IRGC में शामिल हुए। 1988 से 1998 तक वे कुद्स फोर्स के कमांडर रहे। कुद्स फोर्स ईरान की वह यूनिट है जो विदेशों में उसकी रणनीतिक और सैन्य गतिविधियां संभालती है। 2009 में उन्हें ईरान का रक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में ईरान ने मिसाइल और हथियार बनाने के अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। उनका नाम 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुए AMIA बम धमाके से भी जोड़ा गया। अर्जेंटीना ने उन पर आरोप लगाए और इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया था। इजराइली हमले में खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी की मौत ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी है। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर किए हमले में 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया। इजराइली हमले में ईरान रक्षा परिषद के सचिव और खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी की भी मौत हो गई है। इससे पहले (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर की भी मौत हो गई थी। ईरान-इजराइल के बीच विवाद न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से उसने कई बार उस पर पाबंदियां लगाईं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने और वैज्ञानिक रिसर्च के लिए है, हथियार बनाने के लिए नहीं। बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा: परमाणु समझौते की बातचीत में ईरान का मिसाइल प्रोग्राम सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। ईरान साफ कहता है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। वह इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है। इजराइल को लेकर टकराव: अमेरिका, इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक है। वहीं ईरान इजराइल का खुलकर विरोध करता है और उस पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाता है। मिडिल ईस्ट में दखल: अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में अपने समर्थक गुटों को मदद देकर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ईरान कहता है कि वह अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा कर रहा है। आर्थिक पाबंदियां: अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। इसके जवाब में ईरान भी कभी अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने या सख्त बयान देने जैसे कदम उठाता है। जानिए अब तक ट्रम्प ने ईरान को लेकर क्या कहा… --------------------------- ईरान-इजराइल जंग से जुड़ी दूसरी खबरें पढ़ें… अमेरिका-इजराइल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत: बेटी-दामाद, बहू-पोती भी मारी गईं; ईरान की सेना बोली- थोड़ी देर में सबसे खतरनाक हमला करेंगे अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की है। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका&#45;इजराइल जंग से क्या पेट्रोल&#45;डीजल महंगे होंगे:सोना&#45;चांदी के दाम बढ़ेंगे; समुद्री रूट बंद हुआ तो कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसका असर भारत के तेल, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग &#039;होर्मुज स्ट्रेट&#039; के बंद होने की आशंका है। इससे भारत को हर महीने होने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने का असर आम आदमी पर भी पड़ेगा… एनालिटिक्स फर्म केपलर के डेटा के मुताबिक, जनवरी-फरवरी 2026 में भारत ने अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगवाया है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई अचानक गिर जाएगी और कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। एक्सपर्ट बोले- 150 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को सिर्फ एक दिन के लिए भी ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। फिलहाल ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत $66 के करीब है। केपलर लिमिटेड की सीनियर क्रूड एनालिस्ट मुयू जू के मुताबिक, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करने की कोशिशों से सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाएगी। फरवरी में सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच तेल की कीमतें पहले ही 6 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं। ब्लूमबर्ग के विश्लेषण के अनुसार, अगर यह रूट असुरक्षित होता है, तो तेल टैंकरों को पश्चिमी नौसेना के संरक्षण में चलना पड़ेगा। इससे शिपमेंट की रफ्तार धीमी हो जाएगी। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा होर्मुज से गुजरता है होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है। होर्मुज बंद हुआ तो ईरान को भी नुकसान होगा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ईरान की अपनी इकोनॉमी भी तबाह हो सकती है क्योंकि वह खुद अपना तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। अगर सप्लाई बाधित होती है, तो चीन के साथ ईरान के रिश्ते बिगड़ सकते हैं। डेटा के मुताबिक, 2025 में ईरान ने इस रास्ते से 2018 के बाद सबसे ज्यादा तेल ट्रांसपोर्ट किया है। सऊदी अरब के पास &#039;ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन&#039; होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प के तौर पर सऊदी अरब के पास &#039;ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन&#039; है। यह 746 मील लंबी पाइपलाइन देश के एक छोर से दूसरे छोर (रेड सी टर्मिनल) तक जाती है। इसके जरिए रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल भेजा जा सकता है। भारत और अन्य एशियाई देश इस तरह के वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित भंडारों पर नजर बनाए हुए हैं। भारत दूसरे देशों से बढ़ा रहा तेल का इम्पोर्ट सरकार इस संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारत खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायर्स से तेल की खरीदारी बढ़ा रहा है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर भारत अपने &#039;स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व&#039; (SPR) से भी तेल निकाल सकता है। ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल जंग से क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे:सोना-चांदी के दाम बढ़ेगे; समुद्री रूट बंद हुआ तो कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट 
अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसके बाद ईरान में 40 दिन का शोक घोषित किया गया है। रविवार सुबह लोग सड़कों पर रोते और बिखलते नजर आए। सरकार से जवाबी कार्रवाई का नारा लगाते दिखे। पूरी खबर पढ़े… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका-इजराइल, जंग, से, क्या, पेट्रोल-डीजल, महंगे, होंगे:सोना-चांदी, के, दाम, बढ़ेंगे, समुद्री, रूट, बंद, हुआ, तो, कच्चे, तेल, की, सप्लाई, पर, संकट</media:keywords>
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<title>इजराइल&#45;ईरान जंग,दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन अटैक,बुर्ज खलीफा के पास धमाका:यहां फंसी इंडियन शटलर सिंधु बोलीं&#45; मेरे पास धमाका हुआ; श्रीनगर&#45;UP में विरोध प्रदर्शन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल का ईरान पर रविवार को लगातार दूसरे दिन हमला जारी है। आज सुबह ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत की पुष्टि भी हुई। जंग के बीच मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। एयरस्पेस बंद होने का असर दुबई से लेकर भारत तक दिखाई दे रहा है। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन टकराया है। घटना में 4 लोग घायल हुए हैं। एक दिन पहले बुर्ज खलीफा के पास भी ब्लास्ट हुआ। इसका वीडियो भी सामने आया है। भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु दुबई में फंसी हुई हैं। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- यहां हर घंटे हालात और डरावने होते जा रहे हैं। एयरपोर्ट पर जहां हम ठहरे थे, उसके करीब विस्फोट हुआ। हम वहां से भागे। सिंधु के अलावा एक्ट्रेस सोनल चौहान भी दुबई में हैं। उन्होंने X पोस्ट में पीएम मोदी से मदद मांगी है। एअर इंडिया ने आज 22 और इंटरनेशनल फ्लाइट रद्द कीं। एक दिन पहले 28 उड़ानें रद्द की गई थीं। एविएशन मिनिस्ट्री के मुताबिक भारतीय एयरलाइंस की 444 इंटरनेशनल फ्लाइट रद्द हो सकती हैं। एयरलाइन इंडिगो ने भी अपनी कुछ इंटरनेशनल फ्लाइट को 2 नंबर रात 11.59 तक सस्पेंड किया है। इधर, दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार दोपहर से हजारों यात्री अपनी फ्लाइट के इंतजार में हैं। कईयों ने दिल्ली और मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रात गुजारी। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और उत्तर प्रदेश के लखनऊ में खामेनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है। देखिए देश-दुनिया की 10 तस्वीरें… जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाएं… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प बोले&#45; क्यूबा आर्थिक तंगी से जुझ रहा, जल्द फ्रेंडली टेकओवर कर सकते है, बातचीत जारी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि क्यूबा सरकार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है और अमेरिका से बातचीत कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका क्यूबा का ‘फ्रेंडली टेकओवर’ कर सकता है, जिससे क्यूबन-अमेरिकियों को लाभ हो सकता है। व्हाइट हाउस से टेक्सास रवाना होते समय ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “क्यूबा सरकार हमसे बात कर रही है। वे बड़ी मुसीबत में हैं। उनके पास पैसा नहीं है, उनके पास कुछ भी नहीं है। लेकिन वे हमसे बातचीत कर रहे हैं और हो सकता है कि हमारा क्यूबा पर फ्रेंडली टेकओवर हो जाए।” हालांकि ट्रम्प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फ्रेंडली टेकओवर से उनका क्या मतलब है और दोनों देशों के बीच किस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि संभावित कदम अमेरिका में रहने वाले उन क्यूबाई मूल के लोगों के लिए सकारात्मक हो सकता है, जो दशकों पहले क्यूबा छोड़कर आए थे। उनके मुताबिक, ऐसे कई लोग क्यूबा लौटना चाहते हैं और मौजूदा बातचीत से संतुष्ट हैं। अमेरिका और क्यूबा के संबंध दशकों से राजनीतिक तनाव और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण जटिल रहे हैं। ट्रम्प की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह कई बार ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… यौन अपराधी से संबंध पर क्लिंटन बोले- अपराध से अनजान था, जानकारी होती तो एपस्टीन को पुलिस के हवाले करता पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने जेफ्री एपस्टीन मामले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। न्यूयॉर्क में हाउस ओवरसाइट कमेटी के सामने बंद कमरे में हुई गवाही में उन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की जानकारी नहीं थी। क्लिंटन ने अपने लिखित प्रारंभिक बयान में कहा कि अगर उन्हें एपस्टीन की गतिविधियों की जानकारी होती तो वे उससे दूरी बना लेते और खुद ही पुलिस के हवाले कर देते। उन्होंने कहा कि वे एपस्टीन के अपराधों से अनजान थे और दो दशक पहले ही उससे संबंध खत्म कर चुके थे। गवाही के दौरान एक तस्वीर पर भी सवाल हुआ, जिसमें क्लिंटन एक अज्ञात महिला के साथ हॉट टब में दिखाई देते हैं। महिला की पहचान गोपनीय रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक क्लिंटन ने कहा कि वे उस महिला को नहीं जानते और उनके साथ किसी तरह का यौन संबंध नहीं था। एक दिन पहले पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने भी कमेटी के सामने बयान दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। दोनों ने शुरुआत में गवाही देने का विरोध किया था। हालांकि, संसद की अवमानना की कार्रवाई की संभावना के बाद उन्होंने गवाही देने पर सहमति दी। रिपब्लिकन चेयरमैन जेम्स कोमर ने कहा कि वीडियो व पूरी ट्रांसक्रिप्ट जल्द जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लिंटन ने हर सवाल का जवाब दिया या देने की कोशिश की। गवाही के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और एपस्टीन के संबंधों पर भी सवाल उठे। डेमोक्रेट सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा कि क्लिंटन की गवाही में ट्रम्प से जुड़े तथ्य सामने आए हैं, जिन पर पूछताछ होनी चाहिए। कोमर के मुताबिक क्लिंटन ने कहा कि ट्रम्प को बुलाना कमेटी का फैसला है और उन्हें ट्रम्प के किसी भी अपराध में शामिल होने की जानकारी नहीं है। कोमर ने कहा कि क्लिंटन 50 साल में संसद के सामने बयान देने वाले पहले राष्ट्रपति हैं। एपस्टीन पर नाबालिगों की तस्करी और यौन शोषण के आरोप थे। वह 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मृत पाया गया था। जारी दस्तावेजों में कई प्रभावशाली लोगों के नाम हैं, हालांकि दस्तावेजों में नाम आने मात्र से किसी के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होता। इटली में ट्राम पटरी से उतरी, दुकान की खिड़की से टकराई, 2 लोगों की मौत, 40 घायल इटली के मिलान शहर में शुक्रवार को एक ट्राम (रेल) पटरी से उतर गई और पास की दुकान की खिड़की से टकरा गई। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। स्थानीय दमकल विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि रेल पटरी से उतरने के बाद सीधे एक दुकान में जा घुसी। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय इमरजेंसी सेवाओं के मुताबिक मौके पर 13 एंबुलेंस भेजी गईं। नागरिक सुरक्षा टीमों ने घायलों की मदद के लिए वहां एक अस्थायी टेंट भी लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। मिलान परिवहन कंपनी एटीएम ने बयान जारी कर कहा कि हादसे में शामिल ट्राम शहर में चलने वाले नए मॉडलों में से एक थी। कंपनी ने घटना पर गहरा दुख जताया और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। एटीएम ने कहा कि हादसे के कारणों की जांच के लिए वह संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है। फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों की जांच जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 12:23:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बोलिविया में करेंसी से भरा प्लेन क्रैश, 15 की मौत:30 घायल, खराब मौसम के कारण रनवे से फिसला; हाईवे पर बिखरे नोट उठाने जुटे लोग</title>
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<description><![CDATA[ बोलिविया के एल आल्टो शहर में शनिवार सुबह (भारतीय समयानुसार) एक विमान क्रैश हो गया। यह बोलिविया की वायुसेना का हरक्यूलिस विमान था। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हैं। विमान देश के सेंट्रल बैंक के नए नोट लेकर जा रहा था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खराब मौसम के बीच विमान लैंडिंग के बाद रनवे से फिसलकर पास की व्यस्त सड़क पर जा गिरा। जिस सड़क पर यह गिरा, वहां खड़ी 10 से 15 गाड़ियां भी इसके चपेट में आ गई। एयरक्राफ्ट का मलबा, टूटी हुई कारें और लाशें सड़क पर बिखरी नजर आई। सड़क पर बैंक के नोट भी बिखरे नजर आए, जिन्हें उठाने के लिए लोग मौके पर जुट गए। हादसे के बाद एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। हादसे की तस्वीरें… दो टुकड़ों में बंटा प्लेन सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में हादसे के बाद अफरातफरी का माहौल दिखा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि, इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। हादसे के बाद एल आल्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। राष्ट्रीय एयरलाइन ने बयान जारी कर बताया कि दुर्घटनाग्रस्त प्लेन उसके बेड़े का हिस्सा नहीं था, यह बोलिवियन एयर फोर्स का विमान था। स्थानीय मीडिया में प्रसारित फुटेज में विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त दिखा। हादसे के बाद प्लेन दो टुकड़ों में बंट गया। बोलिविया का सेंट्रल बैंक आज इस घटना पर प्रेस ब्रीफिंग करने वाला है। हादसे के कारणों की आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पतालों में जारी है। प्रशासन ने मृतकों की पहचान और नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में बर्फीले तूफान से 11 हजार फ्लाइट रद्द:5 लाख घरों की बिजली गुल, 153 साल में पहली बार अखबार नहीं छप सका अमेरिका में भीषण तेज हवाओं और भारी बर्फबारी के कारण एयरपोर्ट पर रनवे बंद करने पड़े और कई जगह उड़ानों पर रोक लगानी पड़ी है। यहां रविवार से मंगलवार के बीच 11,055 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर हमला किया:आसमान में धुंए का गुबार; अमेरिका से बातचीत के बीच अटैक</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया है। भारतीय समय के मुताबिक शनिवार सुबह हुए इस हमले के बाद शहरों में धुएं का गुबार नजर आ रहा है। इजराइल डिफेंस फोर्स ने ईरान पर हमले की जानकारी देते हुए इसे ‘प्रिवेंटिव अटैक’ बताया है। तेहरान समेत कई शहरों में धमाके सुने गए हैं और हवाई हमलों के सायरन बज रहे हैं। हमले के बाद ईरान ने सभी उड़ानें रोक दी हैं और एयरस्पेस पूरी तरह खाली करा लिया गया है। इधर इजराइल में भी एयर अटैक सायरन सुनाई दे रहे हैं। संवेदनशील इलाकों को खाली कराया जा रहा है। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। हमले की तस्वीरें… अमेरिका ने हमले की धमकी दी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी सेना पहले ही ईरान को चारों तरफ से घेर चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत इजरायल छोड़ने के लिए कहा था। इजराइल के ईरान पर हमले से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 12:23:45 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:किम जोंग&#45;उन की साउथ कोरिया को चेतावनी, बोले&#45; खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे</title>
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<description><![CDATA[ नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने साउथ कोरिया को कड़ी चेतावनी दी है। किम ने कहा है कि उनके देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो वे साउथ कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर सकते हैं। प्योंगयांग में सात दिन चली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस के समापन पर किम ने अगले पांच वर्षों के लिए परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज करने का खाका पेश किया। उन्होंने पानी के भीतर से दागे जा सकने वाले इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, सामरिक परमाणु हथियारों के विस्तार, परमाणु-संचालित पनडुब्बी, एआई-युक्त ड्रोन और उन्नत उपग्रह विकसित करने की बात कही। किम ने साउथ कोरिया को ‘स्थायी दुश्मन’ बताते हुए कहा कि उससे बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। वहीं, उन्होंने कहा कि अमेरिका यदि प्रतिबंध और दबाव की नीति छोड़े तो संवाद संभव है। कांग्रेस के बाद राजधानी में भव्य सैन्य परेड आयोजित की गई, जिसमें किम अपनी बेटी के साथ नजर आए। हालांकि परेड में अमेरिका तक मार करने में सक्षम बड़े ICBM प्रदर्शित नहीं किए गए एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम एक ओर अपने परमाणु कार्यक्रम को मजबूती दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ भविष्य की संभावित बातचीत के लिए विकल्प भी खुले रख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर हमला, दावा- 55 सैनिकों की मौत:19 चौकियों पर कब्जा; PAK ने भी काबुल-कंधार में एयरस्ट्राइक की, कहा- 133 लड़ाके मारे अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर गुरुवार देर रात हमला किया। कुनार प्रांत में तालिबान लड़ाकों के हमले में पाकिस्तानी सेना के 55 सैनिक मारे गए। यह जानकारी टोलो न्यूज ने तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद के हवाले से दी। अफगान सरकार का दावा है कि 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव उनके पास हैं। पाकिस्तानी सेना के एक हेडक्वॉर्टर और 19 चौकियों पर भी कब्जा कर लिया गया है। अफगानिस्तान के डिप्टी स्पोक्सपर्सन हमदुल्ला फितरत ने कहा कि कुछ पाकिस्तानी सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया गया, जबकि कई हथियार, एक टैंक और एक हार्वेस्टर जब्त किया गया है। वहीं, पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक जवाबी कार्रवाई करते हुए PAK सरकार ने ऑपरेशन &#039;गजब लिल हक&#039; शुरू किया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने काबुल, नंगरहार प्रांत समेत कई शहरों में एयरस्ट्राइक की। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के हमले अभी भी जारी हैं। पाकिस्तान सरकार का दावा है कि अब तक 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हैं। 27 तालिबान चौकियां तबाह कर दी गई हैं और 9 पर कब्जा कर लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… आरोप- बांग्लादेश सरकार ने डिफाल्टर को सेंट्रल बैंक गवर्नर बनाया:विपक्ष बोला- ये बर्दाश्त नहीं कर सकते, देश में भीड़तंत्र चल रहा बांग्लादेश में सेंट्रल बैंक के नए गवर्नर की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि तारिक रहमान की सरकार ने एक डिफाल्टर को कारोबारी को सेंट्रल बैंक गवर्नर बना दिया है, जो देश में भीड़तंत्र की शुरुआत जैसा है। बांग्लादेश बैंक के नए गवर्नर के रूप में मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया। जमात ए इस्लामी के प्रमुख और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने कहा कि यह फैसला पीएम की शह पर लिया गया है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने अहसान हबीब मंसूर का कार्यकाल अचानक खत्म कर दिया था, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था। मंसूर ने कहा कि उन्होंने न इस्तीफा दिया और न ही उन्हें हटाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना मिली। उन्हें यह खबर मीडिया के जरिए पता चली। पूरी खबर यहां पढ़ें… कनाडाई PM आज 4 दिन के दौरे पर भारत पहुंचेंगे: निवेश-ट्रेड डील पर फोकस; कनाडाई अफसर बोले- कनाडा में अपराधों से भारत का लेना-देना नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज 4 दिन के दौरे पर भारत पर पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मकसद भारत और कनाडा के बीच व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस करना है। प्रधानमंत्री के तौर पर मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा है। कनाडा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कार्नी मुंबई में बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे। इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश पर चर्चा होगी। कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा के अधिकारी अब भारत पर लगाए गए कुछ गंभीर आरोपों से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। पहले कनाडा ने आरोप लगाया था कि भारत उसकी जमीन पर हस्तक्षेप कर रहा है और सीमापार दबाव जैसी गतिविधियों में शामिल है। सीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने कहा कि अगर कनाडा को लगता कि भारत उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल दे रहा है, तो प्रधानमंत्री भारत की यात्रा नहीं करते। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:43:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>आरोप&#45; बांग्लादेश सरकार ने डिफाल्टर को सेंट्रल बैंक गवर्नर बनाया:विपक्ष बोला&#45; ये बर्दाश्त नहीं कर सकते, देश में भीड़तंत्र चल रहा</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में सेंट्रल बैंक के नए गवर्नर की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि तारिक रहमान की सरकार ने एक डिफाल्टर को कारोबारी को सेंट्रल बैंक गवर्नर बना दिया है, जो देश में भीड़तंत्र की शुरुआत जैसा है। बांग्लादेश बैंक के नए गवर्नर के रूप में मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया। जमात ए इस्लामी के प्रमुख और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने कहा कि यह फैसला पीएम की शह पर लिया गया है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने अहसान हबीब मंसूर का कार्यकाल अचानक खत्म कर दिया था, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था। मंसूर ने कहा कि उन्होंने न इस्तीफा दिया और न ही उन्हें हटाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना मिली। उन्हें यह खबर मीडिया के जरिए पता चली। गारमेंट कारोबारी रहे हैं मोस्ताकुर रहमान मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति इसलिए अलग मानी जा रही है क्योंकि अब तक बांग्लादेश में केंद्रीय बैंक का गवर्नर आमतौर पर अनुभवी बैंकर, अर्थशास्त्री या वरिष्ठ सिविल सेवक होते रहे हैं। मोस्ताकुर एक कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट और गारमेंट कारोबारी हैं। वे हेरा स्वेटर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और हालिया चुनाव में तारिक रहमान की BNP पार्टी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति से भी जुड़े रहे थे। उनकी नियुक्ति को लेकर कर्ज चुकाने से जुड़े पुराने मामलों पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीडी न्यूज24 की रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी कंपनी 86 करोड़ टका का कर्ज समय पर नहीं चुका पाई थी। एक बैंक अधिकारी ने कहा कि जो इंसान अपनी ही कंपनी के लिए स्पेशल कंडीशन पर कर्ज का पुनर्गठन कराता है, वह देश के बैंकिंग सिस्टम के हितों की रक्षा कैसे करेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ ढाका के पूर्व प्रोफेसर दीन इस्लाम ने भी कहा कि किसी एक्टिव कारोबारी को केंद्रीय बैंक का गवर्नर बनाना गलत संदेश देता है और इससे हितों के टकराव की आशंका बढ़ती है। विपक्ष ने मोस्तकुर को गवर्नर बनाने पर विरोध जताया मोस्ताकुर की नियुक्ति के बाद विपक्षी नेता शफीकुर रहमान ने फेसबुक पर लिखा कि बांग्लादेश बैंक में जो हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि किसी को भी गवर्नर और उनके सलाहकारों जैसे सम्मानित लोगों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से कई समस्याओं से जूझ रही है, तब बांग्लादेश बैंक जैसी महत्वपूर्ण संस्था में इस तरह की कार्रवाई बची हुई अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद कर देगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों से विरोध करने की अपील की और कहा कि अगर सरकार सच में लोकतांत्रिक और भेदभाव-रहित बांग्लादेश बनाना चाहती है तो ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद होनी चाहिए। जरूरी पदों पर नियुक्तियां योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक निष्ठा के आधार पर। अहसान हबीब को गवर्नर पद से हटाने का विरोध विवाद की दूसरी बड़ी वजह उनकी नियुक्ति की परिस्थितियां हैं। अहसान हबीब मंसूर 2024 में चार साल के लिए गवर्नर बनाया गया था और उनका कार्यकाल अगस्त 2028 तक था, लेकिन 18 महीने से भी कम समय में ही उनका कार्यकाल खत्म कर दिया गया। मंसूर को हटाए जाने से पहले कुछ अधिकारियों ने उनके खिलाफ तानाशाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, मंसूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को साजिश बताया था। अहसान हबीब मंसूर की बर्खास्तगी से देश में कई लोग हैरान हैं। उन्हें 27 साल का अनुभव है। वे IMF जैसी संस्थाओं में काम कर चुके हैं। 2024 में शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार के हटने के बाद जब देश में आर्थिक अस्थिरता थी, तब उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी। जब उन्होंने पद संभाला था तब फॉरेंन करेंसी रिजर्व 26 अरब डॉलर था। उनके पद छोड़ने तक यह बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया।  उन्होंने टका को 122.20 प्रति डॉलर पर स्थिर किया और महंगाई दर को 2024 के 10.49% से घटाकर जनवरी 2026 में 8.58% तक लाने के लिए पॉलिसी अपनाईं। ढाका स्थित HSBC के डायरेक्टर शाहीर चौधरी ने लिखा कि मंसूर ने बहुत कठिन समय में जिम्मेदारी संभाली, जब बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कमजोर था और 18 महीनों में हालात में सुधार आया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव और रिकॉर्ड वाले इंसान को कार्यकाल पूरा करने का मौका न देना निराशाजनक है। वहीं NCP नेता नाहिद इस्लाम ने भी फेसबुक पर लिखा कि मंसूर को हटाकर सरकार ने फाइनेंशियल सेक्टर में लूट का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि मंसूर ने पद संभालने के बाद फाइनेंशियल सेक्टर में अनुशासन बहाल करने में काफी सफलता हासिल की थी और मोस्ताकुर जैसे कारोबारी के हाथों में देश की सर्वोच्च बैंकिंग संस्था सुरक्षित नहीं रह सकती। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:43:47 +0530</pubDate>
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<title>सरबजीत कौर के खिलाफ पक्ष रखने वाले वकील को सम्मान:IHRC के को&#45;चेयरमैन बने अली चंगेजी, प्रो बोनो सेवाओं से बनाई अलग पहचान</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के लाहौर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरबजीत कौर मामले में खिलाफ पक्ष रखने वाले वकील एडवोकेट अली चंगेजी संधू को वर्ष 2026 के लिए इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (IHRC) का को-चेयरमैन नियुक्त किया। यह नियुक्ति 24 सितंबर 2025 से प्रभावी मानी गई है। यह सम्मान उन्हें सरबजीत कौर से संबंधित मामलों में उनके असाधारण और साहसिक कानूनी योगदान के कारण प्रदान किया गया। एडवोकेट संधू ने पाकिस्तान में कानून के शासन को मजबूत करने, सिख समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने और दोनों पंजाबों के बीच आपसी सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने न केवल मानवाधिकारों की रक्षा की बल्कि सामाजिक समरसता को भी नई दिशा दी। प्रो बोनो सेवाओं से बनाई अलग पहचान संधू लॉ फर्म इंटरनेशनल के सीईओ के रूप में उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मामलों में प्रो बोनो सेवाएं प्रदान कीं, जो उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती हैं। मानव तस्करी, रेप, महिला अधिकार, पशु अधिकार और अन्य उच्च-प्रोफाइल मामलों में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है। नियुक्ति पत्र का औपचारिक सम्मान लाहौर हाई कोर्ट के सचिव फरुख इलियास चीमा और एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट उसामा राठौर ने उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान किया। यह सम्मान उनके मानवीय और पेशेवर योगदान की आधिकारिक स्वीकृति है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:43:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ब्रिटेन में एंट्री के लिए डिजिटल परमिट जरूरी, 85 देशों के यात्रियों को ₹1970 में प्री&#45;ट्रैवल परमिट लेना होगा</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन ने 85 देशों से आने वाले यात्रियों के लिए बुधवार से इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) जरूरी कर दिया है। इस नियम के तहत बिना वैध ETA, ई-वीजा या अन्य जरूरी दस्तावेज के यात्रियों को एयरलाइंस बोर्डिंग की अनुमति नहीं देंगी। ETA योजना 2023 में शुरू की गई थी। इसके तहत जिन यात्रियों को वीजा की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें यात्रा से पहले ऑनलाइन आवेदन कर 16 ब्रिटिश पाउंड (करीब 1970 रुपए) शुल्क देकर प्री-ट्रैवल परमिट लेना होगा। ETA एक डिजिटल एंट्री परमिट है जो उन विदेशी यात्रियों के लिए जरूरी होता है, जिन्हें वीजा की जरुरत नही होती। यह पासपोर्ट से इलेक्ट्रोनिक रूप से जुड़ा होता है और यात्री की सुरक्षा जाचं के लिए यूज किया जाता है। वहीं ई-वीजा डिजिटल वीजा होता है जो पासपोर्ट पर लगने वाले कागजी वीजा स्टिकर की जगह लेगी। अप्रैल 2024 में इसे यूरोपीय यात्रियों तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब तक सख्त अमल नहीं हो रहा था। 25 फरवरी से यह पूरी तरह लागू हो गया है। यह नई व्यवस्था पुराने पासपोर्ट पर लगने वाले कागजी वीजा स्टिकर की जगह लेगी। ब्रिटिश और आयरिश नागरिकों, दोहरी नागरिकता रखने वालों और ब्रिटेन में रहने का अधिकार रखने वालों को इस नियम से छूट दी गई है। ब्रिटेन के माइग्रेशन और सिटिजनशिप मिनिस्टर माइक टैप ने कहा कि यह कदम सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और प्रणाली को अधिक आधुनिक बनाने के लिए उठाया गया है। ब्रिटेन के माइग्रेशन मंत्री माइक टैप ने कहा कि ETA स्कीम देश की सीमा सुरक्षा को मजबूत करने का अहम हिस्सा है। उनके अनुसार, इससे एंट्री सिस्टम अधिक आधुनिक और प्रभावी बनेगा, जिससे यात्रियों और ब्रिटिश नागरिकों दोनों को लाभ होगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:59:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले&#45; ईरान आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़:सनकी और क्रूर शासन को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वॉरशिप और सैनिकों की तैनाती के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कूटनीति को कमजोरी न समझा जाए और जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प भी इस्तेमाल होगा। वेंस ने कहा कि सैन्य कार्रवाई की धमकियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। फॉक्स न्यूज से बातचीत में वेंस ने कहा- हमें ऐसी स्थिति में पहुंचना होगा जहां ईरान, जो दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ है, परमाणु आतंकवाद से दुनिया को धमकी न दे सके। सनकी, क्रूर और दुनिया के सबसे खतरनाक शासन को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन उनके पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं और वे उनका इस्तेमाल करने की इच्छा दिखा चुके हैं। ट्रम्प ने बुधवार को संसद में अपने संबोधन के दौरान आरोप लगाया था कि ईरान अमेरिका तक मार करने में सक्षम मिसाइलें विकसित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पिछले साल अमेरिकी हमलों के बाद अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। वेंस बोले- बातचीत का अंतिम फैसला ट्रम्प के हाथ में है जब वेंस से पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता को हटाना भी अमेरिका का लक्ष्य है, तो उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। वेंस ने कहा कि बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प करेंगे। उन्होंने कहा- हम कोशिश जारी रखेंगे। लेकिन राष्ट्रपति के पास यह अधिकार है कि वे तय करें कि कूटनीति अपनी सीमा तक पहुंच गई है या नहीं। हमें उम्मीद है कि इस बार बातचीत बुरे अंजाम तक नहीं पहुंचेगी, लेकिन अगर पहुंचती है तो फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान अगले दो हफ्तों में ज्यादा बड़ा प्रस्ताव देगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम किए जा सकें। ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे दौर की बातचीत आज यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के अधिकारी गुरुवार यानी आज जिनेवा में तीसरे दौर की बातचीत करेंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची अपनी टीम के साथ जिनेवा पहुंच चुके हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ करेंगे। वॉशिंगटन इस बीच ‘मैक्सिमम प्रेशर’ अभियान के तहत नए प्रतिबंधों की भी तैयारी कर रहा है। ईरान ने जिनेवा वार्ता से पहले अमेरिकी दबाव की रणनीति को खारिज किया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रम्प के बयानों को झूठ बताया और उन पर दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया। ट्रम्प ने कई बार चेतावनी दी है कि वार्ता विफल होने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। क्षेत्रीय देशों को आशंका है कि ऐसा कदम संघर्ष को जन्म दे सकता है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि किसी भी हमले की स्थिति में मिडिल ईस्ट में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे उसके निशाने पर होंगे। इससे क्षेत्र में तैनात हजारों अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट पहुंचे अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पिछले हफ्ते 50 से ज्यादा फाइटर जेट भेजे। इंडिपेंडेंट फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और मिलिट्री एविएशन मॉनिटर्स ने कई F-22, F-35 और F-16 फाइटर जेट को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया गया। इन विमानों में से कुछ मिडिल ईस्ट में उतर चुके हैं। खासकर इजराइल के एयरबेस बेन गुरियन और ओवडा) पर, जहां अमेरिकी F-22 जेट को देखा गया और वहां लैंड करते हुए रिपोर्ट किया गया। यह जानकारी अमेरिका और ईरान के बीच 16 फरवरी को जिनेवा में हुई दूसरी दौर की बातचीत के दौरान सामने आई थी। दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय की गई शर्तों को ईरान मानने को तैयार नहीं है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि बातचीत के कुछ हिस्से सकारात्मक रहे, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बनी है। इन बयानों से साफ है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत अभी भी नाजुक दौर में है। अमेरिका ने रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट भेजे अमेरिकी फाइटर जेट्स के साथ कई एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी मिडिल ईस्ट की ओर भेजे हैं। इससे संकेत मिलता है कि विमान लंबे समय तक ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इस बीच, अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि USS जेराल्ड आर. फोर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा कि फोर्ड के साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, USS माहान, USS बैनब्रिज और USS विन्सटन चर्चिल भी हैं। इससे पहले USS अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी एयर और नेवल एसेट्स भी इस साल की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किए जा चुके हैं। इससे अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। F-35 और F-16 फाइटर जेट के बारे में जानिए… ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। ईरानी विदेश मंत्री बोले थे- हमला हुआ तो इसका असर दूसरों पर भी पड़ेगा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका के साथ हुए दूसरे दौर की बातचीत को सकारात्मक बताया था। अरागची ने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में नई खिड़की खुली है। बातचीत के बाद संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में अरागची ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि बातचीत से टिकाऊ और सहमति वाला समाधान निकलेगा, जो सभी संबंधित पक्षों और पूरे क्षेत्र के हित में होगा।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी खतरे या हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसके नतीजे अकेले वह नहीं भुगतेंगे, बल्कि दूसरों पर भी इसका असर पड़ेगा। ----------------------- ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:59:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिकी, उपराष्ट्रपति, बोले-, ईरान, आतंकवाद, का, सबसे, बड़ा, गढ़:सनकी, और, क्रूर, शासन, को, परमाणु, हथियार, रखने, की, अनुमति, नहीं, दे, सकते</media:keywords>
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<title>इजराइल में मोदी&#45;नरसंहार में मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि देंगे:इजराइली राष्ट्रपति और पीएम से मिलेंगे, दोनों देशों में डिफेंस डील संभव</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का आज दूसरा दिन है। दिन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी येरुशलम स्थित होलोकॉस्ट के स्मारक ‘याद वाशेम’ में मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वह इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे, जहां द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा होगी। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है। दोपहर से पहले प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और एडवांस टेक्नीक के सेक्टर में साझेदारी पर फोकस रहने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिन के इजराइल दौरे पर पहुंचे थे। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को भी संबोधित किया। उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया गया। मोदी नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। हिटलर के शासन में मारे गए यहूदियों की याद में बना ‘यद वाशेम’ स्मारक याद वाशेम होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक इजराइल की राजधानी येरुशलम में स्थित है और हर साल दुनिया भर से लोग यहां आकर इतिहास को समझते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी। इस नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इजराइल की संसद नेसेट ने साल 1953 में फैसला किया कि होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों की याद में एक खास स्मारक बनाया जाए। बाद में 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय खोला गया, ताकि आने वाली पीढियां इस त्रासदी को समझ सकें। याद वाशेम परिसर में होलोकॉस्ट संग्रहालय, हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक और राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन जैसी जगहें मौजूद हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीडितों की व्यक्तिगत कहानियां सुरक्षित रखी गई हैं। याद वाशेम नाम का अर्थ है याद और नाम, यानी जिन लोगों को मिटाने की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे। 26 फरवरी को पीएम मोदी का शेड्यूल (स्थानीय समयानुसार)...

सुबह करीब 9 बजे: पीएम मोदी याद वाशेम होलोकॉस्ट मेमोरियल जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। (भारतीय समयानुसार- दोपहर 12:30 बजे)

सुबह करीब 10:30 बजे: इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से औपचारिक मुलाकात और द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। (भारतीय समयानुसार- दोपहर 2 बजे)

सुबह 11:30 से दोपहर 12:30 बजे: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक होगी। (भारतीय समयानुसार- शाम 4 बजे)

दोपहर करीब 12:45 बजे: भारत-इजराइल के बीच समझौतों पर हस्ताक्षर और संयुक्त प्रेस बयान जारी किया जाएगा।(भारतीय समयानुसार- शाम 4:15 बजे)

दोपहर करीब 1:15 बजे: आधिकारिक कार्यक्रम समाप्त कर पीएम मोदी भारत के लिए रवाना होंगे। (भारतीय समयानुसार- शाम 4:45 बजे) किन मुद्दों पर चर्चा हो सकती है बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। व्यापार और इन्वेस्टमेंट को आगे बढ़ाने पर चर्चा भी होगी। वार्ता के बाद कुछ अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। रक्षा और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में नए करार भारत की आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया पहल को मजबूती दे सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यक्रम के दौरान इजराइल में बसे भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात को सांस्कृतिक रिश्तों और लोगों के बीच जुडाव मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दिनभर के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री भारत के लिए रवाना हो जाएंगे। भारत-इजराइल में FTA पर बातचीत जारी मोदी का यह दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ है और यह 26 फरवरी 2026 तक चलेगा। नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए थे, जिससे यह तय हुआ कि किन मुद्दों पर बातचीत होगी और कैसे आगे बढ़ा जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल सामान का व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 31 हजार करोड़ रुपए रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद हैं। यह एफटीए दोनों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा और कारोबारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा भरोसा और स्थिरता देगा। इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें गुड्स एंड सर्विसेज का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजन, हेल्थ और पौधों से जुड़े नियम, व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रोसेस, व्यापार को आसान बनाने के उपाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत-इजराइल के बीच ड्रोन डील संभव PM मोदी आज इजराइली प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत और इजराइल के बीच ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग समेत कई बड़े रक्षा समझौतों पर सहमति बन सकती है। फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक 2026 में दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता संभव है। इसमें प्रिसीजन गाइडेड बम और मिसाइल सिस्टम के साथ एडवांस ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत हैरोन MK-2 MALE ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है। यह ड्रोन 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है, 470 किलोग्राम भार उठा सकता है और 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), व्यापार और निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में जैसे मुद्दों पर भी बातचीत संभव हैं। हालांकि संभावित समझौतों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आयरन डोम डिफेंस सिस्टम पर भी बात हो सकती है इजराइल भारत के साथ अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है। यह जानकारी मुंबई में IANS को दिए इंटरव्यू में इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एजेंडे में आयरन डोम को लेकर बातचीत भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इजराइल इस टेक्नोलॉजी को भारत के साथ शेयर करने के लिए है। रेवाच ने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंध है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए भारत में सैन्य उपकरणों के निर्माण पर फोकस किया जाएगा। दौरे के पहले दिन को जानिए… एयरपोर्ट पर नेतन्याहू-मोदी ने प्राइवेट बातचीत की मोदी को रिसीव करने के दौरान 25 फरवरी को एयरपोर्ट पर ही मोदी और नेतन्याहू ने राजधानी तेल अवीव में प्राइवेट बातचीत भी की। इसके बाद वे होटल पहुंचे जहां, प्रवासी भारतीयों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान कलाकारों ने परफॉर्मेंस भी दी। मोदी का यह 9 साल बाद दूसरा इजराइल दौरा है। इससे पहले वे जुलाई 2017 में तेल अवीव गए थे। मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें… नेतन्याहू के संबोधन की 2 बड़ी बातें… तस्वीरों में कल का दौरा… मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठे मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग को लेकर विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने सवाल उठाए हैं। यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका की सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को समिति की बैठक में कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि जब भारत ने अपने नागरिकों को संभावित अमेरिकी हमले के खतरे के कारण ईरान छोड़ने की सलाह दी है, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इजराइल जाना कितना उचित है। इस पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सभी प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि तनाव बढ़ने पर दौरा रद्द होगा या नहीं। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष शशि थरूर ने की थी। कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार विदेश नीति में अमेरिका के प्रभाव को ज्यादा महत्व दे रही है और इससे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। मोदी इजराइल जाने वाले एकमात्र भारतीय PM मोदी इजराइल का दौरा करने वाले अब तक एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं। 70 साल तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा नहीं की थी। 2017 में मोदी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया और दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की। भारत ने 1950 में इजराइल को मान्यता दी, 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा नहीं हुई। इसकी एक बड़ी वजह भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन-समर्थक नीति रही। जुलाई 2017 में मोदी की पहली यात्रा को ‘पाथ-ब्रेकिंग’ कहा गया। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर्स में समझौते हुए। कभी इजराइल बनने के खिलाफ था भारत भारत और इजराइल के संबंधों में भले ही आज गर्मजोशी देखी जाती है, लेकिन शुरुआत में भारत इजराइल बनने के ही खिलाफ था। भारत नहीं चाहता था कि फिलिस्तीन को बांटकर इजराइल बनाया जाए। महात्मा गांधी ने 1938 में अपने साप्ताहिक पत्र हरिजन में लिखा कि फिलिस्तीन उतना ही अरबों का है जितना इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का। उन्होंने यहूदियों के साथ हो रहे जर्मन अत्याचारों पर सहानुभूति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि किसी पीड़ित समुदाय की समस्या का समाधान दूसरे समुदाय की जमीन पर उन्हें बसाकर नहीं किया जा सकता। 1947 में जब संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों यहूदी राज्य (इजराइल) और अरब राज्य (फिलिस्तीन) में बांटने का प्रस्ताव रखा, तब भारत ने इसका विरोध किया। भारत का मानना था कि यह विभाजन बाहरी दबाव में किया जा रहा है और इससे स्थायी शांति नहीं आएगी। स्वतंत्रता के बाद भी भारत अपने रुख पर कायम रहा। 1949 में जब इजराइल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर मतदान हुआ, तो भारत ने उसके खिलाफ वोट दिया। इस दौर की नीति ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी। यही कारण है कि शुरुआती दशकों में भारत ने खुद को फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थक और पश्चिम एशिया की राजनीति में संतुलन बनाने वाले देश के रूप में स्थापित किया। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मोदी को इजराइली संसद का सर्वोच्च सम्मान:PM ने हमास हमले की निंदा की, कहा- आपका दर्द समझते हैं; नेतन्याहू बोले- मोदी एशिया के शेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिन के इजराइल दौरे पर पहुंचे। इस दौरान इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 11:59:00 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला, 2 पुलिसकर्मी की मौत, एक दिन में अलग&#45;अलग हमलों में 7 जाने गईं</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में मंगलवार को अलग-अलग हमलों में 7 पुलिसकर्मियों की जान चली गई। अधिकारियों ने बताया कि पंजाब प्रांत के भक्कर जिले में एक सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला हुआ। पंजाब पुलिस प्रमुख अब्दुल करीम के मुताबिक इस हमले में 2 पुलिसकर्मी मारे गए। इस धमाके में 3 आम लोग भी घायल हुए, जिनमें पोलियो रोधी अभियान से जुड़े 2 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। इसी दिन इससे पहले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट इलाके में उग्रवादियों ने एक पुलिस गाड़ी पर हमला किया। आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि इस हमले में 5 पुलिसकर्मी, जिनमें एक वरिष्ठ अधिकारी भी थे और 2 नागरिक मारे गए। कोहाट के जिला पुलिस अधिकारी शेहबाज इलाही ने बताया कि इस हमले में 3 अन्य लोग घायल भी हुए। पिछले एक हफ्ते में खैबर पख्तूनख्वा और दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में उग्रवादियों के खिलाफ झड़पों और सुरक्षा अभियानों के दौरान कम से कम 16 सुरक्षाकर्मी, जिनमें एक सीनियर सेना अधिकारी भी शामिल थे, मारे गए हैं। सेना के मुताबिक इन अभियानों और हमलों में 53 उग्रवादी भी मारे गए। हाल के सालों में पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाएं बढ़ी हैं। खास तौर पर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों, पुलिस और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:59:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका में बर्फीले तूफान से 11 हजार फ्लाइट रद्द:5 लाख घरों की बिजली गुल, 153 साल में पहली बार अखबार नहीं छप सका</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में भीषण तेज हवाओं और भारी बर्फबारी के कारण एयरपोर्ट पर रनवे बंद करने पड़े और कई जगह उड़ानों पर रोक लगानी पड़ी है। यहां रविवार से मंगलवार के बीच 11,055 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। सिर्फ सोमवार को ही करीब 5,600 से 5,700 उड़ानें कैंसिल हुईं, जो देशभर की उड़ानों का लगभग 20% था। यह जानकारी फ्लाइट ट्रैकिंग कंपनी फ्लाइटअवेयर ने दी। नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक, रोड आइलैंड और मैसाचुसेट्स के कुछ हिस्सों में लगभग 37 इंच तक बर्फ गिरी। बर्फबारी की वजह से उत्तर-पूर्वी राज्यों में 6 लाख से ज्यादा घरों की बिजली चली गई। सोमवार शाम तक 5 लाख 19 हजार 232 घर और ऑफिस बिना बिजली के थे। भारी बर्फबारी के कारण द बोस्टन ग्लोब अपने 153 साल के इतिहास में पहली बार अखबार नहीं छाप सका क्योंकि कर्मचारी प्रिंटिंग प्रेस तक नहीं पहुंच पाए। बर्फबारी की 5 तस्वीरें… बर्फबारी से कई राज्यों में इमरजेंसी घोषित न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में रविवार से सोमवार के बीच करीब 20 इंच बर्फ दर्ज की गई, जबकि लॉन्ग आइलैंड के इस्लिप इलाके में 22 इंच से ज्यादा बर्फ पड़ी। प्रोविडेंस, रोड आइलैंड में 32.8 इंच बर्फबारी हुई, जिसने 1978 के पुराने रिकॉर्ड 28.6 इंच को तोड़ दिया। हालात इतने खराब हो गए कि कई राज्यों में इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। न्यूयॉर्क सिटी में स्कूलों, सड़कों, पुलों और हाईवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। बाद में हालात सुधरने पर मेयर जोहरान ममदानी ने यह आदेश हटा लिया और कहा कि स्कूल मंगलवार को खुलेंगे। वहीं मैसाचुसेट्स की गवर्नर मॉरा हीली ने कुछ इलाकों में ट्रैवल बैन लागू किया और लोगों से घर में रहने की अपील की। रोड आइलैंड के गवर्नर डैन मैकी ने भी पूरे राज्य में ट्रैवल बैन लगा दिया। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने भी पूरे राज्य में इमरजेंसी की घोषणा की और नेशनल गार्ड को अलर्ट पर रखा है। न्यूयॉर्क में ट्रेन सेवा भी सस्पेंड रही तूफान का असर सिर्फ सड़कों और हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। न्यूयॉर्क और बोस्टन के बीच ट्रेन सेवा सोमवार रात तक सस्पेंड रही। थिएटर ब्रॉडवे के सभी शो रविवार शाम रद्द कर दिए गए। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह पिछले लगभग एक दशक का सबसे शक्तिशाली नॉरईस्टर तूफान है। कई इलाकों में प्रति घंटे 2 से 3 इंच तक बर्फ गिरने की चेतावनी दी गई है और हवा की रफ्तार कुछ जगह 110 मील प्रति घंटे तक पहुंच गई। नॉरईस्टर एक तरह का तेज तूफान होता है जो अमेरिका के पूर्वी तट पर आता है। इसे नॉरईस्टर इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें हवाएं आमतौर पर उत्तर-पूर्व (नॉर्थ-ईस्ट) दिशा से चलती हैं। गर्म और नम हवा मिलकर बनाती है यह तूफान अमेरिका के उत्तर-पूर्व में आने वाला यह विंटर स्टॉर्म इसलिए बनता है क्योंकि वहां मौसम की कुछ खास स्थितियां एकसाथ बन जाती हैं। सर्दियों में कनाडा की तरफ से बहुत ठंडी हवा नीचे की ओर आती है। उसी समय समुद्र की तरफ से हल्की गर्म और नम हवा ऊपर उठती है। जब ये दोनों आमने-सामने आती हैं तो मौसम अचानक बिगड़ जाता है और तेज बर्फीला तूफान बन जाता है। समुद्र भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। अटलांटिक महासागर का पानी ठंड के मुकाबले थोड़ा गर्म रहता है। इससे हवा में नमी बढ़ती है। जब यह नमी ठंडी हवा से मिलती है तो भारी बर्फ गिरने लगती है। आसमान में तेज रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी इस सिस्टम को और ताकत देती हैं। इन हवाओं को जेट स्ट्रीम कहते हैं। ---------------------------- ये खबर पढ़ें… अमेरिका के न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर के टॉयलेट जाम: 45 मिनट लाइन में लगना पड़ रहा, मरम्मत के लिए टेक्नीशियन और सैनिकों में झड़प ईरान की तरफ बढ़ रहा अमेरिकी न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड फोर्ड एक अलग ही संकट से जूझ रहा है। जहाज के ज्यादातर टॉयलेट जाम हो चुके हैं। इससे 4,500 से ज्यादा नौसैनिकों को रोज 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:59:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PM मोदी का 9 साल बाद इजराइल दौरा:संसद को संबोधित करेंगे, विपक्ष ने बहिष्कार की धमकी दी; हथियार डील पर बातचीत संभव</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिन के इजराइल दौरे पर रवाना होंगे। यह उनकी बीते 9 साल में दूसरी इजराइल यात्रा है। इससे पहले वे जुलाई 2017 में गए थे। बुधवार को राजधानी तेल अवीव पहुंचने के बाद PM मोदी नेतन्याहू के साथ प्राइवेट बातचीत करेंगे। मोदी आज इजराइल की संसद को भी संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसके अलावा वे भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। मोदी के इस दौरे पर भारत और इजराइल के हथियारों से जुड़ी डील पर बातचीत की संभावना है। इनमें ड्रोन और एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। इससे पहले नेतन्याहू ने रविवार को कहा था कि वे अपने प्रिय मित्र के इजराइल आने का इंतजार कर रहे हैं। मोदी के भाषण का बहिष्कार कर सकता है इजराइली विपक्ष इजराइली संसद में होने वाला मोदी का भाषण घरेलू राजनीति के विवाद में घिर गया है। इजराइल का विपक्ष बुधवार को संसद के विशेष सत्र का बहिष्कार करने की योजना बना रहा है। विवाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आइजैक अमीत को आमंत्रित न किए जाने को लेकर है। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद स्पीकर अमीर ओहाना ने विशेष सत्र में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को आमंत्रित नहीं किया है। परंपरा के मुताबिक ऐसे औपचारिक सत्रों में चीफ जस्टिस को बुलाया जाता है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। विपक्षी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री येर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का बहिष्कार दरअसल विपक्ष का भी बहिष्कार है। लैपिड ने कहा कि वे भारत को शर्मिंदा नहीं करना चाहते, जहां 1.5 अरब आबादी वाले देश का प्रधानमंत्री आधी खाली संसद को संबोधित करे। कल यहूदियों के नरसंहार से जुड़े स्मारक जाएंगे मोदी दौरे के दूसरे दिन मोदी 26 फरवरी को इजराइल के ऐतिहासिक होलोकॉस्ट स्मारक ‘यद वाशेम’ जाएंगे। यह स्मारक जर्मनी में हिटलर के नाजी शासन में मारे गए 60 लाख से अधिक यहूदियों की याद में बना है। इनमें करीब 15 लाख बच्चे भी शामिल थे। स्मारक परिसर में पीड़ितों के नामों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों का विशाल संग्रह है। यहां रखी ‘बुक ऑफ नेम्स’ में लाखों पीड़ितों का विवरण दर्ज है। प्रधानमंत्री इन अभिलेखों का अवलोकन करेंगे और होलोकॉस्ट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यद वाशेम के बाद प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। बैठक में राजनीतिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों नेता क्षेत्रीय स्थिरता, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। भारत-इजराइल के बीच ड्रोन डील संभव राष्ट्रपति से मुलाकात के तुरंत बाद मोदी, नेतन्याहू के साथ बैठक में शामिल होंगे। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत और इजराइल के बीच ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग समेत कई बड़े रक्षा समझौतों पर सहमति बन सकती है। फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक 2026 में दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता संभव है। इसमें प्रिसीजन गाइडेड बम और मिसाइल सिस्टम के साथ एडवांस ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत हैरोन MK-2 MALE ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है। यह ड्रोन 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है, 470 किलोग्राम भार उठा सकता है और 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), व्यापार और निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में जैसे मुद्दों पर भी बातचीत संभव हैं। हालांकि संभावित समझौतों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आयरन डोम डिफेंस सिस्टम पर भी बात हो सकती है इजराइल भारत के साथ अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है। यह जानकारी मुंबई में IANS को दिए इंटरव्यू में इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एजेंडे में आयरन डोम को लेकर बातचीत भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इजराइल इस टेक्नोलॉजी को भारत के साथ शेयर करने के लिए है। रेवाच ने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंध है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए भारत में सैन्य उपकरणों के निर्माण पर फोकस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी रक्षा सहयोग को इस यात्रा का अहम एजेंडा बताया है। भारत-इजराइल में FTA पर बातचीत जारी मोदी का यह दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ है और यह 26 फरवरी 2026 तक चलेगा। नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए थे, जिससे यह तय हुआ कि किन मुद्दों पर बातचीत होगी और कैसे आगे बढ़ा जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल सामान का व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद हैं। यह एफटीए दोनों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा और कारोबारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा भरोसा और स्थिरता देगा। इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें गुड्स एंड सर्विसेज का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजन, हेल्थ और पौधों से जुड़े नियम, व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रोसेस, व्यापार को आसान बनाने के उपाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं। मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठे मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग को लेकर विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने सवाल उठाए हैं। यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका की सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को समिति की बैठक में कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि जब भारत ने अपने नागरिकों को संभावित अमेरिकी हमले के खतरे के कारण ईरान छोड़ने की सलाह दी है, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इजराइल जाना कितना उचित है। इस पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सभी प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि तनाव बढ़ने पर दौरा रद्द होगा या नहीं। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष शशि थरूर ने की थी। कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार विदेश नीति में अमेरिका के प्रभाव को ज्यादा महत्व दे रही है और इससे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। मोदी इजराइल जाने वाले एकमात्र भारतीय PM मोदी इजराइल का दौरा करने वाले अब तक एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं। 70 साल तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा नहीं की थी। 2017 में मोदी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया और दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की। भारत ने 1950 में इजराइल को मान्यता दी, 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा नहीं हुई। इसकी एक बड़ी वजह भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन-समर्थक नीति रही। जुलाई 2017 में मोदी की पहली यात्रा को ‘पाथ-ब्रेकिंग’ कहा गया। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर्स में समझौते हुए। कभी इजराइल बनने के खिलाफ था भारत भारत और इजराइल के संबंधों में भले ही आज गर्मजोशी देखी जाती है, लेकिन शुरुआत में भारत इजराइल बनने के ही खिलाफ था। भारत नहीं चाहता था कि फिलिस्तीन को बांटकर इजराइल बनाया जाए। महात्मा गांधी ने 1938 में अपने साप्ताहिक पत्र हरिजन में लिखा कि फिलिस्तीन उतना ही अरबों का है जितना इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का। उन्होंने यहूदियों के साथ हो रहे जर्मन अत्याचारों पर सहानुभूति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि किसी पीड़ित समुदाय की समस्या का समाधान दूसरे समुदाय की जमीन पर उन्हें बसाकर नहीं किया जा सकता। 1947 में जब संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों यहूदी राज्य (इजराइल) और अरब राज्य (फिलिस्तीन) में बांटने का प्रस्ताव रखा, तब भारत ने इसका विरोध किया। भारत का मानना था कि यह विभाजन बाहरी दबाव में किया जा रहा है और इससे स्थायी शांति नहीं आएगी। स्वतंत्रता के बाद भी भारत अपने रुख पर कायम रहा। 1949 में जब इजराइल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर मतदान हुआ, तो भारत ने उसके खिलाफ वोट दिया। इस दौर की नीति ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी। यही कारण है कि शुरुआती दशकों में भारत ने खुद को फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थक और पश्चिम एशिया की राजनीति में संतुलन बनाने वाले देश के रूप में स्थापित किया। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… दावा- नॉर्वे के पूर्व PM ने आत्महत्या की कोशिश की:एपस्टीन फाइल में नाम आया था; भ्रष्टाचार केस में 10 साल जेल हो सकती है नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री थोरब्योर्न जगलैंड को कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना पिछले हफ्ते हुई। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 09:59:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी सेना ने ड्रग&#45;तस्करों की नावों पर हवाई हमला किया, 3 लोगों का मौत, 5 महीने में 150 जाने गईं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने सोमवार को कैरेबियन सागर में ड्रग-तस्करों की नावों पर हवाई हमला किया। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई। ट्रम्प प्रशासन के अभियान के तहत सितंबर से अब तक 151 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी सरकार के मुताबिक यह लोग ड्रग तस्करी में शामिल थे। यूएस कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें आउटबोर्ड इंजन लगी छोटी नाव को नष्ट होते दिखाया गया है। सेना ने दावा किया कि नाव नार्को-ट्रैफिकिंग रूट पर चल रही थी और ड्रग-तस्करी में शामिल थी। इन हमलों को लेकर विवाद तब और बढ़ गया, जब खुलासा हुआ कि पहली नाव पर हमले के बाद बचे लोगों को फॉलो-अप स्ट्राइक में मार दिया गया था।
ट्रम्प बोले- अमेरिकी आर्मी चीफ के बारे में फेक न्यूज फैलाया जा रहा, वे ईरान में सैन्य कार्रवाई का विरोध नहीं कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें कहा गया है कि अमेरिका के जनरल ईरान में सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी खबरे 100 फीसदी गलत हैं। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, ‘मीडिया में कई खबरें चल रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि जनरल डैनियल केन ईरान के खिलाफ युद्ध के फैसले के विरोध में हैं। इन खबरों में इस जानकारी का कोई स्रोत नहीं बताया गया है और पूरी तरह गलत है।&#039; उन्होंने लिखा, ‘’जनरल केन हम सबकी तरह युद्ध नहीं देखना चाहते, लेकिन अगर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया जाता है, तो उनकी राय है कि यह काफी आसान होगा। वह ईरान को अच्छी तरह जानते हैं, क्योंकि उन्होंने मिडनाइट हैमर ऑपरेशन को लीड किया था, जिसमें ईरान के परमाणु एनरिचमेंट प्रोग्राम पर हमला हुआ था। ट्रम्प ने लिखा, ‘ईरान के साथ युद्ध के बारे में जो कुछ भी लिखा गया है, वह गलत और जानबूझकर फैलाया गया भ्रम है। फैसला मैं करता हूं। मैं समझौता करना ज्यादा पसंद करूंगा, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ, तो उस देश के लिए और दुर्भाग्य से उसके लोगों के लिए बहुत बुरा दिन होगा। वे लोग कमाल के हैं उनके साथ ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।’ ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है। लेकिन अभी तक इसमें कोई कामयाबी नहीं मिली है। ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। वहीं ट्रम्प बार-बार हमले की धमकी दे चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… आज से ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद: अमेरिका को ₹16 लाख करोड़ लौटाने पड़ सकते हैं; कोर्ट ने 3 दिन पहले रोक लगाई अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन पहले इन टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया था। अमेरिकी US कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CPB) ने एक बयान में कहा- 1977 के कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली मंगलवार रात 12 बजकर 1 मिनट (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से बंद कर दी जाएगी। एजेंसी ने इम्पोर्ट्स को निर्देश दिया है कि इन टैरिफ से जुड़े सभी कोड उसके कार्गो सिस्टम से हटा दिए जाएंगे। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कोर्ट से इस फैसले से अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर (15.75 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई वापस करनी पड़ सकती है। पूरी खबर पढ़ें… मेक्सिको- ड्रग माफिया की मौत से 20 राज्यों में हिंसा :25 सैनिकों समेत 32 मौतें, 20 बैंक फूंके; गर्लफ्रेंड से लोकेशन का पता चला मेक्सिको में ड्रग माफिया सरगना एल मेंचो की मौत के बाद सोमवार को भी हिंसक प्रदर्शन हुए। BBC के मुताबिक मेंचो के समर्थकों ने 20 राज्यों में हिंसा फैला दी। कई जगह रोडब्लॉक लगाए, गाड़ियों और 20 से ज्यादा सरकारी बैंक शाखाओं में आग लगा दी गई। जालिस्को में लॉकडाउन के हालात हैं। ये शहर फीफा 2026 के मेजबान शहरों में शामिल है। अलग-अलग शहरों में कम से कम 32 मौतें हुईं हैं, जिसमें 25 सैनिक शामिल है। ऑपरेशन के दौरान सेना ने बख्तरबंद गाड़ियां और रॉकेट लॉन्चर सहित बड़ी संख्या में हथियार जब्त किए। दरअसल, मेक्सिको में सेना ने रविवार को एक ऑपरेशन चलाकर देश के सबसे बड़े ड्रग माफिया सरगना एल मेंचो को मार गिराया। सेना के ऑपरेशन के दौरान वह घायल हो गया था। उसे एयरलिफ्ट कर मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस ऑपरेशन में मेंचो के अलावा अन्य 8 अपराधी भी मारे गए। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:17:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>आज से ट्रम्प के इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद:समझौते से पीछे हटने वाले देशों को ट्रम्प की धमकी, कहा&#45; गेम मत खेलो, ऊंचे टैरिफ लगाऊंगा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सरकार आज से राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर देगी। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को टैरिफ समझौते से पीछे हटने वाले देशों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील के नाम पर यदि किसी देश ने अमेरिका के साथ &#039;गेम&#039; खेलने की कोशिश की उसके नतीजे बुरे होंगे साथ ही और ऊंचे टैरिफ लगाए जाएंगे। दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन पहले इन टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया था। अमेरिकी US कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CPB) ने एक बयान में कहा- 1977 के कानून इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली मंगलवार रात 12 बजकर 1 मिनट (भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे) से बंद कर दी जाएगी। एजेंसी ने इम्पोर्ट्स को निर्देश दिया है कि इन टैरिफ से जुड़े सभी कोड उसके कार्गो सिस्टम से हटा दिए जाएंगे। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कोर्ट से इस फैसले से अमेरिकी सरकार को 175 अरब डॉलर (15.75 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई वापस करनी पड़ सकती है। रॉयटर्स के मुताबिक, IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से अमेरिका की हर दिन 50 करोड़ डॉलर (4,500 करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई हो रही थी। अब इन्हें रद्द किए जाने के बाद कंपनियां रिफंड की मांग कर सकती हैं। ट्रम्प बोले- कई देशों ने अमेरिका को नुकसान पहुंचाया टूथ सोशल पर ट्रम्प ने कहा, ‘कई देशों ने अमेरिका को व्यापार में बरसों तक नुकसान पहुंचाया है।’ ट्रम्प का बयान ऐसे समय पर आया है, जब मंगलवार से भारत समेत सभी देशों पर 15% टैरिफ शुरू हो जाएगा। दरअसल, कुछ देश 15% टैरिफ का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प ने ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों से ट्रेड डील कर 10% अमेरिकी बेस लाइन टैरिफ चुकाने पर सहमति जताई थी। अब 15% टैरिफ चुकाना पड़ेगा। इन देशों का कहना है कि ट्रेड डील में जब 10% टैरिफ पर करार हुआ है तो वे ज्यादा टैरिफ नहीं चुकाएंगे। इस पर ट्रम्प प्रशासन ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। ट्रम्प बोले- सुप्रीम कोर्ट ने मुझे पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद सोमवार को कहा कि इस फैसले से उल्टा उनकी ताकत और बढ़ गई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनजाने में उन्हें पहले से ज्यादा अधिकार दे दिए हैं। ट्रम्प ने कहा, &#039;मैं कुछ समय तक &#039;सुप्रीम कोर्ट&#039; स्माल लेटर में लिखूंगा, क्योंकि मुझे इस फैसले का सम्मान नहीं रहा।&#039; उन्होंने फैसले को मूर्खतापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांटने वाला बताया। इसके बावजूद ट्रम्प का कहना है कि इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि वह दूसरे कानूनों के तहत टैरिफ लगाने की अपनी ताकत का और ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं। कोर्ट ने बाकी बचे टैरिफ को कानूनीतौर पर मजबूत कर दिया है और अब वह उन्हें और ज्यादा सख्त तरीके से लागू कर सकते हैं। ट्रम्प ने यह भी कहा कि वह लाइसेंस जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके देशों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने बाकी सभी टैरिफ को मंजूरी दे दी है और ऐसे टैरिफ की संख्या काफी ज्यादा है। वसूला गया टैरिफ वापस होगा या नहीं इसकी जानकारी नहीं यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तीन दिन से ज्यादा समय बाद लागू किया जा रहा है। एजेंसी ने यह नहीं बताया कि इन तीन दिनों में टैरिफ क्यों वसूले जाते रहे। यह भी साफ नहीं किया गया है कि जिन लोगों से पैसा लिया गया है, उन्हें वह वापस मिलेगा या नहीं। यह आदेश सिर्फ IEEPA कानून के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू होगा। जबकि नेशनल सिक्टोरिटी के नाम पर ‘सेक्शन 232’ के तहत और अनफेयर ट्रेड केस के ‘सेक्शन 301’ के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे और उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। CBP ने कहा है कि वह व्यापार से जुड़े लोगों को आगे की जानकारी आधिकारिक संदेशों के जरिए देती रहेगी। अमेरिकी कानून के सेक्शन 232 और सेक्शन 301 को जानिए अमेरिका के व्यापार कानून में सेक्शन 232 और सेक्शन 301 ऐसे नियम हैं, जिनके जरिए सरकार दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगा सकती है। सेक्शन 232- यह 1962 के कानून का हिस्सा है। अगर अमेरिकी सरकार को लगे कि किसी देश से ज्यादा सामान आने से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हो सकता है, तो राष्ट्रपति उस सामान पर टैरिफ लगा सकते हैं। मतलब, अगर इम्पोर्ट से सेना, डिफेंस इंडस्ट्री या जरूरी घरेलू इंडस्ट्री कमजोर पड़ते दिखें, तो इस नियम का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में स्टील और एल्युमिनियम पर इसी सेक्शन के तहत टैरिफ लगाए थे। उनका कहना था कि ज्यादा इम्पोर्ट से अमेरिकी इंडस्ट्री कमजोर हो रही है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। सेक्शन 301- यह 1974 के कानून का हिस्सा है। अगर अमेरिका को लगे कि कोई देश उसके साथ गलत तरीके से व्यापार कर रहा है, जैसे नियमों का उल्लंघन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) की चोरी या भेदभाव तो वह उस देश के सामान पर टैरिफ लगा सकता है। चीन के खिलाफ लगाए गए कई टैरिफ इसी सेक्शन 301 के तहत लगाए गए थे। ट्रम्प ने दुनियाभर पर 15% ग्लोबल टैरिफ लगाया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ने 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने IEEPA कानून का इस्तेमाल करते हुए हद से ज्यादा ताकत ले ली थी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस कानून में राष्ट्रपति को इतने बड़े स्तर पर इंपोर्ट पर टैरिफ लगाने की इजाजत नहीं है। कोर्ट का फैसला आते ही कुछ ही घंटों में ट्रम्प ने नए ग्लोबल टैरिफ का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि मंगलवार से अमेरिका में आने वाले हर सामान पर एक जैसा टैरिफ लगेगा। पहले यह 10% बताया गया, लेकिन बाद में अचानक इसे बढ़ाकर 15% कर दिया गया। अचानक हुए इस बदलाव से कुछ अधिकारी भी हैरान रह गए। यह नया टैरिफ अमेरिकी व्यापार कानून के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है। इस नियम के तहत सरकार 15% तक टैरिफ लगा सकती है, लेकिन अगर इसे 150 दिनों से ज्यादा जारी रखना है तो कांग्रेस (संसद) की मंजूरी लेनी पड़ेगी। भारत भी 15% वाले टैरिफ के दायरे में इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा। पिछले एक साल में अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाला टैक्स कई बार बदला है। पहले करीब 26% था, फिर बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया। उसके बाद इसे घटाकर 18% किया गया और अब कोर्ट के फैसले के बाद यह 15% वाले ग्लोबल टैरिफ में आ गया है। अब आगे भारतीय सामान पर असली असर क्या होगा, यह कुछ बातों पर टिका है। जैसे कि क्या अमेरिका की संसद 150 दिन की इस व्यवस्था को आगे बढ़ाती है या नहीं, भारत और अमेरिका के बीच जो अस्थायी व्यापार समझौता चल रहा है वह कब लागू होता है। इसके अलावा क्या अमेरिकी सरकार आगे कोई दूसरा कानूनी रास्ता अपनाती है या नहीं। मतलब अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है आगे और बदलाव हो सकते हैं। 1974 के कानून का हिस्सा है सेक्शन 122 सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है। NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 15% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे। निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी। ---------------- यह खबर भी पढ़ें… टैरिफ में बदलाव से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बैठक टली: इसमें भारत पर 18% टैरिफ लगना था, अब ट्रम्प ने खुद ही ग्लोबल टैरिफ 15% किया भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) को लेकर होने वाली बैठक टल गई है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी PTI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से दी। बैठक 23-26 फरवरी को वॉशिंगटन में होनी थी। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:17:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>न्यूजीलैंड के बाद ऑस्ट्रेलिया में पंजाबियों का विरोध:कट्‌टरपंथियों ने देश छोड़ने की धमकी दी, बोले&#45; यहां भारत या सूडान नहीं बनने देंगे</title>
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<description><![CDATA[ न्यूजीलैंड में नगर कीर्तन रोकने के बाद ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों और खासकर पंजाबियों का विरोध शुरू हो गया है। ऑस्ट्रेलिया के कट्‌टरपंथी नेता थॉमस सेवेल ने उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी है। सेवेल ने कल (23 फरवरी) कहा कि हम नहीं चाहते कि ऑस्ट्रेलिया भारत और सूडान बने। सेवेल ने कहा कि इंडियंस को यह देश छोड़कर चले जाना चाहिए क्योंकि ऑस्ट्रेलिया केवल गोरों का है। उसने भारतीयों को नीच बताते हुए उनको निकालने की मांग की। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सेवेल के बयान को खारिज करते हुए ऑस्ट्रेलिया में रह रहे 2 लाख से अधिक पंजाबी सिखों और 10 लाख भारतीयों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। गृह मंत्री टोनी बर्क ने साफ किया है कि नफरत फैलाने वालों पर नए हेट स्पीच कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कहा कि थॉमस सेवेल ऑस्ट्रेलिया में नस्लवाद और कट्टरपंथ का चेहरा है। मेलबर्न कोर्ट के बाहर सेवेल ने भारतीयों को पीआर देने का विरोध किया। उसने खुलेआम कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया को तीसरी दुनिया बनने से रोकना चाहता है और 10 लाख के करीब भारतीयों को वापस भेजने के हक में है। बता दें कि सेवेल के संगठन नेशनल सोशलिस्ट नेटवर्क को ऑस्ट्रेलिया की सरकार बैन कर चुकी है। बावजूद इसके सेवेल नस्लीय बयान देता है। गृह मंत्री टोनी बर्क ने स्पष्ट किया है कि ऑस्ट्रेलिया की पहचान उसकी डायवर्सिटी है और नफरत फैलाने वालों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलियाई सरकार नए हेट स्पीच कानून लागू कर रही है। 5 पॉइंट में जानें थॉमस सेवेल ने क्या कहा… जानें थॉमस सेवेल के बयान पर कौन क्या बोला… जानें कौन है थॉमस सेवेल और उससे जुड़े विवाद ***************** ये खबर भी पढ़ें: न्यूजीलैंड में पंजाबियों की पुलिस में भर्ती पर प्रदर्शन: लेफ्ट विंग बोला- कीवी बनो या देश छोड़ो; 2 बार नगर कीर्तन रोक चुके 
सिखों का नगर कीर्तन रोके जाने के बाद अब न्यूजीलैंड पुलिस में पंजाबियों की भर्ती का विरोध शुरू हो गया है। मैनीकॉ पुलिस स्टेशन में हुए भर्ती सेमिनार का स्थानीय डेस्टिनी चर्च के ब्रायन टमाकी ने न्यूजीलैंड में भारतीय खासकर पंजाबियों की बढ़ रही संख्या के खिलाफ आज (31 जनवरी) को प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:17:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>नेपाल&#45; बस हाईवे से नदी में गिरी, 18 की मौत:25 घायल, मरने वालों में 2 विदेशी नागरिक; कंट्रोल खोने से हादसा</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के धादिंग जिले में सोमवार देर रात एक बस हाईवे से नदी में गिर गई। नेपाली मीडिया के मुताबिक हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 घायल हैं। मृतकों में एक पुरुष और एक महिला विदेशी नागरिक शामिल हैं। हालांकि, यह किस देश से थे और इनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं। आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के मुताबिक, अब तक 17 शव बरामद किए जा चुके हैं। बाद में एक अन्य यात्री की मौत की पुष्टि हुई, जिससे मृतकों का आंकड़ा 18 हो गया। हादसे में घायल लोगों को रेस्क्यू कर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अब तक मृतकों और घायलों की पहचान नहीं हो सकी है। बस (Ga 1 Kha 1421) पोखरा से काठमांडू की ओर जा रही थी, तभी किसी कारण ड्राइवर का बस से नियंत्रण खो गया और बस त्रिशूली नदी में जा गिरी। हादसा देर रात करीब रात 1:30 बजे धादिंग जिले के बेनिघाट रोरांग इलाके में हुआ। फिलहाल पुलिस हादसे की अन्य वजहों की भी जांच कर रही है। हादसे की 3 तस्वीरें… हादसे के समय बस में 44 लोग सवार थे मरने वालों में 12 पुरुषों और 6 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय बस में कुल 44 यात्री सवार थे। घायल 26 यात्रियों को बचा लिया गया है। कुछ का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है, जबकि अधिकांश को आगे के इलाज के लिए काठमांडू रैफर कर दिया गया है। यह दुर्घटना आधी रात को होने के कारण बचाव अभियान में परेशानी हुई। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर बचाव कार्य किया। बारातियों से भरी बस खाई में गिरी थी इससे पहले नेपाल के बैतड़ी जिले में 5 फरवरी को बारातियों से भरी एक बस अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी थी। हादसे में 13 बारातियों की मौत हो गई, जबकि 34 लोग घायल हो गए थे। बस गांव से दुल्हन लेकर सुनकुड़ा जा रही थी। बस एक मोड़ पर चढ़ाई के दौरान अनियंत्रित हो गई और गहरी खाई में गिर गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि हादसा ओवरलोडिंग के कारण हुआ था। वहीं, साल 2024 में लैंडस्लाइड की वजह से दो बसें त्रिशूली नदी में बह गईं थीं। दोनों बसों में चालकों समेत 63 लोग सवार थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में 7 भारतीयों और एक बस चालक की मौत हुई। भगवान शिव के त्रिशूल से जुड़ी है त्रिशूली नही त्रिशूली नदी नका नाम भगवान शिव के त्रिशूल से आया है। इसके पीछे एक प्रचलित कथा है कि गोसाइकुंडा (एक पवित्र जगह) में शिव जी ने अपना त्रिशूल जमीन में गाड़ा, जिससे तीन झरने निकले और ये नदी बनी। ये तिब्बत (चीन) के ग्यिरोंग काउंटी में शुरू होती है। वहाँ दो नदियाँ - क्यिरोंग त्सांगपो और लेंदे खोला से मिलकर त्रिशूली बनाती हैं। नेपाल में ये रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन जैसे जिलों से गुजरती है। पृथ्वी हाईवे के साथ-साथ बहती है, जो काठमांडू और पोखरा को जोड़ता है। आखिर में ये नारायणी नदी (गंडकी नदी) में मिल जाती है। इसकी लंबाई लगभग 200 किलोमीटर है। पुराने समय में ये काठमांडू वैली और तिब्बत के बीच व्यापार का मुख्य रास्ता था। ये नदी स्थानीय लोगों के लिए पानी, सिंचाई, मछली पकड़ने और संस्कृति का हिस्सा है। पर्यटन (राफ्टिंग, ट्रेकिंग) से भी अर्थव्यवस्था को फायदा होता है। नदी के किनारे कई रिजॉर्ट्स, होटल और गांव हैं, जहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। ये इलाका बौद्ध और हिंदू संस्कृति का मिश्रण है। हालांकि, मानसून में तेज बहाव, लैंडस्लाइड के कारण और यहां कई दुखद घटनाएँ हुई हैं। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मेक्सिकन सेना के ऑपरेशन में ड्रग-कार्टेल लीडर की मौत:भड़के समर्थकों का हिंसक प्रदर्शन, एयरपोर्ट में तोड़फोड़, गाड़ियां फूंकी; 136 करोड़ का इनामी था मेक्सिकन सेना ने रविवार को एक ऑपरेशन के तहत देश के सबसे बड़े ड्रग कार्टेल के लीडर को मार गिराया। नेमेसियो रुबन ओसेगुएरा सर्वेंटेस उर्फ एल मेंचो जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल (CJNG) का लीडर था और दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों में शामिल था। पूरी खबर पढ़े… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:52:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>मेक्सिको में ड्रग तस्कर की मौत के बाद हिंसा:₹136 करोड़ के इनामी को सेना ने मारा, समर्थकों ने एयरपोर्ट&#45;मॉल में आग लगाई</title>
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<description><![CDATA[ मेक्सिको में सेना ने रविवार को एक ऑपरेशन चलाकर देश के सबसे बड़े ड्रग माफिया सरगना एल मेंचो को मार गिराया। इसके बाद देशभर में आगजनी और हिंसा शुरू हो गई है। मेंचो के समर्थकों ने बदला लेने के लिए हाईवे को जाम कर दिया है और गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रहे हैं। तलपला शहर में सेना के ऑपरेशन के दौरान वह घायल हो गया था। उसे एयरलिफ्ट कर मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इस ऑपरेशन में मेंचो के अलावा कम से कम और 9 अपराधी भी मारे गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक एल मेंचो, जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल (CJNG) का लीडर था। जलिस्को कार्टेल मेक्सिको में ड्रग्स बनाने और बेचने, स्थानीय कारोबारियों से वसूली करने और कई इलाकों में लोगों को डराकर रखने के लिए कुख्यात रहा है। इस कार्टेल की मौजूदगी अमेरिका के 50 राज्यों में है। अमेरिकी सरकार ने अल मेंचो के ऊपर 136 करोड़ रुपए का इनाम रखा था। हिंसा की 7 तस्वीरें… पहले भी ऐसी हिंसक घटनाएं हुईं मेक्सिको में पहले भी जब किसी बड़े कार्टेल नेता को पकड़ा गया या मारा गया है, तब सरकार और कार्टेल के बीच हिंसक टकराव हुआ है। कई बार गिरोह के अंदर ही सत्ता की लड़ाई छिड़ जाती है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एल मेंचो की मौत से पहले 2016 में सिनाओला कार्टेल के सरगना एल चापो की गिरफ्तारी और 2024 में अल मायो की गिरफ्तारी के वक्त भी देश में ऐसा ही हुआ था। 2019 में जब अल चापो के बेटे ओविदियो गुजमान को पकड़ा गया था, तब उसके गुर्गों ने कुलियाकान शहर को घंटों तक बंधक बना लिया था और सरकार को उसे छोड़ना पड़ा था। इसलिए अब भी डर है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जालिस्को कार्टेल के पास नया नेता साफ तौर पर तय है या नहीं। अगर अंदरूनी लड़ाई शुरू हुई तो खून-खराबा और बढ़ सकता है। जालिस्को में सबसे ज्यादा हालात खराब सिर्फ जालिस्को राज्य में ही सरकारी बैंक की 20 शाखाओं को नुकसान पहुंचाया गया। 20 से ज्यादा सड़कों पर गाड़ियां जलाकर रास्ता रोका गया। कई इलाकों में सार्वजनिक परिवहन रोक दिया गया और होटलों को कहा गया कि मेहमानों को बाहर न निकलने दें। जालिस्को की राजधानी ग्वादलाहारा में हालात और गंभीर हो गए। यह शहर इस साल होने वाले फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी करने वाला है। एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए जिनमें लोग भागते नजर आए। हालांकि प्रशासन ने कहा कि एयरपोर्ट सामान्य रूप से काम कर रहा है और यात्रियों को कोई खतरा नहीं है। भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की मेक्सिको में हालात बिगड़ने पर भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। जालिस्को (पुएर्तो वालार्टा, चापाला, ग्वाडलाहारा), तमाउलिपास (रेनोसा), मिचोआकान, गुरेरो और न्यूवो लियोन राज्यों में रह रहे भारतीयों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। दूतावास ने नागरिकों से सुरक्षित स्थान पर रहने, अनावश्यक आवाजाही से बचने और भीड़ से दूर रहने की अपील की है। साथ ही परिवार और मित्रों को अपनी स्थिति की जानकारी देने को कहा है। इमरजेंसी में 911 पर संपर्क करने और सहायता के लिए +52-55-4847-7539 पर भारतीय दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी गई है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ट्रम्प ने कार्टेल को आतंकवादी संगठन घोषित किया था जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल CJNG के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अल मेंचो की गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 15 मिलियन डॉलर (136 करोड़ रुपए) तक का इनाम देने का ऑफर दिया था। CJNG मेक्सिको के सबसे ताकतवर और तेजी से बढ़ने वाले क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन में से एक है। यह कार्टेल 2009 में बना था। इसी साल फरवरी में ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने कार्टेल को विदेशी टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन घोषित किया। मेक्सिको से अमेरिका में होती है ड्रग तस्करी मेक्सिको दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का गढ़ माना जाता है, जहां से कोकीन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनाइल जैसे बेहद खतरनाक ड्रग अमेरिका तक पहुंचते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक देश में ड्रग्स की सबसे बड़ी सप्लाई मेक्सिकन कार्टेल्स के जरिए होती है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग मार्केट है। हर साल लाखों लोग नशे की लत के शिकार होते हैं और फेंटेनाइल जैसी दवाओं से हजारों मौतें होती हैं। अमेरिकी सरकार पर लगातार दबाव रहता है कि ड्रग तस्करी पर सख्त कदम उठाए जाएं और इसी वजह से उसकी नजर मेक्सिको में मौजूद कार्टेल्स पर रहती है। दूसरी तरफ, कार्टेल्स मेक्सिको में इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि कई इलाकों में वे पुलिस और सरकार को चुनौती देते हैं। हथियारबंद गिरोह, धमकी, भ्रष्टाचार और हिंसा के चलते स्थानीय प्रशासन भी कई बार उन्हें रोक नहीं पाता। कई कार्टेल्स तो अपने को शेडो गवर्नमेंट की तरह चलाते हैं। ट्रम्प भी ड्रग कार्टेल को खत्म करने की धमकी दे चुके वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी देते हुए कहा कि उनका प्रशासन जल्द ही जमीन पर मौजूद ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के लिए कार्रवाई शुरू करेगा। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि मेक्सिको पर ड्रग कार्टेल का कब्जा है। यह अमेरिका में हर साल 2.5 लाख से 3 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र के रास्ते से ड्रग्स की तस्करी को 97% तक रोक दिया है, इसलिए अब जमीन पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने योजनाओं के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबॉम ने ट्रम्प के बयानों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि अमेरिका किसी भी क्षेत्र का मालिक नहीं है। न्यू जेनरेशन कार्टेल के पास मशीन गन, टैंक भी मौजूद द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार मेक्सिको के सबसे बड़े सिनालोआ कार्टेल के पास 600 से ज्यादा विमान और हेलिकॉप्टर हैं। ये संख्या मेक्सिको की सबसे बड़ी एयरलाइंस एयरो मेक्सिको से पांच गुना ज्यादा है। कार्टेल्स अब ड्रोन और आर्मर्ड व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। जैसे जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) के पास मशीन गन, टैंक और बॉडी आर्मर से लैस ग्रुप्स हैं। कुल मिलाकर, कार्टेल्स की प्राइवेट सेना या मेंबर्स की संख्या 2022-2023 में 160,000 से 185,000 अनुमानित थी, जो मेक्सिको में पांचवीं सबसे बड़ी एम्प्लॉयर बनाती है मेक्सिको गृह मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार कार्टेल के पास एके-47 और एम-80 जैसे असॉल्ट राइफलों का जखीरा है। हर साल सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा ड्रग कार्टेल के कब्जे से 20 हजार से ज्यादा असॉल्ट राइफलों की बरामदगी की जाती है। मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स सबसे ज्यादा कमाई करने वाले क्रिमिनल ग्रुप्स मेक्सिको सरकार कार्टेल से बरामद किए जाने वाले हथियारों को खत्म करती है, ताकि इनका फिर से इस्तेमाल न किया जा सके। कार्टेल इन हथियारों को अमेरिकी माफिया से ड्रग्स की सप्लाई के बदले में लेते हैं। 5 साल के दौरान कार्टेल ने रॉकेट लॉन्चर्स भी हासिल कर लिए हैं। इनका इस्तेमाल सरकारी टोही विमानों पर हमले के लिए करते हैं। UN वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2025 के अनुसार मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स अब दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले क्रिमिनल ग्रुप्स हैं, जो सालाना $12.1 बिलियन (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा कमाते हैं। यह मुख्य रूप से कोकीन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनाइल की तस्करी से आता है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के रिजॉर्ट में घुस रहे युवक को गोली मारी,मौत: गन और फ्यूल केन लेकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मार-ए-लागो रिजॉर्ट में घुसने की कोशिश करने वाले एक युवक को सुरक्षाकर्मियों ने गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई है। घटना स्थानीय समयानुसार रविवार आधी रात 1:30 बजे हुई। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:52:12 +0530</pubDate>
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<title>कनाडा के 3 पंजाबी सांसदों की सीक्रेट विजिट पर विवाद:पूछा जा रहा&#45; यात्रा पर खर्चा किसने किया; हथियारबंद निहंगों से मिलने पर सवाल उठ रहे</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में मुख्य विपक्षी पार्टी कंजर्वेटिव पार्टी ऑफ कनाडा के पंजाबी मूल के 3 सांसदों की पंजाब यात्रा पर सवाल उठ रहे हैं। कनाडा में सोशल मीडिया पर तीनों कंजर्वेटिव सांसदों से पूछा जा रहा है कि उनकी इस यात्रा का खर्च किसने उठाया? कनाडा के सांसद जसराज सिंह हल्लां, अमरप्रीत सिंह गिल और दलविंदर सिंह गिल पंजाब यात्रा पर आए थे। यात्रा का कारण और इस यात्रा के बारे में जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई, इस पर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। यही नहीं, सांसदों के आसपास हथियारबंद निहंगों के होने पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यात्रा से जुड़ी बातें और अन्य गतिविधियों से जुड़े फोटो-वीडियो लोगों ने सोशल मीडिया पर अपलोड किए। इसके बाद सांसदों की यात्रा का खुलासा हुआ। 15 से 17 फरवरी तक सोशल मीडिया पर चले फोटो-वीडियो सांसदों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पंजाब दौरे के वीडियो, फोटो और जानकारियां शेयर नहीं की, लेकिन जब वे 15 से 17 फरवरी तक पंजाब में रहे तो उनके बहुत से वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए। यही वीडियो कनाडा मीडिया और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों तक पहुंचे। उसके बाद उन्होंने सांसदों व कंजर्वेटिव पार्टी से इस पर सवाल पूछने शुरू किए। गोल्डन टेंपल, गुरु की रसोई व परगट सिंह से मिले तीनों सांसद 15 फरवरी को अमृतसर में श्री हरमिंदर साहिब (गोल्डन टेंपल) गए और वहां माथा टेका। उसके बार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (SGPC) ने उन्हें सम्मानित किया। SGPC के सदस्यों व अन्य धार्मिंक नेताओं के साथ बैठक की। उसके बाद वह कांग्रेस विधायक परगट सिंह से मिले और उनके साथ इमीग्रेशन के मुद्दे पर बातचीत की। बाद में वे होशियारपुर में गुरु की रसोई में गए। वीडियो में हथियारबंद निहंगों के साथ दिखे सांसद कनाडा सरकार कट्टरपंथी व गनकल्चर को प्रमोट नहीं करती है। कनाडा में सरकार किसी को भी हथियार प्रदर्शन करने नहीं देती। कनाडा में सोशल मीडिया पर सांसदों के जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनमें सांसद एक धार्मिक स्थल पर हैं और उनके साथ हथियारबंद निहंग हैं। निहंग सिहों के पास गन हैं। खाने की टेबल पर भी हथियारबंद निहंगों के साथ दिखे सांसद सांसद जब गुरु की रसोई में गए तो वहां खाने की व्यवस्था थी। खाने की टेबल पर जहां तीनों सांसद बैठे थे, वहां बड़ी संख्या में निंहग सिंह व अन्य लोग भी बैठे थे। टेबल पर बैठे निहंग सिंहों के पास भी बंदूकें दिख रही हैं। कनाडा में इन क्षेत्रों से सांसद हैं तीनों जसराज सिंह हल्लां कैलगरी ईस्ट, अमनप्रीत सिंह गिल कैलगरी स्काईव्यू और दलविंदर सिंह गिल कैलगरी मैकनाइट से सांसद हैं। तीनों पंजाबी मूल के हैं और सिख धर्म से संबंध रखते हैं। कनाडा के अलग-अलग शहरों में पंजाबियों की संख्या काफी है। ऐसे में वे पंजाब आकर कनाडा में रहने वाले पंजाबियों में अपनी पकड़ मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इमीग्रेशन कानून पर की विधायक से चर्चा जालंधर से कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने बतायाक कनाडा में इमीग्रेशन कानून को सख्त बनाने की बात चल रही है, जिसकी वजह से पंजाब के स्टूडेंट्स और वर्कर्स को कनाडा में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने कनेडियन सांसदों से मिलकर इमीग्रेशन कानून के कारण स्टूडेंट्स व वर्कर्स को आ रही दिक्कतों के बारे में चर्चा की। कनाडा में सांसदों के पंजाब दौरे को लेकर सवाल उठने के कारण… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:52:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका के गुरुद्वारा साहिब से किडनेप सिख का शव मिला:2 दिन पहले जबरन कार में बैठा ले गए थे आरोपी, रसोइए का काम करता था</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के ट्रेसी शहर के गुरुद्वारे से किडनैप हुए सिख व्यक्ति का आज शव मिला है। मौत किन कारणों से हुई, पुलिस इसकी जांच कर रही है। मृतक की पहचान अवतार सिंह (57) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से लुधियाना के रहने वाले हैं और कई साल से कैलिफोर्निया में परिवार सहित रह रहे हैं। दमदमी टकसाल के प्रमुख बाबा हरनाम सिंह धुमा ने शनिवार शाम को अपने फेसबुक पेज पर यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि उनका शव मिल गया है। वह ट्रेसी स्थित गुरुद्वारा साहिब में रसोइए के रूप में सेवा करते थे और परिसर में ही रहते थे। परिवार ने सैन जोआक्विन काउंटी शेरिफ ऑफिस में उनके लापता होने की शिकायत दर्ज की थी। जिसके बाद पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिली थी, जिसमें सफेद रंग की एसयूवी और गहरे कपड़े पहने तीन व्यक्ति अवतार सिंह को जबरन ले जाते दिखाई दे रहे थे। 17 फरवरी को हुए थे किडनेप पुलिस के अनुसार, 17 फरवरी को शाम 8:52 बजे लापता होने की सूचना मिलने पर टीम ने डब्ल्यू ग्रांट लाइन रोड के 16000 ब्लॉक पर जांच की। पुलिस ने अवतार सिंह और संदिग्ध एसयूवी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी कर लोगों से जानकारी देने की अपील की थी। अवतार सिंह को जबरन एक्सयूबी में बैठाया
अमेरिकी पुलिस के अुनसार, एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया था, जिससे पता चला कि तीन अज्ञात लोगों ने अवतार सिंह को जबरन कार में बैठाया और उसके बाद वहां से चले गए। अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। पत्नी ने जुड़वा तीन बच्चों को जन्म दिया था
पुलिस द्वारा डाली गई अवतार सिंह की पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों के कमेंट भी आए। लोग उनकी तरफ से गुरुद्वारा साहिब में की जाने वाली सेवा की प्रशंसा करते दिखे थे। वहीं कुछ लोगों ने ये भी बताया कि उनकी पत्नी ने तीन महीने पहले ही जुड़वा तीन बच्चे को जन्म दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 12:03:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:हॉन्गकॉन्ग सरकार अग्निकांड पीड़ितों के 1700 जले फ्लैट खरीदेगी, बदले में नकद या नया फ्लैट देगी</title>
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<description><![CDATA[ हॉन्गकॉन्ग में नवंबर 2025 की भीषण आग के तीन महीने बाद सरकार ने पुनर्वास योजना का ऐलान किया है। ताई पो स्थित वांग फुक कोर्ट की 7 इमारतों के करीब 1700 फ्लैट मालिकों से स्वामित्व अधिकार खरीदने या फ्लैट एक्सचेंज का विकल्प दिया जाएगा। 26 नवंबर 2025 को लगी आग में 168 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के बाद हजारों लोग बेघर हो गए थे और अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं। सरकार फिलहाल किराये के लिए वित्तीय मदद दे रही है। इस पूरी प्रक्रिया पर करीब 6.8 अरब हॉन्गकॉन्ग डॉलर (यानी करीब 7892 करोड़ रुपए) खर्च होंगे। इसमें से 4 अरब डॉलर सार्वजनिक फंड से आएंगे, बाकी राहत कोष से। सरकार फ्लैट मालिकों से स्वामित्व अधिकार नकद में खरीदेगी। चाहें तो प्रभावित लोग निर्धारित सरकारी नीति के तहत नया फ्लैट खरीद सकते हैं। जो लोग बड़ी रकम लेने से बचना चाहते हैं, वे सीधे फ्लैट एक्सचेंज कर सकेंगे। मार्च से मालिकों से संपर्क शुरू होगा। एक्सचेंज योजना चुनने वाले सितंबर से नए घर चुन सकेंगे। डिप्टी फाइनेंशियल सेक्रेटरी माइकल वोंग ने कहा कि इमारतों की मरम्मत का कोई उचित और किफायती तरीका नहीं है। प्रशासन सातों इमारतों को ध्वस्त करने के पक्ष में है और साइट पर दोबारा आवासीय निर्माण नहीं किया जाएगा। यहां पार्क या सामुदायिक सुविधाएं बनाई जा सकती हैं। वोंग के मुताबिक, अगर सरकार दखल नहीं देती तो फ्लैट मालिकों को बाजार में खरीदार नहीं मिलेंगे और उनकी वर्षों की निवेश राशि शून्य हो सकती है। उन्होंने बताया कि, सर्वे में 74% प्रभावित लोगों ने सरकार को हक बेचने की इच्छा जताई, जबकि 9% लोग उसी जगह दोबारा निर्माण चाहते हैं, जिसमें करीब दस साल तक लग सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… रिसर्च- अमेरिका में हिंदू सबसे ज्यादा शिक्षित धार्मिक समूह: 70% के पास बैचलर डिग्री, यहूदी दूसरे नंबर पर अमेरिका में हिंदू सबसे ज्यादा शिक्षित धार्मिक समुदाय हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2023-24 रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी (RLS) के मुताबिक 70% हिंदुओं के पास बैचलर या उससे अधिक की डिग्री है। इस अध्ययन के अनुसार, हिंदुओं के बाद 65 प्रतिशत यहूदियों के पास बैचलर डिग्री या उससे ऊंची शिक्षा है। यह आंकड़ा पूरे अमेरिका के वयस्कों के औसत से काफी अधिक है, जहां सिर्फ 35 प्रतिशत लोगों के पास बैचलर डिग्री या उससे ऊपर की पढ़ाई है। रिपोर्ट 19 फरवरी को सार्वजनिक की गई थी। अन्य धार्मिक समूहों में भी औसत से ज्यादा शिक्षा स्तर देखा गया है। मुस्लिम, बौद्ध और ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदायों में 40 प्रतिशत से अधिक वयस्कों के पास कम से कम बैचलर डिग्री है। मेनलाइन प्रोटेस्टेंट ईसाई भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। वहीं, इवैंजेलिकल प्रोटेस्टेंट, कैथोलिक और ऐतिहासिक रूप से ब्लैक प्रोटेस्टेंट चर्चों के सदस्यों में कॉलेज ग्रेजुएट्स का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। यह सर्वेक्षण 17 जुलाई 2023 से 4 मार्च 2024 तक चला, जिसमें कुल 36,908 अमेरिकी वयस्कों ने हिस्सा लिया। यह अध्ययन अमेरिका में धर्म, शिक्षा और सामाजिक जीवन के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण है। प्यू के मुताबिक इन शैक्षिक अंतर की बड़ी वजह इमिग्रेशन और जनसांख्यिकीय पैटर्न हैं। हिंदू, मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के कई लोग उच्च शिक्षा या स्किल्ड वर्कर कार्यक्रमों के जरिए अमेरिका पहुंचे, जिससे इन समुदायों में उच्च शिक्षित आबादी का अनुपात अधिक है। पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 16 मौतें: सभी एक परिवार के; PAK बोला- TTP के 7 कैंपों को निशाना बनाया पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। अल-जजीरा के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा, ‘हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे नेटवर्क ने कराए।’ अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक हमले में नांगरहार के एक घर को निशाना बनाया, जिससे एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक सिर्फ चार लोगों को निकाला जा सका है। हमले के समय परिवार सो रहा था, इसलिए उन्हें भागने का मौका ही नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें… ट्रम्प ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर 15% किया: कल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द किए, फिर नाराज ट्रम्प ने 10% टैरिफ लगाया था 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर नए कानून (सेक्शन-122) का इस्तेमाल कर 10% टैरिफ लगा दिया था। इस कानून के तहत अधिकतम 15% टैरिफ ही लगाया जा सकता है। हालांकि यह टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही लागू रहेगा। अगर इसे आगे बढ़ाना है तो कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 12:03:24 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 16 मौतें:सभी एक परिवार के; PAK बोला&#45; TTP के 7 कैंपों को निशाना बनाया, आत्मघाती हमलों का बदला लिया</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। अल-जजीरा के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा, ‘हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे नेटवर्क ने कराए।’ अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक हमले में नांगरहार के एक घर को निशाना बनाया, जिससे एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक सिर्फ चार लोगों को निकाला जा सका है। हमले के समय परिवार सो रहा था, इसलिए उन्हें भागने का मौका ही नहीं मिला। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) के मुताबिक इसमें 16 लोगों की मौत हो गई। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, आंकड़ों की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हमले की तस्वीरें… अफगानिस्तान बोला- सही समय पर कड़ा जवाब देंगे अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सही समय पर पाकिस्तान को जवाब देने की चेतावनी दी है। मंत्रालय ने इन हमलों को अफगानिस्तान की गोपनीयता नीति का उल्लंघन बताया। अफगान सूत्रों के अनुसार पक्तिका में एक धार्मिक स्कूल पर ड्रोन हमला हुआ और नांगरहार प्रांत में भी कार्रवाई की गई। पाकिस्तान ने कहा है कि उन्होंने आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया, लेकिन अफगान स्रोतों के अनुसार नागरिकों को नुकसान हुआ। पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार से मांग करता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान की मांग- अंतरराष्ट्रीय समुदाय तालिबान पर दबाव डाले पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह 2020 में दोहा में अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव डाले, ताकि अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो। 2020 का दोहा समझौता जिसे अफगानिस्तान में शांति प्रयास भी कहा जाता है। यह अमेरिका और तालिबान के बीच 29 फरवरी 2020 को कतर की राजधानी दोहा में हस्ताक्षरित हुआ था। यह समझौता अफगानिस्तान में 2001 से चल रहे युद्ध को समाप्त करने और अमेरिकी बलों की वापसी का रास्ता बनाने के लिए किया गया था। तालिबान ने प्रतिबद्धता जताई कि वह अफगानिस्तान की जमीन को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी समूह या व्यक्ति को इस्तेमाल नहीं करने देगा। इसमें विशेष रूप से अल-कायदा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संबंध तोड़ने और उन्हें अफगानिस्तान में भर्ती, प्रशिक्षण, फंडिंग या हमले की अनुमति न देने का वादा शामिल था। समझौते के बाद अमेरिका ने 2021 में अपनी सेना वापस बुला ली, जिसके बाद तालिबान ने तेजी से काबुल पर कब्जा कर लिया पाकिस्तानी शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान ब्लास्ट हुआ था एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी मारे गए। 16 फरवरी को पाकिस्तान के बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई थी। इस हमले में 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया था। इससे पहले 6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, हमले में 31 लोगों की मौत हो गई है और 169 घायल हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। अक्टूबर में हिंसक झड़पों के बाद तनाव बढ़ा अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों तरफ के सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। कतर की मध्यस्थता से 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में वार्ता औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। दरअसल, 9 अक्टूबर को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे। तालिबान का कहना था कि ये हमले पाकिस्तान ने किए थे। हालांकि पाकिस्तान ने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि ये हमले उसने किए, लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी कि वह अपनी जमीन पर TTP को पनाह न दे। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बना TTP अफगानिस्तान में 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ रखा है। TTP को पिछले बारह साल में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा आतंकवादी खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके सीमा पार अफगानिस्तान से ट्रेनिंग लेकर पाकिस्तान लौटते और हमला करते हैं। हालांकि तालिबान दावा करता है कि वह TTP का समर्थन नहीं करता। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, देश में आतंकवादी हमले 2015 के बाद सबसे ज्यादा हो गए हैं और TTP ही इसकी मुख्य वजह है। वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के इन हमलों की वजह से ही पाकिस्तान आतंकवाद प्रभावित देशों की सूची में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। अमेरिकी हमले के जवाब में TTP का गठन पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित इलाके हैं। देश भर की कुल आतंकी घटनाओं में से 90% इसी इलाके में हुईं। रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे साल पाकिस्तान का सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन बताया गया। 2024 में इस ग्रुप ने 482 हमले किए, जिसकी वजह से 558 मौतें हुई थीं, जो 2023 के मुकाबले 91% ज्यादा हैं। दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… BLA का दावा- 17 पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लिया:10 रिहा किए, 7 अभी भी कैद में; अदला-बदली के लिए 7 दिन की मोहलत बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने रविवार को दावा किया कि उसने 17 पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लिया है। इनमें से 10 को छोड़ दिया गया है, जबकि बाकी 7 को कैद कर लिया है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Feb 2026 12:03:24 +0530</pubDate>
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<title>पीएम मोदी से आज मिलेंगे ब्राजीलियन प्रेसिडेंट डी सिल्वा:भारत&#45;ब्राजील के बीच ट्रेड डील पर मुहर संभव, लूला बोले थे&#45; हमारी एयरोस्पेस कंपनी यहां प्लांट खोलेगी</title>
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<description><![CDATA[ ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान भारत-ब्राजील के बीच ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते (ट्रेड डील) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ्स, डिफेंस, एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों पर खास फोकस है। इसमें ट्रेड डील समेत कई समझौतों को फाइनल करने की संभावना जताई जा रही है। लूला प्रधानमंत्री मोदी के न्योते पर भारत आए हैं। वे 18-22 फरवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं। लूला अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। मोदी से मुलाकात के बाद 22 फरवरी को वे सियोल (दक्षिण कोरिया) रवाना होंगे। भारत-ब्राजील संबंधों पर लुला ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार सिर्फ 15 अरब डॉलर है, जिसे 30-40 अरब तक बढ़ाना चाहिए। वे 260 ब्राजीलियाई व्यवसायियों के साथ आए हैं ताकि अंतरिक्ष, रक्षा, फार्मा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी हो। एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर भारत में प्लांट खोलेगी। दोनों देश ग्लोबल साउथ के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और उदाहरण पेश कर सकते हैं। लुला ने यह बात शुक्रवार को इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कही। क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ पर डील संभव आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख हिस्सा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की निर्भरता कम करने, ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को सपोर्ट करने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह समझौता दोनों देशों को कच्चे माल के निर्यातक से आगे बढ़ाकर प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और रिसाइक्लिंग में भागीदार बनाने पर जोर देता है। ब्राजील के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व ब्राजील दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रेयर अर्थ रिजर्व वाला देश है। जिसके पास लगभग 21 मिलियन मीट्रिक टन का विशाल भंडार है। इसके अलावा लिथियम, निकल, नियोबियम, ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स प्रचुर मात्रा में हैं। ब्राजील का लक्ष्य सिर्फ रॉ मटेरियल एक्सपोर्टर न रहकर वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (प्रोसेस्ड मिनरल्स) बनाना। भारत का लक्ष्य EV, बैटरी, सोलर और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन बनाना। भारत पहले से ही KABIL के जरिए अर्जेंटीना, चिली आदि में सक्रिय है, और अब ब्राजील को प्राथमिकता दे रहा है। यह समझौता BRICS और ग्लोबल साउथ की रणनीति का हिस्सा है, जहां दोनों देश अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच मिडिल पावर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। लूला ने एक इंटरव्यू में कहा &quot;ब्राजील में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की बहुतायत है, लेकिन हम इसे सिर्फ रॉ मटेरियल सैंक्चुअरी नहीं बनाना चाहते।&quot; वे भारत के साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश AI में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जहां क्रिटिकल मिनरल्स AI हार्डवेयर (चिप्स, सर्वर्स) के लिए जरूरी हैं। द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भारत और ब्राजील ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसमें 25% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। भारत का निर्यात 8.35 अरब डॉलर और ब्राजील से आयात 6.85 अरब डॉलर रहा। ब्राजील में भारतीय निवेश 15 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। ब्राजील का बिजनेस डेलीगेशन ऊर्जा, कृषि, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। उम्मीद है कि इस दौरे के दौरान कई निवेश प्रस्तावों और साझेदारी समझौतों पर चर्चा होगी। राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा यह राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा है। वे पहली बार 2004 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। आखिरी बार वे सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2025 में ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया के राजकीय दौरे पर गए थे, जो 57 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली राजकीय यात्रा थी। नवंबर 2025 में दोनों नेता जोहान्सबर्ग में जी20 बैठक के दौरान भी मिले थे। मोदी को 2025 में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान &#039;ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस&#039; से सम्मानित किया था। भारत-ब्राजील UN और BRICS जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं भारत और ब्राजील के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। साल 2006 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया। दोनों ही देश लोकतंत्र में भरोसा रखते हैं और दुनिया में शांति और बराबरी की बात करते हैं। भारत और ब्राजील BRICS, G20, UN और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ मिलकर काम करते हैं। रक्षा के मामले में दोनों देशों के बीच 2003 में समझौता हुआ था, जिसे 2006 में मंजूरी मिली। जुलाई 2025 में संयुक्त रक्षा समिति की बैठक ब्राजील में हुई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक-दूसरे के यहां आते-जाते रहते हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों साथ काम कर रहे हैं। भारत ने 2021 में ब्राजील का उपग्रह Amazonia-1 लॉन्च किया था। तेल और गैस के मामले में ब्राजील, अमेरिका महाद्वीप में भारत का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट सेंटर है। बॉयो फ्यूल के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ब्राजील ग्लोबल बॉयोफ्यूल अलायंस का सह-संस्थापक सदस्य है। कृषि, फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन भी दोनों देशों के सहयोग के अहम क्षेत्र हैं। भारत की गिर और कांकरेज जैसी गायों की नस्लें पहले ब्राजील भेजी गई थीं, जिन्हें वहां की जरूरत के हिसाब से विकसित किया गया। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा का इंटरव्यू पढ़िए… सिल्वा ने इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की। यह इंटरव्यू भारत में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुआ, जहां लुला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मित्रता की सराहना की और कहा कि दोनों देश मिलकर भारत और ब्राजील के इतिहास को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 1. सवाल: ब्रिक्स को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, यह असल में कितना ताकतवर बन सकता है? जवाब: ब्रिक्स पिछले 30 साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। भारत-चीन अकेले दुनिया की आधी आबादी हैं। ब्रिक्स से नई व्यापार, संस्कृति और रिश्ते बन सकते हैं। मैं बहुपक्षवाद चाहता हूं, कोई नया शीत युद्ध नहीं। ब्राजील अमेरिका, चीन, भारत, रूस सबके साथ व्यापार करना चाहता है। ब्रिक्स ने न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाया, जो आईएमएफ-वर्ल्ड बैंक से अलग है। ब्रिक्स हमारी उम्मीद है। 2. सवाल: ब्रिक्स में मतभेद कैसे दूर होंगे? जवाब: सही फैसले लेकर मजबूत होगा। जैसे ट्रम्प के टैरिफ पर ब्रिक्स ने बैठक की और बयान दिया। गाजा, यूक्रेन पर भी ब्रिक्स ने रुख जाहिर किया। हम यूक्रेन पर हमले की निंदा करते हैं, गाजा में नरसंहार की भी। ब्राजील-भारत रिश्ते मजबूत होने चाहिए। मैं मोदी जी से कहता हूं कि दोनों देशों का व्यापार 15 अरब से बढ़ाकर 30-40 अरब करना चाहिए। 300 ब्राजीलियाई बिजनेसमैन आए हैं, साझेदारी बढ़ेगी। 3. सवाल: क्या ब्रिक्स ग्लोबल इकोनॉमी को डी-डॉलराइज कर सकता है? जवाब: कोई ब्रिक्स मुद्रा बनाने की बात नहीं है। हम सिर्फ अपनी मुद्राओं में व्यापार की कोशिश कर रहे हैं, जैसे ब्राजील-भारत या ब्राजील-चीन। डॉलर पर निर्भरता कम करनी चाहिए, लेकिन रातोंरात नहीं। यह फायदेमंद हो तो शुरू करेंगे। अमेरिका को चिंता है क्योंकि डॉलर मजबूत है, लेकिन हमें सोचना चाहिए कि क्या हम अपनी मुद्राओं से व्यापार कर सकते हैं। 4. सवाल: ट्रम्प से आपका रिश्ता कैसा रहेगा? जवाब: मैं बुश, ओबामा, बाइडेन से अच्छा रिश्ता रखता था, ट्रम्प से भी अच्छा रखना चाहता हूं। ब्राजील-अमेरिका 200 साल पुराने रिश्ते हैं। ट्रम्प से मार्च में मिलूंगा, टैरिफ, ड्रग तस्करी, क्रिटिकल मिनरल्स पर बात होगी। ब्राजील संप्रभुता पर समझौता नहीं करेगा। ट्रम्प मार्केटिंग एक्सपर्ट हैं, लेकिन पर्सनल में शांत रहते हैं। हम 80 साल के हैं, गंभीरता से बात करेंगे। 5. सवाल: वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका ने पकड़ लिया। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई सही नहीं है। किसी देश का राष्ट्रपति दूसरे देश में घुसकर उसके राष्ट्रपति को पकड़ना गलत है। मादुरो का वेनेजुएला में ही ट्रायल होना चाहिए, विदेश में नहीं। वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल करना जरूरी है, बिना विदेशी हस्तक्षेप के। 6. सवाल: भारत को लेकर आपका मकसद क्या होगा? जवाब: मैं 80 साल का हूं लेकिन 30 साल वाले जोश से लड़ रहा हूं। मेरा युद्ध भूख, असमानता, महिलाओं पर हिंसा के खिलाफ है। महात्मा गांधी मेरा आदर्श हैं। मैं 120 साल तक जीऊंगा। भारत और ब्राजील को आर्थिक महाशक्तियां बनाना मेरा मकसद है। मोदी जी के साथ मिलकर इतिहास बदलेंगे। 1945 के मॉडल से अब काम नहीं चलेगा। भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान, अफ्रीकी देशों को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। यूएन को मजबूत बनाना होगा ताकि युद्ध रोके जा सकें। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया: नए कानून के तहत ऐलान; 3 घंटे पहले सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द किए थे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 09:58:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>NASA ने माना&#45; सुनीता का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था:इसे कल्पना चावला के साथ हुए हादसे जैसा माना; घटना को गंभीर कैटेगरी में रखा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को दुर्घटना की टाइप ए कैटेगरी में रखा गया है। इसी कैटेगरी को दुर्घटना की सबसे गंभीर कैटेगरी माना जाता है। चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए भी इसी कैटेगरी का इस्तेमाल किया गया था। कोलंबिया शटल दुर्घटना में ही भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन हुआ था। 19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमान ने लिखा- सुनीता विलियम्स के मिशन में गंभीर खामियां थी। उन्होंने कमियों को नजरअंदाज करने के लिए एजेंसी और बोइंग की कड़ी आलोचना की। दरअसल, सुनीता विलियम्स साल 2024 में 8 दिन के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंची थीं, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में 9 महीने से ज्यादा समय लग गया था। जनवरी में सुनीता विलियम्स ने 27 साल बाद रिटायरमेंट लिया NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के बाद रिटायरमेंट लिया है। उनका रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से लागू हुआ। हालांकि NASA ने इसकी घोषणा 20 जनवरी को की थी। सुनीता 27 साल पहले 1998 में नासा से जुड़ी थीं। उन्होंने NASA के 3 मिशन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। पहली बार वह 9 दिसंबर 2006 में अंतरिक्ष में गई थी। सुनीता ने अंतरिक्ष में 9 स्पेसवॉक की। इस दौरान उन्होंने 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री में सबसे ज्यादा है। सुनीता बोलीं- स्पेस से धरती देखने पर महसूस होता है कि हम सब एक हैं सुनीता पिछले महीने भारत दौरे पर आईं थीं। उन्होंने दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर&#039; सेमिनार में हिस्सा भी लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। भारत आना घर वापसी जैसा: भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। वहीं, चांद पर जाने के NDTV के सवाल पर मजाकिया लहजे में कहा, &#039;मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा। अंतरिक्ष में बिताए दिन पर: क्या स्पेस ट्रैवल ने उनकी जिंदगी के नजरिए को बदला है, तो उन्होंने कहा- हां, बिल्कुल। जब आप धरती को स्पेस से देखते हैं, तो महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें ज्यादा करीब से मिलकर काम करना चाहिए। अंतरिक्ष में फैले कचरे पर: पिछले एक दशक में यह एक बड़ी चुनौती बन गई है और इसे मैनेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है। अंतरिक्ष मिशन को याद किया: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में बिताए समय और उस वक्त के चुनौतीपूर्ण दौर पर कहा, जब 8 दिन का मिशन तकनीकी दिक्कतों के कारण नौ महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान ISS पर मल्टी-कल्चरल क्रू के साथ त्योहार मनाने के विजुअल्स भी दिखाए गए। अब जानिए कल्पना चावला के बारे में… भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने पहली बार 19 नवंबर 1997 को स्पेस के लिए उड़ान भरी थी। अपनी पहली स्पेस यात्रा में वो 372 घंटे अंतरिक्ष में रही थीं। इसके बाद उन्हें 16 जनवरी 2003 को दूसरी बार अंतरिक्ष में जाने का मौका मिला। 1 फरवरी 2003 को कल्पना चावला को सुरक्षित धरती पर वापस लौट आना था, लेकिन उनका यह मिशन फेल हो गया था। चावला के स्पेसक्राफ्ट कोलंबिया शटल STS-107 के टेकऑफ करते वक्त यान के ही फ्यूल टैंक से निकले इंसुलेटिंग फोम के टुकड़े शटल के बाएं पंख से टकरा गए थे। इस वजह से जैसे ही कल्पना चावला का स्पेसक्राफ्ट धरती के वायुमंडल में पहुंचा तो हवा के तेज घर्षण की गर्मी से एक बड़ा धमाका हुआ और सभी 7 अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें… ----------------- ये खबर भी पढ़ें… भास्कर से बोलीं सुनीता विलियम्स- भारतीय स्पेस प्रोग्राम से जुड़ना चाहूंगी, अंतरिक्ष से हिमालय देखना शानदार भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने स्पेस से लौटने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दैनिक भास्कर इकलौता भारतीय न्यूज संस्थान रहा, जिसे सुनीता विलियम्स से सवाल पूछने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस प्रोग्राम में अपनी जगह बना रहा है। वह इसका हिस्सा बनना चाहेंगी। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 09:58:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>लुधियाना में तलवार लेकर लुटेरों के पीछे दौड़ी NRI महिला:बाइक सवार बदमाशों ने चलती कार के शीशे पर अंडे फेंके; VIDEO सामने आया</title>
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<description><![CDATA[ पंजाब में सोशल मीडिया पर एक NRI महिला की दिलेरी का वीडियो वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो लुधियाना के डेहलों का है। वीडियो में महिला लुटेरों के पीछे तलवार लेकर दौड़ रही है। दावा किया जा रहा है कि यह महिला NRI है। वह ऑस्ट्रेलिया से आई है। वीडियो में मोटरसाइकिल सवार 2 लुटेरे कार के शीशे पर अंडे मारकर कार सवार महिलाओं को लूटने की कोशिश करते हैं। इतने में कार चला रही NRI महिला तलवार लेकर बाहर निकलने लगती है तो उसके साथ बैठी एक बुजुर्ग महिला उसे रोकने की कोशिश करती है। महिला हाथ में तलवार लेकर बाहर निकलती है और लुटेरों का पीछा करते हुए दौड़ने लगती है। यही नहीं महिला लुटेरों को ललकार रही है। इस पूरी घटना को कार में बैठी अन्य महिला ने शूट किया है। घटना के 2 PHOTOS… वीडियो में क्या-क्या दिख रहा… वीडियो के असली होने पर शक, इसके 4 कारण… ॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबी NRI दूल्हे की शादी में नोटों की बारिश:दावा- दूल्हा-दुल्हन पर ₹8 करोड़ उड़ाए गए; DJ वाला बोला- डॉलर समेत ₹3 लाख उठाए तरनतारन जिले के पट्टी क्षेत्र में एक NRI की शादी पंजाब में चर्चा का विषय बन गई। शादी समारोह के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दिख रहा है कि दूल्हा अपनी दुल्हन पर नोटों की बारिश कर रहा है। इस दौरान रिश्तेदार खड़े होकर इस सीन को देख रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:बच्चों की सोशल मीडिया पर लत पर कोर्ट ने जुकरबर्ग से पूछा&#45; क्या 9 साल का बच्चा आपकी शर्तें पढ़ेगा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के लॉस एंजिलिस की एक अदालत में मार्क जुकरबर्ग से कड़े सवाल पूछे गए। मामला बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जज और वकीलों ने पूछा कि क्या इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों को जानबूझकर ऐसा कंटेंट दिखाते हैं जिससे उन्हें लत लग जाए और उन्हें नुकसान हो। यह मामला इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जुकरबर्ग कुछ सवालों पर असहज नजर आए और वकीलों की दलीलों पर नाराज भी दिखे। कोर्ट में जुकरबर्ग ने कहा कि उनकी कंपनी ने कम उम्र के बच्चों की पहचान करने के तरीके बेहतर किए हैं। उन्होंने यह भी माना कि कई बच्चे अकाउंट बनाते समय अपनी असली उम्र नहीं बताते और झूठी उम्र डाल देते हैं। कंपनी ऐसे अकाउंट्स को पहचानकर हटाने की कोशिश करती है। इस पर केस करने वाले वकीलों ने सवाल उठाया कि क्या कोई 9 साल का बच्चा अकाउंट बनाते समय लिखी गई लंबी और मुश्किल शर्तें पढ़ सकता है? उनका कहना था कि इतनी छोटी उम्र के बच्चे नियम और शर्तें समझ ही नहीं सकते, फिर कंपनी कैसे मान लेती है कि वे सब समझकर अकाउंट बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… भारत आज अमेरिकी गठबंधन &#039;पैक्स सिलिका&#039; में शामिल हो सकता है, ये सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन सुरक्षित बनाने की पहल भारत शुक्रवार को अमेरिका की अगुआई वाले रणनीतिक गठबंधन &#039;पैक्स सिलिका&#039; में शामिल हो सकता है। यह गठबंधन दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मकसद दुनिया में AI और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और गैर-सहयोगी देशों पर निर्भरता कम करना है। भारत के शामिल होने से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे। खासकर महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन और तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। इससे सुरक्षित और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी। यह फैसला ऐसे समय में हो रहा है जब दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है। दोनों देश आपसी रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। अमेरिका के अलावा इस गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, UAE और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। पैक्स सिलिका क्या करेगा? अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग ने कहा कि 20वीं सदी में तेल और स्टील ने दुनिया को आगे बढ़ाया, लेकिन 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर पर चल रही है। कंप्यूटर और AI सिस्टम बनाने के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज जरूरी हैं। पैक्स सिलिका का मकसद भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर एक साझा योजना बनाना है, ताकि भविष्य की AI और टेक्नोलॉजी सिस्टम तैयार किए जा सकें। यह पहल टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन के हर हिस्से को कवर करती है, जैसे ऊर्जा, जरूरी खनिज, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, चिप्स और AI मॉडल। इसमें शामिल देश तकनीकी प्रगति, आर्थिक सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। क्या है इसका बड़ा मकसद? इस गठबंधन का मकसद टेक्नोलॉजी में आगे रहने वाले देशों को एक साथ लाना है। मिलकर काम करने से AI की पूरी आर्थिक क्षमता का फायदा उठाया जा सकेगा और नई AI आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। पैक्स सिलिका के घोषणा पत्र में कहा गया है कि AI की तकनीकी क्रांति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। यह दुनिया की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल सप्लाई चेन को बदल रही है। AI की वजह से ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, क्योंकि बड़े कंप्यूटर सिस्टम और डेटा सेंटर को चलाने के लिए ज्यादा बिजली चाहिए। इसके साथ ही जरूरी खनिज, चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इस पहल का एक बड़ा लक्ष्य यह है कि कोई भी देश किसी एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भर न रहे। यानी कच्चे माल, टेक्नोलॉजी या उत्पादों के लिए किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भरता कम की जाए, ताकि व्यापार में दबाव या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। दूसरा मकसद सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार करना है और यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक तकनीक की चोरी या गलत इस्तेमाल न हो सके। ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैं पीएम मोदी को अच्छी तरह जानता हूं। ट्रम्प ने कहा कि मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करूंगा। ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किसी देश के थे। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 09:47:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प की &amp;apos;बोर्ड ऑफ पीस&amp;apos; मीटिंग में भारत शामिल हुआ:गाजा के लिए ₹1.5 लाख करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान; 50 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में हुई। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया। भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था। &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा। वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। वॉशिंगटन में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित बाकी देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए। बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ी तस्वीरें… ट्रम्प बोले- ये रकम युद्ध पर खर्च के मुकाबले बहुत छोटी ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। UN की निगरानी करेगा ट्रम्प का बोर्ड ऑफ पीस 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि यह बोर्ड अब दुनिया भर के संघर्ष सुलझाने में भी भूमिका निभाएगा। ट्रम्प ने कहा, बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी करेगा और सुनिश्चित करेगा कि वह ठीक से काम कर रहा है। वहीं, &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; की पहली बैठक से ठीक पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक हुई। इसमें वेस्ट बैंक में इजरायल के नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशों की आलोचना की गई। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ शामिल हुए बैठक में भारत समेत ज्यादातर देशों ने सीनियर अधिकारियों को भेजा। वहीं पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुद पहुंचे। जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन उन देशों में हैं, जो बोर्ड में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन ऑब्जर्वर के तौर पर भाग लिया। ट्रम्प ने दावा किया, &#039;सभी ने गाजा पर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और जिन्होंने नहीं माना है वे भी जल्द इसे मान लेंगे।&#039; बैठक की चर्चा का केंद्र एक ऑर्मड इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स बनाना रहा, जिसका काम सुरक्षा बनाए रखना और हमास को निरस्त्र कराना होगा। यह इजराइल की प्रमुख मांग है और सीजफायर डील का अहम हिस्सा भी। हालांकि हमास ने अब तक निरस्त्रीकरण को लेकर बहुत भरोसा नहीं दिलाया है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया था कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। भेजे गए एक मसौदा (चार्टर) में कहा है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। बैठक में ट्रम्प ने ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया इंटरनेशनल स्टैबलाइजेशन फोर्स के प्रमुख मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स ने कहा कि योजना के तहत गाजा के लिए 12,000 पुलिस और 20,000 सैनिकों की जरूरत होगी। बैठक के दौरा राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए &#039;10 दिनों का अल्टीमेटम&#039; दिया है। ट्रम्प ने कहा कि अगले 10 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ईरान के साथ कोई समझौता होगा या अमेरिका को सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनना पड़ेगा। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर इस बार सहमति नहीं बनी तो हमें एक कदम आगे (सैन्य कार्रवाई की ओर) बढ़ना पड़ सकता है। ------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 09:47:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; मैंने भारत&#45;PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये बात ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में कही। ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैं पीएम मोदी को अच्छी तरह जानता हूं। ट्रम्प ने कहा कि मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करूंगा। ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किस देश के थे। ट्रम्प ने कहा- पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने कहा था कि ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाकर 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई। पहलगाम हमले के बाद भारत ने सैन्य कार्रवाई की थी पाकिस्तानी आतंकियों ने पिछले साल 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में 26 भारतीय टूरिस्ट्स को मार दिया था। इसके बाद भारत ने 6 और 7 मई की रात पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की थी। इन ठिकानों में पाकिस्तान के पंजाब राज्य के बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके भी शामिल थे। इसके जवाब में 8 मई की शाम को पाकिस्तान ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला करने की कोशिश की। उसने तुर्किये और चीन के ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन इसमें उसे कामयाबी नहीं मिली। भारत की एयरफोर्स पूरी तरह से एक्टिव थी और छोटे से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम तक हर हथियार तैयार था। इन हथियारों ने पाकिस्तान के ड्रोन्स को काफी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना ने भी सीमा के दूसरी तरफ भारी तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह से उलझा कर रखा और मंसूबे नाकाम कर दिए। ट्रम्प बोले- अप्रैल में चीन दौरे पर जाऊंगा चीन को लेकर ट्रम्प ने कहा कि उनका राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल में चीन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब वे चीन गए थे तो राष्ट्रपति शी ने उनका शानदार स्वागत किया था। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने इतने सारे सैनिक एक साथ कभी नहीं देखे थे, जो बिल्कुल एक ही कद के थे। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर वे हेलमेट उतार देते तो उनके सिर पर बिलियर्ड खेला जा सकता था। बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा। बोर्ड के मसौदे (चार्टर) में कहा गया है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। ---------------- यह खबर भी पढ़ें… दावा- ईरान पर इस हफ्ते हमला कर सकता है अमेरिका:2003 के बाद सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात, कई हफ्ते चलेगा मिलिट्री ऑपरेशन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने 2003 के इराक युद्ध के बाद अपनी सबसे बड़ी एयर फोर्स तैनात की है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 09:47:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>गाजा में कंट्रोल बढ़ा रहा हमास:प्रभाव वाले इलाकों में 90% मौजूदगी; ट्रम्प पीस बोर्ड की बैठक आज, इसके दस्तावेजों में गाजा का ही जिक्र नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अक्टूबर में अमेरिका की पहल पर लागू हुए सीजफायर के बाद गाजा में हमास ने अंदरूनी मोर्चे पर अपनी पकड़ फिर मजबूत कर ली है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब ने कहा, ‘हमास ने उन क्षेत्रों के 90% से अधिक हिस्से पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है जहां वह मौजूद है।’ दियाब ने कहा, ‘पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़कों पर लौट आई हैं। वे अपराध रोकने और जिन लोगों को सहयोगी या विरोधी मानते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।’ इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गुरुवार को वॉशिंगटन में अपनी पहली बैठक करेगा। इसमें करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में गाजा पट्टी के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जाएगी। हालांकि, टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, पीस बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का ही स्पष्ट जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मिशन गाजा से कहीं आगे, पूरी दुनिया में शांति लाना है। कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का पर्सनल प्रोजेक्ट बताया और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। विश्व नेताओं को बुला रहे ट्रम्प, पाकिस्तान भी शामिल ट्रम्प ने सोमवार को कहा था, ‘हम सभी विश्व नेताओं को बुला रहे हैं।’ हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि कितने राष्ट्राध्यक्ष खुद शामिल होंगे। बैठक डोनाल्ड जे. ट्रम्प यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में होगी। इस जगह का नाम हाल ही में बदला गया था। जर्मन न्यूज DW के मुताबिक करीब 60 देशों को बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा गया था, जिनमें से लगभग 27 देशों ने शामिल होने पर सहमति दी है। इनमें अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन जैसे नेता भी शामिल हैं। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने निमंत्रण स्वीकार किया है, लेकिन वे खुद नहीं आ रहे, उनकी जगह विदेश मंत्री आएंगे। बोर्ड में शामिल आधे से ज्यादा देश, अमेरिका की उस सूची में हैं जिनके नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। इनमें बेलारूस भी शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बैठक में शामिल होंगे। वहीं, मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश केवल निचले स्तर के अधिकारियों को भेज रहे हैं या ऑब्जर्वर के रूप में भाग लेंगे। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार आएंगे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। ट्रम्प बोले- गाजा के लिए 5 बिलियन डॉलर देंगे सदस्य देश बोर्ड के चार्टर के मुताबिक, तीन साल की अस्थायी सदस्यता मुफ्त है। लेकिन स्थायी सीट के लिए पहले साल में 1 बिलियन डॉलर नकद देने की शर्त रखी गई है। यह साफ नहीं है कि किन देशों ने यह राशि दी है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि सदस्य देश गाजा में मानवीय राहत और पुनर्निर्माण के लिए 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा देने का वादा करेंगे। साथ ही ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) और स्थानीय पुलिस के लिए हजारों जवान तैनात करने की प्रतिबद्धता भी जताई जाएगी। उन्होंने हमास से पूरी तरह से हथियार छोड़ने की मांग दोहराई है। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना गाजा से नहीं हटेगी। इजराइल ने हमास को 60 दिन का समय दिया है कि वह पूरी तरह हथियार छोड़ दे। ट्रम्प के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुशनर ने दावोस में गाजा के दक्षिणी हिस्से में छह नए शहर बसाने और समुद्री तट पर पर्यटन परियोजना बनाने की योजना पेश की थी। हालांकि, इसके लिए फंडिंग और समय-सीमा अभी तय नहीं है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को &#039;कार्यकारी बोर्ड&#039; की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। इजराइल का आरोप- हमास फिर से संगठित हो रहा इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदाव शोशानी ने कहा, &#039;हमास युद्धविराम को फिर से संगठित होने का समय मान रहा है। जब तक उसे निरस्त्र नहीं किया जाता, युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता।&#039; IDF के मुताबिक युद्धविराम के बाद भी हमास की ओर से रोजाना हमले हो रहे हैं और अब तक चार इजराइली सैनिक मारे जा चुके हैं। दूसरी ओर, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजराइली हमलों में युद्धविराम के बाद 603 फलस्तीनी मारे गए हैं। हाल में IDF ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें मलबे के बीच दौड़ते कुछ लोगों को हथियारबंद आतंकी बताया गया था। अब गाजा जंग को जानिए… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 10:58:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में बर्फ की चट्टान खिसकने से 8 लोगों की मौत, 1 लापता; 45 साल में सबसे घातक हादसा</title>
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<description><![CDATA[ कैलिफोर्निया के सिएरा नेवादा पर्वतों में मंगलवार को बर्फ की चट्टान खिसकने से 15 लोगों का एक ग्रुप फंस गया। यह ग्रुप ब्लैकबर्ड माउंटेन गाइड्स कंपनी के साथ तीन दिनों की गाइडेड ट्रिप पर था। दोपहर करीब 11:30 बजे हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई है और एक 1 भी लापता है, जिसे मृत मान लिया गया है। बुधवार को नेगाडा काउंटी शेरिफ शैनन मून ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। मृतकों में कंपनी के तीन गाइड भी शामिल हैं। कुल मृत और लापता लोगों में सात महिलाएं और दो पुरुष हैं। 6 लोगों को मंगलवार शाम को बचाया गया। यह अमेरिका में पिछले 45 सालों का सबसे घातक हिमस्खलन है, जो 1981 में वॉशिंगटन के माउंट रेनियर पर हुए हादसे के बाद दूसरा सबसे बड़ा है, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। हादसा होने के समय इलाके में भारी बर्फबारी हो रही थी। यहां पिछले 36 घंटों में 2 से 3 फीट नई बर्फ गिरी और प्रति घंटा 2-4 इंच बर्फ गिर रही थी। तेज हवाओं से सफेद धुंध की स्थिति बन गई थी, जिससे हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके और ग्राउंड रेस्क्यू टीमों को भी काफी मुश्किल हुई। सिएरा एवलांच सेंटर ने पहले से ही हाई भारी बर्फबारी के खतरे की चेतावनी जारी की थी और यात्रा न करने की सलाह दी थी। मृतकों के शव बर्फ में दबे हुए हैं और मौसम साफ होने पर रिकवर किए जाएंगे, ताकि पोस्टमॉर्टम के बाद परिवारों को सौंपे जा सकें। शेरिफ ने कहा कि कंपनी के फैसले पर अभी जांच चल रही है कि इतने खतरनाक हालात में ग्रुप को क्यों भेजा गया। कंपनी के अनुसार, ट्रिप के लिए ग्रुप को अच्छी फिजिकल फिटनेस की जरूरत होती है। यह हादसा लेक ताहो के उत्तर-पश्चिम में डोनर पास के पास हुआ, जहां इंटरस्टेट 80 भी बंद हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- सोशल मीडिया यूजर के दिमाग से खेल रहा, यह फ्री स्पीच के लिए खतरनाक भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने AI, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके प्रमुखों पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को यह नहीं पता कि उन्हें किस तरह कंटेंट दिखाया जा रहा है, तो फ्री स्पीच बकवास है। मैक्रों ने कहा कि असली समस्या अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि वे ऐसे एल्गोरिदम हैं जो तय करते हैं कि यूजर क्या देखेगा और किस दिशा में जाएगा। मैक्रों ने कहा कि कुछ टेक कंपनियां खुद को फ्री स्पीच का समर्थक बताती हैं, लेकिन एल्गोरिदम को अपने कब्जे में रखा है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम नियमों और निर्देशों का एक ग्रुप है जो प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को छांटता है, प्राथमिकता देता है और व्यवस्थित करता है। यह यूजर के पिछले व्यवहार, पसंद-नापसंद, और सहभागिता का विश्लेषण करके, उनकी फीड में सबसे प्रासंगिक सामग्री को दिखाता है। मैक्रों ने चेतावनी दी कि अगर लोगों को यह नहीं पता कि एल्गोरिदम कैसे बनाए गए, कैसे टेस्ट और ट्रेन किए गए, तो वे उन्हें किस दिशा में ले जा रहे हैं। इसके लोकतांत्रिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। मैक्रों ने इस दावे को भी खारिज किया कि प्लेटफॉर्म खुद को तटस्थ बता सकते हैं, जबकि वे चुपचाप यूजर्स को ज्यादा चरमपंथी कंटेंट की ओर धकेलते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको यह नहीं पता कि आपको किस तरह इस फ्री स्पीच की ओर ले जाया जा रहा है, तो यह फ्री स्पीच नहीं है। खासकर तब, जब आपको एक नफरती भाषण से दूसरे नफरती भाषण तक पहुंचाया जा रहा हो।” उन्होंने कहा कि वे एक पारदर्शी व्यवस्था चाहते हैं, जहां अलग-अलग विचारों के बीच जाने का रास्ता साफ हो। साथ ही उन्होंने नस्लवादी और नफरती कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की। मैक्रों ने कहा, “मैं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना चाहता हूं। मैं नस्लवादी और नफरती भाषण से बचना चाहता हूं।” मैक्रों की सरकार पहले भी फ्रांस और यूरोपीय संघ में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी की वकालत करती रही है। उनका कहना है कि बिना नियंत्रण वाले एल्गोरिदम सिर्फ यूजर्स के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 10:58:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दावा&#45; ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका:ये मिलिट्री ऑपरेशन कई हफ्ते चलेगा, वेनेजुएला से भी खतरनाक कार्रवाई होगी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ गया है और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आने वाले दिनों या हफ्तों में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है। अमेरिकी न्यूज एजेंसी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तो वह छोटी या प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा ऑपरेशन होगा। एक व्हाइट हाउस अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में हमले की संभावना 90% तक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ऑपरेशन पिछले महीने वेनेजुएला में हुई सीमित कार्रवाई से कहीं बड़ा होगा और संभव है कि इसे इजराइल के साथ मिलकर अंजाम दिया जाए। इसका निशाना ईरान का परमाणु और मिसाइल ढांचा हो सकता है। इजराइली अधिकारी बोले- संघर्ष की बहुत ज्यादा आशंका इजराइल की सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी आमोस यादलिन ने कहा कि टकराव अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, लेकिन एक महाशक्ति कुछ ही दिनों में युद्ध शुरू नहीं करती। कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यादलिन ने यह भी कहा कि कई लोग हमले के खिलाफ हैं और पेंटागन भी पूरी तरह साफ नहीं है कि वह इस कार्रवाई से क्या हासिल करना चाहता है, लेकिन राष्ट्रपति काफी दृढ़ नजर आ रहे हैं। ट्रम्प का &#039;सभी ऑप्शन खुले हैं&#039; वाला बयान असली सैन्य तैयारी के बारे में बताता है। लड़ाई खत्म करने की डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु कूटनीति के साथ-साथ बड़े स्तर पर सैन्य तैयारी भी शुरू कर दी है। मंगलवार को उनके सलाहकार जेराड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन घंटे तक बातचीत की। दोनों पक्षों ने कहा कि बातचीत में कुछ डेवलपमेंट हुआ है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी अब भी कुछ बड़े मुद्दों पर सहमति बनने को लेकर डाउट में हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कुछ मामलों में बातचीत अच्छी रही, लेकिन कई मुद्दों पर राष्ट्रपति ने जो &#039;रेड लाइन&#039; तय की हैं, उन्हें ईरान मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति समझौता चाहते हैं, लेकिन यह भी संभव है कि कूटनीति अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुकी हो। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य-पूर्व में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी काफी बड़ी हो चुकी है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर, करीब एक दर्जन युद्धपोत, सैकड़ों फाइटर जेट और कई एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं और और भी सैन्य उपकरण भेजे जा रहे हैं। ओपन-सोर्स ट्रैकिंग के मुताबिक 150 से ज्यादा कार्गो उड़ानें हथियार और गोला-बारूद लेकर क्षेत्र में पहुंची हैं। साथ ही 50 से ज्यादा फाइटर जेट, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, मिडिल ईस्ट की ओर भेजे गए हैं। ट्रम्प के एक एक एडवाइजर ने कहा कि कुछ लोग राष्ट्रपति को ईरान से युद्ध न करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की संभावना 90% है। इजराइल के दो अधिकारियों ने भी कहा कि देश &#039;कुछ ही दिनों में&#039; युद्ध की स्थिति के लिए तैयारी कर रहा है और ऐसी कार्रवाई की वकालत कर रहा है जो ईरान की सत्ता को चुनौती दे सके। रूस ने ईरान के साथ नेवी एक्सरसाइज का ऐलान किया रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि जून 2025 में ईरानी मिसाइलों से 32 लोगों की मौत हुई थी और 3,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लिकुड पार्टी के सांसद बोआज बिस्मुथ ने कहा कि इजराइल का कोई भी नागरिक ऐसा नहीं है जो दिन में कई बार यह न सोचता हो कि ईरान के साथ संघर्ष कब होगा। उन्होंने कहा कि जनता और सरकार दोनों अलग-अलग संभावित हालात के लिए तैयार हैं। इस बीच ईरान और रूस ने ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने का ऐलान किया है। वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होरमुज स्ट्रैट के पास सैन्य अभ्यास किया और कुछ घंटों के लिए वहां आवाजाही आंशिक रूप से रोक दी। हॉर्मुज स्ट्रैट दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम रास्ता हॉर्मुज स्ट्रैट अपनी सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर (21 मील) चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का तेल और गैस यहीं से बाहर जाता है। ज्यादातर खेप एशिया के लिए होती है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस रास्ते का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है, हालांकि सऊदी अरब और यूएई ने कुछ पाइपलाइन बनाई हैं जो इस मार्ग को बायपास करती हैं। हालांकि स्ट्रैट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है और सभी जहाजों के लिए खुला है, लेकिन इसके किनारों के क्षेत्रीय पानी पर ईरान और ओमान का नियंत्रण है। ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। -------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 10:58:07 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी सांसद बोले&#45; कुत्तों&#45;मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था&#45; न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंगलवार को X पर लिखा कि अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े तो यह मुश्किल फैसला नहीं है। दरअसल, रैंडी फाइन ने यह टिप्पणी न्यूयॉर्क में एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी एक्टिविस्ट नेरदीन किसवानी की पोस्ट के जवाब में की थी। किसवानी ने लिखा था कि कुत्ते अपवित्र हैं। ऐसे समय में जब न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, कुत्तों को घर के अंदर नहीं रखना चाहिए। इन्हें बैन करना चाहिए। इसपर फाइन ने कहा कि दुनिया में 57 ऐसे देश हैं जहां शरिया कानून लागू है। अगर आप ऐसा चाहते हैं, तो वहीं चले जाइए। अमेरिका 58वां मुस्लिम देश नहीं बनेगा। बाद में किसवानी ने कहा था कि वह बस मजाक कर रही थीं। उन्होंने कहा कि यह न्यूयॉर्क में सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों की गंदगी को लेकर चल रही बहस से जुड़ा था। उनका कहना था कि यह उन लोगों के लिए कहा गया था, जो राजनीति में मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव को खतरा मानते हैं। फाइन पर मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप किसवानी ने होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपने फार्म पर एक कुत्ते को गोली मारने की बात कही थी। किसवानी ने लिखा, ‘क्रिस्टी नोएम ने अपने ही कुत्ते को गोली मारने की बात कही और ज्यादातर लोगों ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन न्यूयॉर्क में एक मुस्लिम कह दे कि शहर पालतू जानवरों के लिए सही जगह नहीं है, तो उसे मौत की धमकियां मिलने लगती हैं।’ उन्होंने फाइन पर फिलिस्तीनियों और मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की ओर से आ रही मुस्लिम विरोधी भाषा पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज रैंडी फाइन के इस बयान पर वॉशिंगटन में भारी विरोध हुआ है। डेमोक्रेट्स, सिविल राइट्स ग्रुप्स और कई नेताओं ने इसे इस्लामोफोबिया और घृणा फैलाने वाला बताया। अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल (CAIR) ने फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि उनके इस्तीफे की मांग पहले से चल रही है। यासमिन अंसारी ने हाउस स्पीकर से तुरंत निंदा करने को कहा। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने फाइन को नस्लवादी कहकर इस्तीफा देने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन ने भी उन्हें कड़ी फटकार लगाई। फाइन बोले- कुत्ते हमारे परिवार के सदस्य, इन्हें नहीं छोड़ेंगे फाइन ने विरोध पर पलटवार किया और कहा कि असली समस्या किसवानी का बयान है, जो लिखित रूप में था। फाइन ने न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका पोस्ट किसवानी के बयान के जवाब में था, जो शरिया लॉ (इस्लामी कानून) थोपने की कोशिश है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में कुत्ते परिवार के सदस्य हैं, और हम यूरोप की तरह शर्मिंदा होकर हार नहीं मानेंगे।’ उन्होंने कुत्तों की तस्वीरें शेयर कीं, जिन पर ‘डोंट ट्रेड ऑन मी’ (ऐतिहासिक गैड्सडेन फ्लैग का स्लोगन) लिखा था। इस पोस्ट को 42 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले, हजारों लाइक्स, रीपोस्ट्स और कमेंट्स। फाइन ने क्रिटिक्स को जवाब दिया कि किसवानी का बयान लिखित था और लाखों ने देखा। पोस्ट के तुरंत बाद वॉशिंगटन और पूरे अमेरिका में हंगामा मच गया। इसे इस्लामोफोबिया, बिगॉट्री (कट्टरता) और डीह्यूमनाइजेशन कहा गया। फाइन पहले भी गाजा से जुड़े बयानों पर आलोचना झेल चुके हैं। 2025 में उन्होंने गाजा पर कहा था कि गाजावासियों को भूखा मरने दो जब तक इजराइली बंधक रिहा न हों। उन्होंने गाजा का हाल हिरोशिमा और नागासाकी जैसा करने की बात भी की थी। फाइन बोले- यूरोप की तरह कमजोरी नहीं दिखाएंगे फाइन का कहना है कि यूरोप के लोग मुसलमानों के सामने शर्मिंदा होकर या दबाव में आकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और आजादी को खो चुके हैं। वे नहीं चाहते कि अमेरिका में भी ऐसा हो। उनका कहना है कि अमेरिका, यूरोप जैसी कमजोरी नहीं दिखाएंगे। फाइन और उनके जैसे कई राइट-विंग ट्रम्प समर्थक अक्सर यह दावा करते हैं कि यूरोप में इस्लामिक टेकओवर हो रहा है। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर मुस्लिम इमिग्रेशन से नो-गो जोन्स बन गए हैं, जहां स्थानीय कानून कमजोर पड़ गए हैं। यूरोपीय सरकारें पॉलिटिकल करेक्टनेस या मल्टीकल्चरलिज्म के नाम पर मुसलमानों की मांगों के आगे झुक रही हैं, जैसे कुत्तों पर प्रतिबंध या महिलाओं के अधिकारों में बदलाव। इसका नतीजा यह हो रहा है की यूरोप अपनी मूल संस्कृति और वैल्यूज खो रहा है और लोग शर्मिंदा होकर विरोध नहीं कर पा रहे। फाइन ने खुद कई बार कहा है कि शरिया अमेरिका में नहीं आएगी। अमेरिका इस्लामिक देश नहीं बनेगा। उन्होंने नो शरीया जैसा बिल भी पेश किया है। इजराइल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं फाइन रैंडी फाइन एक अमेरिकी राजनेता हैं, जो रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हैं। उनका जन्म 20 अप्रैल 1974 को एरिजोना के ट्यूसन शहर में हुआ था। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1996 में एबी डिग्री और 1998 में एमबीए पूरा किया। पेशे से वे बिजनेस एक्जीक्यूटिव हैं और पहले जुआ इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं। राजनीति में उन्होंने फ्लोरिडा स्टेट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 2016 से 2024 तक सेवा की, फिर फ्लोरिडा संसद में 2024-2025 तक रहे। अप्रैल 2025 में एक स्पेशल इलेक्शन में वे फ्लोरिडा के 6वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए। वे इजराइल के कट्टर समर्थक हैं और अक्सर फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर विवादास्पद बयान देते हैं। न्यूयॉर्क मेयर पद पर जोहरान ममदानी मुस्लिम समुदाय से हैं न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, नेरदीन किसवानी के इस बयान को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल, ममदानी इस पद पर आने वाले पहले मुस्लिम हैं। हालांकि, किसवानी ने ममदानी का जिक्र नहीं किया। इन्होंने 2025 में मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वे शहर के पहले मुस्लिम और 100 साल से अधिक समय में सबसे युवा गवर्नर बने। उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जिसमें वे किराए पर रोक, निःशुल्क बस सेवा, किफायती आवास और शहर को अधिक सस्ता बनाने पर जोर दे रहे हैं। जोहरान ममदानी एक प्रमुख अमेरिकी राजनीतिज्ञ हैं। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। वे प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर के बेटे हैं। सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क शहर चले आए और यहीं बड़े हुए। वे डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका के सदस्य हैं और प्रगतिशील विचारधारा के समर्थक हैं। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा: पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:00:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ब्राजील के राष्ट्रपति आज भारत आएंगे:14 मंत्री, 260 कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल भी आएगा; दिल्ली की AI समिट में शामिल होंगे</title>
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<description><![CDATA[ ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा आज भारत के राजकीय दौरे पर आ रहे हैं। वे 18 से 22 फरवरी तक भारत में रहेंगे। यह दौरा प्रधानमंत्री पीएम मोदी के निमंत्रण पर हो रहा है। इस बार राष्ट्रपति लूला अपने साथ 260 कंपनियों के मालिकों और अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल लेकर आ रहे हैं। उनके साथ करीब 14 मंत्री भी भारत आ रहे हैं। भारत पहुंचने के बाद राष्ट्रपति लूला 19 और 20 फरवरी को नई दिल्ली में हो रहे दूसरे AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। उन्होंने भारत रवाना होते समय कहा कि वे इस समिट में भाग लेंगे और भारत के साथ नए सहयोग के अवसरों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में भारत और ब्राजील के बीच व्यापार 15 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा रहा है। भारत दौरे के बाद वे दक्षिण कोरिया भी जाएंगे, जहां वे राष्ट्रपति ली जे म्युंग से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे राष्ट्रपति लूला की 21 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक होगी। इस बैठक में दोनों देश अपने रिश्तों की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। पीएम मोदी उनके सम्मान में एक लंच का आयोजन भी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला की बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा खासकर नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और दवाइयां, महत्वपूर्ण खनिज और रेयर अर्थ मिनरल्स, विज्ञान और तकनीक, नवाचार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष और लोगों के बीच कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे शामिल रहेंगे। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। इनमें बहुपक्षीय मंचों में सहयोग, ग्लोबल रूल ऑर्डर में सुधार, ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे, संयुक्त राष्ट्र (UN) सुधार, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस दौरे के दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति लूला से मुलाकात करेंगी और उनके सम्मान में एक राजकीय भोज देंगी। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उनसे मिलेंगे। राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा यह राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा है। वे पहली बार 2004 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। आखिरी बार वे सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2025 में ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया के राजकीय दौरे पर गए थे, जो 57 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली राजकीय यात्रा थी। नवंबर 2025 में दोनों नेता जोहान्सबर्ग में जी20 बैठक के दौरान भी मिले थे। भारत-ब्राजील UN और BRICS जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं भारत और ब्राजील के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। साल 2006 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया। दोनों ही देश लोकतंत्र में भरोसा रखते हैं और दुनिया में शांति और बराबरी की बात करते हैं। भारत और ब्राजील BRICS, G20, UN और वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ मिलकर काम करते हैं। रक्षा के मामले में दोनों देशों के बीच 2003 में समझौता हुआ था, जिसे 2006 में मंजूरी मिली। जुलाई 2025 में संयुक्त रक्षा समिति की बैठक ब्राजील में हुई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारी एक-दूसरे के यहां आते-जाते रहते हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों साथ काम कर रहे हैं। भारत ने 2021 में ब्राजील का उपग्रह Amazonia-1 लॉन्च किया था। तेल और गैस के मामले में ब्राजील, अमेरिका महाद्वीप में भारत का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट सेंटर है। बॉयो फ्यूल के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। ब्राजील ग्लोबल बॉयोफ्यूल अलायंस का सह-संस्थापक सदस्य है। कृषि, फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन भी दोनों देशों के सहयोग के अहम क्षेत्र हैं। भारत की गिर और कांकरेज जैसी गायों की नस्लें पहले ब्राजील भेजी गई थीं, जिन्हें वहां की जरूरत के हिसाब से विकसित किया गया। कई ब्राजीली छात्र और अधिकारियों ने भारत आकर ट्रेनिंग ली हेल्थ सेक्टर में 2020 में दोनों देशों ने समझौता किया। ब्राजील की स्वास्थ्य नीति में आयुर्वेद और योग को वैकल्पिक इलाज के तौर पर जगह दी गई है। डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी 2025 में समझौता हुआ, जिसके तहत दोनों देश बड़े स्तर पर लागू डिजिटल सिस्टम और समाधान एक-दूसरे से साझा करेंगे। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी भारत और ब्राजील साथ काम कर रहे हैं। ब्राजील में हुए संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में भारत ने सक्रिय भाग लिया। तकनीकी सहयोग और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के तहत कई ब्राजीली छात्र और अधिकारी भारत आकर ट्रेनिंग ले चुके हैं। सांस्कृतिक रिश्ते भी काफी मजबूत हैं। ब्राजील में भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और शास्त्रीय नृत्य को लोग पसंद कर रहे हैं। साओ पाउलो में 2011 में भारत का पहला सांस्कृतिक केंद्र खोला गया था। ब्राजील के कई शहरों में महात्मा गांधी की प्रतिमा लगी है महात्मा गांधी को ब्राजील में काफी सम्मान दिया जाता है। रियो डी जेनेरियो, साओ पाउलो और ब्रासीलिया जैसे शहरों में उनकी प्रतिमाएं लगी हुई हैं। 2025 में ब्राजील के आचार्य जोनस मासेट्टी को भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया। भारतीय फिल्में भी ब्राजील में पसंद की जाती हैं और 2024 में साओ पाउलो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारत को फोकस कंट्री बनाया गया। ब्राजील में करीब 4,000 भारतीय रहते हैं। ज्यादातर लोग साओ पाउलो और रियो डी जेनेरियो में बसे हैं। ये लोग कारोबार, नौकरी और रिसर्च जैसे कामों से जुड़े हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:00:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>ब्राजील, के, राष्ट्रपति, आज, भारत, आएंगे:14, मंत्री, 260, कंपनियों, का, प्रतिनिधिमंडल, भी, आएगा, दिल्ली, की, समिट, में, शामिल, होंगे</media:keywords>
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<title>PAK डॉन का लॉरेंस गैंग को धमकी:बोला&#45; जितने हथियार दिखाए, उतने मेरे पास बेकार पड़े; गैंगस्टर बनने का शौक तो चेहरा दिखाओ</title>
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<description><![CDATA[ लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर हैरी बॉक्सर की धमकी के बाद पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी ने भी एक ऑडियो जारी कर जवाब दिया है। भट्टी ने कहा कि उसके पास एक वीडियो पहुंची है, जिसमें एक व्यक्ति हथियारों के साथ बैठकर कह रहा है कि वह शहजाद भट्टी को मार देगा। इस पर भट्टी ने जवाब देते हुए कहा कि जितने हथियार सामने रखकर वीडियो बनाई जा रही है, उतने हथियार तो उसके पास बेकार पड़े हैं। उसने यह भी कहा कि जैसा तुम्हारा मालिक लॉरेंस है, वैसे ही तुम भी हो। कुत्तों के बारे में बोलने का मन नहीं करता है, इन्हें याद दिलाने के लिए बोलना पड़ता है कि ये कोई गैंगस्टर नहीं हैं। भट्टी ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वीडियो बनानी है, तो चेहरा दिखाकर और अपनी लोकेशन बताकर बनाओ, ताकि पता चले कि तुम सच में गैंगस्टर हो या नहीं। उसने कहा कि लॉरेंस उसे अच्छी तरह जानता है और आज तक उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया, क्योंकि वह भट्टी को समझता है। गौरतलब है कि लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर हैरी बॉक्सर ने भट्टी को धमकी दी थी। उसने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें हथियार दिखाए। बॉक्सर ने कहा था कि जिस दिन चाहेंगे तेरा सिर कलम कर देंगे। हमारे पास इतने हथियार हैं, इतनी गोली मारेंगे कि गोलियां गिन कर तेरा खानदान करोड़पति हो जाएगा। लॉरेंस बाप था और बाप रहेगा। पाकिस्तानी डॉन भट्टी की बड़ी बातें… ****************** ये खबर भी पढ़ें: लॉरेंस गैंग की पाकिस्तानी डॉन को धमकी: हथियार दिखाए, कहा- जिस दिन चाहेंगे तेरा सर कलम कर देंगे, भट्‌टी ने चैलेंज किया था लॉरेंस गैंग के गैंगस्टर हैरी बॉक्सर ने पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को धमकी दी। उसने एक वीडियो जारी किया, जिसमें हथियार दिखाए। बॉक्सर ने कहा कि जिस दिन चाहेंगे तेरा सर कलम कर देंगे। हमारे पास इतने हथियार हैं, इतनी गोली मारेंगे कि गोलियां गिन कर तेरा खानदान करोड़पति हो जाएगा। लॉरेंस बाप था और बाप रहेगा। (पढ़े पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:00:06 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। यह बयान ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर दूसरे दौर की बातचीत से पहले आया है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आज (17 फरवरी 2026) जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में हो रही है। इससे पहले ओमान में 6 फरवरी को पहली बैठक हुई थी। ट्रम्प ने कहा, ‘मैं उन बातचीत पर नजर रहूंगा।’ उन्होंने संकेत दिया कि ईरान इस बार समझौते को लेकर गंभीर है। डील की संभावना पर ट्रम्प ने कहा कि ईरान इसे लेकर सख्त रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले साल अमेरिका की ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी से उसे अक्ल आई। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम भुगतना चाहेंगे।’ ईरान-अमेरिका के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होगी ईरान ने ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच के लिए नौसैनिक अभ्यास शुरू किया एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक, ईरान ने सोमवार को कुछ ही हफ्तों में दूसरी बार नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज, पर्शियन गल्फ और गल्फ ऑफ ओमान में हो रहा है। इसका मकसद खुफिया और ऑपरेशनल क्षमताओं की जांच करना है। समुद्री सुरक्षा कंपनी ईओएस रिस्क ग्रुप ने कहा कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को रेडियो पर चेतावनी दी गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के उत्तरी मार्ग में मंगलवार को लाइव-फायर ड्रिल हो सकती है। हालांकि ईरानी सरकारी टीवी ने लाइव-फायर अभ्यास का जिक्र नहीं किया। जनवरी के अंत में हुए इसी तरह के अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कड़ा बयान जारी किया था। उसने कहा था कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री क्षेत्र में पेशेवर तरीके से काम करने का अधिकार है, लेकिन वह अमेरिकी वॉरशिप या ट्रेड जहाजों को परेशान न करें। ईरान के उप विदेश मंत्री बोले- ट्रम्प प्रतिबंध हटाएं तो डील संभव व्हाइट हाउस का कहना है कि वह ऐसा समझौता चाहता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। वहीं, रविवार को ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने BBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर बात करने को तैयार है, तो हम अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार है। वहीं अमेरिकी अधिकारी बार-बार कहते रहे हैं कि परमाणु वार्ता में प्रगति रुकने की वजह ईरान है, न कि अमेरिका।  रवांची बोले- हमने 60% इंरिच्ड यूरेनियम घटाने का प्रस्ताव दिया ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता एक लंबे समय से चल रही विवादास्पद बातचीत है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। जिससे वह परमाणु हथियार न बना सके। मजीद तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान ने 60% तक इंरिच्ड यूरेनियम को कम करने का प्रस्ताव दिया है। ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा उच्च स्तर पर इंरिच्ड यूरेनियम का भंडार है।  2015 के परमाणु समझौते के तहत उसने अपना यूरेनियम रूस भेजा था। इस बार क्या वह ऐसा करेगा, इस पर तख्त-रवांची ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। रूस ने दोबारा यह सामग्री स्वीकार करने की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान अस्थायी रूप से यूरेनियम इंरिचमेंट रोकने का प्रस्ताव भी दे चुका है। बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका  ईरान की एक बड़ी शर्त रही है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे पर हो। तख्त-रवांची ने कहा कि उनकी समझ है कि अगर समझौता करना है तो फोकस परमाणु मुद्दे पर ही रहेगा। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। रवांची बोले- हमारे अस्तित्व पर खतरा हुआ तो जवाब देंगे ईरान के उप विदेश मंत्री ने ट्रम्प के बयानों पर चिंता जताई। सार्वजनिक रूप से और निजी तौर पर अमेरिका बातचीत में रुचि दिखा रहा है, लेकिन ट्रम्प ने हाल में सत्ता परिवर्तन की बात की। तख्त-रवांची ने कहा कि निजी संदेशों में ऐसा नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बढ़ोतरी पर चिंता जताई और कहा कि दूसरा युद्ध सबके लिए बुरा होगा। अगर ईरान को अस्तित्व का खतरा लगा, तो ईरान जवाब देगा। ईरान ने क्षेत्रीय देशों से बात की है और सब युद्ध के खिलाफ हैं। ईरान को लगता है कि इजराइल इस वार्ता को तोड़ना चाहता है। समझौते को लेकर तख्त-रवांची ने कहा कि ईरान जेनेवा में उम्मीद के साथ जाएगा और दोनों पक्षों को ईमानदारी दिखानी होगी। क्षेत्र में तैनात किए जा रहे 40,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के बारे में पूछे जाने पर, तख्त-रावंची ने जवाब दिया, ‘ऐसी स्थिति में खेल अलग होगा।’ ईरान से तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा रहा अमेरिका अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड को मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक हफ्ता लगेगा। वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और दूसरे युद्धपोत तैनात हैं। जेराल्ड अपने साथी जहाजों के साथ कैरिबियन सागर में तैनात था। यह इस साल वेनेजुएला में हुए अमेरिकी अभियानों में हिस्सा ले चुका है। इसके अलावा हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी मिडिल ईस्ट में भेजे गए हैं। USS जेराल्ड आर. फोर्ड को जानिए… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>भारत&#45;फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ की डील आज:भारत को 114 राफेल मिलेंगे; मुबंई में राष्ट्रपति मैक्रों से मिलेंगे पीएम मोदी</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आज मुंबई में मुलाकात होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपए की डिफेंस डील होगी। यह डील कीमत के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी सैन्य खरीद होगी। इसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे। आज होने वाली बैठक में रक्षा, समुद्री सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति, उभरती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक दोपहर 3:15 बजे मुबंई के लोक भवन में होगी। दोनों नेता शाम 5:15 बजे वे भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026 का उद्घाटन करेंगे। साथ ही दोनों देशों के उद्योगपतियों, स्टार्टअप फाउंडर्स, रिसर्च एक्सपर्ट्स और इनोवेशन से जुड़े लोगों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद चौथी बार भारत पहुंचे मैक्रों राष्ट्रपति बनने के बाद मैक्रों का यह चौथा भारत दौरा है। इससे पहले वे मार्च 2018 में पहली बार भारत आए थे। इसके बाद वे सितंबर 2023 में G20 समिट के लिए और जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनकर आए थे। भारत और फ्रांस के बीच 1998 से रणनीतिक साझेदारी है और दोनों देश रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साथ काम करते हैं। यह दौरा भी इसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। भारत को 24 सुपर राफेल फाइटर जेट मिलेंगे भारत फ्रांस के बीच राफेल डील की सबसे खास बात ये है कि इनमें से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे। इन एडवांस्ड जेट को F-5 वर्जन कहा जा रहा है, जिन्हें फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन बना रही है। अभी इंडियन एयरफोर्स के पास जो राफेल हैं, वे F-3 वेरिएंट हैं और 4.5 जेनरेशन फाइटर माने जाते हैं। इनमें स्टेल्थ फीचर्स और न्यूक्लियर वेपन कैरी करने की क्षमता भी है। नई डील में मिलने वाले ज्यादातर जेट F-4 वर्जन के होंगे, जो ज्यादा एडवांस सिस्टम और अपग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे। बताया जा रहा है कि यूरोपियन स्टैंडर्ड के हिसाब से F-5 राफेल को और ज्यादा एडवांस कैटेगरी में रखा जा रहा है। ये अभी डेवलपमेंट फेज में हैं। प्लान के मुताबिक F-4 जेट की डिलीवरी 2028–29 से शुरू होगी, जबकि 2030 के बाद मिलने वाले जेट F-5 यानी सुपर राफेल होंगे। इस डील के बाद फ्रांस के अलावा भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इतनी एडवांस कैपेबिलिटी वाले राफेल फाइटर जेट होंगे। इससे एयरफोर्स की स्ट्रेंथ और टेक्नोलॉजी लेवल दोनों में बड़ा बूस्ट माना जा रहा है। भारत में बनेंगे 96 राफेल फाइटर जेट फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन से होने वाली इस डील में की अहम बात यह है कि 114 में से 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। सिर्फ 18 जेट उड़ान के लिए तैयार हालत (फ्लाई-अवे कंडीशन) में सीधे फ्रांस से मिलेंगे। बाकी विमानों का प्रोडक्शन भारत में होगा और उनमें करीब 60% तक स्वदेशी पार्ट्स इस्तेमाल किए जाएंगे। राफेल जेट का निर्माण मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत होगा। दसॉ एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर प्रोडक्शन करेगी। हाल ही में दसॉ ने अपने जॉइंट वेंचर दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) में हिस्सेदारी 49% से बढ़ाकर 51% कर ली है। इस साझेदारी में अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। डील के तहत सभी 114 जेट में भारतीय हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद इंटीग्रेट किए जाएंगे और सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम भी दिया जाएगा, जिससे ये विमान भारतीय रडार और सेंसर नेटवर्क से सीधे जुड़ सकें। दसॉ एयरफ्रेम बनाने की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी देगा, जबकि इंजन कंपनी साफ्रान और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स इस प्रोजेक्ट में सहयोग करेंगी। भारत पहले ही खरीद चुका है 36 राफेल जेट भारत पहले ही फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट खरीद चुका है। भारत और फ्रांस के बीच इन विमानों की खरीद का समझौता सितंबर 2016 में हुआ था। इसकी कीमत उस समय करीब 7.8 अरब यूरो यानी तकरीबन ₹59 हजार करोड़ थी। इन राफेल विमानों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से शुरू हुई थी। पहला विमान 2019 में फ्रांस में भारत को सौंपा गया था, जबकि 2020 से जेट भारत पहुंचने लगे। सभी 36 विमान 2022 तक भारतीय वायुसेना को मिल चुके थे। भारतीय वायुसेना ने इन विमानों को दो स्क्वाड्रन अंबाला एयरबेस (हरियाणा) और हासीमारा एयरबेस (पश्चिम बंगाल) में तैनात किया है। राफेल जेट आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस हैं। इनमें मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल, SCALP क्रूज मिसाइल और MICA मिसाइल सिस्टम जैसे एडवांस हथियार शामिल हैं, जो वायुसेना की मारक क्षमता को काफी बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार 36 राफेल की पहली खेप भारतीय वायुसेना के लिए तकनीकी अपग्रेड साबित हुई थी और इसी अनुभव के आधार पर अब बड़े पैमाने पर राफेल डील की जा रही है। भारत-फ्रांस इस साल इनोवेशन ईयर मना रहे भारत और फ्रांस ने साल 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ के रूप में मना रहे हैं। यह एक साल तक चलने वाली संयुक्त पहल है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच नई तकनीक, रिसर्च और इंडस्ट्रियल इनोवेशन में सहयोग को तेज करना है। यह पहल सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं है। इसमें दोनों देशों के स्टार्टअप्स, वैज्ञानिक, कंपनियां और इंडस्ट्री लीडर्स भी शामिल हैं, ताकि रिसर्च से लेकर बाजार तक टेक्नोलॉजी को तेजी से पहुंचाया जा सके। इस इनोवेशन ईयर का सबसे बड़ा फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर है। भारत और फ्रांस मिलकर एक साझा AI रोडमैप पर काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य जिम्मेदार और एथिकल AI सिस्टम विकसित करना है। इसके अलावा डीपटेक और स्टार्टअप सहयोग, अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में संयुक्त विकास, तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस पर भी काम होगा। मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान फ्रांस से 110 से ज्यादा कंपनियों का बड़ा बिजनेस डेलिगेशन भी आया है, जो मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी पर चर्चा करेगा। फिलहाल भारत में 1,100 से ज्यादा फ्रांसीसी कंपनियां काम कर रही हैं और करीब 3.5 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। इनोवेशन ईयर का लक्ष्य निवेश और टेक्नोलॉजी सहयोग को और बढ़ाना है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मंडे मेगा स्टोरी- 114 राफेल की डील क्यों जरूरी:एयरफोर्स के पास 13 स्क्वाड्रन कम, आगे और घटेंगे; पाकिस्तान-चीन की एयर पावर कितनी मजबूत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा सिर्फ कूटनीतिक इवेंट नहीं है। इसके साथ जुड़ी है 3.60 लाख करोड़ की 114 राफेल फाइटर जेट की संभावित डील, जो भारतीय वायुसेना के लिए ऑक्सीजन साबित हो सकती है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>भारत-फ्रांस, के, बीच, 3.25, लाख, करोड़, की, डील, आज:भारत, को, 114, राफेल, मिलेंगे, मुबंई, में, राष्ट्रपति, मैक्रों, से, मिलेंगे, पीएम, मोदी</media:keywords>
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<title>बांग्लादेश&#45; तारिक रहमान आज पीएम पद की शपथ लेंगे:13 देशों को न्योता भेजा था; भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर बिरला शामिल होंगे</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) लगभग दो दशक बाद आज फिर से सत्ता में लौट रही है। कुछ ही देर में ढाका स्थित जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ समारोह की तैयारियां लगभग पूरी हो गई। नव निर्वाचित BNP सांसद अपने शपथ ग्रहण समारोह से पहले संसद परिसर में पहुंचने लगे हैं। शपथ ग्रहण समारोह कुछ देर में शुरू होना है, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएंगे। मुख्य समारोह शाम 4 बजे शुरू होगा। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन निर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनके शुरुआती मंत्रिमंडल को पद की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए 13 देशों को आधिकारिक न्योता भेजा गया है, जिनमें भारत, चीन, पाकिस्तान जैसे बड़े नाम शामिल हैं। भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जा रहे हैं। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिश्री भी शामिल होंगे। समारोह में कुल लगभग 1,200 मेहमान शामिल होंगे। कई देशों और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी BNP BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 300 सदस्यीय जातीय संसद में 212 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, महंगाई पर काबू पाने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने को अपनी प्राथमिकता बताया था। आज के समारोह के साथ अंतरिम प्रशासन से नई निर्वाचित सरकार को कार्यकारी अधिकारों का औपचारिक हस्तांतरण पूरा हो जाएगा। तारिक रहमान ने दो जीती सीटों में से एक छोड़ा BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट को अपने पास रखने और बोगरा-6 सीट को खाली करने का फैसला किया है। 13वीं संसदीय चुनाव में तारिक रहमान ने दोनों सीटों से भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। ढाका-17 से उन्होंने लगभग 72,699 वोट प्राप्त किए, जबकि बोगरा-6 से उन्होंने 216,284 वोट हासिल कर जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार अब्दुर रहमान सोहेल को बड़े अंतर से हराया था। अब तारिक रहमान ने बांग्लादेश निर्वाचन आयोग (ईसी) को एक लिखित पत्र भेजकर बोगरा-6 सीट छोड़ने की औपचारिक घोषणा की है। ईसी के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने इसकी पुष्टि की है। बांग्लादेश के नियमों (आरपीओ) के अनुसार, जब कोई सांसद दो सीटों से जीतता है और एक सीट छोड़ता है, तो उस खाली सीट पर उपचुनाव (by-election) कराना अनिवार्य होता है। इसलिए बोगरा-6 सीट पर अब उपचुनाव होगा, जिसे ईसी को 90 दिनों के अंदर आयोजित करना होगा। इसके अलावा, शेरपुर-3 सीट पर भी मतदान होना है। मूल चुनाव (12 फरवरी 2026) में 300 में से 299 सीटों पर वोटिंग हुई थी, लेकिन शेरपुर-3 में एक वैध उम्मीदवार (जमात-ए-इस्लामी के) की मौत के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया था। अब ईसी इस सीट पर सामान्य चुनाव कराएगा और इसका शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा। हिंदू नेता को नई कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं तारीक रहमान BNP से 2 हिंदू सांसद भी चुने गए हैं। इनमें से ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। रॉय BNP के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वह खालिदा जिया की BNP सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) राज्य मंत्री थे। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद समेत रक्षा मंत्रालय और दूसरे पांच मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 148 के मुताबिक, आधिकारिक नतीजे आने के तीन दिन के भीतर निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ लेनी होती है। 13वें संसदीय चुनाव के निर्वाचित सदस्य मंगलवार को शपथ लेंगे, जबकि कैबिनेट भी उसी दिन बाद में शपथ लेगी। यह जानकारी चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग में दी। बांग्लादेश में 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, इनमें 2 हिंदू बांग्लादेश के आम चुनाव में 4 अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार सांसद चुने गए हैं। इनमें दो हिंदू, जबकि दो अन्य बौद्ध समुदाय से हैं। हिंदू नेता में गोयेश्वर चंद्र रॉय और उनके समधी निताई रॉय चौधरी BNP की टिकट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। निताई रॉय चौधरी BNP के प्रमुख उपाध्यक्षों में शामिल हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। दोनों ने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशियों को हराया। तीसरे अल्पसंख्यक सांसद साचिंग प्रू हैं, जो बंदरबन के पहाड़ी जिले से चुने गए। वे मरमा जातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और BNP के वरिष्ठ नेता हैं। चौथे विजेता दिपेन दीवान रंगामाटी सीट से जीते। वे चकमा समुदाय से आते हैं, जो बौद्ध बहुल जनजातीय समूह है। 30 से 40 सदस्यों की कैबिनेट बनाने की तैयारी में BNP BNP के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि कैबिनेट बहुत बड़ा नहीं होगा। इसमें 30 से 40 सदस्य शामिल हो सकते हैं। इसमें 2001 की BNP सरकार के पूर्व मंत्री, स्टैंडिंग कमेटी सदस्य और नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। तारिक रहमान ने कैबिनेट गठन को लेकर वरिष्ठ नेताओं से परामर्श शुरू कर दिया है। हालांकि, किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा, यह शपथ ग्रहण के बाद ही साफ होगा। BNP की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि देश को कैबिनेट का अंतिम स्वरूप देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में समय लग सकता है। तब तक उनके किसी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने की संभावना जताई जा रही है। किन नामों पर चल रही चर्चा विदेश मंत्री पद के लिए BNP के संयुक्त महासचिव हुमायूं कबीर का नाम चर्चा में है। पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. रेजा किब्रिया को वित्त मंत्री पद के लिए विचार किया जा रहा है। वे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में वरिष्ठ अर्थशास्त्री रह चुके हैं। आमिर खुसरो महमूद चौधरी को वाणिज्य मंत्रालय दिया जा सकता है। वे पहले भी इस पद पर रह चुके हैं। BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का नाम स्थानीय सरकार मंत्रालय के लिए सामने आया है। वे पहले कृषि राज्य मंत्री और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके हैं। पूर्व अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मोहम्मद असदुज्जमान का नाम कानून मंत्रालय के लिए चर्चा में है। सलाहुद्दीन अहमद का नाम गृह मंत्रालय के लिए और मिर्जा अब्बास का नाम सड़क परिवहन एवं पुल मंत्रालय के लिए लिया जा रहा है। डॉ. एजेडएम जाहिद हुसैन स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल सकते हैं, जबकि रुहुल कबीर रिजवी को सूचना मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा नज्रुल इस्लाम खान, डॉ. अब्दुल मोयीन खान, गायेश्वर चंद्र रॉय, हाफिज उद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद टुकू, सेलीमा रहमान, अंदलीव रहमान पार्थो, मिजानुर रहमान मिनू और शमा ओबैद सहित कई अन्य नामों पर भी चर्चा चल रही है। मंत्रियों के चयन का प्रोसेस जानिए पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की अंतिम संरचना का फैसला BNP की स्थायी समिति और अध्यक्ष तारिक रहमान करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में वे अंतिम सूची में कभी भी बदलाव कर सकते हैं। मंगलवार सुबह मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएंगे। सांसदों के शपथ लेने के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष अलग-अलग बैठक कर अपने संसदीय नेता का चुनाव करेंगे। बहुमत दल का नेता इसके बाद बंगभवन जाकर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन से मुलाकात करेगा। राष्ट्रपति औपचारिक रूप से उसे सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उपमंत्रियों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे। राष्ट्रपति सूची कैबिनेट डिवीजन को भेजेंगे, जो शपथ समारोह की तैयारी पूरी करेगा। कैबिनेट सचिव नामित मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शपथ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण देंगे और उनके घरों पर आधिकारिक वाहन भेजे जाएंगे। ------------------- ये खबर भी पढ़ें… तारिक रहमान बोले-भारत से रिश्तों में बांग्लादेश का हित जरूरी: चीन डेवलपमेंट में सहयोगी, हसीना की वापसी पर कहा- कानून अपना काम करेगा बांग्लादेश आम चुनाव में जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को पहली बार मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़े सवाल पर कहा कि हम बांग्लादेश के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>बांग्लादेश&#45;यूनुस के खिलाफ जांच आयोग बैठा सकती है रहमान सरकार:18 मंत्रियों की संपत्ति में इजाफा; यूनुस की प्रॉपर्टी ₹12 करोड़ हुई, पेरिस जाने की तैयारी में</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद गठित मोहम्मद यूनुस सरकार के मंत्रियों की संपत्ति में उछाल आया है। सरकार के मुखिया यूनुस की संपत्ति में एक साल में लगभग 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यूनुस की संपत्ति अब कुल साढ़े 12 करोड़ रुपए हो गई है, इसमें लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपए का उछाल आया है। अंतरिम सरकार के टॉप 4 मंत्रियों में सबसे ज्यादा संपत्ति की वृद्धि यूनुस की हुई है। दूसरे नंबर पर आवास मंत्री अदिलुर रहमान की संपत्ति में 1 करोड़ 23 लाख रुपए की वृद्धि हुई। यूनुस के 21 में से 18 मंत्रियों की संपत्ति बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार नए पीएम रहमान अंतरिम सरकार के मंत्रियों की संपत्ति में इजाफे की जांच के लिए कमेटी गठित कर सकते हैं। इस सब के बीच यूनुस अब फिर से पेरिस में बसने की तैयारी में हैं। बता दें कि यूनुस बांग्लादेश के एकमात्र नोबेल अवॉर्ड विजेता हैं। बांग्लादेश में माइ्क्रो फाइनेंस के क्षेत्र में बड़ा नाम यूनुस का शेख हसीना सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए थे। लेकिन यूनुस ने अपनी सरकार बनने पर केस वापस कर लिए थे। IT मंत्री फैज नीदरलैंड्स लौटे तारिक रहमान की जीत के साथ ही यूनुस सरकार में आईटी मंत्री रहे फैज अहमद तैयब नीदरलैंड्स लौट गए हैं। फैज के कार्यकाल के दौरान IT सेक्टर में उनके द्वारा विदेशी कंपनियों के पक्ष में दिए गए कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां भी आई थीं। उन पर अनावश्यक हाई-कैपेसिटी इक्विपमेंट खरीद के लिए कुछ कंपनियों को टेंडर जारी करने के भी आरोप हैं। यूनुस सरकार में पर्यावरण मंत्री सैयदा रिजवाना का कहना है कि फैज अपने परिवार के साथ नीदरलैंड्स में ही रहते हैं, वे यूनुस सरकार में शामिल होने के लिए बांग्लादेश लौटे थे। जमात प्रमुख शफीकुर से मिले तारिक रहमान बांग्लादेश के नवनिर्वाचित पीएम रहमान ने रविवार देर शाम जमात के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान के साथ मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार रहमान ने संसद के सुचारु संचालन के लिए जमात के साथ समझौते पर सहमति भी बनाई है। बता दें कि जमात ने 32 सीटों में धांधली का आरोप लगाया है। दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार ढाका में चीन और पाकिस्तान के दूतावासों में बैठकों के दौर तेज हो गए हैं। पाकिस्तान से लगभग 6 वरिष्ठ आर्मी अफसर पिछले एक पखवाड़े से दूतावास में डेरा जमाए हुए हैं। जमात की हार के बाद पाकिस्तान रहमान सरकार के साथ संबंधों के लिए ग्राउंड वर्क में जुटा है। पूर्व में पाक कट्‌टरपंथी जमात का समर्थक रहा है। BNP के नवनिर्वाचित सांसद गायेश्वर चंद्र रॉय खालिदा जिया की कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। उनका इंटरव्यू पढ़िए… 1. क्या शेख मुजीब की विरासत बनाए रखेंगे? शेख मुजीब उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपिता हैं। हमारे देश के गठन में उनकी बड़ी भूमिका रही है। BNP का मानना है कि मुजीब के दौर में कुछ गलतियां भी हुईं, जिसके लिए मुजीब की भूमिका की जांच होने में कोई बुराई नहीं है। अब शेख हसीना और अवामी लीग की जिम्मेदारी है कि वह शेख मुजीब की विरासत को बचाए रखने के लिए रहमान सरकार के साथ सहयोग करें। 2. अवामी लीग पर प्रतिबंध पर क्या रुख रहेगा? BNP और अवामी लीग प्रतिस्पर्धी पार्टियां रही हैं। लेकिन BNP प्रतिबंधों की राजनीति के खिलाफ रही है। यूनुस सरकार ने जब अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया तो BNP ने इसका विरोध किया था। चुनावों में अवामी लीग को होना चाहिए था, अब हसीना को बांग्लादेश लौट जाना चाहिए। हमारी नेता खालिदा जिया पर केस हुए, पर उन्होंने देश नहीं छोड़ा। 3. भारत के साथ रिश्ते कैसे बेहतर होंगे? हम भारत के साथ बराबरी के संबंध चाहते हैं। यही हमारी और अवामी लीग की सोच में फर्क है। अवामी लीग भारत का पिछलग्गू बनकर रहना चाहती है जबकि BNP ऐसा नहीं करेगी। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध हैं। बरसों से हम सहअस्तित्व के पक्षधर हैं। भारत को भी बांग्लादेश के साथ संबंधों के लिए पहल करनी चाहिए। इसकी शुरुआत शेख हसीना की वापसी से हो सकती है। बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान बेहतर संबंधों के पक्षधर हैं। 4. बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? बांग्लादेश संभी धर्मों के लोगों के लिए बना है। मैं खुद हिंदू हूं, लेकिन पहले मैं बांग्लादेशी हूं। ऐसा ही हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को भी सोचना चाहिए। लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि भारत सरकार ने मेरा वीसा कभी क्लीयर नहीं किया। जबकि मैंने कई बार भारत जाने के लिए वीसा एप्लीकेशन लगाई थी। पिछले सरकार के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कल पीएम पद की शपथ लेंगे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान कल यानी 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस समारोह में भारत की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल होंगे। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी रहेंगे। PM मोदी 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं, इसलिए वे ढाका नहीं जा रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से अलग इस बार राष्ट्रपति भवन की जगह ढाका के नेशनल पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के साउथ प्लाजा में होगा। रहमान बोले- बांग्लादेश का हित सबसे ऊपर बांग्लादेश आम चुनाव में जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को पहली बार मीडिया से बात की। उन्होंने भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़े सवाल पर कहा कि हम बांग्लादेश के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे। रहमान ने यह भी कहा कि चीन बांग्लादेश का विकास में सहयोगी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में बांग्लादेश और चीन मिलकर काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि दूसरे देशों की तरह चीन भी बांग्लादेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब उनसे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने के बारे में पूछा गया, तो रहमान ने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे हैं तारिक रहमान तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उन्होंने 1988 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जॉइन की। 2001 के चुनाव में संगठनात्मक काम से उन्हें पहचान मिली, लेकिन 2006 के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2008 में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और करीब 17 साल तक देश से बाहर रहे। इस दौरान वे पार्टी के सीनियर उपाध्यक्ष और बाद में कार्यकारी अध्यक्ष बने। उन पर कई मामले दर्ज हुए, लेकिन बाद में अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया। पिछले साल वे बांग्लादेश लौटे और मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली। हालिया चुनाव में BNP की जीत के बाद तारिक रहमान अब देश के प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बन गए हैं। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश- 17 को रहमान का शपथ समारोह, मोदी को न्योता: इसी दिन PM की फ्रांसीसी राष्ट्रपति से मुलाकात, स्पीकर ओम बिरला ढाका जाएंगे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 10:47:51 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में लूनर न्यू ईयर से पहले पटाखों की दुकान में विस्फोट, 8 लोगों की मौत, 2 घायल</title>
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<description><![CDATA[ पूर्वी चीन में लूनर (न्यू ईयर) से ठीक पहले पटाखों की दुकान में हुए विस्फोट और आग में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 अन्य लोग मामूली रूप से झुलस गए। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। यह धमाका रविवार दोपहर जिआंगसू प्रांत के डोंगहाई काउंटी के एक गांव में हुआ। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, एक निवासी ने दुकान के पास गलत तरीके से पटाखे जलाए, जिससे विस्फोट हो गया। घटना के कारणों की जांच जारी है। सरकार के बयान में कहा गया कि दुकान के आसपास पटाखों को जलाना बैन है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लापरवाही से पटाखे जलाने के कारण आग भड़की और फिर विस्फोट हुआ। चीन में लूनर न्यू ईयर में पटाखे जलाना परंपरा का हिस्सा है। इसे बुरी शक्तियों को दूर भगाने का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण और सुरक्षा कारणों से कई शहरों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था। पिछले साल कुछ स्थानीय सरकारों ने इन प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिससे बाजार में पटाखों की बिक्री बढ़ी। रविवार की घटना के बाद आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने सभी क्षेत्रों से पटाखों के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और उपयोग की निगरानी कड़ी करने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि दुकानों के आसपास पटाखे जलाने पर सख्ती से रोक लगाई जाए और स्थानीय प्रशासन जोखिम वाले जगहों की पहचान करे, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से त्यौहार मना सके। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिका ने सीरिया में IS के 30 से ज्यादा ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, हथियार भंडार को निशाना बनाया, हजारों कैदी इराक ट्रांसफर अमेरिकी सेना ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट (IS) के 30 से ज्यादा ठिकानों पर पिछले दो हफ्तों में हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई पिछले साल अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के जवाब में की गई, जिसमें दो सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक मारे गए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक 3 फरवरी से 12 फरवरी के बीच 10 एयरस्ट्राइक की गईं। इन हमलों में IS के हथियार भंडार, लॉजिस्टिक ठिकाने और अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। CENTCOM का दावा है कि दिसंबर में हुए घातक हमले के बाद शुरू की गई कार्रवाई में अब तक 100 IS ठिकानों पर हमला किया जा चुका है। कम से कम 50 आतंकी मारे गए या पकड़े गए हैं। सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पूर्वी क्षेत्र में स्थित अल-तनफ बेस पर सरकारी बलों ने नियंत्रण कर लिया है। यह बेस कई वर्षों तक अमेरिकी सेना के अधीन रहा और IS के खिलाफ अभियान में अहम भूमिका निभाता रहा। इस बीच अमेरिका ने सीरिया से हजारों IS बंदियों को इराक स्थानांतरित कर दिया है। इन्हें इराक की अल-करख जेल में रखा जाएगा। यह वही परिसर है जिसे पहले कैंप क्रॉपर कहा जाता था और जहां सद्दाम हुसैन को फांसी से पहले रखा गया था। CENTCOM प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि बंदियों का ट्रांसफर क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम है। उन्होंने मिशन को चुनौतीपूर्ण बताते हुए संयुक्त बलों की सराहना की। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि IS के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री अमेरिका से बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे, परमाणु समझौते को लेकर विवाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची रविवार को जेनेवा (स्विट्जरलैंड ) पहुंचे, जहां मंगलवार को अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का दूसरा दौर होना है। वे ईरान की टीम का नेतृत्व करेंगे। ओमान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अरागची एक कूटनीतिक और तकनीकी प्रतिनिधिमंडल के साथ रवाना हुए। यह वार्ता इस महीने की शुरुआत में मस्कट (ओमान) में हुई पहली बैठक के बाद हो रही है, जिससे कई महीनों की ठहराव के बाद बातचीत फिर शुरू हुई है। ये वार्ताएं क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका की सैन्य तैयारियों के बीच हो रही हैं। वार्ता में ईरान के यूरेनियम इनरिचमेंट की सीमा, निगरानी व्यवस्था और अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। अरागची जेनेवा में स्विस और ओमानी अधिकारियों से मिलेंगे, साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से भी मुलाकात करेंगे। ईरान का कहना है कि वह एक नया परमाणु समझौता चाहता है, जो दोनों पक्षों को आर्थिक फायदे दे। ये वार्ताएं 2025 के मध्य में हुए 12 दिनों के संघर्ष के बाद हो रही हैं, जिसमें अमेरिका ने ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी। पिछले साल ईरान और इजराइल के बीच हुए संघर्ष के बाद बातचीत रुक गई थीं। ईरान के पास अब काफी मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम जमा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है। ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। दूसरी ओर, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। दो विमानवाहक पोत, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड तैनात किए गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से समझौता नहीं हुआ तो ताकत का इस्तेमाल करना पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 10:47:51 +0530</pubDate>
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<title>BLA का दावा&#45; 17 पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लिया:10 रिहा किए, 7 अभी भी कैद में; अदला&#45;बदली के लिए 7 दिन की मोहलत</title>
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<description><![CDATA[ बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने रविवार को दावा किया कि उसने 17 पाकिस्तानी सैनिकों को हिरासत में लिया है। इनमें से 10 को छोड़ दिया गया है, जबकि बाकी 7 को कैद कर लिया है। इनके बदले बलूच लड़ाकों की रिहाई के लिए पाकिस्तान सरकार को एक हफ्ते की मोहलत दी गई है। यह दावा BLA की मीडिया विंग ‘हक्काल’ के नाम से जारी एक कथित बयान में किया गया है। पाकिस्तान की सेना या सरकार की ओर से इस पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। BLA के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने बयान में इसे ‘ऑपरेशन हेरोफ’ का दूसरा चरण बताया है। BLA के मुताबिक, जिन 10 लोगों को छोड़ा गया है वे बलूच हैं और स्थानीय पुलिस से जुड़े थे। बयान में कहा गया कि उन्हें चेतावनी देकर रिहा किया गया है। PAK सैनिकों को बलूच अदालत में पेश किया BLA ने कहा कि बाकी 7 बंदी पाकिस्तान सेना की नियमित यूनिटों के सदस्य हैं। बयान के अनुसार, उन्हें एक कथित ‘बलूच नेशनल कोर्ट’ में पेश किया गया। यहां उन पर आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई, जबरन गुमशुदगी में मदद और बलूच लोगों के खिलाफ नरसंहार में शामिल होने जैसे आरोप लगाए गए। BLA ने दावा किया कि सुनवाई के दौरान आरोपियों को जवाब देने का मौका दिया गया, सबूत पेश किए गए और बयान दर्ज किए गए। इसके बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। BLA ने कहा कि दोषी ठहराए जाने के बावजूद इस्लामाबाद को 7 दिन का समय दिया जा रहा है, ताकि वह औपचारिक रूप से कैदी अदला-बदली की इच्छा जताए। बलूच आर्मी का ऑपरेशन हेरोफ क्या है BLA ने 25-26 अगस्त 2024 की रात ब बलूचिस्तान में बड़ा संगठित हमला किया। BLA ने इसे ऑपरेशन हेरोफ नाम दिया। ऑपरेशन हेरोफ के तहत बलूचिस्तान के 10 से ज्यादा जिलों में एक ही समय पर कार्रवाई की गई। बलूच भाषा में ‘हेरोफ’ का मतलब ‘तूफान’ होता है। BLA के निशाने पर पाकिस्तानी सुरक्षा बल, पुलिस, पंजाब प्रांत के श्रमिक और पुल-हाईवे जैसे बुनियादी ढांचे थे। प्रमुख इलाके मुसाखेल, कलात, बेला, मस्तुंग, बोलान और तर्बत रहे। इस हमले में BLA के साथ उसका आत्मघाती दस्ता ‘मजीद ब्रिगेड’ भी शामिल था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में कम से कम 73 लोगों की मौत हुई। इनमें 31 सुरक्षाकर्मी, 33 नागरिक और 14 हमलावर थे। BLA का दावा है कि इस ऑपरेशन 800 लड़ाके शामिल थे और 100 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई। बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहा है BLA बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) एक संगठन है जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना 2000 के दशक की शुरुआत में हुई और इसे कई देशों द्वारा आतंकी संगठन भी घोषित किया गया है। BLA का दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण हो रहा है और बलूच लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। यह संगठन पाकिस्तानी सेना, सरकार और चीनी प्रोजेक्ट्स जैसे CPEC को निशाना बनाता रहा है। BLA अपनी गुरिल्ला शैली के लिए जाना जाता है। यानी पहाड़ी इलाकों में छिपकर सेना पर हमला करना और तुरंत वापस लौट जाना। पाकिस्तान का सबसे गरीब राज्य बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है, जबकि यहां प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है। शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास के मामले में यह देश के बाकी हिस्सों से काफी पीछे है। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और विद्रोह से जूझ रहा है। यह खनिज संसाधनों से भरपूर दक्षिण-पश्चिमी प्रांत है, जिसकी सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है। यहां लड़ाके अक्सर सरकारी बलों, विदेशी नागरिकों और दूसरे प्रांतों से आए लोगों को निशाना बनाते हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) बलूचिस्तान का सबसे सक्रिय अलगाववादी संगठन माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बलूच अलगाववादियों ने दूसरे प्रांतों से आए पाकिस्तानी मजदूरों और विदेशी कंपनियों पर हमले तेज कर दिए हैं। उनका आरोप है कि ये लोग और कंपनियां बलूचिस्तान के संसाधनों का शोषण कर रही हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 10:47:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बांग्लादेश&#45; 17 को रहमान का शपथ समारोह, मोदी को न्योता:इसी दिन PM की मुंबई में फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ मुलाकात, ढाका जाने की संभावना कम</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारीक रहमान 17 फरवरी को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह परंपरा से अलग इस बार राष्ट्रपति भवन की जगह ढाका के नेशनल पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स के साउथ प्लाजा में होगा। ढाका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं को इस समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा है। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, यह न्योता शनिवार देर रात भारतीय पक्ष को भेजा गया। इससे पहले BNP नेताओं ने संकेत दिया था कि दक्षिण एशियाई देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं, इसलिए उनके ढाका जाने की संभावना कम है। ऐसे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर या उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन जैसे वरिष्ठ नेता कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को रीसेट करना चाहता है, लेकिन जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहता। खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी इस कार्यक्रम में बुलाए जाने की उम्मीद है। SAARC सदस्य देशों को न्योता देने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश ज्यादातर SAARC सदस्य देशों के नेताओं को आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। SAARC पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पहल पर शुरू हुआ था। जिया, तारिक के पिता थे। इसके अलावा चीन, मलेशिया, सऊदी अरब और तुर्किये जैसे मित्र देशों के प्रमुखों को भी बुलाने की तैयारी है। तारिक रहमान ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार की विदेश नीति बांग्लादेश के लोगों के हितों की रक्षा पर केंद्रित होगी और यह किसी एक देश पर आधारित नहीं होगी। रहमान बोले- SAARC को फिर एक्टिव करने की कोशिश करेंगे बांग्लादेश आम चुनाव में जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को पहली बार मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि SAARC की शुरुआत बांग्लादेश ने की थी, इसलिए वे इसे फिर से शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद वे दूसरे देशों से बात करेंगे और संगठन को दोबारा एक्टिव करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि देश में कानून-व्यवस्था हर हाल में बनाए रखी जाएगी। शांति और सुरक्षा बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून सभी पर बराबर लागू होगा। तारिक रहमान ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में सभी को साथ रहना होगा। राष्ट्रीय एकता ही देश की ताकत है और बंटवारा कमजोरी। तारिक ने कहा कि आज से देश में सच्चे अर्थों में आजादी और अधिकार बहाल हुए हैं। उन्होंने बांग्लादेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि लोगों ने सभी मुश्किलों को पार कर देश में लोकतंत्र की राह बनाई है। रहमान बोले- बांग्लादेश का हित सबसे ऊपर तारिक रहमान ने भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़े सवाल पर कहा कि हम बांग्लादेश के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे। रहमान ने यह भी कहा कि चीन बांग्लादेश का विकास में सहयोगी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में बांग्लादेश और चीन मिलकर काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि दूसरे देशों की तरह चीन भी बांग्लादेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब उनसे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने के बारे में पूछा गया, तो रहमान ने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। पीएम मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी थी इससे पहले शुक्रवार को पीएम मोदी और रहमान के बीच पहली फोन बातचीत हुई। मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि वे दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए साथ काम करने को उत्सुक हैं। BNP ने एक्स पर एक पोस्ट में मोदी के बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया। पार्टी ने कहा, ‘हम भारत के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने को तैयार हैं। हमारा रिश्ता आपसी सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि की साझा प्रतिबद्धता से आगे बढ़ेगा।’ 16 फरवरी को भारत की यात्रा पर आ रहे फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कल यानी 16 फरवरी से भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मैक्रों के दौरे का पूरा शेड्यूल जारी किया है जिसमें वो 16 फरवरी को देर रात दिल्ली पहुंच रहे हैं और 17 फरवरी को उनका मुंबई में कार्यक्रम है। प्रधानमंत्री मोदी मुंबई में मैक्रों के साथ होंगे, जहां राजभवन के दरबार हाल में MoU पर हस्ताक्षर होंगे और प्रेस बयान जारी किया जाएगा। मैक्रों का दौरा 19 फरवरी तक रहने वाला है और वो शाम को पेरिस रवाना होंगे। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतरारष्ट्रीय दौरे की व्यस्तता के चलते पीएम मोदी शायद ही तारिक रहमान के शपथ ग्रहण में जा पाएं, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे हैं तारिक रहमान तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उन्होंने 1988 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जॉइन की। 2001 के चुनाव में संगठनात्मक काम से उन्हें पहचान मिली, लेकिन 2006 के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2008 में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और करीब 17 साल तक देश से बाहर रहे। इस दौरान वे पार्टी के सीनियर उपाध्यक्ष और बाद में कार्यकारी अध्यक्ष बने। उन पर कई मामले दर्ज हुए, लेकिन बाद में अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया। पिछले साल वे बांग्लादेश लौटे और मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली। हालिया चुनाव में BNP की जीत के बाद तारिक रहमान अब देश के प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार बन गए हैं। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… तारिक रहमान बोले-भारत से रिश्तों में बांग्लादेश का हित जरूरी: चीन डेवलपमेंट में सहयोगी, हसीना की वापसी पर कहा- कानून अपना काम करेगा बांग्लादेश आम चुनाव में जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को पहली बार मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने भारत-बांग्लादेश रिश्तों से जुड़े सवाल पर कहा कि हम बांग्लादेश के हितों को सबसे ऊपर रखेंगे। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी बेस में एलियंस के शव होने की अफवाह, बराक ओबामा बोले&#45; एलियंस असली हैं, लेकिन मैंने कभी नहीं देखा</title>
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<description><![CDATA[ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में एलियंस के बारे में बात की है। उन्होंने कहा कि एलियंस असली हैं, लेकिन उन्होंने खुद उन्हें कभी नहीं देखा है और न ही उन्हें पता है कि वे कहां हैं। यह बयान शनिवार को जारी हुए एक पॉडकास्ट में आया, जहां उन्होंने कमेंटेटर और यूट्यूबर ब्रायन टेलर कोहेन से बातचीत की। जब कोहेन ने उनसे सीधे पूछा कि क्या एलियंस असली हैं, तो ओबामा ने जवाब दिया, &quot;वे असली हैं, लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा है।&quot; उन्होंने आगे कहा कि एलियंस को एरिया 51 में नहीं रखा गया है। एरिया 51 नेवादा में स्थित अमेरिकी वायुसेना का एक बेहद गोपनीय बेस है। इस जगह को लेकर अलग-अलग अफवाहें सामने आती रहती है। कुछ लोग मानते हैं कि सरकार यहां एलियन क्राफ्ट और उनके शव छिपाकर रखती है। ओबामा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वहां कोई अंडर ग्राउंड सुविधा नहीं है। उन्होंने यह भी हंसते हुए कहा कि राष्ट्रपति बनते ही उनका सबसे पहला सवाल यही था कि एलियंस कहां हैं? पिछले कुछ सालों में एलियन संपर्क को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। इसकी वजह सरकार के कुछ दस्तावेज और वीडियो रहे, जिनमें रहस्यमयी उड़ने वाली चीजें देखी गईं। करीब 13 साल पहले अमेरिकी वायुसेना के रीपर ड्रोन से ली गई रडार फुटेज लीक हुई थी। इसमें मिडिल ईस्ट के आसमान में अनआइडेंटिफाइड एनोमलस फेनोमेना (UAP) उड़ते दिखे थे। UAP शब्द अब सरकार की ओर से UFO के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह फुटेज फरवरी की शुरुआत में रिपोर्टर और यूएफओ शोधकर्ता जॉर्ज नैप और जेरेमी कॉर्बेल ने साझा की थी। साल 2021 में अमेरिकी सेनी ने नेवी के तीन अनक्लासिफाइड वीडियो जारी किए थे। इनमें आसमान में अजीब ऑब्जेक्ट तेज रफ्तार से उड़ते दिखे। एक वीडियो में एक UAP हवा के खिलाफ घूमता नजर आया था। ओबामा ने 2021 में “द लेट लेट शो” के होस्ट जेम्स कॉर्डन से बातचीत में भी इस मुद्दे पर इशारा किया था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था, “एलियन के मामले में कुछ बातें हैं, जो मैं ऑन एयर नहीं बता सकता।” हालांकि, उसी इंटरव्यू में उन्होंने यह भी माना था कि आसमान में ऐसी चीजों के फुटेज और रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिन्हें लेकर सरकार के पास साफ जवाब नहीं है। उन्होंने कहा था, ‘सच यह है कि आसमान में ऐसी वस्तुओं के फुटेज और रिकॉर्ड हैं, जिनके बारे में हमें ठीक-ठीक नहीं पता कि वे क्या हैं।’ अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के भारतीय छात्र का शव मिला, छह दिन से लापता था, रूममेट में लिंक्डइन पर जानकारी दी थी अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के 22 वर्षीय भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया का शव बरामद हुआ है। वह 9 फरवरी से लापता थे। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने रविवार को इसकी पुष्टि की। दूतावास ने X पर पोस्ट कर बताया कि स्थानीय पुलिस ने लापता छात्र का शव मिलने की पुष्टि की है। परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। दूतावास ने यह भी कहा कि वह परिवार को हर जरूरी सहायता देने के लिए तैयार है। इसमें स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और पार्थिव शरीर को भारत भेजने की व्यवस्था शामिल है। दूतावास के अधिकारी परिवार के सीधे संपर्क में हैं और सभी औपचारिकताओं में सहयोग करेंगे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लापता होने से पहले साकेत को बर्कले हिल्स स्थित लेक एंजा के पास आखिरी बार देखा गया था। उनका बैग एक घर के दरवाजे पर मिला था, जिसमें पासपोर्ट और लैपटॉप था। साकेत कर्नाटक के रहने वाले थे। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था और 2025 में ग्रेजुएट हुए थे। इसके बाद वह बर्कले में केमिकल और बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग में मास्टर्स कर रहे थे। उनके लापता होने के बाद रूममेट बनीत सिंह ने सोशल मीडिया पर लोगों से जानकारी मांगी थी। उन्होंने लिंक्डइन पर लिखा था कि साकेत 9 फरवरी से लापता हैं और लेक एंजा के पास आखिरी बार देखे गए थे। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि अगर किसी के पास कोई जानकारी हो तो तुरंत संपर्क करें। उन्होंने बताया था कि वे पुलिस के साथ मिलकर उनकी तलाश कर रहे हैं और यह उनके लिए बेहद कठिन समय है। फिलहाल मौत के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जर्मनी में ईरान विरोधी रैली, 2.5 लाख लोग जुटे, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी बोले- दुनिया खामोश रही तो और मौतें होंगी जर्मनी के म्यूनिख शहर में शनिवार को ईरान की सरकार के खिलाफ लगभग 2.5 लाख लोगों ने बड़ा प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अपील पर हुआ। उन्होंने इसे ग्लोबल डे ऑफ एक्शन बताया और कहा कि ईरान में हालिया प्रदर्शनों के बाद दुनिया को ईरानी लोगों का साथ देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने ड्रम बजाए, परिवर्तन, परिवर्तन, शासन परिवर्तन के नारे लगाए और ईरान के 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले वाले हरे-सफेद-लाल झंडे लहराए, जिन पर शेर और सूरज का चिह्न था। कई लोगों ने ‘मेक ईरान ग्रेट अगेन’ लिखे लाल कैप पहने थे, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थकों के MAGA कैप की नकल थे। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी भीड़ को संबोधित किया और ऐसे कैप हाथ में उठाकर फोटो खिंचवाए। प्रदर्शनकारियों ने रेजा पहलवी की तस्वीरें वाली तख्तियां लहराईं। कुछ पोस्टरों में उन्हें राजा कहकर संबोधित किया गया। रेजा पहलवी, ईरान के पूर्व शाह के बेटे हैं और लगभग 50 साल से निर्वासित हैं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी दी कि अगर लोकतांत्रिक देश चुप रहे तो ईरान में और मौतें होंगी। उन्होंने कहा, ‘हम ईरान के लोगों के साथ खड़े होने के लिए इकट्ठा हुए हैं। क्या दुनिया ईरान के लोगों के साथ खड़ी होगी?’ उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार का बचा रहना हर तानाशाह को यह संदेश देता है कि जितने ज्यादा लोगों को मारोगे, उतने समय तक सत्ता में रहोगे। टोरंटो में पुलिस के अनुसार लगभग 3.5 लाख लोगों ने सड़कों पर मार्च किया। साइप्रस के निकोसिया में राष्ट्रपति महल के बाहर भी करीब 500 लोगों ने ईरान सरकार के खिलाफ और पहलवी के समर्थन में प्रदर्शन किया। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, पिछले महीने ईरान में हुए प्रदर्शनों में कम से कम 7,005 लोग मारे गए थे। एजेंसी का दावा है कि वह ईरान के अंदर एक्टिविस्ट नेटवर्क के जरिए मौतों की पुष्टि करती है और पहले भी उसके आंकड़े सटीक रहे हैं। वहीं, ईरान सरकार ने 21 जनवरी को जारी अपने आंकड़ों में 3,117 लोगों की मौत की बात कही थी। ईरान की सरकार पर पहले भी अशांति के दौरान मौतों की संख्या कम बताने या सार्वजनिक न करने के आरोप लगते रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>आरोप&#45; पुतिन ने अपने विरोधी को एपिबैटिडीन जहर देकर मारा:इससे पहले लकवा फिर दर्दनाक मौत होती है, दक्षिण अमेरिकी मेंढक में मिलता है</title>
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<description><![CDATA[ यूरोप के पांच देशों ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर उनके विरोधी एलेक्सी नवलनी को &#039;एपिबैटिडीन जहर&#039; देकर मारने का आरोप लगाया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड ने कहा है कि यूरोप की लैब में नवलनी के शरीर के नमूनों की जांच में एपिबैटिडीन पाया गया। ये जहर रूस में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलता। इन देशों ने कहा कि रूस के पास यह जहर देने के साधन, मकसद और मौका तीनों थे। उन्होंने रूस के खिलाफ केमिकल वेपन्स कन्वेंशन के उल्लंघन की शिकायत करने की बात कही है। नेशनल ज्योग्राफिक के मुताबिक, ये जहर दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले जहरीले डार्ट मेंढकों की त्वचा में मिलता है। यह जहर पहले शरीर को लकवाग्रस्त करता है, फिर सांस लेने में दिक्कत पैदा करता है और आखिर में दर्दनाक मौत हो सकती है। एक डार्ट मेंढक का जहर 10 लोगों को मार सकता है डार्ट मेंढक करीब दो इंच लंबे होते हैं, लेकिन उनके शरीर में इतना जहर होता है कि वह लगभग 10 वयस्क लोगों को मार सकता है। इन मेंढकों की त्वचा से निकाले जाने वाले जहर को एपिबैटिडीन कहा जाता है। यह एक न्यूरोटॉक्सिन है, यानी ऐसा जहर जो सीधे नर्व सिस्टम पर असर करता है। इसे एक रासायनिक हथियार के रूप में भी जाना जाता है। डार्ट मेंढक का जहर धरती के सबसे घातक जहरों में गिना जाता है। यह मॉर्फीन से लगभग 200 गुना ज्यादा ताकतवर है। इससे शरीर को लकवा मार सकता है, सांस लेने में गंभीर दिक्कत पैदा हो सकती है और दर्दनाक मौत होती है। वैसे तो एपिबैटिडीन मेंढकों में प्राकृतिक रूप से मिलता है, लेकिन इसे लैब में भी बनाया जा सकता है। यूरोपीय वैज्ञानिकों को शक है कि इस मामले में इसे लैब में तैयार किया गया था। नवलनी आर्कटिक की जेल में सजा कर रहे थे नवलनी की 16 फरवरी 2024 को आर्कटिक की एक जेल में मौत हो गई थी, वो यहां 19 साल की सजा काट रहे थे। वे सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते थे और विरोध प्रदर्शन करते थे। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने कहा कि रूस नवलनी को खतरे के रूप में देखता था और इस तरह का जहर इस्तेमाल कर उसने दिखाया कि वह राजनीतिक विरोध से कितना डरता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि पुतिन सत्ता में बने रहने के लिए बायोलॉजिकल हथियार तक इस्तेमाल करने को तैयार हैं। नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया ने कहा कि उन्हें पहले दिन से यकीन था कि उनके पति को जहर दिया गया था और अब इसका सबूत मिल गया है। उन्होंने पुतिन को हत्यारा बताते हुए जवाबदेह ठहराने की मांग की। वहीं रूसी अधिकारियों का कहना है कि नवलनी टहलने के बाद बीमार पड़े और उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इन आरोपों को खारिज किया है। नवलनी को पहले भी जेल जहर देने की कोशिश हुई थी नवलनी पहले भी 2020 में जहर देने की कोशिश की गई थी। उस वक्त उन्हें ‘नोविचोक’ नाम का नर्व एजेंट दिया गया था। उन्होंने इसका आरोप क्रेमलिन पर लगाया था, लेकिन रूस ने इससे इनकार किया था। इलाज के लिए उन्हें जर्मनी ले जाया गया था। ठीक होने के बाद जब वे रूस लौटे तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और अपनी जिंदगी के आखिरी तीन साल जेल में बिताए। रूस पर पहले भी ऐसे हमलों के आरोप लगाते रहे हैं ब्रिटेन पहले भी रूस पर ऐसे हमलों का आरोप लगाता रहा है। 2018 में इंग्लैंड के सैलिस्बरी शहर में पूर्व रूसी एजेंट सर्गेई स्क्रिपल पर ‘नोविचोक’ नर्व एजेंट से हमला हुआ था। वे और उनकी बेटी गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। एक ब्रिटिश महिला डॉन स्टर्जेस की भी मौत हो गई थी। ब्रिटेन की जांच में कहा गया था कि इस हमले को हाई लेवल से मंजूरी मिली होगी। इसी तरह 2006 में लंदन में पूर्व रूसी एजेंट अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की रेडियोएक्टिव पदार्थ पोलोनियम-210 से मौत हुई थी। ब्रिटिश जांच में कहा गया था कि दो रूसी एजेंटों ने उन्हें जहर दिया और संभव है कि इस ऑपरेशन को मंजूरी दी गई हो। हालांकि रूस ने इन सभी मामलों में अपनी भूमिका से इनकार किया है। 26 साल से रूस पर पुतिन का राज ​​​​​​​पुतिन पहली बार साल 2000 में रूस के राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले 1999 में उन्हें रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने बतौर PM चुना था। 2000 से 2008 तक लगातार 2 कार्यकाल के दौरान पुतिन रूस के राष्ट्रपति पद पर काबिज रहे। रूस के संविधान के मुताबिक, पुतिन लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में साल 2008 में पुतिन के सबसे बड़े समर्थकों में शामिल दिमित्री मेदवेदेव राष्ट्रपति बने। इस दौरान पुतिन ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद संभाला। 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने अपनी पार्टी से पुतिन को प्रेसिडेंट कैंडिडेट के लिए नॉमिनेट करने को कहा। इसके बाद 2012 के चुनाव में पुतिन ने दोबारा जीत हासिल की और वो सत्ता में लौट आए। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन: नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। पूरी खबर पढ़ें.. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जर्मन चांसलर मर्ज बोले&#45; यूरोप की आजादी की गारंटी नहीं:अमेरिका से रिश्तों में गहरी दरार, नियमों से चलने वाली दुनिया खत्म</title>
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<description><![CDATA[ जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा है कि यूरोप की आजादी की अब गारंटी नहीं है। मर्ज के मुताबिक यूरोप अब यह मानकर नहीं चल सकता कि उसे अपने-आप सुरक्षा मिलती रहेगी। म्यूनिख में सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मर्ज ने माना कि यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में गहरी दरार आ गई है। उन्होंने कहा कि नियमों से चलने वाली दुनिया खत्म हो गई है, वैश्विक व्यवस्था अब उस रूप में मौजूद नहीं रही। मर्ज ने कहा कि दुनिया अब बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा से चल रही है। सम्मेलन में कई यूरोपीय नेता और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद बनी व्यवस्था खत्म हुई मर्ज ने कहा कि सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद जो वैश्विक व्यवस्था बनी थी, वह अब खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि उस समय देश आपसी नियमों और समझ के आधार पर काम करते थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मर्ज ने कहा कि ऐसे माहौल में यूरोप यह मानकर नहीं चल सकता कि उसकी सुरक्षा और आजादी अपने-आप बनी रहेगी। यूरोपीय देशों को अब ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। जरूरत पड़े तो त्याग भी करना होगा और अपनी रक्षा व अर्थव्यवस्था खुद मजबूत करनी होगी। मर्ज के मुताबिक, अब फैसले साझा नियमों से नहीं, बल्कि ताकत और अपने-अपने हितों के आधार पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, मर्ज बोले- अमेरिका भी अकेले नहीं चल सकता मर्ज ने कहा कि आज की दुनिया में अमेरिका भी अकेले नहीं चल सकता। उनके मुताबिक, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि कोई भी बड़ी ताकत अपने दम पर हर चुनौती का सामना नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अमेरिका को भी सहयोगियों की जरूरत है। सुरक्षा, रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर साझेदारी जरूरी है। सिर्फ ताकत के भरोसे आगे बढ़ना अब संभव नहीं है। मर्ज ने साफ किया कि नाटो सिर्फ यूरोप के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी फायदेमंद है। यह गठबंधन दोनों पक्षों को मजबूत बनाता है। इसलिए उन्होंने कहा, “आइए, हम मिलकर ट्रांस-अटलांटिक भरोसे को फिर से मजबूत करें। मर्ज के मुताबिक, यूरोप नाटो के भीतर ही एक मजबूत ताकत बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, ताकि साझेदारी बराबरी की हो। उन्होंने यह भी माना कि मर्ज ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस को निशाना बनाया मर्ज ने पिछले साल म्यूनिख में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान का जिक्र करते हुए उन पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “MAGA आंदोलन की सांस्कृतिक लड़ाई हमारी नहीं है।” पिछले साल म्यूनिख सम्मेलन में जेडी वेंस ने यूरोप में अभिव्यक्ति की आजादी, आप्रवासन और पारंपरिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यूरोप अपने मूल्यों से दूर जा रहा है और कुछ देशों में फ्री स्पीच सीमित हो रही है। उनके बयान को यूरोपीय नीतियों की आलोचना के तौर पर देखा गया था। मर्ज ने उसी पर जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका की ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) राजनीति और उससे जुड़ी सांस्कृतिक बहसें यूरोप की नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि यूरोप में अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन वह मानव गरिमा और संविधान के खिलाफ नहीं जा सकती। मर्ज के इस बयान को वेंस के बयान पर सीधा पलटवार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोप अपनी राजनीतिक दिशा खुद तय करेगा और अमेरिका की घरेलू राजनीति से दूरी बनाए रखेगा। फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- यूरोप को भू-राजनीतिक ताकत बनना होगा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोप सिर्फ आर्थिक ताकत न रहे, बल्कि रक्षा और तकनीक में भी मजबूत होकर एक भू-राजनीतिक ताकत बने। उनका मतलब था कि यूरोप को वैश्विक फैसलों में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभानी होगी। नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भी कहा कि सोच बदल रही है। उनके मुताबिक, यूरोप अब अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर है और नाटो के भीतर नेतृत्व की बड़ी भूमिका निभाने के लिए आगे आ रहा है। सम्मेलन के दौरान मैक्रों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अन्य यूरोपीय नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। 1963 से हो रही म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC) दुनिया की सबसे अहम सुरक्षा बैठकों में से एक है। यह हर साल जर्मनी के शहर म्यूनिख में आयोजित होती है। यहां दुनिया के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश और रक्षा मंत्री समेत बड़े रणनीतिक विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इस सम्मेलन की शुरुआत 1963 में हुई थी। उस समय इसे “इंटरनेशनल डिफेंस कॉन्फ्रेंस” कहा जाता था और यह मुख्य रूप से नाटो देशों के बीच रक्षा सहयोग पर केंद्रित थी। धीरे-धीरे यह मंच वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और विदेश नीति की बड़ी बैठक बन गया। इस सम्मेलन में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों के शीर्ष नेता हिस्सा लेते हैं। नाटो, यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे संगठनों के प्रमुख भी इसमें शामिल होते हैं। इसके अलावा सुरक्षा विशेषज्ञ, सैन्य अधिकारी, थिंक टैंक और नीति-निर्माता भी यहां मौजूद रहते हैं। म्यूनिख कॉन्फ्रेंस में वैश्विक सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों पर चर्चा होती है। नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत, बैक-चैनल डिप्लोमेसी और रणनीतिक संवाद के लिए यह अहम मंच माना जाता है। यह बैठक आमतौर पर फरवरी में होती है और तीन दिन तक चलती है। इसका आयोजन म्यूनिख के होटल बायेरिशर होफ में किया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:33:30 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:बांग्लादेश के चापाइनवाबगंज में देशी बम बनाने के दौरान धमाका; 2 की मौत, 3 घायल</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के चापाइनवाबगंज जिले में शनिवार सुबह करीब 5 बजे देशी बम बनाते समय विस्फोट हो गया। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घटना चर बगडांगा यूनियन के पाथापाड़ा गांव की है। सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी नुरे आलम ने बताया कि घर के अंदर कथित तौर पर देशी बम तैयार किए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज धमाका हुआ। मृतकों की पहचान तत्काल नहीं हो सकी है। घायलों की पहचान पाथापाड़ा गांव के मिनहाज (52) और बाजलुर रहमान (20), तथा रानीहाटी के धूमी गांव निवासी मोहम्मद शुवो (20) के रूप में हुई है। सभी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मकान की ईंटों की दीवारें ढह गईं और टिन की छत उड़कर दूर जा गिरी। आसपास के इलाके में भी अफरातफरी मच गई। पुलिस ने क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि विस्फोटक सामग्री किस उद्देश्य से तैयार की जा रही थी और इस घटना में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिकी सेना का कैरेबियन सागर में एक और बोट पर हमला, 3 की मौत अमेरिकी सेना ने कैरेबियन सागर में ड्रग तस्करी के आरोप में शुक्रवार को एक और नाव पर हमला किया है। इस हमले में 3 लोगों की मौत हुई है। अमेरिकी सदर्न कमांड के मुताबिक नाव कथित तौर पर ड्रग तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रही थी। यह हमला किया गया। अमेरिकी सदर्न कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह नाव कैरेबियन में ‘नार्को-ट्रैफिकिंग रूट’ पर चल रही थी और ड्रग तस्करी में शामिल थी। कमांड ने बताया कि हमले में नाव सवार तीन लोग मारे गए। पोस्ट के साथ एक वीडियो भी शेयर किया गया है। वीडियो में एक नाव पानी में चलते हुए दिखती है, जिसके बाद वह धमाके के साथ आग की लपटों में घिर जाती है। यह हमला ट्रम्प प्रशासन की उस कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें कथित ड्रग तस्करी में शामिल नावों को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले साल सितंबर से अब तक कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में कम से कम 38 हमले किए गए हैं। इन हमलों में अब तक कुल 133 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पिछले हफ्ते कहा था कि क्षेत्र के कुछ बड़े कार्टेल ड्रग तस्करों ने हाल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण अनिश्चितकाल के लिए नशीले पदार्थों का कारोबार बंद करने का फैसला किया है। हालांकि, हेगसेथ ने अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर किए गए इस दावे के समर्थन में कोई सबूत शेयर नहीं किया। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका लैटिन अमेरिका के ड्रग कार्टेल के साथ सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में है। उन्होंने इन हमलों को ड्रग्स की सप्लाई रोकने के लिए जरूरी कदम बताया है। खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश का मामला:भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की सजा; न्यूयॉर्क कोर्ट में गुनाह कबूला खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को 24 साल की जेल की सजा सुनाई गई। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक निखिल ने शुक्रवार को अमेरिका के न्यूयॉर्क की कोर्ट में गुनाह कबूल कर लिया है। 29 मई को सजा का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने एक्स पर पोस्ट कर निखिल गुप्ता के अपराध कबूलने की जानकारी दी। FBI के मुताबिक, यह साजिश एक अमेरिकी नागरिक की हत्या के लिए रची गई थी, जिसे अमेरिकी एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया। US अटॉर्नी ऑफिस के बयान के मुताबिक, निखिल गुप्ता उर्फ ‘निक’ ने सेकंड सुपरसिडिंग इंडिक्टमेंट में लगाए गए तीनों आरोपों को स्वीकार किया है। इन आरोपों में मर्डर-फॉर-हायर, मर्डर-फॉर-हायर की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश शामिल है। पूरी खबर यहां पढ़ें… अमेरिका का दूसरा जंगी बेड़ा मिडिल ईस्ट रवाना:यह दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर; वेनेजुएला में ऑपरेशन में शामिल था अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है। यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है। रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड को मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक हफ्ता लगेगा। वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और दूसरे युद्धपोत तैनात हैं। जेराल्ड अपने साथी जहाजों के साथ कैरिबियन सागर में तैनात था। यह इस साल वेनेजुएला में हुए अमेरिकी अभियानों में हिस्सा ले चुका है। इसके अलावा हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी मिडिल ईस्ट में भेजे गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:33:30 +0530</pubDate>
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<title>अमृतसर के युवक की कनाडा में गोली मारकर हत्या:झाड़ियों में मिली लाश, 2 महीने पहले युवक&#45;युवती के साथ नए घर में शिफ्ट हुआ था</title>
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<description><![CDATA[ अमृतसर के जंडियाला गुरु के नजदीक गांव देवीदासपुरा के रहने वाले युवक सिमरनजीत सिंह संधू का शुक्रवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसकी करीब 1 महीने पहले कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। युवक का शव झाड़ियों से बरामद हुआ। इसके बाद गुरुवार को ही युवक का शव पंजाब लाया गया था। परिजन का आरोप है कि इसके साथ रहने वाले लोगों ने ही इसकी हत्या की है। युवक करीब 2 महीने पहले ही 2 युवकों और एक युवती के साथ नए घर में शिफ्ट हुआ था। उसके पास 10 लाख रुपए थे, जो उसने लास्ट टाइम हुई वीडियो कॉल पर दिखाए भी थे। उन्हीं रुपयों के लिए युवक की हत्या की गई है। स्थानीय पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। स्टडी वीजा पर कनाडा गया था युवक
मृतक के पिता सुखदेव सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे सिमरनजीत सिंह (24) को बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजा था। सिमरनजीत साल 2023 में स्टडी वीजा पर कनाडा गया था, ताकि वहां पढ़ाई कर अपने भविष्य को संवार सके और परिवार का नाम रोशन कर सके। उन्होंने बताया कि सिमरनजीत कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया राज्य में शहर कमलूप्स शहर में रह रहा था। यहां वह करीब 2 महीने पहले ही अपने दोस्तों के शिफ्ट हुआ। उसे कनाडा का वर्क परमिट मिल चुका था। साथ ही उसे अमेरिका का भी 10 साल का वीजा मिला था। 12 जनवरी को गोली मारकर हत्या की गई परिजन बताते हैं कि उन्हें 14 जनवरी 2026 को कनाडा पुलिस की ओर से सूचना दी गई कि 12 जनवरी को सिमनरजीत सिंह की हत्या हो गई है। उसकी लाश सुनसान रास्ते पर झाड़ियों में पड़ी थी। इस सूचना के बाद घर में मातम छा गया। स्थानीय पुलिस ने परिजन को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हत्या किसने और किस कारण से की? आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और दोस्तों से भी पूछताछ की जा रही है। गांव में मातम, नम आंखों से अंतिम विदाई गुरुवार को जब युवक का शव गांव देवीदासपुरा पहुंचा तो माता-पिता और अन्य परिजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता ने नम आंखों से बताया कि उन्होंने अपने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी सारी जमीन तक बेच दी थी। उम्मीद थी कि बेटा पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनेगा। पिता की इंसाफ की गुहार मृतक के पिता ने कनाडा सरकार और भारत सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि उनके बेटे के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही उन्होंने यह भी अपील की कि उनके बेटे के बनते पैसे और उसका जरूरी सामान मोबाइल व लैपटॉप परिवार को सौंपा जाए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:33:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PAK गई पंजाबी महिला बोली&#45; मेरा 8 साल पुराना प्यार:मुंह में दांत न रहते तो भी जरूर पाकिस्तान आती; मुस्लिम से निकाह रचाकर खुश हूं</title>
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<description><![CDATA[ पंजाब से पाकिस्तान गई सरबजीत कौर की रिहाई के बाद पहली बार उसकी बातचीत का वीडियो सामने आया है, जिसमें उसकी खुशी साफ झलक रही है। उसने पाकिस्तान की मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी भावनाएं साझा कीं। इस दौरान उसके साथ उसका पति नासिर हुसैन भी नजर आया। सरबजीत ने कहा कि अगर सच्चा प्यार होता है, तो दिल में यह एहसास जरूर रहता है कि हम एक-दूसरे से मिलेंगे। उसने बताया कि उनका प्यार आज का नहीं, बल्कि पिछले 8 साल से है। उसने भावुक होकर कहा कि अगर उसके मुंह में दांत भी न रहते, तब भी वह पाकिस्तान जरूर आती। सरबजीत ने कहा कि अब वह अपनी बाकी जिंदगी पाकिस्तान में खुश रहकर बिताएगी। सरबजीत कौर की 3 बड़ी बातें वकीन ने सरकार से की घर दिलाने की मांग वहीं वकील ने कहा कि अब सरबजीत कौर सब कुछ भारत से छोड़-छाड़ कर आई हैं। मैं पाकिस्तान की सरकार से गुजारिश करता हूं कि सरबजीत कौर को रहने के लिए घर दिया जाए और उसके पति को अच्छा काम दिया जाए। सिलसिलेवार ढंग से पढ़ें पूरा मामला... 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान: कपूरथला के गांव अमानीपुर की रहने वाली सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गई थी। यह सिख जत्था 10 दिन तक पाकिस्तान में रहा। दर्शन करने के बाद जत्था 13 नवंबर को भारत लौटा: उन्होंने सिख गुरुओं से जुड़े विभिन्न स्थलों के दर्शन किए और 13 नवंबर को भारत वापस लौट आए। पूरे सिख जत्थे के एक साथ भारत लौटने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और 3 महिलाओं समेत कुल 9 श्रद्धालु पहले लौट आए थे। सिख श्रद्धालुओं के साथ वापस नहीं लौटी: हालांकि जब श्रद्धालुओं का पूरा जत्था वापस लौटा तो 1923 की जगह 1922 लोग ही वापस पहुंचे। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि सरबजीत कौर वापस नहीं आई है। उसका नाम न तो पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में मिला। पहले माना गया कि वह लापता है। इसके बाद पाकिस्तान में भी लोकल पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी उसकी तलाश शुरू कर दी। निकाहनामा और वीडियो वायरल होने से पता चला: इसके बाद अचानक उर्दू में लिखा सरबजीत का निकाहनामा वायरल हो गया। जिसमें लिखा था कि सरबजीत ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपना लिया है। उसने शेखुपुरा नूर हुसैन नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है। सरबजीत पर कपूरथला में कई केस चल रहे: सरबजीत के गांव के लोगों का कहना था कि महिला के दो बेटे हैं। इनके खिलाफ भी सुल्तानपुर लोधी में 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। गांव अमानीपुर के अंदर सरबजीत की आलीशान कोठी है। उसका लोगों से ज्यादा मिलना जुलना नहीं था। ***************** ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी महिला सरबजीत लाहौर शेल्टर होम से रिहा: मुस्लिम पति के घर लौटी, वकील के साथ नजर आई; सिख श्रद्धालुओं के साथ PAK गई थी भारत से पाकिस्तान गई पंजाबी महिला सरबजीत कौर की नई तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह अपने वकील के साथ कार में बैठी नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, सरबजीत कौर किसी कानूनी प्रक्रिया के सिलसिले में अपने वकील के साथ जा रही थी। सरबजीत कौर को 11 फरवरी को शेल्टर होम से रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह अपने पति के घर वापस चली गई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसे राजनीतिक कारणों से कैद में नहीं रखा जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, उसका रिहाई का फैसला कानूनी और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया। (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 14:00:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कन्फर्म हुआ&#45; इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म:कोर्ट के ऑर्डर पर हुई जांच, पूर्व PAK PM बोले&#45; प्राइवेट इलाज की इजाजत नहीं</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इमरान खान जेल प्रशासन से कई महीनों आंखों में धुंधलापन होने की शिकायत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन बाद में दाईं आंख की रोशनी अचानक चली गई। जांच के दौरान पिम्स अस्पताल के एक आई एक्सपर्ट को बुलाया गया। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी आंख में खून का थक्का जम गया था, जिससे गंभीर नुकसान हुआ। इलाज और इंजेक्शन देने के बाद भी उनकी दाईं आंख में अब सिर्फ लगभग 15% रोशनी बची है। वहीं इमरान का कहना है उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई है। रिपोर्ट- इमरान खान मानसिक दबाव से जूझ रहे रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से इमरान खान को अडियाला जेल में लगातार अलग-थलग रखा गया है। उनके वकील ने मुलाकात के बाद बताया कि वो काफी परेशान और मानसिक रूप से दबाव में नजर आए। 73 साल के इमरान खान ने यह भी कहा कि उन्हें अपने निजी डॉक्टरों से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई। उनका रेगुलर ब्लड टेस्ट भी नहीं हुआ। यहां तक कि दो साल में उन्हें दांतों के डॉक्टर के पास भी नहीं ले जाया गया, जबकि उन्होंने कई बार इसकी मांग की थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उनके परिवार और वकीलों से मिलने पर भी पाबंदियां लगाई गईं। अदालत के आदेश के बावजूद उनकी बहनों को नियमित रूप से मिलने नहीं दिया गया। हालांकि हाल ही में जेल प्रशासन बदलने के बाद अब उन्हें अपनी पत्नी से हफ्ते में एक बार 30 मिनट मिलने की इजाजत मिली है। उनके बेटों कासिम और सुलेमान से 2025 में सिर्फ दो बार फोन पर बात करने दी गई। पिछले पांच महीनों से उन्हें अपने मुख्य वकील और कानूनी टीम से भी मिलने नहीं दिया गया। रिपोर्ट के अंत में चेतावनी दी गई है कि अगर तुरंत बेहतर मेडिकल जांच, साथ ही परिवार और वकीलों से मिलने की सुविधा बहाल नहीं की गई, तो उनकी सेहत को और गंभीर खतरा हो सकता है। दावा- इमरान को सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन बीमारी इमरान खान की पार्टी PTI ने पिछले महीने बताया था कि इमरान खान की दाहिनी आंख में सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) नाम की बीमारी पाई गई है। पार्टी ने कहा था कि मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय में सही इलाज नहीं मिलने पर इमरान की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। CRVO आंख की एक गंभीर बीमारी है। इसमें आंख के अंदर मौजूद रेटिना से खून बाहर ले जाने वाली मुख्य नस में ब्लॉकेज हो जाता है। रेटिना आंख का वह हिस्सा है, जो देखने का काम करता है। नस बंद होने के बाद खून रेटिना में जमा होने लगता है। इससे सूजन आती है और खून का रिसाव भी हो सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, CRVO में आंखों की रोशनी जाने का खतरा तब ज्यादा होता है, जब इलाज में देरी हो जाए। खासतौर पर अगर ब्लॉकेज पूरी तरह हो, रेटिना में ज्यादा सूजन आ जाए या बार-बार खून का रिसाव होने लगे। कई मामलों में अगर 24 से 72 घंटे के भीतर इलाज नहीं मिला, तो नुकसान स्थायी हो सकता है। CRVO होने पर तुरंत इलाज जरूरी CRVO का इलाज सामान्य दवाओं या छोटे क्लिनिक में संभव नहीं होता। इसके लिए तुरंत रेटिना स्पेशलिस्ट की जरूरत पड़ती है। इलाज के दौरान आंख के अंदर सूजन कम करने के लिए विशेष इंजेक्शन दिए जाते हैं। कुछ मामलों में लेजर ट्रीटमेंट भी करना पड़ता है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को कंट्रोल करना भी जरूरी होता है, क्योंकि ये ब्लॉकेज की बड़ी वजह मानी जाती हैं। इस बीमारी के इलाज के लिए ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं, स्टरल माहौल और अनुभवी विशेषज्ञ जरूरी होते हैं। इमरान खान 3 साल से जेल में बंद हैं इमरान खान पर 100 से ज्यादा केस चल रहे हैं और वे अगस्त 2023 से जेल में हैं। भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें सरकारी गिफ्ट (तोशाखाना केस) बेचने और सरकारी सीक्रेट लीक करने जैसे आरोप शामिल हैं। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अल-कादिर ट्रस्ट के लिए पाकिस्तान सरकार की अरबों रुपए की जमीन सस्ते में बेच दिया था। इस मामले में इमरान को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पूरे मुल्क में फौज के कई अहम ठिकानों पर हमले हुए थे।​​​ पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने अल-कादिर ट्रस्ट केस में दिसंबर 2023 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी और अन्य 6 व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया था। हालांकि जब इमरान के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ, उससे पहले से ही वे तोशाखाना केस में अडियाला जेल में बंद थे। ​​​ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन को थी CRVO जैसी बीमारी अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति वुडरो विल्सन को भी अपने कार्यकाल के दौरान आंख की गंभीर समस्या हुई थी। उस समय CRVO जैसा मेडिकल टर्म प्रचलन में नहीं था, लेकिन उनकी एक आंख की रोशनी अचानक काफी कम हो गई थी और रेटिना में ब्लीडिंग भी हुई थी। आज के डॉक्टर और मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वुडरो विल्सन को जो समस्या हुई थी, वह लक्षणों के आधार पर CRVO जैसी ही थी। दरअसल, CRVO एक तकनीकी मेडिकल डायग्नोसिस है। आम भाषा में इसे लोग ‘आंख की नस में ब्लॉकेज’ या ‘रेटिना की नस बंद हो जाना’ कहते हैं। कई मामलों में या तो बीमारी का सही नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता, या फिर मरीज की पूरी मेडिकल जानकारी सामने नहीं आती। डॉक्टरों के मुताबिक, पहले के दौर में ऐसी बीमारियों को सिर्फ “अचानक नजर कम होना” या “रेटिना में ब्लीडिंग” कहकर टाल दिया जाता था, जबकि आज इन्हें अलग मेडिकल कंडीशन के तौर पर पहचाना जाता है। ------------- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल किया:मतलब निकलने पर टॉयलेट पेपर की तरह फेंका; साथ देने की कीमत आज भी चुका रहे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को संसद में कहा कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकलने के बाद उसे टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 14:00:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PAK डॉन बोला&#45; गैंगस्टर लॉरेंस गद्दार:जेल से निकले, फिर कार्रवाई करूंगा, दोनों भाई मुझसे डरते हैं; भारत में मेरे 25–30 खास लोग</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी ने वीडियो जारी कर गैंगस्टर लॉरेंस को घेरा। भट्टी ने कहा कि पिछले 10–15 दिनों से उसके खिलाफ झूठी खबरें फैलाई गईं कि उस पर गोलियां चलाई गईं। उसने लॉरेंस को खुली चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उसके पास उसे मारने के लिए हथियार हैं। भट्टी ने दावा किया कि भारत में उसके 25–30 खास लोग मौजूद हैं, जिन तक लॉरेंस आज तक नहीं पहुंच सका। साथ ही उसने लॉरेंस को गद्दार बताते हुए कहा कि सही वक्त आने पर वह जवाब देगा। कुछ दिन पहले लॉरेंस गैंग ने दावा किया था कि शहजाद भट्टी पर हमला करवाया। लॉरेंस गैंग की तरफ से गैंगस्टर रणदीप मलिक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी। जिसमें शहजाद भट्टी को पुर्तगाल में ट्रैक कर हमला करने की बात लिखी थी। भट्‌टी और लॉरेंस पहले अच्छे दोस्त थे। मगर, भट्‌टी के लॉरेंस के गुर्गों से अपने काम करवाने और पहलगाम अटैक पर लॉरेंस की हाफिज सईद को धमकी के बाद वह एक-दूसरे के कट्‌टर दुश्मन बन गए हैं। वीडियो में शहजाद भट्टी ने क्या कहा… ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी डॉन ने बिहार CM को धमकाया, मुस्लिम महिला का हिजाब उतारने पर भड़का, बोला- माफी मांगो, फिर मत कहना चेतावनी नहीं दी बिहार के CM नीतीश कुमार द्वारा मुस्लिम महिला के चेहरे से हिजाब हटाने पर पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्‌टी भड़क गया है। उसने वीडियो जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें, वरना बाद में ये मत कहना की चेतावनी नहीं दी गई थी। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:कंबोडिया में नकली भारतीय पुलिस स्टेशन बनाकर हो रही थी ठगी, 200 फर्जी कॉल सेंटर बंद</title>
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<description><![CDATA[ कंबोडिया में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी चल रही थी। हजारों लोग इमारतों में बैठकर अलग अलग देशों के लोगों को फोन और इंटरनेट के जरिए ठग रहे थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब सरकार ने इन ठिकानों पर छापा मारकर करीब 200 ऐसे सेंटर बंद कर दिए हैं। कई बड़े सरगना पकड़े गए हैं और हजारों लोगों को देश से बाहर भेजा गया है। छापे के दौरान एक जगह ऐसा कमरा मिला जिसे भारतीय पुलिस स्टेशन की तरह बनाया गया था। वहां गांधी की फोटो और भारत से जुड़े निशान लगाए गए थे। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि सामने वाले व्यक्ति को लगे कि वह सच में भारत की पुलिस या किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है। कम्पोट प्रांत में वियतनाम सीमा के पास स्थित एक बड़े परिसर में पत्रकारों को ऐसे कमरे दिखाए गए, जहां कंप्यूटर की कतारें लगी थीं। वहां थाई नागरिकों को ठगने के निर्देशों वाले दस्तावेज पड़े थे। फोन कॉल के लिए स्टूडियो बूथ और एक नकली भारतीय पुलिस स्टेशन भी बनाया गया था। पुलिस का कहना है कि उनके पास इतने लोगों को रोकने के लिए पर्याप्त बल नहीं था। कम्पोट के प्रांतीय पुलिस प्रमुख माओ चनमोथुरिथ ने बताया, “पूरे प्रांत में हमारे पास करीब 1000 पुलिसकर्मी और 300 सैन्य पुलिसकर्मी हैं। जब यहां से 6 से 7 हजार लोग एक साथ निकले, तो हम उन्हें रोक नहीं पाए।” अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा पर टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी संसद में वोटिंग, ट्रम्प की धमकी के बावजूद 6 सांसदों ने समर्थन में वोट दिया कनाडा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में वोटिंग हुई। टैरिफ रद्द करने से जुड़ा प्रस्ताव 219 के मुकाबले 211 वोट से पास हो गया। इस दौरान क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिली। ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन के 6 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के 1 सांसद ने इसके खिलाफ वोटिंग की। वोटिंग से पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट कर रिपब्लिकन सांसदों को चेतावनी दी थी कि जो भी टैरिफ के खिलाफ वोट करेगा, उसे चुनाव के समय गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। अब यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा, जहां रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। हालांकि अगर यह सीनेट से भी पास हो जाए, तब भी इसके कानून बनने की संभावना काफी कम मानी जा रही है। क्योंकि इसे राष्ट्रपति ट्रम्प की मंजूरी चाहिए होगी। चूंकि ट्रम्प ने ही टैरिफ लगाए हैं, इसलिए वे इस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं, यानी इसे रोक सकते हैं। अगर राष्ट्रपति ट्रम्प किसी बिल को वीटो कर देते हैं, तो कांग्रेस दोबारा उस पर वोट कर सकती है। लेकिन इस बार साधारण बहुमत नहीं, बल्कि दोनों सदनों (हाउस और सीनेट) में दो तिहाई बहुमत चाहिए होता है। यानी कि व्यावहारिक तौर पर टैरिफ हटने की संभावना फिलहाल बहुत कम है। ट्रम्प का कहना है कि कनाडा ने कई सालों तक व्यापार के मामले में अमेरिका का फायदा उठाया है। उन्होंने कनाडा पर अलग अलग तरह के टैरिफ लगाए हैं। हाल ही में कनाडा और चीन के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के जवाब में ट्रम्प ने कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है। बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी, NCP नेता बोले- पूरा भरोसा हमारा गठबंधन सरकार बनाएगा
 बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। इस बार 51 राजनीतिक पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए मैदान में हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाता आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 साल के हैं। इनमें करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। पूर्व पीएम खालिदा जिया की पार्टी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। माना जा रहा है कि अगर BNP चुनाव जीतती है तो खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अगले पीएम बनेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:33:05 +0530</pubDate>
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<title>आरोप&#45; इजराइल ने गाजा में प्रतिबंधित वैक्यूम बम गिराए थे:इनसे तापमान 3,500 डिग्री पहुंचा, हजारों इंसान भाप बनकर गायब</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल पर गाजा में ‘वैक्यूम बम’ इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। रिपोर्ट ‘द रेस्ट ऑफ द स्टोरी’ के मुताबिक, ये बम पहले हवा में ईंधन जैसा एक बादल फैलाते हैं और फिर उसमें आग लगा देते हैं। इससे बहुत बड़ा आग का गोला बनता है और आसपास की हवा खिंचकर एक तरह का जीरो (वैक्यूम) पैदा हो जाता है। इन धमाकों से तापमान 3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इन बमों में एल्यूमिनियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व होते हैं, जो कुछ ही सेकेंड में शरीर को जला देते हैं। मिलिट्री एक्सपर्ट्स और चश्मदीदों का भी कहना है कि इजराइल ने वहां ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया, जिन्हें ‘वैक्यूम बम’, ‘थर्मल’ या ‘थर्मोबैरिक’ बम कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में मारे गए कई लोगों के शव तक नहीं मिले। गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने 2,842 ऐसे फिलिस्तीनियों का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिनके बारे में कहा गया कि दफनाने के लिए उनका कोई हिस्सा तक नहीं बचा। वहीं 3,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। सीजफायर लागू होने के बाद से गाजा में 500 लोगों की मौत इस वक्त गाजा में औपचारिक सीजफायर लागू है और समझौते के 100 दिन पूरे होने के बाद यह दूसरे चरण में पहुंच चुका है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है। 10 अक्टूबर 2025 से अब तक 500 से ज्यादा फिलिस्तीनियों के मारे जाने की खबरें आई हैं। एक मां, यासमीन महानी, ने अपनी आपबीती सुनाई। 10 अगस्त 2024 को गाजा सिटी के अल-तबिन स्कूल पर हमले के बाद वह अपने बेटे साद को ढूंढ रही थीं। उन्हें वहां अपने पति तो मिल गए, लेकिन बेटे का कोई निशान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि मस्जिद में उन्हें जमीन पर मांस और खून बिखरा मिला, लेकिन दफनाने के लिए बेटे का कोई हिस्सा तक नहीं मिला। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यासमीन जैसी हजारों माताएं आज भी अपने बच्चों को अस्पतालों और मुर्दाघरों में तलाश रही हैं। इस युद्ध में मरने वालों की संख्या 72,000 से ज्यादा बताई जा रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इजराइल पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे बमों का इस्तेमाल घनी आबादी वाले इलाकों में करना बहुत गंभीर मामला है। बांग्लादेश पर तीन तरह के वैक्यूम बम इस्तेमाल करने का आरोप एमके-84 ‘हैमर’: करीब 900 किलो का बम, जो 3,500 डिग्री तक तापमान पैदा कर सकता है। इसका दबाव और गर्मी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। बीएलयू-109 बंकर बस्टर: यह मजबूत ढांचे में घुसकर अंदर फटता है और बंद जगहों में आग का बड़ा गोला बनाता है। जीबीयू-39: इसे सटीक निशाना लगाने वाला ग्लाइड बम बताया गया है। अल-तबिन स्कूल पर हमले के बाद इसके टुकड़े मिलने की बात कही गई है। इन हथियारों को एयरोसोल या वैक्यूम बम भी कहा जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनका असर इतना भीषण होता है कि इमारत बाहर से ज्यादा खराब नहीं दिखती, लेकिन अंदर मौजूद हर चीज जलकर राख हो सकती है। व्हाइट हाउस में नेतन्याहू से मिले ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बुधवार को व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई। ये बैठक करीब 2 घंटे तक बंद कमरे में चली। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा- मैंने नेतन्याहू से साफ कहा है कि अमेरिका को ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत जारी रखनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि बैठक बहुत अच्छी रही, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। ईरान के साथ अच्छा समझौता हो सकता है तो यह बेहतर होगा, लेकिन नहीं हुआ तो आगे क्या करना है, यह देखा जाएगा। ट्रम्प ने यह भी याद दिलाया कि पिछली बार ईरान ने समझौता नहीं किया था, जिसके बाद अमेरिका ने उस पर सैन्य कार्रवाई &#039;ऑपरेशन मिडनाइड हैमर&#039; किया था। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से गाजा की स्थिति और क्षेत्र में शांति प्रयासों पर भी बात की है। नेतन्याहू ने ट्रम्प से मुलाकात से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से भी मुलाकात की। 27 जनवरी: नेतन्याहू बोले- गाजा में अमेरिका के कारण हमारे सैनिक मरे इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया था कि अमेरिका की वजह से इजराइल के कई सैनिक मारे गए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक उन्होंने कहा था कि हमास के खिलाफ गाजा जंग के दौरान हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई रोक दी गई थी। नेतन्याहू ने कहा था कि इजराइल के पास जरूरी गोला-बारूद खत्म हो गया था, इस वजह से कुछ सैनिकों की जान चली गई। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस वजह से कितने सैनिकों की मौत हुई। इजराइली पीएम ने सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि यह हथियार रोक तब खत्म हुई जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बने। पूरी खबर पढ़ें… नेतन्याहू बोले- अलग फिलिस्तीन किसी हाल में नहीं बनेगा नेतन्याहू ने यह भी कहा था कि एक अलग फिलिस्तीनी देश बनने की कोई संभावना नहीं है और न ही ऐसा होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इजराइल गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक दोनों पर कंट्रोल बनाए रखेगा, भले ही बाकी देश एक अलग फिलिस्तीन को मान्यता देते रहें। नेतन्याहू ने कहा कि टू स्टेट सॉल्यूशन (द्वि राष्ट्र समाधान) को लागू होने से उन्होंने बार-बार रोका है। नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल जॉर्डन नदी से लेकर समुद्र तक कंट्रोल बनाए रखेगा। उन्होंने ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के हालिया बयानों का भी जिक्र किया। अमेरिका ने इलाके में अपना एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है। नेतन्याहू ने कहा कि ट्रम्प अपना फैसला खुद लेंगे और इजराइल अपना। लेकिन अगर ईरान ने इजराइल पर हमला करने की बड़ी गलती की, तो इजराइल ऐसा जवाब देगा, जैसा ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा।
 इजराइल को सालाना ₹32,000 करोड़ की मदद दे रहा अमेरिका वॉर पावर इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इजराइल को हर साल लगभग 3.8 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपये) का सैन्य सहायता देता है। यह मुख्य रूप से फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग (FMF) के तहत होता है, जिसमें 3.3 अरब डॉलर सामान्य हथियार खरीद के लिए और 500 मिलियन डॉलर मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए दिए जाते हैं। यह सहायता 2016 में साइन हुए 10 साल के समझौते के तहत दी जाती है। यह 2019 से शुरू हुआ और 2028 तक चलेगा। इस MOU के तहत कुल 38 अरब डॉलर की सहायता का वादा किया गया था, जो हर साल बराबर किश्तों में मिलती है। यह समझौता ओबामा प्रशासन में हुआ था। अमेरिकी कांग्रेस हर साल इसे अप्रूव करती है। इसके अलावा अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अतिरिक्त सहायता दी है। 2023-2025 तक कुल 21.7 अरब डॉलर से ज्यादा मिलिट्री एड दी गई है, जिसमें 2024 में 8.7 अरब डॉलर का स्पेशल पैकेज शामिल है। 2025 में भी सालाना 3.8 अरब डॉलर के आसपास जारी रही और ट्रम्प प्रशासन ने मार्च 2025 में इमरजेंसी अथॉरिटी से 4 अरब डॉलर की फास्ट-ट्रैक सहायता दी। कुल मिलाकर, अक्टूबर 2023 से अब तक करीब 17-22 अरब डॉलर या उससे ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। इजराइल की सेना दुनिया में 15वें नंबर पर इजराइल की सैन्य शक्ति दुनिया में सबसे मजबूत और उन्नत मानी जाती है। जनवरी 2026 तक, ग्लोबल फायर पावर (GFP) की रैंकिंग के अनुसार, इजराइल 145 देशों में 15वें स्थान पर है। इसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.2661 है (जितना कम स्कोर, उतनी ज्यादा ताकत)। यह टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और रणनीति के कारण इतनी ऊंची रैंकिंग रखता है। वहीं, अमेरिका की सेना दुनिया में नंबर 1 पर है। गाजा जंग में 1 हजार से ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी इजराइल-हमास युद्ध में 2023 से अब तक करीब 900 से 1,150 इजराइली सैनिकों की मौत हुई है। इजराइली अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवंबर 2025 तक कुल 922 सैनिकों की मौत हुई है। इसमें से 471 गाजा में ग्राउंड ऑपरेशंस और बॉर्डर पर ऑपरेशंस के दौरान मारे गए। इजराइली सेना ने खुद 1,152 सैनिकों की मौत स्वीकार की है, जिसमें से ज्यादातर 7 अक्टूबर 2023 के हमले और उसके बाद के ग्राउंड ऑपरेशंस में हुईं। जंग के करीब ढाई साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। इन दो सालों में गाजा की 98% खेती की जमीन बंजर हो गई है। अब सिर्फ 232 हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ बची है। यहां फिर से खेती शुरू करने में 25 साल लगेंगे। जंग की वजह से गाजा के 23 लाख लोगों में से 90% बेघर हो गए हैं। ये बिना पानी-बिजली के तंबुओं में रह रहे हैं और आधे से ज्यादा भुखमरी झेल रहे हैं। 80% इलाका मिलिट्री जोन बन चुका है। UN की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर लग सकते हैं। 80% इमारतें तबाह हो गई हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। ………………………….. ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- दूसरा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा: नए समझौते पर सहमति का दबाव बनाया; एक जंगी बेड़ा पहले ही पहुंच चुका है ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>बांग्लादेश में वोटिंग जारी, BNP और जमात में मुकाबला:12 करोड़ वोटर्स से यूनुस बोले&#45; आज का दिन आजादी जैसा, नया बांग्लादेश बनाने का मौका</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। इस बार 51 राजनीतिक पार्टियां मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला जमात-ए-इस्लामी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में माना जा रहा है। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाता आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 साल के हैं। इनमें करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। पूर्व पीएम खालिदा जिया की पार्टी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है। माना जा रहा है कि अगर BNP चुनाव जीतती है तो खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान अगले पीएम बनेंगे। वहीं अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने वोट डालने के बाद कहा कि आज पूरे देश के लिए खुशी और आजादी जैसा दिन है। यह बुरे दौर के खत्म होने और नए सपने की शुरुआत का दिन है, मिलकर नया बांग्लादेश बनाने का मौका है। बांग्लादेश में चुनाव की 5 तस्वीरें… बांग्लादेश चुनाव से जुड़े सभी बड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइये… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:33:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>भारत&#45;US ट्रेड डील में भारत को और राहत:दाल और 500 अरब डॉलर की खरीद भी जरूरी नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने भारत के साथ हुई हालिया ट्रेड डील पर जारी अपनी फैक्ट शीट में कई बड़े बदलाव किए हैं। पहले जिन बातों का साफ जिक्र था, अब उन्हें या तो हटा दिया गया है या उनकी भाषा बदली गई है। पिछले हफ्ते दोनों देशों ने ट्रेड डील का ऐलान किया था। इसके बाद व्हाइट हाउस ने एक फैक्ट शीट जारी कर आगे की रूपरेखा बताई थी। लेकिन अब उसी दस्तावेज का नया वर्जन जारी हुआ है। सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर है। पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। अब नए दस्तावेज से दाल का जिक्र हटा लिया गया है। 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भाषा बदली गई है। पहले लिखा था कि भारत, अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए &#039;कमिटेड&#039; है। अब इसे बदलकर &#039;इरादा रखता है&#039; कर दिया गया है। डिजिटल सर्विस टैरिफ पर भी अमेरिका के रुख में नरमी नए दस्तावेज में सिर्फ एनर्जी, सूचना और संचार तकनीक, कोयला और कुछ अन्य सामान की बात कही गई है। डिजिटल सर्विस टैरिफ पर भी अमेरिका ने नरमी दिखाई है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैरिफ हटाएगा। अब सिर्फ इतना लिखा है कि भारत डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है। अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल इम्पोर्ट के कारण पेनल्टी के रूप में लगाए गए 25% टैरिफ को वापस करने का भी फैसला लिया है। इस फैसले से भारतीय कारोबारियों को ₹40 हजार करोड़ की राहत मिलने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस आधिकारिक जानकारी के मुताबिक 27 अगस्त 2025 से लेकर 6 फरवरी 2026 के बीच अमेरिका द्वारा किए गए जिन इम्पोर्ट पर यह पेनल्टी लगी थी, उनका रिफंड दिया जाएगा। यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन कानून के तहत जारी किया जाएगा। भारतीय निर्यातकों को कितना रिफंड मिलेगा, ये अभी तय नहीं है। क्योंकि रिफंड की राशि अमेरिकी इम्पोर्टर को दी जाएगी, फिर वे भारतीय एक्सपोर्टर के साथ बातचीत करके इस राशि का बंटवारा करेंगे। भारत पर नजर रखने के लिए टास्क फोर्स गठित ट्रेड डील को लेकर अंतरिम समझौते के ढांचे के अनुसार भारत रूस से तेल का आयात दोबारा शुरू न करे, इस पर निगरानी रखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तीन मंत्रियों की एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। इस समिति को लगता है कि भारत ने रूस से तेल का इम्पोर्ट दोबारा शुरू कर दिया है, तो वह राष्ट्रपति ट्रम्प को दोबारा 25% पेनल्टी लगाने और अन्य कार्रवाई करने के लिए सिफारिश कर सकती है। भारत को इस समझौते से मिलने वाले लाभ अमेरिकी टैरिफ में कमी: भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका के टैरिफ को 18% तक घटाया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। चुनिंदा उत्पादों पर जीरो टैरिफ: जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे और विमान पार्ट्स पर पूरी तरह टैरिफ खत्म किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक पहुंच: भारतीय MSME, किसान, मछुआरे, महिलाओं और युवा उद्यमियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रवेश। निर्यात क्षेत्रों में बढ़ावा: टेक्सटाइल, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी में नए अवसर। सेक्शन 232 छूट: विमान पार्ट्स पर अमेरिकी सेक्शन 232 के तहत छूट मिलेगी। ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा: कुछ ऑटो कंपोनेंट्स के लिए अमेरिका में विशेष पहुंच मिलेगी। जेनेरिक दवाओं पर बेहतर शर्तें: भारतीय जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स के लिए टैरिफ और नियामक नियमों में सुधार। -------------- यह खबर भी पढ़ें… रूस बोला- भारत पर हमसे तेल नहीं खरीदने का दबाव:अमेरिका एनर्जी सप्लाई पर कंट्रोल चाहता है, ताकि दुनिया के देश उनसे महंगी गैस खरीदें रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत जैसे देशों पर दबाव बना रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई उसके कंट्रोल में रहे और देश मजबूर होकर महंगी अमेरिकी गैस खरीदें। उन्होंने यह बातें 9 फरवरी को डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे के मौके पर कहीं। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:20:17 +0530</pubDate>
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<title>बांग्लादेश में शेख हसीना की सीट पर हिंदू उम्मीदवार:BNP को दे रहे कड़ी टक्कर; कल वोटिंग और संविधान सुधारों पर जनमत संग्रह</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट गोपालगंज-3 पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। यहां BNP के उम्मीदवार एसएम जिलानी को दो हिंदू उम्मीदवार कड़ी टक्कर दे रहे हैं।  निर्दलीय उम्मीदवार गोविंद चंद्र प्रमाणिक और गणो फोरम के दुलाल चंद्र विश्वास को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। गोपालगंज-3 सीट में टुंगीपाड़ा और कोटालिपाड़ा इलाके आते हैं।  टुंगीपाड़ा में करीब 26% और कोटालिपाड़ा में 47% से ज्यादा हिंदू आबादी है। यह इलाका शेख मुजीबुर रहमान की जन्मस्थली है और लंबे समय से अवामी लीग का गढ़ माना जाता रहा है। गोविंद चंद्र प्रमाणिक का कहना है कि उन्हें लोगों से अच्छा समर्थन मिल रहा है। वहीं एक 23 साल के युवक ने कहा कि अगर वोट नहीं दिया तो हमला या केस हो सकता है। उसने कहा कि वोट तो देंगे, लेकिन शायद इस बार BNP को वोट दें। बांग्लादेश में 12 फरवरी को वोटिंग और संविधान सुधारों पर जनमत संग्रह होना है। BNP ने 80 हिंदुओं को टिकट दिया BNP ने भी कई अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। उसके 80 हिंदू उम्मीदवारों में से ढाका-1 सीट से गोयेश्वर चंद्र रॉय को मजबूत माना जा रहा है। मगुरा में निताई रॉय चौधरी के सामने कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं है। बागेरहाट-1 सीट जो पहले अवामी लीग का गढ़ रही है, वहां BNP के कपिल कृष्ण मंडल मजबूत माने जा रहे हैं। बागेरहाट-4 में सोमनाथ डे भी जीत के दावेदार बताए जा रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी ने भी पहली बार किसी हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया है। पार्टी ने खुलना-1 सीट से कृष्णा नंदी को मैदान में उतारा है। यहां मुकाबला BNP के आमिर एजाज खान और सीपीबी के किशोर कुमार रॉय से है। कृष्णा नंदी अपने सरल और मजाकिया अंदाज के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। हिंदू बहुल जिलों में भी बड़े दलों ने हिंदू उम्मीदवार नहीं उतारे गोपालगंज और खुलना के अलावा बागेरहाट, बरीसाल, पिरोजपुर, मगुरा, जेसोर और दिनाजपुर जिलों में भी हिंदू आबादी अच्छी खासी है। लेकिन बरीसाल, पिरोजपुर, जेसोर और दिनाजपुर में इस बार बड़ी पार्टियों ने हिंदू उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। बरीसाल-5 सीट से डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट की डॉ. मोनिषा चक्रवर्ती चर्चा में हैं। बरीसाल-2 से गणो अधिकार परिषद के रंजीत कुमार बरोई चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी जीत की संभावना कम मानी जा रही है। पिरोजपुर में कोई अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में नहीं है। जेसोर-4 से BMJP के सुकृति कुमार मंडल चुनाव लड़ रहे हैं। दिनाजपुर-3 से CPB के अमृत कुमार रॉय और दिनाजपुर-1 से जकर पार्टी के रघुनाथ चंद्र रॉय मैदान में हैं, लेकिन उनकी जीत की उम्मीद बहुत कम बताई जा रही है। साउथ एशिया के पावर बैलेंस के लिए अहम बांग्लादेश बांग्लादेश का आम चुनाव तय करेगा कि देश आगे भारत के करीब रहेगा या पाकिस्तान और चीन की तरफ झुकेगा। इससे साउथ एशिया का पावर बैलेंस बदल सकता है। इसी वजह से इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है। बांग्लादेश साउथ एशिया के पावर बैलेंस के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह देश भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों चारों मोर्चों पर एक साथ असर डालता है। बांग्लादेश, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लगभग चारों तरफ से घेरता है। भारत का नॉर्थ-ईस्ट सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए भारत से कनेक्ट होता है। ऐसे में बांग्लादेश की भूमिका भारत के लिए कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सप्लाई लाइनों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाती है। दूसरी बड़ी वजह है भारत-चीन की रणनीतिक खींचतान। चीन पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में बंदरगाह, सड़क, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर चुका है। बांग्लादेश अगर चीन के ज्यादा करीब जाता है तो यह भारत के लिए सीधा रणनीतिक झटका होता है, खासकर बंगाल की खाड़ी और इंडियन ओशन रीजन में। बांग्लादेश की समुद्री सीमा इस इलाके को रणनीतिक रूप से बहुत अहम बना देती है। यह इलाका ग्लोबल शिपिंग, एनर्जी रूट्स और नौसैनिक गतिविधियों के लिए बेहद संवेदनशील है। चौथा फैक्टर है इस्लामिक राजनीति और कट्टरपंथ। बांग्लादेश मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन अब तक उसकी राजनीति तुलनात्मक रूप से संतुलित रही है। अगर वहां राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है या कट्टरपंथ को जगह मिलती है, तो इसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत, म्यांमार और पूरे साउथ एशिया की सुरक्षा पर पड़ता है। ------------------- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश को 35 साल बाद नया PM मिलेगा:चुनाव पर भारत-पाक और चीन की नजर, बदल जाएगा साउथ एशिया का पावर बैलेंस बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं। पूर्व पीएम शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव है। 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति में इन दो नेताओं का दबदबा रहा। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:20:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कनाडा के स्कूल में गोलीबारी, शूटर समेत 9 की मौत:25 घायल, स्कूल में 175 स्टूडेंट पढ़ते हैं; PM कार्नी ने जर्मनी दौरा रद्द किया</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के टम्बलर रिज शहर में मंगलवार को एक हाईस्कूल में गोलीबारी हुई। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 घायल हैं। अभी तक ये जानकारी नहीं आई है कि मरने वालों में कोई छात्र है या नहीं। स्कूल को एहतियातन बंद कर दिया गया है। इलाके के विधायक लैरी न्यूफेल्ड ने बताया कि हालात काबू में करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और एंबुलेंस की टीमें मौके पर भेजी गईं हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो लोग अपने परिवार वालों को ढूंढने के लिए बाहर निकल आए हैं, वे घर लौट जाएं। वहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस गोलीबारी के बाद अपना जर्मनी दौरा रद्द कर दिया है। सरकारी वेबसाइट के मुताबिक, हादसे वाले टम्बलर रिज सेकेंडरी स्कूल में 7 से 12 क्लास तक के कुल 175 छात्र पढ़ते हैं। संदिग्ध महिला ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने बताया कि संदिग्ध एक महिला थी, जिसने स्कूल ड्रेस पहन रखी थी और उसके बाल भूरे थे। उसका शव स्कूल के अंदर मिला। पुलिस का मानना है कि उसने खुद को गोली मारी है। पुलिस के अनुसार, दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट (भारतीय समयानुसार रात करीब 2 बजे) पर स्कूल में गोलीबारी की खबर मिली थी। जब अधिकारी हाई स्कूल पहुंचे तो वहां छह लोग मृत मिले। एक अन्य घायल की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। इसके अलावा, पास के एक घर में दो और लोगों के शव मिले। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह इस घटना से बेहद दुखी हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना जताई और राहतकर्मियों की तारीफ की। छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया हमलावर के अलावा छह और लोग स्कूल के अंदर मृत मिले। दो घायलों को गंभीर हालत में हेलीकॉप्टर से अस्पताल भेजा गया। एक अन्य व्यक्ति की अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। करीब 25 लोगों को हल्की चोटों के साथ स्थानीय मेडिकल सेंटर में इलाज के लिए ले जाया गया। पुलिस अधिकारी केन फ्लॉयड ने बताया कि स्कूल से लगभग 100 छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गोलीबारी की वजह अभी साफ नहीं है। हादसे वाली जगह पर इमरजेंसी अलर्ट खत्म ब्रिटिश कोलंबिया की पब्लिक सेफ्टी मंत्री और सॉलिसिटर जनरल नीना क्रिगर ने इस गोलीबारी को &#039;दिल दहला देने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोगों की मदद के लिए हर संभव मदद करेगी। क्रिगर ने कहा कि RCMP ने टम्बलर रिज में जारी इमरजेंसी अलर्ट खत्म कर दिया है। पुलिस का मानना है कि अब कोई अन्य संदिग्ध फरार नहीं है और आम लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है। इस बीच, टम्बलर रिज के एलीमेंट्री और सेकेंडरी स्कूलों को इस हफ्ते के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने ऑनलाइन जारी बयान में कहा कि इस दुखद घटना के कारण दोनों स्कूल पूरे हफ्ते बंद रहेंगे। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट में न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान ब्लास्ट:करीब 47 की मौत, 115 घायल, इनमें कई विदेशी नागरिक; रात 1.30 बजे हादसा स्विट्जरलैंड के क्रांस मोंटाना शहर के &#039;अल्पाइन स्की रिसॉर्ट&#039; में गुरुवार को न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान विस्फोट हुआ। स्विट्जरलैंड पुलिस के मुताबिक हादसे में करीब 47 लोगों की मौत हुई है, जबकि 115 घायल हैं। मरने वालों में कई देशों के नागरिक शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<title>रूस में भारतीय छात्रों के शोषण के मामले बढ़े:2025 में दुनियाभर में 350 शिकायतें दर्ज, इनमें 200 रूस से</title>
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<description><![CDATA[ रूस की एक यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में 7 फरवरी को हुई चाकूबारी की घटना में चार भारतीय छात्र घायल हो गए। इस घटना के बाद रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और परेशानियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसी बीच विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। दुनिया भर में भारतीय छात्रों की तरफ से शोषण, उत्पीड़न और नस्लीय भेदभाव को लेकर की गई शिकायतों में से आधे से ज्यादा मामले सिर्फ रूस से जुड़े हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 196 देशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने ऐसी करीब 350 शिकायतें दर्ज कराईं। इनमें से 200 से ज्यादा शिकायतें रूस में पढ़ने वाले छात्रों की थीं। पिछले तीन सालों में इन शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ी है। साल 2023 में 68 शिकायतें दर्ज हुई थीं। 2024 में यह संख्या बढ़कर 78 हो गई और 2025 में बढ़कर 201 तक पहुंच गई। यूनिवर्सिटीज पर भी मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप रूस में पढ़ने वाले ज्यादातर भारतीय मेडिकल छात्र राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु से आते हैं। कम फीस और आसानी से एडमिशन मिलने की वजह से रूस लंबे समय से मेडिकल की पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों की पसंद रहा है। लेकिन अब वहां से लगातार शिकायतें सामने आने लगी हैं, जिससे छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई छात्रों का कहना है कि उन्हें दूसरे देशों के छात्रों की तरफ से अक्सर भेदभाव झेलना पड़ता है। छात्रों का आरोप है कि कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन भी उन्हें मानसिक रूप से परेशान करता है। छोटी-छोटी बातों पर कॉलेज से निकालने की धमकी दी जाती है। वीजा और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं के डर की वजह से कई छात्र खुलकर अपनी परेशानी बता भी नहीं पाते। मॉस्को की बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके एक छात्र ने मीडिया को बताया कि उनके हॉस्टल की रसोई में मामूली कहासुनी के बाद कुछ विदेशी छात्रों ने भारतीय छात्रों पर हमला कर दिया था और चाकू दिखाकर डराया था। भारतीय छात्रों से अक्सर नस्लीय भेदभाव होता है फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स से जुड़े संगठनों का कहना है कि रूस में भारतीय छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव आम बात हो गई है। कई बार छात्रों के साथ गाली-गलौज भी होती है और जब वे इसकी शिकायत करते हैं तो यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से उन्हें सही मदद नहीं मिलती। छात्रों का यह भी कहना है कि नियमों के अनुसार एक यूनिवर्सिटी में करीब 200 विदेशी छात्रों को ही एडमिशन दिया जाना चाहिए, लेकिन कुछ यूनिवर्सिटिज 1,200 से भी ज्यादा छात्रों को दाखिला दे देती हैं। बाद में इन्हीं छात्रों को, कई बार छठे साल में भी पढ़ाई से बाहर कर दिया जाता है। इससे छात्रों को भारी आर्थिक नुकसान होता है और वे मानसिक तनाव में भी आ जाते हैं। रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 50% घटी हालात बिगड़ने की वजह से अब कई भारतीय छात्र रूस की जगह कजाखस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों में पढ़ाई करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनोज कुमार ने मीडिया बताया कि इन सब दिक्कतों की वजह से पिछले कुछ सालों में रूस जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 50% घट गई है। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे छात्रों का भरोसा और कम हुआ है। इसी मुद्दे पर लोकसभा में सवाल पूछे जाने पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशों में भारतीय छात्रों और कामगारों की मदद के लिए भारतीय दूतावासों में खास अधिकारी तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दूतावास लगातार छात्रों से संपर्क में रहते हैं, उन्हें वहां की चुनौतियों और खतरों के बारे में बताते हैं और सीनियर अधिकारी विदेशी यूनिवर्सिटियों में जाकर भारतीय छात्रों से सीधे बातचीत भी करते हैं। -------------- यह खबर भी पढ़ें… पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:05:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं, कश्मीरी मूल की हैं</title>
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<description><![CDATA[ एपस्टीन फाइल्स विवाद में अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। लेबर पार्टी ने उनके इस्तीफे की मांग की है। हालांकि स्टार्मर ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है। शबाना महमूद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर मूल की है। 2025 में गृह मंत्री बनने वाली वह पहली मुस्लिम महिला हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं, तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री भी होंगी। ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि पीएम स्टार्मर के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा। मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने कहा कि यह नियुक्ति गलत थी। मैकस्वीनी ने माना कि उन्हें पता था कि मंडेलसन ने जेफ्री एपस्टीन का जेल जाने के बाद भी समर्थन किया था। मंडेलसन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी रहते हुए एपस्टीन को मार्केट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शेयर की थी। मैकस्वीनी ने कहा कि इस फैसले से पार्टी, देश और राजनीति पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। वहीं विपक्ष का कहना है पीएम स्टार्मर को मामले की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिका ने बांग्लादेश पर टैरिफ 1% घटाया, कुछ गारमेंट प्रोडक्ट्स पर टैरिफ जीरो करने का वादा भी किया अमेरिका ने बांग्लादेश पर टैरिफ 20% से घटाकर 19% कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने कुछ कपड़ा और गारमेंट उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म करने का वादा किया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया कि अमेरिका बांग्लादेशी उत्पादों पर लगाए गए &#039;रेसिप्रोकल टैरिफ&#039; को 20% से घटाकर 19% कर देगा। ये टैक्स अमेरिका ने व्यापार में असंतुलन और उन तरीकों को लेकर लगाए थे, जिन्हें वह गलत मानता है। पहले अमेरिका ने बांग्लादेश से आने वाले सामान पर 37% टैक्स लगाने की घोषणा की थी। बाद में इसे घटाकर 20% किया गया था। अब नए समझौते के बाद यह टैक्स 19% हो जाएगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात में कपड़ा और गारमेंट उद्योग की हिस्सेदारी करीब 80% है। यह उद्योग 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद प्रभावित हुआ था, जिसमें देश की सरकार गिर गई थी। इसके बाद से यह सेक्टर फिर से संभलने की कोशिश कर रहा है। नए समझौते के तहत अमेरिका एक ऐसी सिस्टम बनाएगा, जिससे बांग्लादेश के कुछ कपड़ा और गारमेंट उत्पादों पर जीरे टैरिफ लगेगा। हालांकि यह सुविधा उन्हीं उत्पादों को मिलेगी, जिनमें अमेरिका से भेजा गया कपास या अन्य कच्चा माल इस्तेमाल किया गया होगा। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में बांग्लादेश ने अमेरिका को 8.4 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि अमेरिका से बांग्लादेश का आयात 2.2 अरब डॉलर रहा। कनाडा में भारतीय मूल के टेक प्रोफेशनल की गोली मारकर हत्या, अब तक हमलावर की पहचान नहीं कर्नाटक से ताल्लुक रखने वाले 37 साल के भारतीय मूल के टेक प्रोफेशनल चंदन कुमार राजा नंदकुमार की कनाडा के टोरंटो में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला शनिवार को एक शॉपिंग मॉल के पार्किंग एरिया में हुआ। हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। चंदन ब्रैम्पटन में रहते थे, जो ग्रेटर टोरंटो एरिया में आता है। वह बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला के पास स्थित थ्यमगोंडलू गांव के रहने वाले थे। उनके पिता नंदकुमार ने कहा कि हमने पिछले शुक्रवार को उससे बात की थी। उसने कहा था कि इस गर्मी में छुट्टी लेकर घर आएगा। हम उसकी शादी की योजना बना रहे थे। हम पूरी तरह टूट गए हैं। अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। टोरंटो पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और इसे टार्गेटेड अटैक मान रही है। परिवार के कुछ लोगों को शक है कि टोरंटो में कन्नड़ संगठन बनाने की चंदन की कोशिश इस हमले की वजह हो सकती है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी तरह के मकसद की पुष्टि नहीं की है। बेंगलुरु के सप्थगिरी कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करने वाले चंदन करीब छह साल पहले कनाडा गए थे। वह LT की सहयोगी कंपनी LTI Mindtree में काम कर रहे थे। ]]></description>
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<title>रूस बोला&#45; भारत पर हमसे तेल नहीं खरीदने का दबाव:अमेरिका एनर्जी सप्लाई पर कंट्रोल चाहता है, ताकि दुनिया के देश उनसे महंगी गैस खरीदें</title>
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<description><![CDATA[ रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत जैसे देशों पर दबाव बना रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई उसके कंट्रोल में रहे और देश मजबूर होकर महंगी अमेरिकी गैस खरीदें। उन्होंने यह बातें 9 फरवरी को डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे के मौके पर कहीं। लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। रूस की विदेश में रखी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और रूस के खिलाफ लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प सरकार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात तो करती है, लेकिन जो प्रतिबंध पहले लगाए गए थे, वे अब भी जारी हैं। रूस के मुताबिक, यूक्रेन पर सहमति बनने के बाद भी अमेरिका नए प्रतिबंध लगाता रहा। भारत समेत BRICS देशों पर रूसी से दूरी बनाने का दबाव रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत और दूसरे BRICS देशों पर दबाव डाल रहा है कि वे रूस से दूरी बनाएं। रूस की तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर रोक लगाई गई है और रूस के व्यापार और निवेश को सीमित करने की कोशिश हो रही है। ये सब गलत और अनुचित तरीके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से बदल रही है। पहले अमेरिका पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और पैसों के सिस्टम पर हावी था और डॉलर के जरिए अपनी ताकत दिखाता था, लेकिन अब उसकी पकड़ कमजोर हो रही है। वहीं चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अफ्रीका के देश भी अब सिर्फ कच्चा माल बेचने के बजाय अपने यहां इंडस्ट्री लगाना चाहते हैं। भारत जो मुद्दे उठाता है वे आज की जरूरतें भारत की BRICS अध्यक्षता पर लावरोव ने कहा कि भारत जिन मुद्दों को आगे बढ़ा रहा है, वे आज की जरूरतों से जुड़े हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, खाने और ऊर्जा की सुरक्षा, तकनीक और AI जैसे विषय अहम हैं। उन्होंने बताया कि भारत फरवरी में AI पर एक बड़ी बैठक करने वाला है, जिसमें रूस भी शामिल होगा। रूस का कहना है कि AI को लेकर नियम ऐसे होने चाहिए, जिनमें हर देश की आजादी बनी रहे और कोई एक देश बाकी देशों पर हुक्म न चलाए। लावरोव बोले- पश्चिमी देश अपनी पकड़ नहीं छोड़ना चाहते लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश अपनी पुरानी पकड़ छोड़ना नहीं चाहते। ट्रम्प सरकार के आने के बाद यह और साफ हो गया है कि अमेरिका ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी दुनिया पर कंट्रोल चाहता है और अपने मुकाबले वालों को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि इन हालात का असर रूस के दूसरे देशों के साथ रिश्तों पर भी पड़ रहा है। रूस पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। खुले समुद्र में रूसी जहाजों को रोका जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। कुछ देशों को रूसी तेल और गैस खरीदने पर टैरिफ भी देना पड़ रहा है। लावरोव ने कहा कि रूस के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि देश सुरक्षित रहे और आगे बढ़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप में कुछ नेता खुले तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध की बात कर रहे हैं। रूस का कहना है कि उसकी सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि यूक्रेन की जमीन से उसे कोई खतरा न हो और क्रीमिया, डोनबास और नोवोरोसिया में रहने वाले रूसी और रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है। पश्चिमी देशों पर दूसरे देशों को उनका हक नहीं देने का आरोप BRICS को लेकर लावरोव ने कहा कि इंडोनेशिया के जुड़ने से यह समूह और मजबूत हुआ है। रूस IMF, वर्ल्ड बैंक और WTO को खत्म नहीं करना चाहता, लेकिन चाहता है कि तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं को इन संस्थानों में उनका सही हक मिले। पश्चिमी देश इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से रूस और BRICS देश मिलकर नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसमें अपनी-अपनी करेंसी में व्यापार करना, नए पेमेंट सिस्टम बनाना, निवेश के नए तरीके और अनाज के लिए अलग बाजार तैयार करना शामिल है। लावरोव ने साफ किया कि इसका मकसद किसी के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि खुद को एकतरफा दबाव से बचाना है। -------------- यह खबर भी पढ़ें… पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:05:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>एपस्टीन फाइल्स में जुकरबर्ग&#45;मस्क की तस्वीर:सिलिकॉन वैली में डिनर के दौरान ली गई; एपस्टीन ने अपने अपार्टमेंट में लगा रखी थी</title>
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<description><![CDATA[ एपस्टीन फाइल्स में टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक इलॉन मस्क और मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग की तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में सिलिकॉन वैली के बड़े टेक दिग्गज साथ में डिनर करते नजर आ रहे हैं। इसमें पेपाल के को-फाउंडर पीटर थील और MIT मीडिया लैब के पूर्व डायरेक्टर जोई इतो भी दिख रहे हैं। यह फोटो साल 2015 की बताई जा रही है।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वही डिनर पार्टी है, जिसे यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने &#039;वाइल्ड डिनर&#039; कहा था। एपस्टीन ने यह तस्वीर अगस्त 2015 में खुद को ईमेल की थी और इसे फ्रेम कराकर अपने न्यूयॉर्क स्थित अपार्टमेंट में लगा रखा था। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी को एपस्टीन फाइल्स के 30 लाख दस्तावेज सार्वजनिक किए थे, जिसके बाद से इस मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। एपस्टीन ने डिनर को &#039;वाइल्ड&#039; बताया था जस्टिस डिपार्टमेंट की फाइलों के मुताबिक, 2 अगस्त 2015 को एपस्टीन ने अपने दोस्त पीटर एटिया को ईमेल भेजकर लिखा था कि उस रात एलन मस्क, पीटर थील और मार्क जुकरबर्ग के साथ डिनर है। जवाब में एटिया ने लिखा था कि यह शानदार डिनर लग रहा है। इसके कुछ दिनों बाद, 20 अगस्त 2015 को एपस्टीन ने अरबपति टॉम प्रिट्जकर को एक और ईमेल भेजा, जिसमें उसने इस डिनर को &#039;वाइल्ड&#039; बताया। इलॉन मस्क का नाम पहले भी एपस्टीन फाइल्स में आ चुका है। 2012 के एक ईमेल में मस्क ने एपस्टीन से पूछा था कि उसके आइलैंड पर सबसे &#039;वाइल्ड पार्टी&#039; किस दिन होगी। यह मेल उस सवाल के जवाब में था, जिसमें एपस्टीन ने आइलैंड पर जाने वालों की संख्या पूछी थी। ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक एपस्टीन फाइल्स के नए खुलासे सामने आने के बाद अब एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि दुनिया के सबसे ताकतवर और अमीर लोगों के एपस्टीन से रिश्ते कितने गहरे थे। एपस्टीन फाइल्स- ब्रिटिश पीएम की कुर्सी जाने का खतरा वहीं एपस्टीन फाइल की वजह से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार मुश्किल में फंस गई है। एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा। मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने कहा कि यह नियुक्ति गलत थी। मैकस्वीनी ने माना कि उन्हें पता था कि मंडेलसन ने जेफ्री एपस्टीन का जेल जाने के बाद भी समर्थन किया था। मंडेलसन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी रहते हुए एपस्टीन को मार्केट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शेयर की थी। मैकस्वीनी ने कहा कि इस फैसले से पार्टी, देश और राजनीति पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। वहीं विपक्ष का कहना है पीएम स्टार्मर को मामले की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देना चाहिए। मैकस्वीनी को ब्रिटिश पीएम का दिमाग कहा जाता है मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे मजबूत सहारा माना जाता था। उन्हें प्रधानमंत्री का &#039;दिमाग&#039; कहा जाता है और सत्ता तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उनके जाने के बाद लेबर पार्टी के सांसद पूछ रहे हैं कि अब स्टार्मर कितने दिन टिक पाएंगे। पार्टी के वामपंथी धड़े ने सीधे प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। लेबर पार्टी के पूर्व कैंपेन प्रमुख जॉन ट्रिकेट ने कहा कि जिम्मेदारी ऊपर तक जाती है। सांसद ब्रायन लीशमैन ने कहा कि पार्टी की दिशा बदलनी है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री से होनी चाहिए। सांसद किम जॉनसन ने माना कि स्टार्मर के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया है, जबकि रैचेल मास्केल ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। PM स्टार्मर देश को संबोधित कर सकते हैं इस पूरे विवाद के बीच पीएम स्टार्मर देश को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं। वे राजनीति को साफ करने की बात रखेंगे और यह संकेत देंगे कि वह इस्तीफा नहीं देने जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रधानमंत्री आज लेबर सांसदों की बैठक में भी बात रखेंगे। इधर, पार्टी के अंदर लीडरशिप की रेस तेज हो गई है। उपप्रधानमंत्री एंजेला रेनर और स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग के नाम चर्चा में हैं। विदेश मंत्री डेविड लैमी ने साफ किया है कि उन्होंने मंडेलसन की नियुक्ति का विरोध किया था। ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड को संभावित किंगमेकर बताया जा रहा है। स्टार्मर के समर्थक चेतावनी दे रहे हैं कि बड़ी चुनावी जीत के सिर्फ 18 महीने बाद प्रधानमंत्री को हटाने से देश और पार्टी दोनों में भारी अस्थिरता आ सकती है। वर्क एंड पेंशन सेक्रेटरी पैट मैकफैडन ने कहा कि इससे आर्थिक और राजनीतिक अराजकता फैल सकती है। स्टार्मर ने मंडेलसन को झूठा बताया था इससे पहले स्टार्मर ने 5 फरवरी को मंडेलसन को झूठा बताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें मंडेलसन ने झूठ बोला था और उन्होंने उस झूठ पर भरोसा करके उन्हें राजदूत बनाया। मुझे इस फैसले पर गहरा अफसोस है। स्टार्मर ने अपने भाषण में कहा कि अब उन्हें समझ आया है कि मंडेलसन और एपस्टीन के रिश्ते कितने गहरे और अंधेरे थे। उन्होंने लेबर सांसदों और एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें इस नियुक्ति पर अफसोस है। स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह सुरक्षा जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस जांच के चलते ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदा कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह पीड़ितों को न्याय मिलने के रास्ते में कोई कदम नहीं उठाएंगे। इस पूरे विवाद के बाद ब्रिटेन की उधारी लागत भी बढ़ गई है, क्योंकि निवेशकों को डर है कि स्टार्मर सरकार टिक पाएगी या नहीं। स्टार्मर पर गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने आरोप विपक्षी कंजर्वेटिव नेता केमी बेडेनोक ने कहा कि असली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। उनका आरोप है कि स्टार्मर हर बार गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ देते हैं। PM स्टार्मर के कार्यकाल में दूसरे चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा है। इससे पहले 2024 के चुनाव के बाद सू ग्रे को हटाया गया था। मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद जिल काथबर्टसन और विध्या अलकेसन को कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है। वहीं, मैकस्वीनी के करीबी मानते हैं कि उन्हें हटाना बड़ी गलती थी। एक नेता ने कहा, यह अपनी ही टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ी को बाहर करने जैसा है। कुछ सांसदों को डर है कि उनके जाने से पार्टी और ज्यादा वामपंथी रास्ते पर चली जाएगी। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… एपस्टीन फाइल्स-10 देशों में इस्तीफे, 80 ताकतवर लोगों की जांच:अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं-अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:28:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ईरान में नोबेल विजेता को 7 साल की जेल, देश के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को सात साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई है। उनके वकील के मुताबिक उन्हें &#039;राज्य के खिलाफ साजिश&#039; और &#039;प्रोपेगेंडा&#039; के मामलों में दोषी ठहराया गया। सजा के साथ दो साल का आंतरिक निर्वासन और यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया है। मोहम्मदी फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं। वे 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों की मुखर समर्थक रही हैं। इससे पहले वे 13 साल सजा काट रही थीं और स्वास्थ्य कारणों से अस्थायी रिहाई पर थीं। मानवाधिकार संगठनों ने सजा की निंदा की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान अमेरिका से परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा है। नरगिस मोहम्मदी को साल 2023 में नोबेल पीस प्राइज के लिए चुना गया था। यह पुरस्कार पाने वाली वो ईरान की दूसरी महिला हैं। उनको ईरान में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार और राजनीतिक कैदियों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने ईरान में मृत्यु दंड के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। नोबेल समिति के प्रमुख ने उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा था। जब उन्हें यह प्राइज मिला तब वो तेहरान की एविन जेल के अंदर थी। उनके बच्चों ने यह प्राइज लिया था जो कि पेरिस में रहते है। नरगिस ने अपनी किताब &#039;व्हाइट टॉर्चर: इंटरव्यूज़ विद ईरानी वुमन प्रिज़नर्स&#039; में अपने और 12 कैदियों के जेल के अनुभव को लिखा हैं। नरगिस मोहम्मदी पिछले 30 सालों से ईरान में मानव अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। वो अभी तक 13 बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। पहली बार उन्हें 2011 में हिरासत में लिया था। इसके बाद 2015 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ दुष्प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जंजन की सेंट्रल जेल में रखा गया था। इसके बाद 2020 में नरगिस को सजा कम होने पर रिहा कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ीं खबरें… बांग्लादेश में ढाका सीट से उम्मीदवार का चुनाव लड़ने से इनकार, कहा-इलाका बड़ा है, खर्च ज्यादा हो रहा बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले &#039;नागरिक ओइक्या&#039; पार्टी के नेता महमूदुर रहमान मन्ना ने ढाका-18 सीट से चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह इस सीट से अपना नाम वापस ले रहे हैं। मन्ना ने यह बात सोमवार को द डेली स्टार से बातचीत में कही। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर भी इसकी जानकारी दी। मन्ना ने लिखा कि खास हालात में उन्होंने ढाका-18 और बोगुरा-2, दोनों सीटों से चुनाव लड़ने का सोचा था। उन्होंने बताया कि ढाका-18 सीट बहुत बड़ी है। यहां करीब साढ़े सात थानों का इलाका आता है और लगभग 6 लाख 50 हजार वोटर हैं। मन्ना के मुताबिक, इस सीट पर चुनाव लड़ने में बहुत ज्यादा खर्च आता है, जिसे वह संभाल नहीं पा रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने ढाका-18 सीट से चुनाव की दौड़ से हटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अगर किसी को बुरा लगा हो, तो उन्हें इसका अफसोस है। पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। एपस्टीन 2018 में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए पुतिन तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था। उसने इसके लिए नॉर्वे के पूर्व पीएम थॉर्बजॉर्न यागलैंड से संपर्क किया था। जून 2018 के एक ईमेल में एपस्टीन ने नॉर्वे के पूर्व पीएम थोर्ब्योर्न यागलैंड से कहा था कि वह पुतिन को यह सुझाव दें कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उससे बातचीत करें। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन खुद को एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और निवेश जैसे मुद्दों पर रूस की मदद कर सकता है। पढ़ें पूरी खबर… जापान चुनाव में PM तकाइची की बड़ी जीत:उनकी पार्टी LDP ने 465 में से 316 सीटें जीतीं; PM पीएम मोदी ने बधाई दी जापान में रविवार को हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BBC के मुताबिक, LDP के गठबंधन को 465 में से 352 सीटें मिली हैं। LDP अकेले 316 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 233 सीटों से काफी ज्यादा हैं। यह पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है। इससे पहले 1986 में पार्टी ने 300 सीटें जीती थीं। चुनाव जीतने के बाद ताकाइची ने कहा कि वह जापान को मजबूत और समृद्ध बनाने पर काम करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो विपक्ष के साथ मिलकर काम करेंगी। इस जीत के बाद ऊपरी सदन में विपक्ष के नियंत्रण के बावजूद PM ताकाइची को कानून पास करने की ताकत मिल गई है। तकाइची की जीत पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- मुझे विश्वास है आपके कुशल नेतृत्व में हम भारत-जापान मित्रता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर… एपस्टीन फाइल्स- 10 देशों में इस्तीफे, 80 की जांच:अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं, राजदूतों, अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। इन फाइलों में नेता, राजदूत, अरबपति और शाही परिवारों के नाम शामिल हैं। ईमेल, फ्लाइट लॉग और संपर्क रिकॉर्ड में 700 से 1000 असरदार लोगों का जिक्र है। कई मामलों में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी हैं। दस्तावेजों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन जैसे हाई-प्रोफाइल नाम अलग-अलग संदर्भों में सामने आए हैं। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:28:02 +0530</pubDate>
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<title>पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। एपस्टीन 2018 में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए पुतिन तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था। उसने इसके लिए नॉर्वे के पूर्व पीएम थॉर्बजॉर्न यागलैंड से संपर्क किया था। जून 2018 के एक ईमेल में एपस्टीन ने नॉर्वे के पूर्व पीएम थोर्ब्योर्न यागलैंड से कहा था कि वह पुतिन को यह सुझाव दें कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उससे बातचीत करें। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन खुद को एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और निवेश जैसे मुद्दों पर रूस की मदद कर सकता है। रूसी राजदूत से मिलता था अपराधी एपस्टीन CNN की रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एपस्टीन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में रूस के तत्कालीन राजदूत विटाली चुरकिन के साथ नियमित संपर्क में था। विटाली चुरकिन 2006 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि रहे। इसी दौरान एपस्टीन की उनसे न्यूयॉर्क में मुलाकातें और बातचीत होती थीं। एपस्टीन ने चुरकिन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म में नौकरी दिलाने में मदद की पेशकश भी की थी। यह बात एपस्टीन के ईमेल्स में सामने आई है। एपस्टीन ने चुरकिन को लेकर यह भी दावा किया कि वह उसकी बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बेहतर तरीके से समझने लगे थे। हालांकि दस्तावेजों में इस दावे का कोई सबूत नहीं मिला है। फरवरी 2017 में विटाली चुरकिन की न्यूयॉर्क में अचानक मौत हो गई थी। इसके बाद एपस्टीन ने 2018 के एक ईमेल में लिखा कि अब वह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए फिर से संपर्क बनाना चाहता है। 2013 से ही पुतिन से मुलाकात की कोशिश कर रहा था दस्तावेज बताते हैं कि मई 2013 में एपस्टीन ने इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक को ईमेल कर कहा था कि यागलैंड पुतिन से मिलने वाले हैं और उन्होंने पूछा है कि क्या एपस्टीन भी पुतिन से मिल सकता है। एपस्टीन ने दावा किया था कि वह रूस को पश्चिमी देशों से निवेश लेने के तरीकों पर सलाह दे सकता है। एक अन्य ईमेल में उसने कहा कि अगर पुतिन मिलना चाहते हैं तो उन्हें दो से तीन घंटे का समय देना होगा। मई 2013 के ही एक ईमेल में एपस्टीन ने बिना सबूत के यह दावा किया कि उसने सेंट पीटर्सबर्ग में एक आर्थिक सम्मेलन के दौरान पुतिन से मिलने का अनुरोध ठुकरा दिया था। हालांकि दस्तावेजों में यह साफ नहीं है कि पुतिन ने वास्तव में ऐसी कोई मुलाकात चाही थी या नहीं। पोलैंड में एपस्टीन और रूस के कनेक्शन जांच शुरू पोलैंड में जेफ्री एपस्टीन के रूस से कथित संबंधों को लेकर जांच शुरू की गई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि एपस्टीन और रूसी खुफिया एजेंसियों के संभावित रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कैबिनेट बैठक में टस्क ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आ रही जानकारियां इस ओर इशारा करती हैं कि यह यौन शोषण कांड किसी संगठित खुफिया ऑपरेशन का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने इसे पोलैंड की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। रूस ने एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि एपस्टीन को लेकर चल रही जासूसी थ्योरी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर &#039;#MeToo&#039; लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ---------------------- यह खबर भी पढ़ें… एपस्टीन फाइल्स- 10 देशों में इस्तीफे, 80 की जांच:अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं, राजदूतों, अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:28:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जापान चुनाव, PM ताकाइची बोलीं&#45; हारी तो इस्तीफा दे दूंगी:465 में से 300 सीटें मिलने की उम्मीद; ट्रम्प ने भी समर्थन दिया</title>
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<description><![CDATA[ जापान में रविवार को लोअर हाउस के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसमें प्रधानमंत्री साने ताकाइची को बड़ी जीत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बर्फबारी के कारण मतदान प्रतिशत घटने की आशंका जताई जा रही है। यहां रविवार को 27 से 28 इंच तक बर्फबारी होने का अनुमान है। ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने अक्टूबर में पद संभाला था। ओपिनियन पोल के अनुसार, उनकी कंजर्वेटिव गठबंधन (लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और जापान इनोवेशन पार्टी) को संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की 465 सीटों में से 300 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। फिलहाल गठबंधन के पास 233 सीटें हैं, और अगर यह 310 सीटें जीत लेता है तो ऊपरी सदन में विपक्ष के नियंत्रण के बावजूद कानून पास करने की ताकत मिल जाएगी। ताकाइची ने कहा है कि अगर गठबंधन बहुमत खो देता है तो वह इस्तीफा दे देंगी। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी ताकाइची को समर्थन जता चुके हैं। ताकाइची ने चीन के खिलाफ रुख मजबूत किया ताकाइची ने चीन के खिलाफ मजबूत रुख अपनाते हुए सैन्य खर्च बढ़ाया है, आर्थिक पैकेज और टैक्स कटौती की घोषणा की है। उन्होंने खाद्य पदार्थों पर 8% सेल्स टैक्स को दो साल के लिए निलंबित करने का वादा किया है ताकि बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत मिले। रणनीतिक सलाहकार कंपनी एफजीएस ग्लोबल के मैनेजिंग डायरेक्टर सेइजी इनाडा के मुताबिक, ‘अगर ताकाइची बड़ी जीत दर्ज करती हैं, तो उन्हें टैक्स में कटौती जैसे अहम फैसलों को लागू करने की आजादी मिलेगी।’ ट्रम्प बोले थे- तकाइची शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 फरवरी को एक पोस्ट में साने ताकाइची को पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने तकाइची को मजबूत, शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता कहा, जो अपने देश से सच्चा प्यार करती हैं और जापान के लोगों को निराश नहीं करेंगी। ट्रम्प ने बताया कि वह 19 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस में ताकाइची से मुलाकात करेंगे। यह समर्थन जापान के 8 फरवरी 2026 के चुनाव से ठीक दो दिन पहले आया है। यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने जापान के किसी नेता को चुनाव में खुलकर समर्थन दिया है। सोशल मीडिया पर साने ताकाइची का क्रेज बढ़ा सोशल मीडिया पर साने ताकाइची को लेकर ‘सानाकात्सु’ नाम का ट्रेंड भी चर्चा में है। इसमें उनके इस्तेमाल किए गए सामान, जैसे हैंडबैग और संसद में इस्तेमाल किया जाने वाला गुलाबी पेन, युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए हैं। एक हालिया सर्वे में 30 साल से कम उम्र के 90% से ज्यादा मतदाताओं ने ताकाइची के पक्ष में रुझान दिखाया, हालांकि यह वर्ग आमतौर पर कम मतदान करता है। जापान में बर्फबारी से मतदान घटने का अनुमान उधर, रविवार को उत्तरी और पूर्वी जापान में 70 सेंटीमीटर तक बर्फबारी का अनुमान है। निआगाता प्रांत के नागाओका जैसे इलाकों में सड़कों के किनारे एक मीटर से ज्यादा बर्फ जमी हुई है। ऐसे में कई मतदाताओं के लिए घर से निकलना मुश्किल हो सकता है। जापानी कम्युनिस्ट पार्टी के स्वयंसेवक ताकेहिको इगाराशी के मुताबिक, उनकी पार्टी समर्थकों को फोन कर रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था भी कर रही है। पिछले कुछ चुनावों में लोअर हाउस का टर्नआउट करीब 55% के आसपास रहा है। अगर इस बार मतदान और घटता है, तो संगठित वोटिंग ब्लॉक्स का असर और बढ़ सकता है। वोटिंग 289 सिंगल-सीट सीटों पर सीधे मुकाबले से होगी, जबकि बाकी सीटें प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन से तय होंगी। पोलिंग रात 8 बजे बंद होगी, जिसके बाद एग्जिट पोल के आधार पर शुरुआती अनुमान जारी किए जाएंगे। ताकाइची ने संसद भंग कर चुनाव की घोषणा की थी यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि यह न केवल जापान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा असर डालेगा। 2024 के चुनाव में LDP को भारी नुकसान हुआ था और पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की सरकार अल्पमत में आ गई थी। उसके बाद 2025 में LDP की प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में ताकाइची ने जीत हासिल की और जापान इनोवेशन पार्टी के साथ गठबंधन बनाकर सरकार बनाया। जनवरी 2026 में जब संसद सत्र शुरू होने वाला था, ताकाइची ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को भंग कर दिया और 8 फरवरी को चुनाव की घोषणा की। यह फैसला उस समय लिया गया जब उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 प्रतिशत से ऊपर थी। ताकाइची का दावा है कि यह चुनाव उनके कंजर्वेटिव एजेंडे के लिए जनादेश प्राप्त करने का माध्यम है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना, इमिग्रेशन रिफॉर्म्स और चीन पर निर्भरता कम करना शामिल हैं। विपक्ष ने महंगाई को मुद्दा बनाया, ताकाइची का फोकस सुरक्षा पर उम्मीदवारों की बात करें तो LDP ने 285 सिंगल-सीट डिस्ट्रिक्ट्स और 52 प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उनके गठबंधन साथी इशिन नो काई ने 33 सीटों पर दांव लगाया है। ताकाइची खुद टोक्यो से चुनाव लड़ रही हैं और उनकी लोकप्रियता का फायदा पूरी पार्टी को मिलने की उम्मीद है। विपक्ष में सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस (CRA) प्रमुख है, जिसमें कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (CDP) और कोमेइतो (जो पहले LDP का साथी था) शामिल हैं। CRA ने 159 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। विपक्षी नेता यूरिको कोइके (कोमेइतो) और CDP के प्रमुखों ने अर्थव्यवस्था, महंगाई और सोशल वेलफेयर पर फोकस किया है, जबकि ताकाइची ने राष्ट्रीय सुरक्षा और इमिग्रेशन को मुख्य मुद्दा बनाया है। PM शिगेरू इशिबा ने इस्तीफा क्यों दिया शिगेरू इशिबा सितंबर 2024 में पीएम बने थे। वे पार्टी में &#039;आउटसाइडर&#039; थे, यानी उनका कोई गॉडफादर नहीं था। उन्होंने वादा किया था कि महंगाई और आर्थिक समस्याओं को ठीक करेंगे, लेकिन उनका समय मुश्किल भरा रहा। 1. चुनावी हार का झटका: अक्टूबर 2024 के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) चुनाव में LDP-कोमेइतो गठबंधन बहुमत हार गया। फिर जुलाई 2025 के ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) चुनाव में भी बुरी हार हुई। पार्टी को 1955 के बाद पहली बार दोनों सदनों में बहुमत गंवाना पड़ा। 2. पार्टी का दबाव: हार के बाद पार्टी के अंदरूनी लोग इशिबा पर इस्तीफे का दबाव डालने लगे। इनका आरोप है कि इशिबा &#039;बहुत उदार&#039; हैं, जबकि पार्टी को कंजर्वेटिव लीडर चाहिए। इशिबा ने 7 सितंबर 2025 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा- मैं पार्टी में फूट नहीं चाहता। अब नई पीढ़ी को मौका दूंगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:31:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दलाई लामा ऑफिस ने एपस्टीन फाइल्स से संबंध नकारा:सोशल मीडिया पर आई खबरों पर दी सफाई, कहा&#45; कभी नहीं मिले</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के चर्चित &#039;एपस्टीन फाइल्स&#039; सेक्स स्कैंडल से अब बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का नाम भी जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दलाई लामा को अमेरिकी अपराधी जेफ्री एपस्टीन से संबंधित बताया जा रहा था। इन दावों पर दलाई लामा के कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया है। दलाई लामा के कार्यालय ने इन खबरों को पूरी तरह से असत्य बताया है। जारी प्रेस स्टेटमेंट में कहा गया, &quot;हम पूरी स्पष्टता के साथ पुष्टि करते हैं कि परम पावन दलाई लामा ने कभी भी जेफ्री एपस्टीन से मुलाकात नहीं की है। न ही उन्होंने अपनी ओर से किसी को एपस्टीन से मिलने या बातचीत करने के लिए अधिकृत किया था।&quot; अमेरिकी राष्ट्रपतियों सहित कई बड़ी हस्तियों के नाम हाल ही में न्यूयॉर्क की एक अदालत ने एपस्टीन से जुड़े सैकड़ों पन्नों के अदालती दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में उन लोगों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें एपस्टीन के निजी द्वीप, उसके प्लेन (&#039;लोलिता एक्सप्रेस&#039;) या उसके घर पर देखा गया था। इन फाइलों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप, प्रिंस एंड्रयू और स्टीफन हॉकिंग जैसे कई प्रमुख व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि किसी का नाम फाइलों में होने का मतलब यह नहीं है कि वह किसी अपराध में शामिल था। तश्वीरों को छेड़छाड़ कर आया था नाम दलाई लामा का नाम सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ &#039;मॉर्फ्ड&#039; (छेड़छाड़ की गई) तस्वीरों और फर्जी सूचियों के माध्यम से सामने आया है। दलाई लामा कार्यालय ने इसे उनकी छवि खराब करने की एक सुनियोजित साजिश बताया है। दलाई लामा की टीम ने साफ कर दिया है कि धर्मगुरु का इस विवादित मामले से कोई संबंध नहीं है और ये खबरें पूरी तरह से फर्जी हैं।

​कौन था जेफ्री एपस्टीन? एपस्टीन अमेरिका का एक रसूखदार और अरबपति फाइनेंसियर था, जिस पर कम उम्र की लड़कियों की तस्करी (Sex Trafficking) और शोषण का आरोप था। 2019 में जेल में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:31:37 +0530</pubDate>
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<title>मोदी बोले&#45; आतंकवाद पर कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं:तमिल भाषा भारत&#45;मलेशिया को जोड़ती है; दोस्त से किया वादा निभाने मलेशिया आया</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे का आज दूसरा दिन है। पीएम मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच आज द्विपक्षीय बातचीत हुई। पीएम मोदी ने आतंकवाद पर अपना रुख कड़ा किया।  उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद के बारे में हमारा संदेश बहुत स्पष्ट है, कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं। भारत और मलेशिया आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करेंगे।’ पीएम मोदी ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान तमिल भाषा की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि तमिल भाषा के प्रति साझा प्रेम भारत और मलेशिया को जोड़ता है।  मोदी ने ऑडियो-विजुअल समझौते का जिक्र करते हुए कहा, &#039;मुझे पूरा विश्वास है कि आज हुए ऑडियो-विजुअल समझौते के साथ फिल्में और संगीत, खासकर तमिल फिल्में, हमारे दिलों को और करीब लाएंगी।’ पीएम मोदी ने मलेशियाई पीएम को अपना दोस्त बताया। उन्होंने कहा- आज 10वें CEO फोरम में हिस्सा लेंगे पीएम मोदी पीएम मोदी को आज पेरदाना पुत्रा भवन में औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। स्वागत के बाद पीएम मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मौजूदगी में भारत और मलेशिया के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। पीएम मोदी आज भारत-मलेशिया के 10वें CEO फोरम में भी हिस्सा लेंगे। इस फोरम में दोनों देशों के बड़े उद्योगपति और कारोबारी शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को आठ साल बाद मलेशिया पहुंचे हैं। इससे पहले वे साल 2018 में मलेशिया गए थे। PM मोदी के स्वागत की 5 तस्वीरें… पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें पीएम मोदी के मलेशिया दौरे से जुड़े पल-पल के अपडेट्स जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:31:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>एपस्टीन फाइल्स&#45; अनिल अंबानी की चैट सामने आई:दावा&#45; सुनहरे बालों वाली स्वीडिश महिला की पेशकश हुई, अनिल बोले&#45; अरेंज करो</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने जो दस्तावेज जारी किए हैं, उसमें अनिल अंबानी से जुड़े नए खुलासे सामने आए हैं। ये दस्तावेज एपस्टीन और उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुई बातचीत से जुड़े हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कारोबार, वैश्विक मामलों और महिलाओं को लेकर चर्चा हुई। 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा- क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे अरेंज करो।’ बातचीत तब की है। दावा- एपस्टीन के घर गए थे अंबानी यह बातचीत उस समय की है, जब एप्सटीन को पहले ही 2008 में नाबालिगों से जुड़े यौन आपराध के मामले में सजा मिल चुकी थी। इसके बावजूद एप्सटीन दुनिया के कई प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के संपर्क में बना हुआ था। रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों के बीच पेरिस और न्यूयॉर्क में मिलने की योजना बनीं। मई 2019 में अनिल अंबानी के न्यूयॉर्क दौरे के वक्त एपस्टीन ने उन्हें मैनहैटन स्थित अपने घर बुलाया, जहां दोनों मिले। दूसरे ईमेल्स से यह भी पता चलता है कि अंबानी और एपस्टीन के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, बिजनेस मीटिंग्स और वैश्विक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर बातचीत हुई थी। इनमें पेरिस, न्यूयॉर्क और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के कार्यक्रमों में संभावित मुलाकातों का जिक्र है। एप्सटीन को 2019 में संघीय स्तर पर सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मुकदमा शुरू होने से पहले ही उसकी हिरासत में मौत हो गई। इसके बाद दुनियाभर में विवाद खड़ा हुआ और उसके नेटवर्क को लेकर कई तरह की जांच शुरू हुईं। एपस्टीन ने अंबानी से पूछा- आपकी फेवरेट हीरोइन कौन? चैट्स में डोनाल्ड ट्रम्प और हॉलीवुड से जुड़े संदर्भ भी हैं। एक बातचीत में एपस्टीन ने पसंदीदा महिला पर सवाल किया, जिस पर अंबानी ने हॉलीवुड अभिनेत्री स्कारलेट जोहानसन का जिक्र किया। तब रिलायंस एंटरटेनमेंट उनकी फिल्म ‘घोस्ट इन द शेल’ की सह-निर्माता थी। इसी अवधि में एपस्टीन ने अंबानी परिवार से जुड़ी किताबें मंगवाई थीं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अनिल अंबानी के प्रतिनिधि ने इस मामले पर किसी टिप्पणी से इनकार किया। अनिल अंबानी अनिल अंबानी रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन हैं। साल 2008 में उनकी संपत्ति करीब 42 अरब डॉलर आंकी गई थी। उस समय फोर्ब्स की अमीरों की सूची में उनका छठा स्थान था। अंबानी के अलावा भी कई भारतीय और भारतीय मूल के सेलिब्रिटी एपस्टीन के संपर्क में थे। इनमें फिल्मकार मीरा नायर, डायरेक्टर अनुराग कश्यप, अभिनेत्री नंदिता दास, वेलनेस गुरु दीपक चोपड़ा का नाम शामिल है। हालांकि, फाइल में नाम होना किसी अपराध का सबूत नहीं है। ये सिर्फ सामाजिक या पेशेवर संपर्क दिखाते हैं। मीरा नायर की फिल्म की खुशी में मैक्सवेल ने पार्टी रखी थी मीरा नायर से जुड़ा मेल अमेरिकी पब्लिसिटी मैनेजर पेगी सीगल ने एपस्टीन को 21 अक्टूबर 2009 को भेजा था। इसमें सीगल ने लिखा है कि वह गिस्लीन मैक्सवेल (एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और अपराधी) के मैनहट्टन टाउनहाउस से एक आफ्टर-पार्टी से लौटी हैं। मीरा नायर न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी की मां हैं। मैक्सवेल के घर पर हुई यह पार्टी मीरा नायर की 2009 में रिलीज हुई फिल्म &#039;एमेलिया&#039; से जुड़ी थी। फिल्म में हिलेरी स्वैंक ने एविएटर एमेलिया ईयरहार्ट का किरदार निभाया था और रिचर्ड गियर उनके पति जॉर्ज पुटनम के रूप में थे। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर &#039;#MeToo&#039; लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 12:23:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>भारत पर अमेरिकी एक्स्ट्रा टैरिफ आज से खत्म:अमेरिका 30 लाख करोड़ डॉलर का बाजार खोलेगा, भारत 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा</title>
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<description><![CDATA[ भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है। दोनों देशों ने कहा कि इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू किया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई भारत-अमेरिका BTA वार्ता को आगे बढ़ाएगा। इस समझौते में आगे चलकर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन को मजबूत करने और ट्रेड बैरियर कम करने जैसे प्रावधान शामिल होंगे। इसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर सभी टैरिफ खत्म या कम करेगा। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपये) के बाजार को खोलेगा। उनके मुताबिक, MSME, किसान और मछुआरे सबसे बड़े लाभार्थी होंगे और इससे महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देश पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को। भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था। भारत ने वादा किया है कि इन लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करेगा, ताकि अमेरिकी मेडिकल डिवाइस आसानी से भारत में बिक सकें। इससे भारतीय अस्पतालों और मरीजों को बेहतर और सस्ती अमेरिकी तकनीक मिल सकती है। अमेरिकी ICT उत्पाद के आयात के लिए भारत में लाइसेंस की प्रक्रिया बहुत जटिल और समय लेने वाली थी। भारत ने सहमति जताई है कि इन लाइसेंस प्रक्रियाओं को आसान और तेज करेगा। इससे अमेरिकी आईटी और टेक कंपनियों के लिए भारत में बाजार पहुंच आसान हो जाएगी और भारत में भी सस्ते और अच्छे उपकरण उपलब्ध होंगे। अमेरिकी स्टैंडर्ड्स और टेस्टिंग को मान्यता देने पर काम करेगा भारत भारत यह भी तय करेगा कि समझौते लागू होने के 6 महीने के अंदर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में अमेरिकी स्टैंडर्ड्स (जो अमेरिका में इस्तेमाल होते हैं) और टेस्टिंग आवश्यकताओं को स्वीकार किया जा सकता है या नहीं। जब कोई अमेरिकी कंपनी भारत में अपना सामान बेचना चाहती है, तो भारत में अलग-अलग स्टैंडर्ड्स (मानक) और टेस्टिंग (जांच) की जरूरत पड़ती है। अमेरिका में पहले से ही अपने उत्पादों पर अमेरिकी स्टैंडर्ड्स के अनुसार टेस्टिंग हो चुकी होती है, लेकिन भारत में अक्सर दूसरी बार टेस्टिंग करनी पड़ती है। यानी वही सामान भारत में फिर से जांचा जाता है। इससे समय लगता है, खर्च बढ़ता है, सामान महंगा हो जाता है, और व्यापार धीमा हो जाता है। भारत ने वादा किया है कि समझौता लागू होने के 6 महीने के अंदर कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में जांच करेगा। इसमें देखा जाएगा कि क्या अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को सीधे स्वीकार किया जा सकता है। अगर अमेरिका में सामान पहले ही उन स्टैंडर्ड्स के अनुसार टेस्ट हो चुका है, तो भारत में दोबारा टेस्टिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। संयुक्त बयान में लिखा है कि इसका नतीजा सकारात्मक रखने की कोशिश की जाएगी। यानी जितना संभव हो अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को मान्यता देने की दिशा में काम होगा। भारत-अमेरिका भविष्य में टैरिफ में बदलाव कर सकेंगे दोनों देशों ने यह भी कहा है कि वे कुछ चुने हुए क्षेत्रों में अपने-अपने नियमों पर चर्चा करेंगे, ताकि इनका पालन करना आसान हो सके। अगर भविष्य में कोई देश तय टैरिफ में कोई बदलाव करता है, तो दूसरा देश भी अपने वादों में संशोधन कर सकता है। अमेरिका और भारत ने पूर्ण व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत के जरिए बाजार पहुंच को और बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिका ने भारत की मांग को ध्यान में रखते हुए कहा है कि वह BTA की बातचीत के दौरान भारतीय सामानों पर अपने टैरिफ कम करने की दिशा में काम करेगा। 500 अरब डॉलर मूल्य का सामान खरीदेगा भारत भारत ने घोषणा की है कि वह अगले 5 सालों में अमेरिका से कुल 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदेगा। इनमें शामिल हैं: भारत को इस समझौते से मिलने वाले लाभ कॉमर्स मिनिस्टर बोले- डील से कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते में भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा है। इन उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि, संयुक्त बयान के अनुसार भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म या कम करने पर सहमति जताई है। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए रेड सोरघम, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। डिजिटल ट्रेड और सप्लाई चेन पर सहयोग बढ़ेगा दोनों देश डिजिटल ट्रेड में भेदभावपूर्ण नियमों और बोझिल प्रक्रियाओं को खत्म करने की दिशा में काम करेंगे। इसका मतलब है कि डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स, डेटा फ्लो, क्लाउड सर्विसेज और ऑनलाइन ट्रेड में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाएगा। यह भारत के लिए फायदेमंद है। इससे भारतीय आईटी कंपनियां, स्टार्टअप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अमेरिकी बाजार में आसानी से काम करने का मौका मिलेगा। साथ ही अमेरिकी टेक्नोलॉजी जैसे GPUs, डेटा सेंटर उपकरण का आयात बढ़ेगा, जो भारत के AI और डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। दोनों पक्ष टेक्नोलॉजी उत्पादों में व्यापार बढ़ाने और संयुक्त टेक्नोलॉजी सहयोग पर भी सहमत हुए हैं। पीएम मोदी बोले- यह समझौता मेक इन इंडिया को मजबूत करेगा फ्रेमवर्क जारी होने के बाद पीएम मोदी ने इसे भारत और अमेरिका दोनों के लिए खुशखबरी बताया। उन्होंने कहा, ‘हम दोनों महान देश एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमत हो गए हैं।’ उन्होंने ट्रम्प को दोनों देशों के संबंध को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया। मोदी ने कहा- 
----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… दावा- डोभाल की बैकडोर बातचीत के बाद अमेरिकी ट्रेड डील: विदेश मंत्री से कहा था- भारत झुकेगा नहीं, ट्रम्प के हटने का इंतजार करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल सितंबर की शुरुआत में चीन गए थे, जहां उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दोस्ताना मुलाकात की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद भारत ने अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों को संभालने की कोशिशें तेज कर दीं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 12:23:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PM मोदी दो दिन के दौरे पर मलेशिया रवाना:8 साल बाद जा रहे, फरार जाकिर नाइक का मुद्दा उठाएंगे, कल CEO फोरम में शामिल होंगे</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह दो दिन के दौरे पर मलेशिया रवाना हुए हैं। यह दौरा मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के न्योते पर हो रहा है। मोदी करीब 8 साल के बाद मलेशिया जा रहे है, इससे पहले 2018 में गए थे। अपनी यात्रा के दौरान, आज मोदी मलेशिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के सचिव पी. कुमरन ने बताया कि यह दौरा भारत के आसियान देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने और मलेशिया के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए अहम है। उन्होंने ये भी बताया इस यात्रा में 10 साल से मलेशिया में रह रहे भगोड़े जाकिर नाइक के मुद्दों पर भी चर्चा होगी। भारत इससे पहले भी अलग-अलग मौकों पर ये मामला उठा चुका है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान 8 फरवरी को भारत–मलेशिया सीईओ फोरम की 10वीं बैठक भी कुआलालंपुर में होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री मलेशिया के बड़े उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। मलेशिया के प्रधानमंत्री से द्विपक्षीय चर्चा करेंगे PM मोदी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देश यह देखेंगे कि भारत और मलेशिया के बीच बनी &#039;कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप&#039; में अब तक कितना डेवलपमेंट हुआ है और आगे क्या किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और लोगों के आपसी संपर्क जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। पी. कुमरन ने बताया कि दोनों देश रेलवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, नवीकरणीय ऊर्जा और दूसरे सहयोग के क्षेत्रों पर भी काम करने की सोच रहे हैं। इसके साथ ही छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की संख्या बढ़ाने और मलेशिया में थिरुवल्लुवर सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज खोलने पर विचार हो रहा है। मलेशिया में 29 लाख भारतीय रहते हैं इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और मलेशिया के रिश्ते बहुत पुराने हैं और इतिहास, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुए हैं। मलेशिया में रहने वाले भारतीयों का इतिहास भी काफी पुराना है और उन्होंने भारत के आजादी के आंदोलन में भी भूमिका निभाई थी। विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि भारत और मलेशिया आपसी व्यापार को बैलेंस करने और लंबे समय तक आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसके लिए भारत-मलेशिया ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन एग्रीमेंट’ की समीक्षा की जा रही है। ASEAN के लिहाज से क्यों अहम है यह दौरा मलेशिया ASEAN का एक अहम सदस्य देश है और ऐसे में पीएम मोदी की यह यात्रा भारत-ASEAN संबंधों को नई ताकत दे सकती है। भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में ASEAN हमेशा से केंद्रीय भूमिका में रहा है और मलेशिया इस ग्रुप में भारत का एक भरोसेमंद साझेदार है। खास बात यह है कि भारत इस समय ASEAN के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (AITIGA) को अपडेट करने की कोशिश कर रहा है। मौजूदा समझौते को लेकर भारत को लंबे समय से यह शिकायत रही है कि इससे व्यापार घाटा बढ़ा है और भारतीय कंपनियों को बराबर का फायदा नहीं मिल पा रहा। भारत का आसियान के साथ व्यापार घाटा 2022-23 में यह लगभग 43 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा AITIGA को ज्यादा बैलेंस और आधुनिक बनाने के लिए ASEAN देशों का समर्थन जुटाने में मदद कर सकता है। भारत-मलेशिया के रिश्तों में जाकिर नाइक की वजह से तनाव जाकिर नाइक भारत और मलेशिया के रिश्तों में बार-बार तनाव की वजह बनता है। भारत में जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग और कट्टरता फैलाने के केस दर्ज है। गिरफ्तारी के डर से वह 2016 में मलेशिया भाग गया था। जून 2017 में कोर्ट ने नाइक को अपराधी घोषित किया था। उस पर मलेशिया में अल्पसंख्यक हिंदुओं और चीन के लोगों की भावनाएं आहत करने का भी आरोप है। भारत चाहता है कि मलेशिया उन्हें भारत को सौंपे, ताकि कानून के मुताबिक उन पर मुकदमा चलाया जा सके। हालांकि उसे मलेशिया में स्थायी निवास (परमानेंट रेजीडेंसी) मिली हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 12:23:07 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की चेतावनी:वर्चुअल एंबेसी बोली&#45; मदद का इंतजार न करें, खुद निकलें; ओमान में परमाणु मुद्दे पर आज बातचीत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सख्त चेतावनी दी है। वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि देश में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। बढ़ती अशांति, पाबंदियां और यात्रा में रुकावटें लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। एम्बेसी ने साफ कहा है कि जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें। अपने निकलने का प्लान खुद बनाएं और इसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर भरोसा न करें। मौजूदा हालात में आधिकारिक सहायता बेहद सीमित है। ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और अशांति के कारण सुरक्षा व्यवस्था सख्त हो गई है। सड़कें बंद हैं, सार्वजनिक परिवहन ठप है, इंटरनेट और मोबाइल-लैंडलाइन सेवाएं बार-बार बाधित हो रही हैं। कई एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानों को सीमित या रद्द कर दिया है, जिससे बाहर निकलना और भी मुश्किल हो गया है। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता आज ओमान की राजधानी मस्कट में शुरू हो रही है। यह पिछले करीब नौ महीनों में दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक बैठक है, जो जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद से निलंबित थी। दूतावास ने दोहरी नागरिकता वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरा बताया अमेरिकी चेतावनी में कहा गया है कि अगर तुरंत निकलना संभव न हो तो सुरक्षित जगह पर रहें। वहां खाना, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान का स्टॉक रखें। इंटरनेट ब्लैकआउट जारी रहने की संभावना है, इसलिए परिवार और दोस्तों से संपर्क के लिए दूसरे तरीके सोचें। US एम्बेसी ने अमेरिका-ईरान की दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरा बताया है। ईरान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता, इसलिए ऐसे लोग ईरानी पासपोर्ट से ही बाहर निकल सकते हैं। अमेरिकी पासपोर्ट दिखाना या अमेरिका से जुड़ाव जाहिर करना ईरानी अधिकारियों के लिए हिरासत में लेने का कारण बन सकता है। ऐसे में पूछताछ, गिरफ्तारी या लंबी हिरासत का खतरा है। जो अमेरिकी नागरिक बिना वैध अमेरिकी पासपोर्ट के हैं, उन्हें ईरान छोड़ने के बाद नजदीकी अमेरिकी दूतावास से पासपोर्ट बनवाने की सलाह दी गई है। लोगों को प्रदर्शनों से दूर रहने और फोन चार्ज रखने की सलाह अमेरिकी सरकार ने साफ किया है कि ईरान में कूटनीतिक और कांसुलर संबंध न होने की वजह से वह अपने नागरिकों की मदद करने की स्थिति में नहीं है। अमेरिका के हितों का प्रतिनिधित्व तेहरान में स्विट्जरलैंड दूतावास करता है। रूटीन कांसुलर सेवाएं बंद हैं और हालात में सुधार के कोई संकेत नहीं दिख रहे, इसलिए अमेरिकी नागरिकों से खुद ही सुरक्षित निकलने की ठोस योजना बनाने की अपील की गई है। सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सलाह भी दी गई है, जैसे प्रदर्शनों और भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहें, फोन हमेशा चार्ज रखें, परिवार से संपर्क बनाए रखें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखकर हालात की जानकारी लेते रहें। व्हाइट हाउस बोला- बातचीत नाकाम हुई तो ताकत का इस्तेमाल करेंगे हाई-लेवल वार्ता से पहले व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कूटनीति के पक्ष में हैं, लेकिन अगर बातचीत नाकाम होती है तो ताकत का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि ट्रम्प ओमान में होने वाली बातचीत में देखना चाहते हैं कि क्या कोई समझौता हो सकता है। साथ ही उन्होंने ट्रम्प की मांग दोहराई कि ईरान के पास जीरो परमाणु क्षमता होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत से नतीजा नहीं निकला तो राष्ट्रपति के पास कई विकल्प मौजूद हैं। यूएस सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि ईरान के पास कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 3 का प्रमुख जहाज, न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अभियानों में लगा हुआ है। अमेरिका ने ईरान के आगे 4 शर्तें रखी इस महीने की शुरूआत में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान से समझौते के लिए 4 शर्तें बताई- बातचीत से पहले ईरान-अमेरिका के मतभेद अमेरिका और ईरान ने शुक्रवार को ओमान में बातचीत करने पर सहमति जताई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बड़े मतभेद हैं। यह बातचीत पहले तुर्किये में होनी थी, लेकिन बुधवार देर रात यह घोषणा की गई कि वार्ता का स्थान बदलकर मस्कट कर दिया गया है। हालांकि, इसकी वजह नहीं बताई गई है। अमेरिका ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को भी वार्ता में शामिल करना चाहता है, जबकि तेहरान कह रहा है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित रहनी चाहिए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची एक राजनयिक दल के साथ मस्कट पहुंच चुके हैं। अमेरिका चाहता है कि वार्ता में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भी चर्चा हो, लेकिन ईरान ने साफ कह दिया है कि वह केवल परमाणु मुद्दे पर ही बात करेगा। ईरान के विदेश मंत्री ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकोफ और सलाहकार जैरेड कुशनेर से मुलाकात करने वाले हैं। वार्ता से ठीक पहले ईरानी राज्य मीडिया ने बताया कि तेहरान ने रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स साइट पर लंबी दूरी की खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल तैनात की है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा रखी है अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करते हुए अरब सागर और लाल सागर में विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन, USS थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं। साथ ही कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से वायुसेना की सक्रियता बढ़ी है। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है। ईरान के खिलाफ पहले कार्यकाल से आक्रामक रहे ट्रम्प ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते संयुक्त व्यापक कार्य योजना ( JCPOA) से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकाल लिया था। यह समझौता ओबामा प्रशासन के समय में जुलाई 2015 में हुआ था, जिसमें ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ शामिल थे। समझौते के तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई सख्त सीमाएं लगाई थीं। इसके बदले में ईरान को अमेरिका और अन्य देशों ने लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी, खासकर तेल निर्यात, बैंकिंग और व्यापार पर। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ था। ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में ही इस समझौते को दुनिया का सबसे खराब समझौता कहा था। उनका कहना था कि यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को सिर्फ टालता है, खत्म नहीं करता। ईरान ने समझौते में बुरे इरादे से हिस्सा लिया और पहले अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम छिपाया था। उन्होंने कहा था कि समझौता ईरान के अन्य बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन, आतंकवाद और अमेरिकियों की हिरासत पर रोक नहीं लगाता। 8 मई 2018 को ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में जॉइंट कॉन्प्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर निकलने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने उन सभी प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया जो समझौते के तहत हटाए गए थे। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अपनाई, जिसके तहत- मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं। ईरान पर पहले भी हमला कर चुका है अमेरिका ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि तीन सुविधाओं पर हमले से ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह नष्ट हो गई है। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान थे। उन्होंने कहा, “22 साल से लोग यह करना चाहते थे।” ]]></description>
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<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:26:32 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी राष्ट्रपति ने TrumpRx नाम की सरकारी वेबसाइट लॉन्च की, लोग कम कीमत पर दवाइयां खरीद सकेंगे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को TrumpRx नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च की। ट्रम्प का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म अमेरिकियों को सस्ती दवाएं दिलाने में मदद करेगा और इससे हेल्थकेयर खर्च कम होगा। व्हाइट हाउस परिसर में वेबसाइट का अनावरण करते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘आप बहुत सारा पैसा बचाने वाले हैं। यह पूरे हेल्थकेयर सिस्टम के लिए भी अच्छा है।’ TrumpRx सीधे दवाएं नहीं बेचती। यह वेबसाइट एक तरह से क्लीयरिंगहाउस की तरह काम करती है, जो यूजर्स को दवा कंपनियों की अपनी वेबसाइटों पर भेजती है, जहां वे दवाएं खरीद सकते हैं। इसके साथ ही रिटेल फार्मेसी में इस्तेमाल के लिए कूपन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर 40 से ज्यादा दवाएं शामिल हैं। इनमें वजन घटाने की चर्चित दवाएं ओजेम्पिक और वेगोवी भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस होती रही है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में महंगाई और जीवनयापन की लागत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए दवाओं, हेल्थकेयर, घर, किराया और ग्रॉसरी की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। ट्रम्प ने कहा कि दवाओं पर मिलने वाली छूट फार्मास्युटिकल कंपनियों पर उनके व्यक्तिगत दबाव का नतीजा है। उनका कहना है कि अमेरिकी लंबे समय से दवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि दूसरे देशों में वही दवाएं सस्ती मिलती हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में दवाओं की कीमतें कम होने से कंपनियां दूसरे देशों में कीमतें बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा, “हम दुनिया को सब्सिडी देकर थक चुके हैं।” राष्ट्रपति ने पहली बार सितंबर में TrumpRx का जिक्र किया था। तब उन्होंने बताया था कि दवा कंपनियों के साथ 15 से ज्यादा समझौते किए गए हैं, जिनका मकसद अमेरिका में दवाओं की कीमतें विकसित देशों में सबसे कम दरों के बराबर लाना है। TrumpRx का लॉन्च कई बार टल चुका था। पिछले साल सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज के प्रमुख मेहमत ओज ने कहा था कि वेबसाइट साल के अंत तक शुरू हो जाएगी, लेकिन बाद में जनवरी का प्रस्तावित लॉन्च भी टाल दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं की पहचान बताया, आलोचक बोले- ईरान के हालात को नजरअंदाज कर रहे न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद में घिर गए हैं। 1 फरवरी को वर्ल्ड हिजाब डे के मौके पर उनके ऑफिस की ओर से किए गए एक पोस्ट को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह पोस्ट ईरान में महिलाओं पर लागू जबरन हिजाब कानूनों और वहां हो रहे दमन को नजरअंदाज करता है। मेयर के ऑफिस ऑफ इमिग्रेंट अफेयर्स की ओर से साझा किए गए पोस्ट में कहा गया था कि दुनिया भर की उन मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों की आस्था, पहचान और गर्व का जश्न मनाया जा रहा है, जो हिजाब पहनना चुनती हैं। इस पोस्ट की टाइमिंग और भाषा को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि ईरान में हिजाब पहनने से इनकार करने पर महिलाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है, पीटा जा रहा है और कई मामलों में उनकी जान तक चली गई है। ऐसे माहौल में हिजाब को गर्व और उत्सव के प्रतीक के रूप में पेश करना संवेदनहीन है। ईरानी-अमेरिकी पत्रकार और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने मेयर को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क जैसे शहर में रहते हुए भी उन्हें यह पोस्ट देखकर मानसिक पीड़ा हो रही है। उन्होंने लिखा कि ईरान में महिलाएं हिजाब और उससे जुड़ी इस्लामिक विचारधारा को न मानने पर जेल भेजी जा रही हैं, गोली मारी जा रही हैं, जबकि न्यूयॉर्क में उसी प्रतीक का जश्न मनाया जा रहा है। तुर्किेए-अमेरिकी अर्थशास्त्री और राजनीतिक वैज्ञानिक तैमूर कुरान ने कहा कि ईरान, तुर्किए और सऊदी अरब जैसे देशों में लाखों मुसलमान इसे गर्व नहीं बल्कि उत्पीड़न का प्रतीक मानते हैं। तैमूर कुरान ने यह भी कहा कि किसी एक धार्मिक परिधान की आधिकारिक रूप से प्रशंसा करना धार्मिक पक्षपात जैसा लग सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शहर प्रशासन अन्य धर्मों के प्रतीकों के साथ भी ऐसा ही करेगा। उनके मुताबिक, पहचान की राजनीति पहले ही अमेरिका में गहरे विभाजन पैदा कर चुकी है और यह पोस्ट उन तनावों को और बढ़ाती है। ]]></description>
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<title>जहरीली पंजीरी खाकर जर्मनी में परिवार वेंटिलेटर पर:प्रेग्नेंट बेटी के लिए मोहाली की बिजनेसवुमन लेकर गई; बोली&#45; मारने की कोशिश हुई, बाल झड़े</title>
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<description><![CDATA[ मोहाली की रहने वाली एक बिजनेसवुमन जर्मनी में रह रही अपनी प्रेग्नेंट बेटी के लिए पंजीरी लेकर गई तो उसका पूरा परिवार वेंटिलेटर पर आ गया। पंजीरी से बने लड्डू खुद महिला ने भी खाए थे, इसलिए उसकी भी तबीयत बिगड़ी। जब जर्मनी पुलिस ने मामले की जांच की तो पता चला कि पंजीरी में थैलियम नाम का जहर था, जिसे अक्सर चूहे मारने वाली दवाओं और कीटनाशक में इस्तेमाल किया जाता है। इस जहर के असर से महिला और उसकी बेटी के पूरे बाल झड़ गए। बेटी तो अब भी अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। जबकि, उसकी नवजात बच्ची भी प्रभावित है। महिला ने इस मामले में अपने नौकर के खिलाफ शिकायत दी है। कहा कि सामूहिक हत्या की कोशिश की गई है। फिलहाल, नौकर फरार है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। महिला ने रो-रोकर पूरा मामला बताया… नौकर के पास था घर का पूरा एक्सेस शिकायत में महिला ने बताया- 3 फरवरी को मुझे मोहाली के पारस अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया। इस दौरान मुझे याद आया कि मेरे घर का पूरा एक्सेस केवल मेरे नौकर के पास ही था। जाने से एक महीना पहले मैंने उसे घर से निकाल दिया था, लेकिन उसने कहा कि आपके आने के बाद मैं घर छोड़ दूंगा। तब मैं यहां रह लेता हूं और घर की देखभाल करूंगा। अब नौकर फरार, नंबर बंद हैं महिला ने कहा- मैं उसे घर में छोड़कर चली गई थी। मुझे नहीं पता कि उसके दिल में क्या था? जब मैंने उससे पूछा कि तूने तो खाने में जहर नहीं मिलाया तो वह कहता है कि मैं ऐसा क्यों करूंगा? फिर वह घर से चला गया। अब उसके तीनों नंबर बंद हैं। बेटी और उसके बच्चे के शरीर में जहर की भारी मात्रा जर्मनी की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, नवजात बच्ची के शरीर में थैलियम का स्तर 470 पाया गया, जबकि सामान्य स्तर 0.2 होता है। वहीं, रणजीता बत्रा के शरीर में थैलियम का स्तर 9984 पाया गया। रचना कपूर ने बताया कि उनकी बेटी के बच्चे ने सिर्फ एक दिन स्तनपान किया था। इतने में ही उसे यह बीमारी हो गई। अब बेटी खड़ी भी नहीं हो पा रही। पुलिस बोली- मामले की जांच कर रहे इस बारे में मोहाली रूरल एसपी मनप्रीत सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और इसे पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आज पीड़िता हमसे मिली है। हम सभी तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर रहे हैं। पूरी जांच के बाद FIR दर्ज की जाएगी और आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।” ]]></description>
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<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:26:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>रूस बोला&#45;भारत किसी से भी तेल खरीदने के लिए आजाद:इसमें कुछ भी गलत नहीं, प्रवक्ता बोले&#45; भारत से तेल खरीद रोकने की जानकारी नहीं</title>
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<description><![CDATA[ रूस ने बुधवार को कहा कि भारत किसी भी देश से क्रूड ऑयल खरीदने के लिए पूरी तरह आजाद है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस कभी भी भारत का एकमात्र एनर्जी पार्टनर नहीं रहा है इसलिए अगर भारत तेल की खरीद किसी और देश से करता है, तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। पेस्कोव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है, इस तरह की कोई भी ऑफिशियल जानकारी भारत की ओर से नहीं दी गई है। उन्होंने एक दिन पहले भी यही बात कही थी कि नई दिल्ली से ऐसा कोई मैसेज नहीं आया है। ट्रम्प का दावा- भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि भारत, अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के तहत रूस से तेल खरीद रोकने को तैयार हो गया है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटकर 18% हो गया है। उन्होंने दावा किया कि इसके बदले में भारत, रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और व्यापार से जुड़ी टैरिफ की रुकावटें भी कम करेगा। रूसी प्रवक्ता बोलीं- तेल खरीदी दोनों देशों के लिए फायदेमंद रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बुधवार को रूस और भारत के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा भारत की रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है। हम अपने भारतीय साझेदारों के साथ निकट सहयोग जारी रखने के लिए तैयार हैं। इस बीच रूस के एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत के लिए रूसी तेल को पूरी तरह छोड़कर किसी और देश का तेल लेना आसान नहीं है। नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने बताया कि अमेरिका जो तेल बेचता है, वह हल्का होता है, जबकि रूस, भारत को भारी और सल्फर वाला यूराल्स क्रूड सप्लाई करता है जिसका इस्तेमाल भारतीय रिफाइनरियां करती हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत अमेरिका से हल्का तेल खरीदेगा, तो उसे दूसरे तेलों के साथ ब्लेंड (मिक्स) करना पड़ेगा, ताकि मशीनें ठीक से चल सकें। ऐसा करने पर भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। यानी कि भारत को अमेरिकी तेल खरीदना ज्यादा महंगा पड़ेगा। एक्सपर्ट बोले- रूस जितना तेल सप्लाई करना अमेरिका के लिए मुश्किल एनर्जी एक्सपर्ट इगोर युशकोव ने यह भी कहा कि रूस भारत को रोजाना 1.5 से 2 मिलियन बैरल तक तेल भेजता है। यह बहुत बड़ी मात्रा है। अमेरिका इतनी बड़ी मात्रा में तेल आसानी से भारत को नहीं सप्लाई कर सकता। अमेरिका के पास इतनी क्षमता या तैयार सप्लाई चेन नहीं है जो इतनी जल्दी और इतने बड़े वॉल्यूम में मैच कर सके। अगर भारत अचानक रूसी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दे और अमेरिका या किसी और से तेल लेने की कोशिश करे, तो अमेरिका के लिए इतना ज्यादा तेल उपलब्ध करा पाना मुश्किल होगा। इससे भारत को तेल की कमी हो सकती है या कीमतें बहुत बढ़ सकती हैं। एनर्जी एक्सपर्ट बोले- रूसी तेल बंद हुआ तो कीमतें बढ़ेंगी युशकोव ने कहा कि भारत का रूसी तेल खरीदना कोई ‘एक झटके में’ होने वाला काम नहीं है। ट्रम्प यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी वजह से भारत रूसी तेल छोड़ देगा, लेकिन हकीकत इतनी सरल नहीं है।  युशकोव ने याद दिलाया कि 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो पश्चिमी देशों ने रूसी तेल खरीदना कम कर दिया या बंद कर दिया। रूस ने अपने तेल को यूरोप-अमेरिका से हटाकर भारत जैसे देशों की तरफ मोड़ दिया। इस दौरान रूस ने अपना तेल उत्पादन लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन (1 मिलियन बैरल/दिन) कम कर दिया। इस वजह से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई में कमी आई। तेल की मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, जिससे वहां आम लोगों को तेल बहुत महंगा पड़ा। यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद बढ़ी रूसी तेल की खरीद फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू हो गया, जो अब तक जारी है। इस युद्ध के कारण रूस पर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, खासकर उसके तेल और गैस सेक्टर पर। इन प्रतिबंधों की वजह से रूस को अपना कच्चा तेल सस्ते दामों पर बेचने के लिए नए खरीदार ढूंढने पड़े। इसी दौरान भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना शुरू किया। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का था। भारत ने अकेले 52.73 अरब डॉलर का कच्चा तेल रूस से खरीदा था। तेल खरीदी बंद होने से रूस-भारत का व्यापार घट सकता है भारत अगर रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद कर देता है, तो भारत-रूस का कुल द्विपक्षीय व्यापार घटकर 20 अरब डॉलर से भी नीचे आ सकता है। भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले महीने कहा था कि रूस से कच्चे तेल के आयात में आगे भी गिरावट आने की संभावना है। पुरी ने ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि रूस से तेल खरीद में आई कमी की वजह किसी राजनीतिक या विदेशी दबाव की वजह से नहीं, बल्कि बाजार की परिस्थितियों का नतीजा है। उन्होंने कहा था कि भारत अब तेल आपूर्ति के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता और इसी वजह से अलग-अलग देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाई जा रही है। हालांकि पुरी ने रूसी तेल आयात में कटौती को लेकर किसी अमेरिकी दबाव का जिक्र नहीं किया, लेकिन ट्रम्प खुले तौर पर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत को रूस से तेल खरीदने से रोका है। भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार दिसंबर 2025 में भारत रूस से तेल खरीदने में तीसरे नंबर पर आ गया। तुर्किये दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। तुर्किये ने 2.6 बिलियन यूरो का तेल खरीदा। भारत ने दिसंबर में रूस से 2.3 बिलियन यूरो यानी लगभग 23,000 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। नवंबर में भारत ने 3.3 बिलियन यूरो यानी करीब 34,700 करोड़ रुपए का तेल खरीदा था। चीन अब भी सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, उसने दिसंबर में रूस से 6 बिलियन यूरो यानी करीब 63,100 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। भारत की खरीद कम होने की सबसे बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूस से तेल खरीद करीब आधी कर दी। पहले रिलायंस पूरी सप्लाई रूस की कंपनी रोसनेफ्ट से लेती थी, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों के डर से अब कंपनियां रूस से तेल कम खरीद रही हैं। रिलायंस के अलावा सरकारी तेल कंपनियों ने भी दिसंबर में रूस से तेल खरीद करीब 15% घटा दी। रूस ने छूट घटाई, भारत को पहले जैसा फायदा नहीं यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। तब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, ऐसे में ये छूट भारत के लिए किफायती थी। अब स्थिति बदल गई है। फरवरी 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों को रूसी उराल्स क्रूड ब्रेंट से 10-11 डॉलर प्रति बैरल (कुछ मामलों में 10 डॉलर से ज्यादा, शिपिंग और अन्य खर्चों सहित) सस्ता मिल रहा है, जो जनवरी के अंत में 9.15 डॉलर था। यह छूट पहले के 20-25 डॉलर से कम है, इसलिए भारत को पहले जैसा बड़ा फायदा नहीं मिल रहा। इसके अलावा रूस से तेल लाने में शिपिंग, फ्रेट और बीमा का खर्च ज्यादा पड़ता है, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण &quot;शैडो फ्लीट&quot; (पुराने टैंकर) का इस्तेमाल होता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। वहीं, सऊदी अरब, यूएई, इराक या अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से तेल लाना सस्ता और कम रिस्क वाला है। इसी वजह से भारत अब दोबारा दूसरे सप्लायर्स से तेल खरीदने पर विचार कर रहा है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… दावा- डोभाल की बैकडोर बातचीत के बाद अमेरिकी ट्रेड डील: विदेश मंत्री से कहा था- भारत झुकेगा नहीं, ट्रम्प के हटने का इंतजार करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल सितंबर की शुरुआत में चीन गए थे, जहां उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दोस्ताना मुलाकात की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद भारत ने अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों को संभालने की कोशिशें तेज कर दीं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 12:40:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी अखबार में छंटनी&#45;शशि थरूर के बेटे की नौकरी गई:वॉशिंगटन पोस्ट ने 300 स्टाफ को निकाला, स्पोर्ट्स सेक्शन बंद, भारत में पूरी टीम खत्म</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के मशहूर अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने बुधवार को 800 पत्रकारों में से 300 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। इसमें सीनियर कॉलमिस्ट ईशान थरूर भी शामिल हैं। वे कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। ईशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वॉशिंगटन पोस्ट ने इंटरनेशनल टीम के कई शानदार पत्रकारों के साथ उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया है। यह न्यूज रूम के लिए बेहद दुखद दिन है। एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने बताया कि जेफ बेजोस की कंपनी पिछले कई सालों से घाटे में चल रही थी। इस छंटनी में स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है, हालांकि कुछ रिपोर्टर फीचर्स डिपार्टमेंट में शिफ्ट होकर स्पोर्ट्स की कल्चर कवरेज जारी रखेंगे। लोकल न्यूज सेक्शन छोटा हो जाएगा, बुक्स सेक्शन बंद हो जाएगा और डेली न्यूज पॉडकास्ट ‘पोस्ट रिपोर्ट्स’ भी खत्म हो जाएगा। वॉशिंगटन पोस्ट ने मिडिल ईस्ट, इंडिया और ऑस्ट्रेलिया से भी रिपोर्टर और एडिटर निकाल दिए हैं। एग्जीक्यूटिव एडिटर बोले- अखबार पाठकों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाम एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कर्मचारियों से कहा कि अखबार पाठकों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है। मरे ने कहा कि यह फैसला दर्दनाक, लेकिन जरूरी है। अखबार को बदलती तकनीक और पाठकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालना होगा। अखबार का फोकस मुख्य रूप से राष्ट्रीय खबरों, राजनीति, बिजनेस और स्वास्थ्य पर ज्यादा होगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में कवरेज काफी कम हो जाएगी। जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है, वे 10 अप्रैल तक कंपनी में बने रहेंगे, हालांकि उनसे काम करने की अपेक्षा नहीं की जाएगी। उन्हें छह महीने तक स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलता रहेगा। ब्यूरो चीफ बोले- मिडिल ईस्ट की रिपोर्टिंग टीम को निकालना समझ से बाहर  काहिरा (मिस्र) ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर ने एक्स पर लिखा कि पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम को निकाल दिया गया है, जिसे समझना मुश्किल है। यूक्रेन से युद्ध क्षेत्र में रिपोर्टिंग करने वाली लिजी जॉनसन को भी निकाल दिया गया है। एक स्पोर्ट्स रिपोर्टर को इटली में विंटर ओलंपिक्स कवर करने के दौरान छंटनी की सूचना मिली, लेकिन उन्होंने कहा कि वे स्टोरी फाइल करते रहेंगे। कर्मचारियों को कंपनी की एक मीटिंग के बाद ईमेल के जरिए छंटनी की जानकारी दी गई। पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अखबार की ब्रांड वैल्यू को खुद ही नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया। यह छंटनी पत्रकार जगत के लिए एक बड़ा झटका है। वॉशिंगटन पोस्ट अमेजन के संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक जेफ बेजोस के स्वामित्व में है। दो साल में वॉशिंगटन पोस्ट को 1,500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ वॉशिंगटन पोस्ट को पिछले कुछ सालों से भारी घाटा हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 में अखबार को 77 मिलियन डॉलर (लगभग 650 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ, जबकि 2024 में यह घाटा 100 मिलियन डॉलर (लगभग 840 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। पिछले दो सालों में कुल मिलाकर 177 मिलियन डॉलर (लगभग 1,500 करोड़ रुपये) का घाटा बताया गया है। कंपनी लगातार पैसे गंवा रही थी और कई सालों से मुनाफा नहीं कमा पा रही थी, जिसके कारण पहले भी 2023 और 2025 में वॉलंटरी बायआउट्स और छोटी छंटनियां हो चुकी हैं। इस घाटे की मुख्य वजहें हैं डिजिटल मीडिया में बदलाव, जहां जेनरेटिव AI के बढ़ने से ऑनलाइन सर्च ट्रैफिक पिछले तीन सालों में आधा हो गया है। पहले लोग गूगल सर्च से वॉशिंगटन पोस्ट की खबरें पढ़ते थे, लेकिन अब AI टूल्स से सीधे जवाब मिलने लगे हैं। साथ ही, सब्सक्रिप्शन में भारी गिरावट आई, खासकर 2024 के अंत में राष्ट्रपति चुनाव से पहले जेफ बेजोस के फैसले से कि अखबार किसी राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन नहीं देगा। इससे कमला हैरिस के समर्थन वाला ड्राफ्ट रुक गया और लाखों सब्सक्राइबर ने सदस्यता रद्द कर दी। इससे रेवेन्यू और कम हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 12:40:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प पर हमले की कोशिश करने वाले शख्स को उम्रकैद, 2024 में AK&#45;47 जैसी राइफल लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति के गोल्फ क्लब आया था</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की कोशिश के मामले में दोषी ठहराए गए रयान राउथ को फेडरल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, सजा बुधवार (स्थानीय समय) को सुनाई गई। यह घटना 15 सितंबर 2024 को हुई थी, जब ट्रम्प राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे। राउथ AK-47 जैसी सोवियत शैली की राइफल और बॉडी आर्मर के साथ ट्रम्प के गोल्फ कोर्स के पास झाड़ी में पास छिपा था। एक सीक्रेट सर्विस एजेंट ने राइफल की नली और आरोपी का चेहरा देखा और गोली चलाई, जिसके बाद राउथ मौके से भाग गया। बाद में उसकी गाड़ी की नंबर प्लेट के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। अदालत ने रयान राउथ को सितंबर 2024 में पांच आरोपों में दोषी ठहराया था। इनमें घटना के समय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ट्रम्प की हत्या की कोशिश का मामला भी शामिल है। यह फैसला अमेरिकी जिला जज एलीन कैनन ने सुनाया। अदालत की कार्यवाही के दौरान जज कैनन ने कहा कि आरोपी ने रयान का इरादा साफ तौर पर ट्रम्प की हत्या करना था और अपने मंसूबे को अंजाम देने के बेहद करीब पहुंच गया था। उम्रकैद के अलावा राउथ को कई अन्य सजाएं भी दी गईं, जो साथ-साथ चलेंगी। इनमें हिंसक अपराध के दौरान हथियार रखने पर 84 महीने, एक फेडरल अधिकारी पर हमला करने के लिए 240 महीने, सजायाफ्ता अपराधी होने के बावजूद हथियार रखने पर 18 महीने और सीरियल नंबर मिटे हथियार के कब्जे के लिए 60 महीने की सजा शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 12:40:01 +0530</pubDate>
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<title>लीबिया के पूर्व तानाशाह गद्दाफी के बेटे की हत्या:घर में घुसकर गोली मारी; चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे</title>
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<description><![CDATA[ लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। लीबियाई न्यूज चैनल फवासेल के मुताबिक जिंटान शहर में उनके घर पर चार हमलावरों ने हमला किया और उन्हें मार डाला। सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी के वकील खालिद अल-जैदी और राजनीतिक सलाहकार अब्दुल्ला ओथमान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनकी मौत की जानकारी दी। हालांकि शुरुआती बयानों में हत्या की वजह या हमलावरों की पहचान को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई। सैफ अल-इस्लाम की मौत को लेकर उनकी बहन ने अलग ही दावा किया है। BBC ने लीबियाई टीवी के हवाले से बताया कि सैफ अल-इस्लाम की मौत लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई। सैफ अल-इस्लाम की उम्र 53 साल थी। सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को कभी अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता था। मुअम्मर गद्दाफी के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाते थे सैफ अल-इस्लाम सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को लंबे समय तक अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता रहा। उनका जन्म 25 जून 1972 को त्रिपोली में हुआ। गद्दाफी परिवार लीबिया में दशकों तक सत्ता में रहा और सैफ अल-इस्लाम उसी ताकतवर परिवार का सबसे पढ़ा-लिखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना-पहचाना चेहरा थे। उन्होंने लीबिया के बाहर भी पढ़ाई की और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा ली। 2000 के दशक में वे खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में पेश करते थे। वे पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने, अर्थव्यवस्था और कुछ हद तक राजनीतिक बदलाव की बातें करते थे। इसी वजह से कई विदेशी नेता और मीडिया उन्हें गद्दाफी शासन का नरम और आधुनिक चेहरा मानने लगे थे। सैफ ने कभी कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला, लेकिन वे लीबिया में अपने पिता के बाद सबसे ताकतवर व्यक्ति थे। 2000 के दशक में उन्होंने लीबिया के पश्चिमी देशों से रिश्ते सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई। सैफ अल-इस्लाम को 2015 में मौत की सजा सुनाई गई 2011 में अरब स्प्रिंग (तानाशाही के खिलाफ विरोध प्रदर्शन) के दौरान लीबिया में विद्रोह हुआ, जो गद्दाफी शासन के खिलाफ था। सैफ अल-इस्लाम ने अपने पिता का साथ दिया और विद्रोहियों को कुचलने की कोशिश की। वे टीवी पर आए और लोगों को चेतावनी दी कि विरोध करने वालों को सजा मिलेगी। सैफ अल-इस्लाम विद्रोहियों को &#039;चूहे&#039; कहकर बुलाते थे और कहते थे कि सरकार आखिरी गोली तक लड़ेगी। उन्होंने कहा था, &quot;हम लीबिया में लड़ेंगे, यहीं मरेंगे।&quot; क्रांति के दौरान उनके पिता मारे गए और सैफ अल-इस्लाम भागने की कोशिश में पकड़े गए। नवंबर 2011 में उन्हें जिंटान शहर के मिलिशिया ने गिरफ्तार कर लिया। 2015 में लीबियन कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई (उन्हें कोर्ट में पेश किए बिना)। 2017 में माफी के बाद रिहा हुए थे अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने उन पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए। उन पर आरोप लगे कि उन्होंने अपने पिता की सरकार के साथ मिलकर आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा और दमन में भूमिका निभाई। सैफ को 2017 तक जिंटान में कैद रखा गया। हालांकि, 2017 में एक आम माफी के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद कई साल तक सैफ अल-इस्लाम सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई दिए और उनकी स्थिति रहस्यमय बनी रही। वे राजनीति में वापसी की कोशिश कर रहे थे। 2021 में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी घोषित की थी सैफ ने 2021 में उन्होंने लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी घोषित की, जो काफी विवादास्पद थी। कई लोग उन्हें गद्दाफी शासन के अपराधों के लिए जिम्मेदार मानते थे, इसलिए चुनाव टल गया। वे पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ लीबिया (PFLL) पार्टी से जुड़े थे। इलेक्शन कमीशन ने पहले उनकी कैंडिडेसी रिजेक्ट कर दी। कमीशन ने कहा कि क्रिमिनल रिकॉर्ड की वजह से वो चुनाव नहीं लड़ सकते। सैफ ने इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की। कोर्ट ने दिसंबर 2021 में फैसला दिया कि वो कैंडिडेट रह सकते हैं। उनकी कैंडिडेसी बहाल कर दी गई। लेकिन लीबिया की पॉलिटिक्स इतनी उलझी हुई थी कि चुनाव ही नहीं हो पाया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 12:29:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में दंपती ने अपने ही दो बच्चों के सिर काटे, दो छोटे बच्चों को जबरन कटे शव दिखाए, उम्रकैद की सजा मिली</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक दंपती को उनके दो बच्चों की क्रूर हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मॉरिस ज्वेल टेलर सीनियर (39 वर्ष) और उनकी पत्नी नताली सुमिको ब्रॉथवेल (49 वर्ष) को सोमवार को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाईं, साथ ही अतिरिक्त छह साल की सजा भी दी गई। जज ने इस अपराध को राक्षसी करार देते हुए कहा कि यह बेहद क्रूर हरकत है, जिसमें उन्होंने अपने 13 साल की बेटी मालियाका और 12 साल के बेटे मॉरिस की हत्या की, जिसमें चाकू से वार कर सिर काट दिया गया। यह घटना 29 नवंबर 2020 को उनके घर में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के बाद दंपती ने अपने दो छोटे बेटों को जबरन अपने भाई-बहन के कटे हुए शव देखने के लिए मजबूर किया और उन्हें कई दिनों तक बिना खाना दिए कमरों में बंद रखा। नवंबर 2025 में जूरी ने दोनों को दो मामलों में प्रथम श्रेणी की हत्या और बच्चों के साथ क्रूरता से दुर्व्यवहार के दो मामलों में दोषी ठहराया था। पुलिस को इस मामले की जानकारी तब मिली जब टेलर, जो एक पर्सनल ट्रेनर थे और कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन जूम सेशन्स लेते थे, अचानक अपने शेड्यूल्ड मीटिंग्स में लॉग इन करना बंद कर दिया। चिंतित क्लाइंट्स ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो घर में दो बच्चों के शव अलग-अलग बेडरूम में मिले, जिन पर तेज धार वाले हथियार से हमले के निशान थे। टेलर को कुछ दिनों बाद गिरफ्तार किया गया, जबकि ब्रॉथवेल को लगभग एक साल बाद 2021 में पकड़ा गया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 13 साल के ऑस्ट्रेलियाई बच्चे ने 4 घंटे तैरकर मां और भाई-बहन की जान बचाई, बोट पलटने से 14 किलोमीटर दूर बहे थे 13 साल के ऑस्ट्रेलियाई बच्चे ऑस्टिन एपलबी ने समंदर में करीब 4 घंटे लगातार तैरकर अपनी मां और दो छोटे भाई-बहनों की जान बचाई। वह परिवार के साथ समुद्र में गया था। अचानक लहरें तेज हो गईं। बोट पलटने से सभी बहते हुए समुद्र में दूर निकल गए। ऑस्टिन एपलबी का परिवार पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के क्विंडालुप के पास समुद्र में एक छुट्टी बिताने आया था। पर्थ से आए परिवार ने होटल के पास पैडल बोर्ड किराए पर लिए थे। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण उनकी बोट पटल गई। ऑस्टिन ने कहा, “लहरें बहुत बड़ी थीं। मैं बस सोचता रहा, ‘बस तैरते रहो, बस तैरते रहो।’ आखिरकार मैं किनारे पहुंचा और वहीं गिर पड़ा।” किनारे पहुंचकर शाम करीब 6 बजे उन्होंने पुलिस और बचाव टीम को सूचना दी। इसके बाद रेस्क्यू टीम पहुंची और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। मां और दो छोटे बच्चे 14 किलोमीटर दूर बह गए। वे करीब 10 घंटे तक समुद्र में रहे। पुलिस इंस्पेक्टर जेम्स ब्रैडली ने कहा, “13 साल के लड़के की कार्रवाई की बहुत तारीफ की जानी चाहिए। उसके साहस ने उसकी मां और भाई-बहनों की जान बचाई।” ]]></description>
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<title>दावा&#45; ईरान में प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ:गर्भाशय निकाले, सिर की खाल नोची गई; सबूत छिपाने के लिए शव जलाए</title>
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<description><![CDATA[ ईरानी-जर्मन पत्रकार मिशेल अब्दोल्लाही ने ईरानी सरकार पर चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी सुरक्षा बलों ने विरोध करने वाली महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और म्यूटिलेशन (विकलांग करना) को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह लोगों में ज्यादा से ज्यादा डर पैदा कर सके और संघर्ष रुक जाए। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, अब्दोल्लाही ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर दावा किया कि उन्हें प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी मिली है। उनके अनुसार, गिरफ्तार महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है, उनके गर्भाशय निकाल दिए जाते हैं, सिर की खाल उनके बालों सहित उतार दी जाती है और शरीर पर सिगरेट के जलने के निशान छोड़ दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के शव बहुत कम या बिल्कुल नहीं लौटाए जाते क्योंकि शासन उन्हें पहले जला देता है ताकि यातना के निशान छिप जाएं। अब्दोल्लाही ने आरोप लगाया कि ईरान का इस्लामिक गणराज्य, खामेनेई के नेतृत्व में अपने लोगों के खिलाफ बलात्कार को हथियार बनाता है। यहां तक कि बच्चों के साथ भी ऐसी ही हिंसा की जा रही है। गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को जबरन नग्न किया, इंजेक्शन दिए जर्मन अखबार डाई वेल्ट ने भी प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से ऐसी ही घटनाओं की रिपोर्ट की है। एक गवाह ने बताया कि अधिकारियों ने घायल महिलाओं को कूड़े के ढेर की तरह गाड़ियों में लोड किया और कहा, &quot;हम तुम्हें अभी नहीं मारेंगे। पहले बलात्कार करेंगे, फिर मारेंगे।&quot; इसके अलावा, ईरान में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को जबरन नग्न किया गया और अज्ञात पदार्थों के इंजेक्शन दिए गए। द गार्जियन अखबार ने भी केरमानशाह शहर में 16 साल की एक लड़की सहित कई प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना रिपोर्ट की, जहां सुरक्षा बलों ने डंडो से उनके शरीर को गलत तरीके से छुआ और बुरी तरह पीटा। ईरान में महिलाओं ने हिजाब उतार विरोध जताया था ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा 15 जनवरी तक चली थी। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। इनमें 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। यह हिंसा महंगाई के खिलाफ भड़की थी। ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 1,455,000 से 1,457,000 रियाल (ओपन मार्केट रेट) हो गई। चाय, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें भी बहुत महंगी हो गईं। कई लोग पुरानी राजशाही (शाह का शासन) वापस लाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान महिलाओं ने हिजाब न पहनने, मोटरसाइकिल चलाने, खामेनेई की तस्वीरों को जलाकर और सिगरेट जलाने जैसी हरकतों से विरोध जताया था। रिपोर्ट- ईरान में लगभग 5000 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरान में 8 जनवरी से इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय संचार बंद कर दिया गया था। मिलिशिया और यहां तक कि इराक से 5,000 शिया लड़ाकों को भी तैनात किया गया। सरकार और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स एजेंसियों ने मौत का आंकड़ा भी अलग-अलग बताया। ईरान की सरकारी एजेंसी ने 3,117 मौतें बताईं, जिनमें से ज्यादातर सुरक्षा बलों या निर्दोष लोगों की बताई गईं। रॉयटर्स ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से 5,000 मौतें रिपोर्ट की। जबकि अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स इन ईरान ने 3,308 मौतों का अनुमान लगाया। दूसरे रिपोर्टों में मौतों की संख्या 2,000 से 6,000 तक बताई गई है। हालांकि ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया कि देशभर में कम से कम 12 हजार लोगों की मौत हुई है। ज्यादातर लोग गोली लगने से मारे गए हैं। हिजाब ठीक से नहीं पहनने पर महसा अमीनी के साथ रेप किया गया था ईरान में साल 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद भड़के प्रदर्शनों को दबाने के लिए भी सुरक्षा बलों ने महिलाओं के साथ यौन हिंसा, रेप और अत्याचार किए थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट्स में महिलाओं और पुरुषों दोनों के साथ रेप, यौन उत्पीड़न और टॉर्चर की पुष्टि हुई थी। सितंबर 2022 में 22 साल की कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी अपने भाई के साथ तेहरान घूमने आई थीं। 13 सितंबर को ईरान की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उनका हिजाब ठीक से नहीं पहना गया था। पुलिस ने उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में ले जाकर रखा, जहां महिलाओं को हिजाब के नियम सिखाए जाते हैं। वहां कुछ ही मिनटों बाद महसा बेहोश हो गईं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां वे कोमा में चली गईं और 16 सितंबर 2022 को उनकी मौत हो गई। ईरानी सरकार का दावा है कि महसा को हार्ट अटैक हुआ था और उनकी मौत पहले से मौजूद बीमारी की वजह से हुई। हालांकि, उनके परिवार और कई प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि पुलिस ने उनके साथ मार-पीट की। संयुक्त राष्ट्र की जांच ने 2024 में कहा कि महसा अमीनी की मौत शारीरिक हिंसा के कारण हुई। ईरान में महिलाओं को जबरन प्रदर्शनकारी बना कपड़े उतरवाए गए थे इस मौत के बाद ईरान भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जो महीनों तक चले। लोग सड़कों पर उतरे, खासकर महिलाएं हिजाब उतारकर बाल खोलकर विरोध जता रही थीं। प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों गिरफ्तार हुए, और कई को फांसी दी गई। यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में सबसे बड़ा विरोध आंदोलन था, जो सिर्फ हिजाब से शुरू होकर पूरे शासन के खिलाफ हो गया। इस दौरान गिलान प्रांत की 25 साल की डोर्सा (नाम बदला हुआ) अपनी बहन और दो पुरुष दोस्तों के साथ कार में थीं। चेकपॉइंट पर सुरक्षा बलों ने उन्हें रोका। बहन के बैग में स्प्रे पेंट मिलने पर दोनों बहनों को आंखों पर पट्टी बांधकर, हाथ पीछे बांधकर ले जाया गया। उन्हें जबरन विरोध करने का कबूलनामा साइन करवाया गया। डोर्सा को अलग कमरे में ले जाकर बुरी तरह पीटा गया, गालियां दी गईं। कपड़े उतरवाकर एक पुरुष (जिसे डॉक्टर बताया गया) ने उनके शरीर पर हाथ फेरा। दर्द और सदमे से वह बेहोश हो गईं। रात में उन्हें शहर से दूर छोड़ दिया गया। घर पहुंचकर डॉक्टर ने बताया कि उनके साथ बलात्कार हुआ था। ईरान में महिलाओं का बिना हिजाब घूमना गैरकानूनी ईरान में महिलाओं की आजादी को लेकर कई कानून बनाए गए हैं। जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद लागू हुए। हिजाब और ड्रेस कोड: विवाह और तलाक: लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 13 साल है। पुरुष को एक से ज्यादा शादी का अधिकार है। महिलाएं आसानी से तलाक नहीं ले पाती। बच्चों की कस्टडी: तलाक के बाद छोटे बच्चों की कस्टडी मां को, लेकिन बड़े होने पर पिता को मिलती है। नागरिकता: ईरानी महिला से शादी करने वाले विदेशी पुरुष को ईरानी नागरिकता नहीं मिलती और बच्चे को भी मां से नागरिकता नहीं मिलती (पिता से मिलती है)। यात्रा: महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पति या पिता की अनुमति जरूरी है (कुछ अपवादों को छोड़कर)। गवाही: अदालत में एक महिला की गवाही आधी गवाही मानी जाती है (पुरुष की तुलना में)।
---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ईरानी प्रदर्शनकारी बोले- ट्रम्प ने हमें धोखा दिया: सबसे ज्यादा जरूरत के वक्त समर्थन नहीं किया; हिंसा में अब तक 5000 लोगों की मौत ईरान में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से उम्मीद थी कि वे उनके लिए मददगार साबित होंगे। लेकिन अब ट्रम्प के रुख में बदलाव आ गया है, इससे वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ट्रम्प ने जो कहा और बाद में जो किया, उनके बीच बहुत बड़ा फर्क था। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:05:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:यौन अपराधी एपस्टीन से संबंधों को लेकर सफाई देंगे बिल क्लिंटन, 43 साल में पहली बार गवाही देंगे अमेरिकी राष्ट्रपति</title>
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<description><![CDATA[ पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी संसदीय जांच में पेश होने के लिए सहमति जताई है। इससे पहले दंपती ने पेश होने से इनकार कर दिया था। इस वजह से उन्हें आपराधिक अवमानना (क्रिमिनल कंटेम्प्ट) में डालने के लिए वोट किया जाना था। यह विवाद कई महीनों से चल रहा था, जिसमें क्लिंटन दंपती ने कमेटी के कानूनी आदेश को खारिज कर दिया था। कमेटी ने पिछले महीने बिपार्टिसन (विरोधी गुटों का एक साथ मिलकर काम करना) वोट से क्लिंटन को अवमानना में डालने का प्रस्ताव पास किया था, जिसे कुछ डेमोक्रेट्स का भी समर्थन मिला। क्लिंटन दंपति का कहना है कि उन्होंने कमेटी को पहले ही बयान दिए थे और एपस्टीन के बारे में अपनी जानकारी साझा की थी। पहले बिल क्लिंटन ने एपस्टीन के यौन अपराधों की जानकारी होने से इनकार किया था और कहा था कि उन्होंने दो दशक पहले उससे संपर्क तोड़ लिया था। एपस्टीन के निजी जेट के लॉग्स दिखाते हैं कि क्लिंटन ने 2002 और 2003 में चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ली थीं। जस्टिस डिपार्टमेंट के जारी रिकॉर्ड्स में कुछ फोटोज भी हैं, जिनमें क्लिंटन एपस्टीन के एस्टेट में पूल में तैरते हुए और हॉट टब में लेटे हुए दिख रहे हैं। बिल क्लिंटन के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ एंजेल उरेना ने तब कहा था कि ये फोटोज दशकों पुरानी हैं और क्लिंटन ने एपस्टीन के अपराधों के सामने आने से पहले ही उससे संबंध तोड़ लिया था। क्लिंटन पर एपस्टीन के पीड़ितों ने कभी कोई आरोप नहीं लगाया है और वे किसी गलत काम से जुड़े नहीं पाए गए हैं। क्लिंटन दंपति ने पिछले महीने कमेटी के चेयरमैन जेम्स कोमर को पत्र लिखकर उनकी जांच की आलोचना की। 1983 में जेराल्ड फोर्ड की गवाही के बाद यह पहली बार होगा जब कोई पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति संसद पैनल के सामने गवाही देंगे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए जल्द बैठक होगी, ट्रम्प ने अंजाम भुगतने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए शुक्रवार को तुर्किये में महत्वपूर्ण बैठक होने की उम्मीद है। कई क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनेर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस बैठक में शामिल होंगे। साथ ही तुर्किये, कतर और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है। कुछ सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और पाकिस्तान जैसे अन्य देशों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले सकते हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बहुत खराब हो चुके हैं। ट्रम्प ने हाल ही में ईरान पर हमले की धमकी दी थी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी जहाजों का एक बड़ा बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और अगर समझौता नहीं हुआ तो बुरे हालात हो सकते हैं। पिछले महीने ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। ट्रम्प ने तब भी हस्तक्षेप की धमकी दी थी। वे ईरान में शासन परिवर्तन की बात भी कर चुके हैं। ईरान के नेता धमकियों के बीच बातचीत से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब वे बात करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि उनका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा के लिए है, हथियारों के लिए नहीं। वे अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं। दुबई की एमिरेट्स एयरलाइन ने इजराइल के लिए फ्लाइट शुरू करने से इनकार किया, 2 साल पहले उड़ाने रोकी थी दुबई की प्रमुख एयरलाइन एमिरेट्स ने सोमवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि वह इजराइल के लिए उड़ानें फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही है। एयरलाइन ने साफ किया कि फिलहाल इजराइल के लिए उड़ानें निलंबित हैं और इन्हें बहाल करने की कोई ठोस योजना नहीं है। यह बयान ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि दुबई की यह फ्लैगशिप एयरलाइन आने वाले महीनों में इजराइल के लिए उड़ानें दोबारा शुरू करने पर काम कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो इस योजना में देरी हो सकती है या इसे टाल भी दिया जा सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात को भरोसा दिलाया है कि इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर एमिरेट्स के लैंडिंग और टेक-ऑफ स्लॉट सुरक्षित रखे गए हैं। हालांकि, एमिरेट्स ने इस दावे को भी स्वीकार नहीं किया। यह रिपोर्ट इजराइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव के दुबई दौरे के बाद सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, एमिरेट्स अधिकारियों ने 2026 की पहली तिमाही में यूएई और इजराइल के बीच उड़ानें बहाल करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, एमिरेट्स ने दोहराया कि फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। एयरलाइन ने यह भी बताया कि दुबई और इजराइल के बीच यात्रा करने वाले यात्री उसकी कोडशेयर पार्टनर फ्लाई दुबई के जरिए सफर कर सकते हैं, जो इजराइल के लिए सीधी उड़ानें जारी रखे हुए है। दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन मानी जाने वाली एमिरेट्स ने अक्टूबर 2023 में मिडिल ईस्ट में संघर्षों के चलते इजराइल के लिए सभी उड़ानें रोक दी थीं। अमेरिका-चीन के बीच फंसा भारत:अब कम ताकतवर देशों से बढ़ा रहा दोस्ती, ट्रम्प के टैरिफ से बदली भारत की विदेश और व्यापार नीति कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से कहा था कि दुनिया की पुरानी व्यवस्था ‘टूट’ रही है। अब मध्यम ताकत वाले देशों को साथ लाकर काम करना होगा। दावोस में अपने भाषण में कार्नी ने न तो ट्रम्प प्रशासन का नाम लिया और न ही उन अमेरिकी टैरिफ का जिक्र किया, जिनकी वजह से पुराना ग्लोबल सिस्टम हिल गया। अपने भाषण में उन्होंने सीधे तौर पर भले ही भारत का नाम न लिया हो, लेकिन इशारा साफ तौर पर भारत की तरफ था। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:05:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>वर्ल्ड, अपडेट्स:यौन, अपराधी, एपस्टीन, से, संबंधों, को, लेकर, सफाई, देंगे, बिल, क्लिंटन, साल, में, पहली, बार, गवाही, देंगे, अमेरिकी, राष्ट्रपति</media:keywords>
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<title>&amp;apos;आधार&#45;डिजिटल पेमेंट से करप्शन रुका, पाकिस्तान भी सीखे&amp;apos;:वर्ल्ड बैंक चेयरमैन अजय बंगा पाकिस्तान पीएम से बोले&#45; कर्ज मुफ्त में नहीं मिलता</title>
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<description><![CDATA[ वर्ल्ड बैंक के चेयरमैन अजय पाल सिंह बंगा 4 दिन के पाकिस्तान दौरे पर हैं। इस्लामाबाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब से मुलाकात की। इसमें पाकिस्तान को 10 साल में 20 अरब डॉलर देने का रोडमैप तैयार किया। बंगा ने मंत्रियों से कहा कि पाकिस्तान कर्ज तो ले रहा है, लेकिन ये न समझे कि मदद मुफ्त में की जा रही है। आप अपने देश में करप्शन और टैक्स चोरी रोकें। अगर सुधार नहीं किए तो आने वाले सालों में कोई कर्ज नहीं मिलेगा। वहीं, बंगा ने आधार और डिजिटल पेमेंट का जिक्र भी किया। हालांकि उन्होंने भारत का नाम नहीं लिया। माना यही जा रहा है कि उन्होंने पाकिस्तान को भारत से सीखने की नसीहत दी। बंगा आज पंजाब के खुशाब जिले में स्थित अपने पुश्तैनी गांव जाएंगे। 1947 के बंटवारे के बाद बंगा परिवार का पहला सदस्य अपने पैतृक गांव जा रहा है। इससे पहले उन्होंने गुरुद्वारा पंजा साहिब में माथा टेका। बंगा ने पाकिस्तान से क्या कहा, 5 पॉइंट्स पाकिस्तान ने बंगा को खुश करने के लिए क्या किया… बंगा की यात्रा पर पाकिस्तानी मीडिया में क्या चल रहा… --------- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी कैद से छूटे पंजाबी ने बताई टॉर्चर की कहानी:रात भर दौड़ाते, नंगा कर ठंड में बैठाते, रॉड मारते; जासूस बनाने पर तुले रहे बाढ़ के पानी में बहकर गलती से पाकिस्तान पहुंचे लुधियाना के हरविंदरपाल के साथ जानवरों जैसा सलूक हुआ। उन्हें कैद में रख पाकिस्तानी रेंजर्स ने जमकर पीटा। जासूसी का आरोप कबूल करवाने के लिए पूरी रात नंगे पैर चलवाते। रुकने पर तलवों में डंडे मारते। नींद की झपकी आती तो फिर पिटाई करने लगते। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:05:01 +0530</pubDate>
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<title>कार्लोस की जीत... 10 बार के चैम्पियन जोकोविच हारे:अल्काराज़ चार ग्रैंड स्लैम जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं।</title>
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<description><![CDATA[ रविवार को टेनिस इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया। 2026 ऑस्ट्रेलियन ओपन के रोमांचक फाइनल में, विश्व के नंबर-1 खिलाड़ी कार्लोस अल्काराज़ ने 38 वर्षीय अनुभवी नोवाक जोकोविच को 2-6, 6-2, 6-3, 7-5 से हराकर अपना पहला ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीता। तीन घंटे और दो मिनट तक चले एक मैच में, 22 वर्षीय स्पेनिश स्टार ने न केवल मेलबर्न फाइनल में कभी न हारने के जोकोविच के रिकॉर्ड को तोड़ा बल्कि अपना &#039;करियर ग्रैंड स्लैम&#039; भी पूरा किया। 22 साल और 272 दिन की उम्र में, अल्काराज़ अब इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने चारों प्रमुख खिताब जीते हैं।  उन्होंने ओपन एरा में डॉन बज (22 वर्ष 355 दिन) और राफेल नडाल (24 वर्ष) के 1938 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। वह ओपन एरा में यह उपलब्धि हासिल करने वाले छठे पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। यह उनका सातवां ग्रैंड स्लैम खिताब है, और फाइनल में उनका रिकॉर्ड 7-0 हो गया है। उन्होंने दो विंबलडन, दो फ्रेंच ओपन और दो यूएस ओपन जीते हैं। दूसरी ओर, जोकोविच अपना 11वां ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतने से चूक गए। अल्काराज़ ने कहा- &quot;मेरी टीम जानती है कि इस ट्रॉफी को जीतने के लिए मैंने कितनी मेहनत की है। पिछले सीज़न के अंत के बाद, मैं कई भावनात्मक उतार-चढ़ावों से गुज़रा। नोवाक जिस तरह से खेल रहे हैं, वह वाकई प्रेरणादायक है। उनके साथ लॉकर रूम और कोर्ट साझा करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।&quot;

पहले सेट में हार के बाद शानदार वापसी; पिछले 9 टूर्नामेंटों में जोकोविच को सिनर या अल्काराज़ ने रोका मैच की शुरुआत में सर्बिया के दिग्गज खिलाड़ी जोकोविच पूरी तरह से हावी नजर आ रहे थे। उन्होंने पहले सेट में अल्काराज़ को संभलने का कोई मौका नहीं दिया और आसानी से सेट 6-2 से जीत लिया। उस समय ऐसा लग रहा था कि जोकोविच आसानी से अपना 25वां ग्रैंड स्लैम जीत लेंगे।
हालांकि, दूसरे सेट से ही स्थिति पलट गई। अल्काराज़ ने अपनी घबराहट पर काबू पाया और बिजली की तरह फुर्ती दिखाई। उन्होंने दूसरा सेट 6-2 से जीतकर मैच को बराबरी पर ला दिया। इसके बाद, तीसरे सेट में वे 6-3 से जीते। चौथे सेट के 12वें गेम में उन्होंने जोकोविच की सर्विस तोड़ी और 7-5 से सेट व मैच अपने नाम कर लिया। नोवाक जोकोविच मेलबर्न मे्ं अपने रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम टाइटल के लिए खेल रहे थे लेकिन अल्कारेज ने उनका सपना तोड़ दिया। पिछले 9 मेजर टूर्नामेंट्स में जोकोविच को सिर्फ अल्कारेज या सिनर ही रोक पाए हैं। इन्हीं दो खिलाड़ियों ने पिछले 9 ग्रैंडस्लैम बांटे हैं। नोवाक जोकोविच ने कार्लोस को शुभकामनाएं देते हुए कहा- &quot;कार्लोस को बधाई। उनके खेल का वर्णन करने के लिए सबसे उपयुक्त शब्द &#039;ऐतिहासिक&#039; है। मुझे यकीन है कि अगले 10 वर्षों में हमारा कई बार आमना-सामना होगा। मुझे हमेशा खुद पर भरोसा रहा है, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस समारोह में खड़ा होऊंगा।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:16:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>सिंधु&#45;साइना के एलीट क्लब में शामिल हुईं देविका:बैडमिंटन में उपलब्धि, सिहाग ने जीता थाईलैंड मास्टर्स</title>
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<description><![CDATA[ भारत की 20 वर्षीय उभरती शटलर देविका सिहाग ने रविवार को थाईलैंड मास्टर्स 2026 में इतिहास रच दिया। बैंकॉक में खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने मलेशिया की गो जिन वेई को हराकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 खिताब जीता। देविका ने पहला गेम 21-8 के बड़े अंतर से जीता। दूसरे गेम में जब वे 6-3 से आगे चल रही थीं, तभी मलेशियाई खिलाड़ी को चोट के कारण रिटायर होना पड़ा और देविका को विजेता घोषित कर दिया गया। देविका ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी गेम नहीं गंवाया। उन्होंने हर मैच सीधे सेटों में जीता। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने टूर्नामेंट की नंबर-1 सीड सुपनिदा को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। इस जीत के साथ देविका सुपर 300 खिताब जीतने वाली भारत की सिर्फ तीसरी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले यह उपलब्धि केवल पीवी सिंधु और साइना नेहवाल के नाम थी। देविका ने कहा-मैं बेहद खुश हूं क्योंकि यह मेरा पहला सुपर 300 खिताब है। मैंने यहां बहुत अच्छे मैच खेले और काफी कुछ सीखा है। मैं सिर्फ अपना 100% देना चाहती थी। इसी सोच ने मुझे आत्मविश्वास दिया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:16:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड:बोले&#45; यह केवल मेरी निजी नहीं, मानवता की साझा जिम्मेदारी की जीत है</title>
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<description><![CDATA[ तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा को प्रतिष्ठित ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान &#039;बेस्ट ऑडियोबुक नरेशन&#039; कैटेगरी में उनकी ऑडियोबुक &#039;मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शन्स ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा&#039; के लिए प्रदान किया गया है। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए दलाई लामा ने कहा कि यह अवॉर्ड उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि दुनिया में शांति और करुणा के संदेश का सम्मान है। उन्होंने इसे कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया, और इसे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा। मानवता की एकता की समझ जरूरी दलाई लामा ने जोर देकर कहा कि यह हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की पहचान है। उन्होंने बताया कि दुनिया के सभी 8 अरब लोगों की सामूहिक भलाई के लिए शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और &#039;मानवता की एकता&#039; की समझ होना बेहद जरूरी है। धर्मगुरु ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि ग्रैमी जैसा मंच इन विचारों और संदेशों को दुनिया भर में और अधिक व्यापक रूप से फैलाने में सहायक होगा। सम्मान बताता है कि संसार को शांति के संदेश की जरूरी ग्रैमी अवॉर्ड्स को संगीत और रिकॉर्डिंग की दुनिया का &#039;ऑस्कर&#039; माना जाता है। एक आध्यात्मिक गुरु को इस मंच पर सम्मान मिलना यह दर्शाता है कि आज की दुनिया में मानसिक शांति और करुणा के संदेश की कितनी अधिक अहमियत है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 12:16:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी की डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगैंडा बनकर रह गई:मेलानिया की फिल्म फ्लॉप, सिनेमाघरों में दर्शकों का टोटा, लंदन प्रीमियर में सिर्फ 1 टिकट बिका</title>
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<description><![CDATA[ नमस्कार दर्शकों! अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प की डॉक्यूमेंट्री ‘मेलानिया: 20 डेज टू हिस्ट्री’ शुक्रवार को रिलीज हुई, लेकिन सिनेमाघरों में दर्शकों का टोटा रहा। हाइप के साथ पेश की गई इस फिल्म में जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने से ठीक 20 दिन पहले की जिंदगी दिखाई गई है। फिल्म को खुद मेलानिया ने को-प्रोड्यूस किया है। दावा किया, ‘हर कोई जानना चाहता है मेरी कहानी।’ लेकिन ब्रिटेन से लेकर अमेरिका तक हॉल खाली पड़े दिखे। लंदन में इसके प्रीमियर से पहले इस्लिंगटन के एक सिनेमाघर में दोपहर के समय की स्क्रीनिंग के लिए केवल एक टिकट बिका, जबकि उसी स्थान पर शाम के शो के लिए केवल दो टिकट ही बिके। प्रमुख मल्टीप्लेक्सों में स्थिति और भी निराशाजनक थी, लंदन के व्यू थिएटरों में निर्धारित सभी स्क्रीनिंग के लिए एडवांस बुकिंग शून्य रही। फिल्म को ब्रिटिश फिल्म वर्गीकरण बोर्ड द्वारा रिलीज के लिए मंजूरी मिलने, अमेरिका में बढ़चढ़कर प्रचार और वाइट हाउस में प्रीमियर के बावजूद दर्शक दूर रहे। ब्रिटेन की कॉलमनिस्ट व फिल्म समीक्षक जूडिथ वुड्स ने उत्तर लंदन के मॉल में सिनेमा देखी। उन्होंने कहा कि सिनेमाघर में उन्हें मिलाकर पांच दर्शक थे। इसमें एक महिला तो सिर्फ ठंड से बचने के लिए सिनेमाघर में आ गई थी। दर्शक क्यों नहीं आए
जूडिथ वुड्स की राय में ये डॉक्यूमेंट्री कम, उत्तर कोरिया स्टाइल प्रोपेगैंडा और ब्रांडिंग मुहिम ज्यादा है। ​फिल्म में मेलानिया की ठंडी मुस्कान, रात में डार्क सनग्लासेस पहनना, परफेक्ट ड्रेसिंग डरावनी लगी। कोई भावनाएं नहीं, सिर्फ दिखावा ही नजर आया। फिल्म पर 687 करोड़ रु. खर्च हुए
अमेजन ने इस फिल्म के राइट्स और मार्केटिंग पर करीब 687 करोड रु. खर्च किए हैं। इसमें मेलानिया के निजी जीवन की झलकें हैं, लेकिन कई पहलू नहीं दिखाए। जैसे- फर्स्ट लेडी की भूमिका पर असहजता जताई है, लेकिन राजनीतिक विचार छिपा लिए। फिल्म ऐसे समय आई है, आईसीई एजेंट द्वारा दो लोगाें की हत्या को लेकर अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे असंवेदनशीलता भी कहा जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:08:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>हाइब्रिड वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक सामान के नाम पर तस्करी:चीन ने अमेरिका के बाद यूरोप में फैलाया ड्रग्स का कारोबार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के बाद अब यूरोप में ड्रग्स के जरिए हाइब्रिड वारफेयर शुरू हो गया है। यूरोपोल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भेजे जा रहे काले बाजार के केमिकल्स से यूरोप में मेथ और एक्स्टेसी जैसे क्लास-ए ड्रग्स बनाए जा रहे हैं। इस महीने यूरोप के कई देशों में छापेमारी कर 24 इंडस्ट्रियल लैब्स को बंद किया गया और 1,000 टन से ज्यादा प्रीकरसर केमिकल जब्त किए गए। इनमें से ज्यादातर चीन से आए थे। ड्रग्स बनाने वाले गैंग चीन से सस्ते और लगातार मिलने वाले केमिकल्स को यूरोप लाकर बड़े पैमाने पर ड्रग्स तैयार कर रहे हैं। इन केमिकल्स को इलेक्ट्रॉनिक सामान या पीवीसी जैसे सामान्य उत्पादों के नाम पर कंटेनरों में छिपाकर भेजा जाता है। फिर इन्हें वैध रास्तों से यूरोप पहुंचाया जाता है। कस्टम और एक्सपोर्ट चेक से बचने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है। यूरोप पहुंचने के बाद ये केमिकल्स ट्रेन से अलग-अलग देशों में भेजे जाते हैं ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके। इसके बाद इन्हें नीदरलैंड्स, बेल्जियम, चेक रिपब्लिक और पोलैंड की लैब्स में भेजा जाता है, जहां इन्हें ड्रग्स में बदला जाता है। इन लैब्स में ड्रग्स बनाने के लिए खास तरह की 400 लीटर की मशीनें लगाई जाती हैं, जिनकी कीमत करीब 60 हजार पाउंड होती है। एक बार में ये मशीनें 100 किलो तक मेथ या एक्स्टसी बना सकती हैं। ड्रग्स के लिए तैयार लैब्स भी चीन से आ रही हैं
यूरोपीय ड्रग निरोधक एजेंसी के मुताबिक, अब कुछ गैंग चीन से पूरी तरह तैयार लैब्स भी खरीद रहे हैं। पहले इंजीनियर इन्हें यूरोप में बनाते थे, लेकिन अब सीधे चीन से मंगाई जा रही हैं। ड्रग्स की यूरोपीय मार्केट 18,823 करोड़ रुपए की
यूरोप में मेथ और एक्स्टेसी जैसी ड्रग्स की मार्केट करीब 1.5 अरब पाउंड या 18,823 करोड़ रुपए की है। यूरोप में ज्यादातर ड्रग्स लैब्स नीदरलैंड्स में हैं। कुछ लैब्स खेतों में बने बड़े सेटअप हैं, तो कुछ किचन में बने छोटे लैब्स, जो हर बार 500 ग्राम तक ड्रग्स बना सकते हैं। चीन में खुलेआम मिलते हैं ड्रग्स के केमिकल
यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन में ड्रग्स बनाने वाले केमिकल्स को मामूली बदलाव कर वैध बना दिया जाता है, जिससे उन पर बैन नहीं लग पाता। जबकि, ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए इन केमिकल्स की सप्लाई हो रही है। चीन की केमिकल इंडस्ट्री इतनी बड़ी है कि हर कंटेनर की जांच करना लगभग नामुमकिन है। अमेरिका में एक साल में फेंटानिल से 48 हजार मौतें
अमेरिका पहले ही चीन पर फेंटानिल ड्रग की सप्लाई का आरोप लगा चुका है। 2024 में अमेरिका में फेंटानिल के ओवरडोज से 48 हजार लोगों की मौत हुई। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए इसे ‘मास डिस्ट्रक्शन वेपन’ घोषित किया था। हालांकि, लंदन स्थित चीनी दूतावास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह चीन के खिलाफ एक साजिश है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:08:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; भारत ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा:डील पहले ही तय हो चुकी, चीन को भी डील करने के लिए कहा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि भारत अब ईरान से कच्चा तेल खरीदने के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। उन्होंने दावा किया है कि भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीदने का सौदा कर लिया है। यह बयान ट्रम्प ने वॉशिंगटन डीसी से एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रम्प ने कहा, “हमने पहले ही एक डील कर ली है। भारत वेनेजुएला से तेल खरीदेगा, ईरान से नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ इस सौदे का कांसेप्ट तय हो चुका है। ट्रम्प के मुताबिक, चीन भी अगर चाहे तो वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है। भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर बहुत कड़े आर्थिक प्रतिबंध (सेंक्शंस) लगा दिए थे, अमेरिका ने सेकेंडरी सेंक्शंस भी लगा दिए, यानी जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती है, उसे अमेरिकी बाजार में व्यापार करने या बैंकिंग सुविधाओं से रोक दिया जा सकता था। इस वजह से कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया। भारत भी वेनेजुएला से बहुत ज्यादा तेल खरीदता था। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि तब भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 6% वेनेजुएला से लेता था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है। भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा। 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। इसके बाद 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी। इसके बाद 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात सिर्फ 0.3% रह गया। वेनेजुएला से तेल खरीदने की कोशिश में रिलायंस रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से फिर से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मंजूरी लेने की कोशिश शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं और रिलायंस अपने लिए वैकल्पिक तेल सप्लाई सुरक्षित करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस के प्रतिनिधि इस मंजूरी के लिए अमेरिका के यूएस स्टेट डिपार्टमेंट और यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रॉयटर्स की ओर से भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। पिछले साल रोजाना 63,000 बैरल तेल खरीदती थी रिलायंस रिलायंस ने पहले भी अमेरिका से लाइसेंस लेकर वेनेजुएला से तेल खरीदा था। कंपनी के पास दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। यह गुजरात में स्थित है और इसकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। 2025 के पहले चार महीनों में वेनेजुएला की कंपनी PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से तेल भेजा था, जो रोजाना करीब 63,000 बैरल के बराबर था। लेकिन मार्च-अप्रैल 2025 में अमेरिका ने ज्यादातर लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी दी, जिसके बाद मई 2025 में रिलायंस का आखिरी वेनेजुएलन तेल का जहाज भारत पहुंचा था। रिलायंस ने गुरुवार को कहा था कि अगर अमेरिकी नियमों के तहत गैर-अमेरिकी खरीदारों को वेनेजुएला से तेल बेचने की इजाजत मिलती है, तो वह दोबारा खरीद पर विचार करेगी। अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल देगा वेनेजुएला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने कहा था कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल सौंपेगी। ट्रम्प ने बताया कि यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इससे मिलने वाली रकम पर ट्रम्प का कंट्रोल रहेगा। 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की कीमत वर्तमान में करीब 25 हजार करोड़ रुपए है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक इसका इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के हित में किया जाएगा। -------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला से 5 करोड़ बैरल तेल लेंगे ट्रम्प: कहा- कमाई पर भी मेरा कंट्रोल रहेगा, इससे दोनों देशों को फायदा होगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेगी। ट्रम्प ने बताया कि यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा। इससे मिलने वाली रकम पर ट्रम्प का कंट्रोल रहेगा। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अफ्रीकी देश कांगो के खदान में लैंडस्लाइड, 200 लोगों की मौत, महिलाएं और बच्चे भी शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अफ्रीकी देश कांगो रिपब्लिकन के पूर्वी हिस्से में रुबाया कोल्टैन खदान में लैंडस्लाइड हो गया है, जिसमें 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा बुधवार को हुआ, जब बारिश के मौसम में जमीन कमजोर हो गई और खदान ढह गई। गवर्नर के प्रवक्ता लुबुम्बा कंबेरे मुयिसा ने रॉयटर्स को बताया कि इस लैंडस्लाइड में 200 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें खनन मजदूर, बच्चे और बाजार में सब्जी-फल बेचने वाली महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, शुक्रवार शाम तक सटीक मृतकों की संख्या स्पष्ट नहीं हो पाई थी, क्योंकि मलबे से शव निकालने का काम जारी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… दावा- कनाडा के दुश्मनों से मिले अमेरिकी अधिकारी: अल्बर्टा को आजाद देश बनाने की कोशिश में अलगाववादी कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में एक नया विवाद शुरू हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारियों ने कनाडा के अल्बर्टा प्रांत को अलग देश बनाने की मांग कर रहे अलगाववादी समूह के नेताओं से मुलाकात की। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल से अब तक अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी तीन बार अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिले। ये नेता अल्बर्टा को कनाडा से अलग कर एक स्वतंत्र देश बनाने की वकालत कर रहे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा। कार्नी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। पूरी खबर पढ़ें… अमेरिका में डंकी रूट से रोज 65 भारतीय पकड़े गए: सालभर में 23 हजार लोग गिरफ्तार हुए; तुर्किये-दुबई रूट से US में एंट्री का ट्रेंड बढ़ा अमेरिका में डंकी रूट से एंट्री करने के मामले में बीते एक साल में हर रोज 65 भारतीय पकड़े गए। जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी बॉर्डर एंड कस्टम ने कुल 23,830 भारतीयों को पकड़ा। विभाग के मुताबिक एंट्री के मामले घटे हैं, लेकिन इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगी है। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में 2024 में कुल 85,119 भारतीय पकड़े गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इस बार एक नया ट्रेंड भी सामने आया है। अमेरिका में एंट्री करते पकड़े गए सभी भारतीय सिंगल एंटिटी यानी अकेले ही थे। कोई भी भारतीय परिवार के साथ नहीं पकड़ा गया। जबकि 2024 में पकड़े गए भारतीयों में से करीब 20 हजार भाई, पत्नी या बच्चों के साथ अमेरिका में अवैध रूप से एंट्री कर रहे थे। वहीं अमेरिका में कनाडा और मैक्सिको बॉर्डर के बजाय अब तुर्किये-दुबई रूट से अवैध एंट्री के मामले सामने आ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:55:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दावा&#45; कनाडा के दुश्मनों से मिले अमेरिकी अधिकारी:अल्बर्टा को आजाद देश बनाने की कोशिश में अलगाववादी; PM कार्नी बोले&#45; आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में एक नया विवाद शुरू हो गया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारियों ने कनाडा के अल्बर्टा प्रांत को अलग देश बनाने की मांग कर रहे अलगाववादी समूह के नेताओं से मुलाकात की। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल से अब तक अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी तीन बार अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिले। ये नेता अल्बर्टा को कनाडा से अलग कर एक स्वतंत्र देश बनाने की वकालत कर रहे हैं। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा। कार्नी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। जनमत संग्रह की मांग कर रहे अलगाववादी कनाडा से आजादी की मांग कर रहे इस समूह का नाम अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट (APP) है। यह संगठन अल्बर्टा की आजादी के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की मांग कर रहा है। APP के नेता और को-फाउंडर जेफ्री रथ ने अल्बर्टा की आजादी के लिए अमेरिका से 500 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। उन्होंने 23 जनवरी को X पर पोस्ट कर बताया कि वे अगले महीने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान अमेरिका से इस रकम को कर्ज के तौर पर मांगा जाएगा। BBC से बातचीत में जेफ्री ने बताया कि अल्बर्टा के आजाद होने पर इस पैसे का इस्तेमाल किया जाएगा। कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है अल्बर्टा अल्बर्टा पश्चिमी कनाडा का तेल-समृद्ध प्रांत है। इसकी आबादी करीब 50 लाख है।CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यहां कनाडा के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है। यह प्रांत लंबे समय से खुद को एनर्जी प्रांत” के रूप में देखता रहा है। अलगाववादियों का कहना है कि कनाडा सरकार की जलवायु नीतियां अल्बर्टा के तेल उद्योग को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका आरोप है कि अल्बर्टा से सरकार को भारी टैक्स मिलता है, जबकि बदले में राज्य को कम आर्थिक सहायता मिलती है। रिपोर्च के मुताबिक अल्बर्टा में लोग परंपरावादी है, जबकि कनाडा के दूसरे राज्यों में उदार आबादी ज्यादा है। इससे उनकी रूढ़िवादी आवाज दब जाती है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट माइकल सोलबर्ग के मुताबिक, अल्बर्टा में अलग होने की मांग कनाडा के गठन के समय से ही है, लेकिन जब सरकार के फैसले सीधे अल्बर्टा की जीवनशैली पर असर डालते हैं, तब यह ज्यादा तेज हो जाती है। ट्रम्प की वापसी से अलगाववादियों को बढ़ावा मिला CNN की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी हाल में कहा था कि अल्बर्टा अमेरिका का नेचुरल पार्टनर है और वहां के लोग बहुत स्वतंत्र सोच वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अल्बर्टा के पास प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है और अमेरिका एक स्वतंत्र अल्बर्टा के साथ काम कर सकता है। क्या कनाडा से अलग हो सकता है अल्बर्टा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अल्बर्टा में इस साल जनमत संग्रह कराए जाने की संभावना बढ़ गई है। इससे पहले कनाडा में सिर्फ क्यूबेक ने अलग होने के जनमत संग्रह कराया था, जो नाकाम रहा। जनमत को लेकर हुए सर्वे बताते हैं कि अल्बर्टा की आजादी के समर्थन में अभी भी अल्पसंख्यक ही हैं। जनवरी में हुए एक सर्वे में केवल 19% लोगों ने अलगाव का समर्थन किया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनमें से कई लोग सिर्फ सरकार को संदेश देने के लिए रेफरेंडम चाहते हैं। इसके अलावा, अलगाव के विरोध में भी एक नागरिक याचिका लाई गई है, जिस पर 4 लाख से ज्यादा लोग साइन कर चुके हैं आदिवासी समुदाय भी अल्बर्टा को अलग करने के खिलाफ है, क्योंकि उनके कनाडा सरकार के साथ हुए समझौते अल्बर्टा प्रांत के बनने से भी पुराने हैं। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा है कि वह अलगाव का समर्थन नहीं करतीं, लेकिन ऐसे लोगों की शिकायतों को जायज मानती हैं। क्यूबेक ने दो बार कनाडा से अलग होने की कोशिश की कनाडा में जब भी किसी प्रांत के अलग होने की चर्चा होती है, तो सबसे पहले क्यूबेक का उदाहरण दिया जाता है। फ्रेंच-भाषी प्रांत क्यूबेक में कनाडा से अलग होने के लिए अब तक दो बार जनमत संग्रह हो चुका है। दोनों ही मौकों पर जनता ने अलगाव के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। क्यूबेक में पहला जनमत संग्रह 20 मई 1980 को हुआ था। उस समय सवाल यह था कि क्या क्यूबेक को कनाडा के भीतर रहते हुए ज्यादा संप्रभुता दी जानी चाहिए। इस प्रस्ताव को करीब 60% मतदाताओं ने नकार दिया, जबकि लगभग 40% ने समर्थन किया। इसके बाद 30 अक्टूबर 1995 को दूसरी बार जनमत संग्रह कराया गया। इस बार सवाल सीधा था कि क्या क्यूबेक को कनाडा से अलग होकर एक संप्रभु देश बन जाना चाहिए। यह जनमत संग्रह कनाडा के इतिहास का सबसे करीबी माना जाता है। 1995 में 50.58% लोगों ने अलगाव के खिलाफ और 49.42% ने समर्थन में वोट दिया। यानी फर्क 1% से भी कम रहा और केवल करीब 54 हजार वोटों से कनाडा टूटने से बचा। इस नतीजे के बाद कनाडा सरकार ने अलगाव की प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी प्रांत एकतरफा तरीके से देश से अलग नहीं हो सकता। इसके लिए स्पष्ट सवाल, स्पष्ट बहुमत और संघीय सरकार से बातचीत जरूरी होगी। इसके बाद वर्ष 2000 में क्लेरिटी एक्ट लागू किया गया, जिससे भविष्य में किसी भी प्रांत के अलगाव की प्रक्रिया को कानूनी दायरे में बांधा गया। क्यूबेक में अलगाव आंदोलन अब पहले जितना मजबूत नहीं रहा, लेकिन यह मुद्दा पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है। यही वजह है कि जब भी अल्बर्टा जैसे प्रांतों में अलगाव की बात उठती है, क्यूबेक में हुए इन दो जनमत संग्रहों को मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। 160 साल पहले 4 प्रांतों से बना कनाडा आज जिस कनाडा को दुनिया एक मजबूत और स्थिर देश के रूप में जानती है, वह शुरू से एकजुट नहीं था। ब्रिटिश शासन के दौर में अलग-अलग उपनिवेशों को जोड़कर 19वीं सदी में कनाडा का गठन किया गया। यह गठन समझौतों और संघीय व्यवस्था के जरिए हुआ। 1 जुलाई 1867 को ब्रिटिश नॉर्थ अमेरिका एक्ट के तहत कनाडा का गठन हुआ। शुरुआत में चार प्रांत ओंटारियो, क्यूबेक, नोवा स्कोटिया और न्यू ब्रंसविक शामिल हुए। इसी दिन को कनाडा डे के तौर पर मनाया जाता है। 1867 के बाद दूसरे प्रांत और इलाके भी जुड़ते गए। 1949 में न्यूफाउंडलैंड आखिरी प्रांत बना। आज कनाडा में 10 प्रांत और 3 क्षेत्र हैं। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:55:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>न्यूजीलैंड में पंजाबियों की पुलिस में भर्ती पर विरोध:लेफ्ट विंग बोला&#45; कीवी बनो या देश छोड़ो, 2 बार नगर कीर्तन रोक चुके</title>
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<description><![CDATA[ सिखों का नगर कीर्तन रोके जाने के बाद अब न्यूजीलैंड पुलिस में पंजाबियों की भर्ती का विरोध शुरू हो गया है। मैनीकॉ पुलिस स्टेशन में हुए भर्ती सेमिनार का स्थानीय डेस्टिनी चर्च के ब्रायन टमाकी ने न्यूजीलैंड में भारतीय खासकर पंजाबियों की बढ़ रही संख्या के खिलाफ आज (31 जनवरी) को प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। ब्रायन टमाकी और उनके संगठन द फ्रीडम एंड राइट्स कोएलिशन का कहना है कि यह प्रदर्शन बेतहाशा इमिग्रेशन के खिलाफ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने न्यूजीलैंड को न्यूजीलैंड ही रहने दें, घुल-मिल जाएं या छोड़ दें का नारा दिया है। हालांकि पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने सुरक्षा कारणों से पुल पर मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन टमाकी और उनके समर्थक प्रदर्शन पर अड़े हुए हैं। पुलिस के रोकने के बाद प्रदर्शनकारी एक हार्बर ब्रिज के नीचे एकत्रित हुए और नारेबाजी की। नौकरी को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ… न्यूजीलैंड में FTA का भी विरोध शुरू 
न्यूजीलैंड और भारत सरकार के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का भी टमाकी ग्रुप ने विरोध शुरू कर दिया है। इसके साथ न्यूजीलैंड फर्स्ट और वहां के राइट विंग इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध का कारण प्रवासियों, विशेषकर भारतीयों की बढ़ती संख्या है। हाल ही में सिख नगर कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने और कीवी लाइफस्टाइल अपनाने या देश छोड़ने जैसी धमकियां इंडियन को मिल रही हैं। जानें विरोध के 5 प्रमुख कारण राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहा टमाकी
डेस्टिनी चर्च का फाउंडर ब्रायन टमाकी न्यूजीलैंड का आकलैंड में लोगों को राष्ट्रवाद के नाम पर भड़का रहा है। इससे पहले वह सिखों के नगर कीर्तन को दो बार रोक चुका है और हाका कर चुका है। अब विवादित नेता ब्रायन टमाकी और द फ्रीडम एंड राइट्स कोएलिशन के साथ न्यूजीलैंड सरकार को खुली चुनौती दे रहा है। वह 31 जनवरी 2026 को ऑकलैंड हार्बर ब्रिज पर प्रदर्शन करने पहुंचा, लेकिन पुलिस ने रोक दिया है। इसके बाद प्रदर्शकारी पुल के नीचे एकत्रित हुए और न्यूजीलैंड में भारतीयों खासकर पंजाबियों की बेताहाशा इमिग्रेशन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान टमाकी ने कहा कि आज के दिन का सबसे खास पल वह था जब हमारा सामना पुलिस की घेराबंदी से हुआ। मैं साफ कर दूं कि मोर्चे पर तैनात पुलिसकर्मी समस्या नहीं हैं, वे तो बस दबाव और कठिन हालात में अपना काम कर रहे हैं, जबकि असली दिक्कत ऊपर बैठे भ्रष्ट नेतृत्व की है। हमने शांति और प्रार्थना का रास्ता चुना। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:55:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका में जन्मे बच्चों को ₹92 हजार देगी सरकार:निवेश में बैंक&#45;टेक कंपनियां भी शामिल; 18 साल के होने पर पढ़ाई&#45;बिजनेस में इस्तेमाल कर सकेंगे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को सरकार की ओर से 1,000 डॉलर (92 हजार रुपए) दिए जाएंगे। यह रकम बच्चों के नाम से खोले जाने वाले एक स्पेशल अकाउंट में जमा की जाएगी। यह योजना पिछले साल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरू की थी। अब इसे अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों का समर्थन मिलने लगा है। इस योजना को ‘ट्रम्प अकाउंट’ कहा जाता है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह एक टैक्स-फ्री सेविंग अकाउंट होगा, जिसमें सरकार बच्चों के भविष्य के लिए शुरुआती निवेश करेगी। इस खाते में जमा रकम शेयर बाजार में निवेश की जाएगी ताकि समय के साथ यह बढ़ सके। इस योजना का लाभ उन बच्चों को मिलेगा जो 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2028 के बीच अमेरिका में पैदा होंगे। इसका मकसद बच्चों को जन्म से ही वित्तीय शुरुआत देना और लंबे समय तक निवेश के जरिए धन बढ़ाना है। ताकि वे 18 साल की उम्र में पढ़ाई, बिजनेस शुरू करने, घर खरीदने या अन्य जरूरतों के लिए फंड का इस्तेमाल कर सकें। अब कई बड़ी कंपनियां भी इस योजना में आगे आ रही हैं। बैंक ऑफ अमेरिका और जेपी मॉर्गन चेस ने घोषणा की है कि वे अपने कर्मचारियों के बच्चों के ट्रम्प अकाउंट में सरकार की तरह 1,000 डॉलर की बराबर राशि जमा करेंगे। ट्रम्प बोले- हमारी सरकार हर बच्चे को आर्थिक आजादी दे रही है ट्रम्प ने कहा, &quot;हर राष्ट्रपति ने हमारी अगली पीढ़ी को सिर्फ कर्ज दिया है, लेकिन हमारी सरकार हर बच्चे को असली संपत्ति और आर्थिक आजादी का मौका देगी।&quot; उन्होंने नियोक्ताओं से अपील की कि वे अपने कर्मचारियों के लिए ट्रम्प अकाउंट में योगदान दें। 92 हजार केवल ट्रम्प प्रशासन के दौरान जन्मे बच्चों को मिलेगा। बच्चे के माता-पिता की इमिग्रेशन स्थिति कोई मायने नहीं रखती, कोई भी पैरेंट अकाउंट खोल सकता है। बड़े बच्चों के लिए अकाउंट खोला जा सकता है, लेकिन उन्हें राशि नहीं मिलेगा। समर्थक बोले- इससे गरीब बच्चों को भी अमेरिका की संपत्ति का हिस्सा मिलेगा समर्थकों का कहना है कि इससे ज्यादा लोग स्टॉक मार्केट से जुड़ेंगे और गरीबी में जन्मे बच्चों को भी अमेरिका की संपत्ति का हिस्सा मिलेगा। यह पूंजीवाद को बढ़ावा देगा, खासकर जब समाजवादी विचार बढ़ रहे हैं। निवेशक ब्रैड गर्स्टनर ने कहा, &#039;सोशलिज्म का जवाब पूंजीवाद है, इससे हर बच्चा जन्म से ही कैपिटलिस्ट बन जाता है।&quot; 2022 में केवल 58% अमेरिकी घरों के पास स्टॉक या बॉन्ड थे और सबसे अमीर 1% के पास आधे से ज्यादा मूल्य था। इससे पहले कैलिफोर्निया, कनेक्टिकट और वॉशिंगटन डीसी जैसे जगहों पर &#039;बेबी बॉन्ड्स&#039; जैसे कार्यक्रम चल रहे थे, लेकिन वे सिर्फ गरीब या फोस्टर केयर बच्चों के लिए थे।&#039; आलोचक बोले- इससे अमीरों को फायदा, गरीबों को नुकसान आलोचकों का कहना है कि यह कार्यक्रम शुरुआती सालों में बच्चों की मदद नहीं करता, जब वे सबसे ज्यादा गरीबी और कमजोरी में होते हैं। ट्रम्प टैक्स बिल में ही फूड असिस्टेंस और मेडिकेड जैसी योजनाओं में कटौती की गई है। अमीर परिवार ज्यादा योगदान देकर ज्यादा फायदा उठाएंगे, जबकि गरीब परिवार कम योगदान दे पाएंगे और कम लाभान्वित होंगे। 92 हजार के सरकारी धन पर 7% सालाना रिटर्न मानें तो 18 साल बाद यह लगभग 3,10,960 रुपये हो जाएगा। सरकार के बराबर राशि कर्मचारियों के बच्चों के देंगी कंपनियां जेपी मॉर्गन चेस के CEO जेमी डाइमोन ने कहा कि उनकी कंपनी लंबे समय से अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए काम करती रही है। उन्होंने कहा कि इस योगदान से कर्मचारियों को जल्दी बचत शुरू करने और अपने परिवार के भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी। बैंक ऑफ अमेरिका ने भी कहा है कि वह सरकार के 1,000 डॉलर के योगदान के बराबर राशि अपने योग्य कर्मचारियों के बच्चों के खातों में डालेगा। इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों को यह सुविधा देगा। कई कंपनियां भी इस पहल में शामिल हो रही हैं। इंटेल ने कहा है कि वह भी अपने कर्मचारियों के बच्चों के खातों में सरकार के बराबर राशि जमा करेगा। वीजा ने घोषणा की है कि वह अपने क्रेडिट कार्ड धारकों को उनके रिवॉर्ड पॉइंट्स के जरिए ट्रम्प अकाउंट में पैसा जमा करने की इजाजत देगा। इसके अलावा, टर्निंग पॉइंट USA संगठन की CEO एरिका किर्क ने कहा है कि उनका संगठन भी अपने कर्मचारियों के नवजात बच्चों के लिए सरकार के 1,000 डॉलर के योगदान के बराबर राशि देगा। बच्चे के 18 साल पूरे होने पर पैसे निकाले जा सकेंगे दिसंबर में टेक्नोलॉजी इंटरप्रेन्योर माइकल डेल और उनकी पत्नी सुसन डेल ने घोषणा की थी कि वे 2.5 करोड़ अमेरिकी बच्चों के ट्रम्प अकाउंट में 250 डॉलर प्रति बच्चे के हिसाब से डोनेट करेंगे, जिसकी कुल राशि 6.25 अरब डॉलर होगी। चार्ल्स श्वाब, ब्लैकरॉक, BNY और चार्टर कम्युनिकेशंस जैसी कंपनियों ने भी पहले ही इस योजना के समर्थन का ऐलान कर दिया है। बुधवार को ट्रेजरी डिपार्टमेंट के एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ट्रम्प ने अन्य अमेरिकी कंपनियों से भी अपील की कि वे अपने कर्मचारियों के ट्रम्प अकाउंट में योगदान करें। उन्होंने कहा कि यह योजना लोगों को घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट और अन्य जरूरतों के लिए बचत करने में मदद करेगी। ट्रम्प प्रशासन के मुताबिक, 4 जुलाई से परिवार ट्रम्प अकाउंट में पैसा जमा करना शुरू कर सकेंगे। सरकार की 1,000 डॉलर की राशि के अलावा, हर साल एक बच्चे के खाते में अधिकतम 5,000 डॉलर तक जमा किए जा सकेंगे। आमतौर पर बच्चे के 18 साल का होने से पहले इस खाते से पैसा नहीं निकाला जा सकेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:17:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ग्रीनलैंड पर ट्रम्प की धमकी का डेनमार्क PM को फायदा:अमेरिकी राष्ट्रपति को चैलेंज किया था, अब सर्वे में पार्टी को 9 सीटों का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच विवाद का फायदा डेनिश पीएम मेट फ्रेडरिक्सन को मिला है। अमेरिकी वेबसाइट द पोलिटिको ने लिखा है कि फ्रेडरिक्सन को राष्ट्रपति ट्रम्प को शुक्रिया कहना चाहिए क्योंकि उन्होंने उन्हें गहराते राजनीतिक संकट से बाहर निकाल लिया है। फ्रेडरिकसन की पार्टी के पॉपुलैरिटी में काफी उछाल आया है। सर्वे में सोशल डेमोक्रेट्स को सिर्फ 32 सीटें मिलती दिख रही थीं। यानी एक ही महीने में पार्टी की स्थिति में करीब 9 सीटों का उछाल आया है। पिछले साल नवंबर 2025 में सोशल डेमोक्रेट पार्टी लोकल चुनाव हार गई थी। सबसे बड़ा झटका कोपेनहेगन में लगा, जहां पार्टी ने 100 साल में पहली बार सत्ता गंवा दी। स्थिति तब बदलनी शुरू हुई, जब ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क से छीनकर अपने में मिलाने की धमकी दी। इसके जवाब में डेनमार्क की प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन ने खुलकर देश की संप्रभुता का बचाव किया। गठबंधन की सरकार चला रहीं फ्रेडरिक्सन डेनमार्क में संसद में कुल 179 सीटें हैं, इनमें से प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन की सोशल डेमोक्रेट्स के पास 50 सीटें हैं। सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट पार्टी इस समय देश में गठबंधन सरकार चला रही है। इस गठबंधन में दो सेंटर-राइट पार्टियां मॉर्डरेटर्स और वेनस्टर भी शामिल हैं। मेगाफॉन नाम की एक डेनिश कंसल्टेंसी के सर्वे में सोशल डेमोक्रेट पार्टी को 22.7% वोट और संसद की 41 सीटें मिलीं। यह सर्वे 20 से 22 जनवरी के बीच किया गया। दिसंबर में हुए सर्वे में फ्रेडरिकसन की पार्टी को सिर्फ 32 सीटें मिलती दिखाई गई थीं। ताजा सर्वे दिखाते हैं कि 41 सीटों के साथ भी वे संसद की सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेंगी। इससे वे फिर से गठबंधन सरकार बनाने की बातचीत में सबसे मजबूत स्थिति में आ जाएंगी, हालांकि सत्ता में बने रहने के लिए उन्हें सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ेगा। 100 साल में पहली बार राजधानी में हारी पार्टी समर्थन में आई यह बढ़त इसलिए और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि नवंबर में हुए नगर निगम चुनावों में सोशल डेमोक्रेट्स को करारी हार मिली थी। इस चुनाव में पार्टी ने कोपेनहेगन गंवा दिया था, जो बेहद अहम सीट थी और जिसे पार्टी ने पिछले 100 सालों में कभी नहीं खोया था। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन के नेतृत्व वाली मॉडरेट्स पार्टी ने इस सर्वे में अपना वोट शेयर लगभग तीन गुना कर लिया। पार्टी का वोट 2.2% से बढ़कर 6.4% हो गया। यह करीब 12 सीटों के बराबर है। वहीं एक और एजेंसी वॉक्समीटर के सोमवार को जारी सर्वे में फ्रेडरिकसन की कैबिनेट को 40.9% समर्थन मिला, जो दो साल में सबसे ऊंचा स्तर है। अगर आज चुनाव होते हैं तो गठबंधन के 73 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी, बाद में पलटे जनवरी की शुरुआत में ट्रम्प ने कहा था कि वे किसी भी तरीके से ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका है। ट्रम्प इस पर कब्जा करने की धमकी पहले भी दी जाती रही थी, लेकिन वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद यह और गंभीर लगने लगी। 2019 से सत्ता में रहीं फ्रेडरिकसन ने ग्रीनलैंड के लिए जोरदार तरीके से कूटनीतिक बचाव किया और इस मामले पर पूरे यूरोपीय देशों को एकजुट किया। ट्रम्प को कहना पड़ा कि वे ग्रीनलैंड पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेंगे। इसका फायदा यह हुआ कि डेनमार्क के लोग PM के साथ खड़े हो गए हैं। यूरोप से जुड़े पॉलिटिकल मामलों की एक्सपर्ट ऐन रासमुसेन ने पोलिटिको से कहा- आखिरी बार डेनमार्क में सरकार के साथ इतनी एकजुटता कोविड महामारी के दौरान देखने को मिली थी। राष्ट्रीय संकट अक्सर ऐसा होता है। लोग सत्ता में बैठी सरकार के समर्थक बन जाते हैं। पीएम को मिल सकता है चुनावी फायदा डेनमार्क के चुनावी कानून के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से पहले देश में चुनाव कराना जरूरी है। अब माना जा रहा है कि फ्रेडरिकसन अपनी राजनीतिक बढ़त को भुनाने के लिए जल्दी चुनाव कराएंगी। फ्रेडरिकसन पहले भी जल्दी चुनाव का जोखिम उठा चुकी हैं। 2022 में गिरते समर्थन के बीच उन्होंने अचानक चुनाव कराए थे और जीत हासिल की थी। रासमुसेन ने कहा कि देश में कुछ ही महीने बाद चुनाव हो जाएंगे, इसकी संभावना ज्यादा है। जानवर को मारने का आदेश, लोगों की नजर में बुरी बनीं PM फ्रेडरिकसन एक प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। हालांकि कई गलत फैसले लेने की वजह से देश में उनकी लोकप्रियता में जबरदस्त गिरावट आई। जैसे कोरोना फैलने से रोकने के लिए उन्होंने 1.7 करोड़ फर वाले जानवर (मिंक) को मारने का आदेश दिया था। दरअसल तब वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि मिंक की वजह से देशभर में कोरोना फैल सकता है। हालांकि कुछ दिन बाद कोर्ट ने इसे गलत बताया। मिंक की महंगी खाल से किसानों को फायदा होता था, जिससे करोड़ों का फर बिजनेस चलता था और हजारों लोगों की रोजी जुड़ी हुई थी। 1.7 करोड़ मिंक के मार दिए जाने से पीएम की लोकप्रियता में जबरदस्त गिरावट आई। 2020 में यूगॉव सर्वे में फ्रेडरिकसन की लोकप्रियता 79% से गिरकर सिर्फ 34% रह गई थी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में वामपंथी पार्टियां फायदे में रिपोर्ट के मुताबिक यह रुझान सिर्फ डेनमार्क तक सीमित नहीं है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी जहां-जहां नेताओं ने ट्रम्प का खुलकर विरोध किया है, वहां उन्हें चुनावी फायदा मिला है। कनाडा में कंजरवेटिव पार्टी चुनाव जीतती हुई दिख रही थी। तमाम सर्वे में पियरे पोइलिव्रे को अगला पीएम माना जा रहा था। लेकिन तभी अमेरिका में ट्रम्प दोबारा चुनाव जीत गए। उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी दी। इसका फायदा यह हुआ कि लिबरल पार्टी को चुनाव में जीत मिल गई और मार्क कार्नी पीएम बन गए। जबकि कुछ महीने पहले तक लिबरल पार्टी की स्थिति बहुत खराब थी। जस्टिन ट्रूडो को पीएम पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। दरअसल कंजरवेटिव पार्टी को ट्रम्प के करीब माना जाने लगा और यह धारणा बनी कि वे अमेरिका के सामने सख्ती नहीं दिखा पाएंगे। दूसरी ओर, लिबरल पार्टी ने खुद को कनाडा की आजादी और आत्मसम्मान की रक्षा करने वाली पार्टी के रूप में पेश किया। ऑस्ट्रेलिया में भी एक समय ऐसा लग रहा था कि कंजरवेटिव (राइट-विंग) पार्टियां चुनाव में बढ़त बनाए हुए हैं और मौजूदा सरकार मुश्किल में है। लेकिन अब कई सर्वे में एंथनी अल्बनीज की पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। ------------ यह खबर भी पढ़ें… NATO बोला-अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता:यूरोपीय नेता बस सपने देख रहे, अगर अकेले चलना है तो डिफेंस बजट बढ़ाएं NATO के महासचिव मार्क रुट ने सोमवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:17:58 +0530</pubDate>
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<title>जॉब के लिए जिस्म की मांग, कनाडा में पंजाबी गिरफ्तार:फर्जी कंपनी में आसान नौकरी की एड, सिर्फ लड़कियों की डिमांड; टैक्सी में सुनसान जगह ले जाता</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में पुलिस ने एक पंजाबी व्यक्ति को नौकरी के बहाने लड़कियों के यौन शोषण के केस में अरेस्ट किया है। वह फर्जी कंपनी मालिक या रिक्रूटर (भर्ती करने वाला) बनता था। फिर कनाडा के लोकप्रिय क्लासिफाइड पोर्टल Kijiji जैसे प्लेटफॉर्म पर इजी जॉब के विज्ञापन देता। जिसमें सिर्फ लड़कियों की डिमांड की जाती। जब लड़कियां उससे कॉन्टैक्ट कर मिलने आती तो उन्हें सुनसान जगह पर ले जाकर जबरदस्ती करता था। आरोपी तेजिंदर धालीवाल (47) की इन करतूतों का खुलासा तब हुआ, जब 2 लड़कियां पुलिस तक पहुंच गईं। जिसमें एक लड़की ने यहां तक कहा कि तेजिंदर ने जॉब के बदले उससे शारीरिक संबंध बनाने को कहा। उसने कई लड़कियों को अपना शिकार बनाया। यही वजह है कि जब पुलिस ने उसे 26 जनवरी को अरेस्ट किया तो उसकी फोटो भी जारी कर दी कि अगर कोई और लड़की उसके झांसे में आई है तो इसके बारे में पुलिस को सूचना दें। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसके लड़कियों को फंसाने के लिए की जाने वाली चालाकी की पूरी कहानी सामने आ गई। आरोपी कैसे लड़कियों को फंसाता, कैसे मिलने बुलाता, सुनसान जगह पर ले जाकर क्या करता, पढ़ें पूरी रिपोर्ट... तेजिंदर ने लड़कियों को कैसे फंसाया, 3 पॉइंट में जानें.. 2 लड़कियों की आपबीती से हुआ खुलासा गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद जमानत मिल गई
ब्रैम्पटन पुलिस ने बताया कि लंबी जांच और सुराग जुटाने के बाद 26 जनवरी 2026 को पुलिस ने तेजिंदर धालीवाल को ब्रैम्पटन से गिरफ्तार कर लिया। उस पर यौन शोषण और नौकरी के बदले यौन सेवा की मांग जैसी धाराएं लगाई गईं। कनाडा में यौन शोषण का कानून कमजोर होने के चलते तेजिंदर को 27 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई के तुरंत बाद जमानत मिल गई। कैनेडियन कम्युनिटी में जमानत पर गुस्सा
महज 24 घंटे के भीतर तेजिंदर की गिरफ्तारी और फिर कोर्ट से जमानत मिलने को लेकर कनाडा की लोकल कम्युनिटी में गुस्सा है। उनका कहना है कि यौन शोषण गंभीर अपराध है। इस मामले में प्रवासियों के लिए कनाडा सरकार को सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि वह इतनी आसानी से न छूट सकें। कनाडा पुलिस का बयान... इस मामले में हॉल्टन पुलिस की 2 अहम बातें.. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:17:58 +0530</pubDate>
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<title>अल्बानिया&#45; भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनीं AI मंत्री पर शक:बनाने वाली एजेंसी के दो अफसर हाउस अरेस्ट; सरकारी ठेकों के बदले रिश्वत लेने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ अल्बानिया ने साल 2025 में दुनिया की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री &#039;डिएला&#039; बनाया था, जिसका मकसद देश में फैली भ्रष्टाचार को कम करना था। हालांकि अब एक बड़ा विवाद सामने आया है डिएला को बनाने वाली नेशनल इंफॉर्मेशन एजेंसी (AKSHI) के दो प्रमुख अधिकारी खुद भ्रष्टाचार के आरोप में फंस गए हैं। नेशनल इंफॉर्मेशन एजेंसी की डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर को हाउस अरेस्ट किया गया है। उन्हें ठेकों में धमकी देकर हेरफेर करने, रिश्वत लेने और क्रिमिनल संगठन से जुड़े होने का आरोप है। यह वही एजेंसी है जो सरकार की डिजिटल व्यवस्था संभालती है। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी तक इन अधिकारियों पर औपचारिक रूप से कोई आरोप तय नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री रामा ने कहा कि वे जांच पूरी होने तक कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। अल्बानिया यूरोपीय यूनियन में शामिल होने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जरूरी शर्त है। भ्रष्टाचार के आरोप के बाद सवाल उठने लगे है कि क्या AI को कुछ सबूत छिपाने या हेरफेर करने के लिए डिएला को प्रोग्राम किया जा सकता है। डिएला बोलीं- मैं इंसान नहीं, मेरा कोई स्वार्थ नहीं डिएला एक वर्चुअल अवतार है, जो पारंपरिक अल्बानियाई पोशाक में दिखाई देती है। पिछले साल से डिएला कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में बोल चुकी है और दुनिया भर में AI को सरकारी कामों में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सितंबर में अल्बानिया की संसद में वीडियो के जरिए डिएला ने कहा था कि वह इंसान नहीं है, इसलिए उसके पास कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या स्वार्थ नहीं है। सिर्फ डेटा, ज्ञान और एल्गोरिदम हैं, जो नागरिकों की निष्पक्ष सेवा के लिए समर्पित हैं। उसने कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर उसे दुख हुआ है। सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में लोगों की मदद करती है वर्चुअल अवतार डिएला डिएला नागरिकों को ऑनलाइन सरकारी सेवाएं दिलाने में मदद करती है, जैसे दस्तावेज जारी करना या अपॉइंटमेंट बुक करना। इससे पहले अधिकारियों को रिश्वत देकर काम करवाना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया खत्म हो रही है। जल्द ही डिएला सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के आवेदनों की जांच करेगी और डेटा के आधार पर तय करेगी कि कौन सा बोलीदाता सबसे योग्य है। इसका काम ऑडिट किया जा सकता है। प्रधानमंत्री रामा ने इसे दीएला (रोशनी) नाम दिया है, ताकि सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता आए। रामा ने कहा कि अल्बानिया &#039;दो भाइयों का देश&#039; है, जहां निष्पक्ष संबंध बनाना मुश्किल है। EU को दिखाने के लिए डिएला का इस्तेमाल कर रही अल्बानिया सरकार यह यूनिट पूर्व राष्ट्रपति, तिराना के मेयर और उप-प्रधानमंत्री बेलिंडा बालुकु (रामा के करीबी) पर भी जांच कर रही है। बालुकु पर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में फंड का गलत इस्तेमाल का आरोप है और विपक्ष उनकी संसदीय इम्युनिटी हटाने की मांग कर रहा है। रामा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया। भ्रष्टाचार के आरोपों से विरोध बढ़ा है और पिछले महीने प्रदर्शनकारियों ने पैट्रोल बम से हमला किया और सरकार के इस्तीफे की मांग की। रामा ने यूनिट का समर्थन किया, लेकिन कहा कि प्री-ट्रायल डिटेंशन की दर यूरोप में सबसे ज्यादा है, इसलिए संस्था को स्वतंत्र और पेशेवर रहना चाहिए। यूनिट के आंकड़ों के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामले डिटेंशन में सिर्फ छोटा हिस्सा हैं। डिएला ने भ्रष्टाचार कितना कम किया, यह मापना मुश्किल है क्योंकि यह रोकथाम पर काम करती है, पता लगाने पर नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रामा के लिए EU को दिखाने का तरीका है कि वे भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं। AI मंत्री डिएला प्रेग्नेंट, 83 बच्चे होने वाले हैं पीएम रामा ने बीते साल अक्टूबर में एक अनोखी और रोचक घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि दुनिया की पहली AI मंत्री डिएला अब प्रेग्नेंट है। उनके 83 बच्चे होने वाले हैं। ये बच्चे वास्तव में डिजिटल असिस्टेंट होंगे, जो अल्बानिया की संसद में सत्तारूढ़ सोशलिस्ट पार्टी के 83 सांसदों की मदद करेंगे। रामा ने यह बात बर्लिन में ग्लोबल डायलॉग फोरम में कही थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, &quot;पहली बार डिएला गर्भवती हैं और उनके 83 बच्चे हैं।&quot; ये 83 AI असिस्टेंट संसद की बैठकों में हिस्सा लेंगे, वहां होने वाली हर चर्चा और घटना का रिकॉर्ड रखेंगे। सांसदों को सूचित करेंगे अगर वे किसी सत्र में अनुपस्थित रहें और जरूरत पड़ने पर सुझाव देंगे कि किसी मुद्दे पर कैसे जवाब देना चाहिए या किसकी आलोचना करनी चाहिए। उदाहरण देते हुए रामा ने कहा, &quot;अगर आप कॉफी पीने चले गए और काम पर वापस लौटना भूल गए, तो यह बच्चा आपको बताएगा कि जब आप हॉल में नहीं थे तब क्या कहा गया और आपको किस पर काउंटर-अटैक करना चाहिए।&quot; यह पूरा सिस्टम 2026 के अंत तक पूरी तरह से ऑपरेशनल हो जाएगा। यह अभी विकास के चरण में है। यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश कर रहा अल्बानिया अल्बानिया लंबे समय से भ्रष्टाचार की समस्या से जूझ रहा है। यूरोपीय संघ की कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अल्बानिया में भ्रष्टाचार सिर्फ निचले स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च स्तर तक फैला है। इसमें राजनेता, मंत्री और बड़े अधिकारी शामिल रहे हैं। EU बार-बार कह चुका है कि अगर अल्बानिया 2030 तक EU का सदस्य बनना चाहता है, तो उसे भ्रष्टाचार खत्म करने और न्यायपालिका को मजबूत करने पर तुरंत और ठोस कदम उठाने होंगे। यही वजह है कि रामा सरकार अब AI जैसे नए प्रयोग कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखा सके कि वे सुधारों के लिए गंभीर हैं। प्रधानमंत्री रामा ने मई 2025 में ऐतिहासिक चौथी बार जनादेश हासिल किया था, जिसके बाद उन्होंने वादा किया कि अल्बानिया 2030 तक यूरोपीय संघ का हिस्सा बनेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:01:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ब्रिटिश PM 8 साल बाद चीन पहुंचे:कोरोनाकाल में चीनी कंपनी हुआवे को निकाला था, अब बोले&#45; अमेरिका अपनी जगह, लेकिन चीन जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर बुधवार को 8 साल बाद तीन दिन के दौरे पर चीन पहुंचे। इससे पहले 2018 में तत्कालीन ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे चीन पहुंची थी। पिछले 8 सालों में ग्लोबल राजनीति काफी बदल चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रमक नीतियों और बयानों की वजह से यूरोपीय देश नए पार्टनर तलाश रहे हैं, ऐसे में चीन उन्हें एक मजबूत विकल्प नजर आ रहा है। चीन रवाना होने से पहले स्टार्मर ने मीडिया से कहा था कि ब्रिटेन को अमेरिका और चीन में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। अमेरिका के साथ रिश्ते बने रहेंगे, लेकिन चीन को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ेगा और रिश्तों में स्थिरता आएगी। ब्रिटेन भले ही आज चीन को जरूरी देश बता रहा है, लेकिन 2020 में कोरोना के वक्त ही उसने चीनी टेक कंपनी हुआवे को जासूसी के शक में अपने देश से निकाल दिया था। ब्रिटिश पीएम के चीन दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें… ब्रिटेन ने चीनी कंपनी को 5G प्रोजेक्ट से निकाला था ब्रिटिश सरकार ने 2010 में चीनी कंपनी हुआवे को देश में मोबाइल नेटवर्क पर काम करने की इजाजत दी। उसी समय हुआवे के ऑफिस में &#039;द सेल&#039; नाम का एक खास दफ्तर बनाया गया, जिसके जरिए सरकार कंपनी के काम पर नजर रखती थी। इसे कई सालों तक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम माना गया। इस दफ्तर में ब्रिटेन के साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स काम करते थे। हुआवे के खर्च पर वे उसके हर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की जांच करते थे, ताकि कोई ऐसा कोड न हो जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सके। फिर भी ब्रिटेन की सरकार को इस सिस्टम से पूरी तरह भरोसा नहीं हुआ। करीब 10 साल तक हुआवे को काम करने देने के बाद, सरकार ने साल 2020 में फैसला किया कि उसे ब्रिटेन के 5जी नेटवर्क से बाहर कर दिया जाएगा। उसी साल संसद की एक जांच में कहा गया कि हुआवे और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच मिलीभगत के साफ सबूत हैं। जो 5G इक्विपमेंट पहले से लगे हैं, उन्हें हटाना होगा। अब &#039;द सेल&#039; इस बात की मिसाल बन गया है कि चीन के साथ रिश्तों में ब्रिटेन को कितनी मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। एक तरफ खुफिया एजेंसियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं हैं, दूसरी तरफ प्राइवेट कंपनियां सस्ती तकनीक चाहती हैं और सरकार को अर्थव्यवस्था सुधारने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स और पूर्व डिप्लोमेट्स का कहना है कि अलग-अलग सरकारें चीन को लेकर सही संतुलन नहीं बना पाईं हैं। इसकी वजह से ब्रिटेन की पॉलिसी में शक और डर नजर आता है। एक्सपर्ट्स बोले- चीनी ऐसी हकीकत जिसका सामना करना जरूरी स्टार्मर की ये यात्रा चीन को लेकर बने शक और डर को कम करने की कोशिश है। ये विजिट ऐसे समय हो रही है जब यूरोप और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हाल के हफ्तों में फिनलैंड और आयरलैंड के प्रधानमंत्री भी चीन जा चुके हैं। जर्मन चांसलर के भी फरवरी में चीन जाने की संभावना है। फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओरपो ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। चीन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और यूरोपियन यूनियन पार्टनर हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं और सहयोग मतभेदों से ज्यादा अहम है। पीएम कीर स्टार्मर ने भी माना है कि चीन को लेकर ब्रिटेन का रवैया कभी बहुत नरम रहा, तो कभी बहुत सख्त। उनका कहना है कि वे चीन के साथ &#039;गोल्डन एरा&#039; या ‘आइस एज’ जैसी दो टूक सोच में भरोसा नहीं करते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटेन अब चीन को न तो दोस्त मान रहा है और न दुश्मन, बल्कि एक ऐसी हकीकत मान रहा है जिसका सामना करना जरूरी है। किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर केरी ब्राउन ने कहा कि ब्रिटेन को दूसरे विकल्प तलाशने होंगे और ऐसा बाकी देश भी कर रहे हैं। कीर स्टार्मर के चीन दौरे का मकसद... 10 साल पहले ब्रिटिश पीएम ने चीनी राष्ट्रपति को बीयर पिलाई थी CNN के मुताबिक, एक समय ब्रिटेन को लगता था कि चीन से दोस्ती करके उसे हर तरह का फायदा मिल सकता है। 2010 के बाद तत्कालीन पीएम डेविड कैमरन और वित्त मंत्री जॉर्ज ऑसबॉर्न ने चीन से रिश्ते मजबूत किए। उनकी कोशिश थी कि लंदन को चीनी इन्वेस्टमेंट का बड़ा सेंटर बनाया जाए और न्यूक्लियर एनर्जी जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी चीन को शामिल किया जाए। 2015 में जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिटेन आए, तो इन रिश्तों को ‘गोल्डन एरा’ कहा गया। उस वक्त कैमरन उन्हें एक पुराने पब में बीयर पिलाने भी ले गए थे। लेकिन इसके बाद हालात बदल गए। 2016 में ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन (EU) से बाहर निकलने के फैसले से कई योजनाएं अटक गईं। फिर चीन की ‘मेड इन चाइना 2025&#039; योजना की वजह से ब्रिटेन का चीन को होने वाला निर्यात भी कमजोर पड़ने लगा। ट्रम्प की वजह से बड़ी ताकतों की राजनीति बदली हॉन्गकॉन्ग में चीन की सख्ती ने रिश्तों को और बिगाड़ दिया। इसके जवाब में ब्रिटेन ने वहां के लाखों लोगों को अपनी नागरिकता देने की पेशकश की। फिर 2020 में ब्रिटेन ने हुआवे पर रोक लगा दी और 2023 में चीन ने एक न्यूक्लियर प्रोजेक्ट में पैसा लगाना बंद कर दिया। हालांकि अब हालात बदलते दिख रहे हैं। ट्रम्प की लीडरशिप में बड़ी ताकतों की राजनीति बदलती नजर आ रही है। ऐसे में स्टार्मर अपनी चीन यात्रा पर ब्रिटेन की बड़ी कंपनियों के सीनियर अधिकारियों को साथ लेकर आए हैं ताकि चीन के साथ व्यापार बढ़ाया जा सके। ट्रम्प की नीतियों ने यूरोप और चीन को करीब लाया एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रम्प का रवैया यूरोप और चीन को करीब ला रहा है। बीजिंग के एक रिसर्चर ने कहा कि ट्रम्प की नीतियों की वजह से EU को चीन से जुड़ना पड़ा है और रिश्ते तेजी से बेहतर हो रहे हैं। लंदन यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने कहा कि पिछली सरकार ज्यादा सख्त नियमों पर जोर देती थी, जबकि मौजूदा सरकार आर्थिक रिश्तों को सुधारने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। दोनों देशों के हित एक जैसे नहीं हैं, लेकिन ब्रिटेन अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए चीन से रिश्ते सुधारना चाहता है। ब्रिटेन में इस यात्रा के समय को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन ने लंदन के फाइनेंनसियल इलाके के पास चीन को एक बड़ा दूतावास बनाने की मंजूरी दी है। यह फैसला पहले सुरक्षा चिंताओं की वजह से टलता रहा था, क्योंकि वहां से जरूरी डेटा ले जाने वाली केबल्स गुजरती हैं। कुछ पूर्व मंत्री और चीन के आलोचक मानते हैं कि रिश्ते सुधारने की कोशिश में चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया जा रहा है, खासकर शिनजियांग और हांगकांग को लेकर। स्टार्मर से उम्मीद है कि वह इन मुद्दों को उठाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:01:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>ब्रिटिश, साल, बाद, चीन, पहुंचे:कोरोनाकाल, में, चीनी, कंपनी, हुआवे, को, निकाला, था, अब, बोले-, अमेरिका, अपनी, जगह, लेकिन, चीन, जरूरी</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:रिपोर्ट&#45; भारतीय मूल के अमेरिकी अधिकारी ने Chatgpt पर सीक्रेट डॉक्यूमेंट अपलोड किए, जांच बैठाई गई</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की साइबर सुरक्षा एजेंसी CISA के भारतीय मूल के एक्टिंग डायरेक्टर डॉ. माधु गोट्टुमुक्कला ने संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों को पब्लिक वर्जन के ChatGPT में अपलोड कर दिया। पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, माधु गोट्टुमुक्कला ने पिछले साल काम के सिलसिले में कॉन्ट्रैक्टिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े कुछ आंतरिक दस्तावेज ChatGPT में डाले, जो सिर्फ आधिकारिक इस्तेमाल के लिए थे। ये दस्तावेज क्लासिफाइड नहीं थे, लेकिन इन्हें सार्वजनिक करने से रोका गया था। इस अपलोड से ऑटोमेटेड सिक्योरिटी अलर्ट बजे और होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) में आंतरिक जांच शुरू हुई। जांच का नतीजा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। डॉ. माधु गोट्टुमुक्कला CISA के एक्टिंग डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर हैं, जो अमेरिकी सरकार के फेडरल नेटवर्क्स को रूस और चीन जैसे देशों से जुड़े उन्नत साइबर खतरों से बचाने की जिम्मेदारी संभालते हैं। वे मई 2025 से इस पद पर हैं। इससे पहले वे साउथ डकोटा राज्य में ब्यूरो ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के कमिश्नर और चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर थे। यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि DHS के अधिकांश कर्मचारियों के लिए ChatGPT तक पहुंच प्रतिबंधित है, लेकिन गोट्टुमुक्कला ने CISA के चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर से स्पेशल परमिशन ली थी। पब्लिक ChatGPT में डाला गया डेटा कंपनी रखा सकती है और सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करती है, जिससे संवेदनशील जानकारी के लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… नॉर्थ कोलंबिया के ग्रामीण इलाके में छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त, सभी 15 लोगों की मौत नॉर्थ कोलंबिया के नॉर्ट डी सेंटेंडर प्रांत के एक ग्रामीण इलाके में बुधवार को एक छोटा प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्लेन में सवार सभी 15 लोगों की मौत हो गई।
सरकारी एयरलाइन कंपनी सतेना इस फ्लाइट का संचालन करती थी। कंपनी ने कहा कि घटनास्थल पर एक बचाव दल भेजा गया। विमान HK4709 स्थानीय समय के अनुसार सुबह 11:42 बजे राजधानी कुकुटा के हवाई अड्डे से ओकाना के लिए रवाना हुआ था। ओकाना पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह उड़ान आमतौर पर लगभग 40 मिनट की होती है। सतेना के बयान के अनुसार, विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से आखिरी संपर्क उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद हुआ। एयरलाइन ने कहा कि छोटे विमान में दो चालक दल के सदस्य और 13 यात्री सवार थे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:01:15 +0530</pubDate>
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<title>नेतन्याहू बोले&#45;गाजा में अमेरिका की वजह से हमारे सैनिक मरे:बाइडेन पर हथियारों की सप्लाई रोकने का आरोप लगाया, कहा&#45; अब अपनी हथियार इंडस्ट्री बनाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की वजह से इजराइल के कई सैनिक मारे गए। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक उन्होंने कहा कि हमास के खिलाफ गाजा जंग के दौरान हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई रोक दी गई थी। नेतन्याहू ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इजराइल के पास जरूरी गोला-बारूद खत्म हो गया था, इस वजह से कुछ सैनिकों की जान चली गई। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इस वजह से कितने सैनिकों की मौत हुई। इजराइली पीएम ने सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि यह हथियार रोक तब खत्म हुई जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति बने। उनके मुताबिक, ट्रम्प के राष्ट्रपति बनते ही इजराइल को फिर से हथियार मिलने लगे। नेतन्याहू ने कहा कि विदेशी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करने के लिए वे एक मजबूत और स्वतंत्र घरेलू हथियार इंडस्ट्री बनाएंगे। अमेरिकी सहायता पर निर्भरता कम करना चाहते हैं नेतन्याहू नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध में सैनिकों की मौत आम बात है, लेकिन साथ ही यह भी तर्क दिया कि कुछ मौतों को टाला जा सकता था। नेतन्याहू ने बताया कि गोला-बारूद की कमी के कारण सैनिकों को घरों में घुसकर लड़ना पड़ा और कई सैनिक मारे गए। नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि उन्होंने फैसला किया है कि ऐसा दोबारा कभी नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अगले दशक के भीतर इजराइल अमेरिकी सहायता पर निर्भरता कम कर दे। नेतन्याहू ने इजराइल-अमेरिका संबंध को सहायता से साझेदारी में बदलने की बात कही, जिसमें इजराइल में विकास शामिल हो। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का सहयोग भारत और जर्मनी सहित अन्य सहयोगी देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है। उनका लक्ष्य हथियार के क्षेत्र में अधिकतम स्वतंत्रता हासिल करना है, ताकि कभी भी हथियारों या गोला-बारूद की कमी न हो। इजराइल को हर साल ₹32,000 करोड़ की सहायता देता अमेरिका वॉर पावर इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इजराइल को हर साल लगभग 3.8 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपये) का सैन्य सहायता देता है। यह मुख्य रूप से फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग (FMF) के तहत होता है, जिसमें 3.3 अरब डॉलर सामान्य हथियार खरीद के लिए और 500 मिलियन डॉलर मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए दिए जाते हैं। यह सहायता 2016 में साइन हुए 10 साल के समझौते के तहत दी जाती है। यह 2019 से शुरू हुआ और 2028 तक चलेगा। इस MOU के तहत कुल 38 अरब डॉलर की सहायता का वादा किया गया था, जो हर साल बराबर किश्तों में मिलती है। यह समझौता ओबामा प्रशासन में हुआ था। अमेरिकी कांग्रेस हर साल इसे अप्रूव करती है। इसके अलावा अक्टूबर 2023 से गाजा युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अतिरिक्त सहायता दी है। 2023-2025 तक कुल 21.7 अरब डॉलर से ज्यादा मिलिट्री एड दी गई है, जिसमें 2024 में 8.7 अरब डॉलर का स्पेशल पैकेज शामिल है। 2025 में भी सालाना 3.8 अरब डॉलर के आसपास जारी रही और ट्रम्प प्रशासन ने मार्च 2025 में इमरजेंसी अथॉरिटी से 4 अरब डॉलर की फास्ट-ट्रैक सहायता दी। कुल मिलाकर, अक्टूबर 2023 से अब तक करीब 17-22 अरब डॉलर या उससे ज्यादा की सहायता दी जा चुकी है। इजराइल की सेना दुनिया में 15वें नंबर पर इजराइल की सैन्य शक्ति दुनिया में सबसे मजबूत और उन्नत मानी जाती है। जनवरी 2026 तक, ग्लोबल फायर पावर (GFP) की रैंकिंग के अनुसार, इजराइल 145 देशों में 15वें स्थान पर है। इसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.2661 है (जितना कम स्कोर, उतनी ज्यादा ताकत)। यह टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग और रणनीति के कारण इतनी ऊंची रैंकिंग रखता है। वहीं, अमेरिका की सेना दुनिया में नंबर 1 पर है। बाइडेन के सहयोगी बोले- नेतन्याहू झूठ बोल रहे नेतन्याहू के दावे के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के एक शीर्ष सहयोगी एमोस होचस्टीन ने नेतन्याहू पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। होचस्टीन ने कहा, &#039;नेतन्याहू न तो सच बोल रहे हैं और न ही उस राष्ट्रपति के तरफ सम्मान दिखा रहे हैं, जिसने मुश्किल समय में इजराइल की मदद की।&#039; होचस्टीन के साथ बाइडेन के एक दूसरे शीर्ष सहयोगी ब्रेट मैकगर्क भी शामिल हुए, उन्होंने कहा, &#039;नेतन्याहू का वह बयान सरासर झूठा है।&#039; गाजा जंग में 1 हजार से ज्यादा सैनिकों की मौत हुई थी इजराइल-हमास युद्ध में 2023 से अब तक करीब 900 से 1,150 इजराइली सैनिकों की मौत हुई है। इजराइली अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नवंबर 2025 तक कुल 922 सैनिकों की मौत हुई है। इसमें से 471 गाजा में ग्राउंड ऑपरेशंस और बॉर्डर पर ऑपरेशंस के दौरान मारे गए। इजराइली सेना ने खुद 1,152 सैनिकों की मौत स्वीकार की है, जिसमें से ज्यादातर 7 अक्टूबर 2023 के हमले और उसके बाद के ग्राउंड ऑपरेशंस में हुईं। जंग के 2 साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। इन दो सालों में गाजा की 98% खेती की जमीन बंजर हो गई है। अब सिर्फ 232 हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ बची है। यहां फिर से खेती शुरू करने में 25 साल लगेंगे। जंग की वजह से गाजा के 23 लाख लोगों में से 90% बेघर हो गए हैं। ये बिना पानी-बिजली के तंबुओं में रह रहे हैं और आधे से ज्यादा भुखमरी झेल रहे हैं। 80% इलाका मिलिट्री जोन बन चुका है। UN की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर लग सकते हैं। 80% इमारतें तबाह हो गई हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 72 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए उत्तर और दक्षिण गाजा से भगाए गए लाखों लोग अब टेंटों में बिना पानी, बिजली और दवा के दिन गुजार रहे हैं। यूएन एजेंसियों के मुताबिक, आधे से ज्यादा लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। अब तक 72 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचिबद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- दूसरा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा: नए समझौते पर सहमति का दबाव बनाया; एक जंगी बेड़ा पहले ही पहुंच चुका है ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:06:34 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; दूसरा नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा:नए समझौते पर सहमति का दबाव बनाया; एक जंगी बेड़ा पहले ही पहुंच चुका है</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। मंगलवार को दिए एक भाषण में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इसकी उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान को नए समझौते पर सहमत किया जा सकता है। एक हफ्ते पहले भी ट्रम्प ने इसी तरह का बयान देते हुए कहा था कि एक बड़ा अमेरिकी सैन्य बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ रहा है। बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है। USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है। अमेरिका ने ईरान के आगे 4 शर्तें रखी ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए एक अलग इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ स्थिति अभी बदल रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान के पास वेनेजुएला से बड़ा आर्मडा (बेड़ा) है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं और वे डील करना चाहते हैं। ट्रम्प का मानना है कि ईरान बात करने के लिए उत्सुक है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है। अगर ईरान संपर्क करता है और शर्तें मानता है तो बात होगी। इस महीने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने समझौते के लिए शर्तें बताई हैं- ईरान के खिलाफ पहले कार्यकाल से आक्रामक रहे ट्रम्प ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते संयुक्त व्यापक कार्य योजना ( JCPOA) से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकाल लिया था। यह समझौता ओबामा प्रशासन के समय में जुलाई 2015 में हुआ था, जिसमें ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ शामिल थे। समझौते के तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई सख्त सीमाएं लगाई थीं, जैसे: ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर की नीति अपनाते हैं ट्रम्प इसके बदले में ईरान को अमेरिका और अन्य देशों ने लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी, खासकर तेल निर्यात, बैंकिंग और व्यापार पर। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ था। ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में ही इस समझौते को दुनिया का सबसे खराब समझौता कहा था। उनका कहना था कि यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को सिर्फ टालता है, खत्म नहीं करता। ईरान ने समझौते में बुरे इरादे से हिस्सा लिया और पहले अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम छिपाया था। उन्होंने कहा था कि समझौता ईरान के अन्य बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन, आतंकवाद और अमेरिकियों की हिरासत पर रोक नहीं लगाता। 8 मई 2018 को ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में जॉइंट कॉन्प्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर निकलने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने उन सभी प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया जो समझौते के तहत हटाए गए थे। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अपनाई, जिसके तहत- ईरान पर पहले भी हमला कर चुका है अमेरिका ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि तीन सुविधाओं पर हमले से ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह नष्ट हो गई है। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान थे। उन्होंने कहा, &quot;22 साल से लोग यह करना चाहते थे।&quot; ट्रम्प ने अभी यह नहीं बताया कि ईरान पर और सैन्य कार्रवाई की जाएगी या नहीं। हालांकि उन्होंने पहले कहा था कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है तो कार्रवाई होगी। मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं। 
अमेरिका के USS अब्राहम लिंकन को जानिए… राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान पहुंच चुका है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) की जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पहुंच गया है। USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ। ईरान ने भी अमेरिका को पलटवार की चेतावनी दी अमेरिका की धमकी के बाद एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मिडिल ईस्ट में उसके सभी सैन्य अड्डे और इजराल के केंद्र ईरान के निशाने पर होंगे। दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि उनकी सेना की उंगली ट्रिगर पर है। गुरुवार को एक लिखित बयान में पाकपुर ने कहा कि ईरान की सेना पहले से ज्यादा तैयार है। इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ फिर से कोई हमला किया, तो उसे पहले से “सात गुना ज्यादा ताकत” से जवाब दिया जाएगा। ईरान में सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत कर चुके हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते पोलिटिको से कहा, “ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।” उन्होंने ईरानी नागरिकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने और संस्थानों पर कब्जा करने की अपील भी की थी। हालांकि अगले दिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बंदियों को फांसी देने की योजना फिलहाल रोकी गई है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर ईरान में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरानी जनता को हुए नुकसान और मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके जवाब में ट्रम्प ने खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान की तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं और वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है। ईरान में 19 दिन प्रदर्शन हुए, 5000 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा 15 जनवरी तक चली थी। यह कई कारणों से भड़की। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। इनमें 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। यह हिंसा महंगाई के खिलाफ भड़की थी। ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 1,455,000 से 1,457,000 रियाल (ओपन मार्केट रेट) हो गई है। चाय, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें भी बहुत महंगी हो गईं। कई लोग पुरानी राजशाही (शाह का शासन) वापस लाने की मांग कर रहे थे। सऊदी अरब बोला- हमारा एयरस्पेस ईरान पर हमले के लिए बंद है ईरान और अमेरिका के विवाद के बीच सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए अपने एयरस्पेस या जमीन का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश जारी किया है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मंगलवार को फोन पर बात की। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब ईरान की संप्रभुता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा हम ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र का इस्तेमाल किसी को नहीं करने देंगे। क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने और स्थिरता बढ़ाने की कोशिश का समर्थन करता है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सऊदी अरब की इस मजबूत स्थिति के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए शुक्रिया अदा किया। पेजेशकियन ने कहा कि इस्लामी देशों की एकता और एकजुटता ही क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा, स्थिरता और शांति की गारंटी दे सकती है। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… NATO बोला-अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता: यूरोपीय नेता बस सपने देख रहे, अगर अकेले चलना है तो डिफेंस बजट बढ़ाएं NATO के महासचिव मार्क रुट ने सोमवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक रुट ने कहा कि अगर वे वास्तव में अकेले ही ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपने रक्षा खर्च को 10% तक बढ़ाना होगा। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:06:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>गोल्डन टेंपल सरोवर में कुल्ला, पाकिस्तानी डॉन की एंट्री:भट्‌टी बोला&#45; धर्म&#45;मर्यादा की जानकारी नहीं तो न जाया करें; युवक की निहंग पिटाई कर चुके</title>
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<description><![CDATA[ अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने के मामले में पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्‌टी की एंट्री हो गई है। भट्‌टी ने एक वीडियो जारी कर मुस्लिम युवक की हरकत पर नाराजगी जताई। भट्टी ने कहा कि भारत में एक मुस्लिम युवक का गुरुघर जाकर पवित्र सरोवर में वजू करना गलत है। यह किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। गोल्डन टेंपल सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल है और वहां की मर्यादा का पालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि दिल्ली का रहने वाला युवक 13 जनवरी को गोल्डन टेंपल में आया था। इसके बाद उसने सरोवर में बैठकर कुल्ला किया। उसने मुंह में पानी भरा और वहीं थूक दिया। इसके बाद वह गोल्डन टेंपल परिसर में घूमा और दूसरे साथी से वीडियो शूट करवाया था। 24 जनवरी को यूपी के गाजियाबाद में निहंगों ने उसे पकड़ लिया था और जमकर पिटाई करने के बाद पुलिस हवाले कर दिया था। एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें- भट्टी  सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करते हुए गैंगस्टर शहजाद भट्टी ने कहा कि अगर किसी मुस्लिम धार्मिक स्थल, मस्जिद या अन्य पवित्र जगह पर कोई ऐसी हरकत करेगा, तो मुस्लिम समुदाय को भी उतना ही दुख और गुस्सा होगा। सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना चाहिए, तभी समाज में भाईचारा और शांति बनी रह सकती है। भट्टी ने कहा कि युवक की यह हरकत सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है और यह इस्लाम धर्म की शिक्षाओं के भी खिलाफ है। इस्लाम में भी किसी दूसरे धर्म के पवित्र स्थल का अपमान करना गलत माना जाता है। किसी दूसरे धर्म और परंपराओं की जानकारी नहीं है, तो ऐसे पवित्र स्थलों पर न जाएं। अंत में शहजाद भट्टी ने युवाओं से अपील की कि अगर उन्हें किसी दूसरे धर्म और उसकी परंपराओं की जानकारी नहीं है, तो ऐसे पवित्र स्थलों पर जाने से पहले सही जानकारी जरूर लें। अज्ञानता में की गई ऐसी हरकतें समाज में तनाव और विवाद पैदा करती हैं। 3 पॉइंट में जानिए पूरा विवाद क्या है... 2 बार माफी मांगी, लेकिन तरीके पर सवाल उठे ******************* इस खबर को भी पढ़ें: गोल्डन टेंपल सरोवर में कुल्ला करने वाले की CCTV फुटेज: माथा नहीं टेका, सिर्फ VIDEO बनाई, कल निहंगों ने पीटा, UP पुलिस की हिरासत में पंजाब के अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल के पवित्र सरोवर में कुल्ला करने वाले मुस्लिम युवक सुब्हान रंगरीज की CCTV फुटेज सामने आई हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने यह फुटेज निकाली है। इसमें स्पष्ट दिख रहा है कि युवक गोल्डन टेंपल में माथा टेकने नहीं आया था। वह सिर्फ इंस्टाग्राम रील के लिए यहां वीडियो शूट करने के लिए आया था। इसी आधार पर SGPC ने माना कि वह गोल्डन टेंपल में बेअदबी की नीयत से आया था। इस वजह से उसके खिलाफ अमृतसर में पुलिस को शिकायत दे दी गई है। युवक गाजियाबाद पुलिस की हिरासत में है। (पूरी खबर पढ़ें) ]]></description>
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:06:34 +0530</pubDate>
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<title>NATO बोला&#45;अमेरिका के बिना यूरोप अपनी रक्षा नहीं कर सकता:यूरोपीय नेता बस सपने देख रहे, अगर अकेले चलना है तो डिफेंस बजट बढ़ाएं</title>
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<description><![CDATA[ NATO के महासचिव मार्क रुट ने सोमवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक रुट ने कहा कि अगर वे वास्तव में अकेले ही ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपने रक्षा खर्च को 10% तक बढ़ाना होगा, अपनी परमाणु क्षमता का निर्माण करना होगा, जिसकी लागत अरबों यूरो होगी। अभी NATO के खर्च में यूरोपीय देशों का कुल योगदान केवल 30% है, जो देशों की GDP का औसतन 2% है। रुट ने ट्रम्प के आर्कटिक क्षेत्र और ग्रीनलैंड की मजबूत रक्षा की रणनीति का समर्थन किया। रुट ने यह भी कहा कि उन्होंने ट्रम्प को उनकी बढ़ती धमकियों से पीछे हटने के लिए मनाया और ग्रीनलैंड को लेकर समझौते की दिशा में ले जाने की कोशिश की। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं की रुट से नाराजगी बढ़ी ट्रम्प ने 21 जनवरी को दावोस में रुट के साथ ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत की थी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता इस बात से नाराज हो गए थे कि ट्रम्प और रुट उनके पीठ पीछे ग्रीनलैंड के भविष्य पर बात कर रहे हैं।  यूरोपीय संसद के कई सदस्यों ने रुट से पूछा कि उन्होंने ट्रम्प से ठीक क्या चर्चा की और इसका डेनमार्क व ग्रीनलैंड पर क्या असर होगा। ट्रम्प ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर नाटो के साथ एक समझौते का ढांचा तैयार हो गया है, जिससे यूरोप में राहत मिली, हालांकि कई लोग चिंतित हैं कि ट्रम्प अपना मन बदल सकते हैं। रुट बोले- ट्रम्प अच्छा काम कर रहे जिससे कई लोग चिढ़ रहे रुट ने कहा कि 70 साल बाद भी यूरोप अमेरिकी सैन्य शक्ति पर निर्भर है। यूरोप को अपनी मजबूत रक्षा के लिए बहुत अधिक खर्च करना होगा, यहां तक कि अपना परमाणु हथियार बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘2035 तक 5% जीडीपी रक्षा खर्च काफी नहीं, इसे 10% तक ले जाना होगा। उस स्थिति में आप हमारी स्वतंत्रता के अंतिम गारंटर यानी अमेरिकी परमाणु सुरक्षा कवच को खो देंगे। अगर यूरोप अकेला चल सके तो मेरी ओर से शुभकामनाएं।’ रुट ने ट्रम्प की बात दोहराई कि चीन और रूस आर्कटिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कहा, &quot;ट्रम्प बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, मैं जानता हूं कि इससे कई लोग चिढ़ रहे हैं।&quot; आर्कटिक रक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि &quot;ट्रम्प सही हैं।&quot; यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने से पीछे हटे थे ट्रम्प हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने से पीछे हट गए थे। ये टैरिफ 1 फरवरी से लगने वाले थे। ट्रम्प ने रुट के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया था। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी NATO चीफ के साथ ग्रीनलैंड को लेकर होने वाले समझौते की बुनियादी बातें तय हो गई हैं। अगर यह समझौता पूरा होता है, तो यह अमेरिका और NATO के सभी देशों के लिए फायदेमंद होगा। ग्रीनलैंड को लेकर NATO को मिल सकती है खास जिम्मेदारी रुट ने ग्रीनलैंड मुद्दे के संबंध में दो फ्रेमवर्क प्रस्तुत की। यह फ्रेमवर्क भी ट्रम्प से मुलाकात के दौरान तय की गई थी। NATO के अनुच्छेद 5 के तहत एक-दूसरे की रक्षा करते सदस्य देश NATO के अनुच्छेद 5 के तहत किसी नाटो सदस्य देश पर हमला होता है, तो इसे सभी सदस्य देशों पर हमला समझा जाएगा। फिर सभी सदस्य देश मिलकर उस हमले का जवाब देने के लिए सहमत होते हैं। हालांकि, यह युद्ध की गारंटी नहीं देता। हर देश अपनी संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। यह अनुच्छेद मुख्य रूप से सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ बनाया गया था, ताकि कोई भी देश अकेला न रहे। इसका मशहूर नारा है- एक पर हमला, सभी पर हमला। ट्रम्प ने यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहा था पिछले साल नीदरलैंड्स के द हेग शहर में हुई NATO समिट के बाद ट्रम्प ने यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहा था। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका NATO को बहुत पैसा देता है, लेकिन बाकी देश अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं। ट्रम्प चाहते हैं कि सभी सदस्य देश अपने GDP का 5% रक्षा पर खर्च करें। वहीं, स्पेन ने साफ कर दिया कि वह अपनी GDP का 5% रक्षा खर्च पर नहीं लगा सकता। स्पेन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वो 2.1% से ज्यादा खर्च नहीं करेगा। बाकी यूरोपीय देश इस खर्च को पूरा करने में अभी काफी पीछे हैं। कई देशों के लिए यह खर्च बहुत बड़ा है और वे शायद 2032 या 2035 तक भी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे। NATO से बाहर निकलना चाहते हैं ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प NATO को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। ट्रम्प ने बार-बार कहा कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे और सारा बोझ अमेरिका उठा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर यूरोपीय देश 2% GDP रक्षा पर खर्च नहीं करते तो अमेरिका संगठन से हट भी सकता है। डोनाल्ड ट्रम्प पिछले दो दशक से अमेरिका को नाटो से बाहर निकलने की वकालत करते रहे हैं। 2016 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में ट्रम्प ने कहा था कि यदि रूस बाल्टिक देशों (एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया) पर हमला करता है, तो वे यह देखने के बाद ही मदद करेंगे कि उन्होंने अमेरिका के लिए अपना फर्ज पूरा किया है या नहीं। ट्रम्प का मानना है कि यूरोपीय देश अमेरिका के खर्च पर नाटो की सुविधाएं भोग रहे हैं। 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद तो उन्होंने नाटो से निकलने की धमकी ही दे दी थी। ट्रम्प ने 2024 में एक इंटरव्यू में साफ कह दिया था कि जो देश अपने रक्षा बजट पर 2% से कम खर्च कर रहे हैं, अगर उन पर रूस हमला करता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा। उल्टे वे रूस को हमला करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद कमजोर हुआ यूरोप सेकेंड वर्ल्ड वॉर (1939-45) के बाद यूरोप आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हो गया था। दूसरी तरफ जापान पर परमाणु बम गिराने के बाद अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा। अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना और परमाणु हथियार थे। उसने यूरोपीय देशों को परमाणु सुरक्षा मुहैया कराई। इससे यूरोपीय देशों को अपने परमाणु हथियार विकसित करने की जरूरत नहीं थी। अमेरिका खासतौर पर रूस से परमाणु हमलों के खिलाफ यूरोपीय देशों को परमाणु सुरक्षा की गारंटी देता है। इससे यूरोपीय देशों का सैन्य खर्च कम होता है। यूरोप में अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। जर्मनी, पोलैंड और ब्रिटेन में 10 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अमेरिका ने यहां मिलिट्री बेस बनाए हैं और मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं। अमेरिका की मौजूदगी यूरोप को सुरक्षा का भरोसा देती है। अमेरिका के नाटो से बाहर होने से क्या बदलेगा यूरोप की सैन्य शक्ति सीमित है। ज्यादातर यूरोपीय देश अमेरिका की तुलना में रक्षा पर कम खर्च करते हैं। यूरोपीयन यूनियन (EU) के पास NATO जैसी संगठित सेना नहीं है। यहां तक कि जर्मनी और फ्रांस जैसे ताकतवर देश भी खुफिया जानकारी और तकनीक के लिए अमेरिका पर निर्भर है। अगर अमेरिका गठबंधन छोड़ देता है तो यूरोप को अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए और ज्यादा खर्च करने की आवश्यकता होगी। उन्हें गोला-बारूद, परिवहन, ईंधन भरने वाले विमान, कमांड और नियंत्रण प्रणाली, उपग्रह, ड्रोन इत्यादि की कमी को पूरा करना होगा, जो वर्तमान में अमेरिका द्वारा मुहैया कराए जाते हैं। यूके और फ्रांस जैसे नाटो सदस्य-देशों के पास 500 एटमी हथियार हैं, जबकि अकेले रूस के पास 6000 हैं। अगर अमेरिका नाटो से बाहर चला गया तो गठबंधन को अपनी न्यूक्लियर-पॉलिसी को नए सिरे से आकार देना होगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:58:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प ने साउथ कोरिया पर 25% टैरिफ लगाया:कहा&#45; उन्होंने हमारी ट्रेड डील मंजूर नहीं की, कोरिया बोला&#45; हमें इसकी जानकारी नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साउथ कोरिया के सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि साउथ कोरिया पिछले साल हुए ट्रेड डील पर ठीक से अमल नहीं कर रहा है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि साउथ कोरिया पर 15% से बढ़ाकर 25% टैरिफ लगाया जाएगा। यह टैरिफ कारों, लकड़ी, दवाओं और बाकी उत्पादों पर लागू होगा। ट्रम्प का कहना है कि साउथ कोरिया की संसद इस समझौते को मंजूरी देने में देर कर रही है, जबकि अमेरिका ने समझौते के मुताबिक अपने टैरिफ तेजी से कम किए हैं। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील हुई थी ट्रम्प ने कहा कि साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यांग और मैंने 30 जुलाई 2025 को दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति बनाई थी। मैंने 29 अक्टूबर 2025 को कोरिया में रहते हुए इस समझौते को दोहराया था। कोरियाई संसद ने इसे मंजूरी क्यों नहीं दी? उन्होंने हमारे ऐतिहासिक व्यापार समझौते को लागू नहीं किया है, जो उनकी जिम्मेदारी है। उस समझौते में ट्रम्प ने दावा किया था कि साउथ कोरिया, अमेरिका में 350 अरब डॉलर (करीब 29 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करेगा, जिस पर कंट्रोल अमेरिका का रहेगा। अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में साउथ कोरिया ने अमेरिका को करीब 132 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपए) का सामान एक्सपोर्ट किया। इसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद प्रमुख हैं। टैरिफ बढ़ने से इन साउथ कोरियाई सामानों की कीमतें अमेरिका में बढ़ सकती हैं। साउथ कोरिया बोला- टैरिफ बढ़ने की जानकारी नहीं साउथ कोरिया ने कहा है कि उसे टैरिफ बढ़ाने के फैसले की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। साउथ कोरिया ने इस मुद्दे पर अमेरिका से तुरंत बातचीत की मांग की है। साउथ कोरिया ने यह भी बताया कि उसके उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान, जो इस समय कनाडा में हैं, जल्द से जल्द वॉशिंगटन जाएंगे और अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात करेंगे। सियोल और वॉशिंगटन के बीच पिछले साल अक्टूबर में एक व्यापार समझौता हुआ था। इसके तहत दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में 350 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया था। इस निवेश का एक हिस्सा जहाज निर्माण क्षेत्र में जाना था। इसके अगले महीने दोनों देशों ने सहमति जताई थी कि जैसे ही दक्षिण कोरिया समझौते को मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू करेगा, अमेरिका कुछ उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा। यह समझौता 26 नवंबर को दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली में पेश किया गया था और अभी उसकी समीक्षा चल रही है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, फरवरी में इसके पास होने की संभावना है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:58:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>ट्रम्प, ने, साउथ, कोरिया, पर, 25, टैरिफ, लगाया:कहा-, उन्होंने, हमारी, ट्रेड, डील, मंजूर, नहीं, की, कोरिया, बोला-, हमें, इसकी, जानकारी, नहीं</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ब्रिटेन में भारतवंशी नेता सुएला ब्रेवरमैन ने कंजरवेटिव पार्टी छोड़ी, कट्टर दक्षिणपंथी नाइजल फराज की पार्टी में शामिल</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने सोमवार को कंजर्वेटिव पार्टी छोड़कर आप्रवासन-विरोधी पार्टी रिफॉर्म यूके पार्टी जॉइन कर ली। उन्होंने कहा कि वे अब टोरी पार्टी को “अलविदा” कह रही हैं, क्योंकि कंजर्वेटिव सरकार के दौर में इमिग्रेशन पूरी तरह “काबू से बाहर” हो गया है। 45 साल की ब्रेवरमैन दक्षिणी इंग्लैंड के फेयरहैम और वॉटरलूविल से सांसद हैं और गोवा मूल की हैं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बताया कि उन्होंने कंज़र्वेटिव पार्टी की 30 साल पुरानी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। लंदन में हुए एक कार्यक्रम में रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फराज ने उनका स्वागत किया। ब्रेवरमैन अब उन बड़े कंजर्वेटिव नेताओं में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने फाराज की पार्टी का दामन थामा है। उनसे पहले पूर्व मंत्री रॉबर्ट जेनरिक और नदीम जहावी भी रिफॉर्म यूके में जा चुके हैं। इसके साथ ही कंजर्वेटिव पार्टी से रिफॉर्म यूके में जाने वाले सांसदों की संख्या 8 हो गई है। पार्टी छोड़ने के बाद ब्रेवरमैन ने कहा, “ब्रिटेन टूट चुका है। देश तकलीफ में है, ठीक नहीं है। इमिग्रेशन काबू से बाहर है, सार्वजनिक सेवाएं चरमरा गई हैं, लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते और हमारे युवा बेहतर भविष्य की तलाश में देश छोड़कर जा रहे हैं।” ब्रेवरमैन ने फराज की तारीफ करते हुए कहा कि ब्रिटिश राजनीति में सिर्फ एक ही ऐसा व्यक्ति है जो अपने देश के लिए लगातार साहस के साथ खड़ा रहा है, और वह व्यक्ति नाइजेल फराज हैं। कंजर्वेटिव पार्टी के भीतर ब्रेवरमैन को कट्टर दक्षिणपंथी धड़े का बड़ा चेहरा माना जाता रहा है। वे पहले पार्टी नेतृत्व का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक ने उन्हें अपनी सरकार की टॉप लीडरशिप में शामिल किया था। विवादों से उनका पुराना नाता रहा है। उन्हें दो बार गृह मंत्री पद से हटाया गया। पहली बार लिज ट्रस के कार्यकाल में मंत्री आचार संहिता के उल्लंघन पर और दूसरी बार पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के दौर में विवादित मीडिया टिप्पणियों की वजह से। इजराइल ने गाजा से आखिरी बंधक का शव बरामद किया, कब्र खोदकर पुलिस का शव निकाला इजरायल की सेना ने सोमवार को घोषणा की कि गाजा में अंतिम बंधक का शव बरामद कर लिया गया है। बंधकों की खोज के लिए इजराइली सेना कई दिनों से ऑपरेशन चला रही थी। इसी दौरान कब्रिस्तान से पुलिस अधिकारी रान गिविली का शव मिला। इसके साथ ही इजराइल और हमास के बीच लागू युद्धविराम के अगले चरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि गिविली 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व वाले हमले में मारे गए थे, जिसने युद्ध की शुरुआत की थी। गिविली उन पहले लोगों में शामिल थे, जिन्हें गाजा ले जाया गया था। सभी बंधकों को वापस लाने का वादा पूरा किया गया है। गिविली के परिवार ने पहले सरकार से अपील की थी कि उनके शव की बरामदगी से पहले युद्धविराम के दूसरे चरण में प्रवेश न किया जाए। हमास ने कहा है कि वह युद्धविराम के पहले चरण की सभी शर्तों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि आखिरी बंधक के शव की वापसी मध्य पूर्व में शांति की दिशा में अहम कदम है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह अमेरिका, इजरायल और पूरी दुनिया के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। इससे मध्य-पूर्व में शांति की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि गाजा के पुनर्निर्माण के संबंध में नवगठित शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए 20 से अधिक नए देशों ने भी हस्ताक्षर किए हैं, जो राष्ट्रपति के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:58:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>UAE ने पाकिस्तान से इस्लामाबाद एयरपोर्ट ऑपरेशन डील तोड़ी:राष्ट्रपति नाहयान के भारत दौरे के बाद फैसला, सिर्फ 2 घंटे के लिए नई दिल्ली आए थे</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तानी में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ऑपरेशन यानी संचालन की डील को खत्म कर दिया है। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक अबू धाबी ने यह फैसला किया है कि वह अब इस्लामाबाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नहीं चलाएगा। इसे UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की अचानक हुई यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। नाहयान 19 जनवरी को भारत दौरे पर आए थे। उनकी यात्रा का ऐलान 1 दिन पहले 18 जनवरी को हुआ था। पाकिस्तान बोला- UAE से कभी कोई डील नहीं हुई पाकिस्तान ने शनिवार को कहा कि UAE के साथ इस्लामाबाद एयरपोर्ट को लीज पर देने या चलाने को लेकर कभी कोई डील नहीं हुई। सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रामक बताया, जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान ने UAE के साथ प्रस्तावित समझौता रद्द कर दिया है। पाकिस्तान ने कहा कि राजधानी का इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को प्राइवेट करने की तैयारी है। सरकार के मुताबिक, नवंबर 2025 में यह फैसला लिया गया था कि एयरपोर्ट्स को सरकार-से-सरकार मॉडल के बजाय ओपन और प्रतिस्पर्धी बिडिंग के जरिए निजी हाथों में दिया जाएगा। इसकी वजह निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी बताई गई। इस्लामाबाद एयरपोर्ट प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम में शामिल सरकार ने बताया है कि इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अब लॉन्ग-टर्म कंसेंशन मॉडल के तहत एक्टिव प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम में शामिल कर लिया गया है। इसे कराची और लाहौर एयरपोर्ट्स की तर्ज पर ही प्राइवेट किया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि ओपन बिडिंग प्रक्रिया में घरेलू और विदेशी सभी निवेशकों को बराबरी का मौका मिलेगा। इसमें UAE जैसे साझेदार देशों के निवेशक भी शामिल हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद एविएशन सेक्टर का आधुनिकीकरण करना और निजी निवेश को बढ़ावा देना है। इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पाकिस्तान में सबसे बड़ा इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पाकिस्तान का सबसे बड़ा और आधुनिक एयरपोर्ट है। यह देश की राजधानी इस्लामाबाद का मुख्य इंटरनेशनल गेटवे है और पुराने बेनजीर भुट्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जगह बनाया गया है। इस एयरपोर्ट का निर्माण 2007 में शुरू हुआ था। करीब 11 साल बाद यह पूरी तरह बनकर तैयार हुआ। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 90 अरब पाकिस्तानी रुपये खर्च हुए, जिससे यह देश के सबसे महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गया। एयरपोर्ट का संचालन मई 2018 में शुरू हुआ था। इसे बढ़ते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। एयरपोर्ट से औसतन रोजाना 45 से 50 फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानें शामिल हैं। यहां से कराची, लाहौर, पेशावर के अलावा मिडिल ईस्ट, यूरोप और एशिया के कई देशों के लिए सीधी फ्लाइट्स जाती हैं। 2 घंटे के लिए भारत आए थे नाहयान UAE राष्ट्रपति की भारत यात्रा सिर्फ 2 घंटे की थी। वे 19 जनवरी की शाम करीब 4:30 बजे भारत पहुंचे थे। पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। दोनों नेताओं के बीच ट्रेड और डिफेंस समेत 9 बड़े समझौते हुए। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि यह दौरा छोटा था, लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान दोनों नेताओं की मौजूदगी में कई दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी किया गया। UAE के प्रतिनिधिमंडल में अबू धाबी और दुबई के शाही परिवारों के सदस्य और कई सीनियर मंत्री व अधिकारी शामिल थे। सरकारी एयरलाइन बेच चुका है पाकिस्तान पाकिस्तान अपनी सरकार एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेच चुका है। पिछले महीने 23 दिसंबर को PIA की नीलामी गई। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने PIA में 75% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था। देश के आरिफ हबीब ग्रुप ने 4320 करोड़ रुपए में PIA को खरीदा। सरकार ने 25% हिस्सा अपने पास रखा है। PIA कई सालों से घाटे में चल रही थी और उस पर भारी कर्ज था। पिछले साल भी सरकार ने इसे बेचने की कोशिश की थी, लेकिन तब सिर्फ एक बहुत कम कीमत की बोली आई थी, जिस वजह से सौदा रद्द हो गया था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 15:24:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>चीनी जनरल पर अमेरिका को न्यूक्लियर सीक्रेट बेचने के आरोप:अमेरिकी अखबार का दावा; जिनपिंग के बाद सबसे ताकतवर अधिकारी थे, पद से हटाए गए</title>
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<description><![CDATA[ चीन में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन पर चीन के न्यूक्लियर हथियार से जुड़ी सीक्रेट जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप है। झांग को 24 जनवरी को पद से हटाया गया था। चीनी रक्षा मंत्रालय ने उन पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। झांग पर CMC के अंदर अपनी अलग गुटबाजी करने और पार्टी में फूट डालने का भी आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के पूर्व जनरल मैनेजर गु जून ने झांग के खिलाफ कुछ सबूत दिए हैं। गु जून पर भी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अपराधों के लिए जांच चल रही है। चीनी प्रवक्ता बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि यह जांच दिखाती है कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के नेतृत्व में चल रही उस मुहिम का हिस्सा है, जिसका मकसद सेना में सुधार के साथ अफसरों में वफादारी बढ़ाना है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कमीशन के एक अन्य सदस्य और जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख ल्यू झेनली को भी जांच के दायरे में रखा गया है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन चीन की सेना से जुड़े बड़े फैसले लेने वाली संस्था है। चीन-वियतनाम जंग में मोर्चे पर भेजे गए थे जनरल झांग जनरल झांग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के एक वरिष्ठ जनरल हैं। जनवरी 2026 तक वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के पहले रैंक वाले उपाध्यक्ष थे, जो चीन की सेना का सबसे ऊंची कमांड बॉडी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद CMC के चेयरमैन हैं, इसलिए झांग उनके ठीक नीचे सबसे पावरफुल सैन्य अधिकारी माने जाते थे। चीनी क्रांति के दौरान के एलीट क्लास के नेता और टॉप सैन्य अफसरों के बेटों को ‘प्रिंसलिंग’ यानी ‘छोटा राजकुमार’ कहा जाता है। झांग भी ऐसे ही एलीट क्लास के एक राजकुमार थे। 1968 में 18 साल की उम्र में झांग चीनी सेना में शामिल हुए। 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध में झांग भी मोर्चे पर भेजे गए और इसके बाद तेजी से उनकी तरक्की होने लगी। अगस्त 2000 में झांग 13वीं ग्रुप आर्मी के कमांडर बने और 2011 में चीनी जनरल के पद तक पहुंचे। 2020 में झांग 70 साल के हो गए, ये चीन में आर्मी ऑफिसर्स के रिटायर होने की उम्र होती है, लेकिन जिनपिंग ने उन्हें पद पर बनाए रखा। झांग ने राष्ट्रपति बनने में जिनपिंग की मदद की थी जिनपिंग को 2023 में तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी, लेकिन फिर उनके जिनपिंग से मतभेद गहरे होते गए। अब तक झांग ही PLA में बड़े फैसले ले रहे थे। जनरल झांग और CMC के एक और जनरल लियू कई महीनों से कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों से गायब रहने लगे। झांग पहले भी कई बार गायब हो चुके थे। चीन में ऐसा तब होता है, जब किसी ऑफिसर को हटाया जाना होता है या उसकी जिनपिंग से वफादारी पर संदेह खड़ा होता है। 24 जनवरी 2026 को झांग के खिलाफ ‘पार्टी के कानून और अनुशासन के उल्लंघन’ का आरोप लगा और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। चीन में भ्रष्टाचार और टॉप लीडरशिप के प्रति वफादारी न दिखाने पर ऐसे ही आरोपों के तहत जांच शुरू की जाती है। कई ऑफिसर इस जांच के पहले ही गायब हो जाते हैं या पद से हटा दिए जाते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि चीन में किसी ऑफिसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू हो और वह बाद में निर्दोष साबित हो जाए। झांग से पहले भी कई ऑफिसर इसी तरह हटाए गए हैं। शी जिनपिंग के करीबी जनरल भी पद से हटाए गए थे अक्टूबर 2024 में पार्टी ने CMC के दूसरे उपाध्यक्ष हे वीडोंग को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। 2024 में दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को भी भ्रष्टाचार के मामलों में पार्टी से बाहर किया गया था। हे वीडोंग चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के दूसरे नंबर के वाइस चेयरमैन थे, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में दूसरा बड़ा पद है। यह कमीशन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना की सर्वोच्च कमान संभालता है। वे मार्च 2025 से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। हे वीडोंग को शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी माना जाता है। दोनों ने 1990 के दशक में फुजियान और झेजियांग प्रांतों में साथ काम किया था। हे को 2022 में सीधे CMC के उपाध्यक्ष का पद दिया गया था, जो आमतौर पर हाई कमिशन में सर्विस के बाद ही मिलता है। रक्षा मंत्री पर भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप राष्ट्रपति बनने के बाद से ही शी जिनपिंग सेना में फैले भ्रष्टाचार की रोकथाम में लगे हैं। साल 2204 में चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन का भी एंटी करप्शन ड्राइव में नाम आया था, इसके बाद उनके खिलाफ जांच बैठाई गई थी। इससे पहले दो पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और वेई फेंगहे को पद से हटा दिया गया था। चीन लगातार अपनी सेना को आधुनिक बना रहा चीन लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। चीन ने इस साल के अपने सालाना रक्षा बजट में 7.2% की बढ़त की है। इस साल यह 249 अरब डॉलर (1.78 ट्रिलियन युआन) हो गया। यह भारत के 79 अरब डॉलर के सैन्य बजट के मुकाबले करीब 3 गुना है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि चीन का वास्तविक डिफेंस खर्च उसकी तरफ से बताए गए खर्च से 40-50% ज्यादा है। चीन अपने सैन्य खर्च को कम दिखाने के लिए अलग-अलग सेक्टर के तहत धन आवंटित करता है। चीन अमेरिका के बाद सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करता है। अमेरिका का रक्षा बजट 950 अरब डॉलर के करीब है। जो चीन के बजट से 4 गुना है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की 100% टैरिफ धमकी पर कनाडाई पीएम की सफाई: बोले- चीन के करीब नहीं जा रहे; हमारे बीच कोई फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार को कहा है कि उनकी सरकार चीन के साथ किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई व्यापार समझौता करने का कोई इरादा भी नहीं है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 15:24:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वेंस की वजह से नहीं हो पाई भारत&#45;अमेरिका ट्रेड डील:US सांसद की ऑडियो रिकॉर्डिंग लीक, ट्रम्प को भी जिम्मेदार ठहराया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की वजह से भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाई। यह दावा अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने किया है। क्रूज की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग लीक हुई है। यह सीक्रेट रिकॉर्डिंग अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सिओस को मिली हैं। रिकॉर्डिंग में क्रूज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी कभी-कभी डील में देरी के लिए जिम्मेदार बताया है। ये बातचीत 2025 के मध्य में दानदाताओं के साथ निजी बैठकों के दौरान की गई थी। रिकॉर्डिंग में क्रूज कहते हैं कि भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर विरोध रहा। जब दानदाताओं ने पूछा कि डील में सबसे ज्यादा अड़चन कौन डाल रहा है, तो क्रूज ने व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कभी-कभी ट्रम्प का नाम लिया। &#039;ट्रम्प को चेताया, चुनाव हार सकते हैं&#039; रिकॉर्डिंग में क्रूज ने कहा कि अप्रैल 2025 में लागू किए गए ट्रम्प के टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। क्रूज के मुताबिक, टैरिफ लागू होने के बाद उन्होंने और कुछ अन्य सीनेटरों ने ट्रम्प से देर रात तक चली फोन कॉल में फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा, लेकिन बातचीत ठीक नहीं रही। क्रूज ने दावा किया कि उन्होंने राष्ट्रपति को चेताया था कि अगर नवंबर 2026 तक किराना सामान की कीमतें 10 से 20% बढ़ गईं, तो रिपब्लिकन पार्टी को चुनावों में भारी नुकसान होगा। क्रूज ने ट्रम्प से कहा- “आप हाउस हारेंगे, सीनेट हारेंगे और अगले दो साल हर हफ्ते महाभियोग झेलेंगे।” इसके जवाब में ट्रम्प ने कथित तौर पर कहा, “दफा हो जाओ, टेड।” रिकॉर्डिंग से रिपब्लिकन नेताओं में मतभेद सामने आए रिकॉर्डिंग से रिपब्लिकन पार्टी के भीतर पारंपरिक फ्री ट्रेड समर्थकों और ‘अमेरिका फर्स्ट’ धड़े के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। क्रूज ने वेंस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे कंजर्वेटिव कमेंटेटर टकर कार्लसन के प्रभाव में हैं। ये मतभेद सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि विदेश नीति और अहम नियुक्तियों तक फैले हुए हैं। हालांकि ऑडियो लीक के बावजूद, सार्वजनिक तौर पर क्रूज और व्हाइट हाउस दोनों ही पार्टी एकता पर जोर दे रहे हैं। क्रूज के प्रवक्ता ने कहा कि सीनेटर प्रशासन के मजबूत सहयोगी हैं और साझा लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं। दावा- मोदी ने फोन नहीं किया इसलिए डील रुकी इससे पहले अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया था कि पीएम मोदी ने ट्रम्प को कॉल नहीं किया, इसकी वजह से भारत के साथ ट्रेड डील नहीं हुई। 8 जनवरी को एक पॉडकास्ट में लुटनिक ने ये बात कही थी। लुटनिक ने कहा था कि “भारत के साथ ट्रेड डील लगभग पूरी हो चुकी थी। भारत को बातचीत फाइनल करने के लिए &#039;तीन शुक्रवार&#039; का समय दिया गया था। ट्रम्प खुद इसे क्लोज करना चाहते थे। इसके लिए बस मोदी को राष्ट्रपति को कॉल करना था। भारतीय पक्ष ऐसा करने में असहज था और मोदी ने कॉल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि डेडलाइन निकल गई।” वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने लुटनिक के बयान को गलत बताया था। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पीएम मोदी और प्रेसिडेंट ट्रम्प 2025 में 8 बार फोन पर बात कर चुके हैं। जायसवाल ने कहा था कि “भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं। कई राउंड नेगोशिएशन हो चुके हैं और कई बार हम डील के करीब पहुंचे हैं।” अमेरिका अब तक भारत पर 50% टैरिफ लगा चुका अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से 25% को वह ‘रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ’ कहता है। जबकि 25% रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। भारत का कहना है कि यह पेनाल्टी गलत है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। दोनों देशों के बीच 2025 की शुरुआत में ही ट्रेड डील का प्रस्ताव रखा गया था, इस पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। भारत पर लगे 25% एक्स्ट्रा टैरिफ हटा सकता है US अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 22 जनवरी को कहा था की ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए 25% एक्स्ट्रा टैरिफ को हटाने पर विचार कर सकता है। उन्होंने अमेरिकी मीडिया वेबसाइट पॉलिटिको को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना काफी कम कर दिया है, इसलिए टैरिफ में राहत देने की गुंजाइश बन रही है। बेसेंट ने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताते कहा था कि भारत पर लगाया गया 25% टैरिफ काफी असरदार रहा है। इसकी वजह से भारत की रूसी तेल खरीद घट गई है। उन्होंने कहा था कि “टैरिफ अभी भी लागू हैं, लेकिन अब इन्हें हटाने का रास्ता निकल सकता है।” ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 15:24:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प ने NATO पर दिए बयान पर सफाई दी:ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ की, कहा&#45; अफगानिस्तान में जो शहीद हुए, वे महान योद्धा</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान युद्ध में NATO की भूमिका पर विवादित बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। शनिवार को उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों की तारीफ करते हुए अफगानिस्तान युद्ध में उनकी कुर्बानियों को याद किया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ब्रिटेन के महान और बेहद बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में 457 ब्रिटिश सैनिक मारे गए, कई गंभीर रूप से घायल हुए और वे दुनिया के सबसे महान योद्धाओं में शामिल थे। ट्रम्प का यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जब उन्होंने इस हफ्ते एक इंटरव्यू में कहा था कि NATO देशों ने अफगानिस्तान में सीमित भूमिका निभाई और वे फ्रंटलाइन से दूर रहे। उनकी इस टिप्पणी से NATO के सहयोगी देशों में नाराजगी फैल गई थी। ब्रिटेन ने ट्रम्प के बयान को अपमानजनक बताया था ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रम्प के बयान को “अपमानजनक और बेहद आपत्तिजनक” बताया। अफगानिस्तान युद्ध में हिस्सा ले चुके प्रिंस हैरी ने भी कहा कि NATO सैनिकों की कुर्बानियों को सम्मान और सच्चाई के साथ याद किया जाना चाहिए। स्टार्मर ने शनिवार को ट्रम्प से फोन पर बात की। डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, बातचीत में अफगानिस्तान में साथ लड़ने वाले ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों की बहादुरी और बलिदान पर चर्चा हुई। ब्रिटिश पीएम ने कहा- आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने NATO देशों से मदद ली 11 सितंबर 2001 को अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था। अल-कायदा के आतंकियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक किया। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों से टकराए, एक विमान पेंटागन से और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में गिरा। इन हमलों में करीब 3,000 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने इसे सिर्फ आतंकी हमला नहीं, बल्कि अपने देश पर सीधा युद्ध बताया। इसी के बाद अमेरिका ने NATO से औपचारिक मदद मांगी। NATO ने पहली बार अपने इतिहास में आर्टिकल 5 लागू किया। इस आर्टिकल के तहत यह माना जाता है कि संगठन के किसी एक सदस्य देश पर हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। आर्टिकल 5 लागू होते ही ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क समेत NATO के कई सदस्य और साझेदार देश अमेरिका के समर्थन में अफगानिस्तान पहुंचे। अमेरिका का कहना था कि अल-कायदा को अफगानिस्तान में तालिबान का संरक्षण मिला हुआ है। इसके बाद करीब 20 साल तक NATO देशों की सेनाएं अमेरिकी फौज के साथ अफगानिस्तान में रहीं। इस दौरान हजारों विदेशी सैनिक तैनात किए गए और सैकड़ों सैनिकों ने अपनी जान गंवाई। NATO ने अफगानिस्तान में दो अभियान चलाए थे अफगानिस्तान में NATO के तहत मुख्य रूप से दो बड़े अभियान चले, जिनमें ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, डेनमार्क सहित दर्जनों देशों के हजारों सैनिकों ने हिस्सा लिया। पहला और सबसे बड़ा अभियान अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (ISAF) था, जो 2001 से 2014 तक चला। इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेश पर शुरू किया गया और 2003 से नाटो ने इसका नेतृत्व संभाला। ISAF का मकसद अफगान सुरक्षा बलों को प्रशिक्षित करना, सुरक्षा प्रदान करना और तालिबान/अल-कायदा के खिलाफ लड़ाई में मदद करना था। इस मिशन में अधिकतम 1,30,000 से ज्यादा सैनिक तैनात थे, जिसमें 51 नाटो और पार्टनर देश शामिल थे। दूसरा अभियान रेजोल्यूट सपोर्ट मिशन था, जो 2015 से 2021 तक चला। यह गैर-लड़ाकू मिशन था, जिसमें अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों (ANDSF) को प्रशिक्षण, सलाह और सहायता दी जाती थी। इसमें भी नाटो के 36 देशों के लगभग 9,000-17,000 सैनिक शामिल रहे। इन अभियानों में ब्रिटेन के 457 सैनिक, कनाडा के 159, फ्रांस के 90, जर्मनी के 62, पोलैंड के 44, डेनमार्क के 44 सैनिक शहीद हुए। यूरोपीय देश बोले- हमने साथ मिलकर लड़ाई की, इसे नहीं भुलाया जा सकता डच विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने ट्रम्प के बयान को झूठा बताया। पोलैंड के पूर्व विशेष बल कमांडर और रिटायर्ड जनरल रोमन पोल्को ने कहा कि ट्रम्प ने हद पार कर दी है। उन्होंने कहा, &quot;हमने इस गठबंधन के लिए खून बहाया, अपनी जानें दीं। हमने साथ मिलकर लड़ाई की लेकिन सभी घर नहीं लौटे।&quot; पोलैंड के रक्षा मंत्री व्लादिस्लाव कोसिनियाक-कामिश ने कहा कि पोलैंड के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और इसे कमतर नहीं दिखाया जा सकता। ब्रिटेन के पूर्व MI6 प्रमुख रिचर्ड मूर ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने CIA के बहादुर अधिकारियों के साथ खतरनाक मिशनों में काम किया और अमेरिका को अपना सबसे करीबी सहयोगी माना। ट्रम्प के बयान पर ब्रिटेन के लिबरल डेमोक्रेट्स नेता एड डेवी ने एक्स पर लिखा कि ट्रम्प ने वियतनाम युद्ध में ड्राफ्ट से बचने के लिए पांच बार छूट ली थी, फिर वे दूसरों के बलिदान पर सवाल कैसे उठा सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 12:13:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कनाडा में पंजाबी युवक की हत्या:कातिलों ने अपनी कार फूंकी, फिर दूसरी गाड़ियों से फरार हुए; कैनेडियन पुलिस को टारगेट किलिंग का शक</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में पंजाबी मूल के युवक की हत्या कर दी गई। युवक वैंकूवर का रहने वाला था। वारदात बर्नाबी इलाके में हुई। वारदात के बाद हमलावरों ने उस गाड़ी में भी आग लगा दी, जिससे वे आए थे। इसके बाद हमलावर वहां से अन्य वाहनों में सवार होकर भाग गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह कार में लगी आग बुझाई। इसके बाद मामले की जानकारी जुटाई। जिस तरह से यह वारदात की गई, उससे पुलिस यह मानकर चल रही है कि मामला टारगेट किलिंग का हो सकता है। इसके अलावा पुलिस इसे गैंगवार से जोड़कर भी देख रही है। उधर, मृतक युवक की पहचान दिलराज सिंह गिल (28 ) के रूप में की गई है। फिलहाल, हत्या की जांच करने वाली खास टीम इंटीग्रेटेड होमिसाइड इन्वेस्टिगेशन टीम (IHIT) ने मामला अपने हाथ में ले लिया। इस टीम ने कई बिंदुओं पर अपनी जांच शुरू की है। कैनेडियन पुलिस ने घटना के बारे में बताई 4 अहम बातें.. कुछ दिन पहले पंजाबी युवती की भी गई थी हत्या कुछ दिन पहले ही पंजाब के संगरूर से परिवार को अच्छी जिंदगी देने के मकसद से कनाडा गई युवती अमनप्रीत की भी उसके दोस्त मनप्रीत सिंह ने हत्या कर दी थी। युवती कनाडा की परमानेंट सिटिजन थी। उत्तर प्रदेश का रहने वाला युवक जबरन उससे शादी करना चाहता था ताकि उसे भी परमानेंट सिटीजनशिप मिल सके। अमनप्रीत ने मनप्रीत सिंह की बात नहीं मानी तो उसकी ईगो हर्ट हो गई। इसलिए उसने अमनप्रीत की हत्या का प्लान बना लिया। उसने अमनप्रीत को मिलने के लिए सुनसान जगह बुलाया। यहां पर उसने अपनी PR के लिए अमनप्रीत को फिर शादी के लिए कहा। अमनप्रीत ने इनकार किया तो फिर से दोनों के बीच बहसबाजी हुई। इसके बाद मनप्रीत ने चाकू निकालकर अमनप्रीत पर हमला कर दिया। गर्दन समेत उसके शरीर के कई हिस्सों पर चाकू से वार किया गया था, जिससे उसकी वहीं मौत हो गई। कत्ल के बाद अमनप्रीत भारत भाग आया। जब उसका नाम उजागर हुआ तो उसने सोशल मीडिया के जरिए परिवार को धमकाया। जब वे पीछे नहीं हटे तो पंजाब के संगरूर में परिवार को धमकाने के लिए हथियार लेकर घर तक पहुंच गया। हालांकि यही गलती उसे भारी पड़ गई। संगरूर पुलिस ने उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर धमकाने का केस दर्ज कर लिया। इसके बाद वह फिर संगरूर में धमकी देने आया तो पुलिस ने उसे दबोच लिया। -------------------- ये खबर भी पढ़ें... कनाडा में अमृतसर के युवक की गोली मारकर हत्या:परिवार को दोस्तों पर शक, 3 साल पहले स्टडी वीजा पर गया था पंजाब के अमृतसर के युवक की कनाडा में हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उस पर फायरिंग कर दी। परिजनों को फोन पर उसकी हत्या की सूचना मिली। उन्होंने दोस्तों पर हत्या का शक जताया है। परिवार ने सरकार से बेटे के शव को घर वापस लाने में मदद करने की अपील की है। (पूरी खबर पढ़ें) ]]></description>
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<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 12:13:38 +0530</pubDate>
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<title>कनाडाई पीएम बोले&#45; लोग स्वदेशी सामान खरीदें:ट्रम्प की 100% टैरिफ धमकी के बाद कहा&#45; हमारी अर्थव्यवस्था पर बाहरी खतरा</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रम्प की टैरिफ धमकी के बाद देशवासियों से स्वदेशी सामान खरीदने की अपील की है। कार्नी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कनाडा की अर्थव्यवस्था पर इस वक्त बाहरी खतरा है, इसलिए जो हमारे नियंत्रण में है, उसी पर ध्यान देना होगा। कार्नी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा को चीन के साथ व्यापार समझौते करने पर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाए, तो अमेरिका कनाडाई सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा। उन्होंने कहा, ट्रम्प ने कनाडाई पीएम को गवर्नर कार्नी कहा ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री को ‘गवर्नर कार्नी’ कहा। उन्होंने लिखा कि अगर कार्नी कनाडा को चीन के लिए अमेरिका में सामान भेजने का ‘ड्रॉप ऑफ पोर्ट’ बनाना चाहते हैं, तो यह गलतफहमी है। ट्रम्प ने आगे कहा कि चीन कनाडा के कारोबार, सामाजिक ढांचे और जीवनशैली को पूरी तरह नष्ट कर देगा। इससे पहले शुक्रवार को भी ट्रम्प ने कहा था कि चीन, कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के &#039;गोल्डन डोम&#039; मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। अमेरिका-कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर अमेरिका और कनाडा दुनिया के उन गिने-चुने देशों में हैं, जो एक-दूसरे के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर हैं। अमेरिका की सरकारी ट्रेड बॉडी USTR के मुताबिक दोनों देशों के बीच हर दिन औसतन 2 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। अमेरिका को मिलने वाला कच्चा तेल, गैस और बिजली का बड़ा हिस्सा कनाडा से आता है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और कृषि उत्पाद भी अमेरिका में कनाडा से बड़े पैमाने पर जाते हैं। कनाडा अपने कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका को भेजता है। मशीनरी, टेक्नोलॉजी, दवाइयां और उपभोक्ता सामान के मामले में कनाडा अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से रिश्ते गहरे हुए अमेरिका और कनाडा बीच गहरे व्यापारिक रिश्तों की नींव 1989 में पड़ी, जब पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ। 1994 में NAFTA लागू होने के बाद यह रिश्ता और मजबूत हुआ। इससे ऑटो, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सप्लाई चेन अमेरिका-कनाडा सीमा के आर-पार जुड़ गई। 2020 में NAFTA की जगह USMCA लागू किया गया। इस समझौते के तहत ज्यादातर सामान बिना टैरिफ के आयात-निर्यात होता है और ट्रेड को ज्यादा नियमबद्ध बनाया गया। अमेरिका और कनाडा की कई फैक्ट्रियां एक ही प्रोडक्ट पर साथ-साथ काम करती हैं। उदाहरण के तौर पर एक कार का इंजन अमेरिका में बनता है, उसके पार्ट्स कनाडा में फिट होते हैं और फिर वह गाड़ी दोबारा अमेरिका लौटती है। ट्रम्प कनाडा और चीन के बीच समझौते से नाराज कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा की और वहां व्यापार समझौते किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प इससे नाराज बताए जा रहे हैं। करीब एक साल पहले कार्नी खुद चीन को कनाडा के सामने “सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा” बता चुके थे, लेकिन एक साल बाद हालात बदल चुके हैं। चीन दौरे पर उन्होंने कई अहम करार किए हैं। इसमें कनाडा, चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) पर लगाए गए टैरिफ को कम करेगा। कनाडा ने 2024 में अमेरिका के साथ मिलकर चीनी गाड़ियों पर 100% टैरिफ लगाया था। अब नए समझौते के तहत इस टैरिफ को घटाकर 6.1% किया जा रहा है। हालांकि यह हर साल 49 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू होगा। 5 साल में इसे बढ़ाकर 70 हजार तक किया जा सकता है। इसके बदले में चीन, कनाडा के कुछ अहम कृषि उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को घटाएगा। पहले यह टैरिफ 84% तक था, जिसे अब घटाकर 15% कर दिया गया है। साल के अंत तक इसे जीरो किया जा सकता है। कार्नी के भाषण से नाराज हुए ट्रम्प कनाडाई पीएम ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ पर भाषण दिया था। इसे लंबे समय से किसी भी राजनेता के दिए गए सर्वश्रेष्ठ भाषणों में से एक बताया जा रहा है। कार्नी ने बड़े देशों के दबदबे के खिलाफ अपनी राय रखी। उन्होंने कहा- हमें बार-बार याद दिलाया जाता है कि आज की दुनिया बड़ी ताकतों की आपसी होड़ का दौर है। जो नियमों पर चलने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था थी, वह अब कमजोर पड़ रही है। ताकतवर देश वही करते हैं जो वे करना चाहते हैं, और छोटे या कमजोर देशों को उसे झेलना पड़ता है। कार्नी आगे कहते हैं कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जो कहानी सुनाई जाती रही है, वह पूरी तरह सच नहीं थी। जब बड़े देशों को फायदा होता है, तो वे खुद के लिए नियमों से छूट ले लेते हैं। व्यापार के नियम सब पर बराबर लागू नहीं होते। वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून भी सख्ती से इस बात पर निर्भर करता है कि मामले में आरोपी कौन है और पीड़ित कौन। उन्होंने कहा कि महाशक्तियां अकेले चलने का जोखिम उठा सकती हैं। उनके पास बड़ा बाजार होता है, मजबूत सेना होती है और शर्तें तय करने की ताकत भी होती है। लेकिन कमजोर देशों के पास ये चीजें नहीं होतीं। जब ऐसे देश किसी बहुत ताकतवर देश से आमने-सामने बातचीत करते हैं, तो वे कमजोर स्थिति में होते हैं। इसलिए उन्हें वही मानना पड़ता है, जो सामने वाला देश देने को तैयार होता है। पहले भी आमने-सामने आ चुके ट्रम्प-कार्नी मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ता तनाव नया नहीं है। पहले भी दोनों नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ग्रीनलैंड को लेकर कार्नी ने ट्रम्प को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता और यह अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क का है। कार्नी ने उस समय अमेरिका समेत नाटो के सभी सहयोगी देशों से अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करने की अपील की थी और साफ किया था कि कनाडा डेनमार्क की संप्रभुता के साथ खड़ा है। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 12:13:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>कनाडाई, पीएम, बोले-, लोग, स्वदेशी, सामान, खरीदें:ट्रम्प, की, 100, टैरिफ, धमकी, के, बाद, कहा-, हमारी, अर्थव्यवस्था, पर, बाहरी, खतरा</media:keywords>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; कनाडा को खा जाएगा चीन:हमारे बजाय चीन से संबंध बढ़ा रहा; कनाडा के गोल्डन&#45;डोम प्रोजेक्ट का विरोध करने पर भड़के</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि चीन कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के &#039;गोल्डन डोम&#039; मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा हमारे बजाए चीन से दोस्ती बढ़ा रहा, जो उन्हें पहले ही साल में बर्बाद कर देगा। कनाडा पर आरोप लगाते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह विवाद तब और तेज हो गया जब कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा की और वहां व्यापार समझौते किए। इनमें कनाडाई कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करना और चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोटा शामिल है। ट्रम्प बोले- कनाडा अमेरिका के कारण जिंदा है डेवोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) पर गुरुवार को ट्रम्प ने अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा, कनाडा को अमेरिका से बहुत सारे फायदे मिलते हैं, उन्हें आभारी होना चाहिए। ट्रम्प ने कार्नी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कनाडा अमेरिका के कारण जीवित है। अगली बार जब तुम बयान दोगे तो यह याद रखना मार्क। दरअसल ट्रम्प कार्नी के एक बयान से नाराज हो गए थे। कार्नी ने 20 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। कार्नी बोले- अपनी वजह से फल-फूल रहे कार्नी ने 22 जनवरी को फिर ट्रम्प को का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा- कनाडा और अमेरिका ने अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में शानदार पार्टनरशिप निभाई है। लेकिन कनाडा अमेरिका के कारण नहीं जीवित है। कनाडा अपने कनाडाई होने के कारण फल-फूल रहा है। इस बयान के बाद ट्रम्प ने कार्नी से गाजा &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; में शामिल होने का न्योता भी वापस ले लिया। पहले भी आमने-सामने आ चुके ट्रम्प-कार्नी मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ता तनाव नया नहीं है। पहले भी दोनों नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ग्रीनलैंड को लेकर कार्नी ने ट्रम्प को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता और यह अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क का है। कार्नी ने उस समय अमेरिका समेत नाटो के सभी सहयोगी देशों से अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करने की अपील की थी और साफ किया था कि कनाडा डेनमार्क की संप्रभुता के साथ खड़ा है। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। कनाडा अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर रहा कनाडा ने अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिशें शुरू कर दी थी। वे अब चीन के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका की तरफ से कनाडा पर सीधा सैन्य हमला होना मुश्किल है, लेकिन आर्थिक दबाव डाला जा सकता है। कार्लेटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर स्टेफनी कार्विन ने कहा कि अमेरिका अब पहले से ज्यादा आसानी से कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर ट्रम्प के दबदबे के बाद यह साफ है कि अमेरिका वेस्टर्न हेमिस्फेयर में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए ज्यादा आक्रामक हो सकता है। कनाडा और चीन ने ट्रेड, एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में समझौते किए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा गए थे। यह चार दिन की आधिकारिक यात्रा थी, जिसमें उन्होंने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और 16 जनवरी 2026 को व्यापार समझौते की घोषणा की गई। यह 2017 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली प्रमुख यात्रा थी। इसका मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना, व्यापार, ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में नई साझेदारी बनाना था। इसे स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का हिस्सा बताया गया। इस समझौते के तहत कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर लगे 100% टैरिफ को घटाकर 6.1% (मोस्ट-फेवर्ड-नेशन रेट) कर दिया है। फिलहाल सालाना केवल 49,000 वाहनों तक सीमित कोटा लागू किया गया है। क्या है ट्रम्प का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट, जिसका कनाडाई PM ने विरोध किया अमेरिका ने इजराइल के आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तर्ज पर अपना डिफेंस सिस्टम गोल्डन डोम बनाने का फैसला किया है। ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के एक हफ्ते बाद ही गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। यह प्रोजेक्ट करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपये) का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए 1200 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। इसकी मदद से अमेरिका दुश्मन मिसाइलों का अंतरिक्ष में ही पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 400 से 1000 सैटेलाइट्स दुश्मन मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए तैनात किए जाएंगे। वहीं, लगभग 200 इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स उन मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही मार गिराने के लिए तैयार की जाएंगी। यह डिफेंस सिस्टम दुनिया के किसी भी हिस्से से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा। ट्रम्प ने दावा किया है कि गोल्डन डोम अंतरिक्ष से हुए हमलों को भी रोकने के काबिल होगा। इसमें सर्विलांस सैटेलाइट और इंटरसेप्टर सैटेलाइट दोनों शामिल होंगे। ट्रम्प ने जनवरी में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। उन्होंने कहा है कि यह सिस्टम 2029 तक काम करने लगेगा। प्रोजेक्ट की कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के वरिष्ठ जनरल माइकल ग्यूटलेन को सौंपी गई है। ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर चर्चा जारी ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रुथ पर लिखा कि ग्रीनलैंड से जुड़े गोल्डन डोम मामले पर और चर्चा जारी है। आगे की जानकारी जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, उपलब्ध कराई जाएगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश सचिव मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अन्य जिम्मेदार लोग बातचीत करेंगे और सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे। गोल्डन डोम अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट है। यह इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है। गोल्डन डोम का मकसद चीन, रूस जैसे देशों से आने वाले खतरे से अमेरिका को बचाना है। ट्रम्प कई मौकों पर ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम रक्षा प्रोजेक्ट के लिए अहम बता चुके है। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका: तेजी से बढ़ रहा जंगी बेड़ा; ईरानी नेता बोले- खाड़ी के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस हमारे निशाने पर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:51:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में शादी समारोह में हमलावर ने विस्फोट किया, 7 की मौत, 25 घायल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान जिले में शुक्रवार को एक शादी समारोह के दौरान आत्मघाती हमलावर ने धमाका कर दिया। इस हमले में सात लोग मारे गए और 25 घायल हो गए। हमला नूर आलम महसूद नाम के एक प्रो-गवर्नमेंट कम्युनिटी लीडर नूर आलम महसूद के घर पर हुआ। जहां शादी की खुशी मनाई जा रही थी। पुलिस के अनुसार, मेहमान नाच रहे थे तभी यह धमाका हुआ, जिससे जगह पर अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट इतना जोरदार था कि छत ढह गई, जिससे मलबे के नीचे फंसे लोगों को बचाना मुश्किल हो गया। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में एक पूर्व तालिबान सदस्य भी शामिल था। बाकी मृतक उसके रिश्तेदार बताए गए हैं। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, शांति समिति के नेता वाहीदुल्लाह महसूद उर्फ जिगरी महसूद भी इस हमले में मारे गए हैं। सभी घायलों और मृतकों को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इससे पहले इसी महीने खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में शांति समिति के चार सदस्यों की हत्या हुई थी और नवंबर 2025 में भी इसी प्रांत में शांति समिति के कार्यालय पर हमला हुआ था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- कनाडा को खा जाएगा चीन:हमारे बजाय चीन से संबंध बढ़ा रहा; कनाडा के गोल्डन-डोम प्रोजेक्ट का विरोध करने पर भड़के 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि चीन कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के &#039;गोल्डन डोम&#039; मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा हमारे बजाए चीन से दोस्ती बढ़ा रहा, जो उन्हें पहले ही साल में बर्बाद कर देगा। कनाडा पर आरोप लगाते हुए ट्रम्प ने कहा कि वह उत्तर अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। पूरी खबर पढ़ें… यूरोप की सबसे ताकतवर फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी टूटने के करीब:मेलोनी के साथ दोस्ती बढ़ा रहे जर्मन चांसलर, मैक्रों से क्यों हुए नाराज द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जर्मनी और फ्रांस यूरोप की सबसे ताकतवर जोड़ी मानी जाती रही है। लेकिन अब इसमें दरार आने लगी है। यूरो न्यूज के मुताबिक जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अब इटली की दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ दोस्ती बढ़ा रहे हैं। मर्ज ने इसका इशारा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से ही कर दिया था। उन्होंने कहा कि 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी समिट में वह और मेलोनी मिलकर यूरोपीय यूनियन को बेहतर और अलग तरीके से चलाने के लिए कुछ नए सुझाव सामने रखेंगे। पूरी खबर पढ़ें… क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका:तेजी से बढ़ रहा जंगी बेड़ा; ईरानी नेता बोले- खाड़ी के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस हमारे निशाने पर अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने ऐसे सैन्य विकल्पों की मांग की है, जिनका असर ‘निर्णायक’ हो। रक्षा मंत्रालय पेंटागन और व्हाइट हाउस ने इन पर काम करना शुरू कर दिया है। इनमें ईरानी शासन को सत्ता से हटाने की योजना भी शामिल है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:51:18 +0530</pubDate>
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<title>क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका:तेजी से बढ़ रहा जंगी बेड़ा; ईरानी नेता बोले&#45; खाड़ी के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस हमारे निशाने पर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने ऐसे सैन्य विकल्पों की मांग की है, जिनका असर ‘निर्णायक’ हो। रक्षा मंत्रालय पेंटागन और व्हाइट हाउस ने इन पर काम करना शुरू कर दिया है। इनमें ईरानी शासन को सत्ता से हटाने की योजना भी शामिल है। दूसरी तरफ आज अमेरिकी जंगी बेडा USS अब्राहम लिंकन भी मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है। इसके चलते आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका ईरान पर कोई अचानक सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी गतिविधियों के जवाब में ईरानी सुप्रीम काउंसिल के जावेद अकबरी ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सभी सैन्य अड्‌डे ईरान के निशाने पर हैं। हमारी मिसाइलें आदेश के इंतजार में दुश्मन पर गरजने को तैयार हैं। ईरान के कई शहर USS अब्राहम लिंकन के स्ट्राइक रेंज में राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) के जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पहुंच गया है। USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक USS अब्राहम लिंकन 20 नॉट से ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ा और बाद में अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ऑटोमैटिक पहचान सिस्टम बंद कर दिया। इसी रफ्तार से चलने पर आज मिडिल ईस्ट में पहुंच सकता है। अब्राहम लिंकन के साथ कई डिस्ट्रॉयर जहाज और न्यूक्लियर पनडुब्बियां भी चल रही हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर पर 48 से 60 F/A-18 फाइटर जेट मौजूद हैं। ये बिना ईंधन भरे 2300 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकते हैं। जॉर्डन में फाइटर जेट्स तैनात किए रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक US एयरफोर्स ने जॉर्डन में कम से कम 12 F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि और विमान भी रास्ते में हैं। 20 से 22 जनवरी के बीच अमेरिकी C-17 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान कई बार जॉर्डन के मफराक अल-खवाजा एयरबेस पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों से पैट्रियट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम लाए गए हैं। इनका मकसद इजराइल को ईरान की जवाबी कार्रवाई से बचाना है, क्योंकि तेहरान पहले ही बदले की धमकी दे चुका है। इसके अलावा हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर लगातार कार्गो विमान उतर रहे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका संभावित सैन्य ऑपरेशन के लिए रसद और सैनिकों की तैनाती कर रहा है। एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को ईरान के संभावित हमले से बचाया जा सके। ईरान बोला- हमारी सेना की उंगली ट्रिगर पर है एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मिडिल ईस्ट में उसके सभी सैन्य अड्डे और इजराल के केंद्र ईरान के निशाने पर होंगे। दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर ने मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि उनकी सेना की उंगली ट्रिगर पर है। गुरुवार को एक लिखित बयान में पाकपुर ने कहा कि ईरान की सेना पहले से ज्यादा तैयार है। इजराइली मंत्री बोले- ईरान को 7 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ फिर से कोई हमला किया, तो उसे पहले से “सात गुना ज्यादा ताकत” से जवाब दिया जाएगा। स्विट्जरलैंड के दावोस में मीडिया से बात करते हुए बरकात ने कहा कि इजराइल पहले भी ईरान को निशाना बना चुका है और आगे किसी भी उकसावे पर जवाब और ज्यादा कठोर होगा। उन्होंने दावा किया कि पिछली सैन्य कार्रवाई में इजराइल ने ईरान की सैन्य कमजोरी को उजागर कर दिया है। ईरान में 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत रॉयटर्स ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया ईरान में अब तक 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। ईरान में 28 दिसंबर को मंहगाई के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो बाद में पूरे देश में फैल गए। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, अब तक 4519 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 4,251 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। 9,049 मौतों की अभी जांच चल रही है। ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कह चुके ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत की है। उन्होंने पिछले हफ्ते पोलिटिको से कहा, “ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।” उन्होंने ईरानी नागरिकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने और संस्थानों पर कब्जा करने की अपील भी की थी। हालांकि अगले दिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बंदियों को फांसी देने की योजना फिलहाल रोकी गई है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर ईरान में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरानी जनता को हुए नुकसान और मौतों के जिम्मेदार हैं। इसके जवाब में ट्रम्प ने खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान की तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं और वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है। --------------------------- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. ईरान के राष्ट्रपति बोले- खामेनेई पर हमले को जंग मानेंगे:ट्रम्प ने कहा था- प्रदर्शनकारियों की हत्याएं जारी रहीं तो हम दखल दे सकते हैं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे ईरान के खिलाफ जंग माना जाएगा। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:51:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>रिपोर्ट&#45;ट्रम्प ने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल कर फैमिली बिजनेस बढ़ाया:एक साल में संपत्ति ₹12,800 करोड़ बढ़ी, भारत में 8 प्रोजेक्ट चल रहे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में दावा किया कि वे अमेरिका को फिर से महान और अमीर बना रहे हैं। उन्होंने अपनी नीतियों और टैरिफ के कारण 16.48 लाख करोड़ रुपये के निवेश आने का दावा किया। वहीं 20 जनवरी को आई न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ वॉर का बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा। इस दौरान ट्रम्प की निजी संपत्ति में जबरदस्त इजाफा हुआ है। NYT के अनुसार, जनवरी 2025 में दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद पिछले एक साल में ट्रम्प की संपत्ति कम से कम करीब 12,810 करोड़ रुपए बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि असली कमाई इससे ज्यादा भी हो सकती है, क्योंकि कई मुनाफे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 8 ट्रम्प-ब्रांडेड प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं या प्लान्ड हैं, जिनमें रेसिडेंशियल टावर्स, कमर्शियल स्पेस और अन्य शामिल हैं। पुणे में बन रहा ट्रम्प वर्ल्ड सेंटर, 289 मिलियन डॉलर की कमाई का अनुमान रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प ने राष्ट्रपति के पद की शक्ति का इस्तेमाल कर खुद और परिवार को फायदा पहुंचाया। ट्रम्प विदेशी सरकारों और कंपनियों से ऐसे सौदे कर रहे हैं जिनसे उनके परिवार को पैसा मिल रहा है। ट्रम्प की कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स से आया है। ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन 20 से ज्यादा विदेशी प्रोजेक्ट्स चला रहा है। उन्होंने &#039;ट्रम्प&#039; नाम को लाइसेंस देकर करीब 210 करोड़ रुपये कमाए, जिसमें ओमान में लग्जरी होटल और सऊदी अरब में गोल्फ कोर्स शामिल हैं। भारत में पहला ट्रम्प-ब्रांडेड कमर्शियल प्रोजेक्ट ट्रम्प वर्ल्ड सेंटर पुणे में बन रहा है। इससे ट्रम्प को 289 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई होने का अनुमान है। गुड़गांव में रेसिडेंशियल और होटल प्रोजेक्ट्स लिस्टेड हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले ट्रम्प ने भारत को डेड इकॉनमी कहा था। टैरिफ के बदले वियतनाम से गोल्फ प्रोजेक्ट शुरू करने की डील की वियतनाम पर पिछले साल अमेरिका ने 46% टैरिफ लगाया गया था। टैरिफ कम करने के बदले ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन को हनोई में 1.5 बिलियन डॉलर का गोल्फ प्रोजेक्ट शुरू करने की मंजूरी मिली और टैरिफ घटाकर 20% कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए स्थानीय कानूनों को भी दरकिनार किया गया। इसी तरह, इंडोनेशिया में अक्टूबर 2025 में एक वायरल वीडियो में राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो को ट्रम्प के बेटे एरिक से मिलने की बात करते सुना गया। एरिक ट्रम्प परिवार का बिजनेस संभाल रहे हैं। इंडोनेशिया में मार्च में पहला ट्रम्प-ब्रांडेड गोल्फ क्लब खुला। वहां एक और प्रॉपर्टी और बाली में एक रिसॉर्ट भी ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन की वेबसाइट पर लिस्टेड हैं। क्रिप्टोकरेंसी से ट्रम्प फैमिली को सबसे ज्यादा कमाई हुई ट्रम्प की सबसे बड़ी कमाई क्रिप्टोकरेंसी से हुई है। पिछले साल उनकी फैमिली से जुड़ी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल कंपनी और एक मीम कॉइन से कम से कम 867 मिलियन डॉलर आए। 2025 में UAE की एक फर्म ने ट्रम्प की कंपनी में 2 बिलियन डॉलर डाले, जो विश्व लिबर्टी फाइनेंशियल मानी जाती है। कुछ हफ्तों बाद ट्रम्प ने UAE को सेमीकंडक्टर चिप्स बेचने की मंजूरी दी। ट्रम्प और उनके बेटों के पास वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल में 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा के स्टेक हैं, जो परिवार की सबसे बड़ी संपत्ति बन गई है। पाकिस्तान के साथ भी एक बड़ा क्रिप्टो डील हुआ है, जो 17,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। अमेजन ने 28 मिलियन डॉलर में खरीदे डॉक्यूमेंट्री मेलानिया के राईट इसके अलावा, ट्रम्प और मेलानिया ने फिल्ममेकिंग से भी कमाई की। अमेजन ने मेलानिया के आने वाले डॉक्यूमेंट्री ‘मेलानिया’ के राईट के लिए 28 मिलियन डॉलर दिए। साथ ही, टेक और मीडिया कंपनियों जैसे एक्स, मेटा, यूट्यूब और पैरामाउंट ने ट्रम्प के खिलाफ मुकदमों को सेटल करने के लिए कुल 90.5 मिलियन डॉलर दिए। यूट्यूब ने ट्रम्प के चैनल सस्पेंड करने पर 24.5 मिलियन डॉलर, जबकि पैरामाउंट ने कमला हैरिस के इंटरव्यू एडिट मामले में 16 मिलियन डॉलर चुकाए। ट्रम्प ने सालभर में ₹18 हजार करोड़ चंदा लिया ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर चंदा भी जुटाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच में सामने आया है कि चुनाव के बाद ट्रम्प और उनके करीबियों ने करीब 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपए) अलग-अलग फंड और योजनाओं के लिए इकट्ठा किए। यह रकम उनके इलेक्शन कैंपेन के लिए जुटाई गई राशि से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कागजात, फंडिंग रिकॉर्ड और कई लोगों से बातचीत करके पता लगा कि कम से कम 346 बड़े दानदाता ऐसे हैं, जिनमें से हर एक ने 2.5 लाख डॉलर या उससे ज्यादा का चंदा दिया। इन लोगों से ही करीब 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम आई। इनमें से लगभग 200 दानदाता ऐसे हैं, जिन्हें या जिनके कारोबार को ट्रम्प सरकार के फैसलों से फायदा मिला। इनमें सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे 6 भारतवंशी बिजनेसमैन शामिल हैं। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि यह साबित करना मुश्किल है कि किसी ने पैसा दिया और बदले में सीधा फायदा मिला, लेकिन इतना जरूर है कि पैसे और फायदों का यह रिश्ता सवाल खड़े करता है। एयरक्राफ्ट समेत कई लग्जरी गिफ्ट्स भी ट्रम्प की प्रॉपटी का हिस्सा ट्रम्प को अपने कार्यकाल के दौरान कई लग्जरी गिफ्ट्स भी मिले। जैसे कतर से 400 मिलियन डॉलर का एयरक्राफ्ट, जिसे &#039;पैलेस ऑन व्हील्स&#039; कहा जा रहा है। ट्रम्प इसे एयर फोर्स वन (निजी प्लेन) के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं और ऑफिस छोड़ने के बाद भी रखना चाहते हैं। यह गिफ्ट ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन के दोहा में लग्जरी गोल्फ रिसॉर्ट डील के कुछ हफ्ते बाद आया। NYT के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई और किराना कीमतों में बढ़ोतरी के बीच ट्रम्प की तेजी से बढ़ती निजी संपत्ति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में उनका पद सिर्फ बिजनेस बन कर रह गया है। अमेरिका में एक सामान्य अमेरिकी परिवार की औसत सालाना इनकम करीब 83,000 डॉलर (लगभग 76.7 लाख रुपये) है। ट्रम्प की एक साल की कमाई इससे 16,720 गुना ज्यादा है। सरकारी खजाने में जमा होते हैं विदेशी गिफ्ट ]]></description>
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<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 09:35:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका आज वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की मेंबरशिप छोड़ेगा:WHO का ₹2 हजार 380 करोड़ बकाया; अमेरिका बोला&#45; भुगतान नहीं करेंगे, जरूरत से ज्यादा दे चुके</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका आज आधिकारिक तौर पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) से बाहर हो जाएगा। अमेरिका पर WHO की करीब 2 हजार 380 करोड़ रुपए से ज्यादा की फीस बकाया है। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन का कहना है कहा कि वे कोई भुगतान नहीं करेंगे क्योंकि WHO को पहले ही जरूरत से ज्यादा दिया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले से अमेरिका के साथ-साथ दुनिया के हेल्थ सिस्टम पर असर पड़ सकता है। इसे अमेरिकी कानून के खिलाफ भी माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2025 में राष्ट्रपति बनने के पहले ही दिन WHO से बाहर होने का फैसला किया था। गुरुवार को अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि WHO बीमारियों को रोकने, संभालने और जानकारी शेयर करने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। अमेरिका बोला- संगठन छोड़ने से पहले भुगतान करना जरूरी नहीं अमेरिकी कानून के मुताबिक किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से बाहर होने के लिए एक साल पहले नोटिस देना और सभी बकाया भुगतान करना जरूरी होता है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने इस बात का खंडन किया कि कानून में ऐसी कोई शर्त है कि निकासी से पहले कोई भी भुगतान करना जरूरी है। WHO को दी जाने वाली अमेरिकी मदद रोकी अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति ने WHO को भविष्य में दी जाने वाली किसी भी तरह की अमेरिकी सरकारी मदद और संसाधनों पर रोक लगा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी लोग पहले ही संगठन को काफी पैसा दे चुके हैं। पिछले एक साल से कई ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट्स अमेरिका से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील कर रहे हैं। इसी महीने WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका फिर से WHO में शामिल होगा और उसका बाहर जाना अमेरिका और दुनिया दोनों के लिए नुकसान है। एक्सपर्ट्स ने कानून का उल्लंघन बताया
WHO ने बताया है कि अमेरिका ने 2024 और 2025 की फीस अब तक नहीं दी है। फरवरी में होने वाली WHO की कार्यकारी बोर्ड बैठक में अमेरिका के बाहर जाने और उसके असर पर चर्चा होगी। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन ने कहा कि यह साफ तौर पर अमेरिकी कानून का उल्लंघन है, लेकिन इसके बावजूद ट्रम्प इससे बच सकते हैं। बिल गेट्स बोले- दुनिया को WHO की जरूरत दावोस में रॉयटर्स से बातचीत में गेट्स फाउंडेशन के प्रमुख बिल गेट्स ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका जल्दी WHO में लौटेगा। उन्होंने कहा कि वह इसके लिए आवाज उठाते रहेंगे, क्योंकि दुनिया को WHO की जरूरत है। WHO पर आर्थिक दबाव बढ़ा अमेरिका के बाहर जाने से WHO को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने अपनी मैनेजमेंट टीम आधी कर दी है और कई गतिविधियों में कटौती की है। अमेरिका WHO का सबसे बड़ा दानदाता रहा है और संगठन के कुल बजट का करीब 18% देता था। WHO ने कहा है कि इस साल के मध्य तक उसे अपने करीब एक चौथाई कर्मचारियों की संख्या कम करनी पड़ सकती है। WHO ने बताया कि वह पिछले एक साल से अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा था और जानकारी शेयर कर रहा था, लेकिन आगे यह सहयोग कैसे चलेगा यह साफ नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स ने कहा कि इससे अमेरिका, WHO और पूरी दुनिया के लिए खतरे बढ़ सकते हैं। ब्लूमबर्ग फिलांथ्रपीज की हेल्थ एक्सपर्ट केली हेनिंग ने कहा कि अमेरिका के बाहर जाने से उन व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचेगा जिन पर दुनिया बीमारियों को पहचानने, रोकने और उनसे लड़ने के लिए भरोसा करती है। ----------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलेगा:इसमें UN की 31 एजेंसी शामिल; भारत की पहल से बना सोलर अलायंस भी छोड़ेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को आधिकारिक रूप से बाहर निकालने की घोषणा की है। द गार्डियन के मुताबिक इसमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र (Non-UN) संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 09:35:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ब्राजील के राष्ट्रपति फरवरी में भारत आएंगे, छह महीने में पीएम मोदी और लूला के बीच तीसरी बातचीत</title>
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<description><![CDATA[ पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने और ट्रम्प प्रशासन की आर्थिक नीतियों से निपटने पर चर्चा की। पीछले छह महीने में यह पीएम मोदी और लूला के बीच तीसरी बातचीत है। मोदी से बातचीत के बाद लूला ने X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि वे 19 से 21 फरवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे के दौरान ब्राजील-भारत बिजनेस फोरम आयोजित किया जाएगा। साथ ही नई दिल्ली में APEX ऑफिस का उद्घाटन भी किया जाएगा, जिससे व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा कि लूला से बात करके खुशी हुई। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी में अब तक आई मजबूत गति की समीक्षा की और इसे आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। मोदी ने कहा कि वे जल्द भारत में लूला का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 09:35:32 +0530</pubDate>
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<title>यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी:अगले हफ्ते दिल्ली में डील होगी; EU बोला&#45; भारत हमारे लिए जरुरी है</title>
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<description><![CDATA[ यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे। EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने बुधवार को यूरोपीय संसद में कहा कि, यह साझेदारी एक बड़े रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा होगी। इसे आगामी नई दिल्ली में होने वाली EU–भारत शिखर सम्मेलन में साइन करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), डिफेंस एंड सिक्योरिटी डील, साइबर सिक्योरिटी, समद्री सुरक्षा और काउंटर टेररिज्म शामिल है। यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत आ रहे हैं। वे 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। भारत-EU शिखर सम्मेलन अगले दिन 27 जनवरी को होगा। कल्लास बोलीं- एग्रीमेंट आतंकवाद से मुकाबले में मददगार काजा कल्लास ने कहा कि यूरोप भारत के साथ एक नए और मजबूत एजेंडे पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। कल्लास ने बताया, इस समझौते से समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला और साइबर रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। मैं अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले EU-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान इस पर साइन करने को लेकर उत्सुक हूं। भारत आ रहे EU के प्रतिनिधिमंडल में लगभग 90 सदस्य शामिल होंगे। इनमें काजा कल्लास, ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक और कई डायरेक्टर्स रहेंगे। कैसे साइन होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट? फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन (FTA) करने के लिए पहले दोनों देश कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करेंगे। पहले यूरोपीय संसद को हां करनी होगी। यूरोपीय काउंसिल की मंजूरी के बाद ट्रेड कमिश्नर सेफकोविक इसे भारत के सामने साइन के लिए पेश करेंगे। समिट के दौरान भारत और EU 2030 तक के लिए एक राजनीतिक एजेंडा भी पेश करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल दोनों देश अभी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे विवादित मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए बात कर रहे हैं। CBAM के तहत स्टील और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन टैरिफ के लिए बनाए गए नियम है। अगर कोई देश बहुत प्रदूषण करके सामान बनाता है। फिर उसे यूरोप में लाया जाता है, तो यूरोप उस पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है। EU ने इस पॉलिसी को लेकर अब तक कोई बदलाव नहीं किया है। दोनों देश इसका हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं। EU-भारत का साथ मिलकर करना फायदेमंद कल्लास ने कहा है कि आज की खतरनाक दुनिया में मिलकर काम करना दोनों के लिए फायदेमंद होगा। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बाजार खुलेगा, जिससे देशों के सामान पर टैक्स और रुकावटें कम होंगी। इसकी वजह से ज्यादा कंपनियां और व्यापारी एक-दूसरे के देश में सामान बेच और खरीद सकते हैं। जिससे निर्यात भी बढ़ेगा। इसके अलावा साफ तकनीक, दवा और सेमीकंडक्टर के सहयोग में भी मदद होगी। नौकरी और पेशेवरों की आवाजाही इस नए एजेंडे का तीसरा हिस्सा है। कल्लास ने बताया कि दोनों देश सीजनल वर्कर्स, स्टूडेंट्स, शोधकर्ताओं और कुशल कामगार की आवाजाही आसान करने के लिए भी समझौता करेंगे। इससे तकनीक और रिसर्च में सहयोग बढ़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:PAK सांसद एक साल तक संपत्ति की जानकारी छिपा सकेंगे; नेशलन असेंबली में बिल पास</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने बुधवार को एक बिल पास किया, जिसके तहत सांसद अब अपनी और अपने परिवार की संपत्तियों का ब्योरा एक साल तक सार्वजनिक नहीं कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम सांसदों और उनके परिजनों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रावधान तभी लागू होगा, जब यह माना जाए कि किसी सांसद या उसके परिवार की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा उनकी जान या सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे मामलों में असेंबली के स्पीकर या सीनेट के चेयरमैन को संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक न करने का अधिकार होगा। हालांकि, सांसद को अपनी संपत्तियों और देनदारियों का पूरा और सही विवरण गोपनीय रूप से चुनाव आयोग को देना अनिवार्य होगा। यह छूट अधिकतम एक साल के लिए दी जा सकेगी। अभी तक नेशनल असेंबली, सीनेट और प्रांतीय विधानसभाओं के सभी सदस्यों को हर साल 31 दिसंबर तक अपनी संपत्तियों और देनदारियों का पूरा विवरण पाकिस्तान के चुनाव आयोग को देना होता है। इसमें जीवनसाथी और आश्रित बच्चों की संपत्तियां भी शामिल रहती हैं। इस बिल का जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने विरोध किया। कानून बनने के लिए अब इसे सीनेट से मंजूरी और राष्ट्रपति की सहमति मिलना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कोर्टरूम में भावुक हुए ब्रिटिश प्रिंस हैरी, बोले- मीडिया ने पत्नी की जिंदगी नर्क बना दी ब्रिटेन के प्रिंस हैरी बुधवार को लंदन की हाई कोर्ट में गवाही के दौरान भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश मीडिया ने उनकी पत्नी मेगन मार्कल की जिंदगी ‘नर्क’ बना दी। कई घंटे की सुनवाई के बाद वह आंसू रोकते हुए बाहर निकले। समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला डेली मेल अखबार के पब्लिशर के खिलाफ चल रहे मुकदमे से जुड़ा है। हाई कोर्ट में प्रिंस हैरी ने कहा कि मीडिया उनकी निजी जिंदगी में लगातार दखल देता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों ने वैध स्रोतों के बजाय अवैध तरीकों से उनकी निजी जानकारी जुटाई। हैरी ने कोर्ट में कहा, “वे अब भी मेरे पीछे पड़े हैं। उन्होंने मेरी पत्नी की जिंदगी पूरी तरह नर्क बना दी।” प्रिंस हैरी समेत सात मशहूर हस्तियों ने डेली मेल के पब्लिशर एसोसिएटेड न्यूजपेपर्स लिमिटेड पर मुकदमा किया है। आरोप है कि बीते करीब 20 साल में निजी जानकारी जुटाने के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए गए। पब्लिशर ने सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि विवादित खबरें वैध सोर्स पर आधारित थीं। यह ट्रायल करीब नौ हफ्ते चलने की उम्मीद है। हैरी ने कहा कि मीडिया के लगातार हमलों, उत्पीड़न और नस्लवादी लेखों की वजह से ही उन्होंने और मेगन ने 2020 में शाही जिम्मेदारियां छोड़कर अमेरिका जाने का फैसला किया। शेख हसीना पर देशद्रोह केस में 9 फरवरी को अगली सुनवाई, युनुस सरकार को गिराने की साजिश का आरोप बांग्लादेश की एक अदालत शेख हसीना के खिलाफ दर्ज देशद्रोह मामले में 9 फरवरी को अगली सुनवाई करेगी। यह मामला दिसंबर 2024 में हुई एक ऑनलाइन बैठक ‘जय बांग्ला ब्रिगेड’ से जुड़ा है। आरोप है कि दिसंबर 2024 में शेख हसीना और अवामी लीग के सैकड़ों नेताओं ने ‘जय बांग्ला ब्रिगेड’ नाम के एक समूह की ऑनलाइन बैठक में हिस्सा लिया था। बैठक में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को गिराने की साजिश रची गई थी। केस में कुल 286 आरोपी हैं, जिनमें से ज्यादातर फरार हैं। शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत चली आई थीं। नवंबर 2025 में एक बांग्लादेश की विशेष ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध और अन्य मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। ट्रम्प ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी वापस ली; ग्रीनलैंड पर NATO चीफ के साथ समझौते का फ्रेमवर्क तय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि वे अब 8 यूरोपीयन देशों पर 10% टैरिफ नहीं लगाएंगे। यह टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने वाला था। ट्रम्प ने यह फैसला दोवोस में NATO सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे के साथ ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र पर बातचीत के बाद लिया। ट्रम्प ने कहा कि दोनों नेताओं ने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के सौदे का फ्रेमवर्क तय किया है। इससे अमेरिका और सभी NATO सदस्यों का फायदा होगा। उन्होंने ट्रुथ पर लिखा कि इस समझ के आधार पर मैं टैरिफ नहीं लगाऊंगा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध करने वाले यूरोपिय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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<title>गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस&amp;apos; में शामिल होंगे 8 इस्लामिक देश:इनमें कतर, तुर्किये और पाकिस्तान भी; विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी किया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बनाए गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में 8 इस्लामिक देशों ने शामिल होने पर सहमति जताई है। इन देशों में कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कतर की राजधानी दोहा संयुक्त बयान इसका ऐलान किया। बयान में कहा गया है कि सभी देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का साझा फैसला लिया है। हर देश अपने-अपने कानूनी और जरूरी प्रक्रियाओं के तहत इसमें शामिल होने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेगा। मिस्र, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात पहले ही बोर्ड में शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं। ट्रम्प का दावा- पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होंगे ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह बयान स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान दिया। पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि पुतिन को न्योता दिया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है। दूसरी तरफ पुतिन ने कहा है कि बोर्ड में औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला रणनीतिक साझेदारों से सलाह के बाद ही लिया जाएगा। व्हाइट हाउस के मुताबिक, अब तक करीब 50 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया गया है, जिनमें से 35 से अधिक देशों ने अपनी सहमति दे दी है। गाजा पीस बोर्ड को रूस 1 अरब डॉलर देगा रूस ने गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की पेशकश की है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भले ही बोर्ड में उसकी औपचारिक भागीदारी पर अंतिम फैसला न हुआ हो, लेकिन वह 1 अरब डॉलर देने पर विचार कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह पैसा उस रूसी संपत्ति से लिया जा सकता है, जिसे अमेरिका ने पिछली सरकार के दौरान फ्रीज कर दिया था। 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन्हीं प्रतिबंधों के तहत अमेरिका और यूरोप में रूस के सेंट्रल बैंक और सरकारी फंड से जुड़ी अरबों डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया था।  इन पैसों पर रूस का मालिकाना हक तो बना रहता है, लेकिन वह बिना अमेरिकी मंजूरी के इनका इस्तेमाल नहीं कर सकता। पुतिन अब इसी फ्रीज संपत्ति से गाजा पीस बोर्ड को 1 अरब डॉलर देने की बात कर रहे हैं। गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंचा सीजफायर के बाद गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने पिछले हफ्ते कहा था कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत किए की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से नाराजगी इजराइल ट्रम्प के पीस बोर्ड को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुका है। नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को &#039;कार्यकारी बोर्ड&#039; की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी। NCAG डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा&#039;थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। रिपोर्ट- परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे ट्रम्प की प्रस्तावित &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है। अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’ गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अब गाजा जंग को जानिए… ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने फर्जी पिज्जा हट का उद्घाटन किया:कंपनी बोली&#45; हमारा कोई लेना देना नहीं; सोशल मीडिया पर मजाक बना</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक अजीब विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने सियालकोट कैंटोनमेंट में पिज्जा हट ब्रांड वाले एक आउटलेट का उद्घाटन किया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद पिज्जा हट कंपनी ने इस आउटलेट को फर्जी बता दिया। सोशल मीडिया पर उद्घाटन की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद पिज्जा हट पाकिस्तान ने बयान जारी कर साफ किया कि इस आउटलेट से उसका कोई लेना-देना नहीं है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में ख्वाजा आसिफ सियालकोट कैंटोनमेंट में बने आउटलेट का फीता काटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने हाथ में कैंची लेकर कैमरे के सामने पोज भी दिया। पिज्जा हट ने ब्रांड के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया पिज्जा हट पाकिस्तान ने बयान जारी कर कहा कि सियालकोट कैंटोनमेंट में खुला यह रेस्टोरेंटपिज्जा हट के नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल कर रहा है। कंपनी ने कहा, यह आउटलेट उससे जुड़ा नहीं है यह पिज्जा हट इंटरनेशनल की रेसिपी, क्वालिटी प्रोटोकॉल, फूड सेफ्टी और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड का पालन नहीं करता। कंपनी ने यह भी बताया कि उसने अपने ट्रेडमार्क के दुरुपयोग को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। कंपनी के मुताबिक, पाकिस्तान में इस समय उसके कुल 16 आधिकारिक आउटलेट हैं। इनमें से 14 लाहौर और दो इस्लामाबाद में हैं। सोशल मीडिया पर आसिफ मजाक बना यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों ने इसे लेकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। एक यूजर ने लिखा, “रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सियालकोट में एक फर्जी पिज्जा हट फ्रेंचाइजी का उद्घाटन किया। ये बेवकूफ बूढ़े लोग हम पर थोपे गए हैं।” एक अन्य यूजर ने मजाक करते हुए लिखा, “जब पिज्जा हट खुद कह दे, यह हमारी स्लाइस नहीं है।” पिज्जा हट के 100 से ज्यादा देशों में आउलेट दुनिया की मशहूर फूड चेन पिज्जा हट एक अंतरराष्ट्रीय पिज्जा रेस्टोरेंट ब्रांड है। यह ब्रांड पिज्जा, पास्ता और फास्ट फूड आइटम्स के लिए जाना जाता है और दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में इसके आउटलेट हैं। पिज्जा हट की शुरुआत साल 1958 में अमेरिका के कैनसस राज्य में हुई थी। इसे दो भाइयों डैन कार्नी और फ्रैंक कार्नी ने एक छोटे से पिज्जा स्टोर के रूप में शुरू किया था, जो बाद में एक वैश्विक ब्रांड बन गया। पिज्जा हट अमेरिका की बड़ी फूड कंपनी यम ब्रांड्स के अंतर्गत आता है। यम ब्रांड्स के पास केएफसी और टैको बेल जैसे बड़े ब्रांड भी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 09:54:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस की पत्नी उषा चौथी बार प्रेग्नेंट: जुलाई के अंत में बेटे को जन्म देंगी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी और सेकेंड लेडी उषा वेंस चौथी बार मां बनने वाली हैं। दंपती ने बताया है कि उषा वेंस जुलाई के अंत में एक बेटे को जन्म देंगी। जेडी वेंस और उषा वेंस ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और पूरा परिवार इस खुशखबरी को लेकर उत्साहित है। जेडी वेंस और उषा वेंस ने बयान में कहा, हम यह खबर साझा करते हुए बहुत खुश हैं कि उषा हमारे चौथे बच्चे, एक बेटे, के साथ गर्भवती हैं। उषा और बच्चा दोनों ठीक हैं और हम जुलाई के अंत में उसका स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। दंपती ने इस दौरान अमेरिकी सेना के डॉक्टरों और स्टाफ का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि ये लोग उनके परिवार की बेहतरीन देखभाल करते हैं और उन्हें देश की सेवा के साथ-साथ बच्चों के साथ अच्छा पारिवारिक जीवन जीने में मदद करते हैं। उषा वेंस की उम्र 40 साल और जेडी वेंस की उम्र 41 साल है। दोनों की मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। उनके पहले से तीन बच्चे इवान (8), विवेक (5) और मिराबेल (4) हैं। उषा वेंस पेशे से लिटिगेटर हैं। वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स और डीसी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स में रहे जज ब्रेट कैवनॉ के लिए क्लर्क रह चुकी हैं। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से बैचलर और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज से मास्टर डिग्री हासिल की है, जहां वे गेट्स कैंब्रिज स्कॉलर भी रही हैं। उषा वेंस के माता-पिता कृष्ण चिलुकुरी और लक्ष्मी चिलुकुरी 1970 के दशक के अंत में भारत से अमेरिका गए थे। कृष्ण चिलुकुरी सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एयरोस्पेस डिपार्टमेंट में लेक्चरर हैं। वहीं, लक्ष्मी चिलुकुरी यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी डिपार्टमेंट में टीचिंग प्रोफेसर और सिक्स्थ कॉलेज की प्रोवोस्ट हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल ले जा रहा 7वां टैंकर पकड़ा, हांगकांग की कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड था अमेरिकाने वेनेजुएला से तेल ले जा रहे एक और प्रतिबंधित ऑयल टैंकर पर कब्जा कर लिया है। यह ट्रम्प प्रशासन के दौरान पकड़ा गया सातवां टैंकर है। अमेरिकी साउदर्न कमांड के मुताबिक, मोटर वेसल सगीट्टा को बिना किसी नुकसान के अपने नियंत्रण में लिया गया। कमांड ने कहा कि यह जहाज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित कैरेबियन क्षेत्र की ‘क्वारंटीन’ का उल्लंघन कर रहा था। सगीट्टा लाइबेरिया-ध्वज वाला टैंकर है, जो हांगकांग की एक कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने इसे रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत प्रतिबंधित किया था। यह कार्रवाई 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद तेज हुई अमेरिकी मुहिम का हिस्सा बताई जा रही है। जानकारी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने दी है। ट्रम्प बोले- ईरान ने मेरी हत्या की तो अमेरिका उसे तबाह कर देगा; ईरान ने पलटवार की चेतावनी दी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान उनकी हत्या करता है, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने यह बयान मंगलवार को दिए एक टीवी इंटरव्यू में दिया। AP की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों को इस बारे में साफ निर्देश दे दिए हैं। अगर उनके साथ कुछ भी होता है, तो ईरान को धरती से मिटा दिया जाएगा। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान की तरफ से भी कड़ा जवाब आया। ईरान के सैन्य प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेकर्ची ने ट्रम्प को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शेकर्ची ने कहा, ट्रम्प जानता है कि अगर हमारे नेता की ओर आक्रामक हाथ बढ़ाया गया, तो हम न सिर्फ उस हाथ को काट देंगे, बल्कि उनकी पूरी दुनिया को आग में झोंक देंगे।  यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ही ट्रम्प ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के करीब 40 साल पुराने शासन को खत्म करने की बात कही थी। अमेरिकी वित्त मंत्री बोले- रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ की तैयारी, भारत ने टैरिफ के बाद आयात घटाया अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात दोहराई है। उन्होंने भारत को लेकर कहा कि 25 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती की है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने किसी आधिकारिक आंकड़े का हवाला नहीं दिया। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) स्कॉट बेसेंट ने कहा कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका कुछ देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पेश रूस प्रतिबंध विधेयक को पास कराने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। बेसेंट ने चीन को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए कहा कि अमेरिका चीन पर भी 500 फीसदी टैरिफ लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वहीं, वाइट हाउस के अधिकारियों ने यूरोप को भी रूस से तेल खरीदने वाला बताते हुए चेतावनी दी है। बेसेंट ने कहा, “यूरोप आज रूस से तेल खरीद रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसा हो सकता है कि यूरोप उसी देश के खिलाफ युद्ध लड़े, जिसकी वह अभी आर्थिक मदद कर रहा है।” ग्रीनलैंड का फ्यूचर तय करने स्विट्जरलैंड पहुंचेंगे ट्रम्प:दावोस के मंच से दुनिया को संबोधित करेंगे, 7 भारतीय उद्योगपतियों से मुलाकात संभव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में शामिल होने स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचेंगे। वे आज ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने के एजेंडे के साथ बुधवार शाम करीब 7 बजे दुनिया को संबोधित करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प का यह भाषण ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दुनिया भर में राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से गहराते जा रहे हैं। यही वजह है कि दावोस में ट्रम्प की मौजूदगी और उनके हर बयान पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। डोनाल्ड ट्रम्प WEF में भाषण देने के बाद एक खास उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत के 7 बड़े कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 09:54:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ग्रीनलैंड का फ्यूचर तय करने स्विट्जरलैंड पहुंचेंगे ट्रम्प:दावोस के मंच से दुनिया को संबोधित करेंगे, 7 भारतीय उद्योगपतियों से मुलाकात संभव</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में शामिल होने स्विट्जरलैंड के दावोस पहुंचेंगे। वे आज ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने के एजेंडे के साथ बुधवार शाम करीब 7 बजे दुनिया को संबोधित करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प का यह भाषण ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दुनिया भर में राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से गहराते जा रहे हैं। यही वजह है कि दावोस में ट्रम्प की मौजूदगी और उनके हर बयान पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है। डोनाल्ड ट्रम्प WEF में भाषण देने के बाद एक खास उच्चस्तरीय कार्यक्रम की मेजबानी भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत के 7 बड़े कारोबारी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 की खास बातें... ट्रम्प 6 साल बाद दावोस में भाषण देंगे दुनिया की सरकारें और कंपनियां सप्लाई चेन, तकनीक और निवेश पर नए सिरे से फैसले ले रही हैं। इसी बीच अमेरिका-भारत के नए व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, इसलिए ट्रम्प के कार्यक्रमों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी पर सबकी नजर है। डोनाल्ड ट्रम्प करीब छह साल बाद दावोस लौटे हैं। इससे पहले उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में 21 जनवरी 2020 को दावोस में भाषण दिया था। इस बार उनका दौरा और ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका की विदेश और व्यापार नीति में आक्रामक बदलाव साफ तौर पर दिख रहे हैं। ट्रम्प के सलाहकारों का कहना है कि वह दावोस में यह साफ कर देंगे कि अमेरिका अब पुराने ग्लोबल सिस्टम और नियमों से आगे बढ़ चुका है। ग्रीनलैंड को लेकर आक्रमक रुख दिखा रहे है ट्रम्प ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा और रणनीतिक ताकत से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों, खनिज संसाधनों और सैन्य अहमियत के चलते ग्रीनलैंड पर अमेरिका का प्रभाव होना जरूरी है। ट्रम्प ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक मैप शेयर किया था, जिसमें ग्रीनलैंड, कनाडा और वेनेजुएला को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया था। ग्रीनलैंड विवाद के साथ-साथ ट्रम्प ने यूरोप और बाकी दुनिया को टैरिफ को लेकर भी साफ चेतावनी दी है। अमेरिका ने डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत आठ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अगर विरोध जारी रहा तो यह टैरिफ 25% तक बढ़ाया जा सकता है। ट्रम्प की नीति साफ है कि व्यापार को अब कूटनीति और दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रम्प NATO और चीन-रूस पर बयान दे सकते हैं ट्रम्प NATO देशों पर भी लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका अकेले वैश्विक सुरक्षा का खर्च नहीं उठा सकता। वह चाहते हैं कि यूरोपीय देश अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करें। दावोस में ट्रम्प यह संदेश दोहरा सकते हैं कि सहयोग तभी मिलेगा जब जिम्मेदारी बराबरी की होगी। चीन और रूस को लेकर भी ट्रम्प का रुख बेहद सख्त है। अमेरिका चीन को व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रभाव के मामले में सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है। वहीं रूस को लेकर भी अमेरिका की नीति टकराव वाली बनी हुई है। दावोस में ट्रम्प का भाषण इन दोनों देशों के लिए भी अहम माना जा रहा है। वेनेजुएला में ट्रम्प के बढ़ते दखल से कई देश परेशान साउथ अमेरिका में अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी भी दुनिया की चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने पूरे लैटिन अमेरिका में अस्थिरता बढ़ा दी है। ट्रम्प प्रशासन इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है, लेकिन कई देश इसे अमेरिका की दबंग नीति मान रहे हैं। यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया भी लगातार तीखी होती जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई नेताओं ने ट्रम्प की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह की नीतियां वैश्विक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बावजूद ट्रम्प अपने फैसलों पर डटे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सबका असर सीधे ग्लोबल मार्केट और निवेश पर पड़ रहा है। दावोस पहुंचे कारोबारी नेताओं का मानना है कि अब जियोपॉलिटिक्स सिर्फ बैकग्राउंड रिस्क नहीं रही, बल्कि निवेश और बिजनेस फैसलों का सबसे बड़ा फैक्टर बन चुकी है। सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और नए निवेश पर फैसले अब राजनीति को देखकर लिए जा रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 क्यों खास है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में हो रहा है। इस साल की बैठक का थीम है &#039;A Spirit of Dialogue&#039; यानी &#039;संवाद की भावना&#039;। इस बैठक में 130 से ज्यादा देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें 60 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, G7 देशों के नेता, करीब 850 बड़े CEOs और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं। इस साल WEF की चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि दुनिया एक साथ कई संकटों से गुजर रही है। युद्ध, टैरिफ वॉर, वैश्विक मंदी की आशंका, जलवायु संकट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे तकनीकी बदलावों ने सरकारों और कंपनियों दोनों को नए फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। दावोस को इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यहां होने वाली बातचीत और बैठकों का असर आने वाले सालों की वैश्विक नीति और बाजारों पर साफ दिखाई देता है। भारत और ग्लोबल साउथ देशों के लिए भी यह मंच बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां निवेश, सप्लाई चेन और विकास से जुड़े बड़े फैसलों पर चर्चा होती है। दावोस में भारत की बढ़ती मौजूदगी यह दिखाती है कि वैश्विक ताकत का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है। WEF 2026 भारत के लिए अहम क्यों मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 भारत के लिए काफी अहम है। इस मंच पर भारत अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, निवेश के मौके और भविष्य की योजनाओं को दुनिया के सामने रख रहा है। सरकार और उद्योग जगत के बड़े नेता यहां एक साथ पहुंचकर भारत को निवेश और साझेदारी के लिए आकर्षक देश के तौर पर पेश कर रहे हैं। WEF 2026 में भारत से जुड़ी अहम बातें • WEF 2026 में भारत का बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहा है।
• भारत से 80 से ज्यादा बड़े उद्योगपति, सीईओ और सीनियर नेता दावोस पहुंचे हैं।
• भारत निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और डिजिटल विकास पर जोर दे रहा है।
• विदेशी कंपनियों और निवेशकों के साथ भारत साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
• भारत अपनी तेज आर्थिक वृद्धि और भविष्य की योजनाओं को वैश्विक मंच पर रख रहा है। -------------- यह खबर भी पढ़ें... फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- गुंडागर्दी नहीं सम्मान की भाषा समझते हैं:ऐसी दुनिया खतरनाक, जहां ताकतवर देश मनमर्जी करें; ट्रम्प ने 200% टैरिफ की धमकी दी थी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को ट्रम्प की फ्रांसीसी शराब पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फ्रांस धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा करता है। मैक्रों स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाषण दे रहे थे। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 09:54:03 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका में 100 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकराई:बर्फीले तूफान की वजह से हादसा, 30 से ज्यादा ट्रक फंसे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के मिशिगन राज्य में बर्फीले तूफान की वजह से बड़ा सड़क हादसा हुआ है। सोमवार को एक इंटरस्टेट हाईवे पर 100 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकरा गईं। कई गाड़ियां सड़क से फिसल गईं। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 30 से ज्यादा सेमी-ट्रेलर ट्रक फंसे हुए हैं। हादसे के बाद पुलिस को हाईवे के दोनों तरफ का ट्रैफिक बंद करना पड़ा। यह दुर्घटना मिशिगन के ग्रैंड रैपिड्स शहर के दक्षिण-पश्चिम में इंटरस्टेट 196 पर हुई। मिशिगन स्टेट पुलिस के मुताबिक, हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने बताया कि फंसे हुए वाहनों को हटाने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। बर्फीले तूफान से हुए हादसे की 6 तस्वीरें… सड़क पर गाड़ियां मुश्किल से दिखीं फॉक्स न्यूज से बात करते हुए लोगों ने बताया कि बर्फीली हवा के चलते आगे चल रही गाड़ियां भी मुश्किल से दिख रही थीं। एक पिकअप ड्राइवर ने बताया कहा कि वह 20 से 25 मील प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे और किसी तरह अपना वाहन ट्रक रोक पाए। उन्होंने कहा पीछे से लगातार टकराने की आवाजें आ रही थीं। आगे तो दिख रहा था, लेकिन पीछे क्या हो रहा है, यह साफ नजर नहीं आ रहा था। हालात काफी डरावने थे।  सैकड़ों लोग फंसे, स्कूल में ठहराया गया मिशिगन के ओटावा काउंटी शेरिफ ऑफिस ने बताया कि इलाके में कई जगह दुर्घटनाएं हुईं और कई ट्रक जैकनाइफ हो गए। कई कारें सड़क से फिसलकर बाहर चली गईं। फंसे हुए यात्रियों को बसों के जरिए हडसनविल हाई स्कूल ले जाया गया, जहां वे मदद के लिए कॉल कर सके या अपने घर जाने की व्यवस्था कर सके। अधिकारियों का कहना है कि सफाई और वाहनों को हटाने का काम पूरा होने तक सड़क कई घंटों तक बंद रह सकती है। प्रशासन ने चेतावनी दी कि क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने और जमी हुई सड़क का ट्रीटमेंट करने में कई घंटे लग सकते हैं, इस दौरान इंटरस्टेट-196 बंद रहेगी। अमेरिका में कई राज्यों में बर्फीले तूफान का असर अमेरिका के कई राज्य इन दिनों बर्फीले तूफान का सामना कर रहे हैं। नेशनल वेदर सर्विस ने चेतावनी जारी की है कि उत्तरी मिनेसोटा से लेकर विस्कॉन्सिन, इंडियाना, ओहायो, पेंसिल्वेनिया और न्यूयॉर्क तक बेहद ठंडा मौसम या बर्फीले तूफान की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक नॉर्थ-सेंट्रल फ्लोरिडा और साउथईस्ट जॉर्जिया में तापमान जीरो डिग्री तक गिर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:16:05 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तानी मंत्री मरियम औरंगजेब का बदला रूप देखकर लोग हैरान:कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की अटकलें, लोग कह रहे&#45; हॉलीवुड के कॉस्मेटिक सर्जर फेल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी PML-N की सीनियर नेता मरियम औरंगजेब इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वजह है लाहौर में हुई शादी में उनका बदला हुआ लुक। यह शादी पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नाती और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की थी। मरियम औरंगजेब यहां मेहमान के तौर पर शामिल हुई थीं। जुनैद सफदर की शादी शंजे अली रोहैल से लाहौर में धूमधाम से हुई थी। हालांकि, शादी से ज्यादा चर्चा मरियम औरंगजेब की तस्वीरों को लेकर हुई। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में मरियम औरंगजेब पहले के मुकाबले ज्यादा स्लिम, शार्प फेस फीचर्स और बदले हुए लुक में नजर आईं। कई यूजर्स ने उनके ग्लो और फिटनेस की तारीफ की। कई लोगों उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सवाल भी उठाए। यूजर्स ने यह अटकलें भी लगाईं कि मरियम औरंगजेब ने कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई हो सकती है। मरियम के वायरल लुक से जुड़ी तस्वीरें… कॉस्मेटिक सर्जरी क्या है? कॉस्मेटिक सर्जरी एक मेडिकल प्रक्रिया होती है, जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर की बनावट और दिखावट ( को बेहतर या बदलने के लिए इलाज किया जाता है। इसका मकसद बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि लुक में बदलाव या सुधार करना होता है। हालांकि, मरियम को लेकर इस तरह की किसी भी अटकल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मरियम औरंगजेब कौन हैं? 45 वर्षीय मरियम औरंगजेब 2013 से पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज से जुड़ी हुई हैं। वह इस समय पंजाब सरकार में सीनियर मंत्री हैं। उनके पास सूचना, पर्यावरण संरक्षण, योजना, वन, मत्स्य पालन, वन्यजीव और विशेष पहलों जैसे अहम विभाग हैं। ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें पर्यटन, पुरातत्व और संग्रहालयों का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… नवाज शरीफ की बहू ने भारतीय डिजाइनर का लहंगा पहना,PHOTOS: पाकिस्तानी बोले– पूर्व PM का परिवार गद्दार, देशभक्ति सिखाने वालों ने भारतीय ब्रांड चुना पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नाती की दुल्हन ने भारतीय डिजाइन का लहंगा पहना। इससे पाकिस्तानी नाराज हो गए। नवाज शरीफ की बेटी और वहां के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी लाहौर में हुई। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:16:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका ने ग्रीनलैंड में मिलिट्री एयरक्राफ्ट भेजा:पिटुफिक स्पेस बेस पर तैनात होगा; डेनमार्क ने भी सैनिक भेजे</title>
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<description><![CDATA[ ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका और डेनमार्क के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड भेजा है। यह विमान जल्द ही पिटुफिक स्पेस बेस पहुंचेगा। NORAD ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह तैनाती पहले से तय सैन्य गतिविधियों के तहत की जा रही है। कमांड ने साफ किया कि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी डेनमार्क और ग्रीनलैंड को दी गई है। ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के बीच डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को कई विमान डेनमार्क के सैनिकों और सैन्य उपकरणों को लेकर ग्रीनलैंड पहुंचे। ग्रीनलैंड और डेनमार्क को बताकर अमेरिका ने विमान भेजा NORAD के बयान के मुताबिक, पिटुफिक स्पेस बेस पर पहुंचने वाला यह विमान अमेरिका और कनाडा के ठिकानों से संचालित अन्य विमानों के साथ मिलकर लंबे समय से तय रक्षा गतिविधियों में शामिल होगा। इन गतिविधियों को अमेरिका, कनाडा और डेनमार्क के बीच चली आ रही रक्षा साझेदारी का हिस्सा बताया गया है। NORAD ने यह भी कहा कि इस तैनाती के लिए जरूरी सभी कूटनीतिक मंजूरियां ली गई हैं। अमेरिका का यह कदम डेनमार्क की अगुआई में हुए एक सैन्य अभ्यास ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस के बाद सामने आया है। यह अभ्यास ग्रीनलैंड में हुआ था, जिसमें जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे, नीदरलैंड और फिनलैंड ने भी सीमित संख्या में अपने सैनिक भेजे थे। ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर सैनिकों के तैनाती की संभावना डेनमार्क पहले से ग्रीनलैंड में करीब 200 सैनिक तैनात किए हुए है। इसके अलावा 14 सदस्यीय सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी वहां मौजूद है, जो आर्कटिक इलाकों में गश्त करते हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि आने वाले दिनों में इन्हें जमीन, हवा और समुद्र के जरिए और मजबूत किया जाएगा। यह संख्या छोटी है, लेकिन यह राजनीतिक संदेश देने के लिए है कि NATO एकजुट है। डेनमार्क की अगुआई में चल रहा ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस एक सैन्य अभ्यास है। इसका मकसद यह देखना है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड में बड़ी संख्या में सैनिक तैनात करने पड़े, तो उसकी तैयारी कैसी होगी। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस अभ्यास का फोकस आर्कटिक इलाके में सहयोगी देशों के बीच तालमेल और काम करने की क्षमता बढ़ाने पर है। आगे चलकर इससे भी बड़ा मिशन लाने की योजना है, जिसे ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री कहा जा रहा है। यह एक नाटो मिशन होगा। इसका उद्देश्य ग्रीनलैंड और उसके आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाना और किसी भी खतरे का सैन्य जवाब देने की ताकत मजबूत करना है। हालांकि यह मिशन तुरंत शुरू नहीं होगा। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक, ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री को शुरू होने में अभी कई महीने लग सकते हैं। यानी फिलहाल ग्रीनलैंड में कोई बड़ा नया सैन्य मिशन शुरू नहीं हुआ है, बल्कि उसकी तैयारी और योजना पर काम चल रहा है। ग्रीनलैंड की अपनी सेना नहीं, अमेरिका और डेनमार्क के सैनिक तैनात ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है। उसकी रक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी डेनमार्क की है। यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। यहां का अबादी महज 57 हजार है। 2009 के बाद, ग्रीनलैंड सरकार को तटीय सुरक्षा और कुछ विदेशी मामलों में छूट मिली है, लेकिन रक्षा और विदेश नीति के मुख्य मामले अभी भी डेनमार्क के पास हैं। अमेरिकी सैनिक: अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस)। ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिम में स्थित यह बेस अमेरिका चलाता है। यह बेस मिसाइल चेतावनी सिस्टम और स्पेस मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल होता है। NYT के मुताबिक यहां करीब 150 से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी और आर्कटिक सुरक्षा के लिए हैं। यह अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा है। डेनिश सैनिक: डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड ग्रीनलैंड में काम करती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां कुल करीब 150 से 200 डेनिश सैन्य और सिविलियन कर्मी हैं। जो निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, और संप्रभुता की रक्षा करते हैं। इसमें प्रसिद्ध सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल (एक छोटी एलीट यूनिट, करीब 12-14 लोग) भी शामिल है, जो कुत्तों की स्लेज से लंबी गश्त करती है। अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी में यूरोपीय देश ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे 8 देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी से लागू होगा। इसके जवाब में यूरोपीय यूनियन भी अमेरिका पर ट्रेड पाबंदियां लगाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके लिए EU एक खास कानूनी हथियार के इस्तेमाल पर सोच रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘ट्रेड बाजूका’ कहा जाता है। इसका मकसद उन देशों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना है, जो यूरोपीय देशों पर जबरदस्ती आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। ग्रीनलैंड को क्या ट्रम्प अमेरिका में मिला सकते हैं, नियम जानिए ट्रम्प ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने (खरीदने या कब्जा करने) की बात 2019 से ही कर रहे हैं। उनके दूसरे कार्यकाल में यह मुद्दा फिर से बहुत जोर पकड़ गया है। लेकिन कानूनी रूप से यह इतना आसान नहीं है। ग्रीनलैंड और अमेरिका दोनों ही NATO देश हैं। कानून के मुताबिक एक NATO देश दूसरे NATO देश पर कानूनी रूप से कब्जा नहीं कर सकता। ये पूरी तरह अवैध और NATO संधि के खिलाफ होगा। NATO का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला है। अगर कोई बाहरी दुश्मन हमला करे तो सभी सदस्य मिलकर मदद करेंगे। ग्रीनलैंड पहले स्वतंत्र हो, फिर अमेरिका से जुड़े: ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। 2009 के सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट के तहत ग्रीनलैंड के लोग रेफरेंडम (जनमत संग्रह) करके स्वतंत्र हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए डेनिश संसद की भी मंजूरी जरूरी है। ग्रीनलैंड क्यों इतना खास… खास भौगोलिक स्थिति: ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति बहुत खास है। यह उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच, यानी अटलांटिक महासागर के बीचों-बीच के पास स्थित है। इसी वजह से इसे मिड-अटलांटिक क्षेत्र में एक बेहद अहम ठिकाना माना जाता है। रणनीतिक सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड यूरोप और रूस के बीच सैन्य और मिसाइल निगरानी के लिए बेहद अहम है। यहां अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी/चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जरूरी है। चीन और रूस पर नजर: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से अमेरिका इस इलाके में अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहता है। प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं, जिनका भविष्य में आर्थिक और तकनीकी महत्व बहुत ज्यादा है। चीन इनका 70-90% उत्पादन नियंत्रित करता है, इसलिए अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। नई समुद्री व्यापारिक राहें: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं। ग्रीनलैंड का नियंत्रण अमेरिका को इन रूटों पर प्रभुत्व और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़त रोकने में मदद करेगा। अमेरिकी सुरक्षा नीति: अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” मानता है। वहां प्रभाव बढ़ाकर वह भविष्य के संभावित खतरों को पहले ही रोकना चाहता है। ------------------------------------- ग्रीनलैंड से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- नोबेल नहीं मिला, अब शांति पर भरोसा नहीं:ग्रीनलैंड पर कब्जे का विचार इसीलिए आया; नॉर्वे के PM को चिट्ठी लिखकर बताया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें नोबेल न मिलने की शिकायत की गई है। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने लिखा कि 8 जंग रुकवाने के बावजूद उन्हें नोबेल नहीं मिला। इसलिए अब उन्होंने शांति के बारे में सोचना छोड़ दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 12:16:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, ने, ग्रीनलैंड, में, मिलिट्री, एयरक्राफ्ट, भेजा:पिटुफिक, स्पेस, बेस, पर, तैनात, होगा, डेनमार्क, ने, भी, सैनिक, भेजे</media:keywords>
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<title>ईरान के राष्ट्रपति बोले&#45; खामेनेई पर हमले को जंग मानेंगे:ट्रम्प ने कहा था&#45; प्रदर्शनकारियों की हत्याएं जारी रहीं तो हम दखल दे सकते हैं</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर हमला हुआ, तो इसे ईरान के खिलाफ जंग माना जाएगा।  पजशकियान ने X पर पोस्ट कर कहा कि किसी भी हमले का कठोर और पछतावे वाला जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के लोगों की जिंदगी में मुश्किलें हैं, तो इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लगाए हुए प्रतिबंध हैं। पजशकियान की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों के बाद आई है। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं या फांसी जारी रहीं, तो अमेरिका दखल दे सकता है। ईरान में 28 दिसंबर से जारी हिंसक प्रदर्शन में अब तक 5,000 लोगों की मौत हो गई है। इनमें करीब 500 सुरक्षाकर्मी शामिल है। एक ईरानी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर रॉयटर्स को यह जानकारी दी है। दावा- ट्रम्प के दबाव में 800 लोगों की फांसी रुकी ट्रम्प ने 15 जनवरी को बताया था कि हत्याएं अब कम हो रही हैं। व्हाइट हाउस ने भी दावा किया कि ट्रम्प के दबाव के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने परिषद को बताया कि ये प्रदर्शन तेजी से फैले। इसमें काफी जान-माल का नुकसान हुआ है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया, जबकि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका है। क्राउन प्रिंस पहलवी बोले- जल्द ईरान लौटूंगा ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने रविवार को कहा है कि वह जल्द ईरान लौटेंगे और देश का नेतृत्व करेंगे। पेरिस से जारी किए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, आज ईरान में लड़ाई कब्जे और आजादी के बीच है। ईरानी जनता ने मुझे नेतृत्व के लिए बुलाया है। मैं ईरान लौटूंगा। पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वह एक ‘मुक्त ईरान’ का सपना देखते हैं, जो इस्लामिक रिपब्लिक की नीतियों से पूरी तरह अलग होगा। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य शांति, समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ओर लौटना है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान में लोकतांत्रिक सरकार बनती है तो देश अपना परमाणु सैन्य कार्यक्रम खत्म करेगा, आतंकी संगठनों को समर्थन बंद करेगा और अमेरिका के साथ संबंध सामान्य करेगा। पहलवी ने यह भी कहा कि एक मुक्त ईरान इजराइल को मान्यता देगा और मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने वाली ताकत बनेगा। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व पर नए प्रतिबंध लगाए ट्रम्प प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों लगाए हैं। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों पर क्रूर कार्रवाई की योजना बनाई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, &#039;राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने वित्त मंत्रालय को प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।&#039; ईरान पहले से ही कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और ज्यादा कमजोर हुई है। इसी आर्थिक संकट को मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरान में हुए प्रदर्शन का कारण जानिए... ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा कई कारणों से भड़की है। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। महंगाई और आर्थिक संकट: ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 1,455,000 से 1,457,000 रियाल (ओपन मार्केट रेट) हो गई है। चाय, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें भी बहुत महंगी हो गईं (महंगाई 50-70% से ज्यादा)। व्यापारियों की हड़ताल: 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बड़े बाजार के व्यापारियों ने दुकानें बंद कर विरोध शुरू किया, जो तेजी से पूरे देश में फैल गया। लोग बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान हैं। सरकार के खिलाफ गुस्सा: लोग सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक की पूरी व्यवस्था के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। कई लोग पुरानी राजशाही (शाह का शासन) वापस लाने की मांग कर रहे हैं। कठोर कार्रवाई: सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, गोलियां चलाईं, जिससे हजारों मौतें हुईं (अनुमान 2,000 से 12000 तक, विभिन्न स्रोतों के अनुसार)। इंटरनेट और फोन बंद कर दिए गए, जिससे हिंसा और बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय तनाव: ईरान सरकार, अमेरिका और इजराइल को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार बता रही है। ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और हस्तक्षेप की धमकी दी थी। --------------------- यह खबर भी पढ़ें… ईरानी प्रदर्शनकारी बोले- ट्रम्प ने हमें धोखा दिया:सबसे ज्यादा जरूरत के वक्त समर्थन नहीं किया; हिंसा में अब तक 5000 लोगों की मौत ईरान में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से उम्मीद थी कि वे उनके लिए मददगार साबित होंगे। लेकिन अब ट्रम्प के रुख में बदलाव आ गया है, इससे वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ट्रम्प ने जो कहा और बाद में जो किया, उनके बीच बहुत बड़ा फर्क था। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:26:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पंजाबी युवती की कनाडा में हत्या की कहानी:PR के लिए UP का युवक जबरन शादी करना चाहता था; इनकार किया तो कत्ल कर भाग आया</title>
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<description><![CDATA[ पंजाब के संगरूर से परिवार को अच्छी जिंदगी देने के मकसद से कनाडा गई युवती की उसके दोस्त ने हत्या कर दी। युवती कनाडा की परमानेंट सिटिजन थी। उत्तर प्रदेश का रहने वाला युवक जबरन उससे शादी करना चाहता था ताकि उसे भी परमानेंट सिटीजनशिप मिल सके। यही नहीं, कत्ल के बाद वह कनाडा में उसके बारे में पता चलने से पहले ही भारत भाग आया। जब उसका नाम उजागर हो गया और वह कत्ल केस में फंस गया तो उसने पहले सोशल मीडिया के जरिए परिवार को धमकाया। जब वे पीछे नहीं हटे तो पंजाब के संगरूर में परिवार को धमकाने के लिए हथियार लेकर घर तक पहुंच गया। हालांकि यही गलती उसे भारी पड़ गई। संगरूर पुलिस ने उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर धमकाने का केस दर्ज कर लिया। जिसके बाद वह फिर संगरूर में धमकी देने आया तो पुलिस ने उसे दबोच लिया। जिसके बाद इस पूरे मामले की कहानी सामने आई है। युवक कैसे अमनप्रीत को जानता था, कैसे इगो हर्ट होने पर उसने पूरी प्लानिंग के साथ युवती की हत्या की, फिर कनाडा की पुलिस को चकमा देकर भारत भाग आया... पढ़िए पूरी कहानी पढ़ें अमनप्रीत के संगरूर से कनाडा पहुंचने और कत्ल की कहानी अमनप्रीत के कत्ल का पता कैसे चला..
पिता के कहने पर बहन गुरसिमरन ने अमनप्रीत की तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान नियाग्रा पुलिस को एक फोन आया। जिसमें किसी ने बताया कि ओंटारियो के लिंकन क्षेत्र में स्थित नियाग्रा नदी के पास एक सुनसान पार्क में इंडियन लड़की की खून से लथपथ डेडबॉडी पड़ी है। जब पुलिस वहां पहुंची देखा कि युवती के शरीर पर चाकू के कई निशान थे। उसकी गर्दन पर वार किया गया था। चाकू गर्दन के आर-पार कर दिया गया था। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पहचान के लिए फोटो सर्कुलेट की गईं। जिसमें पता चला कि मरने वाली युवती अमनप्रीत है। अमनप्रीत का मर्डर क्यों किया, कैसे किया और हत्यारा भारत कैसे पहुंचा... पैरवी होते देख अमनप्रीत के परिवार को धमकाने संगरूर पहुंचा
संगरूर के SSP सरताज चहल ने बताया- मनप्रीत कनाडा से भागकर भारत लौट आया। इसके बाद वह पीड़ित के परिवार को धमकाने लगा। उसने वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम के माध्यम से गुरसिमरन कौर और उसके परिवार को धमकियां भेजीं। अक्टूबर 2025 के अंत में मनप्रीत कथित तौर पर हथियार लेकर इंद्रजीत के घर में घुस गया और परिवार को कनाडा में हत्या का मामला न चलाने की धमकी दी। इस घटना के बाद परिवार ने अपने घर के बाहर CCTV कैमरे लगवाए। पुलिस ने बताया कि 30 नवंबर 2025 और फिर 10 जनवरी 2026 को सीसीटीवी में कैद हुआ। पुलिस ने आगे बताया कि उसने अश्लील टिप्पणियों के साथ तस्वीरें फैलाने के लिए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट भी बनाया था। संगरूर पुलिस ने अरेस्ट किया तो पूरी कहानी सामने आई
संगरूर के SSP सरताज चहल ने बताया कि इंद्रजीत की शिकायत के आधार पर 14 जनवरी को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन संगरूर में मनप्रीत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी को 15 जनवरी को साइबर अपराध के लिए संगरूर से गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ कनाडा में पहले से ही हत्या का मामला दर्ज है। वह कनाडा की पुलिस को वांटेड है। इस बारे में कनाडा की पुलिस के साथ औपचारिक बातचीत की जा रही है। अगर कनाडा पुलिस उसे पूछताछ के लिए मांगती है तो भारत के कानून के अनुसार अगली प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:26:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>स्पेन में दो हाई स्पीड ट्रेनों के बीच टक्कर:21 लोगों की मौत, 73 घायल; दोनों ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे</title>
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<description><![CDATA[ स्पेन के कॉर्डोबा प्रांत में रविवार रात एक ट्रेन पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से टकरा गई। हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 73 यात्री घायल हैं। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, दोनों ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मलागा से मैड्रिड जा रही ट्रेन पटरी से उतरकर पास की लाइन पर चली गई और वहां मैड्रिड–हुएलवा रूट पर चल रही AVE ट्रेन से टकरा गई। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्री एंटोनियो सैंज ने बताया कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है और घायलों को छह अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्पेन रेल हादसे से जुड़ी 5 तस्वीरें... यात्री बोले- भूंकप जैसा झटका लगा ANI की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। स्पेनिश पब्लिक ब्रॉडकास्टर RTVE के पत्रकार साल्वाडोर जिमेनेज भी इर्यो ट्रेन में सफर कर रहे थे। उन्होंने बताया कि ट्रेन के आखिरी दो डिब्बे पटरी से उतर गए, जिनमें से एक पूरी तरह पलट गया। जिमेनेज के मुताबिक, ट्रेन शाम 6:40 बजे समय पर मलागा से रवाना हुई थी। कुछ देर बाद अचानक जोरदार झटका लगा और ट्रेन पटरी से उतर गई। इसके बाद यात्रियों को हथौड़ों से खिड़कियां तोड़कर बाहर निकाला गया। कई यात्रियों को खिड़कियों से बाहर निकलने के दौरान चोटें भी आईं। कुछ यात्रियों ने ट्रेन के अंदर धुआं भरने की भी शिकायत की। मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच ट्रेन सर्विस सस्पेंड स्पेन की रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी ADIF ने बताया कि मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच सभी ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित कर दी गई हैं। मौके पर आपातकालीन सेवाएं तैनात हैं और राहत-बचाव कार्य रातभर जारी रहा। स्पेन के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते ने कहा कि वह ADIF के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से हालात पर नजर रखे हुए हैं।​ ​​रेस्क्यू ऑपरेशन में स्पेन की सेना की इमरजेंसी यूनिट्स भी शामिल की गई हैं। रेड क्रॉस की टीमें घायलों के इलाज में स्वास्थ्य अधिकारियों की मदद कर रही हैं। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर हादसे पर दुख जताया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:26:29 +0530</pubDate>
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<title>ग्रीनलैंड&#45; ट्रम्प के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर:कहा&#45; हमारा देश बिकाऊ नहीं; अमेरिका के साथ ट्रेड एग्रीमेंट रोकने की तैयारी में यूरोपीय संघ</title>
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<description><![CDATA[ ग्रीनलैंड में ट्रम्प के विरोध में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए बयानों पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने &#039;ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है&#039; के नारे लगाए। बर्फीली सड़कों के बीच प्रदर्शनकारी ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक के डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय झंडे लहराए और विरोधी पोस्टर थामे रहे। पुलिस के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें नुउक की लगभग एक-चौथाई आबादी शामिल हुई। इसी दौरान अमेरिका ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे थे। इससे ग्रीनलैंड के लोगों में ट्रम्प को लेकर गुस्सा और बढ़ गया। दूसरी ओर यूरोपीय संघ (EU) के सांसद अमेरिका के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट की मंजूरी रोकने की तैयारी में हैं। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने शनिवार को सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर कहा कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अमेरिका से समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है। प्रदर्शन की 6 तस्वीरें… EU में अमेरिकी उत्पादों पर 0% टैरिफ को होल्ड करने की मांग मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया पर कहा कि EPP व्यापार समझौते के पक्ष में था, लेकिन ट्रम्प की ग्रीनलैंड धमकियों के कारण अब मंजूरी संभव नहीं। उन्होंने अमेरकी उत्पादों पर 0% टैरिफ को होल्ड करने की बात कही। यूरोपीय संसद के अन्य समूह भी समझौते को फ्रीज करने की मांग कर रहे हैं। अगर फैसले को लेकर सहमति बनती है, तो समझौता रुक सकता है। ट्रेड वॉर से बचने के लिए EU ने अमेरिका से समझौता किया था EU-US ट्रेड एग्रीमेंट को यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पिछले साल तय किया था। यह समझौता आंशिक रूप से लागू हो चुका है, लेकिन इसे अंतिम मंजूरी यूरोपीय संसद से मिलना अभी बाकी है। अगर EPP के सांसद वामपंथी दलों के साथ इसके विरोध में खड़े होते हैं, तो उनके पास इतनी संख्या हो सकती है कि वे इस समझौते की मंजूरी को टाल दें या पूरी तरह रोक दें। इस ट्रेड डील के तहत ज्यादातर यूरोपीय वस्तुओं पर अमेरिका 15% टैरिफ लगाने पर सहमत हुआ था। इसके बदले EU ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कुछ कृषि उत्पादों पर शुल्क खत्म करने का वादा किया था। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यह समझौता अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर से बचने के लिए किया था। हालांकि, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प के हालिया रुख ने इस समझौते को राजनीतिक संकट में डाल दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रम्प के बयानों को अस्वीकार्य बताया। यूरोपीय देशों ने कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और सहयोगियों को धमकी नहीं देना चाहिए। EU पर 15% अमेरिकी टैरिफ लगा है अमेरिका ने यूरोपीय यूनियन पर 15% टैरिफ लगा रखा है। ट्रम्प ने पहले EU पर 30% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। हालांकि, स्टील, कॉपर और एल्यूमीनियम के सामानों पर रियायत नहीं मिलेगी और इन पर टैरिफ की दर 50% ही रहेगी। EU अगले 3 साल में अमेरिका से 750 बिलियन डॉलर, यानी करीब 64 लाख करोड़ रुपए की एनर्जी खरीदेगा। इसके साथ ही EU अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर यानी 51 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा। ये निवेश अमेरिका के फार्मा, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में होगा। ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा दिया है। ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे थे। ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड टैरिफ के दायरे में आएंगे। इन पर 1 फरवरी से टैरिफ लागू होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान इन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव दिया ट्रम्प ने पोस्ट में ‘ग्रीनलैंड की पूर्ण और पूरी खरीद’ के लिए डील की बात कही है और साफ किया है कि तय समय तक समझौता नहीं होने पर टैरिफ बढ़ाया जाएगा। ट्रम्प ने लिखा- हमने कई वर्षों तक डेनमार्क, यूरोपीय यूनियन के सभी देशों और कुछ और देशों को सब्सिडी दी है। हमने उनसे टैरिफ या किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लिया। अब सदियों बाद समय आ गया है कि डेनमार्क बदले में कुछ लौटाए क्योंकि अब विश्व शांति दांव पर है। ट्रम्प ने कहा कि चीन और रूस ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहते हैं और डेनमार्क इसे चाहे भी तो नहीं रोक सकता। फिलहाल वहां सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दो डॉग स्लेज (कुत्तों के खींचने वाली गाड़ी) हैं। इस खेल में सिर्फ अमेरिका ही कामयाब तरीके से दखल दे सकता है। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिका पिछले 150 सालों से ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश कर रहा है और कई राष्ट्रपतियों ने इसके प्रयास किए, लेकिन डेनमार्क ने हर बार इनकार किया। फिलहाल इस टैरिफ पर यूरोपीय देशों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यूरोपीय देश ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए सैनिक भेज रहे यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में कदम बढ़ाए हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ग्रीनलैंड में एक निगरानी मिशन के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं। जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में डेनमार्क का समर्थन करने के लिए 13 लोगों की एक टीम भेजेगा। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बुधवार को कहा कि डेनमार्क के कहने पर स्वीडिश आर्म्ड फोर्स के कई अधिकारियों को एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने के लिए ग्रीनलैंड भेजा गया है। EU विदेश नीति प्रमुख बोली- यह विवाद चीन और रूस को मौका देंगे EU विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने अमेरिका के खिलाफ तंज कसते हुए कहा कि चीन और रूस के लिए यह हालात किसी मौके से कम नहीं होंगे। उन्हें सहयोगी देशों के बीच दरार से ही फायदा होता है। उन्होंने आगे कहा, &#039;अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को खतरा है, तो हम इसे नाटो के भीतर ही सुलझा सकते हैं। टैरिफ यूरोप और अमेरिका दोनों को गरीब बना सकते हैं। हमारी साझा समृद्धि को कमजोर हो सकती हैं। हम अमेरिका को यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के मकसद से भटकाने नहीं दे सकते। ग्रीनलैंड को क्या ट्रम्प अमेरिका में मिला सकते हैं, नियम जानिए ट्रम्प ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने (खरीदने या कब्जा करने) की बात 2019 से ही कर रहे हैं। उनके दूसरे कार्यकाल में यह मुद्दा फिर से बहुत जोर पकड़ गया है। लेकिन कानूनी रूप से यह इतना आसान नहीं है। ग्रीनलैंड और अमेरिका दोनों ही NATO देश हैं। कानून के मुताबिक एक NATO देश दूसरे NATO देश पर कानूनी रूप से कब्जा नहीं कर सकता। ये पूरी तरह अवैध और NATO संधि के खिलाफ होगा। NATO का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला है। अगर कोई बाहरी दुश्मन हमला करे तो सभी सदस्य मिलकर मदद करेंगे। ग्रीनलैंड पहले स्वतंत्र हो, फिर अमेरिका से जुड़े: ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। 2009 के सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट के तहत ग्रीनलैंड के लोग रेफरेंडम (जनमत संग्रह) करके स्वतंत्र हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए डेनिश संसद की भी मंजूरी जरूरी है। ग्रीनलैंड क्यों इतना खास… ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत: कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को फिर से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की अपनी इच्छा दोहराई है। उन्होंने कहा कि कुछ न कुछ हल निकल आएगा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 12:43:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प के गाजा पीस बोर्ड से नाराज इजराइल:कहा&#45; बिना बातचीत टीम बनाई, यह नीति के खिलाफ; शांति बोर्ड में भारतवंशी अजय बंगा भी शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; (शांति बोर्ड) का गठन किया है। राष्ट्रपति खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा है कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत के की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की। इस बोर्ड में 7 लोग शामिल हैं, जिनमें भारतवंशी अजय बंगा भी हैं। बंगा फिलहाल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत) समेत कई लीडर शामिल हैं। तुर्किए के विदेश मंत्री गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल पीस बोर्ड के अलावा, हाई रिप्रेजेंटेटिव और NCAG की मदद के लिए गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया जा रहा है। इसके शुरुआती सदस्यों में स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुश्नर, तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान, अली अल-थावादी, जनरल हसन राशाद, टोनी ब्लेयर, मार्क रोवन, यूएई की मंत्री रीम अल-हाशिमी, बल्गेरियाई राजनेता निकोलाय म्लाडेनोव शामिल हैं। निकोलाई म्लाडेनोव एग्जीक्यूटिव बोर्ड के प्रतिनिधि होंगे। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से क्या नाराजगी नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। इजराइल का मुख्य विरोध तुर्किए जैसे देशों की भूमिका से है। यह हमास के समर्थक माने जाते हैं और इजराइल के साथ इनका संबंध तनाव पूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को &#039;कार्यकारी बोर्ड&#039; की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक पलायन की जरूरत है। पीस बोर्ड के हर सदस्य की अपनी तय जिम्मेदारी होगी व्हाइट हाउस ने कहा कि एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा की स्थिरता और लंबे समय की सफलता से जुड़े एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा। इसमें शासन क्षमता बढ़ाना, क्षेत्रीय संबंध, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, आने वाले हफ्तों में बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के और सदस्यों की घोषणा की जाएगी। NCAG डॉ. अली शाथ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा&#039;थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अली शाथ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। रिपोर्ट- परमानेंट सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे ट्रम्प की प्रस्तावित &#039;बोर्ड ऑफ पीस&#039; में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है। अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’ भारतवंशी अजय बंगा के बारे में जानिए… 1959 में भारत के पुणे में अजयपाल सिंह बंगा का जन्म हुआ। पिता हरभजन सिंह बंगा भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे, इसलिए बचपन में पूरे भारत में घूमना पड़ा। बंगा 2007 में अमेरिकी नागरिक बने। फिलहाल वे विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष हैं। बंगा को 3 मई, 2023 को वर्ल्ड बैंक का प्रेसिडेंट चुना गया था। उन्हें फरवरी 2023 में जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा इस पद के लिए नॉमिनेट किया गया था। बंगा इससे पहले भी कई अहम पद संभाल चुके हैं। वह मास्टरकार्ड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रह चुके हैं। वर्ल्ड बैंक के लिए नॉमिनेट होने से पहले वह एक्सोर के चेयरमैन थे। बंगा पूर्व अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट कमला हैरिस के साथ सेंट्रल अमेरिका के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के चेयरमैन भी थे। अजय बंगा ने विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष का पद संभालने के बाद कई सुधार वाले काम शुरू किए हैं। गाजा में आतंकवाद खत्म करने की जिम्मेदारी अमेरिकी जनरल को सौंपी गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना के मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है। व्हाइट हाउस ने कहा कि जैस्पर जेफर्स सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करेंगे। डी-मिलिट्राइजेशन में मदद करेंगे, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण में इस्तेमाल हो रही जरूरी चीजों की सुरक्षा करेंगे। अमेरिका ने इजराइल और अरब देशों के साथ साझेदारी की बात कही
व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि अमेरिका इस ट्रांजिशनल फ्रेमवर्क को पूरी तरह समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत इजराइल, प्रमुख अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर इस योजना को पूरा किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने सभी पक्षों से गाजा के प्रशासन के लिए बनाए गए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG), बोर्ड ऑफ पीस और ISF के साथ पूरा सहयोग करने की अपील की है, ताकि योजना को तेजी से लागू किया जा सके। अमेरिकी प्रशासन बोली- NCAG का मकसद गाजा में स्थायी शांति लाना अमेरिकी प्रशासन ने NCAG को ट्रम्प की योजना के दूसरे चरण को लागू करने की अहम कड़ी बताया गया है। यह योजना 20 प्वाइंट रोडमैप पर आधारित है, जिसका मकसद गाजा में स्थायी शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और समृद्धि लाना है। योजना के मुताबिक, अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो युद्ध तुरंत खत्म हो जाएगा। इसके तहत इजराइली सेना तय लाइन तक पीछे हटेगी, ताकि बंधकों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सके। सभी सैन्य गतिविधियां, जिनमें हवाई और तोपखाने हमले शामिल हैं, रोक दी जाएंगी। गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अब गाजा जंग को जानिए… ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया: ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे थे, कहा- नहीं माने तो जून से 25% टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे थे। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 12:43:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:कराची के शॉपिंग मॉल में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लगी, 3 लोगों की मौत, 7 घायल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कराची में शनिवार को एक शॉपिंग मॉल में अचानक भीषण आग लगने से 3 लोगों की मौत हो गई। जबकि 7 अन्य लोग घायल हो गए हैं। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। ANI की रिपोर्ट के अुनसार, आग एक दुकान से शुरू होकर पूरे मॉल में फैल गई। मौके पर 7 फायर ब्रिगेड पहुंची, जिन्होंने आग पर काबू पाया। इलाके के सिविल अस्पताल को भी अलर्ट पर रखा गया था। बचावदल ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और राहत-बचाव कार्य में मदद की। सिंध के गवर्नर कमरान टेसोरी ने घटना पर चिंता जताई। उन्होंने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी। वहीं सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजार ने ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट करने को कहा और जांच के निर्देश दे दिए हैं। एक दिन पहले कराची पोर्ट ट्रस्ट में भी आग लगी थी, जिसमें 20 से ज्यादा कंटेनर जल गए थे। इनमें से ज्यादातर में इलेक्ट्रिक बैटरियां भरी हुई थीं। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… सीरिया में अमेरिका का तीसरा हमला, ISIS से जुड़े आतंकी लीडर की मौत अमेरिका ने सीरिया में एक और जवाबी हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक उत्तर-पश्चिम सीरिया में हुए इस हमले में एक आतंकी लीडर मारा गया, जिसका संबंध उस इस्लामिक स्टेट (ISIS) हमले से था, जिसमें पिछले महीने दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया मारे गए थे। CENTCOM ने बताया कि शुक्रवार को किए गए हवाई हमले में बिलाल हसन अल-जसीम मारा गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार वह एक अनुभवी आतंकी ऑपरेटिव था और 13 दिसंबर को हुए हमले से सीधे तौर पर जुड़ा था। इस हमले में अमेरिकी सेना के सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर, सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड और सिविलियन इंटरप्रेटर अयाद मंसूर साकत की मौत हुई थी। CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान में कहा- तीन अमेरिकियों की मौत से जुड़े आतंकी की हत्या यह दिखाती है कि अमेरिकी सेना पर हमला करने वालों का हम पीछा करना जारी रखेंगे। अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को निशाना बनाने वालों के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। सर्बिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों छात्रों का प्रदर्शन, सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया नवी साद (सर्बिया) में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतरे। यूनिवर्सिटी छात्रों के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए और राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वूचिच के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया गया। प्रदर्शनकारियों ने “चोर-चोर” के नारे लगाते हुए सरकार पर व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि नवंबर 2024 में नवी साद के रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी, उसके पीछे भी सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। इसी घटना के बाद देशभर में आंदोलन तेज हुआ। छात्रों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति वूचिच ने उनकी मांग के बावजूद समय से पहले चुनाव कराने से इनकार कर दिया है। आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई लोगों ने नौकरी जाने या दबाव का सामना करने की बात कही है। ट्रम्प के बयानों के खिलाफ ग्रीनलैंड में हजारों लोग सड़कों पर उतरे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने से जुड़े बयानों के खिलाफ शनिवार को हजारों ग्रीनलैंडवासी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने &#039;ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है&#039; के नारे लगाए और अपनी स्वशासन व्यवस्था के समर्थन में मार्च किया। बर्फ और बर्फीली सड़कों के बीच प्रदर्शनकारी ग्रीनलैंड की राजधानी नूक के डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय झंडे लहराए और विरोधी पोस्टर थामे रहे। पुलिस के मुताबिक यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें नूक की लगभग एक-चौथाई आबादी शामिल हुई। प्रदर्शन के दौरान ही खबर आई कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने फरवरी से आठ यूरोपीय देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% टैक्स लगाने की घोषणा की है। यह फैसला उन देशों के ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध से जोड़ा जा रहा है। ]]></description>
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<title>अमेरिका की हिदायत&#45; मेक्सिको के ऊपर उड़ते समय सावधान रहे:60 दिन की पाबंदी लगाई; पिछले हफ्ते ड्रग कार्टेल को लेकर हमले की धमकी दी थी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने शुक्रवार को अपनी एयरलाइंस को चेतावनी जारी की है कि वे मेक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों के ऊपर उड़ान भरते समय सतर्क रहें। यह चेतावनी संभावित सैन्य गतिविधियों और जीपीएस सिग्नल में रुकावट के खतरे के कारण दी गई है। FAA ने मेक्सिको, मध्य अमेरिकी देशों, इक्वाडोर, कोलंबिया और पूर्वी प्रशांत महासागर के कुछ हवाई क्षेत्रों के लिए नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी किए हैं। ये चेतावनियां 16 जनवरी 2026 से शुरू होकर 60 दिनों तक, यानी मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी। मेक्सिको सरकार ने FAA की इस चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक सावधानी है। इससे मेक्सिको की हवाई सीमा या वहां की एयरलाइंस पर कोई पाबंदी नहीं लगी है। यह नोटिस केवल अमेरिकी ऑपरेटरों (एयरलाइंस) पर लागू होता है और मेक्सिको में उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहेंगी। ट्रम्प ने 8 दिसंबर को कहा था कि मेक्सिको में ड्रग कार्टेल देश चला रहे हैं और अमेरिका इनके खिलाफ जमीन पर हमले कर सकता है। जमीन पर मौजूद ड्रग कार्टेल को खत्म करेगा अमेरिका वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 8 दिसंबर को कहा था कि उनका प्रशासन जल्द ही जमीन पर मौजूद ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के लिए कार्रवाई शुरू करेगा। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि मेक्सिको पर ड्रग कार्टेल का राज है। यह अमेरिका में हर साल 2.5 लाख से 3 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र के रास्ते से ड्रग्स की तस्करी को 97% तक रोक दिया है, इसलिए अब जमीन पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने योजनाओं के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबॉम ने ट्रम्प के बयानों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि अमेरिका किसी भी क्षेत्र का मालिक नहीं है। ट्रम्प बोले- मेक्सिको में ड्रग कार्टेल्स खत्म करने की पेशकश की, राष्ट्रपति नहीं मानी मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने साफ किया कि मेक्सिको दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को पूरी तरह खारिज करता है। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने शीनबाम से कई बार अमेरिकी सैनिक भेजकर कार्टेल्स को खत्म करने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। शीनबाम ने ने ड्रग तस्करी रोकने में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग का जिक्र किया, लेकिन अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को सिरे से नकार दिया। दावा- मेक्सिको में ड्रग माफिया पर एयर स्ट्राइक करेगा अमेरिका ट्रम्प ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि वो ड्रग तस्करी से निपटने के लिए मेक्सिको में अमेरिकी सेना और खुफिया अधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। ये दावा अमेरिकी न्यूज चैनल NBC न्यूज की रिपोर्ट में किया गया था। रिपोर्ट में दो मौजूदा और दो रिटायर्ड अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस मिशन में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) भी शामिल हो सकती है। इन अधिकारियों के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन ने मेक्सिको में ड्रग कार्टेल्स को निशाना बनाने के लिए इस ऑपरेशन की प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस संभावित मिशन से जुड़ी शुरुआती ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। प्लान के मुताबिक, मेक्सिको की जमीन पर भी ऑपरेशन हो सकता है। हवाई हमलों और ड्रोन स्ट्राइक का प्लान NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिका की ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) की टीमें शामिल हो सकती हैं, जो CIA के अधिकार क्षेत्र में काम करेंगी। मिशन के तहत ड्रग लैब्स और कार्टेल सरगनाओं को निशाना बनाने के लिए ड्रोन स्ट्राइक की योजना है। कई ड्रोन ऐसी हैं जिनके संचालन के लिए जमीन पर भी ऑपरेटर्स की जरूरत पड़ती है। ड्रग्स तस्कर गिरोहों को आतंकी संगठन घोषित किया था फरवरी 2025 में, अमेरिकी विदेश विभाग ने 6 मेक्सिकन कार्टेल्स, MS-13 गैंग और वेनेज़ुएला के ‘ट्रेन डे अरागुआ’ को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। इससे अमेरिकी सेना और CIA को गुप्त ऑपरेशंस करने की खुली छूट मिल जाती है। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि उन्होंने वेनेज़ुएला में CIA को कार्रवाई की मंजूरी दी थी और जरूरत पड़ने पर वे कार्टेल्स को जमीन पर भी निशाना बनाएंगे। मेक्सिको से अमेरिका में होती है ड्रग तस्करी मेक्सिको दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का गढ़ माना जाता है, जहां से कोकीन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनाइल जैसे बेहद खतरनाक ड्रग अमेरिका तक पहुंचते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, देश में ड्रग की सबसे बड़ी सप्लाई मेक्सिकन कार्टेल्स के जरिए होती है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग मार्केट है। हर साल लाखों लोग नशे की लत के शिकार होते हैं और फेंटेनाइल जैसी दवाओं से हजारों मौतें होती हैं। अमेरिकी सरकार पर लगातार दबाव रहता है कि ड्रग तस्करी पर सख्त कदम उठाए जाएं और इसी वजह से उसकी नजर मेक्सिको में मौजूद कार्टेल्स पर रहती है। दूसरी तरफ, कार्टेल्स मेक्सिको में इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि कई इलाकों में वे पुलिस और सरकार को चुनौती देते हैं। हथियारबंद गिरोह, धमकी, भ्रष्टाचार और हिंसा के चलते स्थानीय प्रशासन भी कई बार उन्हें रोक नहीं पाता। कई कार्टेल्स तो अपने को शेडो गवर्मेंट की तरह चलाते हैं। सिनालोआ कार्टेल के पास राइफलों का जखीरा, टैंक भी मौजूद द गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार मेक्सिको के सबसे बड़े सिनालोआ कार्टेल के पास 600 से अधिक विमान और हेलीकॉप्टर हैं। ये संख्या मेक्सिको की सबसे बड़ी एयरलाइंस एयरो मैक्सिको से पांच गुना ज्यादा है। कार्टेल्स अब ड्रोन और आर्मर्ड व्हीकल्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। जैसे जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) के पास मशीन गन, टैंक और बॉडी आर्मर से लैस ग्रुप्स हैं। कुल मिलाकर, कार्टेल्स की &quot;प्राइवेट सेना&quot; या मेंबर्स की संख्या 2022-2023 में 160,000 से 185,000 अनुमानित थी, जो मेक्सिको में पांचवीं सबसे बड़ी एम्प्लॉयर बनाती है मेक्सिको गृह मंत्रालय की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार कार्टेल के पास एके-47 और एम-80 जैसे असॉल्ट राइफलों का जखीरा है। हर साल सुरक्षा एजेंसियों के द्वारा ड्रग कार्टेल के कब्जे से 20 हजार से ज्यादा असॉल्ट राइफलों की बरामदगी की जाती है। मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स सबसे ज्यादा कमाई करने वाले क्रिमिनल ग्रुप्स मेक्सिको सरकार कार्टेल से बरामद किए जाने वाले हथियारों को तबाह करती है। इनका फिर से इस्तेमाल नहीं किया जाता है। कार्टेल इन हथियारों को अमेरिकी माफिया से ड्रग्स की सप्लाई के बदले में करते हैं। 5 साल के दौरान कार्टेल ने रॉकेट लॉन्चर्स भी हासिल कर लिए हैं। इनका इस्तेमाल सरकारी टोही विमानों पर हमले के लिए करते हैं। UN वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, मेक्सिको के ड्रग कार्टेल्स अब दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले क्रिमिनल ग्रुप्स हैं, जो सालाना $12.1 बिलियन (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा कमाते हैं। यह मुख्य रूप से कोकेन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनिल की तस्करी से आता है, और मेक्सिको के कार्टेल्स कोलंबिया के कार्टेल्स से आगे निकल गए हैं। अमेरिका-मेक्सिको ट्रेड एग्रीमेंट भी खतरे में है ट्रम्प की धमकी के बाद अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच USMCA (यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) मुक्त व्यापार समझौते के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मेक्सिको के अर्थव्यवस्था मंत्री मार्सेलो एब्रार्ड ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि यह समझौता पूरी तरह मजबूत है और तीनों देश इसे बढ़ाने के लिए जल्द ही समझौता करेंगे। एब्रार्ड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, &quot;हम पहले से ही संधि की समीक्षा कर रहे हैं और हमें 1 जुलाई, 2026 तक इसे पूरा करना है।&quot; उन्होंने बताया कि तीनों देशों के सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अच्छी प्रगति हुई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हफ्ते फिर से समझौते के भविष्य पर संदेह जताया था। ट्रम्प ने कहा था, &quot;इसमें अमेरिका को कोई असली फायदा नहीं है, यह हमारे लिए बेकार है।&quot; इस साल तीनों देश USMCA की संयुक्त समीक्षा करेंगे USMCA समझौता 2020 में लागू हुआ था, जो पुराने NAFTA (नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की जगह लिया था। यह मेक्सिको की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। तीनों देशों के बीच सालाना लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार होता है। 2026 में तीनों देशों को इसकी संयुक्त समीक्षा करनी है। अगर समीक्षा में तीनों सहमत होकर इसे बढ़ाते हैं, तो समझौता अगले 16 साल (2036 तक) बिना किसी बदलाव के चलेगा। अगर नहीं, तो हर साल समीक्षा होगी और अनिश्चितता बनी रहेगी। ट्रम्प प्रशासन ने पहले ही मेक्सिको से आने वाले स्टील और एल्युमिनियम पर 50% ड्यूटी और कारों पर 25% टैरिफ लगा रखा है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएलाई नेता ने अपना नोबेल पुरस्कार ट्रम्प को दिया: मचाडो के प्रेसिडेंट बनने की चर्चा थी, लेकिन ट्रम्प का समर्थन नहीं; अब बोलीं- अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद यह उनकी किसी भी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:32:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिका, की, हिदायत-, मेक्सिको, के, ऊपर, उड़ते, समय, सावधान, रहे:60, दिन, की, पाबंदी, लगाई, पिछले, हफ्ते, ड्रग, कार्टेल, को, लेकर, हमले, की, धमकी, दी, थी</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प बोले&#45; पाकिस्तानी PM ने 10 लाख लोगों की जान बचाने के लिए शुक्रिया कहा था; भारत&#45;पाक संघर्ष रुकवाने का दावा किया</title>
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<description><![CDATA[ यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क सिटी में शुक्रवार को एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाई थी। ट्रम्प ने बताया कि पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने 10 लाख लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें शुक्रिया कहा था। ट्रम्प ने यह बयान दक्षिणी बोलेवार्ड सड़क का नाम बदलकर ‘डोनाल्ड जे ट्रम्प बुलेवार्ड’ रखे जाने के मौके पर दिया। उन्होंने कहा,‘एक साल में हमने 8 शांति समझौते कराए। गाजा में वॉर रुकवाई, मध्य-पूर्व में शांति लाई। भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु ताकत वाले देशों को लड़ने से रोका।’ हालांकि भारत ने इन दावों का लगातार खंडन किया है। भारत हमेशा कहता आया है कि भारत-पाक के बीच सीजफायर में किसी तीसरे देश का कोई हस्तक्षेप था। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प के गाजा पीस प्लान का दूसरा चरण, पुनर्निर्माण के लिए कमेटी बनाई; बोर्ड ऑफ पीस की अध्यक्षता खुद संभालेंगे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इसे गाजा में लंबे समय तक शांति, पुनर्निर्माण और आर्थिक पुनरुत्थान के लिए 20 सूत्रीय रोडमैप का अहम हिस्सा बताया गया है। यह कमिटी डॉ. अली शा&#039;थ के नेतृत्व में काम करेगी। डॉ. शा&#039;थ एक तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्नोक्रेट) प्रशासक हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, डॉ. शा&#039;थ गाजा में बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा) को बहाल करने, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और रोजमर्रा की जिंदगी को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, राष्ट्रपति ट्रम्प की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस का एक कार्यकारी बोर्ड बनाया गया है। इस बोर्ड का गठन योजना को लागू करने के लिए किया गया है। बोर्ड के प्रमुख सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत), जरद कुश्नर (विशेष दूत), सर टोनी ब्लेयर (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री) समेत कई लोग शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:32:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध किया तो टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प:दुनियाभर के देशों को धमकी दी; कनाडाई PM बोले&#45; हर हाल में ग्रीनलैंड के साथ खड़े</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने को लेकर खुली धमकी दी है। BBC के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर किसी देश ने ग्रीनलैंड पर कब्जे वाले प्लान में उनका साथ नहीं दिया तो वे उन देशों पर टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान यह बयान दिया। हालांकि, ट्रम्प ने साफ नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और इसके लिए वह किस कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। दूसरी ओर कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शुक्रवार को कहा कि ग्रीनलैंड के मालिकाना हक का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नहीं है। NATO देश होने के नाते ग्रीनलैंड के तरफ हमारी जिम्मेदारी बरकरार है। हम इनके पीछे पूरी तरह से खड़े हैं। ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड जरूरी ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए भी अहम बताया है। गोल्डन डोम अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट है। यह इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है। गोल्डन डोम का मकसद चीन, रूस जैसे देशों से आने वाले खतरे से अमेरिका को बचाना है। ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर NATO से भी बातचीत कर रहा है। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि NATO को अमेरिका का साथ देना चाहिए। अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कंट्रोल नहीं किया, तो रूस या चीन वहां अपना असर बढ़ा सकते हैं, जो किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अमेरिकी संसद की टीम ग्रीनलैंड पहुंची ट्रम्प के बयान के वक्त अमेरिकी संसद का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ग्रीनलैंड के दौरे पर था। इस 11 सदस्यीय टीम का नेतृत्व डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स कर रहे हैं। इसमें रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और लिसा मर्कोव्स्की भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीनलैंड के सांसदों के अलावा डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन से मुलाकात की। टीम का मकसद स्थानीय लोगों की बात सुनना और वॉशिंगटन में तनाव कम करना है। सीनेटर कून्स ने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड के लोगों की सुन रहे हैं और उनकी राय लेकर वापस जाएंगे, ताकि स्थिति शांत हो।’ ग्रीनलैंड की सांसद आजा चेमनित्ज ने कहा, &#039;हमें दोस्तों और सहयोगियों की जरूरत है। अमेरिका 2019 से दबाव बना रहा है। यह एक लंबी दौड़ है, जो अभी खत्म नहीं हुई। जितना ज्यादा समर्थन मिले, उतना अच्छा।&quot; उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मुलाकात फायदेमंद साबित होगी। ग्रीनलैंड को लेकर दो गुट में बंटे अमेरिकी सांसद अमेरिकी सीनेटर मर्कोव्स्की ने ग्रीनलैंड को जबरन लेने के खिलाफ संसद में एक बिल पेश किया है। वहीं, एक रिपब्लिकन सांसद ने ग्रीनलैंड को जोड़ने के पक्ष में दूसरा बिल पेश किया। ट्रम्प के विशेष दूत जेफ लैंड्री ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका को ग्रीनलैंड के नेताओं से सीधे बात करनी चाहिए, न कि डेनमार्क से। उन्होंने कहा, ‘ट्रम्प गंभीर हैं। जल्द ही सौदा हो जाएगा।’ बुधवार को डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट ने व्हाइट हाउस में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। एक डेनिश अधिकारी ने BBC से कहा कि सैन्य कार्रवाई की कोई बात नहीं हुई, लेकिन ट्रम्प के बयानों को गंभीरता से लिया जा रहा है। ग्रीनलैंड पर चर्चा के लिए वर्किंग ग्रुप बनेगा व्हाइट हाउस में बुधवार को हुई बातचीत में डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। हालांकि, बैठक के बाद तीनों पक्षों ने ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई, जिसकी बैठकें आने वाले हफ्तों में होंगी। रासमुसेन ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ असहमति बनी हुई है। हमारा रुख काफी अलग है। उन्होंने ट्रम्प के ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने के विचार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘हमने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश आर्कटिक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसमें ग्रीनलैंड में ज्यादा अमेरिकी सैन्य अड्डे बनाने की संभावना भी शामिल है। यूरोपीय देश डेनमार्क के समर्थन में आए, सैनिक भेज रहे यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में कदम बढ़ाए हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ग्रीनलैंड में एक निगरानी मिशन के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं। जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में डेनमार्क का समर्थन करने के लिए 13 लोगों की एक टीम भेजेगा। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बुधवार को कहा कि डेनमार्क के कहने पर स्वीडिश आर्म्ड फोर्स के कई अधिकारियों को एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने के लिए ग्रीनलैंड भेजा गया है। कनाडाई PM बोले- ग्रीनलैंड के साथ खड़े कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शुक्रवार को बीजिंग में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों का फैसला है।” यह बात उन्होंने ग्रीनलैंड से जुड़े एक सवाल के जवाब में कही। कार्नी ने नाटो सहयोगियों, खासकर अमेरिका से कहा कि वे अपने वादों का सम्मान करें। उन्होंने ग्रीनलैंड की संप्रभुता का पूरा समर्थन जताया। कार्नी ने बताया कि ग्रीनलैंड और आर्कटिक संप्रभुता पर बातचीत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से काफी सहमति बनी। ट्रम्प बोले- संधि या लीज नहीं, ग्रीनलैंड पर पूरा कंट्रोल चाहिए ट्रम्प का कहना है कि रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि सिर्फ संधि या लीज से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरा कंट्रोल चाहिए। इससे और सुविधाएं मिलेंगी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को कहा कि उनकी टीम ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने के कई तरीके तलाश रही है, जिनमें सैन्य बल का इस्तेमाल भी शामिल है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया तो अमेरिका को &#039;कुछ करना ही पड़ेगा&#039;। ट्रम्प की टैरिफ डिप्लोमेसी, दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करते ट्रम्प अपने दूसरे टर्म में टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। इसके जरिए वे जियोपॉलिटिकल मुद्दों, जैसे जंग रोकना, क्षेत्रीय नियंत्रण, या राष्ट्रीय सुरक्षा को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये धमकियां अक्सर नेगोशिएशन या दबाव बनाने के लिए दी जाती हैं। ट्रम्प ने अब तक कई मौकों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ग्रीनलैंड को क्या ट्रम्प अमेरिका में मिला सकते हैं, नियम जानिए ट्रम्प ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने (खरीदने या कब्जा करने) की बात 2019 से ही कर रहे हैं। उनके दूसरे कार्यकाल में यह मुद्दा फिर से बहुत जोर पकड़ गया है। लेकिन कानूनी रूप से यह इतना आसान नहीं है। ग्रीनलैंड और अमेरिका दोनों ही NATO देश हैं। कानून के मुताबिक एक NATO देश दूसरे NATO देश पर कानूनी रूप से कब्जा नहीं कर सकता। ये पूरी तरह अवैध और NATO संधि के खिलाफ होगा। NATO का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला है। अगर कोई बाहरी दुश्मन हमला करे तो सभी सदस्य मिलकर मदद करेंगे। ग्रीनलैंड पहले स्वतंत्र हो, फिर अमेरिका से जुड़े: ग्रीनलैंड अभी डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। 2009 के सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट के तहत ग्रीनलैंड के लोग रेफरेंडम (जनमत संग्रह) करके स्वतंत्र हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए डेनिश संसद की भी मंजूरी जरूरी है। 85% लोगों ने अमेरिकी कब्जे का विरोध किया साल 2025 में एक सर्वे में 85 प्रतिशत लोगों ने अमेरिकी कब्जे का विरोध किया था। 1951 का छोटा रक्षा समझौता 2004 में अपडेट किया गया था, जिसमें ग्रीनलैंड की सेमी-ऑटोनॉमस सरकार को शामिल किया गया, ताकि अमेरिकी सैन्य गतिविधियां स्थानीय लोगों को प्रभावित न करें। इस समझौते की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हुई, जब डेनमार्क नाजी कब्जे में था और उसके वॉशिंगटन दूत ने अमेरिका के साथ ग्रीनलैंड के लिए रक्षा समझौता किया। उन्हें डर था कि नाजी ग्रीनलैंड को अमेरिका पर हमले के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उस समय अमेरिकी सैनिकों ने द्वीप पर कई बेस बनाए और जर्मनों को हटाया। युद्ध के बाद अमेरिका ने कुछ बेस अपने पास रखे, लेकिन कोल्ड वॉर खत्म होने पर ज्यादातर बंद कर दिए। अब अमेरिका के पास सिर्फ पिटुफिक स्पेस बेस बचा है, जो मिसाइल ट्रैकिंग करता है। डेनमार्क की भी वहां हल्की मौजूदगी है, जैसे डॉग स्लेज वाली स्पेशल फोर्सेस। हाल में डेनमार्क ने अपना बेस अपग्रेड करने का वादा किया है। ग्रीनलैंड क्यों इतना खास… ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत: कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत:कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:32:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी:ट्रम्प बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं; ईरान का जवाब&#45; हमला किया तो छोड़ेंगे नहीं</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका ने गुरुवार को ईरान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हो रही क्रूर दमनकारी कार्रवाई को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने ईरान के लोगों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि ईरान के लोगों ने इतिहास में कभी भी इतने जोरदार तरीके से आजादी की मांग नहीं की। वाल्ट्ज ने कहा, ‘ट्रम्प एक्शन लेने वाले इंसान हैं, लंबी-लंबी बातें करने वाले नहीं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के नेतृत्व को पता होना चाहिए कि अमेरिका इस नरसंहार को रोकने के लिए कोई भी कदम उठा सकता है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की इस बैठक में ईरान के उप-राजदूत ने जवाब दिया कि उनका देश टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया तो ईरान जवाब देगा। अमेरिका ने ईरान सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए
UN में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने बैठक में ईरान सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर कितनी सख्ती की है। वॉल्ट्ज ने कहा, &#039;ईरान सरकार का यह दावा कि हाल में हुए प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकत हैं, यह दिखाता है कि ईरानी सरकार अपने ही लोगों से डर रही है। साथ ही सारा इल्जाम दूसरों के मत्थे मढ़ रही है। व्हाइट हाउस बोला- ट्रम्प के दबाव में 800 लोगों की फांसी रुकी ट्रम्प ने कई बार ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। गुरुवार को ट्रम्प ने बताया कि हत्याएं अब कम हो रही हैं। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि ट्रम्प के दबाव के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने परिषद को बताया कि ये प्रदर्शन तेजी से फैले। इसमें काफी जान-माल का नुकसान हुआ है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया, जबकि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका है। उन्होंने ईरान सरकार से अपील की है कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में किसी भी फांसी को रोका जाए। सभी मौतों की पारदर्शी जांच हो और कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए। ईरान का जवाब: टकराव नहीं चाहते, लेकिन हमला हुआ तो कार्रवाई करेंगे सुरक्षा परिषद की बैठक में ईरान ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने कहा कि अमेरिका गलत जानकारी फैला रहा है और जानबूझकर अशांति को हिंसा की ओर मोड़ रहा है। दर्जी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि ईरान न तो तनाव बढ़ाना चाहता है और न ही टकराव चाहता है। दर्जी ने चेतावनी दी कि ‘किसी भी तरह की कार्रवाई का निर्णायक और कानूनी जवाब दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिया गया बयान है। ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका मानवाधिकारों की आड़ में शासन बदलने और हमला करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने अमेरिका में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया, जिसमें मिनेसोटा राज्य में एक इमिग्रेशन अधिकारी ने रेनी गुड की हत्या को गोली मार दी थी। रूस बोला- अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल दे रहा
रूस ने अमेरिका की आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि अमेरिका इस बैठक का इस्तेमाल ईरान के आंतरिक मामलों में दखल और आक्रामकता को सही ठहराने के लिए कर रहा है। नेबेंजिया ने चेतावनी दी कि सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं और पूरा क्षेत्र खून-खराबे में डूब सकता है, जिसका असर आसपास के दूसरे देशों पर भी पड़ेगा। रूस ने संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों से बड़े टकराव को रोकने की अपील की। वहीं फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान की कार्रवाई को क्रूर बताया। फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर हो रहे दमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा होनी चाहिए। उन्होंने ईरान नए प्रतिबंधों की चेतावनी दी। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व पर नए प्रतिबंध लगाए बैठक के साथ ही अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया। ट्रम्प प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों लगाए हैं। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों पर क्रूर कार्रवाई की योजना बनाई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, &#039;राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने वित्त मंत्रालय को प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।&#039; ईरान पहले से ही कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और ज्यादा कमजोर हुई है। इसी आर्थिक संकट को मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरान में इतिहास का सबसे लंबा डिजिटल ब्लैकआउट साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था नेट ब्लॉक ने बताया है कि ईरानी सरकार ने 8 जनवरी से देश भर में इंटरनेट की लगभग पूरी पहुंच बंद कर दी है। यह डिजिटल ब्लैकआउट अब एक सप्ताह से ज्यादा (16 जनवरी 2026 तक 180 घंटे से अधिक) चल रहा है। यह ईरान के इतिहास में अब तक के सबसे लंबे डिजिटल ब्लैकआउट में से एक है। यह इंटरनेट कट पूरे देश में लागू है, जिसमें तेहरान, इस्फहान, शिराज, केरमानशाह और कई अन्य शहर शामिल हैं। कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से घटकर महज 1% या उससे भी कम रह गई है। घरेलू नेटवर्क भी प्रभावित हैं। इससे फोन लाइनें, मोबाइल इंटरनेट, सोशल मीडिया और वेबसाइट्स तक पहुंच लगभग बंद हो गई है। नेट ब्लॉक ने इसे डिजिटल ब्लैकआउट कहा है और बताया कि यह विरोध प्रदर्शनों को निशाना बनाने वाली बढ़ती डिजिटल सेंसरशिप का हिस्सा है। इससे लोगों को एक-दूसरे से संपर्क करने, घटनाओं की जानकारी साझा करने और दुनिया को दमन की सच्चाई दिखाने का अधिकार छीन लिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे 9 करोड़ से ज्यादा ईरानी लोग दुनिया से कट गए हैं। ईरान में हुए प्रदर्शन का कारण जानिए... ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा कई कारणों से भड़की है। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें…
अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा: ईरानी विदेश मंत्री बोले- कोई फांसी नहीं; ट्रम्प का दावा- प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुकीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के बाद ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देने के फैसले से पीछे हट गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने बुधवार को कहा कि ईरान की ओर से लोगों को फांसी देने की कोई योजना नहीं है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 12:47:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>अमेरिकी, राजदूत, की, ईरान, को, चेतावनी:ट्रम्प, बातें, नहीं, करते, एक्शन, लेते, हैं, ईरान, का, जवाब-, हमला, किया, तो, छोड़ेंगे, नहीं</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने अमेरिका के मिनेसोटा में सेना तैनात करने की धमकी दी, अप्रवासियों की गिरफ्तारी के बाद हिंसा भड़की</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि वह मिनेसोटा में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए सदियों पुराने कानून का सहारा ले सकते हैं। ट्रम्प ने कहा कि “अगर मिनेसोटा के भ्रष्ट राजनेता कानून का पालन नहीं करते और विद्रोहियों को ICE पर हमला करने से नहीं रोकते तो मैं विद्रोह अधिनियम लागू करूंगा। विद्रोह अधिनियम पहली बार 1792 में पारित हुआ और 1871 में संशोधित किया गया। यह कानून राष्ट्रपति को सैन्य बलों को तैनात करने की अनुमति देता है ताकि विद्रोह या अशांति को कंट्रोल किया जा सके। ट्रम्प का यह बयान मिनियापोलिस में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंटों की बढ़ी मौजूदगी और दो फायरिंग घटनाओं के बाद सामने आया है। पहली घटना में एक ICE एजेंट ने अमेरिकी नागरिक रेनी गुड को गोली मार दी थी, जबकि दूसरी में एक वेनेजुएलाई नागरिक घायल हुआ। ट्रम्प पिछले कई हफ्तों से मिनेसोटा के डेमोक्रेट नेताओं से नाराज हैं। उन्होंने राज्य में रहने वाले सोमाली मूल के लोगों को कचरा बताते हुए देश से बाहर फेंकने जैसी टिप्पणी भी की है। ट्रम्प प्रशासन पहले ही मिनियापोलिस इलाके में करीब 3,000 अधिकारियों को तैनात कर चुका है, जो हथियारों के साथ सैन्य जैसी वर्दी और मास्क पहनकर गश्त कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने 2025 में सत्ता संभालने के बाद बड़े पैमाने पर अवैध अप्रवासियों की गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन की सख्त मुहिम शुरू की है। ये एजेंट हजारों लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं। स्थानीय लोग इसे नस्लीय भेदभाव और आतंक मान रहे हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ दिन-रात विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। स्थानीय लोग सीटी बजा रहे हैं, ढोल-टैंबरीन पीट रहे हैं और नारे लगा रहे हैं। बुधवार रात उस इलाके में बड़ी भीड़ जमा हुई, जहां वेनेजुएलाई नागरिक को गोली लगी थी। इस दौरान अधिकारियों ने ग्रेनेड छोड़े और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इन घटनाओं के बाद ट्रम्प प्रशासन और मिनेसोटा के नेता एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रम्प पहले भी डेमोक्रेट शासित शहरों में नेशनल गार्ड को फेडरल कंट्रोल में लेकर इमिग्रेशन कानून लागू करवा चुके हैं। लॉस एंजिल्स में की गई ऐसी ही कार्रवाई को एक जज ने दिसंबर में असंवैधानिक बताया था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 12:47:25 +0530</pubDate>
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<title>वेनेजुएलाई नेता ने अपना नोबेल पुरस्कार ट्रम्प को दिया:मचाडो के प्रेसिडेंट बनने की चर्चा थी, लेकिन ट्रम्प का समर्थन नहीं; अब बोलीं&#45; अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात की। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद यह उनकी किसी भी वेनेजुएलाई नेता से पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। मुलाकात के बाद माचाडो ने कहा कि उन्होंने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल भेंट किया है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि आज हम वेनेजुएलावासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है।’ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मचाडो ने ट्रम्प को अपना पुरस्कार सौंपने के बारे में बताया, लेकिन उन्होंने दूसरी कोई जानकारी नहीं दी। वहीं, व्हाइट हाउस ने भी यह नहीं बताया कि ट्रम्प ने मेडल स्वीकार किया या नहीं। व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद मचाडो ने बाहर जुटे समर्थकों से स्पेनिश में कहा, &#039;हम राष्ट्रपति ट्रम्प पर भरोसा कर सकते हैं।&#039; हालांकि, ट्रम्प ने अब तक माचाडो को वेनेजुएला की नई नेता के रूप में समर्थन नहीं दिया है। इसकी बजाय वे वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ काम कर रहे हैं।
 नोबेल संस्थान बोला- पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन उपाधि नहीं ट्रम्प हमेशा नोबेल शांति पुरस्कार लेने की इच्छा जताते रहे हैं। जब यह मचाडो को मिला तो उन्होंने नाराजगी जताई। दूसरी ओर नोबेल कमेटी ने पहले कहा था कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद इसे रद्द नहीं किया जा सकता। न ही इसे साझा किया जा सकता है और न ही किसी और को हस्तांतरित किया जा सकता है। यह निर्णय अंतिम है और हमेशा के लिए मान्य रहेगा। वहीं, गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई बैठक से पहले नोबेल संस्थान ने X पर पोस्ट कर बताया कि एक पदक के मालिक बदल सकते हैं, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की उपाधि नहीं बदल सकती। अक्टूबर 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ‘वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए उनके प्रयासों और तानाशाही से शांतिपूर्ण लड़ाई’ के लिए यह सम्मान मिला था। मचाडो बोली- वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी को मेडल लौटाया मचाडो ने ट्रम्प को नोबेल पुरस्कार देते हुए 1825 में अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के हीरो मार्क्विस डे लाफायेट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, &#039;200 साल पहले मार्क्विस डे लाफायेट ने जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर वाला मेडल साइमन बोलिवर को दिया था, जो अमेरिका और वेनेजुएला के बीच स्वतंत्रता की लड़ाई में भाईचारे का प्रतीक था। अब, बोलिवर के लोगों ने वॉशिंगटन के उत्तराधिकारी (ट्रम्प) को नोबेल मेडल लौटाया है। लाफायेट ने दक्षिण अमेरिका के आजादी के नेता साइमन बोलिवर को एक खास सोने का पदक भेजा। इस पदक पर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन की तस्वीर बनी हुई थी। यह तोहफा दोनों देशों के बीच भाईचारे और तानाशाही के खिलाफ साझा लड़ाई का प्रतीक था। बोलिवर ने इस पदक को बहुत सम्मान दिया और इसे हमेशा पहनते रहे। वेनेजुएला के लोग खुद को बोलिवर के वंशज मानते हैं। ट्रम्प बोले- मचाडो एक अद्भुत महिला, उनसे मिलना सम्मानजनक ट्रम्प ने सोशल मीडिया ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर मारिया कोरिना मचाडो से मुलाकात को सम्मानजनक बताया। उन्होंने कहा- मचाडो एक अद्भुत महिला हैं जिन्होंने बहुत कुछ बर्दाश्त किया है। मारिया ने मेरे अच्छे कामों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया। हमारे बीच का यह आपसी सम्मान कमाल का है। नोबेल पुरस्कार गिफ्ट करने को लेकर नियम क्या हैं ट्रम्प-मचाडो के बीच वेनेजुएला में चुनाव पर बातचीत नहीं बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेनेजुएला में संभावित चुनावों के लिए कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं, इस बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने कहा कि मचाडो से इस पर बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा, &#039;मुझे यकीन नहीं है कि राष्ट्रपति इस बैठक में ऐसे किसी विषय पर बात कर रहे हैं । मुझे नहीं लगता कि उन्हें मचाडो से कुछ भी सुनने की जरूरत है। यह एक ऐसी बैठक थी जिसमें ट्रम्प, मचाडो से व्यक्तिगत रूप से मिलने और वेनेजुएला पर बात करने के लिए तैयार थे।&#039; लेविट ने कहा &#039;मचाडो वेनेजुएला के कई लोगों के लिए एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज हैं।&#039; बंद कमरे में हुई ट्रम्प-मचाडो की मीटिंग ट्रम्प-मचाडो की मुलाकात बंद कमरे में हुई। बैठक के बाद ट्रम्प ने कोई बयान जारी नहीं किया, जैसा किसी भी मुलाकात के बाद किया जाता है। हालांकि, मचाडो ने उनके बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, &quot;मैं ट्रम्प की स्पष्टता, वेनेजुएला की स्थिति के बारे में उनके समझ और वेनेजुएला के लोगों के दर्द के प्रति उनकी चिंता से प्रभावित हुई।&quot; उन्होंने आगे कहा कि वेनेजुएला &quot;एकजुट&quot; है। 2024 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं मचाडो 2024 के चुनाव से पहले विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार थीं, लेकिन वेनेजुएला सरकार ने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। इसके बाद उन्होंने दूसरे पार्टी के प्रतिनिधि एडमंडो गोंजालेज उर्रुतिया का समर्थन किया। इसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी मिला। वेनेजुएला में मचाडो के समर्थक पार्टी को साफ जीत मिली लेकिन शासन ने चुनाव परिणाम स्वीकार नहीं किया और सत्ता पर कब्जा बनाए रखा। मचाडो दुनिया में पहली बार तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति का भाषण बंद करा दिया था। यह घटना 14 जनवरी 2012 की है। शावेज संसद में 9 घंटे 45 मिनट का भाषण दे चुके थे। तभी मचाहो ने चिल्लाते हुए उन्हें ‘चोर’ कहा और लोगों की जब्त की गई संपत्ति को लौटाने को कहा। इसके जवाब में शावेज ने कहा कि वो बहस नहीं करेंगे क्योंकि वह इसके काबिल नहीं। यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई और माचाडो को एक साहसी विपक्षी नेता के रूप में स्थापित किया। मादुरो की किडनैपिंग के बाद राष्ट्रपति पद की दावेदार थीं मचाडो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी को अगवा कर लिया था। इसके बाद, मारिया कोरिना मचाडो को कई लोग और विपक्षी समर्थक वेनेजुएला की राष्ट्रपति के रूप में देख रहे थे। मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मचाडो ने खुशी जताई और कहा कि आजादी का समय आ गया है। हालांकि, ट्रम्प ने मचाडो को राष्ट्रपति बनाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मचाडो के पास पर्याप्त समर्थन नहीं है और वे सेना या संस्थाओं में सम्मान नहीं रखतीं। इसके बजाय ट्रम्प ने मादुरो की पूर्व उप-राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में समर्थन दिया। वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने भी रोड्रिग्ज को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाने का आदेश दिया, और वे अब अमेरिकी देखरेख में देश चला रही हैं। एक नजर नोबेल पुरस्कार पर… 1895 में हुई थी नोबेल पुरस्कार की स्थापना नोबेल पुरस्कारों की स्थापना 1895 में हुई थी और पुरस्कार 1901 में मिला। 1901 से 2024 तक मेडिसिन की फील्ड में 229 लोगों को इससे सम्मानित किया जा चुका है। इन पुरस्कारों को वैज्ञानिक और इन्वेंटर अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की वसीयत के आधार पर दिया जाता है। शुरुआत में केवल फिजिक्स, मेडिसिन, केमिस्ट्री, साहित्य और शांति के क्षेत्र में ही नोबेल दिया जाता था। बाद में इकोनॉमिक्स के क्षेत्र में भी नोबेल दिया जाने लगा। नोबेल प्राइज वेबसाइट के मुताबिक उनकी ओर से किसी भी फील्ड में नोबेल के लिए नॉमिनेट होने वाले लोगों के नाम अगले 50 साल तक उजागर नहीं किए जाते हैं। --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत: कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को फिर से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की अपनी इच्छा दोहराई है। उन्होंने कहा कि कुछ न कुछ हल निकल आएगा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 12:47:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>वेनेजुएलाई, नेता, ने, अपना, नोबेल, पुरस्कार, ट्रम्प, को, दिया:मचाडो, के, प्रेसिडेंट, बनने, की, चर्चा, थी, लेकिन, ट्रम्प, का, समर्थन, नहीं, अब, बोलीं-, अमेरिकी, राष्ट्रपति, पर, भरोसा</media:keywords>
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<title>कनाडा में 180 करोड़ की गोल्ड चोरी में एक गिरफ्तार:एक अन्य आरोपी के भारत में होने का दावा; 2023 में टोरंटो एयरपोर्ट से चोरी हुई थी</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा में सबसे बड़ी गोल्ड चोरी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पील रीजनल पुलिस ने बताया कि 2023 में टोरंटो एयरपोर्ट से 180 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का सोना चोरी हुआ था। इस मामले में एक अन्य आरोपी के भारत में होने का भी दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, ‘प्रोजेक्ट 24K’ नाम से चल रही जांच के तहत 43 वर्षीय अरसलान चौधरी को टोरंटो पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। वह दुबई से कनाडा लौट रहा था। पुलिस का कहना है कि चौधरी का कोई स्थायी पता नहीं है। पील रीजनल पुलिस के मुताबिक, अरसलान चौधरी पर 5 हजार डॉलर से अधिक की चोरी, अपराध से हासिल संपत्ति रखने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही जांच का अहम हिस्सा है। कैसे हुई कनाडा की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी 17 अप्रैल 2023 को कनाडा में दोपहर 3 बजकर 56 मिनट पर स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख शहर से आ रही एक फ्लाइट कनाडा के टोरंटो शहर के पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लैंड हुई। इस फ्लाइट से शुद्ध सोने की 6,600 ईंटें और लगभग 2.5 मिलियन डॉलर (21 करोड़ रुपए से ज्यादा) की फॉरेन करेंसी लाई गई। सोने का कुल वजन करीब 400 किलो था, जिसकी कीमत 173 करोड़ रुपए थी। कैश को वेंकुवर के &#039;बुलियन एंड करेंसी एक्सचेंज&#039; और सोने को टोरंटो के TD बैंक में जमा किया जाना था। सोने और कैश को एयरपोर्ट के कार्गो कंपाउंड में रखा गया। कनाडा पुलिस के मुताबिक, वारदात के दिन 5 बजकर 50 मिनट तक सोने वाला कंटेनर कार्गो फैसिलिटी में ही था। शाम 6 बजकर 23 मिनट पर एक 5 टन का बड़ा ट्रक फैसिलिटी के बाहर पार्क किया गया। इस ट्रक से एक फर्जी एयरवे बिल के साथ एक शख्स वेयरहाउस में दाखिल हुआ। सीसीटीवी में कैद हुए इस शख्स के हाथ में ये बिल देखा जा सकता है। ये बिल असल में सीफूड यानी समुद्री मछलियों की डिलीवरी के लिए था। जिन्हें एक दिन पहले ही कार्गो वेयरहाउस से ले जाया जा चुका था। कनाडा पुलिस के मुताबिक, असल में एयरपोर्ट के अंदर के एक आदमी ने प्रिंटर से पुराना बिल निकालकर इसे दूसरे बिल से बदल दिया था। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, शाम 7 बजकर 4 मिनट पर ट्रक का ड्राइवर वेयरहाउस में उस सोने वाले कार्गो के पास पहुंचा। 7 बजकर 27 मिनट पर कार्गो को उठाकर ट्रक में लोड किया गया और अगले 3 मिनट में ट्रक वेयरहाउस से चला गया। करीब साढ़े 9 बजे जब एक सिक्योरिटी कंपनी का असली ट्रक सोने वाला कार्गो लेने एयरपोर्ट पहुंचा, तो पता चला कि सोना तो पहले ही गायब हो चुका है। सुबह 2 बजकर 23 मिनट पर एयर कनाडा ने कनाडा पुलिस को फोन करके वारदात की सूचना दी। क्लेटेन कास्टलिनो टोरंटो में कस्टम्स क्लियरेंस बिजनेस के प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने सीबीसी न्यूज से बातचीत में बताया कि कार्गो फैसिलिटी से कोई कार्गो ले जाने के लिए सिर्फ 2 चीजों की जरूरत होती है- कार्गो भेजने वाले की तरफ से एक लेटर और एक एयरवे बिल। इस बिल पर सही बिल नंबर होना चाहिए। चोरों के पास दोनों दस्तावेज थे। क्लेटेन के मुताबिक इनकी ठीक से जांच नहीं की गई। चोरी में शामिल सिमरनप्रीत के भारत में होने का दावा जांच में सामने आया कि ब्रैम्पटन निवासी 33 वर्षीय सिमरनप्रीत पनेसर ने इस चोरी में अहम भूमिका निभाई। पनेसर एयर कनाडा का पूर्व कर्मचारी है और उस पर एयरलाइन सिस्टम से छेड़छाड़ कर कार्गो को डायवर्ट करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि वह फिलहाल भारत में हो सकता है और उसके खिलाफ कनाडा में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। अब तक 10 लोगों पर कार्रवाई पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक 10 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें ब्रैम्पटन निवासी आर्चित ग्रोवर, परम्पाल सिद्धू, अमित जलोटा, प्रसाथ परमलिंगम, अली रजा, अम्मद चौधरी और डुरांटे किंग-मैकलीन शामिल हैं। किंग-मैकलीन फिलहाल अमेरिका में हथियार तस्करी के एक अन्य मामले में हिरासत में है। पील रीजनल पुलिस प्रमुख निशान दुरईअप्पाह ने कहा कि यह जांच दिखाती है कि पुलिस जटिल और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “चाहे आरोपी कहीं भी छिपे हों, हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे और कानून के सामने लाएंगे।” ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 11:39:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>कनाडा, में, 180, करोड़, की, गोल्ड, चोरी, में, एक, गिरफ्तार:एक, अन्य, आरोपी, के, भारत, में, होने, का, दावा, 2023, में, टोरंटो, एयरपोर्ट, से, चोरी, हुई, थी</media:keywords>
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<title>लंदन में 14 साल की सिख लड़की का गैंगरेप कराया:पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने फ्लैट में बंद किया; 200 सिखों ने घेरा डालकर छुड़ाया</title>
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<description><![CDATA[ इंग्लैंड के वेस्ट लंदन में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग द्वारा सिख लड़की को प्रेम जाल में फंसाकर यौन शोषण का मामला सामने आया है। लड़की की उम्र महज 14 साल है, जिसे पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने पहले अगवा किया और फिर फ्लैट में बंद कर 5-6 लोगों से उसका रेप कराया। लड़की ने भागने की कोशिश भी की, लेकिन उसे डराकर चुप करा दिया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही इस घटना के बारे में वेस्ट लंदन के हाउंस्लो शहर में रहने वाले सिखों को पता चला तो वे आरोपी के फ्लैट के बाहर पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। जैसे-जैसे इस मामले का पता अन्य सिखों को चलता रहा, आरोपी के फ्लैट पर भीड़ बढ़ती गई। कुछ ही देर में वहां 200 से ज्यादा सिख पहुंच गए और कई घंटे हंगामा किया। इसके बाद सभी ने मिलकर लड़की को रिहा करवा लिया। सिखों का आरोप है कि वेस्ट लंदन में इस तरह छोटी बच्चियों को अगवा करके उनका यौन शोषण करने की घटनाएं आम होने लगी हैं। इस मामले से जुड़ी दो पोस्ट भी डेविड अर्थटन नाम के यूजर्स की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर डाली गई है। बता दें कि ग्रूमिंग (Grooming) किसी व्यक्ति, खासकर बच्चे या युवा का विश्वास जीतकर उसे धीरे-धीरे यौन शोषण, कट्टरपंथ या किसी अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के लिए तैयार करना कहलाता है। हाल ही में इंग्लैंड में इस तरह के मामले बढ़े है। अमेरिकी कारोबारी इलॉन मस्क ने भी इस पर चिंता जताई थी और पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की थी। इस घटना से जुड़ी सोशल मीडिया पर डाली गई दो पोस्ट... सिलसिलेवार ढंग से जानिए क्या है पूरा मामला... यूके में ऐसे चलता पाकिस्तानी ग्रूमर गैंग का नेटवर्क... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 11:39:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरानी विदेश मंत्री बोले&#45; प्रदर्शनकारियों ने पुलिसवालों को जिंदा जलाया:इजराइल पर साजिश का आरोप; हिंसा में 538 की मौत, 10 हजार से ज्यादा हिरासत में</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का आज 16वां दिन है। इस बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिसवालों को मारने और जिंदा जलाने का आरोप लगाया है। अराघची ने इसे इजराइली की खुफिया एजेंसी मोसाद की साजिश बताया। बीते दो हफ्तों से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। न्यूज एजेंसी AP ने प्रदर्शनकारियों के हवाले से बताया कि मरने वालों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी हैं। वहीं अल जजीरा की रिपोर्ट में 109 सुरक्षाकर्मियों को मारे जाने का दावा किया गया है। अराघची ने पुलिसवालों पर हमले का वीडियो भी शेयर किया है। ईरान में प्रदर्शन से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान में भारतीयों की गिरफ्तारी की खबर झूठी ईरान में प्रदर्शनों के बीच भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबरों को ईरान ने खारिज कर दिया है। भारत में ईरान के राजदूत ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही यह जानकारी पूरी तरह गलत है।  राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि कुछ विदेशी अकाउंट्स द्वारा ईरान के हालात को लेकर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी प्रदर्शनों के बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला किया तो वह अमेरिकी सैनिकों और इजराइल को निशाना बनाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ ने रविवार को कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, शिप्स और इजरायल हमारे टारगेट पर होंगे। यह बयान संसद के लाइव सत्र के दौरान दिया गया, जहां सांसद &#039;डेथ टू अमेरिका&#039; के नारे लगा रहे थे। कालीबाफ ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हालात में मजबूती से काम किया है। प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सबसे सख्त तरीके से निपटा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। ईरानी संसद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है… ट्रम्प को ईरान पर हमले का प्लान बताया गया ईरान में जारी प्रदर्शन के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विकल्पों की ब्रीफिंग दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करती है तो ट्रम्प सैन्य कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान आजादी की ओर देख रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।’ वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालीबाफ ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर हमला किया तो दोनों को सख्ती से जवाब देंगे। ईरानी राष्ट्रपति बोले- अमेरिका-इजराइल दंगे भड़का रहे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान में दंगे भड़काकर अराजकता और अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं। उन्होंने ईरानियों से दंगाइयों और आतंकवादियों से दूर रहने को कहा। पजशकियान का कहना है कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों की बात सुनेंगे। लेकिन दंगाइयों की नहीं, जो पूरे समाज को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। पजशकियान ने कहा, &#039;हम लोगों की समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन दंगाइयों को पूरे समाज को खत्म करने की इजाजत नहीं दे सकते।&#039; ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रविवार को राष्ट्रपति का एक इंटरव्यू टेलीकास्ट किया, जिसमें पजशकियान ने यह बातें कहीं। ईरान पर हमले की आशंका को लेकर इजराइल हाई अलर्ट पर ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका को लेकर इजराइल हाई अलर्ट पर है। रॉयटर्स ने इजराइली सूत्रों के हवाले से बताया है कि हालात को देखते हुए इजराइली सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता बढ़ाए हुए हैं। इजराइल और ईरान जून में 12 दिन की जंग लड़ चुके हैं, जिसमें अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। शनिवार को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक इस बातचीत में ईरान में अमेरिकी दखल की संभावना पर चर्चा हुई। अमेरिकी अधिकारी ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के मुद्दों का खुलासा नहीं किया। ब्रिटेन में ईरानी दूतावास का झंडा उतारा ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास का इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला झंडा फहरा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी ने शेर और सूरज के निशान वाला तिरंगा झंडा लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह झंडा कई मिनट तक दूतावास पर लगा रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया। यह झंडा ईरान में शाह के शासनकाल के दौरान इस्तेमाल किया जाता था। प्रदर्शन के दौरान ‘डेमोक्रेसी फॉर ईरान’ और ‘फ्री ईरान’ जैसे नारे लगे। लंदन पुलिस ने कहा कि झंडा हटाने की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकी जा सके और ईरानी दूतावास की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने बताया कि इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है। देश लौटने की तैयारी कर रहे रजा पहलवी
रजा पहलवी ने शनिवार को बताया था कि वह देश लौटकर चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होंगे। 65 साल के रजा पहलवी करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। शनिवार सुबह उन्होंने कहा कि वह अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में रजा पहलवी ने लिखा- मैं भी अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा हूं ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय मैं आप सबके साथ, ईरान की महान जनता के बीच खड़ा रह सकूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह दिन अब बहुत करीब है। क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी कारण क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। खामेनेई की अपील- ट्रम्प को खुश करने के लिए देश बर्बाद न करें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था। ईरान के सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया। खामेनेई ने कहा कि ईरान &#039;विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों&#039; को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं, जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं। खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने सभी दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाय वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने आगे कहा- इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है। जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।” ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा। ----------------- यह खबर भी पढ़ें... ट्रम्प का दावा- ईरानी शहर पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा:सिक्योरिटी फोर्स ने मशहद छोड़ा, यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक शहर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद पर अब प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है। मशहद की आबादी करीब 40 लाख है। यह शहर तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है। यह ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 08:29:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जैश के पास हजारों फिदायीन, आतंकी मसूद अजहर का दावा:वायरल ऑडियो क्लिप में बोला&#45; जैश की ताकत सामने आई तो शोर मच जाएगा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के नाम से एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में मसूद अजहर कथित तौर पर दावा करता है कि जैश के पास हमले करने के लिए हजारों आत्मघाती हमलावर तैयार हैं। हालांकि, इस ऑडियो की तारीख और इसकी सच्चाई की पुष्टि नहीं हो पाई है। ऑडियो में मसूद अजहर यह कहते हुए सुनाई देता है कि उसके संगठन में सिर्फ एक-दो, सौ या हजार लोग नहीं हैं। वो दावा करता है कि अगर असली संख्या बता दी गई, तो शोर मच जाएगा। वो यह भी कहता है कि उसके लड़ाके किसी पैसे, वीजा या निजी फायदे के लिए नहीं लड़ते, बल्कि सिर्फ शहादत चाहते हैं। संसद हमले का मास्टरमाइंड है आतंकी अजहर पाकिस्तानी आतंकी मसूद अजहर 2001 में भारत की संसद पर हुए हमले का मास्टरमाइंड है। इसके अलावा भी उसने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है। मसूद 2016 में हुए पठानकोट हमले का भी मास्टरमाइंड है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, मसूद ने भारत पर हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद के कैडर का इस्तेमाल किया था। उसने 2005 में अयोध्या में राम जन्मभूमि और 2019 में पुलवामा में CRPF के जवानों पर भी हमला करवाया था। इसके अलावा मसूद 2016 में उरी हमले और अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ में भारतीय कॉन्सुलेट पर अटैक का भी जिम्मेदार है। 1994 में पहली बार भारत आया था मसूद अजहर मसूद अजहर पहली बार 29 जनवरी, 1994 को बांग्लादेश से विमान में सवार होकर ढाका से दिल्ली पहुंचा था। 1994 में अजहर फर्जी पहचान बनाकर श्रीनगर में दाखिल हुआ था। उसका मकसद हरकत-उल-जिहाद अल-इस्लामी और हरकत-उल-मुजाहिदीन गुटों के बीच तनाव कम करना था। इस बीच भारत ने उसे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए अनंतनाग से गिरफ्तार कर लिया था। तब अजहर ने कहा था- कश्मीर को आजाद कराने के लिए 12 देशों से इस्लाम के सैनिक आए हैं। हम आपकी कार्बाइन का जवाब रॉकेट लॉन्चर से देंगे। इसके 4 साल बाद जुलाई 1995 में जम्मू-कश्मीर में 6 विदेशी टूरिस्ट्स को अगवा कर लिया गया। किडनैपर्स ने टूरिस्ट के बदले समूद अजहर को रिहा करने की मांग की। इस बीच अगस्त में दो टूरिस्ट किडनैपर्स की कैद से भागने में कामयाब हो गए। हालांकि, बाकियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। 1999 में विमान हाईजैक के बाद भारत सरकार ने अजहर को छोड़ 24 दिसंबर 1999 को काठमांडू से दिल्ली आ रहे एक भारतीय विमान को अजहर के भाई सहित दूसरे आतंकियों ने हाईजैक कर लिया था। वो इसे अफगानिस्तान के कंधार ले गए, जहां उस वक्त तालिबान का शासन था। विमान में कैद लोगों के बदले मसूद अजहर सहित 3 आतंकियों को छोड़ने की मांग की गई। आतंकियों की मांग पूरी हुई और मसूद आजाद हो गया। इसके बाद वह पाकिस्तान भाग गया। चीनी सरकार UNSC में मसूद को ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित होने से कई बार बचा चुकी है। 2009 में अजहर को वैश्विक आतंकी की लिस्ट में शामिल करने के लिए पहली बार प्रस्ताव आया था। तब लगातार 4 बार चीन ने सबूतों की कमी का हवाला देकर प्रस्ताव पास नहीं होने दिया। ऑपरेशन सिंदूर में मसूद के परिवार के 10 सदस्य मारे गए थे भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद 7 मई को पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। बहावलपुर पर भारतीय हमले में मसूद के परिवार के 10 लोग मारे गए थे। इसके अलावा 4 सहयोगियों की भी मौत हुई थी। मरने वालों में मसूद की बड़ी बहन और उसका पति, मसूद का भतीजा और उसकी पत्नी, मसूद की एक भतीजी और उसके पांच बच्चे शामिल हैं। हमले के वक्त मसूद मौके पर नहीं था, इस वजह से उसकी जान बच गई थी। बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी मसूद ने परिवार के लोगों के मरने के बाद एक बयान भी जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि मैं भी मर जाता तो खुशनसीब होता। ------------- यह खबर भी पढ़ें... मसूद अजहर हर पाकिस्तानी जिले में महिला आतंकी सेंटर खोलेगा:यहां 15 दिन का टेररिज्म कोर्स चलेगा, कहा- इसमें शामिल महिलाओं को जन्नत मिलेगी आतंकी सगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान के हर जिले में महिला आतंकी सेंटर की ब्रांच खोलेगा। यहां आतंकी बनने के लिए 15 दिन का कोर्स चलेगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हर ब्रांच की हेड &#039;डिस्ट्रिक्ट मुंतेजिमा&#039; होगी, जो लोकल महिलाओं को भर्ती करेगी। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 08:29:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका पर वेनेजुएला में सोनिक हथियार इस्तेमाल करने का आरोप:चश्मदीद बोला&#45; हमले के दौरान सैनिकों को खून की उल्टियां हुईं, नाक से खून बहा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका पर वेनेजुएला में सोनिक हथियार इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक बेहद शक्तिशाली और अब तक न देखे गए हथियार का इस्तेमाल किया, जिससे वेनेजुएला के सैनिक पूरी तरह बेबस हो गए थे। एक वेनेजुएलाई सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि ऑपरेशन शुरू होते ही उनके सभी रडार सिस्टम अचानक बंद हो गए। इसके कुछ ही सेकेंड बाद उन्होंने आसमान में बड़ी संख्या में ड्रोन उड़ते देखे। गार्ड के मुताबिक, उन्हें समझ ही नहीं आया कि इस हालात में क्या किया जाए। गार्ड ने आगे दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक सीक्रेट इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया। यह किसी बहुत तेज आवाज या तरंग (साउंड वेब) जैसा था। इसके तुरंत बाद उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसका सिर अंदर से फट रहा हो। कई सैनिकों की नाक से खून बहने लगा और कुछ को खून की उल्टियां हुईं। सभी सैनिक जमीन पर गिर पड़े और कोई भी खड़ा होने की हालत में नहीं था। गार्ड ने कहा कि वह नहीं जानता कि यह कोई सोनिक हथियार था या कुछ और। इस कार्रवाई के एक चश्मदीद का बयान शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आया, जिसे व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने शेयर किया। अमेरिका ने ऑपरेशन में सिर्फ 8 हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिका ने सिर्फ आठ हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किए गए थे, जिनसे करीब बीस सैनिक उतरे। संख्या कम होने के बावजूद अमेरिकी सैनिकों ने बहुत जल्दी पूरे इलाके पर कंट्रोल हासिल कर लिया। गार्ड ने कहा कि अमेरिकी सैनिक तकनीक के मामले में बेहद आगे थे और वे ऐसे लग रहे थे जैसे पहले कभी उनका सामना नहीं हुआ हो। गार्ड ने इस मुठभेड़ को लड़ाई नहीं बल्कि एकतरफा हमला बताया। वेनेजुएला की तरफ सैकड़ों जवान मौजूद थे, लेकिन फिर भी वे टिक नहीं पाए। अमेरिकी सैनिक बहुत तेज और सटीक तरीके से फायरिंग कर रहे थे, जिससे मुकाबला नामुमकिन हो गया। अमेरिकी हमले में वेनेजुएला के 100 सैनिकों की मौत हुई थी व्हाइट हाउस की ओर से इस बात पर कोई रिस्पांस नहीं दिया गया कि प्रेस सेक्रेटरी की तरफ से शेयर इस पोस्ट को सरकारी पुष्टि माना जाए या नहीं। वहीं, वेनेजुएला के गृह मंत्रालय ने कहा है कि 3 जनवरी को हुई इस कार्रवाई में करीब 100 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी, हालांकि यह साफ नहीं है कि इनमें से कितनी मौतें इस सीक्रेट हथियार से हुईं थीं। अमेरिका के एक पूर्व सीक्रेट अधिकारी ने कहा कि इस तरह के लक्षण डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों से मेल खाते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे हथियार माइक्रोवेव या लेजर जैसी एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं और इससे दर्द, खून बहना और शरीर को शॉर्ट टर्म पैरालिसिस किया जा सकता है। गार्ड ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई के बाद पूरे लैटिन अमेरिका में डर का माहौल है, खासकर तब जब हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अब मेक्सिको भी लिस्ट में है। गार्ड ने इसे अमेरिका से लड़ने की सोच रखने वालों के लिए चेतावनी बताया और कहा कि इस घटना का असर सिर्फ वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा। वेनेजुएला पर हमले की 3 बड़ी वजह... 1. अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं। 2. ट्रम्प का आरोप है कि वेनेजुएला उनके देश में कोकीन और फेंटेनाइल जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी का बड़ा रास्ता बन चुका है। इसे खत्म करने के लिए मादुरो को सत्ता से हटाना जरूरी है। 3. ट्रम्प का आरोप है कि मादुरो की नीतियों से लाखों वेनेजुएलाई लोगों को देश छोड़ अमेरिका भागना पड़ा। उन्होंने जेल और मानसिक अस्पताल से अपराधियों को अमेरिका भेजा। किले की तरह सुरक्षित घर में थे मादुरो मिलिट्री ऑपरेशन के बाद ट्रम्प ने बताया था कि मादुरो राष्ट्रपति भवन में थे, जो किसी किले की तरह सुरक्षित था। वहां एक खास सेफ रूम था, जिसकी दीवारें पूरी तरह स्टील की थीं। मादुरो उस कमरे में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अमेरिकी सैनिक इतनी तेजी से अंदर पहुंचे कि वे दरवाजा बंद ही नहीं कर पाए। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया था कि इस ऑपरेशन की महीनों तक रिहर्सल की गई। अमेरिकी सेना को यह तक पता था कि मादुरो क्या खाते हैं, कहां रहते हैं, उनके पालतू जानवर कौन से हैं और वे कैसे कपड़े पहनते हैं। यहां तक कि मादुरो के घर जैसा नकली भवन बनाकर ट्रेनिंग की गई। ऑपरेशन पूरी तरह अंधेरे में किया गया। काराकस शहर की लाइटें बंद कर दी गईं, ताकि अमेरिकी सैनिकों को फायदा मिल सके। हमले के दौरान कम से कम 7 धमाके सुने गए। पूरा ऑपरेशन 30 मिनट से भी कम समय में खत्म हो गया। 
 --------------- यह खबर भी पढ़ें... रिपोर्ट- ग्रीनलैंड पर हमले का प्लान बना रहे ट्रम्प:स्पेशल कमांडो को जिम्मेदारी सौंपी; जनरल बोले- राष्ट्रपति की जिद 5 साल के बच्चे जैसी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए प्लान बनाने का निर्देश दिया है। डेली मेल के मुताबिक ट्रम्प ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को यह जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि सैन्य अधिकारी इस विचार से सहमत नहीं दिख रहे हैं। वे इसे कानूनी रूप से गलत मानते हैं। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 08:29:50 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका ने सीरिया में ISIS ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, सैनिकों की मौत के बाद जबावी कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने शनिवार रात सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई पिछले महीने पल्मायरा में आतंकी हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक नागरिक की मौत के बाद की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, हमलों में सीरिया के अलग-अलग इलाकों में ISIS के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। CENTCOM ने बताया कि इस ऑपरेशन में ISIS के ठिकानों, हथियारों और ढांचों को निशाना बनाया गया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन इलाकों में और कितने ठिकाने तबाह किए गए। बयान में कहा गया, अगर आप हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो हम आपको दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर मारेंगे, चाहे आप कितनी भी कोशिश कर लें। ट्रम्प प्रशासन ने इस जवाबी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ नाम दिया है। इसकी शुरुआत 19 दिसंबर को हुई थी। तब सीरिया के ISIS के 70 ठिकानों पर बड़े हमले किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी की धमकी:सरकार ने खुदा का दुश्मन बताया; हिंसा में अब तक 217 मौतें, 2600 से ज्यादा हिरासत में
 ईरान में बीते दो हफ्ते से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसके तहत मौत की सजा दी जा सकती है। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई हैं। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक अब तक 2600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूरी खबर यहां पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 10:15:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी की धमकी:सरकार ने खुदा का दुश्मन बताया; हिंसा में अब तक 217 मौतें, 2600 से ज्यादा हिरासत में</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में बीते दो हफ्ते से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसके तहत मौत की सजा दी जा सकती है। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि राजधानी के सिर्फ छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें ज्यादातर की मौत गोली लगने से हुई हैं। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक अब तक 2600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ईरान में प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें… ब्रिटेन में ईरानी दूतावास का झंडा उतारा ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास का इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला झंडा फहरा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी ने शेर और सूरज के निशान वाला तिरंगा झंडा लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह झंडा कई मिनट तक दूतावास पर लगा रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया। यह झंडा ईरान में शाह के शासनकाल के दौरान इस्तेमाल किया जाता था। प्रदर्शन के दौरान ‘डेमोक्रेसी फॉर ईरान’ और ‘फ्री ईरान’ जैसे नारे लगे। लंदन पुलिस ने कहा कि झंडा हटाने की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकी जा सके और ईरानी दूतावास की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने बताया कि मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है। क्राउन प्रिंस पहलवी ने आज फिर सड़कों पर उतरने की अपील
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने देशभर में जारी प्रदर्शनों के बीच वीडियो संदेश जारी कर लोगों से सड़कों पर डटे रहने की अपील की है। पहलवी ने आज शाम 6 बजे फिर से सड़कों पर उतरने के लिए कहा। उन्होंने लोगों से कहा कि वे दोस्तों और परिवार के साथ समूह में मुख्य सड़कों पर निकलें, भीड़ से अलग न हों और ऐसी गलियों में न जाएं, जहां जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि लगातार तीसरी रात हुए प्रदर्शनों से सुप्रीम लीडर खामेनेई का दमनकारी तंत्र कमजोर पड़ा है।

पहलवी ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट मिली हैं कि इस्लामी गणराज्य को प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं मिल पा रहे हैं। उनके मुताबिक, कई सुरक्षा कर्मियों ने अपने कार्यस्थल छोड़ दिए हैं और जनता के खिलाफ कार्रवाई के आदेश मानने से इनकार किया है। पहलवी ने अपने संदेश में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए तैयार रहने की घोषणा की है। देश लौटने की तैयारी कर रहे रजा पहलवी
रजा पहलवी ने शनिवार को बताया था कि वह देश लौटकर चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होंगे। 65 साल के रजा पहलवी करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। शनिवार सुबह उन्होंने कहा कि वह अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में रजा पहलवी ने लिखा- मैं भी अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा हूं ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय मैं आप सबके साथ, ईरान की महान जनता के बीच खड़ा रह सकूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह दिन अब बहुत करीब है। क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी कारण क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। एक्सपर्ट्स को आशंका- सरकार बेरहम कार्रवाई से नहीं हिचकेगी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब जब प्रदर्शन मध्यम वर्गीय इलाकों तक फैल गए हैं, तो सरकार बेरहमी से कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। ईरान पहले से ही इजराइल के साथ संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, गिरती अर्थव्यवस्था, बिजली और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार के भीतर भी मतभेद हैं। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान सार्वजनिक तौर पर नरम रुख दिखा रहे हैं, लेकिन उनके कई मंत्री सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजराइल इन प्रदर्शनों को हवा दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोग पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, जिन्होंने विदेश से प्रदर्शन तेज करने की अपील की है। कुर्द इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। खामेनेई की अपील- ट्रम्प को खुश करने के लिए देश बर्बाद न करें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था। ईरान के सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया। खामेनेई ने कहा कि ईरान &#039;विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों&#039; को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं। खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने सभी दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाय वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने आगे कहा- इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है। जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।” ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा। ----------------- यह खबर भी पढ़ें... ट्रम्प का दावा- ईरानी शहर पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा:सिक्योरिटी फोर्स ने मशहद छोड़ा, यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक शहर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद पर अब प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है। मशहद की आबादी करीब 40 लाख है। यह शहर तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है। यह ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर है। पढ़ें पूरी खबर… ]]></description>
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<title>वेनेजुएला में अमेरिकी एक्शन से कनाडाई एक्सपर्ट्स परेशान:कनाडा पर भी मिलिट्री प्रेशर की आशंका; ट्रम्प का कनाडा को US स्टेट बनने का ऑफर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वेनेजुएला में हालिया कार्रवाइयों के बाद कनाडा में भी डर और चिंता का माहौल है। अमेरिकी सेना हाल ही में वेनेजुएला में घुसकर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले आई थी। इस बीच ट्रम्प के पुराने बयान और धमकियां फिर चर्चा आ गईं जो उन्होंने कनाडा को 51वां अमेरिकी राज्य बनाने के लिए दी थीं। कनाडा के अखबार द ग्लोब एंड मेल में छपे एक लेख में कहा गया है कि कनाडाई लोगों को इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए कि ट्रम्प उनके देश के खिलाफ भी मिलिट्री प्रेशर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस लेख के लेखक और कनाडाई प्रोफेसर थॉमस होमर-डिक्सन ने कहा कि अगर कनाडा के खिलाफ किसी तरह का सैन्य दबाव डाला जाता है, तो यह साफ होना चाहिए कि इसकी कीमत बहुत भारी होगी। एक्सपर्ट्स बोले- कनाडा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा  कनाडा की तरह ही ट्रम्प ग्रीनलैंड को भी अमेरिका में मिलाना चाहते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीनलैंड और कनाडा में कई समानताएं हैं। दोनों लोकतांत्रिक हैं, आर्कटिक इलाके में स्थित हैं और NATO जैसे सुरक्षा संगठन का हिस्सा हैं, जिस पर ट्रम्प अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इसी वजह से कनाडा खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। कनाडा सरकार को सुरक्षा मामलों में सलाह दे चुके वेस्ली वार्क ने कहा कि ओटावा के कई अधिकारी अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि हालात इतने बदल चुके हैं। वेस्ली के मुताबिक, वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प के कदम कनाडा के लिए आखिरी चेतावनी हैं। ये दिखाते हैं कि अमेरिका अब वैसा देश नहीं रहा जैसा पहले हुआ करता था। कनाडा अपनी निर्भरता अमेरिका पर कम कर रहा इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सत्ता में आने के बाद से ही अमेरिका पर निर्भरता कम करने की कोशिशें शुरू कर दी थी। वे अब चीन के साथ व्यापार बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। हाल ही में कार्नी ने कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने ट्रम्प की कनाडा से जुड़ी पुरानी धमकियों पर कोई टिप्पणी नहीं की। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका की तरफ से कनाडा पर सीधा सैन्य हमला होना मुश्किल है, लेकिन आर्थिक दबाव डाला जा सकता है। कार्लेटन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर स्टेफनी कार्विन ने कहा कि अमेरिका अब पहले से ज्यादा आसानी से कनाडा की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है, अगर ऐसा करना राष्ट्रपति की इच्छा के मुताबिक हो। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर ट्रम्प के दबदबे के बाद यह साफ है कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए ज्यादा आक्रामक हो सकता है। अमेरिका मदद के बदले कनाडा पर दबाव डाल सकता है कार्लेटन यूनिवर्सिटी के ही प्रोफेसर फिलिप लागासे ने एक और आशंका जताई। उनके मुताबिक, अगर कनाडा किसी बड़ी आपदा या ऐसे हालात में अमेरिका पर निर्भर होता है जिसे वह खुद संभाल नहीं सकता, तो मौजूदा अमेरिकी प्रशासन मदद के बदले शर्तें रख सकता है। यह भी संभव है कि अमेरिका मदद करने के बाद वहां से हटने से इनकार कर दे या बदले में मांगें रखे। इसके अलावा अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा व्यापार समझौते की समीक्षा भी ट्रम्प का ध्यान फिर से कनाडा की ओर खींच सकती है। यह समझौता ट्रम्प के पहले कार्यकाल में हुआ था और अब इसकी समीक्षा होनी है। इस दौरान अमेरिका, कनाडा पर आर्थिक दबाव बना सकता है। फिलहाल कनाडा अपने करीब 70% निर्यात के लिए अमेरिका पर निर्भर है। मौजूदा समझौते के तहत दोनों देशों के बीच करीब 85% व्यापार बिना किसी टैरिफ के होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प ने इस छूट को खत्म करने की धमकी भी दी, तो इससे कनाडा की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। ---------------- यह खबर भी पढ़ें... ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जा करना हमारी मजबूरी:नहीं तो रूस-चीन यहां काबिज हो जाएंगे, हम अपने पड़ोस में इन देशों को नहीं चाहते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड पर कब्जा करना क्यों जरूरी है। उन्होंने व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के बड़े अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान कहा कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया तो रूस और चीन जैसे देश इस पर काबिज हो जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 10:15:48 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले&#45; अमेरिका नेतन्याहू को भी किडनैप करे:वेनेजुएला के राष्ट्रपति जैसा हाल हो, इजराइली PM फिलिस्तीनियों का सबसे बड़ा दुश्मन</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को किडनैप करने की मांग की। एक टीवी इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका को नेतन्याहू को उसी तरह पकड़ना चाहिए जैसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को पकड़ा गया था। उन्होंने आगे कहा कि तुर्किए भी नेतन्याहू को पकड़ सकता है और पाकिस्तानी इसके लिए दुआ कर रहे हैं। इंटरव्यू में उन्होंने नेतन्याहू को मानवता का सबसे बड़ा अपराधी करार दिया और दावा किया कि गाजा में फिलिस्तीनियों के साथ जो अत्याचार हुए हैं, वे इतिहास में कभी नहीं देखे गए। आसिफ का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह बयान एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में सामने आया, जिसकी क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एंकर हामिद मीर ने टिप्पणी को संवेदनशील बताते हुए इंटरव्यू को बीच में ही रोक दिया। इस दौरान आसिफ ने उन लोगों पर भी सवाल उठाने शुरू किए, जो ऐसे अपराधियों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, ‘कानून उन लोगों के बारे में क्या कहता है, जो ऐसे अपराधियों का साथ देते हैं।’ एंकर हामिद मीर ने टोका कि क्या आप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के संदर्भ में कहना चाह रहे हैं? इसके बाद मीर ने शो बीच में रोक दिया और ब्रेक लेने को कहा। फिलिस्तीनियों का समर्थन करता है पाकिस्तान पाकिस्तान का इजराइल के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है। पाकिस्तान हमेशा से फिलिस्तीनी मुद्दे का मजबूत समर्थन करता रहा है। साथ ही, पाकिस्तान के ईरान के साथ भी अच्छे संबंध हैं, जो इजराइल का विरोधी है। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) ने पहले ही गाजा में अपराधों के लिए नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ है। इसका जिक्र भी आसिफ ने इंटरव्यू में किया है। पूरा इंटरव्यू यहां सुने… 
 ट्रम्प ने मादुरो को वेनेजुएला की सत्ता से हटाया अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया है। 2 जनवरी की रात अमेरिकी सैनिकों ने ऑपरेशन चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया था। इसके साथ ही वेनेजुएला में मादुरो का शासन समाप्त हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई को वेनेजुएला में “लोकतंत्र बहाल करने की दिशा में जरूरी कदम” बताया है। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि मादुरो लंबे समय से ड्रग्स और हथियार तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उन पर अमेरिका में हथियारों और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस को भी आरोपी बनाया गया है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि फ्लोरेस पर अपहरण और हत्याओं के आदेश देने के आरोप हैं। अब गाजा जंग को जानिए… जंग के 2 साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। अब तक 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचि बद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है।
 ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के इशारों पर चल रही वेनेजुएला की सरकार: कहा- यहां से तेल निकालकर दुनिया को बेचेंगे; अमेरिका कई साल राज करेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को चलाएगा और उसके विशाल तेल भंडार से सालों तक तेल निकालेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने बताया कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार “जो भी जरूरी है, वह सब दे रही है।” पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 10 Jan 2026 10:17:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:इटली PM बोलीं&#45; यूरोप को रूस से बातचीत शुरू करना चाहिए; रूस&#45;यूक्रेन दोनों की बात सुनना जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने शुक्रवार को कहा कि यूरोप को अब रूस के साथ बातचीत फिर से शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में यूरोप को दोनों पक्षों से बात करनी चाहिए, सिर्फ एक तरफ से बात करने से उसका योगदान सीमित रह जाएगा। मेलोनी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की बात से सहमति जताई। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यूरोप को रूस के साथ जुड़ाव बढ़ाना चाहिए, जिससे यूक्रेन में चल रहे लगभग चार साल पुराने युद्ध को समाप्त करने में मदद मिल सके। मेलोनी ने कहा, &quot;मुझे लगता है कि मैक्रों सही हैं। अब समय आ गया है कि यूरोप भी रूस से बात करे। अगर यूरोप सिर्फ एक पक्ष से बात करके इस बातचीत में हिस्सा लेगा, तो मुझे डर है कि हमारा योगदान बहुत कम रह जाएगा।&quot; नवंबर से युद्ध खत्म करने की बातचीत तेज हो गई है, लेकिन रूस ने अभी तक कोई बड़ा समझौता करने की इच्छा नहीं दिखाई है। यूक्रेन ने अमेरिका के शुरुआती प्रस्ताव में बदलाव की मांग की है। मेलोनी ने सुझाव दिया कि यूरोपीय संघ को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे बात करने के लिए एक विशेष दूत नियुक्त करना चाहिए। अमेरिका ने नवंबर में प्रस्ताव दिया था कि रूस को फिर से ग्रुप ऑफ सेवन (G7) में शामिल किया जाए और पुराना G8 फॉर्मेट बहाल किया जाए। हालांकि, मेलोनी ने इसे जल्दबाजी बताया। उन्होंने कहा कि रूस को G7 में वापस लाने की बात करना अभी जल्दबाजी होगी। इसके अलावा, मेलोनी ने दोहराया कि इटली यूक्रेन में किसी शांति समझौते की गारंटी के लिए सैनिक नहीं भेजेगा। फ्रांस और ब्रिटेन ने पिछले महीने यूक्रेन में बहुराष्ट्रीय सेनाओं की तैनाती पर सहमति जताई है, लेकिन इटली इसमें शामिल नहीं होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 10 Jan 2026 10:17:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पंजाबी एक्ट्रेस शहनाज गिल ने गाया पाकिस्तानी सीरियल का सॉन्ग:लिखा&#45; मुझ पर इसका जुनून सवार; सरदारजी&#45;3 से विवादित रही हानिया आमिर का इसमें लीड रोल</title>
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<description><![CDATA[ पंजाबी और बॉलीवुड एक्ट्रेस शहनाज गिल पाकिस्तानी गीत गाती नजर आईं। एक स्टूडियो में ‘मेरी जिंदगी है तू’ गीत गाते हुए शहनाज ने अपना वीडियो इंस्टा पर अपलोड किया है। इसमें शहनाज गिल ने लिखा-ओवसेसड विद दिस सॉन्ग...यानी मुझ पर इस गीत का जुनून सवार है। बता दें कि आपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय एक्टर्स के साथ पाकिस्तानी कलाकारों का लंबा विवाद चला। पहलगाम हमले के बाद तो पंजाबी कलाकारों और पाकिस्तानी कलाकारों में खूब बहस भी हुई थी। पाकिस्तान के इफ्तिखार चौधरी को पंजाबी कॉमेडियन बीनू ढिल्लों सहित कई कलाकार करारा जवाब दे चुके हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर के साथ सरदार जी -3 में काम को लेकर पहले ही दिलजीत दोसांझ विरोध झेल रहे हैं। अब शहनाज ने पाकिस्तानी गीत गाकर चौंकाया है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मंडी से BJP सांसद और बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौट भी पाकिस्तानी सॉन्ग &#039;दम नाल दम भरांगी रांझेया वे, जीवें कवेंगा करांगी रांझेया वे&#039; लगाने पर ट्रोल हो चुकी है। कंगना ने राजस्थान के जयपुर में मोर के साथ नाचते हुए इंस्टाग्राम पर 35 सेकेंड की रील डाली थी, जिसके बैकग्राउंड में उन्होंने पाकिस्तानी गाना लगा दिया था। मेरी जिंदगी है तू.... पाकिस्तानी नाटक है
शहनाज गिल इन दिनों सिंह वर्सेज कौर-2 की शूटिंग के लिए विदेश में हैं। वहीं से शहनाज ने पाकिस्तानी सीरियल के थीम सांग- मेरी जिंदगी है तू, गाया है। बता दें कि इस सीरियल की एक किरदार हानिया आमिर हैं। हानिया आमिर वही एक्टर्स हैं, जिसने दिलजीत दोसांझ की फिल्म सरदार जी-3 के जरिए पंजाबी फिल्मों में डेब्यू किया था, लेकिन पाकिस्तानी एक्टर्स की मौजूदगी और पहलगाम अटैक के चलते फिल्म विवादों से घिर गई थी और भारत में रिलीज नहीं हो पाई। शहनाज की जिंदगी के करीब है सीरियल की कहानी
एक्ट्रेस शहनाज बतातीं हैं कि इस पाकिस्तानी सीरियल की कहानी उनकी खुद की जिंदगी के काफी करीब है। इस नाटक में रिश्तों के बीच प्यार और उनके टूटने-जुड़ने की कहानी को बुना गया है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच कामयार (बिलाल अब्बास खान) और आयरा (हानिया आमिर) की मुलाकात इत्तफाक से होती है। दोनों का रिश्ता मासूमियत से शुरू होता है। बाद में धोखा, विश्वासघात और ऐसे मसले होते हैं, जो उनके बनाए हुए इस रिश्ते को खतरे में डाल देते हैं। पहले भी विवादों से रह चुका शहनाज गिल का नाता --------------------- ये खबर भी पढ़ें.... कंगना रनोट ने इंस्टाग्राम रील में पाकिस्तानी गाना लगाया:पाकिस्तान के यूजर्स ने ट्रोल किया; बोले- इतनी नफरत तो हमारा सॉन्ग क्यों लगाया हिमाचल प्रदेश के मंडी से BJP सांसद और बॉलीवुड एक्ट्रेस को सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ट्रोल कर रहे हैं। कंगना ने राजस्थान के जयपुर में मोर के साथ नाचते हुए इंस्टाग्राम पर 35 सेकेंड की रील डाली थी, जिसके बैकग्राउंड में उन्होंने पाकिस्तानी गाना लगा दिया। वीडियो में कंगना मोर के साथ डांस करती और पेड़ से आम तोड़ती भी दिख रही हैं। (पूरी खबर पढ़ें) ]]></description>
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<title>मोदी ने ट्रम्प को कॉल नहीं किया, इसलिए रुकी ट्रेड&#45;डील:अमेरिकी कॉमर्स मिनिस्टर बोले&#45; ट्रम्प ने ईगो पर लिया, अब पुराने ऑफर खत्म</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया है कि भारत के साथ डील किसी पॉलिसी विवाद की वजह से नहीं रुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधे फोन न करना इसकी वजह है। लुटनिक के मुताबिक ट्रम्प चाहते थे कि मोदी खुद उनसे बात करके डील फाइनल करें, लेकिन ऐसा न होने पर ट्रम्प ने इसे अपने &#039;ईगो&#039; पर ले लिया। &#039;डील तैयार थी, मोदी को बस एक फोन करना था&#039; एक पॉडकास्ट में लुटनिक ने बताया कि भारत के साथ ट्रेड डील लगभग पूरी हो चुकी थी। भारत को बातचीत फाइनल करने के लिए &#039;तीन शुक्रवार&#039; का समय दिया गया था। लुटनिक ने कहा, &quot;पूरी डील सेट थी, ट्रम्प खुद इसे क्लोज करना चाहते थे। इसके लिए बस मोदी को राष्ट्रपति को कॉल करना था। भारतीय पक्ष ऐसा करने में असहज था और मोदी ने कॉल नहीं किया। वियतनाम और इंडोनेशिया से डील, भारत पीछे छूटा अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने खुलासा किया कि भारत के देरी करने का फायदा दूसरे देशों को मिला। उन्होंने कहा, &#039;हमने सोचा था कि भारत के साथ डील पहले होगी, लेकिन मोदी के कॉल न करने पर हमने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ ट्रेड डील कर ली।&#039; लुटनिक ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समय सीमा खत्म होने से पहले खुद ट्रम्प को फोन किया और अगले ही दिन डील का ऐलान हो गया। अब पुराने ऑफर मेज पर नहीं, अमेरिका पीछे हटा भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जो शर्तें पहले तय हुई थीं, अब वे खत्म हो चुकी हैं। लुटनिक ने साफ कहा, &#039;अमेरिका अब उस ट्रेड डील से पीछे हट गया है, जिस पर हम पहले सहमत हुए थे। हम अब उस पुराने ऑफर के बारे में नहीं सोच रहे हैं।&quot; उन्होंने संकेत दिया कि अगर अब बातचीत होती है, तो भारत को नई और शायद कठिन शर्तों का सामना करना पड़ सकता है। मोदी ने ट्रम्प के 4 कॉल अटेंड करने से इनकार किया था रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल जुलाई में ट्रम्प ने पीएम मोदी को &#039;चार बार&#039; कॉल किया था, लेकिन प्रधानमंत्री ने बात करने से इनकार कर दिया था। भारत सरकार को अंदेशा था कि ट्रम्प बातचीत के नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान संघर्ष में ट्रम्प की मध्यस्थता की कोशिशों को भी मोदी ने सिरे से खारिज कर दिया था, जिससे ट्रम्प नाराज थे। ईगो की लड़ाई और 50% टैरिफ का बोझ जानकारों का मानना है कि भारत को ट्रम्प के &#039;ईगो&#039; को ठेस पहुंचने का खामियाजा भुगतना पड़ा। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर ट्रम्प ने टैरिफ पहले 25% और फिर इसे बढ़ाकर 50% कर दिया। हालांकि, 17 सितंबर को मोदी के जन्मदिन पर ट्रम्प के कॉल के बाद बर्फ कुछ पिघली। दोनों नेताओं ने दिवाली और दिसंबर में भी बात की है, लेकिन ट्रेड डील अभी भी अधर में है। 25% टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से 25% को वह ‘रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ’ कहता है। जबकि 25% रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। भारत का कहना है कि यह पेनाल्टी गलत है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट 41.18 बिलियन डॉलर अमेरिका के साथ भारत का 2024-25 में वस्तुओं के मामले में ट्रेड डेफिसिट यानी, आयात और निर्यात के बीच का अंतर 41.18 बिलियन डॉलर था। 2023-24 में यह 35.32 बिलियन डॉलर, 2022-23 में 27.7 बिलियन डॉलर, 2021-22 में 32.85 बिलियन डॉलर और 2020-21 में 22.73 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। अमेरिका ने बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई है। ये भी पढ़ें... भारत पर 500% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका: रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े बिल को ट्रम्प की मंजूरी, अगले हफ्ते संसद में वोटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति से बातचीत की, जिसमें ट्रम्प ने संसद में बिल को पेश करने के लिए हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 15:13:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>मोदी, ने, ट्रम्प, को, कॉल, नहीं, किया, इसलिए, रुकी, ट्रेड-डील:अमेरिकी, कॉमर्स, मिनिस्टर, बोले-, ट्रम्प, ने, ईगो, पर, लिया, अब, पुराने, ऑफर, खत्म</media:keywords>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; मेक्सिको पर ड्रग कार्टेल्स का राज चल रहा:जमीनी हमले कर इन्हें खत्म करेंगे; मेक्सिको की राष्ट्रपति बोलीं&#45; अमेरिका कहीं का मालिक नहीं</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि उनका प्रशासन जल्द ही जमीन पर मौजूद ड्रग कार्टेल को निशाना बनाने के लिए कार्रवाई शुरू करेगा। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि मेक्सिको पर ड्रग कार्टेल का राज है। यह अमेरिका में हर साल 2.5 लाख से 3 लाख लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र के रास्ते से ड्रग्स की तस्करी को 97% तक रोक दिया है, इसलिए अब जमीन पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने योजनाओं के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबॉम ने ट्रम्प के बयानों का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कहा कि अमेरिका किसी भी क्षेत्र का मालिक नहीं है। शीनबॉम बोली- हम स्वतंत्र देश, हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबॉम ने साफ किया कि मेक्सिको दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को पूरी तरह खारिज करता है। ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने शीनबॉम से कई बार अमेरिकी सैनिक भेजकर कार्टेल्स को खत्म करने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। शीनबॉम ने जोर देकर कहा कि मेक्सिको एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है। यहां सहयोग तो किया जा सकता है, लेकिन हस्तक्षेप नहीं। उन्होंने ड्रग तस्करी रोकने में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग का जिक्र किया, लेकिन अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को सिरे से नकार दिया। दावा- मेक्सिको में ड्रग माफिया पर एयर स्ट्राइक करेगा अमेरिका ट्रम्प ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि वो ड्रग तस्करी से निपटने के लिए मेक्सिको में अमेरिकी सेना और खुफिया अधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। ये दावा अमेरिकी न्यूज चैनल NBC न्यूज की रिपोर्ट में किया गया था। रिपोर्ट में दो मौजूदा और दो रिटायर्ड अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस मिशन में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) भी शामिल हो सकती है। इन अधिकारियों के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन ने मेक्सिको में ड्रग कार्टेल्स को निशाना बनाने के लिए इस ऑपरेशन की प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस संभावित मिशन से जुड़ी शुरुआती ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। प्लान के मुताबिक, मेक्सिको की जमीन पर भी ऑपरेशन हो सकता है। हवाई हमलों और ड्रोन स्ट्राइक का प्लान NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अमेरिका की ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) की टीमें शामिल हो सकती हैं, जो CIA के अधिकार क्षेत्र में काम करेंगी। मिशन के तहत ड्रग लैब्स और कार्टेल सरगनाओं को निशाना बनाने के लिए ड्रोन स्ट्राइक की योजना है। कई ड्रोन ऐसी हैं जिनके संचालन के लिए जमीन पर भी ऑपरेटर्स की जरूरत पड़ती है। ड्रग्स तस्कर गिरोहों को आतंकी संगठन घोषित किया था फरवरी 2025 में, अमेरिकी विदेश विभाग ने 6 मेक्सिकन कार्टेल्स, MS-13 गैंग और वेनेज़ुएला के ‘ट्रेन डे अरागुआ’ को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। इससे अमेरिकी सेना और CIA को गुप्त ऑपरेशंस करने की खुली छूट मिल जाती है। ट्रम्प पहले भी कह चुके हैं कि उन्होंने वेनेज़ुएला में CIA को कार्रवाई की मंजूरी दी थी और जरूरत पड़ने पर वे कार्टेल्स को जमीन पर भी निशाना बनाएंगे। मेक्सिको से अमेरिका में होती है ड्रग तस्करी मेक्सिको दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का गढ़ माना जाता है, जहां से कोकीन, हेरोइन, मेथ और फेंटेनाइल जैसे बेहद खतरनाक ड्रग अमेरिका तक पहुंचते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, देश में ड्रग की सबसे बड़ी सप्लाई मेक्सिकन कार्टेल्स के जरिए होती है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग मार्केट है। हर साल लाखों लोग नशे की लत के शिकार होते हैं और फेंटेनाइल जैसी दवाओं से हजारों मौतें होती हैं। अमेरिकी सरकार पर लगातार दबाव रहता है कि ड्रग तस्करी पर सख्त कदम उठाए जाएं और इसी वजह से उसकी नजर मेक्सिको में मौजूद कार्टेल्स पर रहती है। दूसरी तरफ, कार्टेल्स मेक्सिको में इतने शक्तिशाली बन चुके हैं कि कई इलाकों में वे पुलिस और सरकार को चुनौती देते हैं। हथियारबंद गिरोह, धमकी, भ्रष्टाचार और हिंसा के चलते स्थानीय प्रशासन भी कई बार उन्हें रोक नहीं पाता। कई कार्टेल्स तो अपने को शेडो गवर्मेंट की तरह चलाते हैं। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला पर अब अमेरिका का कब्जा:150 विमानों के साथ ऑपरेशन चलाकर राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ा, प्लेन से न्यूयॉर्क लाया गया डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अब वेनेजुएला पर अमेरिका का कब्जा है। उन्होंने कहा कि जब तक वहां हालात ठीक नहीं हो जाते, वेनेजुएला को अमेरिका ही चलाएगा। पूरी खबर पढ़ें… ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 15:13:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>ट्रम्प, बोले-, मेक्सिको, पर, ड्रग, कार्टेल्स, का, राज, चल, रहा:जमीनी, हमले, कर, इन्हें, खत्म, करेंगे, मेक्सिको, की, राष्ट्रपति, बोलीं-, अमेरिका, कहीं, का, मालिक, नहीं</media:keywords>
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<title>कनाडा सरकार का पंजाबियों को बड़ा झटका:बुजुर्गों की PR पर 2028 तक रोक लगाई; केयरगिवर प्रोग्राम भी रोका</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा ने वीजा नियमों में बदलाव कर पंजाबियों को बड़ा झटका दिया है। इसके तहत अब देखभाल के बहाने बुजुर्गों के परमानेंट रेसिडेंस वीजा पर रोक लगा दी गई है। हालांकि अभी भी इनके पास सुपर वीजा का आप्शन खुली रहेगी। इसके तहत 5 साल तक लगातार कनाडा में रहा जा सकता है। कनाडा इमिग्रेंट डिपार्टमेंट ने केवल बुजुर्गों की PR पर रोक लगाई है। कनाडा जाने पर रोक नहीं है। अगर वे घूमने या कुछ समय तक जाना चाहते हैं तो ऐसे वीजा पर कोई रोक नहीं रहेगी। कनाडा सरकार 2026-2028 के लिए PR की संख्या कम कर रही है। इस कटौती के तहत माता-पिता और दादा-दादी को बुलाने वाले प्रोग्राम (PGP) के नए आवेदनों को रोका गया है। 2025 में PGP के तहत नए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। केवल 2024 में सबमिट किए गए आवेदनों को ही प्रोसेस किया जाएगा। साल 2024 में, कनाडा ने माता-पिता और दादा-दादी कार्यक्रम (PGP) के तहत लगभग 27,330 नए PR वीजा दिए थे। इसके अलावा कनाडा सरकार ने अपना केयरगिवर कार्यक्रम को भी बंद कर दिया है। हर साल 6 हजार पंजाबी बुजुर्ग करते PR के लिए अप्लाई
कनाडा में दूसरे देशों से आकर रहने वाले लोग अपने बुजुर्गों को यहां बुलाते हैं। हर साल लगभग 25 से 30 हजार बुजुर्गों को PR मिलती है। इसमें 6 हजार के लगभग पंजाबी बुजुर्ग शामिल होते हैं। कनाडा के इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के अनुसार इस वक्त कनाडा में कुल 81 लाख के करीब लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 65 साल से ज्यादा है। कनाडा सरकार का कहना है कि ये रोक 2026-2028 तक के लिए है। इसके बाद रिव्यू किया जाएगा। समीक्षा के बाद PGP प्रोग्राम को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। केयरगिवर प्रोग्राम पर भी लगाई गई रोक
दिसंबर 2025 में कनाडा सरकार ने केयरगिवर के नाम से शुरू &#039;होम केयर वर्कर&#039; पायलट प्रोग्राम को भी अगले आदेश तक रोक दिया है। यह प्रोग्राम उन लोगों के लिए था जो बुजुर्गों या बच्चों की देखभाल के लिए कनाडा जाना चाहते थे। अब यह मार्च 2026 में दोबारा नहीं खुलेगा। कनाडा सरकार ने अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी 2026-2028 के तहत इमिग्रेशन की संख्या को सीमित करने का फैसला किया है। इसका मुख्य कारण आवास की कमी और सेहत सेवाओं पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। तीर्थ सिंह ने बताया- अभी नियम जानना बाकी, बच्चों से मिलने के कई आप्शन
जालंधर बस स्टैंड के पास पिनेकल वीजा के मालिक तीर्थ सिंह ने बताया कि कनाडा ने बुजुर्गों के पीआर को लेकर जो रोक लगाई है, उसके नियम अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। पूरी पॉलिसी पढ़ने के बाद पता चल सकेगा। बच्चों से मिलने जाने वाले बुजुर्गों में ये पैनिक वाली न्यूज है। मुझे कई बुजुर्गों के फोन आ चुके हैं कि अब क्या करेंगे। मैंने उनको बताया है कि डरने की बात नहीं है, कई और भी आप्शन हैं। बच्चों से मिलने के लिए जा सकते हैं। कनाडा ने ऐसा पहली बार नहीं किया है, पहले भी ऐसा किया जा चुका है। कनाडा ने अपने गजट में दिया है बुजुर्गों का वीजा रोकने का ऑर्डर
बुजुर्गों की पीआर को लेकर कनाडा सरकार ने निर्णय लिया। सरकार की हुई मीटिंग में कहा गया है कि डिपार्टमेंट आफ सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन 1 जनवरी से बुजुर्गों की पीआर पर अस्थायी रोक लगा दे। अब नए वीजा जारी न किए जाएं। कनाडा गजट, भाग I, खंड 159, संख्या 52 को 27 दिसंबर, 2025 को जारी किया गया है। इसमें डिपार्टमेंट आफ सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन, इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी प्रोटेक्शन एक्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्पॉन्सर के माता-पिता या दादा-दादी की पीआर एप्लिकेशन 1 जनवरी, 2026 से स्वीकार नहीं होगी। दिसंबर 2025 तक आए आवेदनों पर निर्णय लिया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 15:13:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध बिल को ट्रम्प की मंजूरी:भारत जैसे देशों पर 500% टैरिफ का खतरा; अगले हफ्ते संसद में वोटिंग</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि बुधवार को व्हाइट हाउस में उनकी ट्रम्प से मुलाकात हुई, जिसमें राष्ट्रपति ने बिल को हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है। इस बिल का नाम &#039;सेंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025&#039; है। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लड़ने में मदद मिल रही है। रूसी तेल की वजह से भारत पर पहले से 25% टैरिफ अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर पर पहले से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया हुआ है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो, दिल्ली के लिए नई मुश्किलें लेकर आ सकता है। अब तक भारत पर कुल 50% टैरिफ लग चुका है। इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत भी चल रही है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनाल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है। दावा- भारतीय राजदूत ने 25% टैरिफ हटाने की अपील की लिंडसे ग्राहम ने 5 जनवरी को किया था कि वह करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के घर गए थे। उस मुलाकात में सबसे ज्यादा चर्चा भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने को लेकर हुई थी। उन्होंने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। भारत ने 4 साल बाद रूस से तेल आयात कम किया भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें... अमेरिका ने रूस का जहाज जब्त किया:नाम बदलकर वेनेजुएला से तेल खरीदने जा रहा था; रूसी पनडुब्बी बचाने पहुंच नहीं पाई अमेरिका ने बुधवार को वेनेजुएला से तेल खरीदने जा रहे 2 टैंकरों को पकड़ लिया। न्यूज एजेंसी &#039;रशिया टुडे&#039; के मुताबिक इसमें से एक रूस का जहाज मैरिनेरा है, जबकि दूसरे का नाम सोफिया है। सोफिया पर पनामा देश का झंडा है, लेकिन यह किस देश का है इसकी जानकारी नहीं है। पूरी खबर यां पढें... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 09:52:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>भारत के सत्य साईं वेनेजुएला में घर&#45;घर मशहूर कैसे हुए:राष्ट्रपति मादुरो भी भक्त थे, बाबा के निधन पर देश में राजकीय शोक था</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उनकी सत्य साईं बाबा के साथ एक तस्वीरें वायरल है। 2005 की इस तस्वीर में मादुरो अपनी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ सत्य साईं बाबा के सामने जमीन पर बैठे हुए हैं। मादुरो का जन्म एक कैथोलिक परिवार में हुआ था और वेनेजुएला भी ईसाई बहुल देश है, लेकिन इसके बावजूद वे सत्य साईं बाबा के भक्त माने जाते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर वेनेजुएला की वर्तमान उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का भी वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो बाबा के आश्रम में दर्शन करती नजर आ रही हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि ईसाई बहुल वेनेजुएला के कई हाई प्रोफाइल और ताकतवर लोग सत्य साई बाबा के भक्त कैसे बने। धार्मिक खबरों से जुड़ी वेबसाइट &#039;रिलिजन न्यूज सर्विस (RNS)&#039; के मुताबिक वेनेजुएला में सत्य साईं बाबा संगठन की शुरुआत किसी बड़े मिशन या प्रचार से नहीं हुई। इसकी शुरुआत एक महिला के व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव से हुई। इस महिला का नाम था एना एलेना डियाज-वियाना, जिन्हें वेनेजुएला की पहली साईं भक्त माना जाता है। वेनेजुएला की महिला ने सपने में सत्य साईं बाबा को देखा था RNS के मुताबिक जब डियाज-वियाना करीब 25 साल की थीं, तब उन्होंने एक अजीब सपना देखा। सपने में उन्होंने एक इंसान को सफेद कपड़ों में देखा, जिनके घुंघराले बाल और बड़ा अफ्रो जैसा हेयर-स्टाइल था। उस समय वह उस इंसान को पहचान नहीं सकीं, लेकिन वह सपना उनके मन में बस गया। सपने के बाद कई सालों तक वह उस चेहरे के बारे में सोचती रहीं। उन्होंने किसी गुरु की तलाश नहीं की थी, लेकिन उनके मन में आध्यात्मिक सवाल, सेवा भावना और दूसरों की मदद करने की इच्छा बढ़ती चली गई। करीब पांच साल बाद, उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री &#039;द लॉस्ट इयर्स ऑफ जीसस&#039; देखी। इसमें जब उन्होंने सत्य साईं बाबा को देखा, तो वह चौंक गईं। उनके मुताबिक, वही चेहरा था जो उन्होंने सपने में देखा था। तब उन्हें लगा कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संकेत है। डियाज-वियाना ने अपने घर पर भजन और ध्यान प्रोग्राम शुरू किया इसके बाद डियाज-वियाना ने सत्य साईं बाबा की शिक्षाओं को पढ़ना शुरू किया। बाबा के संदेश &#039;सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो&#039; और &#039;हमेशा मदद करो, कभी किसी को दुख मत दो&#039; उन्हें बहुत प्रभावित किया। उन्होंने इसे धर्म बदलने के रूप में नहीं, बल्कि मानवता और सेवा के तौर पर अपनाया। उन्होंने कराकस में अपने घर पर छोटे-छोटे भजन, ध्यान और सेवा कार्यक्रम शुरू किए। यहां कोई दिखावटी पूजा नहीं होती थी। मुख्य मकसद प्रार्थना करना और जरूरतमंदों की मदद करना था। धीरे-धीरे डॉक्टर, शिक्षक और पढ़े-लिखे लोग उनके साथ जुड़ने लगे। वेनेजुएला में 1974 में पहला साईं समूह बना डियाज-वियाना की कोशिशों से 1974 में काराकस में पहला साईं समूह बना। इसे पूरी तरह लोकल लोगों चलाते थे और इसकी सारी एक्टिविटी स्पेनिश भाषा में होती थीं। यहीं से वेनेजुएला में साईं बाबा का संदेश फैलना शुरू हुआ। डियाज-वियाना 1988 में वेनेजुएला के 64 लोगों के साथ भारत गईं। वहां उन्होंने प्रशांति निलयम आश्रम में सत्य साईं बाबा से मुलाकात की। इस यात्रा के बाद वेनेजुएला में साईं संगठन को औपचारिक मान्यता मिली और डियाज-वियाना को पहले आधिकारिक साईं सेंटर की अध्यक्ष बनाया गया। डियाज-वियाना का यह व्यक्तिगत अनुभव ही वेनेजुएला में साईं आंदोलन की नींव बना। बाद में यही आंदोलन पूरे देश में फैल गया और कई दशकों बाद इसका असर देश की टॉप पॉलिटिकल नजर आने लगा। निकोलस मादुरो की पत्नी भी बाबा की भक्त हैं इस हफ्ते जब निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया, तब उन्होंने कहा कि वे निर्दोष हैं और भगवान उन्हें आजाद कराएंगे। इसके बाद फिर से सत्य साईं बाबा के लिए उनकी आस्था चर्चा में आ गई। मादुरो को सत्य साईं बाबा से जोड़ने में सबसे बड़ा रोल उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस का माना जाता है। सिलिया फ्लोरेस खुद एक वकील और नेता हैं और नेशनल असेंबली की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वे मादुरो से शादी से पहले ही सत्य साईं बाबा की भक्त थीं। उन्हीं के जरिए मादुरो पहली बार बाबा के संपर्क में आए और धीरे-धीरे उनकी आस्था भी गहरी होती चली गई। साल 2005 में, जब सिलिया फ्लोरेस पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के लिए वकील के तौर पर काम कर रही थीं और मादुरो संसद के स्पीकर थे, तब दोनों भारत आए थे। इस यात्रा में वे आंध्र प्रदेश स्थित प्रशांति निलयम आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने सत्य साईं बाबा से मुलाकात की। उस समय की तस्वीरों में मादुरो और फ्लोरेस बाबा के सामने जमीन पर बैठे हुए दिखाई देते हैं। 2024 में वेनेजुएला की वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर आईं थी, तब उन्हें सत्य साईं आश्रम में दर्शन किए थे 
 सत्य साईं बाबा के निधन पर वेनेजुएला राष्ट्रीय शोक था मादुरो के करीबी बताते हैं कि सत्य साईं बाबा की एक बड़ी तस्वीर उनके ऑफिस में भी लगी थी। 2011 में जब सत्य साईं बाबा की मृत्यु हुई थी, तब वेनेजुएला ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। इस समय मादुरो विदेश मंत्री थे। नवंबर में सत्य साईं की 100वीं सालगिरह पर उन्होंने एक मैसेज जारी किया था, &#039;मुझे हमेशा उनकी मुलाकात याद आती है... महान गुरु का ज्ञान हमें हमेशा रोशन करता रहे।&#039; साईं बाबा संगठन लैटिन अमेरिका के 22 देशों में मौजूद है। रिपोर्टों के मुताबिक, वेनेजुएला में उनके सबसे अधिक अनुयायी थे, जहां 30 से ज्यादा साईं सेंटर एक्टिव हैं। कौन थे सत्य साईं बाबा सत्य साईं बाबा का जन्म 1926 हुआ था। उन्होंने खुद को शिरडी साईं बाबा का अवतार बताया था। &#039;लव ऑल, सर्व ऑल&#039; और &#039;हेल्प एवर, हर्ट नेवर&#039; जैसे संदेशों के लिए प्रसिद्ध साईं बाबा के दुनियाभर में करोड़ों अनुयायी हैं। उनके संगठन 120 से ज्यादा देशों में अस्पताल, स्कूल और जल परियोजनाएं चलाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 09:52:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिकी अधिकारी ने कार सवार महिला को गोली मारी, मौत:वीडियो वायरल, ट्रम्प बोले&#45; यह डरावना, लेकिन अधिकारी का बचाव किया; इलाके में प्रदर्शन शुरू</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में बुधवार को इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एक एजेंट ने कार सवार महिला को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। महिला की पहचान रेनी गुड (37) के तौर पर हुई है। वह तीन बच्चों की मां थीं। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के मुताबिक महिला ने अधिकारियों को कार से टक्कर मारने की कोशिश की थी, जिसके बाद एजेंट ने कार्रवाई की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ICE एजेंट का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि महिला ने जानबूझकर अधिकारी को निशाना बनाया। शूटिंग के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रम्प ने कहा, &quot; वीडियो बेहद डरावना है।” घटना के तुरंत बाद सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए और ICE के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई। शाम तक वहां श्रद्धांजलि सभा (विजिल) भी हुई, जिसमें लोगों ने इमिग्रेशन एजेंसियों का विरोध किया। मिनियापोलिस में प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें... सरकार बोली- महिला ने अधिकारियों को कुचले की कोशिश की होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने दावा किया कि महिला ने अधिकारियों को गाड़ी से कुचलने की कोशिश की थी। उन्होंने घटना को ICE अधिकारियों पर किया गया “घरेलू आतंकवादी हमला” बताया। हालांकि, मिनेसोटा के मेयर जैकब फ्रे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। जैकब ने कहा कि इमिग्रेशन एजेंट शहर में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम मांग करते हैं कि ICE तुरंत शहर और राज्य छोड़े। हम अपने प्रवासी और शरणार्थी समुदायों के साथ मजबूती से खड़े हैं।” उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर अराजकता फैलाई जा रही है। परिवार तोड़े जा रहे हैं और अब लोग मारे भी जा रहे हैं। जानिए मौके पर क्या हुआ CNN की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। वीडियो में दिखता है कि एक ICE अधिकारी सड़क के बीच खड़ी SUV के पास जाता है और ड्राइवर से दरवाजा खोलने को कहता है। तभी गाड़ी आगे बढ़ती है और सामने खड़े दूसरे ICE अधिकारी ने तुरंत बंदूक निकालकर बेहद करीब से कम से कम दो गोलियां चला दीं। यह साफ नहीं हो पाया है कि गाड़ी ने अधिकारी को टक्कर मारी या नहीं। गोली लगने के बाद SUV पास में खड़ी दो गाड़ियों से टकराकर रुक गई। बाद में मेडिकल टीम ने महिला को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी मौत हो गई। ]]></description>
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<title>बांग्लादेश में नहर में कूदने से हिंदू युवक की मौत:लोगों ने चोरी के आरोप में पीछा किया, बचने के लिए पानी में छलांग लगाई</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के नाओगांव जिले में नहर में कूदने से 25 साल के हिंदू युवक की मौत हो गई। घटना मंगलवार दोपहर की है। मृतक की पहचान भंडारपुर गांव निवासी मिथुन सरकार के तौर पर हुई है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, कुछ लोगों ने हाट चकगौरी बाजार इलाके में मिथुन पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसका पीछा किया। बचने की कोशिश में वह पास की नहर में कूद गया और लापता हो गया। बाद में स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब चार घंटे बाद शाम 4 बजे गोताखोरों की मदद से मिथुन का शव नहर से बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जनरल अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि मृतक वास्तव में चोरी में शामिल था या नहीं। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले बढ़े बांग्लादेश में पिछले कुछ महीने में हिंदुओं के खिलाफ हमले लगातार बढ़े हैं। सोमवार रात नरसिंदी जिले में एक हिंदू दुकानदार की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि के रूप में हुई है। यह बीते 18 दिनों में छठे हिंदू व्यक्ति की हत्या हुई। शरत चक्रवर्ती मणि पलाश उपजिला के चारसिंदूर बाजार में अपनी किराना दुकान चला रहे थे। इसी दौरान अचानक पहुंचे अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 19 दिसंबर को मणि ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई थी और अपने इलाके को मौत की घाटी बताया था। सोमवार को ही एक और हिंदू की गोली मारकर हत्या 5 जनवरी को ही जेसोर जिले में भी एक हिंदू व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मोनिरामपुर इलाके में एक आइस फैक्ट्री मालिक राणा प्रताप बैरागी की सार्वजनिक रूप से हत्या हुई। वे कपलिया बाजार में आइस फैक्ट्री चलाते थे और दैनिक बीडी खबर’अखबार के कार्यकारी संपादक भी थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक पर सवार तीन हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और सिर में नजदीक से गोली मारकर फरार हो गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बदमाश गोली मारने के बाद मौके से फरार हो गए। बाद में पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। हत्या के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हुआ है। हिंदू विधवा से गैंगरेप, पेड़ से बांधकर पीटा बांग्लादेश में 3 जनवरी को 44 साल की एक हिंदू विधवा महिला से गैंगरेप किया गया। आरोपियों ने रेप के बाद उसे पेड़ से बांधकर पीटा। यह घटना बांग्लादेश के झेनाइदह जिले के कालीगंज इलाके में हुई। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। पीड़ित महिला ने सोमवार दोपहर कालीगंज पुलिस थाने में 4 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जिस एक आरोपी हसन (45 साल) को हिरासत में लिया है, वह उसी इलाके के एक गांव का रहने वाला है। आरोप है कि इस दौरान महिला के बाल काट दिए गए, उसके साथ मारपीट की गई और पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बनाया गया। रिश्तेदारों को कमरे में बंद करके रेप किया पुलिस और स्थानीय लोगों के मुताबिक, महिला ने करीब दो साल पहले गांव में एक घर और जमीन खरीदी थी। यह जमीन उसने आरोपी शाहीन के भाई से ली थी। जमीन खरीदने के बाद से ही शाहीन उसे लगातार परेशान कर रहा था और उससे पैसे मांग रहा था। महिला के दो पुरुष रिश्तेदार शनिवार शाम उससे मिलने आए थे। उसी दौरान शाहीन और हसन जबरन घर में घुस आए। उन्होंने महिला के रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला को दूसरे कमरे में ले जाकर रेप किया। इसके बाद आरोपियों ने महिला और उसके रिश्तेदारों को घर से बाहर घसीटकर पेड़ से बांध दिया और उन पर अश्लील गतिविधियों का झूठा आरोप लगाया। महिला अपने 10 साल के बेटे के साथ उसी गांव में रहती है। शनिवार रात लोकल लोगों ने महिला को गंभीर हालत में देखा और उसे अस्पताल में भर्ती कराया। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में फिर हिंदू शख्स को पेट्रोल डालकर जलाया:धारदार हथियारों से हमला, अस्पताल में भर्ती; 15 दिन में हिंदू को जलाने का दूसरा मामला बांग्लादेश में फिर से एक हिंदू शख्स को जलाने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने धारदार हथियारों से वार करने के बाद पीड़ित के सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पीड़ित की पहचान 50 वर्षीय कारोबारी खोकन चंद्र दास के रूप में हुई है। वह शरियतपुर जिले के दामुद्या इलाके में केउरभांगा बाजार के पास अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनका ऑटो रोककर हमला कर दिया। स्थानीय मीडिया ‘प्रथम आलो’ ने पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:17:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>हरियाणवी युवक की स्पेन में मौत:साइकिल चलाते हुए अचानक गिरा, 3 महीने पहले पत्नी संग गया था</title>
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<description><![CDATA[ हरियाणा में करनाल के रहने वाले युवक की स्पेन में मौत हो गई। युवक साइकिल पर फूड डिलीवर करने के लिए जा रहा था। पहाड़ी एरिया में चढ़ते हुए घबराहट होने के बाद वह गिर गया। आसपास के लोग तुरंत उसे अस्पताल ले गए, यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद करनाल में उसके परिजनों को घटना की सूचना दी गई। मृतक की पहचान कैमला गांव निवासी मुकेश कुमार के तौर पर हुई है। 3 महीने पहले ही वह पत्नी के साथ स्पेन आया था। यहां वह बार्सिलोना शहर में रहता था। डॉक्टरों के मुताबिक मुकेश को हार्ट अटैक आया था। मुकेश का शव भारत लाया जाएगा, इसके बाद उसका अंतिम संस्कार होगा। घटना से जुड़ी तस्वीरें... अब सिलसिलेवार ढंग से मुकेश के बारे में जानिए... एक साल पहले शादी हुई
मधुबन के अर्पणा अस्पताल में सुपरवाइजर देवी सिंह ने बताया कि बेटे मुकेश ने एक साल पहले सपना से कोर्ट मैरिज की थी। मुकेश का बड़ा भाई शादीशुदा है और वह गांव में ही रहता है। मुकेश शुरू से ही विदेश जाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहता था। इसलिए परिवार ने अपनी जमीन बेच दी और मुकेश और उसकी पत्नी का टूरिस्ट वीजा अप्लाई कराया। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 20 लाख रुपए खर्च हुए। नौकरी छूटने पर फूड डिलीवर करने लगा
पिता ने बताया कि 16 अक्टूबर को मुकेश और सपना स्पेन गए। पहले उन्होंने लेबर का काम किया। इसके बाद एक स्टोर पर नौकरी करने लगा। कुछ दिनों बाद उसकी नौकरी छूट गई। वह नई नौकरी की तलाश कर रहा था। जब नौकरी नहीं मिली तो एक रेस्टोरेंट के माध्यम से उसने फूड डिलीवरी का काम शुरू कर दिया। उसकी पत्नी भी इसी रेस्टोरेंट पर काम करने लगी। पत्नी ने फोन कर परिवार को सूचना दी
देवी सिंह ने बताया कि मंगलवार रात को बार्सिलोना से सपना का फोन आया। उसने बताया कि मुकेश रात को साइकिल से एक डिलीवरी लेकर ऊंचाई वाले इलाके की ओर जा रहे थे। चढ़ाई वाले रास्ते पर घबराहट के कारण उन्हें अचानक हार्टअटैक आया। इस कारण उसकी मौत हो गई। बार्सिलोना में अब सिर्फ सपना ही मौजूद है। अस्पताल में रखा है मुकेश का शव
पिता ने बताया कि मुकेश का पार्थिव शरीर अभी अस्पताल में रखा गया है और उसे भारत लाने के लिए कागजी प्रक्रिया और खर्च की जरूरत है। बिना मदद के यह संभव नहीं हो पा रहा। मुकेश ही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद थी और उसके निधन से परिवार टूट गया है। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:17:17 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:इजराइल के विदेश मंत्री सोमालिलैंड पहुंचे, मान्यता देने के बाद पहला दौरा</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार सोमालिलैंड के दौरे पर पहुंचे हैं। इजराइल ने पिछले महीने सोमालिलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी। इसे दोनों पक्षों के लिए अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। दौरे के दौरान गिदोन सार ने सोमालिलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इजराइल सोमालिलैंड के साथ रिश्तों को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है। राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने इस दौरे को “बड़ा दिन” बताया। पिछले महीने इजराइल दुनिया का पहला देश बना, जिसने सोमालिलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। सोमालिलैंड ने 1991 में सोमालिया से अलग होकर खुद को स्वतंत्र घोषित किया था, लेकिन अब तक उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी। इस दौरे और मान्यता पर सोमालिया ने आपत्ति जताई है। उसने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताया है। इजराइल ने साफ किया कि यह फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है। इजराइल और सोमालिलैंड के बीच कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कदम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... फिलीपींस में 6.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का अलर्ट नहीं फिलीपींस में बुधवार सुबह 6.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया। अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक भूकंप का केंद्र सैंटियागो के पास दर्ज किया गया। USGS ने एक अलग आकलन में भूकंप की तीव्रता 6.4 भी बताई है, जिसका केंद्र शहर से करीब 27 किलोमीटर पूर्व में था। भूकंप के बाद प्रशासन ने साफ किया कि फिलहाल किसी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि भूकंप भले ही शक्तिशाली था, लेकिन इससे समुद्र में खतरनाक लहरें उठने की आशंका नहीं है। गौरतलब है कि फिलीपींस प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की वजह से अक्सर भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। यहां तेज भूकंप आना आम बात है। कोलंबिया के राष्ट्रपति की ट्रम्प को धमकी:कहा- हिम्मत है तो मुझे पकड़कर दिखाओ; कभी वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने भी ऐसी धमकी दी थी वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिका के देशों के रिश्तों में भारी तनाव पैदा हो गया है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो खुलकर अमेरिका के खिलाफ आ गए हैं। पेट्रो ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि वह कोलंबिया में ही मौजूद हैं और अमेरिका का इंतजार कर रहे हैं। पेट्रो के इस बयान ने पूरे लैटिन अमेरिका में सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने यह बयान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद दिया। गौरतलब है कि मादुरो भी अगस्त 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प को इसी तरह की चुनौती दे चुके हैं। मादुरो ने कहा था कि अगर हिम्मत है तो अमेरिका आकर उन्हें गिरफ्तार करे। इसके जवाब में अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम की राशि और बढ़ा दी थी। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 11:17:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बांग्लादेश में 18 दिन में छठे हिंदू की हत्या:दुकानदार पर धारदार हथियार से हमला; बढ़ती हिंसा को लेकर फेसबुक पोस्ट किया था</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के नरसिंदी जिले में सोमवार रात एक हिंदू दुकानदार की धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि के रूप में हुई है। यह बीते 18 दिनों में छठे हिंदू व्यक्ति की हत्या है। शरत चक्रवर्ती मणि पलाश उपजिला के चारसिंदूर बाजार में अपनी किराना दुकान चला रहे थे। इसी दौरान अचानक पहुंचे अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मणि को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 19 दिसंबर को मणि ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई थी और अपने इलाके को मौत की घाटी बताया था। कल ही एक और हिंदू की गोली मारकर हत्या 5 जनवरी को ही जेसोर जिले में भी एक हिंदू व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मोनिरामपुर इलाके में एक आइस फैक्ट्री मालिक राणा प्रताप बैरागी की सार्वजनिक रूप से हत्या हुई। वे कपलिया बाजार में आइस फैक्ट्री चलाते थे और दैनिक बीडी खबर’अखबार के कार्यकारी संपादक भी थे। रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक पर सवार तीन हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और सिर में नजदीक से गोली मारकर फरार हो गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बदमाश गोली मारने के बाद मौके से फरार हो गए। बाद में पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। हत्या के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हुआ है। हिंदू विधवा से गैंगरेप, पेड़ से बांधकर पीटा बांग्लादेश में 3 जनवरी को 44 साल की एक हिंदू विधवा महिला से गैंगरेप किया गया। आरोपियों ने रेप के बाद उसे पेड़ से बांधकर पीटा। यह घटना बांग्लादेश के झेनाइदह जिले के कालीगंज इलाके में हुई। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। पीड़ित महिला ने सोमवार दोपहर कालीगंज पुलिस थाने में 4 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जिस एक आरोपी हसन (45 साल) को हिरासत में लिया है, वह उसी इलाके के एक गांव का रहने वाला है। आरोप है कि इस दौरान महिला के बाल काट दिए गए, उसके साथ मारपीट की गई और पूरी घटना का मोबाइल से वीडियो बनाया गया। पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दें... रिश्तेदारों को कमरे में बंद करके रेप किया पुलिस और स्थानीय लोगों के मुताबिक, महिला ने करीब दो साल पहले गांव में एक घर और जमीन खरीदी थी। यह जमीन उसने आरोपी शाहीन के भाई से ली थी। जमीन खरीदने के बाद से ही शाहीन उसे लगातार परेशान कर रहा था और उससे पैसे मांग रहा था। महिला के दो पुरुष रिश्तेदार शनिवार शाम उससे मिलने आए थे। उसी दौरान शाहीन और हसन जबरन घर में घुस आए। उन्होंने महिला के रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला को दूसरे कमरे में ले जाकर रेप किया। इसके बाद आरोपियों ने महिला और उसके रिश्तेदारों को घर से बाहर घसीटकर पेड़ से बांध दिया और उन पर अश्लील गतिविधियों का झूठा आरोप लगाया। महिला अपने 10 साल के बेटे के साथ उसी गांव में रहती है। शनिवार रात लोकल लोगों ने महिला को गंभीर हालत में देखा और उसे अस्पताल में भर्ती कराया। ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में फिर हिंदू शख्स को पेट्रोल डालकर जलाया:धारदार हथियारों से हमला, अस्पताल में भर्ती; 15 दिन में हिंदू को जलाने का दूसरा मामला बांग्लादेश में फिर से एक हिंदू शख्स को जलाने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने धारदार हथियारों से वार करने के बाद पीड़ित के सिर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पीड़ित की पहचान 50 वर्षीय कारोबारी खोकन चंद्र दास के रूप में हुई है। वह शरियतपुर जिले के दामुद्या इलाके में केउरभांगा बाजार के पास अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान बदमाशों ने उनका ऑटो रोककर हमला कर दिया। स्थानीय मीडिया ‘प्रथम आलो’ ने पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 13:35:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दावा&#45; ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई रूस भागने की फिराक में:सत्ता गंवाने का डर, बेटे और साथियों के साथ 20 लोग भी तैयार</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच रूस भागने की योजना तैयार कर ली है। अगर प्रदर्शनों को रोका नहीं जा सका, तो खामेनेई देश छोड़ देंगे। ब्रिटिश अखबार ‘द टाइम्स’ को मिली एक खुफिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 86 साल के खामेनेई अपने बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा समेत करीब 20 लोगों के छोटे दल के साथ तेहरान छोड़ सकते हैं। ईरान में आठ दिन से खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 78 शहरों के 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो चुके हैं। इनमें कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। वहीं 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। देश छोड़ने के लिए पहले से तैयार खामेनेई खामेनेई कई चैरिटेबल फाउंडेशनों के जरिए अरबों डॉलर की संपत्ति पर नियंत्रण रखते हैं। इनमें ‘सेताद’ नाम की संस्था प्रमुख है, जिसकी वैल्यू पहले भी कई अरब डॉलर आंकी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शासन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के रिश्तेदार पहले से ही अमेरिका, कनाडा और खाड़ी देशों में रह रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत विदेशों में संपत्तियां, प्रॉपर्टी और कैश पहले से सुरक्षित कर लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत देश छोड़ा जा सके। ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। प्रदर्शनकारियों को लेकर हमले की चेतावनी दे चुका अमेरिका पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की गई तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, हम पूरी तरह तैयार हैं। अगर ईरान ने पहले की तरह लोगों को मारना शुरू किया, तो उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRAI और ओस्लो स्थित हेंगाव ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने आम नागरिकों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। देशभर में फैले इन प्रदर्शनों की शुरुआत ईरानी मुद्रा के गिरने और महंगाई बढ़ने के बाद हुई। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और शासन परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। वहीं, ईरान की सरकारी फर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों में 250 पुलिसकर्मी और बसीज बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं। ईरान की ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ भी कमजोर पड़ी ईरान के सहयोगी देशों और गुटों की स्थिति कमजोर हुई है। 2023 में शुरू हुए इजराइल-हमास युद्ध के बाद हमास को भारी नुकसान हुआ है। लेबनान की हिजबुल्ला के कई शीर्ष नेता मारे गए हैं। दिसंबर 2024 में सीरिया के राष्ट्रपति को सत्ता से हटाया गया। यमन के हूती विद्रोहियों पर भी हवाई हमले किए हैं। ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ ईरान के नेतृत्व वाला एक अनौपचारिक गठजोड़ है। इसमें वे देश और संगठन शामिल हैं जो अमेरिका और इजराइल के विरोध में खड़े माने जाते हैं। इस गठजोड़ का मकसद मध्य-पूर्व में अमेरिका और इजराइल के प्रभाव को चुनौती देना है। इसमें मुख्य रूप से ईरान के अलावा हमास (गाजा), हिजबुल्ला (लेबनान), हूती विद्रोही (यमन) और पहले सीरिया की सरकार शामिल रही है। ईरान इन गुटों को राजनीतिक समर्थन के साथ-साथ हथियार, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद भी देता रहा है। भारत की एडवाइजरी- गैर जरूरी यात्रा से बचें भारत सरकार ने ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए अपने नागरिकों को वहां गैर जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को यह एडवाइजरी जारी की। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जो भारतीय नागरिक ईरान में रेजिडेंट वीजा पर रह रहे हैं और अब तक दूतावास में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराएं। खामेनेई 35 साल से ईरान की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज आयतुल्लाह अली खामेनेई 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता के पद पर काबिज हैं। ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान, जब शाह मोहम्मद रजा पहलवी को हटाया गया तो खामेनेई ने क्रांति में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस्लामिक क्रांति के बाद खामेनेई को 1981 में राष्ट्रपति बनाया गया। वह 8 साल तक इस पद पर रहे। 1989 में ईरान के सुप्रीम लीडर खुमैनी की मौत के बाद उन्हें उत्तराधिकारी बनाया गया। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अयातुल्ला धर्मगुरू की एक पदवी है। ईरान के इस्लामिक कानून के मुताबिक, सुप्रीम लीडर बनने के लिए अयातुल्ला होना जरूरी है। यानी कि सुप्रीम लीडर का पद सिर्फ एक धार्मिक नेता को ही मिल सकता है। लेकिन जब खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाने के लिए कानून में संसोधन किया गया था क्योंकि वे धार्मिक नेता नहीं थे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 13:35:33 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:नेपाल के बीरगंज में मस्जिद में तोड़फोड़ के बाद कर्फ्यू, हालात बिगड़ने पर प्रशासन का फैसला</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के पर्सा जिले के बीरगंज में रविवार को मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना के बाद हालात बिगड़ गए। प्रदर्शनों के बीच सोमवार को जिला प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया। निषेधाज्ञा के बावजूद दो विरोधी गुट सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। प्रशासन ने पहले दोपहर में निषेधाज्ञा जारी की थी, लेकिन इसका असर नहीं दिखा। हालात बेकाबू होते देख पर्सा के मुख्य जिला अधिकारी भोला दहाल ने सोमवार शाम 6 बजे से कर्फ्यू का आदेश दिया। प्रशासन ने साफ किया है कि कर्फ्यू तीन दिनों तक प्रभावी रहेगा। कर्फ्यू का दायरा पूर्व में बाइपास रोड, पश्चिम में सिर्सिया पुल, उत्तर में पावरहाउस चौक और दक्षिण में शंकराचार्य गेट तक रखा गया है। इस दौरान किसी भी तरह की आवाजाही, सभा, जुलूस और सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक रहेगी। लोगों को केवल आपात स्थिति में ही घर से बाहर निकलने की अनुमति दी गई है। दरअसल, धनुषा जिले के कमला नगर पालिका क्षेत्र में मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना के बाद से ही विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। रविवार को बीरगंज में प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए, पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रशासन ने शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने व अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... बांग्लादेश में दो हिंदू व्यापारियों से लूट, बदमाशों ने नकली पुलिस बनकर वारदात को अंजाम दिया बांग्लादेश के चट्टोग्राम और लक्ष्मीपुर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो हिंदू सोना व्यापारियों से बड़ी लूट की वारदात सामने आई है। इन घटनाओं के बाद सराफा कारोबारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि दोनों मामलों में बदमाशों ने खुद को कानून-व्यवस्था से जुड़े लोग बताकर वारदात को अंजाम दिया। चट्टोग्राम के हाजारी गली इलाके में सोने का कारोबार करने वाले कृष्ण कर्मकार ने बताया कि रविवार तड़के उनके कर्मचारियों से करीब 350 वोरी पिघला हुआ सोना लूट लिया गया। यह वारदात पंचलैश थाना क्षेत्र के रूफाबाद हिलव्यू इलाके में हुई। कर्मकार के मुताबिक, उनके तीन कर्मचारी सबुज देबनाथ, पिंटू धर और बिभाष रॉय गहने बनवाने के लिए सोना ढाका के तांतीबाजार ले जा रहे थे। रास्ते में मोटरसाइकिल सवार 7-8 लोगों ने उनकी सीएनजी ऑटो-रिक्शा को रोका। बदमाशों ने खुद को पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (DB) का अधिकारी बताया और बंदूक की नोक पर सोना छीनकर फरार हो गए। पंचलैश थाने के प्रभारी (OC) अब्दुल करीम ने बताया कि शिकायत में 35 सोने की ईंटों के लूटे जाने का जिक्र है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कर्मचारी तय रास्ते से क्यों हटे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि डीबी के अधिकारी सादे कपड़ों में इस तरह की कार्रवाई नहीं करते। घटना के 24 घंटे बाद तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। दूसरी घटना लक्ष्मीपुर जिले के कमलनगर उपजिला की है। यहां वेलकम ज्वेलर्स के मालिक शुभो पोद्दार से करीब 30 वोरी सोने के गहने लूट लिए गए। पोद्दार ने बताया कि शनिवार शाम ऑटो-रिक्शा से लौटते समय दो अज्ञात यात्रियों एक पुरुष और एक महिला ने उनका मुंह बंद कर दिया और गहने लेकर फरार हो गए। यह वारदात लक्ष्मीपुर सदर उपजिला के पियारापुर इलाके में हुई। पोद्दार ने इससे पहले चंद्रगंज बाजार में 10 वोरी सोना बेचा था और बदले में 21 लाख टका का चेक मिला था। बदमाश गहनों के साथ भागे, लेकिन चेक नहीं ले गए। पुलिस ने मौके का मुआयना किया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है। सदर मॉडल थाने के OC वहीद परवेज ने बताया कि ऑटो-रिक्शा चालक की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है। जापान के चुगोकू में 6.2 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी नहीं जापान के पश्चिमी चुगोकू क्षेत्र में मंगलवार सुबह 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप के बाद कई तेज आफ्टरशॉक्स (झटके) भी महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र शिमाने प्रांत के पूर्वी हिस्से में था। एजेंसी ने बताया कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप के बाद वेस्ट जापान रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर शिन-ओसाका से हाकाटा के बीच शिंकानसेन बुलेट ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप की तीव्रता इतनी तेज थी कि बिना सहारे खड़ा होना या चलना मुश्किल हो गया। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप आने वाले देशों में शामिल है। दुनिया में 6 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों का करीब पांचवां हिस्सा जापान में आता है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति को न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश किया गया:मादुरो बोले- मुझे किडनैप किया; आरोपों से इनकार, गिरफ्तारी को अवैध बताया वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार रात न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। उन्होंने कोर्ट में अपने खिलाफ लगे ड्रग्स और हथियार तस्करी से जुड़े सभी आरोपों से इनकार किया। CNN के मुताबिक, मादुरो ने अदालत में अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया और कहा कि मुझे किडनैप किया गया है। पहली सुनवाई मादुरो ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा, मैं अपराधी नहीं हूं। मैं एक सम्मानित व्यक्ति हूं और अब भी अपने देश का राष्ट्रपति हूं। मादुरो के वकीलों ने अमेरिकी कार्रवाई को सैन्य अपहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। बचाव पक्ष अमेरिकी अदालतों के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) को भी चुनौती देने की तैयारी में हैं। उनकी कानूनी रणनीति का मुख्य आधार यही होगा कि अमेरिकी एजेंसियों ने विदेशी जमीन पर अवैध कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 13:35:33 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात फिर दोहराई:कहा&#45; देश की सुरक्षा के लिए जरूरी, डेनमार्क PM बोलीं&#45; धमकियां देना बंद करें अमेरीकी राष्ट्रपति</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण चाहने की बात दोहराई है। इससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं में गुस्सा भड़क गया है। ट्रम्प ने सोमवार को एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बहुत जरूरी है और वहां रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी चिंता की बात है। इससे पहले द अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में भी ट्रम्प ने कहा था कि रक्षा के लिहाज से ग्रीनलैंड अमेरिका को चाहिए। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने ट्रम्प की इस टिप्पणी पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि अमेरिका का ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात करना पूरी तरह बेतुकी है। वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने भी ट्रम्प की टिप्पणियों को गलत और अपमानजनक बताया। अमेरिकी सेना के वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर न्यूयॉर्क ले जाने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। मादुरो पर ड्रग तस्करी के आरोपों में मुकदमा चलाया जाएगा। डेनमार्क PM बोली- अमेरिका के पास डेनिश साम्राज्य हड़पने का अधिकार नहीं है डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, &quot;अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोई जरूरत नहीं है और न ही उसके पास डेनिश साम्राज्य के किसी भी हिस्से को हड़पने का कोई अधिकार है।&quot; फ्रेडरिक्सेन ने ट्रम्प से करीबी सहयोगी देश के खिलाफ धमकियां देना बंद करने की अपील की और याद दिलाया कि ग्रीनलैंड के लोग खुद स्पष्ट कह चुके हैं कि वे बिकाऊ नहीं हैं। डेनमार्क नाटो का सदस्य है और अमेरिका के साथ पहले से ही उसका रक्षा समझौता है, जिसके तहत ग्रीनलैंड में पहले से अमेरिकी पहुंच है। ग्रीनलैंड PM बोले- हमारा देश बिकने वाला नहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करते हैं, तो यह न केवल गलत है बल्कि हमारे लोगों के प्रति अनादर है। नीलसन ने 4 जनवरी को बयान जारी कर कहा- मैं शुरू से ही शांत और स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं कि घबराहट या चिंता का कोई कारण नहीं है। केटी मिलर के पोस्ट से, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है, इससे कुछ भी नहीं बदलता। नीलसन बोले, &quot;हम स्वतंत्र चुनावों और मजबूत संस्थानों वाला एक लोकतांत्रिक समाज हैं। हमारी स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समझौतों पर आधारित है। इस पर कोई सवाल नहीं है। ग्रीनलैंड सरकार शांतिपूर्वक और जिम्मेदारी से अपना काम जारी रखे हुए है।&quot; अमेरिकी अधिकारी की पत्नी के पोस्ट से भड़का विवाद वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के ठीक बाद व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे के रंग में रंगा हुआ पोस्ट किया। इससे यह विवाद और बढ़ गया। मिलर ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा &quot;जल्द ही&quot;। इससे ग्रीनलैंड और डेनमार्क में अमेरिकी कब्जे की आशंकाएं बढ़ गईं। ट्रम्प लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात करते रहे हैं। जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, खनिज संसाधनों और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की गतिविधियों का हवाला दिया है। इससे पहले मार्च में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने ग्रीनलैंड के एक अमेरिकी सैन्य अड्डे का दौरा किया था और डेनमार्क पर वहां कम निवेश करने का आरोप लगाया था। अमेरिका और डेनमार्क करीबी सहयोगी, दोनों नाटो के संस्थापक सदस्य विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला की घटना के बाद ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर टिप्पणियां नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा सकती हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा हैं और नाटो का सदस्य हैं, जिससे इसकी रक्षा की जिम्मेदारी नाटो की सामूहिक सुरक्षा के तहत आती है। अमेरिका का डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ रिश्ता करीबी और सहयोगी का है। डेनमार्क नाटो का संस्थापक सदस्य है। 1951 के रक्षा समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य आधार रखने की अनुमति है। दोनों देश सुरक्षा, विज्ञान, पर्यावरण और व्यापार में सहयोग करते हैं। जानिए अमेरिका को ग्रीनलैंड से क्या फायदा अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति को अगवा किया था अमेरिकी सैनिकों ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अगवा कर लिया था। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उन पर हथियार-ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। मादुरो को आज मैनहैटन की फेडरल कोर्ट में पेश किया जाएगा। मादुरो पर अमेरिका में हथियार और ड्रग तस्करी के आरोप हैं। मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस को भी केस में शामिल किया गया है। उन पर अपहरण और हत्याओं के आदेश देने का आरोप लगाया गया है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को धमकी दी: कहा- हमारी बात नहीं मानी तो और बुरा हाल करेंगे; UNSC में आज इमरजेंसी मीटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को बुरा हाल करने की धमकी दी है। ट्रम्प ने कहा, &#039;अगर डेल्सी वह नहीं करतीं जो वेनेजुएला के लिए अमेरिका सही मानता है, तो उनका हाल मादुरो से भी ज्यादा बुरा हो सकता है।&#039; पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 13:51:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान में पंजाबी महिला सरबजीत गिरफ्तार:भारत डिपोर्ट करने की तैयारी; सिख जत्थे के साथ गई, नूर हुसैन बनकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह किया</title>
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<description><![CDATA[ भारत से पाकिस्तान गई पंजाबी महिला सरबजीत कौर को गिरफ्तार कर लिया गया है। सरबजीत के साथ उसके पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन को भी हिरासत में लिया गया है। सरबजीत को पाकिस्तान से अटारी बॉर्डर के रास्ते आज ही भारत डिपोर्ट किया जा सकता है। सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व पर सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पाकिस्तान गई थी। उसने वहां जाकर पाकिस्तानी व्यक्ति नासिर हुसैन से निकाह कर लिया था। निकाह के लिए सरबजीत ने मुस्लिम धर्म अपनाकर अपना नाम भी नूर हुसैन रख लिया था। पाकिस्तान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGMC) और पाकिस्तानी पंजाब सरकार के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने सरबजीत की गिरफ्तारी की पुष्टि की। अरोड़ा ने कहा- 4 जनवरी 2026 को ननकाना साहिब के गांव पेहरे वाली में इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। अब पाकिस्तान सरकार, सरबजीत को भारत डिपोर्ट करने की तैयारी में है। सिलसिलेवार पढ़िए क्या था पूरा मामला... 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ गई थी पाकिस्तान
सरबजीत कौर 4 नवंबर को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गई थी। यह सिख जत्था 10 दिन तक पाकिस्तान में रहा। जहां उन्होंने सिख गुरुओं से जुड़े विभिन्न स्थलों के दर्शन किए और 13 नवंबर को भारत वापस लौट आए। पूरे सिख जत्थे के एक साथ भारत लौटने से पहले अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और 3 महिलाओं समेत कुल 9 श्रद्धालु पहले लौट आए थे। सिख श्रद्धालुओं के साथ वापस नहीं लौटी
हालांकि जब श्रद्धालुओं का पूरा जत्था वापस लौटा तो 1923 की जगह 1922 लोग ही वापस पहुंचे। जब इसकी जांच हुई तो पता चला कि जत्थे के साथ गई कपूरथला की सरबजीत कौर वापस नहीं आई है। उसका नाम न तो पाकिस्तान के एग्जिट रिकॉर्ड में था और न ही भारत के एंट्री रिकॉर्ड में मिला। पहले माना गया कि वह लापता है। इसके बाद उसके बारे में पाकिस्तान में भी लोकल पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी उसकी तलाश शुरू कर दी। निकाहनामा और वीडियो वायरल होने से पता चला
इसके बाद अचानक उर्दू में लिखा सरबजीत का निकाहनामा वायरल हो गया। जिसमें लिखा था कि सरबजीत ने पाकिस्तान में इस्लाम धर्म अपना लिया है। उसने शेखुपुरा नूर हुसैन नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है। इसके बाद 15 नवंबर को उसका एक वीडियो भी वायरल हो गया। जिसमें उसने मौलवी को कहा कि वह मुस्लिम बनना चाहती है। सरबजीत ने कहा कि वह नासिर से प्यार करती है और 9 साल से उसे जानती है। सरबजीत ने यह भी कहा था कि मेरा तलाक हो चुका है। पाक इमिग्रेशन फॉर्म में कई जानकारियां नहीं भरीं
सरबजीत के पाकिस्तान में निकाह करने के बाद उसके वीजा के लिए दस्तावेजों की पड़ताल की गई। इसमें पता चला कि उसने पाकिस्तानी इमिग्रेशन में भरे फॉर्म में अपनी राष्ट्रीयता और पासपोर्ट नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां ही नहीं भरी थी। इससे पाकिस्तान में उसे ट्रेस करना मुश्किल हो गया था। निकाह करने के बाद नूर हुसैन बनी सरबजीत नासिर हुसैन के साथ छिपकर रह रही थी। पाकिस्तान में यूट्यूबर नासिर ढिल्लों ने किया था स्वागत
अमृतसर से अटारी के रास्ते में पाकिस्तान के ननकाना साहिब पहुंचने वाले जत्थे का स्वागत पाकिस्तान के यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नासिर ढिल्लों ने किया था। ये वही नासिर हुसैन है जिस पर आपरेशन सिंदूर के वक्त पाकिस्तानी एजेंसियों के लिए काम करने का आरोप लगा था। इसी ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई हरियाणा के हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के साथ भी इंटरव्यू किया था। सरबजीत पर कपूरथला में कई केस चल रहे
सरबजीत कपूरथला के गांव अमानीपुर की रहने वाली हैं। ये गांव पोस्ट आफिस टिब्बा का हिस्सा है और थाना तलवंडी चौधरियां के अंडर आता है। गांव के लोगों का कहना था कि महिला का अपने पति से तलाक हो चुका है। उसके दो बेटे हैं। इनके खिलाफ भी सुल्तानपुर लोधी में 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, जिनमें वेश्यावृत्ति का भी केस शामिल है। गांव अमानीपुर के अंदर सरबजीत की आलीशान कोठी है। उसका लोगों से ज्यादा मिलना जुलना नहीं था। सरबजीत के विवादों के कारण लोगों का उसके घर ज्यादा आना जाना नहीं है। लाहौर हाईकोर्ट भी पहुंचा मामला, कोर्ट ने परेशान न करने को कहा था
सरबजीत कौर के पाकिस्तान में निकाह करने का मामला लाहौर हाईकोर्ट भी पहुंचा था। पाकिस्तान में सिख समुदाय के एक पूर्व विधायक महिंदर पाल सिंह ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए सरबजीत कौर को गिरफ्तार कर भारत भेजने की मांग की थी। कोर्ट में दलील दी गई थी कि सरबजीत कौर की पाकिस्तान में रुकने की वीजा अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद वह यहीं रुकी है। वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। वह संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकती है। इसके साथ ही सरबजीत और नासिर हुसैन ने भी कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान की पुलिस और अधिकारी उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। दोनों ने कोर्ट से सिक्योरिटी और किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई से बचाने की मांग की थी। इस मामले में सुनवाई भी हुई थी। इस मामले में नवंबर महीने में ही लाहौर हाईकोर्ट के जज फारुख हैदर ने फैसला दिया था कि अगर शादी और धर्म परिवर्तन सरबजीत की मर्जी से हुआ तो अधिकारी उन्हें परेशान न करें। उन पर शादी तोड़ने के लिए दबाव न डालें। सरबजीत को गिरफ्तार कर भारत भेजने की याचिका पर अभी अंतिम फैसला नहीं आया। ----------------- ये खबर भी पढ़ें... रूसी आर्मी में गोली से मरे पंजाबी युवक की कहानी:डोंकर ने पीटकर सेना में भेजा, यूक्रेन से लड़ने को छोड़ा; भाई ने 4 बार जाकर लाश ढूंढी​​​​​ पंजाब के जालंधर से रूस गया युवक मनदीप 3 साल बाद ताबूत में लौटा। रूस-यूक्रेन युद्ध में उसकी 2024 में गोली लगने के बाद मौत हो गई। छोटे भाई जगदीप ने मनदीप को जिंदा ढूंढने का 4 बार प्रयास किया मगर असफल रहा। कभी रशियन लैंग्वेज, कभी पैसा, कभी सरकार की पॉलिसी भाई को ढूंढने में बाधा बनती रही (पढ़ें पूरी खबर) ]]></description>
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<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 13:51:29 +0530</pubDate>
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<media:keywords>पाकिस्तान, में, पंजाबी, महिला, सरबजीत, गिरफ्तार:भारत, डिपोर्ट, करने, की, तैयारी, सिख, जत्थे, के, साथ, गई, नूर, हुसैन, बनकर, मुस्लिम, व्यक्ति, से, निकाह, किया</media:keywords>
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<title>अमेरिका में भारतीय महिला की हत्या:एक्स बॉयफ्रेंड पर आरोप, उसी के अपार्टमेंट में शव मिला; आरोपी अर्जुन भागकर भारत आया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में न्यू ईयर से लापता एक भारतीय महिला का शव उसके एक्स बॉयफ्रेंड के अपार्टमेंट से बरामद हुआ है। महिला के शरीर पर चाकू से वार के निशान मिले हैं। पुलिस ने मामले में उसके एक्स बॉयफ्रेंड के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। हावर्ड काउंटी पुलिस के मुताबिक, 27 वर्षीय निकिता गोदिशाला का शव कोलंबिया इलाके में उसके एक्स बॉयफ्रेंड अर्जुन शर्मा के अपार्टमेंट से मिला। पुलिस ने अर्जुन शर्मा के खिलाफ फर्स्ट और सेकंड डिग्री मर्डर का गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस का कहना है कि अर्जुन शर्मा ने 2 जनवरी को निकिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन उसी दिन वह अमेरिका से भारत भाग गया। अधिकारियों को शक है कि 31 दिसंबर की शाम करीब 7 बजे अर्जुन ने निकिता की हत्या की। आरोपी के खिलाफ इंटरपोल की मदद लेने की तैयारी हॉवर्ड काउंटी पुलिस अमेरिकी फेडरल एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर अर्जुन की तलाश कर रही है। अमेरिकी अटॉर्नी ऑफिस इंटरपोल के जरिए रेड नोटिस जारी करने की तैयारी में है। रेड नोटिस जारी होने पर करीब 200 देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, को आरोपी की जानकारी दी जाती है, ताकि उसे गिरफ्तार किया जा सके। अमेरिका और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन आरोपी को भारत से वापस लाने की प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं। भारत के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा है कि वह निकिता के परिवार के संपर्क में है और हर संभव सहायता दी जा रही है। निकिता गोदिशाला कौन थीं निकिता एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल और डेटा एनालिटिक्स एक्सपर्ट थीं। उन्होंने भारत की जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ फार्मेसी (PharmD) की डिग्री ली थी। बाद में उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, बाल्टीमोर काउंटी से हेल्थ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में मास्टर्स किया था। पुलिस का कहना है कि अर्जुन और निकिता का रिश्ता खत्म हो चुका था, लेकिन वे संपर्क में थे। फिलहाल हत्या की वजह साफ नहीं हो पाई है। ------------------- ये खबर भी पढ़ें... कनाडा में भारतीय छात्र की हत्या, यूनिवर्सिटी में गोली मारी:कैंपस में सुरक्षा अलर्ट जारी, आरोपी फरार; 3 दिनों में 2 भारतीयों का मर्डर कनाडा में 23 दिसंबर को यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के पास भारतीय मूल के 20 वर्षीय छात्र शिवांक अवस्थी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मौके पर शिवांक अवस्थी को गोली लगी हालत में पाया और मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।संदिग्ध पुलिस के आने से पहले मौके से फरार हो गए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 13:51:29 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी से टकराव के बीच वेनेजुएला में कई धमाके:राजधानी काराकस में बिजली गुल; कल वेनेजुएला ने 5 अमेरिकी नागरिकों को गिरफ्तार किया था</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला की राजधानी काराकस में शनिवार सुबह कई धमाके हुए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज आवाजें सुनी गईं। शहर का दक्षिणी इलाका, जो एक बड़े सैन्य अड्डे के पास है, वहां बिजली भी गुल हो गई।

खबर अपडेट हो रही है... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:19:15 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान में 7 इमरान समर्थकों को आजीवन कारावास:यूट्यूबर, जर्नलिस्ट और आर्मी अफसर भी शामिल; पूर्व PM की गिरफ्तारी के बाद ऑनलाइन हिंसा भड़काई थी</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक माने जाने वाले 7 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामाला इमरान की गिरफ्तारी के बाद 2023 में हुए हिंसक प्रदर्शनों से जुड़ा है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, सातों पर राज्य संस्थानों के खिलाफ डिजिटल आतंकवाद में शामिल होने का मुकदमा चलाया गया। कोर्ट ने कहा कि इन लोगों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और अशांति भड़काने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्मों का इस्तेमाल किया। दोषी ठहराए गए लोगों में यूट्यूबर आदिल राजा, जर्नलिस्ट वजाहत सईद खान, साबिर शाकिर और शाहीन सहबाई, टेलीविजन एंकर हैदर रजा मेहदी, विश्लेषक मोईद पीरजादा और पूर्व सेना अधिकारी अकबर हुसैन शामिल हैं। यह फैसला इस्लामाबाद की एंटी-टेररिज्म कोर्ट के जज ताहिर अब्बास सिप्रा ने सुनाया। फिलहाल सभी आरोपी फरार हैं और मुकदमा चलाने के लिए पाकिस्तान नहीं लौटे, इसलिए ट्रायल उनकी गैरमौजूदगी में हुआ। अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि अगर वे पाकिस्तान लौटते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाए। इमरान समर्थकों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था यह मामला 9 मई 2023 का है, जब इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के समर्थकों ने उनकी गिरफ्तारी के विरोध में देशभर में बड़े प्रदर्शन किए थे। प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में सेना की इमारतों को आग लगाई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई शुरू की। पाकिस्तानी सरकार और सेना ने इमरान खान की पार्टी और विरोधी लोगों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है, आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल करते हुए सैकड़ों लोगों पर राज्य संस्थानों पर हमले और उकसाने के आरोप में मुकदमा चलाया गया है। फिलहाल विदेश में रह रहे हैं सभी दोषी अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इन सात लोगों ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर भडकाऊ भाषण दिए। राज्य विरोधी पोस्ट शेयर किए और राज्य संस्थाओं के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की। सजा पाने वाले सभी लोग इमरान सरकार हटने के बाद पाकिस्तान छोड़कर चले गए थे और फिलहाल विदेश में रह रहे हैं। कोर्ट 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया अदालत ने हर आरोपी को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने या छेड़ने की कोशिश और आपराधिक साजिश के दो आरोपों में आजीवन कारावास की सजा दी। अदालत ने अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कुल 35 वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा और हर आरोपी पर 15 लाख रुपए का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माने का भुगतान न करने पर छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। सभी दोषियों को सजा के खिलाफ इस्लामाबाद हाई कोर्ट में सात दिनों के अंदर अपील करने का अधिकार है। इस फैसले ने पाकिस्तान में प्रेस की आजादी और इमरान खान के समर्थकों पर कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जर्नलिस्ट सईद खान बोले- कभी समन नहीं भेजा गया, यह सब नाटक है अदालत के फैसले पर न्यूयॉर्क में रहने वाले जर्नलिस्ट सईद खान ने एक बयान में कहा कि उन्हें &quot;कभी कोई समन नहीं भेजा गया, कभी किसी कार्यवाही की सूचना नहीं दी गई, और अदालत ने कभी उनसे संपर्क नहीं किया।&quot; रॉयटर्स के मुताबिक उन्होंने कहा, &quot;यह फैसला न्याय नहीं है। यह एक राजनीतिक नाटक है, जिसे गलत तरीके से विश्वसनीयता के बिना संचालित किया जा रहा है।&quot; इमरान खान 2 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं इमरान खान पर 100 से ज्यादा केस चल रहे हैं और वे अगस्त 2023 से जेल में हैं। भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें सरकारी गिफ्ट (तोशाखाना केस) बेचने और सरकारी सीक्रेट लीक करने जैसे आरोप शामिल हैं। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अल-कादिर ट्रस्ट के लिए पाकिस्तान सरकार की अरबों रुपए की जमीन को सस्ते में बेच दिया था। इस मामले में इमरान को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पूरे मुल्क में फौज के कई अहम ठिकानों पर हमले हुए थे।​​​ पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने अल-कादिर ट्रस्ट केस में दिसंबर 2023 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी और अन्य 6 व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया था। हालांकि जब इमरान के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ, उससे पहले से ही वे तोशाखाना केस में अडियाला जेल में बंद थे। ​​​​ -------------------------- ये खबर भी पढ़ें... PAK नेता का दावा- जयशंकर खुद हाथ मिलाने आए: कहा- आपको पहचानता हूं; विदेश मंत्री ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से मिले थे पाकिस्तान संसद के स्पीकर अयाज सादिक ने दावा कि है कि भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर खुद उनसे हाथ मिलाने आए थे। यह मुलाकात 31 दिसंबर को ढाका में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम विदाई कार्यक्रम के दौरान हुई। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:19:15 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान ने चीन को संघर्ष रुकवाने का क्रेडिट दिया:चीन ने 4 दिन पहले कहा था&#45; हमने भारत&#45;PAK टकराव में मध्यस्थता की</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने चीन के &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान मध्यस्थता के दावे का समर्थन किया है। चीन के दावे से जुड़े सवाल के जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीनी नेता उन दिनों पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में थे। चीन के नेताओं ने भारतीय नेतृत्व से भी कुछ बातचीत की थी। पाकिस्तान का यह बयान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बयान के बाद आया है। वांग यी ने 30 दिसंबर को बीजिंग में कहा था कि चीन दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान भी चीन ने मध्यस्थता की थी। पाकिस्तान ने पहले ट्रम्प को संघर्ष सुलझाने का क्रेडिट दिया था पाकिस्तान सरकार ने ट्रम्प को नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया था। पाकिस्तान का कहना था कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ट्रम्प की कूटनीतिक पहल और मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की। पाकिस्तानी सरकार ने अपने ऑफिशियल स्टेटमेंट में कहा था कि ट्रम्प ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों से बात कर संघर्षविराम में अहम भूमिका निभाई। इससे दो न्यूक्लियर ताकत वाले देशों के बीच युद्ध की आशंका टल गई। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश को भी सराहा था। भारत पहले भी तीसरे पक्ष की भूमिका नकार चुका है चीन और ट्रम्प के दावों के उलट भारत सरकार पहले भी साफतौर पर कह चुकी है कि इस पूरे मामले में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। भारत का कहना है कि यह तनाव सीधे भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत से ही खत्म हुआ। भारत के मुताबिक, भारी नुकसान होने के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी ने भारतीय सैन्य अधिकारी से संपर्क किया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने भारतीय DGMO से बात की और इसके बाद दोनों देशों ने 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। चीन के इस नए दावे के बाद उसकी भूमिका को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत करीबी माने जाते हैं। चीन, पाकिस्तान को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला देश है, इसलिए उस पर सवाल उठते रहे हैं कि वह इस मामले में कितना निष्पक्ष रह सकता है। मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था चीन का यह बयान उस समय को लेकर है, जब इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे कुल मिलाकर 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचा था। भारत ने यह हमला 22 अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में पढ़ें.. चीन से रिश्ते बेहतर कर रहा पाकिस्तान पाकिस्तान लगातार चीन से रिश्ते बेहतर करने की कोशिश में जुटा है। पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन 2020 से अब तक पाकिस्तान को 36 J-10C लड़ाकू विमान दे चुका है। इसके अलावा दोनों देश मिलकर JF-17 फाइटर जेट बना रहे हैं। पाकिस्तान को चीनी ड्रोन और नौसैनिक उपकरण भी मिल रहे हैं। दिसंबर 2024 में चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त आतंकवाद-रोधी सैन्य अभ्यास भी किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भविष्य में पाकिस्तान में चीनी सैन्य ठिकाने बन सकते हैं, जिससे भारत की सीमाओं के पास चीन की मौजूदगी बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत से जुड़े मोर्चे को देखने वाली चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड ने 2024 में ऊंचाई वाले इलाकों में विशेष सैन्य अभ्यास किए। ----------------------- चीन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... अमेरिका की भारत को चेतावनी- चीन दोहरी चाल चल रहा: एक तरफ दिल्ली से रिश्ते सुधारने की कोशिश, दूसरी तरफ पाकिस्तान को हथियार दे रहा अमेरिका ने भारत को चीन की दोहरी रणनीति को लेकर चेतावनी दी है। पेंटागन की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन एक तरफ भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:19:15 +0530</pubDate>
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<title>ईरान में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों GenZ:सरकारी इमारत में तोड़फोड़ की, राजशाही वापस लाने की मांग; 3 लोग मारे गए</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में आर्थिक संकट और मंहगाई बढ़ने के कारण सरकार के खिलाफ पिछले 4 दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। दक्षिणी शहर फासा में प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी इमारत में घुसने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने जमकर तोड़फोड़ की। ईरानी न्यूज एजेंसी मीजान के अनुसार, प्रांतीय गवर्नर कार्यालय के मुख्य दरवाजे और शीशे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को दखल देना पड़ा, जिसके बाद 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 12 पुलिसकर्मी घायल हुए। राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया। कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं, जिससे कारोबार ठप हो गया। इसी दौरान ईरान की अर्धसैनिक बसीज फोर्स का 1 सैनिक और 2 अन्य युवाओं की मौत हुई है। इस घटना के बाद कई इलाकों में तनाव और बढ़ गया है। प्रदर्शन की तस्वीरें... ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। राष्ट्रपति बोले- विदेशी ताकतें देश में फूट डाल रही तेहरान में यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक क्षेत्रों में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब कई शहरों में फैल चुके हैं। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी मौलानाओं के शासन के खात्मे और राजशाही वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इन नारों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना साधा जा रहा था। कुछ वीडियो में लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते और उन्हें सत्ता सौंपने की मांग करते नजर आए। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हालात संभालने के लिए मोर्चा संभाला है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया और देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें देश में फूट डालकर अपना फायदा निकालना चाहती हैं। इस्लामिक क्रांति के बाद खुमैनी ने ईरान में मौलाना शासन की नींव रखी ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन ये प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में आंदोलन भड़क गया था। उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने पकड़ा था। इससे पहले सोमवार को तेहरान के कुछ इलाकों में हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा। कई देशों ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखा है... -------------------------- ये खबर भी पढ़ें... अमेरिका-इजराइल और यूरोप के साथ जंग की स्थिति में ईरान: राष्ट्रपति बोले- ये हमें घुटनों पर लाना चाहते, लेकिन अब हम पहले से ज्यादा मजबूत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि उनका देश अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ पूरी तरह से जंग की स्थिति में है। यह बयान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 10:47:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जिनपिंग बोले&#45; चीन&#45;ताइवान का एक होना तय:अमेरिका की चेतावनी &#45; चीन बेवजह तनाव बढ़ा रहा, ताकत से हालात बदलने की कोशिश नहीं करे</title>
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<description><![CDATA[ चीन और ताइवान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के भाषण में कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और दोनों के बीच खून का रिश्ता है। उन्होंने कहा कि चीन और ताइवान का एक होना समय की मांग है और इसे कोई रोक नहीं सकता। ताइवान की सरकार ने इसे बहुत उकसाने वाला कदम बताया और कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अशांति फैल सकती है। चीन हमेशा से कहता आया है कि ताइवान उसका हिस्सा है और जरूरत पड़ी तो सेना के दम पर उसे अपने साथ मिला लेगा। वहीं अमेरिका ने भी चीन की इस हरकत की आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन की बातें बेवजह तनाव बढ़ा रही हैं। अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ताइवान जलडमरूमध्य (ताइवान और चीन के बीच का समुद्री क्षेत्र) में मौजूदा शांति को भंग करने के किसी भी कदम का विरोध करता है। ट्रम्प बोले- जिनपिंग मेरे अच्छे दोस्त, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका पिछले कई दशकों से ताइवान की मदद करता आ रहा है ताकि वह अपनी रक्षा खुद कर सके। वहीं ट्रम्प ने चीन को लेकर नरम रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि वे चीन के सैन्य अभ्यासों से परेशान नहीं है। चीन पिछले 20 साल से ऐसे अभ्यास करता रहा है। ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनके अच्छे संबंध हैं और उन्हें लगता है कि चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा। चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास किया था चीन ने ताइवान के आसपास अपना सबसे बड़ा और सबसे करीबी सैन्य अभ्यास किया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के मुताबिक, इस अभ्यास में नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स को एक साथ तैनात किया गया है। इसका नाम &quot;जस्टिस मिशन 2025&quot; रखा गया। यह अभ्यास 29 और 30 दिसंबर 2025 को दो दिनों तक चला और 31 दिसंबर को खत्म हो गया। इसमें चीन की सेना ने दर्जनों रॉकेट दागे, सैकड़ों लड़ाकू विमान, नौसेना के जहाज और तटरक्षक बलों को तैनात किया। अभ्यास में ताइवान के मुख्य द्वीप को पूरी तरह घेरने और उसके प्रमुख बंदरगाहों की नाकाबंदी का अभ्यास किया गया, साथ ही समुद्री और हवाई लक्ष्यों पर सटीक हमले की प्रैक्टिस भी हुई। कुछ रॉकेट ताइवान के बहुत करीब, उसके क्षेत्रीय जलों के पास गिरे, जो अब तक का सबसे निकट अभ्यास था। चीनी सेना बोली- यह बाहरी देशों के दखल के खिलाफ चेतावनी चीनी सेना ने कहा है कि यह अभ्यास ताइवान की &#039;अलगाववादी ताकतों&#039; और बाहरी देशों के दखल के खिलाफ चेतावनी है। द गार्डियन ने डिफेंस एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया है कि इस बार चीन का अभ्यास पहले से ज्यादा बड़ा है और ताइवान के बेहद करीब किया जा रहा है। खासकर पूर्वी तट के पास बनाए गए सैन्य जोन को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिशा से संकट के समय ताइवान को अंतरराष्ट्रीय मदद मिल सकती है। ताइवान को अमेरिका से हथियार पैकेज मिलने से भड़का चीन चीन के इस युद्धाभ्यास की वजह अमेरिका और ताइवान के बीच हुई हथियारों की डील मानी जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को करीब 11.1 अरब डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा रक्षा पैकेज है। इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। इस डील से चीन भड़क गया। वह ताइवान को मिलने वाले किसी भी विदेशी सैन्य समर्थन को सीधे अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम मानता है। इसके चलते उसने 26 दिसंबर को अमेरिका की 20 डिफेंस कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। दूसरी ओर ​​​​​जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी 7 नंवबर को कहा था कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो जापान मदद के लिए अपनी सेना भेजेगा। चीन इससे बहुत नाराज हुआ था और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें... चीन ने ताइवान को पांच तरफ से घेरा, सैन्य-अभ्यास शुरू: जवाब में ताइवान ने काउंटर कॉम्बैट एक्सरसाइज लॉन्च की, तीनों सेनाएं भी अलर्ट पर चीन ने ताइवान को पांच तरफ से घेरते हुए बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। चीनी सेना ने ताइवान के उत्तर, उत्तर-पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी तट के पास अलग-अलग जोन बनाकर लाइव-फायर ड्रिल शुरू की है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 10:47:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प ने वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की, जवाब में वेनेजुएला ने 5 अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लिया</title>
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<description><![CDATA[ ट्रम्प प्रशासन ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की सरकार के खिलाफ सैन्य अभियान तेज किए हैं। इसके जवाब में वेनेजुएला भी बड़े पैमाने पर अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में ले रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये गिरफ्तारियां कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने के बीच हो रही हैं, जो सितंबर महीने से शुरू हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक 5 अमेरिकी मूल के नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि सभी मामलों की स्थितियां अलग-अलग हैं। कुछ गिरफ्तारियों में वैध आपराधिक आरोप लग सकते हैं, जबकि अमेरिकी प्रशासन दो अमेरिकियों को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया मानकर एक्शन लेने पर विचार कर रही है। अमेरिकी विदेश विभाग और कोलंबिया में अमेरिकी दूतावास ने इन गिरफ्तारियों पर कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं, सीएनएन को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि जांच जारी है कि ये अमेरिकी नागरिक गिरफ्तारी के समय वेनेजुएला में क्या कर रहे थे, और कुछ मामलों में ड्रग तस्करी के आरोप लग सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस सैन्य बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि यह अमेरिका में ड्रग्स आने से रोकने के लिए जरूरी है, और उन्होंने इसे ड्रग कार्टेल्स के साथ संघर्ष का हिस्सा बताया। अमेरिकी अधिकारियों ने मदुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप भी लगाए हैं। हाल के महीनों में अमेरिका ने ड्रग तस्करी में शामिल बताई जाने वाली नावों पर 30 से अधिक हमले किए हैं, ताकि नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को तोड़ा जा सके। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 10:47:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:मणिपुर&#45;मिजोरम के ब्नेई मेनाशे लोगों की इजराइल वापसी, इस साल 1200 जाएंगे; ₹250 करोड़ की इजराइली योजना मंजूर</title>
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<description><![CDATA[ मणिपुर और मिजोरम में बसे ब्नेई मेनाशे समुदाय के करीब 5,800 लोगों की इजराइल वापसी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इजराइली कैबिनेट द्वारा 250 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद चरणबद्ध तरीके से समुदाय को इजराइल ले जाया जाएगा। 2026 तक समुदाय के 1,200 लोग इजराइल भेजे जाएंगे। जबकि, 2030 तक पूरी &#039;घर वापसी&#039; का लक्ष्य रखा गया है। पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों में बसा यह समुदाय खुद को बाइबिल की &#039;दस खोई हुई जनजातियों&#039; में से मेनाशे का वंशज मानता है। 2700 साल पहले असिरियन निर्वासन के बाद वे पूर्व की ओर बढ़े और अंत में भारत में बस गए। इजराइल सरकार की नई योजना से उनकी &#039;घर वापसी&#039; तेज हो रही है। हालांकि इस तेजी के पीछे मणिपुर की जातीय हिंसा की त्रासदी भी छिपी बताई जा रही है। इजराइल में 1950 के दशक में दुनियाभर में यहूदी जड़ों की खोज शुरू हुई थी। इसके तहत 2005 में इजराइल के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने यहूदी परंपराओं का पालन करने वाले इस समुदाय को धार्मिक मान्यता दी। इजराइल इसे धार्मिक पुनर्मिलन मानता है। इसके अलावा, उसकी योजना इस समुदाया को गलील क्षेत्र में बसाने की है जिससे उसकी उत्तरी सीमा मजबूत होगी। ऐसे में आस्था, सुरक्षा और रणनीतिक अहमियत की संभावना के कारण ब्नेई मेनाशे को प्राथमिकता दी गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे महत्वपूर्ण जियोनिस्ट फैसला माना है। जाने वाले सदस्यों को इजराइल में शांति व सुकून की उम्मीद है। मिजोरम के कम्युनिटी लीडर जेरेमिया एल. ह्वामते कहते हैं, हम &#039;प्रॉमिस्ड लैंड&#039; लौट रहे हैं। हिंसा ने हमें मजबूर किया, पर यह हमारी जड़ों की पुकार है। एक युवा सदस्य ने कहा, &#039;यहां सुरक्षा नहीं, इजराइल में परिवार मिलन, नौकरी, आवास और हिब्रू शिक्षा मिलेगी।&#039; अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ीं अन्य बड़ी खबरें... दुनियाभर में न्यू ईयर का ग्रैंड वेलकम:चीन में शानदार लेजर लाइटिंग, इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया में जमकर आतिशबाजी; नीदरलैंड्स के ऐतिहासिक चर्च में आग लगी भारत समेत दुनियाभर में साल 2026 का आगाज हो चुका है। दिल्ली में इंडिया गेट पर लोगों ने काउंटडाउन के साथ नए साल का स्वागत किया, जबकि जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बीच जश्न मनाया गया। सबसे पहले न्यूजीलैंड ने 2026 में एंट्री की, जहां ऑकलैंड के स्काई टावर पर भव्य आतिशबाजी हुई। जापान, चीन, सिंगापुर, UAE, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में आतिशबाजी और पारंपरिक आयोजनों के साथ नया साल मनाया गया। अलग-अलग टाइम जोन के कारण भारत से पहले 29 देशों में 2026 का स्वागत हुआ। नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम में नए साल के जश्न के दौरान ऐतिहासिक वोंडेल चर्च में आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने के बाद इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 10:39:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दो कुरान लेकर मेयर पद की शपथ लेंगे ममदानी:एक उनके दादा की, दूसरी पॉकेट साइज; न्यूयॉर्क के इतिहास में ऐसा पहली बार</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय मूल के नवनिर्वाचित न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी गुरुवार को दो कुरान पर हाथ रखकर पद की शपथ लेंगे। न्यूयॉर्क के इतिहास में यह पहली बार होगा जब कोई मेयर इस्लाम के पवित्र ग्रंथ पर शपथ लेगा। अब तक न्यूयॉर्क सिटी के अधिकतर मेयर बाइबिल पर शपथ लेते रहे हैं। हालांकि संविधान के तहत शपथ के लिए किसी धार्मिक ग्रंथ का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है। 34 साल के डेमोक्रेट ममदानी न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और पहले अफ्रीका में जन्मे मेयर होंगे। डेमोक्रेट्स की टीम आज दो अलग-अलग जगहों पर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की योजना बना रही है। ममदानी सबसे पहले न्यूयॉर्क के सिटी हॉल के नीचे स्थित एक बंद पड़ी सबवे स्टेशन में शपथ लेंगे। यह एक प्राइवेट समारोह होगा, जिसमें ममदानी का परिवार शामिल होगा। उसके बाद दोपहर में एक सार्वजनिक शपथ ग्रहण समारोह होगा। सबवे स्टेशन में होने वाले समारोह में ममदानी दो कुरानों पर हाथ रखेंगे। इनमें एक उनके दादा की कुरान और दूसरी जेब में रखी जाने वाली छोटी कुरान होगी। कहा जा रहा है कि पॉकेट साइज कुरान 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की की है। यह कुरान न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के संग्रह का हिस्सा है। दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में ममदानी अपने दादा और दादी, दोनों की कुरानों का इस्तेमाल करेंगे। इन कुरानों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। शपथ ग्रहण के लिए कुरान का चयन ममदानी की पत्नी रमा दुवाजी ने किया है। इस काम में उनकी मदद करने वाली एक स्कॉलर के अनुसार, शपथ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ये कुरान शहर की बड़ी और लंबे समय से मौजूद मुस्लिम आबादी को दर्शाता है। बता दें कि चुनाव अभियान के दौरान ममदानी ने महंगाई को प्रमुख मुद्दा बनाया था। साथ ही उन्होंने अपने धार्मिक विश्वास भी खुलकर सामने रखे। उन्होंने शहर के मस्जिदों का दौरा किया और पहली बार मतदान करने वाले कई दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन हासिल किया। शपथ में इस्तेमाल होने वाली कुरान का इतिहास शॉम्बर्ग सेंटर में मौजूद पॉकेट साइज कुरान अश्वेत प्यूर्टो रिकन इतिहासकार आर्तुरो शॉम्बर्ग के संग्रह का हिस्सा थी। यह स्पष्ट नहीं है कि यह कुरान ममदानी के पास कैसे पहुंची, लेकिन स्कॉलर्स का मानना है कि यह अमेरिका और अफ्रीका में इस्लाम और अश्वेत संस्कृतियों के ऐतिहासिक संबंधों में उनकी रुचि को दर्शाती है। यह कुरान सादे डिजाइन की है। कुरान पर गहरे लाल रंग की जिल्द लगी है और फूलों की आकृति बनी है। अंदर काले-लाल स्याही में लिखा गया है। इससे पता चलता है कि इसे सिर्फ प्रदर्शनी के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था। चूंकि कुरान पर तारीख या लेखक का नाम नहीं है, इसलिए इसकी उम्र का अनुमान इसके लेखन और जिल्द के आधार पर लगाया गया। माना जाता है कि यह उस्मानी दौर में, 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत में तैयार हुई, उस क्षेत्र में जो आज के सीरिया, लेबनान, इजराइल, फिलिस्तीनी इलाके और जॉर्डन में शामिल है। न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी की क्यूरेटर हिबा आबिद के अनुसार, इस कुरान की न्यूयॉर्क तक की यात्रा ममदानी के बैकग्राउंड से मेल खाती है। ममदानी भारतीय मूल के न्यूयॉर्कवासी हैं, जिनका जन्म युगांडा में हुआ, जबकि उनकी पत्नी अमेरिकी-सीरियाई हैं। 4 नवंबर 2025: ममदानी ने न्यूयॉर्क मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा ममदानी ने 4 नवंबर को न्यूयॉर्क शहर के मेयर का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया था। ममदानी पिछले 100 सालों में न्यूयॉर्क के सबसे युवा, पहले भारतवंशी और पहले मुस्लिम मेयर हैं। ममदानी मानसून वेडिंग और सलाम बॉम्बे जैसी फिल्में डायरेक्ट करने वाली भारतीय मूल की मीरा नायर के बेटे हैं। चुनाव में जीत के बाद ममदानी ने ब्रुकलिन पैरामाउंट थिएटर में समर्थकों को संबोधित किया था। अपनी विक्ट्री स्पीच में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को दिए गए &#039;ट्रिस्ट विद डेस्टिनी&#039; का जिक्र किया था। इस दौरान उनकी पत्नी रामा दुवाजी, पिता महमूद ममदानी और मां मीरा नायर भी मौजूद थे। भाषण के बाद &#039;धूम मचा ले&#039; गाने पर झूमे ममदानी ममदानी ने भाषण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की इमिग्रेशन नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा था- न्यूयॉर्क इमिग्रेंट्स का शहर है। इस शहर को प्रवासियों ने बनाया, उन्होंने मेहनत से इसे चलाया, और आज से, यह शहर प्रवासी ही चलाएगा। यह हमारी पहचान है और हम इसे बचाएंगे।&#039; भाषण के बाद वे अपनी पत्नी के साथ &#039;धूम मचा ले&#039; गाने पर झूमते नजर आए। मां मीरा नायर ने मंच पर आकर उन्हें गले लगा लिया। पिता महमूद ममदानी भी मौजूद रहे। पूरी खबर यहां पढ़ें... ---------------------------- ममदानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें... भारतवंशी मेयर ममदानी दैनिक भास्कर से बोले- भारतीय विरासत मेरी पहचान, इससे दुनिया को देखता हूं न्यूयॉर्क सिटी के नव-निर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी का कहना है कि उनकी पहली पहचान भारतीय विरासत है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा- भारतीय विरासत मुझे सांस्कृतिक विविधता, लोकतंत्र, राजनीतिक सत्ता और माइग्रेशन के बारे में दुनिया को देखने का नजरिया देती है। भारत हमेशा से मेरे दिल के करीब रहा है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 10:39:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दलाई लामा ने नववर्ष पर दिया प्रेम का संदेश:दुनिया को अधिक समान और मानवीय बनाने का संकल्प लें, करुणामय इंसान बनें</title>
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<description><![CDATA[ नववर्ष के अवसर पर तिब्बत के 14वें दलाई लामा ने मानवता को करुणा, संवेदनशीलता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे नववर्ष की शुभकामनाएं देते समय अधिक ईमानदार, करुणामय और गर्मजोशी से भरे इंसान बनने का संकल्प लें। दलाई लामा ने स्पष्ट किया कि यदि हम अपने व्यवहार और सोच में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, तो ही दुनिया को एक अधिक समान और न्यायपूर्ण स्थान बनाया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत स्तर पर अपनाई गई करुणा और जिम्मेदारी ही समाज और विश्व में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखती है। उनके इस नववर्ष संदेश को शांति, सहअस्तित्व और मानवीय मूल्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण आह्वान के रूप में देखा जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 10:39:15 +0530</pubDate>
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<title>यमन से सैनिक वापस बुलाएगा UAE:आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई भी बंद की; सऊदी ने कल यहां हवाई हमला किया था</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने यमन से अपनी सेना वापस बुलाने का फैसला किया है। UAE ने कहा है कि वह यमन में चल रहे अपने आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन को खत्म कर रहा है। यह फैसला ऐसे समय किया गया है जब सऊदी अरब ने UAE पर यमन के अलगाववादी गुट STC को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। इससे पहले यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने UAE से कहा था कि वह 24 घंटे के भीतर अपनी सेना यमन से हटा ले। इस मांग को सऊदी अरब का भी समर्थन मिला था। इसके कुछ ही समय बाद UAE ने अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा कर दी। सऊदी अरब की लीडरशिप वाले गठबंधन ने कल यमन के मुकल्ला पोर्ट पर हमला किया था। सऊदी का कहना था कि मुकल्ला पोर्ट पर जो जहाज पहुंचा था, उसमें UAE से हथियार भेजे गए थे। सऊदी ने आरोप लगाया था कि ये हथियार यमन के दक्षिणी हिस्से में एक्टिव अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को दिए जाने थे। STC पहले यमन की सरकार के साथ मिलकर हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहा था, लेकिन इस महीने उसने सऊदी समर्थित सरकारी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। STC का कहना है कि वह यमन के दक्षिणी हिस्से को एक अलग देश बनाना चाहता है। सऊदी ने ऑपरेशन का एक वीडियो भी जारी किया था 
 UAE ने सऊदी अरब के आरोपों को गलत बताया हालांकि UAE ने सऊदी अरब के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। UAE के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यमन भेजी गई खेप में हथियार नहीं थे, बल्कि व्हीकल थे, जिनका इस्तेमाल वहां मौजूद UAE के सैनिक करने वाले थे। UAE के मंत्रालय ने यह भी कहा कि हम यमन की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और वहां आतंकवाद से लड़ने एवं वैध सरकार को बहाल करने के पक्ष में है। UAE ने पहले भी कहा था कि यमन का भविष्य और उसकी बॉर्डर यमन के लोग ही तय करें। यमन ने UAE से डिफेंस डील रद्द की मुकल्ला पर हुए हवाई हमले के बाद यमन सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ किया गया रक्षा समझौता भी रद्द कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने हालात पर नियंत्रण के लिए 72 घंटे की हवाई, थल और समुद्री नाकाबंदी लागू करने और 90 दिनों के लिए आपातकाल घोषित करने का फैसला किया है। हालांकि अल-अलीमी ने अलगाववादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सऊदी अरब के समर्थन की सराहना की और कहा कि यह कदम यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के हित में है। सऊदी ने यमन पर हमला क्यों किया? सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन है, जिसे UAE का समर्थन प्राप्त है। STC का मकसद यमन को उत्तर और दक्षिण दो अलग देशों में बांटना है। इसके बाद वह दक्षिणी यमन में अलग सरकार बनाना चाहता है। यमन 1990 से पहले दो हिस्सों उत्तरी और दक्षिणी यमन में बंटा हुआ था। दोनों के एकीकरण के बाद भी दक्षिण में अलगाव की भावना बरकरार है। पिछले एक महीने में STC ने यमन में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए थे। STC की फौजों ने हद्रामौत और अल-मह्रा जैसे तेल और गैस-समृद्ध इलाकों पर कब्जा कर लिया। इस वजह से यमन सरकार की सुरक्षा बलों और स्थानीय कबीलों को पीछे हटना पड़ा। कई इलाकों में हिंसा और मौतों की खबरें आईं दिसंबर के मध्य तक STC ने कई अहम तेल और गैस क्षेत्रों पर नियंत्रण का दावा किया। दक्षिणी अबयान प्रांत में नए सैन्य अभियान की घोषणा की। 15 दिसंबर को STC ने अबयान के पहाड़ी इलाकों में बड़ा हमला किया। इसके जवाब में सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब इलाके में चेतावनी के तौर पर हवाई हमले किए। सऊदी ने साफ कहा कि अगर STC पीछे नहीं हटा, तो आगे और कड़ी कार्रवाई होगी। मुकल्ला पोर्ट पर हमला उसी चेतावनी की अगली कड़ी माना जा रहा है। 1. हूती विद्रोही- हूती विद्रोही खुद को अंसार अल्लाह मतलब अल्लाह के मददगार कहते हैं। इसे ईरान का समर्थन मिलता है। 2. यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज- यह बल हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ता है और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थक माना जाता है। इसे सऊदी अरब व यूएई का समर्थन हासिल है। 3. हदरामी एलीट फोर्सेज- इस बल को UAE का समर्थन हासिल है और इसका मकसद अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करना रहा है। 4. सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल- यह संगठन दक्षिणी यमन की आजादी की मांग करता है। इसे UAE का समर्थन मिलता है। यमन को लेकर सऊदी अरब और UAE के रिश्तों में क्यों आई खटास यमन युद्ध के शुरुआती दौर में सऊदी अरब और UAE एक साथ थे। 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। हूती विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए 2015 में सऊदी के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन बना था। UAE भी इस गठबंधन का हिस्सा था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ समय के बाद UAE ने यमन में सऊदी से अलग अपनी नीति अपनानी शुरू कर दी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि UAE की दिलचस्पी यमन के बंदरगाहों, समुद्री रास्तों और रणनीतिक तटीय इलाकों में है। लड़ाई इन्ही पर नियंत्रण को लेकर हो रही है। कतर की हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुल्तान बरकत के मुताबिक, “UAE बंदरगाहों को विकसित करना नहीं चाहता, बल्कि यह यह चाहता है कि जेबेल अली पोर्ट पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे अहम बंदरगाह बना रहे। ताकि इलाके में UAE का दबदबा बरकरार रहे।” यमन में 2014 में शुरू हुआ था गृह युद्ध यमन में हूती विद्रोहियों ने 2014 में सऊदी के समर्थन वाली सरकार को हटा दिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी के नेतृत्व वाले मिलिट्री अलायंस ने ईरान समर्थित हूतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस जंग में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई। इसके बाद यमन की 80% जनता मानवीय सहायता पर निर्भर हो गई। यमन में गृह युद्ध की मुख्य वजह शिया और सु्न्नी विवाद था। दरअसल यमन की कुल आबादी में 35% की हिस्सेदारी शिया समुदाय की है जबकि 65% सुन्नी समुदाय के लोग रहते हैं। कार्नेजी मिडल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों समुदायों में हमेशा से विवाद रहा था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत हुई तो गृह युद्ध में बदल गया। देखते ही देखते हूती के नाम से मशहूर विद्रोहियों ने देश के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। 2015 में हालात ये हो गए थे कि विद्रोहियों ने पूरी सरकार को निर्वासन में जाने पर मजबूर कर दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 13:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>यमन, से, सैनिक, वापस, बुलाएगा, UAE:आतंकियों, के, खिलाफ, कार्रवाई, भी, बंद, की सऊदी, ने, कल, यहां, हवाई, हमला, किया, था</media:keywords>
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<title>अब चीन का दावा&#45; हमने भारत&#45;पाक संघर्ष रुकवाया:कई लड़ाइयां सुलझाने में मदद की; भारत बोला&#45; सीजफायर में तीसरे पक्ष का रोल नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बाद अब चीन ने भी यह दावा किया है कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को कम कराने में भूमिका निभाई थी। चीन का कहना है कि जब इस साल दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ गए थे, तब उसने बीच में आकर तनाव कम करने की कोशिश की। मंगलवार को बीजिंग में आयोजित एक कार्यक्रम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान भी चीन ने मध्यस्थता की थी। चीन के विदेश मंत्रालय ने उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर शेयर किया। भारत सरकार ने चीन के इस दावे को खारिज किया है। भारत ने कहा है कि संघर्ष को रुकवाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं है। चीन का यह बयान उस समय को लेकर है, जब इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे कुल मिलाकर 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचा था। भारत ने यह हमला 22 अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। भारत पहले भी तीसरे पक्ष की भूमिका नकार चुका है चीन और ट्रम्प के दावों के उलट भारत सरकार पहले भी साफ तौर पर कह चुकी है कि इस पूरे मामले में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी। भारत का कहना है कि यह तनाव सीधे भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत से ही खत्म हुआ। भारत के मुताबिक, भारी नुकसान होने के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी ने भारतीय सैन्य अधिकारी से संपर्क किया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस ने भारतीय DGMO से बात की और इसके बाद दोनों देशों ने 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। चीन के इस नए दावे के बाद उसकी भूमिका को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत करीबी माने जाते हैं। चीन, पाकिस्तान को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला देश है, इसलिए उस पर सवाल उठते रहे हैं कि वह इस मामले में कितना निष्पक्ष रह सकता है। चीन ने फर्जी जानकारी फैलाने की कोशिश की थी नवंबर में आई एक अमेरिकी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स के जरिए AI से बनाई गई झूठी तस्वीरें फैलाई गईं, जिनका मकसद भारत द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमानों की छवि को नुकसान पहुंचाना और चीन के अपने J-35 विमान को बढ़ावा देना था। कूटनीतिक स्तर पर देखें तो जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, उसी दिन चीन ने संयम बरतने की अपील की थी। हालांकि, चीन ने भारत की सैन्य कार्रवाई पर चिंता भी जताई थी और कहा था कि वह हालात पर नजर बनाए हुए है। आतंकियों के ठिकानों पर हमले से शुरुआत भारत ने पाकिस्तान पर हमले की शुरुआत 6 और 7 मई की रात से की। भारत ने पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया था। इन ठिकानों में पाकिस्तान के पंजाब राज्य के बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके भी शामिल थे। इसके जवाब में 8 मई की शाम को पाकिस्तान ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला करने की कोशिश की। उसने तुर्किये और चीन के ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन इसमें उसे कामयाबी नहीं मिली। भारत की वायु रक्षा पूरी तरह से एक्टिव थी और छोटे हथियारों से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम तक हर हथियार तैयार था। इन हथियारों ने पाकिस्तान के ड्रोन को काफी नुकसान पहुंचाया। भारतीय सेना ने भी सीमा के दूसरी तरफ भारी तोपों और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह से उलझा कर रखा और उसे बड़ा नुकसान पहुंचाया। ------------ यह खबर भी पढ़ें... पाकिस्तान बोला-नूरखान एयरबेस में भारत ने 80 ड्रोन दागे थे:इससे कई सैनिक घायल हुए; ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 11 एयरबेस तबाह किए थे पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने शनिवार को एक बार फिर माना कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में उसके नूरखान एयरबेस पर बड़ा ड्रोन हमला किया था। डार ने कहा कि भारत ने 36 घंटे के अंदर पाकिस्तान की तरफ 80 ड्रोन भेजे थे। इस हमले में कई सैनिक घायल हुए थे और सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<title>बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का अंतिम संस्कार आज:पति की कब्र के पास दफनाया जाएगा; श्रद्धांजलि देने विदेशमंत्री जयशंकर ढाका पहुंचे</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया का अंतिम संस्कार आज ढाका में किया जाएगा। खालिदा को संसद परिसर में उनके पति और बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के पास दफनाया जाएगा। उनका 80 साल की उम्र में मंगलवार सुबह निधन हो गया था। वे पिछले करीब 20 दिनों से वेंटिलेटर पर थीं। खालिदा जिया के निधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी आधिकारिक कार्यक्रम स्थगित रहेंगे। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, समर्थक और आम लोग शामिल होने की संभावना है। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर अंतिम संस्कार में शामिल होने ढाका पहुंच गए हैं। वे भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए खालिदा जिया को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 13:00:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>सलमान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान पर चीन में नाराजगी:कहा&#45; ट्रेलर हकीकत से हटकर, चीनी मीडिया बोली&#45; अभी इसका रिलीज होना गलत</title>
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<description><![CDATA[ सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर चीन में आलोचना शुरू हो गई है। इस फिल्म के दृश्यों को हकीकत से अलग बताया जा रहा है। कई लोग इसके ट्रेलर के कुछ सीन को हॉलीवुड के गेम ऑफ थ्रोन्स के दृश्य से तुलना कर रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने इस फिल्म को लेकर एक आर्टिकल भी छपा है, जिसका टाइटल है- ‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म पर विवाद, फिल्म चाहे कितनी भी नाटकीय हो, देश की सीमा पर असर नहीं डाल सकती अखबार एक चीनी एक्सपर्ट के हवाले से लिखता है कि जब चीन और भारत के रिश्तों में सुधार हो रहा है तो इस फिल्म का रिलीज होना गलत है। यह फिल्म सिर्फ भारतीय नजरिया को पेश कर चीन विरोधी भावना बढ़ा सकती है। सलमान के हेयर स्टाइल की भी आलोचना बैटल ऑफ गलवान का ट्रेलर 27 दिसंबर को सलमान खान के जन्मदिन पर रिलीज हुआ था। यह फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई झड़प पर आधारित बताई जा रही है। सलमान इसमें कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सलमान खान की ड्रेस और उनकी हेयर स्टाइल को लेकर भी आलोचना की गई है। चीनी एक्सपर्ट्स का कहना है कि बॉलीवुड फिल्में मनोरंजन के लिए होती हैं, लेकिन वे इतिहास नहीं बदल सकतीं। अखबाल ने लिखा- फिल्म फैक्ट्स बदल नहीं सकता चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से लिखा कि भारत में फिल्मों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन कोई भी फिल्म गलवान झड़प के फैक्ट को नहीं बदल सकती। सॉन्ग ने कहा कि पहले भारतीय सैनिकों ने सीमा पार की थी, जिसके जवाब में चीनी सैनिकों ने चीनी बॉर्डर की रक्षा की। उन्होंने कहा कि चीनी सेना राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा में कभी पीछे नहीं हटेगी। सॉन्ग ने यह भी कहा कि ऊंचाई वाले इलाकों में चीनी सैनिक हमेशा अपने कर्तव्य निभाते हैं और चुनौतियों का सामना करते हैं, जिससे जनता का विश्वास बढ़ता है। गलवान की घटना चीनी समाज में बहुत शिद्दत से याद की जाती है और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करती है। अखबार ने लिखा- भारतीय सैनिक झड़प के जिम्मेदार ग्लोबल टाइम्स ने गलवान घटना का दोष भारतीय सैनिकों पर दिया है। अखबार लिखता है कि गलवान घाटी चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से में LAC के चीनी हिस्से में है। हिंसक झड़प से पहले भी कई सालों से चीनी सैनिक यहां पेट्रोलिंग और ड्यूटी कर रहे थे। अप्रैल 2020 से भारतीय सैनिकों ने LAC पर सड़कें, पुल और अन्य सुविधाएं बनानी शुरू की। चीन ने कई बार विरोध जताया, लेकिन भारत ने LAC पार की और उकसावे वाली हरकत की। चीनी अखबार लिखता है कि 6 मई 2020 की सुबह भारतीय सैनिक रात में LAC पार कर चीन के इलाके में घुसे और वहां किलेबंदी और बैरिकेड बनाकर चीनी सैनिकों की पेट्रोलिंग में रुकावट डाली। चीनी सैनिकों को स्थिति को संभालने और सीमा पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने पड़े। ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि चीन ने 2021 में गलवान झड़प की पूरी डिटेल्स शेयर की, ताकि शहीदों का सम्मान किया जा सके। उस समय के रक्षा मंत्रालय प्रवक्ता रेन गुओकियांग ने कहा कि झड़प की जिम्मेदारी भारतीय सेना की थी, क्योंकि उन्होंने अवैध रूप से LAC पार की और चीनी सैनिकों पर हमला किया। चीन ने 4 सैनिकों के मारे जाने की बात कबूली थी चीन सरकार के मुताबिक इस झड़प में 4 चीनी अधिकारी और सैनिक शहीद हुए और एक गंभीर रूप से घायल हुआ। हालांकि चीन के इस दावे पर दुनियाभर में शक जताया जाता है। ऑस्ट्रेलिया की न्यूज साइट &#039;द क्लैक्सन&#039; ने फरवरी 2022 में अपनी एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में दावा किया था कि गलवान झड़प में चीन को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ था। यह रिपोर्ट सैटेलाइट इमेज, चीनी सोशल मीडिया डेटा और स्वतंत्र रिसर्च पर आधारित थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक गलवान हिंसक संघर्ष में चीन के 4 नहीं बल्कि 38 सैनिक मारे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक कई चीनी सैनिक गलवान नदी में डूबकर मारे गए थे। इससे पहले, चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो ने भी उस रात 38 चीनी सैनिकों के नदी में बहने की बात कही थी, लेकिन चीनी अधिकारियों इन सभी पोस्ट को हटवा दिया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने गलवान का सच छिपाने के लिए दो अलग-अलग घटनाओं को आपस में जोड़कर पेश किया। चीन ने गलवान में मारे गए अपने सैनिकों की सही संख्या कभी नहीं बताई और झड़प में मारे गए कुल 4 सैनिकों को पिछले साल मेडल देने का ऐलान किया। अमेरिकी अखबार &#039;न्यूज वीक&#039; ने भी 2021 में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी, जिसमें दावा किया गया था कि 15 जून 2020 को गलवान में हुई झड़प में 60 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए। गलवान झड़प से जुड़े 7 अहम फैक्ट्स  -------------------------------------- भारत-चीन से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें... हिमालय तक सड़क, सुरंगें और एयरस्ट्रिप बना रहा भारत:अमेरिकी मीडिया का दावा- गलवान झड़प के बाद निर्माण; बॉर्डर तक हथियारों की पहुंच आसान होगी भारत हिमालयी इलाके में चीन से होने वाली किसी भी संभावित झड़प से निपटने के लिए सड़कें, सुरंगें और हवाई पट्टियां बनाने पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:09:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; ईरान पर फिर हमला करेंगे:कहा&#45; दोबारा न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू न करे; हमास को भी जल्द हथियार छोड़ने की चेतावनी दी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने को कहा है कि अगर ईरान दोबारा अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को शुरू करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उस पर एक और बड़ा हमला कर सकता है। इसके साथ ही ट्रम्प ने फिलिस्तीनी संगठन हमास को चेतावनी दी कि अगर उसने हथियार नहीं डाले, तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ट्रम्प ने इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ सोमवार रात मुलाकात के दौरान पत्रकारों से यह कहा। ट्रम्प बोले- ईरान क्या कर रहा, मुझे पूरी जानकारी
ट्रम्प ने कहा कि उन्हें आशंका है कि जून में किए गए बड़े अमेरिकी हमले के बाद ईरान अपने हथियार कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स में इस तरह के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प ने कहा, “मैं ऐसी खबरें पढ़ रहा हूं कि वे फिर से हथियार और दूसरी सैन्य क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। अगर वाकई ऐसा हो रहा है, तो वे उन ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं जिन्हें हमने पूरी तरह नष्ट कर दिया था, बल्कि किसी दूसरी जगह से यह काम कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमें पूरी जानकारी है कि वे कहां जा रहे हैं और क्या कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि वे ऐसा रास्ता नहीं अपनाएंगे, क्योंकि हम B-2 बॉम्बर पर ईंधन खर्च नहीं करना चाहते। इसमें दोनों ओर से मिलाकर करीब 37 घंटे की उड़ान होती है, और मैं इस तरह ईंधन की बर्बादी नहीं चाहता।” अमेरिका का सबसे ताकतवर फाइटर जेट है B-2 B-2 अमेरिका का सबसे आधुनिक और ताकतवर स्टेल्थ बॉम्बर है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ बेहद गंभीर और बड़े सैन्य अभियानों में किया जाता है। जून में ईरान पर हुए अमेरिकी हमले में भी इसी का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए ट्रम्प उसी कार्रवाई की याद दिला रहे थे। B-2 स्टेल्थ बॉम्बर की सटीक ईंधन खपत सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन माना जाता है कि B-2 बॉम्बर औसतन हर घंटे करीब 20 हजार से 25 हजार किलोग्राम जेट फ्यूल खर्च करता है। 37 घंटे की उड़ान हो, तो इसमें लगभग 7 लाख 40 हजार से 9 लाख 25 हजार किलोग्राम तक ईंधन खर्च हो सकता है। यानी एक ही मिशन में करीब 750 से 900 टन जेट फ्यूल जल जाता है। इतनी मात्रा में ईंधन की खपत हजारों सामान्य यात्री विमानों की उड़ानों के बराबर मानी जाती है और इसकी लागत करोड़ों डॉलर तक पहुंच जाती है। इसी भारी खर्च की ओर इशारा करते हुए ट्रम्प ने कहा था कि वह बी-2 बॉम्बर पर ईंधन ‘बर्बाद’ नहीं करना चाहते। ट्रम्प बोले- हमास को हथियार छोड़ने का बहुत कम वक्त देंगे ट्रम्प ने बताया कि नेतन्याहू के साथ हुई चर्चा का मुख्य फोकस गाजा में लागू नाजुक शांति समझौते को आगे बढ़ाने, ईरान को लेकर इजराइल की सुरक्षा चिंताओं और लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े मुद्दों पर रहा। उन्होंने कहा कि गाजा में लागू युद्धविराम के तहत इजराइल अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। ट्रम्प ने कहा, “हमने हमास को लेकर बातचीत की और निरस्त्रीकरण पर भी चर्चा हुई। हमास को हथियार छोड़ने के लिए बहुत कम समय दिया जाएगा और फिर देखा जाएगा कि हालात किस दिशा में जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर हमास ने हथियार नहीं डाले, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन यह साफ है कि नतीजे गंभीर होंगे।” इस बयान पर हमास की ओर से फिलहाल कोई रिएक्शन नहीं आया है। ट्रम्प ने तुर्किये और सीरिया पर भी चर्चा की ट्रम्प ने कहा था कि वह गाजा में तुर्किये के पीस फोर्स तैनात करने की संभावना पर नेतन्याहू से बात करेंगे। यह मुद्दा संवेदनशील है। ट्रम्प जहां तुर्किये के राष्ट्रपति तैयप एर्दोआन की अक्सर तारीफ करते हैं, वहीं इजराइल और तुर्किये के रिश्ते उतने सहज नहीं हैं। हालांकि गाजा में लड़ाई कम हुई है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अक्टूबर में संघर्षविराम लागू होने के बाद भी इजराइली हमलों में 400 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक हैं, ऐसा गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है। वहीं फिलिस्तीनी लड़ाकों ने तीन इजराइली सैनिकों को भी मार डाला है। नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि इजराइल सीरिया के साथ शांतिपूर्ण सीमा चाहता है। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि इजराइल, राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ तालमेल बिठा लेगा, जिन्होंने पिछले साल लंबे समय से सत्ता में रहे बशर अल-असद के हटने के बाद सत्ता संभाली। हालांकि, इजराइल नए सीरियाई नेता को लेकर सतर्क है। अल-शरा कभी अल-कायदा से जुड़े रहे थे। इसी शक के चलते इजराइल ने जुलाई में दमिश्क में सरकारी इमारतों पर बमबारी भी की थी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:09:44 +0530</pubDate>
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<media:keywords>ट्रम्प, बोले-, ईरान, पर, फिर, हमला, करेंगे:कहा-, दोबारा, न्यूक्लियर, प्रोग्राम, शुरू, न, करे, हमास, को, भी, जल्द, हथियार, छोड़ने, की, चेतावनी, दी</media:keywords>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:प्रशांत महासागर में एक नाव पर अमेरिकी सेना का हमला, दो लोगों की मौत, ड्रग तस्करी का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की सेना ने सोमवार को पूर्वी प्रशांत महासागर में एक नाव पर हमला किया, जिस पर ड्रग तस्करी करने का शक था। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई। अमेरिका की साउदर्न कमांड ने इसकी जानकारी दी है। सेना के मुताबिक यह हमला इंटरनेशनल समुद्री सीमा में किया गया और इसमें किसी भी अमेरिकी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। अमेरिकी साउदर्न कमांड ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह कार्रवाई रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के आदेश पर की गई। सेना का कहना है कि जिस नाव को निशाना बनाया गया, वह प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी हुई थी और ड्रग तस्करी में इस्तेमाल हो रही थी। अमेरिका ने इस हमले को &#039;ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर&#039; का हिस्सा बताया है, जिसका मकसद समुद्र के रास्ते होने वाली नशीली दवाओं की तस्करी को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक इस ऑपरेशन के तहत अब तक ड्रग तस्करी से जुड़ी नावों पर किए गए हमलों में 107 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका ने इन लोगों को &#039;गैरकानूनी लड़ाके&#039; बताया है और कहा है कि एक सीक्रेट कानूनी फैसले के तहत वह बिना अदालत की इजाजत के ऐसे हमले कर सकता है। इसी वजह से इन कार्रवाइयों पर सवाल भी उठ रहे हैं। इन हमलों को लेकर अमेरिकी संसद के कुछ सदस्य और मानवाधिकार संगठन चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों को मारना गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए। इससे पहले 22 दिसंबर को भी अमेरिका ने इसी इलाके में एक छोटी नाव पर हमला किया था, जिस पर ड्रग तस्करी का आरोप था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... अमेरिका में कार हादसे में 2 भारतीय छात्राओं की मौत, मास्टर्स की पढ़ाई कर रहीं थीं अमेरिका के कैलिफोर्निया में रविवार को हुए भीषण सड़क हादसे में दो छात्राओं की मौत हो गई। उनकी पहचान तेलंगाना के महबूबाबाद जिले के गरला की पुलखंडम मेघना रानी (25) और मुल्कानूर की कडियाला भावना (24) के रूप में हुई है। मेघना और भावना अपने दोस्तों के साथ अलबामा हिल्स इलाके में घूमने गई थीं। कुल 8 दोस्त दो अलग-अलग कारों में घूम रहे थे। एक मोड़ पर उनकी कार का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी घाटी में जा गिरी। दोनों तीन साल पहले मास्टर्स की पढ़ाई के लिए अमेरिका गई थी। उन्होंने हाल ही में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की थी और नौकरी की तलाश कर रही थीं। बांग्लादेश की पहली महिला PM खालिदा जिया का निधन:20 दिन से वेंटिलेटर पर थीं, किडनी की बीमारी थी, कल ही चुनावी नामांकन किया था बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया का आज सुबह 6 बजे 80 साल की उम्र में निधन हो गया। वे 20 दिन से वेंटिलेटर पर थीं। खालिदा पिछले कई साल से सीने में इन्फेक्शन, लिवर, किडनी, डायबिटीज, गठिया और आंखों की परेशानी से जूझ रहीं थीं। उनके परिवार और पार्टी नेताओं ने निधन की पुष्टि की है। खालिदा 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की पत्नी थीं। उनके बड़े बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 2008 से लंदन में रह रहे थे। वे 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे हैं। वहीं, उनके छोटे बेटे अराफात रहमान का 2015 में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:09:44 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका&#45;इजराइल और यूरोप के साथ जंग की स्थिति में ईरान:राष्ट्रपति बोले&#45; ये हमें घुटनों पर लाना चाहते, लेकिन अब हम पहले से ज्यादा मजबूत</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि उनका देश अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ पूरी तरह से जंग की स्थिति में है। यह बयान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। पेजेशकियन ने इस युद्ध को 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी ज्यादा जटिल और खतरनाक बताया, जिसमें लाखों लोग मारे गए थे। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान में आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक हर तरफ से दबाव बढ़ा है। यह पारंपरिक जंग से कहीं ज्यादा मुश्किल है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ट्रम्प से फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में मुलाकात करने वाले हैं। इस मीटिंग में ईरान प्रमुख मुद्दा रहेगा, जिसमें इसके परमाणु कार्यक्रम पर और सैन्य कार्रवाई पर चर्चा हो सकती है। राष्ट्रपति बोले- दुश्मन हमारे देश में फूट डलवाना चाहते हैं राष्ट्रपति ने लोगों से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की और कहा कि दुश्मन आंतरिक विभाजन का फायदा उठाना चाहते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते हैं, जिसे ईरान बार-बार खारिज करता आया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। ट्रम्प ने जनवरी 2025 में दोबारा सत्ता में आने के बाद अपनी &#039;मैक्सिमम प्रेशर&#039; नीति फिर शुरू की, जिसमें ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने और अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के कदम शामिल हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को फिर से लागू किया, जो 2015 के परमाणु समझौते के बाद हटाए गए थे। इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। ईरान का कहना है कि पश्चिमी देश प्रतिबंधों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए कर रहे हैं, जबकि वे शांति चाहते हैं। राष्ट्रपति बोले- ईरान की सेना अब पहले से ज्यादा मजबूत, जवाब देंगे पेजेशकियन ने दावा किया कि जून के हमलों के बावजूद ईरान की सेना अब पहले से ज्यादा मजबूत है। उन्होंने कहा हमारी सेना हथियारों और मैन फोर्स दोनों में। उन्होंने आगे कहा, &quot;हमारी सेना मजबूती से अपना काम कर रही है। अगर वे फिर हमला करेंगे तो उन्हें कड़ा जवाब मिलेगा।&quot; ईरान-इजराइल के बीच 12 दिन का सीधा युद्ध हुआ था इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में 12 दिन का युद्ध हुआ था, जिसमें इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में ईरान के 1000 से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि ईरान की मिसाइलों से इजराइल में 28 लोगों की मौत हुई। बाद में इसमें अमेरिका भी शामिल हो गया और तीन ईरानी परमाणु साइटों पर बमबारी की, जिससे अप्रैल से चल रही परमाणु वार्ता रुक गई। न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए इजराइल ने हमला किया था इजराइल की ओर किए गए हमले का मकसद ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को पटरी से उतारना था। इस पूरे युद्ध में अमेरिका भी शामिल हो गया था। अमेरिका ने 22 जून को नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हमला किया। दो दिन बाद, अमेरिकी मध्यस्थता से एक सीजफायर लागू हुआ और लड़ाई थम गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने युद्ध के बाद दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी और इजराइली सेनाओं को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या करने से रोका। वहीं, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि वे खामेनेई को मारना चाहते थे, लेकिन यह नहीं पता चल पाया कि वे जमीन के नीचे कहां छिपे हैं। अगर जंग हुआ तो ईरान पर क्या असर पड़ेगा? अगर ये तनाव पूर्ण पैमाने के युद्ध में बदल गया तो ईरान पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी बदतर हो सकता है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... पाकिस्तान बोला-नूरखान एयरबेस में भारत ने 80 ड्रोन दागे थे: इससे कई सैनिक घायल हुए; ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 11 एयरबेस तबाह किए थे पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने शनिवार को एक बार फिर माना कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में उसके नूरखान एयरबेस पर बड़ा ड्रोन हमला किया था। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 12:12:45 +0530</pubDate>
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<title>मेक्सिको में ट्रेन पटरी से उतरी, इंजन पलटा:13 की मौत, 98 घायल, 250 यात्री सवार थे; मैक्सिकन नेवी की देखरेख में चलती है ट्रेन</title>
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<description><![CDATA[ मेक्सिको के दक्षिणी राज्य ओअक्साका में एक ट्रेन के पटरी से उतर गई, जिसके बाद ट्रेन का इंजन पलट गया। कई बोगियां भी पलट गईं। इसमें 13 लोगों की मौत हो गई और 98 लोग घायल हो गए हैं। यह ट्रेन मैक्सिको की खाड़ी और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले एक नए रेलमार्ग पर चल रही थी। इस रेलवे लाइन का संचालन मैक्सिकन नौसेना करती है। मेक्सिकन नौसेना के अनुसार, ट्रेन में 250 लोगों सवार थे, जिसमें 9 क्रू मेंबर शामिल थे। हादसा चिवेला और निजांडा कस्बों के बीच एक मोड़ पर हुआ। घायलों में से 36 को अस्पताल में इलाज दिया जा रहा है। राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाउम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि पांच घायल गंभीर हालत में हैं। उन्होंने सीनियर अधिकारियों को मौके पर भेजकर मृतकों के परिवारों की मदद करने के निर्देश दिए हैं। हादसे की 5 तस्वीर... सरकारी एजेंसियां घायलों की मदद के लिए पहुंचे ओअक्साका राज्य के गवर्नर सलोमोन जारा ने X पर पोस्ट करके बताया कि कई सरकारी एजेंसियां हादसे की जगह पर पहुंच गई हैं और घायलों की मदद कर रही हैं। मेक्सिको की अटॉर्नी जनरल अर्नेस्टिना गोदॉय रामोस ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इस घटना की जांच शुरू कर दी गई है। यह ट्रेन प्रशांत महासागर के सालिना क्रूज बंदरगाह से अटलांटिक महासागर तक लगभग 290 किलोमीटर की दूरी तय करती है। रेल लाइन का उद्घाटन 2023 में हुआ था यह इंटरोशियनिक ट्रेन सेवा 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति एंद्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर ने शुरू की गई थी। यह मेक्सिको के दक्षिणी हिस्से में रेल यात्रा को बढ़ावा देने और तेहुआंतेपेक इस्त्मस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास का हिस्सा है। सरकार का योजना इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रणनीतिक कॉरिडोर बनाने की है, जहां बंदरगाहों और रेल लाइनों से दोनों महासागरों को जोड़ा जा सके। इस हादसे से रेल सेवा प्रभावित हुई है और बचाव कार्य जारी हैं। ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... जापान में 60 से ज्यादा गाड़ियां टकराईं: कई गाड़ियां जलकर खाक, 2 की मौत, 26 घायल; बर्फीला मौसम बना वजह जापान में शुक्रवार देर रात बर्फीले मौसम के कारण बड़ा सड़क हादसा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, कोहरे के कारण इलाके में विजिबिलिटी कम थी, जिसके चलते दो ट्रक आपस में टकरा गए। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ट्रम्प के हाथ फिर से मेकअप से ढंके दिखाई दिए, दावा&#45; किसी बड़ी बीमारी को छुपा रहे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हाथ एक बार फिर मेकअप से ढंके दिखाई दिए। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से रविवार को मुलाकात के दौरान ट्रम्प की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें उनके हाथ पर मेकअप लगा है। तस्वीर सामने आने के बाद ट्रम्प की सेहत को लेकर अटकलें फिर तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प किसी बड़ी बीमारी को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, वाइट हाउस का कहना है कि ट्रम्प के हाथ पर ये निशान लगातार लोगों से हाथ मिलाने की वजह से आया है। ये पहली बार नहीं है जब 79 साल के ट्रम्प के हाथ को लेकर बातें की जा रही हैं। पहले भी उनके हाथ पर मेकअप, काला निशान और टेप जैसा कुछ चिपके होने की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में जब ट्रम्प के दाहिने हाथ पर एक स्पष्ट काला-नीला निशान देखा गया था, तब वाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट ने कहा था, ‘राष्ट्रपति ट्रम्प आम लोगों के नेता हैं और इतिहास में किसी भी दूसरे राष्ट्रपति की तुलना में अधिक अमेरिकियों से मिलते हैं और रोजाना उनसे हाथ मिलाते हैं।’ ट्रम्प लगातार अपनी सेहत को लेकर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते रहे हैं। ट्रम्प ने 9 दिसंबर को ट्रुथ सोशल पर पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने उनकी हेल्थ पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों पर राजद्रोह का आरोप लगाने की चेतावनी दी थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... सीरिया में सांप्रदायिक दंगा, 4 की मौत, दर्जनों घायल; मस्जिद में धमाके के दो दिन बाद झड़प सीरिया में रविवार को अलावी समुदाय के प्रदर्शनकारियों और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ये झड़पें होम्स शहर में एक मस्जिद पर हुए बम विस्फोट के दो दिन बाद हुईं, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और 18 घायल हुए थे। हजारों की संख्या में अलावी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, वे अलावी समुदाय के खिलाफ हो रही हत्याओं, गिरफ्तारियों, नौकरियों से बर्खास्तगी और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने संघीय व्यवस्था की मांग भी की। झड़पों के दौरान, लताकिया में सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अलावी प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंके। सुरक्षा बलों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की और हवा में गोलीबारी करके भीड़ को तितर-बितर किया। सरकारी टीवी के अनुसार, तर्तूस में किसी ने पुलिस स्टेशन पर हैंड ग्रेनेड फेंका, जिसमें सुरक्षा बलों के दो सदस्य घायल हो गए। लताकिया में सुरक्षा बलों की गाड़ियां आग के हवाले कर दी गईं। सरकारी समाचार एजेंसी साना ने बताया कि गोलीबारी में एक सुरक्षा कर्मी की मौत हो गई और पत्थरों, चाकुओं और गोलीबारी से करीब 60 लोग घायल हुए, जिनमें नागरिक और सुरक्षा कर्मी दोनों शामिल हैं। सरकार ने हमले की निंदा की और दोषियों को सजा देने का वादा किया, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। बशर असद के दिसंबर 2024 में सत्ता से हटने के बाद से सीरिया में संप्रदायिक झड़पें बढ़ गई हैं। असद अलावी थे और तख्तापलट के बाद वे रूस भाग गए थे। मार्च 2025 में असद समर्थकों के हमले के बाद बदले की कार्रवाइयों में सैकड़ों अलावी मारे गए थे। असद के शासन में अलावी सेना और सरकारी नौकरियों में ज्यादा प्रतिनिधित्व रखते थे, लेकिन अब वे भेदभाव और हमलों के शिकार हो रहे हैं। न्यू जर्सी में दो हेलिकॉप्टर हवा में टकराए; एक पायलट की मौत, दूसरा गंभीर अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित हैमॉन्टन में रविवार को दो हेलिकॉप्टर हवा में टकरा गए। हादसे में एक पायलट की मौत हो गई, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों हेलिकॉप्टर में सिर्फ पायलट ही सवार थे। हैमॉन्टन पुलिस ने बताया कि सुबह करीब 11:25 बजे हेलिकॉप्टर हादसे की सूचना मिली। मौके से सामने आए वीडियो में एक हेलिकॉप्टर तेजी से गोल-गोल घूमते हुए जमीन की ओर गिरता दिखा। टक्कर के बाद एक हेलिकॉप्टर में आग लग गई, जिसे पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने बुझाया। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के अनुसार, यह टक्कर हैमॉन्टन म्यूनिसिपल एयरपोर्ट के ऊपर हुई। इसमें एनस्ट्रॉम F-28A और एनस्ट्रॉम 280C मॉडल के हेलिकॉप्टर शामिल थे। एक पायलट की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरे को जानलेवा चोटों के साथ अस्पताल ले जाया गया। FAA और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) हादसे की जांच करेंगे। पूर्व FAA और NTSB जांचकर्ता एलन डील के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह देखा जाएगा कि दोनों पायलटों के बीच कोई संचार हुआ था या नहीं और क्या वे एक-दूसरे को देख पा रहे थे। सूरीनाम में 5 बच्चों सहित 9 लोगों की चाकू मारकर हत्या, हमलावर गिरफ्तार; पुलिसकर्मियों पर भी हमले की कोशिश की थी सूरीनाम की राजधानी परमारिबो के बाहरी इलाके में 9 लोगों की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, मृतकों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि मरने वाले लोग हमलावर के बच्चे और पड़ोसी थे। सूरीनाम पुलिस ने बताया कि हमलावर ने मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों पर भी हमला करने की कोशिश की। हालांकि, हमलावर के पैर में गोली मारकर उसे काबू में किया गया। आरोपी फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और इलाज चल रहा है। सूरीनाम दक्षिण अमेरिका का एक छोटा सा देश है जो महाद्वीप के उत्तरी तट पर स्थित है। इसकी सीमा गुयाना, ब्राजील और फ्रेंच गुयाना से लगती है। इसकी आबादी 6 लाख से अधिक है। 1975 में नीदरलैंड से आजादी मिलने के बाद से सूरीनाम को कई बार तख्तापलट और एक गृहयुद्ध का सामना करना पड़ा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 12:12:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका में बर्फीले तूफान से हजारों फ्लाइट कैंसिल:3 साल में सबसे अधिक बर्फबारी; एयरलाइंस ने मुफ्त में टिकट बदलने की छूट दी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उत्तर-पूर्वी इलाकों में बर्फीले तूफान &#039;डेविन&#039; के कारण अमेरिका में शनिवार को 9,000 से अधिक घरेलू उड़ानें रद्द या डिले हुईं। रॉयटर्स के मुताबिक तूफान ने क्रिसमस के बाद की हॉलिडे ट्रैवल को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। फ्लाइट इस तूफान के चलते न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में राज्य आपातकाल घोषित करना पड़ा। फ्लाइट अवेयर के अनुसार, शुक्रवार से शनिवार तक अमेरिका में 2700 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल हुईं और हजारों देरी से चलीं। वहीं, शुक्रवार को 1802 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 22,349 उड़ानें डिले हुईं। जेटब्लू, डेल्टा, अमेरिकन और यूनाइटेड जैसी बड़ी एयरलाइंस ने सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द कीं और यात्रियों को मुफ्त में टिकट बदलने की छूट दी है। नेशनल वेदर एजेंसी के मुताबिक, तूफान ने न्यूयॉर्क शहर को बर्फ की सफेद चादर से ढक दिया है। न्यूयॉर्क से लेकर लॉन्ग आइलैंड और कनेक्टिकट तक शनिवार की सुबह तक लगभग 6 से 10 इंच (15 से 25 सेंटीमीटर) बर्फ गिरी। वहीं शनिवार रात को 2 से 4 इंच बर्फबारी हुई, जिसमें सेंट्रल पार्क में 4.3 इंच बर्फबारी दर्ज की गई, जो 2022 के बाद सबसे अधिक है। बर्फबारी की तस्वीरें... फिसलन और कम विजिबिलिटी के कारण चेतावनी जारी कुछ जगहों पर ओले और जमाव वाली बारिश ने हालात और खराब कर दिए। नेशनल वेदर सर्विस ने विंटर स्टॉर्म वार्निंग जारी की थी, जिसमें फिसलन भरी सड़कें, कम विजिबिलिटी और पावर आउटेज की चेतावनी दी गई। न्यूयॉर्क गवर्नर कैथी होचुल ने राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में इमरजेंसी घोषित की और कहा, &quot;न्यूयॉर्क वासियों की सुरक्षा मेरी पहली प्राथमिकता है, इस तूफान में बेहद सावधानी बरतें।&quot; पूरी रात सड़कें, फुटपाथ साफ करते रहे कर्मचारी सड़कों पर कमर्शियल व्हीकल्स पर बैन लगा दिया गया। कई हाईवे बंद कर दिए गए हैं और पेनसिल्वेनिया, मैसाचुसेट्स में भी विंटर एडवाइजरी जारी की गई। सफाई कर्मचारी पूरी रात सड़कें, फुटपाथ और एयरपोर्ट रनवे साफ करते रहे। टाइम्स स्क्वायर से लेकर सेंट्रल पार्क तक बर्फ हटाने के लिए स्नो प्लो और शोवल का इस्तेमाल हुआ। कुछ पर्यटकों ने बर्फबारी को खूबसूरत बताया, लेकिन ज्यादातर यात्रियों के लिए यह बड़ा झटका बना। एक पर्यटक ने कहा, &quot;यह बहुत ठंडा और अनएक्सपेक्टेड था, लेकिन शहर ने सड़कें साफ करने में अच्छा काम किया।&quot; मौसम विशेषज्ञ बोले- भारी बर्फबारी अब खत्म हो गई है तूफान 25-26 दिसंबर को तेजी से आगे बढ़ा और शनिवार सुबह तक कमजोर पड़ गया। दोपहर तक सिर्फ हल्की बर्फबारी हुई। मौसम विशेषज्ञ बॉब ओरावेक ने कहा, &quot;सबसे भारी बर्फबारी खत्म हो गई, अब सिर्फ हल्की फ्लरीज बची हैं।&quot; अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और गैर-जरूरी यात्रा टालने की अपील की है। यह तूफान 2025 के आखिरी बड़े मौसमी झटकों में से एक था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 12:23:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>जरदारी बोले&#45; पाकिस्तान दोबारा युद्ध को तैयार:मई में भारत को समझाया युद्ध बच्चों का खेल नहीं; बिलावल ने कहा&#45; मोदी मुनीर से डरते हैं</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने शनिवार को कहा कि मई में हुए युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने भारत के आक्रमण का मजबूती से जवाब दिया। इसके बाद भारत सरकार को समझ आ गया कि युद्ध &#039;बच्चों का खेल&#039; नहीं है। जरदारी शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पुण्यतिथि पर कराची में एक रैली में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान के संयम के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि अगर पाकिस्तान चाहता तो और भी भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया जा सकता था। जरदारी ने कहा, मोदी अब समझ चुके हैं कि पाकिस्तान अपनी रक्षा करना जानता है। अगर दोबारा युद्ध थोपा गया तो पाकिस्तान पूरी तरह तैयार है। इधर, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ की। उन्होंने कहा- हमारे फील्ड मार्शल (आसिम मुनीर) का नाम सुनते ही मोदी छिप जाते हैं। अब विदेश में पाकिस्तान को लेकर कुछ नहीं कहते। जरदारी की 3 बड़ी बातें... बिलावल का दावा- पाकिस्तान ने भारत को हराया वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया कि मई में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान की जीत हुई थी। यह 2025 की पाकिस्तान की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि बेनजीर भुट्टो की शहादत के 18 साल बाद भी देश के चारों प्रांतों से लोगों का जुटना आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश है। बिलावल ने कहा कि जुल्फिकार अली भुट्टो ने पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनाया और आसिफ अली जरदारी ने चीन के साथ दोस्ती मजबूत करते हुए चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर(CPEC) की नींव रखी। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें... आसिम मुनीर की धमकी- भारत गलतफहमी में न रहे: अब हमला हुआ तो पाकिस्तान भी कड़ा जवाब देगा, किसी को परखने की अनुमति नहीं देंगे पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने 10 दिसंबर को कहा था कि अगर भविष्य में पाकिस्तान पर कोई हमला होता है तो उसका जवाब पहले से भी ज्यादा तेज और कड़ा होगा। उन्होंने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी गलतफहमी में न रहें। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 12:23:20 +0530</pubDate>
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<title>कनाडा के गुरुद्वारे से पाठी का इमोशनल VIDEO:कहा&#45; टोकाटाकी&#45;भेदभाव से तंग हूं, कोई पैसे देता है तो ताने मारते हैं; जल्द इंडिया लौटूंगा</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा के गुरुद्वारा से पाठी सिंह की इमोशनल वीडियो सामने आई है। इसमें पाठी सिंह ने कनाडा के गुरुद्वारे पर भेदभाव और टोकाटाकी के आरोप लगाए हैं। कीर्तन करते हुए रागी जत्थे में शामिल सिंह इमोशनल होकर कहते हैं कि मैं अब टोकाटाकी के इस कल्चर में ज्यादा दिन नहीं रह पाऊंगा। यहां तो बोलने की आजादी भी छीन ली गई है। उन्होंने कहा कि हमें क्या बोलना है, किसके लिए अरदास करनी है, किसके लिए नहीं, किससे सिरोपा लेना है और किसको सिरोपा देना है, जैसी बातों पर कंट्रोल किया जाता है। सिंह ने गुरुद्वारों की सैलरी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यहां महीने के 800 डॉलर दिए जा रहे हैं। अगर हमें संगत में से कोई पैसे दे जाता है तो ताने सुनने को मिलते हैं कि बहुत कमाई कर रहे हो। आपको तो बिना मेहनत के ही पैसे मिल रहे हैं। मैं तंग आ चुका हूं और अब कनाडा से परमानेंट इंडिया जा रहा हूं। गुरुद्वारों पर भेदभाव के आरोप नए नहीं हैं। शुक्रवार को श्री फतेहगढ़ साहिब में हुई शहीदी सभा में ये मुद्दा निहंग सिंह भी उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि 2-2 बाटों से गुरुद्वारों में अमृत छकाया जा रहा है। एक बाटा किसी जात का तो दूसरा किसी जात है। जात-पात खत्म नहीं हो पाई है। अब विस्तार से पढ़िए सिंह ने वीडियो में क्या कहा... पंजाब के गुरुद्वारों में भी जात-पात सिख इतिहास पर विवाद
न केवल कनाडा बल्कि पंजाब के गुरुद्वारों पर भी सिख जत्थेबंदियां जात-पात और सिख इतिहास से छेड़छाड़ का मुद्दा उठा चुकी हैं। निहंग बाबा रसूलपुर कह चुके हैं कि अकाल तख्त के जत्थेदार को सिखी से जुड़े विवादों का संज्ञान लेना चाहिए। कलगी तोड़े के बहाने लोगों को जात-पात में बांटा जा रहा है। इन्हीं कारणों से तो कई सिख परिवार क्रिश्चियन बन गए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Dec 2025 12:23:20 +0530</pubDate>
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<title>जापान में 50 से ज्यादा गाड़ियां आपस में टकराई:कई गाड़ियां जली, बुजुर्ग महिला की मौत, 26 घायल; बर्फीले मौसम के कारण हादसा हुआ</title>
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<description><![CDATA[ जापान में शुक्रवार देर रात बर्फीले मौसम के कारण बड़ा सड़क हादसा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, कोहरे के कारण इलाके में विजिबिलिटी कम थी, जिसके चलते दो ट्रक आपस में टकरा गए। टक्कर के बाद एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा ब्लॉक हो गया। पीछे से आ रही गाड़ियां बर्फीली सड़क पर समय रहते ब्रेक नहीं लगा सकीं और देखते ही देखते 50 से ज्यादा गाड़ियां आपस में भिड़ गए। टक्कर के बाद गाड़ियों में आग लग गई। हादसा गुन्मा प्रान्त के मिनाकामी कस्बे में कान-एत्सु एक्सप्रेसवे पर हुआ। इसमें 77 साल की बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हो गए। हादसे के वक्त देश में साल के अंत और नए साल की छुट्टियों को लेकर भारी ट्रैफिक था। हादसे की 7 तस्वीरें... एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियां जलकर राख हुईं पुलिस ने बताया कि घायलों में से पांच की हालत गंभीर है। हादसे के बाद एक गाड़ी में आग लग गई। जो तेजी से फैलते हुए एक दर्जन से ज्यादा गाड़ियों तक पहुंच गई। कई वाहन पूरी तरह जलकर राख हो गए हैं। दमकल कर्मियों को आग बुझाने में सात घंटे लगे आग बुझाने में दमकल कर्मियों को करीब सात घंटे लगे। पुलिस जांच, मलबा हटाने और सड़क की सफाई के चलते एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से अभी भी बंद हैं। यहां शुक्रवार देर रात भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन छुट्टियों के कारण लोग घूमने निकल रहे थे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:44:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बांग्लादेश के स्कूल कॉन्सर्ट में भीड़ का हमला:ईंट&#45;पत्थर और कुर्सियां फेंकी, स्कूली छात्र समेत 20 घायल; जबरन घुसने से रोकने पर दंगा</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के फरीदपुर जिले में शुक्रवार की रात डिस्ट्रिक्ट स्कूल की 185वीं एनिवर्सरी के समापन समारोह के दौरान हिंसा हो गई। समारोह में मशहूर रॉक सिंगर जेम्स (नागर बाउल) का कॉन्सर्ट होना था, लेकिन इससे ठीक पहले भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। यह घटना रात करीब 9:30 बजे हुई, जब जेम्स मंच पर आने वाले थे। आयोजकों के अनुसार, कुछ बाहरी लोग जबरन कार्यक्रम स्थल में घुसने की कोशिश कर रहे थे। रोकने पर उन्होंने ईंट-पत्थर और कुर्सियां फेंकना शुरू कर दिया और मंच की ओर बढ़ने लगे। इसके बाद प्रशासन के निर्देश पर कॉन्सर्ट रद्द कर दिया गया। घटना में 20 लोग घायल हो गए। ज्यादातर घायल स्कूल के छात्र हैं, जिन्हें सिर और हाथ-पैर में चोटें आईं। मौके पर मौजूद छात्रों और स्वयंसेवकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, जिसके बाद हमलावर पीछे हटे। हिंसा की 3 तस्वीरें... बैंड को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला गया स्थिति बेकाबू होते देख फरीदपुर जिला प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया। रात करीब 10 बजे आयोजन समिति के संयोजक डॉ. मुस्तफिजुर रहमान शमीम ने मंच से ऐलान किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला उपायुक्त के निर्देश पर जेम्स का कॉन्सर्ट रद्द किया जा रहा है। जेम्स और उनके बैंड सदस्यों को सुरक्षा घेरे में सुरक्षित बाहर निकाला गया। किसी कलाकार को चोट नहीं लगी। ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी स्कूल की स्थापना वर्षगांठ कार्यक्रम के प्रचार और मीडिया उप-समिति के संयोजक राजिबुल हसन खान ने कहा, “हमने जेम्स के कॉन्सर्ट को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारियां की थीं, लेकिन इस अचानक हमले से हम सभी हैरान हैं। हमें नहीं पता कि यह हमला किसने और क्यों किया।” उन्होंने आगे कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए कार्यक्रम रोकना पड़ा। फरीदपुर जिला स्कूल इस क्षेत्र के सबसे पुराने सरकारी संस्थानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1840 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। सांस्कृतिक संस्थान छायनाट पर भीड़ ने हमला किया, म्यूजिक इंस्टूमेंट लूटे थे पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा तैनात की और स्थिति को नियंत्रण में लिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं आई। हाल के समय में कई कलाकारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर इसी तरह के हमले हो चुके हैं, जिससे कलाकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ दिन पहले ढाका के प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्थान छायनाट पर भीड़ ने हमला किया। हमलावरों ने छह मंजिला इमारत में घुसकर तोड़फोड़ की, कई कमरों में आग लगा दी और लूटपाट की। संस्थान के अनुसार, म्यूजिक इंस्टूमेंट जैसे तबला, हारमोनियम, वायलिन आदि क्षतिग्रस्त हुए या लूट लिए गए, फर्नीचर तोड़ दिया गया, सीसीटीवी कैमरे नष्ट कर दिए गए और कुछ सर्वर को आग के हवाले कर दिया गया। ऐतिहासिक दस्तावेज, किताबें और कलाकृतियां भी बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिससे संस्थान को करीब 2.2 करोड़ टका का नुकसान हुआ।
 भारतीय पहचान छिपाकर ढाका से निकले थे भारतीय वादक शिराज प्रसिद्ध भारतीय सारोद वादक शिराज अली खान (उस्ताद अली अकबर खान के पोते और मैहर घराने से जुड़े) 19 दिसंबर को छायनाट में प्रदर्शन करने वाले थे। हमले की खबर मिलते ही कार्यक्रम रद्द हो गया। शिराज अपनी भारतीय पहचान छिपाकर ढाका से कोलकाता लौट आए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि संस्कृति, कलाकारों और साझा विरासत पर हमला है। उन्होंने कहा कि कलाकारों और संगीत की सुरक्षा होने तक बांग्लादेश नहीं आएंगे। कई भारतीय कलाकारों ने कॉन्सर्ट रद्द किए ढाका में उदीची शिल्पीगोष्ठी के मुख्य कार्यालय को भी आग के हवाले कर दिया गया था। यह संस्था संगीत, नाटक और लोक संस्कृति को बढ़ावा देती है। हमलावरों ने इसे &quot;भारतीय संस्कृति का प्रचारक&quot; बताकर निशाना बनाया। इस घटना के बाद कई इंडियन क्लासिकल म्यूजिशियन उस्ताद राशिद खान के बेटे अरमान खान ने बांग्लादेश में अपने सभी कॉन्सर्ट रद्द कर दिए। उन्होंने कहा कि जहां संगीत का अपमान हो रहा हो, वहां प्रदर्शन नहीं करेंगे। कई भारतीय और स्थानीय कलाकारों ने भी सुरक्षा चिंताओं के कारण बांग्लादेश दौरा टाल दिया। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में भारत विरोधी प्रदर्शन: हादी के हत्यारे को सजा देने की मांग; बांग्लादेशी हिंदू की हत्या मामले में 6 और गिरफ्तार बांग्लादेश में एक बार फिर भारत विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इंकिलाब मंच ने नेता उस्मान हादी की हत्या के खिलाफ न्याय की मांग करते हुए ढाका के शाहबाग इलाके में प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत विरोधी नारे भी लगाए गए। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:44:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान में खैबर&#45;पख्तूनख्वा के CM के साथ फिर मारपीट:विधानसभा में बदसलूकी, 1 महीने पहले पुलिस ने पीटा था</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में शुक्रवार को खैबर पख्तूनख्वा (KP) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के साथ सुरक्षाकर्मियों ने मारपीट की। उनके प्रतिनिधियों के साथ भी बदसलूकी की गई। घटना का वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि मुख्यमंत्री अफरीदी अपने प्रतिनिधियों के साथ पंजाब असेंबली में घुस रहे हैं, इस दौरान सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, तभी उनके साथी फतेह उल्लाह बुर्की बीच में आ जाते हैं। इसके बाद अफरीदी ने बयान जारी कर कहा- कोई भी लोकतांत्रिक सरकार ऐसा काम नहीं करती है, यह सीधे-सीधे मार्शल लॉ जैसा व्यवहार है। पाकिस्तान में लोकतंत्र खतरे में है। अफरीदी के प्रतिनिधि के साथ भी मारपीट गार्ड अफरीदी के प्रतिनिधि बुर्की के साथ मारपीट करते हैं और उन्हें धक्का देकर विधानसभा से बाहर निकालने की कोशिश करते हैं। हालांकि, अन्य अधिकारियों के बचाव में आने के बाद बुर्की को छोड़ दिया जाता है। पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक इस दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई है। पाकिस्तान के पंजाब में मुस्लिम लीग नून की सरकार है और नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज मुख्यमंत्री हैं। वहीं, KP के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से हैं। अफरीदी बोले- पंजाब में नकली सरकार है घटना के बाद अफरीदी ने मीडिया से कहा कि लाहौर में हमारे कार्यकर्ताओं के साथ बुरा व्यवहार और उत्पीड़न किया जा रहा है। उनका कहना था कि पंजाब में एक नकली सरकार है, जो सिर्फ एक पार्टी को डराने और धमकाने में लगी है। उन्होंने बताया कि चक्री और मंडी बहाउद्दीन में हमारे कार्यकर्ताओं के रास्ते रोके गए। उनके वाहन रोक दिए गए। कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और सांसदों के साथ भी बदसलूकी हुई। अफरीदी से एक महीने पहले भी मारपीट की गई थी अफरीदी 1 महीने पहले 28 नवंबर को रावलपिंडी की अडियाला जेल में इमरान से मिलने गए थे, तब भी पुलिस ने उनके साथ मारपीट की थी। पुलिस ने उनके बाल खींचे और जमीन पर गिरा दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CM सोहेल अफरीदी पर हमले की कार्रवाई सेना के आदेश पर की गई। अफरीदी जिस समय जेल पहुंचे थे वहां भारी सुरक्षा तैनात थी और PTI समर्थकों की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। उनके पहुंचने से हालात और बिगड़ गए थे। CM अफरीदी हटाए जा सकते हैं पाकिस्तान के न्याय राज्य मंत्री अकील मलिक ने 1 दिसंबर को कहा था, &#039;पख्तूनख्वा में सुरक्षा और प्रशासन की हालत बहुत खराब हो चुकी है।&#039; यह बयान अफरीदी के सेंट्रल जेल रावलपिंडी के बाहर रातभर धरना देने के बाद आया था। मलिक ने कहा था, &#039;खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी वहां की स्थिति को सुधारने में बुरी तरह फेल रहे हैं। वे न तो केंद्र सरकार से कोई तालमेल रख रहे हैं और न ही जरूरी जगहों पर कोई कार्रवाई कर रहे हैं।&#039; पूरी खबर पढ़ें... ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें... पाकिस्तान एयरफोर्स ने अपने ही लोगों पर बमबारी की:महिलाओं-बच्चों समेत 30 की मौत; सेना बोली- यहां तालिबान बम बना रहा था पाकिस्तानी वायुसेना ने 22 सितंबर को अपने ही देशवासियों पर चीन के J-17 विमानों से 8 लेजर-गाइडेड बम गिराए थे। पाकिस्तानी वायुसेना ने यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के तिराह घाटी के एक गांव पर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हवाई हमले में करीब 30 लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:44:39 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:चीन में सेल्फ ड्राइविंग कारों की बिक्री के प्लान पर रोक, मार्च में कार एक्सिडेंट में 3 छात्रों की मौत हुई थी</title>
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<description><![CDATA[ चीन ने एक सड़क हादसे के बाद सेल्फ ड्राइविंग कारों को बेचने के प्लान को फिलहाल रोक दिया है। इस साल 29 मार्च को सेल्फ ड्राइविंग तकनीक से लैस कार में सवार 3 छात्रों की मौत हो गई थी। इस दौरान कार की रफ्तार 116 किमी प्रति घंटा थी। फिलहाल चीन के उद्योग और आईटी मंत्रालय ने केवल दो कंपनियों बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप और चांगन ऑटोमोबाइल को लेवल-3 सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों के टेस्टिंग की अनुमति दी है। ये कारें केवल बीजिंग और चोंगकिंग के कुछ तय किए गए हाईवे पर ही चल सकेंगी। यानी सेल्फ ड्राइविंग कारों को अभी सिर्फ टेस्टिंग की अनुमति दी गई है। दरअसल, चीन में इस समय सिर्फ लेवल-2 सिस्टम चलन में हैं, जिनमें ड्राइवर को हर समय ज्यादा सतर्कता बरतनी पड़ती है। मार्च में हुए हादसे वाली कार में लेवल-2 सिस्टम लगा हुआ था।हादसे के बाद सरकार ने कार कंपनियों को ‘स्मार्ट ड्राइविंग’ या ‘ऑटोनॉमस ड्राइविंग’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल से भी रोक दिया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... कनाडाई PM बोले- हम भारत से ट्रेड वार्ता शुरू कर रहे, ट्रम्प इसका सम्मान करते हैं यूक्रेन ने कहा है कि उसने रूस की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ब्रिटेन की स्टॉर्म शैडो मिसाइलों से हमला किया है। यूक्रेनी सेना के मुताबिक यह हमला रूस के रोस्तोव इलाके में स्थित नोवोशाख्तिंस्क तेल रिफाइनरी पर किया गया। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ ट्रेड वार्ता शुरू कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प इस बात का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा, चीन के साथ रिश्ते बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। कार्नी के मुताबिक, ट्रम्प को लगता है कि जो देश अपने हितों के लिए मजबूत कदम उठाता है, वह सम्मान का हकदार होता है। मार्क कार्नी ने पिछले महीने भी बताया था कि ट्रम्प से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा था कि कनाडा अब अपने व्यापार और विदेश नीति में सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है और चीन के साथ भी रिश्तों में सुधार लाना चाहता है। ट्रम्प ने इस सोच को सही बताया और कहा कि वे कनाडा की इस रणनीति का सम्मान करते हैं। कनाडा हाल ही में भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते पर फिर से बातचीत शुरू करने जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़े और कंपनियों को नए मौके मिलें। इसके साथ ही, कनाडा चीन के साथ भी बातचीत के जरिए पुराने तनाव कम कर रिश्ते सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन का ब्रिटिश मिसाइलों से रूस की तेल रिफाइनरी पर हमला, यहां से रूसी सेना को फ्यूल सप्लाई होती है यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने बताया कि रिफाइनरी में कई जोरदार धमाके हुए। अधिकारियों ने कहा कि यह रिफाइनरी दक्षिणी रूस में तेल उत्पादों की बड़ी सप्लायर थी और यहां से रूसी सेना को डीजल और जेट ईंधन भेजा जाता था, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में हो रहा था। यूक्रेन को पिछले साल ब्रिटेन ने इजाजत दी थी कि वह स्टॉर्म शैडो मिसाइलों का इस्तेमाल रूस के अंदर भी कर सकता है। इसके बाद नवंबर में पहली बार इन मिसाइलों से हमला किया गया था। इसके अलावा यूक्रेन ने अपने बनाए हुए लंबी दूरी के ड्रोन से भी रूस के एनर्जी ठिकानों को निशाना बनाया है। इन ड्रोन हमलों में क्रास्नोदार इलाके के टेमरयुक बंदरगाह पर तेल के टैंक और ओरेनबुर्ग में एक गैस प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला किया गया। ओरेनबुर्ग का यह प्लांट यूक्रेन की सीमा से करीब 1,400 किलोमीटर दूर है। रूस के अधिकारियों ने कहा कि टेमरयुक बंदरगाह पर ड्रोन हमले के बाद दो तेल टैंकों में आग लग गई। पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन और रूस दोनों ही एक-दूसरे के एनर्जी ठिकानों पर हमले बढ़ा चुके हैं। अगस्त से यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों और एनर्जी ढांचे को ज्यादा निशाना बनाना शुरू किया है, ताकि रूस की तेल से होने वाली कमाई को नुकसान पहुंचाया जा सके, क्योंकि यही पैसा उसके युद्ध खर्च का बड़ा हिस्सा है। पाकिस्तान के एटमी हथियार दुनिया के लिए खतरा:दस्तावेजों से खुलासा- पुतिन ने 24 साल पहले जॉर्ज बुश को आगाह किया था रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2001 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से अपनी पहली मुलाकात के दौरान पाकिस्तान को लेकर चिंता जताई थी। पुतिन ने कहा था कि पाकिस्तान असल में एक सैन्य शासन यानी जुंटा है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। यह कोई लोकतांत्रिक देश नहीं है। पुतिन के मुताबिक, इसके बावजूद पश्चिमी देश पाकिस्तान की आलोचना नहीं करते, जो चिंता की बात है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। दोनों नेता पाकिस्तान के अंदरूनी हालात, राजनीतिक अस्थिरता और परमाणु कमांड सिस्टम को लेकर चिंतित थे। उन्हें डर था कि अगर हालात बिगड़े तो परमाणु तकनीक गलत हाथों में जा सकती है। यह जानकारी दोनों के बीच 2001 से 2008 के दौरान हुई बातचीत के डीक्लासिफाइड दस्तावेज सामने आए हैं। ये दस्तावेज अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव ने सूचना के अधिकार कानून के तहत जारी किए हैं। पढ़ें पूरी खबर... अमेरिका की नाइजीरिया में ISIS के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक:ट्रम्प बोले- मारे गए आतंकियों को क्रिसमस की बधाई, ये ईसाइयों की हत्या कर रहे अमेरिका ने गुरुवार रात नाइजीरिया में आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। ट्रम्प का आरोप है कि यहां ISIS ईसाइयों को निशाना बनाकर बेरहमी से हत्या कर रहा है। उन्होंने ISIS आतंकियों को &#039;आतंकी कचरा&#039; बताते हुए लिखा कि यह संगठन लंबे समय से निर्दोष ईसाइयों की हत्या कर रहा है। ट्रम्प के मुताबिक इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने कई परफेक्ट स्ट्राइक कीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि अमेरिका &#039;कट्टर इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।&#039; पोस्ट के अंत में ट्रम्प लिखा- सभी को क्रिसमस की बधाई, मारे गए आतंकियों को भी। अगर ईसाइयों की हत्याएं जारी रहीं, तो आगे और भी आतंकी मारे जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर... म्यांमार से वेनेजुएला तक दुनियाभर में दखल दे रहा अमेरिका:कहीं राष्ट्रपति को हटाने के लिए वॉरशिप तैनात किए, तो कहीं 50% टैरिफ लगाया अमेरिका हाल के सालों में कई देशों के चुनाव और सत्ता में सीधे दखल देता नजर आ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लीडरशिप में अमेरिका कहीं अपने पसंदीदा नेताओं को जिताने की कोशिश कर रहा है, तो कहीं सरकारें गिराने के लिए सैन्य और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए वो अलग-अलग हथकंडे भी अपना रहा है। ट्रम्प सरकार ने दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए कही वॉरशिप तैनात किए हैं, कहीं भारी भरकम टैरिफ की मदद ली है। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 12:43:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान के एटमी हथियार दुनिया के लिए खतरा:दस्तावेजों से खुलासा&#45; पुतिन ने 24 साल पहले जॉर्ज बुश को आगाह किया था</title>
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<description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2001 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से अपनी पहली मुलाकात के दौरान पाकिस्तान को लेकर चिंता जताई थी। पुतिन ने कहा था कि पाकिस्तान असल में एक सैन्य शासन यानी जुंटा है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। यह कोई लोकतांत्रिक देश नहीं है। पुतिन के मुताबिक, इसके बावजूद पश्चिमी देश पाकिस्तान की आलोचना नहीं करते, जो चिंता की बात है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। दोनों नेता पाकिस्तान के अंदरूनी हालात, राजनीतिक अस्थिरता और परमाणु कमांड सिस्टम को लेकर चिंतित थे। उन्हें डर था कि अगर हालात बिगड़े तो परमाणु तकनीक गलत हाथों में जा सकती है। यह जानकारी दोनों के बीच 2001 से 2008 के दौरान हुई बातचीत के डीक्लासिफाइड दस्तावेज सामने आए हैं। ये दस्तावेज अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव ने सूचना के अधिकार कानून के तहत जारी किए हैं। पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा सिस्टम पर चिंता जताई थी यह बातचीत ऐसे समय में हुई थी जब दुनिया में आतंकवाद और दक्षिण एशिया की सुरक्षा को लेकर हालात काफी संवेदनशील थे। पुतिन का मानना था कि परमाणु हथियारों से लैस किसी गैर-लोकतांत्रिक देश का होना वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। बातचीत में पाकिस्तान के &#039;एक्यू खान नेटवर्क&#039;, ईरान और उत्तर कोरिया तक परमाणु तकनीक पहुंचने के खतरे और पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई गई है। 2001-2008 के दौर में पाकिस्तान में सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ का शासन था। 9/11 के बाद आतंकवाद विरोधी लड़ाई में अमेरिका और रूस दोनों उसका सहयोग ले रहे थे। इसके बावजूद, दोनों नेताओं को पाकिस्तान की न्यूक्लियर पॉलिसी और कंट्रोल सिस्टम पर भरोसा नहीं था। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि रूस पश्चिमी देशों का हिस्सा है, कोई दुश्मन नहीं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान भी जताया। बाद में बुश ने यह भी कहा था कि उन्होंने पुतिन को करीब से समझा और उन्हें भरोसेमंद पाया। ईरान और उत्तर कोरिया तक फैलने का डर सितंबर 2005 में व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान बातचीत ईरान और उत्तर कोरिया तक परमाणु तकनीक पहुंचने के मुद्दे पर केंद्रित हो गई। पुतिन ने आशंका जताई कि ईरान की परमाणु गतिविधियों में पाकिस्तान की भूमिका हो सकती है। पूरी बातचीत पढ़ें... पुतिन: लेकिन यह साफ नहीं है कि ईरान की प्रयोगशालाओं में क्या चल रहा है और वे कहां हैं। पाकिस्तान के साथ उसका सहयोग अब भी जारी है। बुश: मैंने इस मुद्दे पर मुशर्रफ से बात की है। मैंने उनसे कहा कि हमें ईरान और उत्तर कोरिया तक तकनीक पहुंचने की चिंता है। उन्होंने (मुशर्रफ) ए.क्यू. खान और उसके कुछ साथियों को जेल में डाला है और नजरबंद किया है। हम जानना चाहते हैं कि उन्होंने पूछताछ में क्या बताया। मैं मुशर्रफ को बार-बार यह बात याद दिलाता हूं। या तो उन्हें पूरी जानकारी नहीं मिल रही है, या फिर वे हमें पूरी सच्चाई नहीं बता रहे हैं। पुतिन: मेरी जानकारी के मुताबिक ईरान के सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तान का यूरेनियम मिला है। बुश: हां, यही वो बात है जो ईरान ने इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को नहीं बताई थी। यह नियमों का उल्लंघन है। पुतिन: अगर यूरेनियम पाकिस्तान का है तो इससे मुझे काफी घबराहट होती है। बुश: इससे हमें भी उतनी ही चिंता होती है। पुतिन: हमारे हालात के बारे में भी सोचिए। भारत की पुरानी चिंता भी सामने आई इन खुलासों के बीच भारत की चिंताएं भी सामने आ गई हैं। भारत लंबे समय से पाकिस्तान के परमाणु प्रसार रिकॉर्ड पर सवाल उठाता रहा है। नवंबर 2025 में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान का इतिहास तस्करी, अवैध परमाणु गतिविधियों और एक्यू खान नेटवर्क से जुड़ा रहा है। 7 से 10 मई के बीच हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद 15 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पाकिस्तान को गैर-जिम्मेदार देश बताते हुए उसके परमाणु हथियारों को IAEA की निगरानी में रखने की मांग की थी। अमेरिका-रूस सहयोग की झलक दिखी इन दस्तावेजों से यह भी सामने आता है कि शुरुआती दौर में पुतिन और बुश के बीच भरोसा और सहयोग बना हुआ था। 9/11 के हमलों के बाद दोनों नेताओं ने आतंकवाद और परमाणु अप्रसार जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर काम किया। हालांकि, बाद के वर्षों में इराक युद्ध, नाटो के विस्तार और मिसाइल डिफेंस जैसे मुद्दों पर अमेरिका और रूस के रिश्तों में धीरे-धीरे तनाव बढ़ता चला गया। अब जानिए एक्यू खान नेटवर्क क्या था एक्यू खान नेटवर्क एक गुप्त अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था, जिसके जरिए पाकिस्तान की परमाणु तकनीक और उपकरण चोरी-छिपे दूसरे देशों तक पहुंचाए गए। इस नेटवर्क के केंद्र में डॉ. अब्दुल कादिर खान (एक्यू खान) थे, जिन्हें पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है। एक्यू खान ने यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी अहम जानकारी, सेंट्रीफ्यूज की तकनीक और परमाणु उपकरण ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया जैसे देशों को बेचे या मुहैया कराए। साल 2004 में यह नेटवर्क दुनिया के सामने आया, जिसके बाद एक्यू खान ने टीवी पर आकर अपनी गलती स्वीकार की। हालांकि उन्हें पाकिस्तान में जेल की बजाय नजरबंद रखा गया। इस नेटवर्क को अब तक दुनिया के सबसे बड़े परमाणु घोटालों में से एक माना जाता है। --------------- ये खबर भी पढ़ें... रूसी मीडिया ने पाकिस्तानी PM से जुड़ा वीडियो डिलीट किया:40 मिनट तक इंतजार करते रहे शहबाज, फिर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुसे थे 
 पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की मीटिंग में जबरन घुसने वाला वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने सोशल मीडिया से हटा दिया है। रशिया टुडे का कहना है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर... मुनीर बोले- भारत से संघर्ष में अल्लाह की मदद मिली:नहीं तो हालात बिगड़ जाते; मई में भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस तबाह किए थे पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत के साथ मई में हुए सैन्य संघर्ष में अल्लाह की मदद मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि हमने इसे महसूस किया‌, जिसकी वजह से हालात पूरी तरह बिगड़ने से बच गए। पूरी खबर लिखों... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 12:43:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दक्षिण कोरिया की महारानी हो ह्वांग&#45;ओक (Queen Heo Hwang&#45;ok) की कांस्य प्रतिमा का अनावरण</title>
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<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:24:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>महारानी हो ह्वांग-ओक   क्वीन हियो ह्वांग-ओक (Queen Heo Hwang-ok)   कांस्य प्रतिमा (Bronze Statue)   प्रतिमा अनावरण (Statue Unveiling)   अयोध्या (Ayodhya)   रानी हो मेमोरियल पार्क (Queen Ho Memorial Park)   इंडो-कोरियन पार्क (Indo-Korean Park)</media:keywords>
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<title>गडकरी हमास चीफ की हत्या से पहले उनसे मिले थे:ईरानी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में मुलाकात हुई, कुछ घंटे बाद इजराइल ने मार दिया</title>
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<description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पूर्व हमास चीफ इस्माइल हानिया से उनकी मौत से कुछ घंटे पहले ही मुलाकात की थी। उन्होंने यह जानकारी हाल ही में एक बुक लॉन्चिंग ईवेंट के दौरान दी। गडकरी ने कहा कि साल 2024 में जब वे ईरान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गए थे, तब उनकी मुलाकात हमास के बड़े नेता से हुई थी। कुछ ही घंटों बाद उन्हें पता चला कि उसी नेता की हत्या कर दी गई है। हानिया 2024 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए तेहरान गए थे। यहां उनकी मिसाइल हमला करके हत्या कर दी गई। वह हमास का सबसे बड़े चेहरे थे। ईरानी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में गए थे गडकरी गडकरी ने बताया कि उन्हें पीएम मोदी ने भारत की तरफ से ईरान भेजा था। जुलाई 2024 में वे तेहरान पहुंचे थे, जहां मसूद पेजेशकियन ईरान के नए राष्ट्रपति बने थे और उनका शपथ ग्रहण समारोह हो रहा था। इस मौके पर दुनिया के कई देशों के नेता वहां मौजूद थे। सभी मेहमानों को एक 5-स्टार होटल में ठहराया गया था और उनके लिए खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया गया था। उन्होंने कहा कि होटल में उनकी नजर एक ऐसे इंसान पर पड़ी, जो किसी भी देश का प्रतिनिधि नहीं लग रहे थे। बाकी सभी लोग किसी न किसी देश की ओर से आए थे, लेकिन वह अलग दिख रहा था। जब गडकरी ने उससे बात की और हाथ मिलाया, तो पता चला कि वह हमास संगठन का प्रमुख नेता है। गडकरी ने बताया कि ईरानी सरकार ने उस नेता को खास अहमियत दी थी और वह ईरान के मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री के साथ चल रहा था। हानिया की मौत की खबर के बाद होटल छोड़कर निकले थे गडकरी हालांकि नितिन गडकरी ने मंच से उस नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से साफ है कि वे इस्माइल हनिया की बात कर रहे थे, जो उस समय हमास के राजनीतिक प्रमुख थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते थे। गडकरी ने बताया कि समारोह खत्म होने के बाद वे रात का खाना खाकर अपने कमरे में सोने चले गए। लेकिन सुबह करीब चार बजे उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया गया। बाहर भारतीय राजदूत खड़े थे। उन्होंने कहा कि तुरंत होटल छोड़ना होगा। जब गडकरी ने वजह पूछी तो बताया गया कि जिस हमास नेता से वे कुछ घंटे पहले मिले थे, उसकी उसके कमरे में ही हत्या कर दी गई है।
यह खबर सुनकर गडकरी भी हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को ईरानी सरकार ने खास सुरक्षा दी थी और एक सुरक्षित कमरे में ठहराया था, उसकी इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद हत्या हो जाना बहुत चौंकाने वाली बात है। गडकरी बोले- समय के साथ बदलाव जरूरी गडकरी ने कहा कि उन्होंने यह किस्सा इसलिए बताया ताकि लोग समझ सकें कि आज के दौर में आधुनिक तकनीक और दूरदर्शी सोच कितनी जरूरी हो गई है, चाहे वह देश की सुरक्षा हो, व्यापार हो या रक्षा से जुड़ी रणनीति। उन्होंने कहा कि अगर समय के साथ बदलाव नहीं किया गया, तो आगे चलकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हमास और ईरान ने हत्या के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया बताया जाता है कि इस्माइल हनिया उस समय कतर में रहते थे और ईरान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने तेहरान आए थे। बाद में ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि उनकी मौत कम दूरी से दागे गए हथियार से हुई। हमास और ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हमले के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया था, हालांकि इजराइल की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। नितिन गडकरी भी उन कई अंतरराष्ट्रीय मेहमानों में शामिल थे, जो 30 जुलाई 2024 को इस समारोह में पहुंचे थे। उन्होंने राष्ट्रपति पजेशकियन को पीएम मोदी की ओर से शुभकामनाएं भी दी थीं। 2013 में हानिया को हमास का डिप्टी चीफ अपॉइंट किया गया था 2013 में हानिया को हमास का डिप्टी चीफ अपॉइंट किया गया था और चार साल बाद 2017 में हमास के फैसले लेने वाली ‘शूरा काउंसिल’ ने उसे हमास का चीफ अपॉइंट कर दिया। जब हानिया के पास गाजा की सत्ता आई तो उसने गाजा पट्‌टी में हर चीज के आयात टैक्स बढ़ा दिया। मिस्र से आने वाली हर चीज पर हानिया रिश्वत लेने के लिए कुख्यात था। इजराइली वेबसाइट वायनेट (Ynet) के अनुसार हमास ने गाजा पट्‌टी में जो सुरंगे बनाई हैं, उस पर भी हानिया की 20% हिस्सेदारी थी। बुनियादी सामानों पर भी खूब टैक्स वसूला जाता था। फिलिस्तीन के लोगों ने इसका विरोध भी किया था। 33 हजार करोड़ की संपत्ति का मालिक, गाजा पर शासन से खूब पैसा कमाया UK के अखबार द टाइम्स के मुताबिक इस्माइल हानिया के पास 33 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति थी। हानिया के पास गाजा में ही कई बड़ी इमारतें और विला थे। इसके अलावा कतर और कई अरब देशों में उसके होटल्स हैं। जिसे उसके बेटे और दामाद संभालते हैं। द टाइम्स की पत्रकार मेलानी स्वान ने पिछले साल इस्माइल हानिया की हत्या से पहले इंटरव्यू किया था। मेलानी ने पूछा कि गाजा में लोग मुफलिसी में जी रहे हैं, जबकि आप यहां कतर में आलीशान जिंदगी जी रहे हैं। इस सवाल के बावजूद हानिया के चेहरे पर कोई शिकन नहीं आई थी। हानिया के एक शादी से 13 बच्चे, 47 की उम्र में दोस्त की पत्नी से दूसरी शादी की यूरोप एंड मिडल ईस्ट न्यूज वेबसाइट के अनुसार इस्माइल हानिया ने दो शादियां की थी। हानिया की दूसरी पत्नी का नाम अभी तक सामने नहीं आया। हानिया ने 2009 में 47 की उम्र में दूसरी शादी की थी। उसकी पहली पत्नी का नाम अमाल था, जो उसके अंकल की बेटी थी। इस वेबसाइट के अनुसार हानिया के 13 बच्चे हैं, जो उनकी पहली पत्नी से हैं। पहली शादी के तीस साल बाद उसने दूसरी शादी की। बताया जाता है जिस महिला से दूसरी शादी हुई है वो हानिया के एक दोस्त की पत्नी थी, जिसकी हत्या हमास के एक ऑपरेशन के दौरान इजराइली सैनिकों ने कर दी थी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 13:34:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>गडकरी, हमास, चीफ, की, हत्या, से, पहले, उनसे, मिले, थे:ईरानी, राष्ट्रपति, के, शपथ, ग्रहण, में, मुलाकात, हुई, कुछ, घंटे, बाद, इजराइल, ने, मार, दिया</media:keywords>
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<title>ट्रेड वार्ता में भारत का अमेरिका को फाइनल ऑफर:टैरिफ 50% से घटाकर 15% करो, रूसी तेल पर लगी पेनाल्टी भी खत्म हो</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने अमेरिका के सामने ट्रेड वार्ता में अपना आखिरी प्रस्ताव रख दिया है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनाल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत चल रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि समझौते पर जल्द सहमति बन सकती है, हालांकि उन्होंने कोई तय समय सीमा नहीं बताई। इस हफ्ते भारत और अमेरिका की व्यापार टीमों के बीच दिल्ली में बैठक हुई। बातचीत दो मुद्दों पर हो रही है। पहला एक बड़े और स्थायी व्यापार समझौते पर और दूसरा अमेरिका की तरफ से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को हटाने या कम करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर। अगर अमेरिका भारत का प्रस्ताव मान लेता है अगर अमेरिका भारत पर लगाया गया 50% टैक्स घटाकर 15% कर देता है और रूस से तेल खरीदने पर 25% की पेनाल्टी हटा देता है, तो- अगर अमेरिका भारत का प्रस्ताव नहीं मानता है अगर अमेरिका टैरिफ कम नहीं करता और पेनाल्टी भी जारी रखता है, तो- 25% टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से  अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है। इसमें से 25% को वह ‘रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ’ कहता है। जबकि 25% रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। भारत का कहना है कि यह पेनाल्टी गलत है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। रूसी तेल की खरीद में गिरावट दर्ज हो सकती है उम्मीद की एक वजह यह भी है कि जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था, जिस पर ट्रम्प प्रशासन ने कई बार सवाल उठाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। भारत EU के जैसे ही राहत चाहता है अब भारत की कोशिश है कि बचे हुए 25% टैरिफ को भी घटाकर 15% किया जाए, ताकि भारत को वही राहत मिले जो यूरोपीय यूनियन (EU) को मिल रही है। अगर टैरिफ इससे ज्यादा रहा, तो भारतीय निर्यातकों को दूसरे देशों के मुकाबले नुकसान होगा। उदाहरण के तौर पर, इंडोनेशिया पर अमेरिकी टैरिफ पहले 32% था, जिसे घटाकर 19% कर दिया गया है। भारत का साफ कहना है कि उसे भी समान स्तर पर राहत मिलनी चाहिए। भारत ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है, रूसी तेल पर लगी पेनाल्टी खत्म की जाए और कुल टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए। अब गेंद अमेरिका के पाले में है और सबकी नजर राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले पर टिकी है। ---------------- यह खबर भी पढ़ें... भारत को रूस से सस्ता तेल क्यों नहीं मिल रहा:अमेरिका, सऊदी और UAE से खरीद बढ़ी; ट्रम्प की धमकी या कोई और वजह भारत ने 4 साल में पहली बार रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2024 में रूस का शेयर 41% था जो सितंबर 2025 में घटकर 31% रह गया। इसकी एक बड़ी वजह भारत पर अमेरिका का 25% एक्स्ट्रा टैरिफ है। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 13:34:41 +0530</pubDate>
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<title>चीनी सैन्य अफसर का VIDEO 35 साल बाद लीक:बताया थियानमेन स्क्वायर पर गोली क्यों नहीं चलाई, इसमें 10 हजार छात्रों को कुचलने की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ चीन में 1989 के थियानमेन स्क्वायर पर लोकतंत्र की मांग करने वाले हजारों छात्रों को मरवा दिया गया था। इस आंदोलन से जुड़ा एक सीक्रेट वीडियो 35 साल बाद सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जाती है कि इस दौरान 10 हजार छात्रों को टैंक से कुचल दिया गया था। हालांकि आधिकारिक आंकड़ा कभी सामने नहीं आया। यह जो सीक्रेट वीडियो सामने आया है वो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का है। जनरल शू बताते हैं कि उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने और सैन्य कार्रवाई का आदेश मानने से इनकार क्यों किया था। 6 घंटे के वीडियो में जनरल शू कहते हैं कि थियानमेन आंदोलन एक राजनीतिक जन आंदोलन था। इसे बातचीत और राजनीतिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए था। उन्होंने साफ कहा कि वे इतिहास में अपराधी नहीं बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने जवानों को छात्रों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया। उस वक्त सरकार ने जनरल शू को बीजिंग भेजकर मार्शल लॉ लागू करने और करीब 15 हजार सैनिकों को तैनात करने का आदेश दिया था। हालांकि, उन्होंने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद चीनी सरकार ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की। सरकार ने जनरल शू को कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया था, साथ ही 5 साल की सजा सुनाई। पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ वीडियो जनरल शू छिनशियान के कोर्ट मार्शल का यह वीडियो पहली बार पिछले महीने ऑनलाइन लीक हुआ। इसके सोर्स की जानकारी नहीं है। इसे यूट्यूब पर 13 लाख से ज्यादा बार देखा चुका है। थियानमेन आंदोलन के इतिहासकार वू रेनहुआ ने इसे शेयर किया है। रेनहुआ कहना है कि यह वीडियो उस दौर की अंदरूनी सैन्य असहमति का सबसे अहम गवाह है। लीक वीडियो दिखाता है कि उस समय चीन की सेना के भीतर भी फैसलों को लेकर मतभेद थे। 1989 में थियानमेन स्क्वायर और उसके आसपास सेना की कार्रवाई में कई हजार लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है। यह घटना आज भी चीन में सबसे ज्यादा सेंसर किए जाने वाले मुद्दों में शामिल है। पूरा वीडियो यहां देख सकते हैं... 35 साल पहले थियानमेन स्क्वायर पर क्या हुआ था  चीन की राजधानी बीजिंग का थियानमेन स्क्वायर साल 1989 में एक बड़े जनआंदोलन का केंद्र बना। यह आंदोलन छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ, जो बाद में आम नागरिकों तक फैल गया। प्रदर्शनकारी सरकार से राजनीतिक सुधार, भ्रष्टाचार पर रोक और अभिव्यक्ति की आजादी की मांग कर रहे थे। आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1989 में सुधारवादी नेता हू याओबांग की मौत के बाद हुई। उनकी मौत की पीछे दिल का दौरा पड़ने को वजह बताया गया। हू याओबांग को राजनीतिक सुधारों का समर्थक माना जाता था। उनकी मौत के बाद छात्र बीजिंग में इकट्ठा होने लगे और सरकार से भ्रष्टाचार खत्म करने, अभिव्यक्ति की आजादी, लोकतांत्रिक सुधार जैसी मांगें करने लगे। देखते ही देखते हजारों छात्र और नागरिक थियानमेन स्क्वायर पर जमा हो गए। 13 मई से प्रदर्शन शुरू हो गया जो कई हफ्तों तक शांतिपूर्ण रहा। सरकार ने मॉर्शल लॉ लगाकर नरसंहार किया चीनी सरकार ने स्थिति बिगड़ती देख बीजिंग में मार्शल लॉ लागू कर दिया। 3 और 4 जून 1989 की रात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को राजधानी में तैनात किया गया। टैंकों और हथियारबंद सैनिकों ने थियानमेन स्क्वायर और उसके आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों और आम लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। घटना के बाद एक तस्वीर दुनियाभर में वायरल हुई। एक अकेला युवक टैंकों के सामने खड़ा होकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करता है। इस व्यक्ति की पहचान आज तक सामने नहीं आई, लेकिन वह साहस और विरोध का वैश्विक प्रतीक बन गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक घटना में सिर्फ कुछ सौ लोग मारे गए। लेकिन BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में मारे जाने वालों का आंकड़ा 10 हजार के पार था। क्यों हुई थियानमेन स्क्वायर की घटना  1980 के दशक के आखिर में चीन तेज आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा था। बाजार खुले, शहर बदले, लेकिन राजनीति वही रही। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रहे इतिहासकार एंड्रयू नाथन अपनी किताब चाइना क्राइसिस में लिखते हैं कि आर्थिक सुधारों ने उम्मीदें तो बढ़ाईं, लेकिन राजनीतिक ढांचा बंद ही रहा। यही विरोधाभास असंतोष की जड़ बना। विश्वविद्यालयों के छात्र सबसे पहले सवाल उठाने लगे। उन्हें लगने लगा कि भ्रष्टाचार बढ़ रहा है और आम लोगों की आवाज सत्ता तक नहीं पहुंच रही। BBC की पूर्व पत्रकार और लेखक लुईसा लिम अपनी किताब ‘द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ एम्नीसिया में बताती हैं, छात्रों को लग रहा था कि अगर अभी नहीं बोले, तो यह मौका हमेशा के लिए खो जाएगा। पत्रकार लुईसा लिम के मुताबिक धीरे-धीरे छात्रों का जमावड़ा एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। चौक पर बहसें होती थीं, भाषण होते थे, लोग भविष्य की बात करते थे। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उम्मीद थी। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोसेफ टोरिजियन की रिसर्च के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व को डर था कि यह आंदोलन पार्टी की सर्वोच्च सत्ता को चुनौती दे सकता है। सरकार के सामने संवाद या सख्ती दो ही रास्ते थे। ब्रिटिश अखबार गार्जियन और ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट्स बताती हैं कि शीर्ष नेतृत्व ने इसे राजनीतिक खतरा माना और सेना उतारने का फैसला किया। 3 और 4 जून 1989 की रात हालात पलट गए। सेना आगे बढ़ी, गोलियां चलीं और आंदोलन को बलपूर्वक खत्म कर दिया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, इसमें सैकड़ों से लेकर हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जाती है, हालांकि चीन ने कभी आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए। ---------------------------- चीन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... अमेरिका की भारत को चेतावनी- चीन दोहरी चाल चल रहा:एक तरफ दिल्ली से रिश्ते सुधारने की कोशिश, दूसरी तरफ पाकिस्तान को हथियार दे रहा अमेरिका ने भारत को चीन की दोहरी रणनीति को लेकर चेतावनी दी है। पेंटागन की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन एक तरफ भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 13:34:41 +0530</pubDate>
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<title>ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारतीय&#45;पाकिस्तानी छात्र में डिबेट:भारतीय छात्र बोला&#45; बेशर्म देश को शर्मिंदा नहीं कर सकते, मुंबई हमले से हमें कड़वा सबक मिला</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी में भारतीय और पाकिस्तानी छात्र के बीच डिबेट हुई थी। इस डिबेट में भारतीय पक्ष की तरफ से मुंबई के छात्र विरांश भानुशाली और पाकिस्तानी पक्ष की तरफ से मूसा हर्राज ने हिस्सा लिया था। यह डिबेट 27 नवंबर को हुई थी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। बहस का टाइटल ‘India’s Policy Towards Pakistan is a Populist Strategy Sold as Security Policy’ रखा गया था। बहस के दौरान भानुशाली ने मुंबई के 26/11 हमले को कड़वा सबक बताते हुए कहा कि हमने यह बात मुश्किल तरीके से सीखी है कि जिस देश (पाकिस्तान) में शर्म नहीं होती, उसे आप शर्मिंदा नहीं कर सकते। विरांश बोले- भारत की पॉलिसी दिखावे की नहीं, सुरक्षा की बहस के दौरान मूसा हर्राज ने भारतीय पक्ष पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा- भारत में जब भी कोई समस्या होती है, हर बात के लिए पाकिस्तान को दोष दे दिया जाता है। भारत की सरकार पाकिस्तान के नाम पर डर दिखाकर लोगों का समर्थन पाना चाहती है। क्या यह सुरक्षा है या सिर्फ राजनीति? इस पर विरांश भानुशाली ने तार्किक जवाब दिया। उन्होंने कहा- मैं मुंबई से हूं। मैंने 26/11 के हमले अपनी आंखों के सामने होते देखे हैं। उस रात मेरी मौसी उसी स्टेशन से गुजरती थीं, जहां आतंकियों ने हमला किया। वह संयोग से बच गईं, लेकिन 166 लोग नहीं बच सके। क्या आप इसे राजनीति कहेंगे? हर्राज ने फिर सवाल किया- लेकिन हर देश में हिंसा होती है। क्या हर बार सख्त नीति अपनाना जरूरी है? क्या यह जनता को खुश करने का तरीका नहीं है? भानुशाली ने जवाब दिया- अगर घर के आस-पास चोरियां हो रही हों, तो क्या आप दरवाजे पर ताला नहीं लगाएंगे? क्या ताला लगाना दिखावा है या सुरक्षा? भारत की नीति भी ऐसी ही है। &#039;भारत पर आतंकवाद को थोपा गया&#039; बहस के दौरान भानुशाली ने कहा कि इस बहस को जीतने के लिए मुझे भाषण नहीं, सिर्फ एक कैलेंडर चाहिए। उन्होंने तारीखें गिनाते हुए पूछा कि 1993 में मुंबई धमाके हुए, तब कौन सा चुनाव था? 2008 में 26/11 हुआ, तब कौन सा चुनाव था? पठानकोट, उरी, पुलवामा, क्या ये सब सिर्फ वोट के लिए हुए? नहीं, ये हमले इसलिए हुए क्योंकि आतंकवाद लगातार भारत पर थोपा गया। इस पर हर्राज ने कहा- अगर ऐसा है, तो 26/11 के बाद भारत ने युद्ध क्यों नहीं किया? अगर खतरा इतना बड़ा था तो? भानुशाली ने जवाब दिया- क्योंकि भारत ने जिम्मेदारी दिखाई। उस समय जनता का गुस्सा बहुत था। अगर सरकार सिर्फ लोकप्रिय होना चाहती, तो तुरंत हमला करती। लेकिन भारत ने संयम रखा, सबूत दिए, दुनिया को दिखाया कि कौन दोषी है। यह राजनीति नहीं, समझदारी थी। फिर भानुशाली ने सवाल किया- क्या उस संयम से शांति मिली? नहीं। उसके बाद भी पठानकोट, उरी और पुलवामा हुए। तो हमें अपनी सुरक्षा को गंभीरता से लेना ही पड़ेगा। विरांश बोले- पहलगाम में पर्यटकों को धर्म पूछकर मारा गया हर्राज ने कहा कि आप (भारत) आज भी हर घटना के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हैं। क्या यह सही है? भानुशाली ने जवाब दिया- हाल ही में पहलगाम में पर्यटकों को धर्म पूछकर मारा गया। उन्होंने यह नहीं पूछा कि उन्होंने किसे वोट दिया। वे सिर्फ भारतीय थे। क्या यह भी राजनीति है? इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान पर तंज किया। उन्होंने कहा- अगर असली दिखावटी राजनीति कहीं है, तो वह पाकिस्तान में है। जब भारत कोई कार्रवाई करता है, तो हम जांच करते हैं। लेकिन वहां इसे जश्न और तमाशा बना दिया जाता है। जब आप अपने लोगों को रोटी नहीं दे सकते, तो उन्हें तमाशा दिखाते हैं। &#039;भारत आतंकवाद नहीं बल्कि शांति चाहता है&#039; बहस के दौरान हर्राज ने कहा कि तो क्या भारत युद्ध चाहता है? इस पर विरांश भानुशाली ने साफ कहा कि नहीं। भारत युद्ध नहीं चाहता। हम शांत पड़ोसी बनकर रहना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि व्यापार हो, एनर्जी और प्रोडक्ट का आदान-प्रदान हो। लेकिन जब तक आतंकवाद को पॉलिसी की तरह इस्तेमाल किया जाएगा, तब तक हम चुप नहीं बैठ सकते। अंत में उन्होंने ने कहा कि अगर अपने लोगों की जान बचाना लोकप्रिय कहलाता है, तो हां, हम लोकप्रिय हैं। लेकिन यह राजनीति नहीं, जिम्मेदारी है। नवंबर में ही भारत-पाकिस्तान की डिबेट कैंसिल हुई थी विरांश और मूसा हर्राज की डिबेट से एक दिन पहले ही ऑक्सफोर्ड यूनियन में भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाली डिबेट कैंसिल हो गई थी। पाकिस्तान और भारत के वक्ताओं को इस डिबेट में हिस्सा लेना था। अब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बैठक से पीछे हटने का आरोप लगाया था। पहले पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारतीय वक्ता ऑक्सफोर्ड यूनियन में होने वाली डिबेट से पहले आखिरी मौके पर भाग गए थे, इसलिए उन्हें ‘वॉकओवर’ (बिना लड़े मिली जीत) मिल गया। इसके बाद भारतीय सीनियर एडवोकेट जे साई दीपक ने आरोपों को झूठा बताते हुए खुलासा किया कि पाकिस्तानी टीम ही आखिरी वक्त पर बहस में शामिल नहीं हुई, जिसके बाद डिबेट को रद्द करना पड़ा। दीपक ने सबूत के तौर पर ईमेल और कॉल रिकॉर्ड पेश किए। उन्होंने कहा कि, भारतीय टीम बहस के लिए तैयार थी, लेकिन पाकिस्तान ने डिबेट कैंसिल करवा दी। पढ़ें पूरी खबर... ऑक्सफोर्ड यूनियन को जानिए जहां बहस हुई थी... ऑक्सफोर्ड यूनियन (OU) दुनिया की सबसे पुरानी स्टूडेंट डिबेट सोसाइटी है। 1823 में स्थापित OU को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र चलाते हैं। हालांकि यह यूनिवर्सिटी का आधिकारिक हिस्सा नहीं है। यह एक आजाद छात्र संगठन है। OU में दुनियाभर के बड़े नेता, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, अभिनेता, लेखक भाषण दे चुके हैं। बहसें लाइव होती हैं, जिसे यूट्यूब पर लाखों-करोड़ों लोग देखते हैं। बहस के बाद जीत-हार दर्शकों के वोट से तय होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:54:05 +0530</pubDate>
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<title>लीबिया के आर्मी चीफ की प्लेन क्रैश में मौत:7 और लोग भी मारे गए, तुर्किए में उड़ान भरने के 30 मिनट बाद हादसा</title>
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<description><![CDATA[ लीबियाई की सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अल-हद्दाद की मंगलवार रात तुर्किये में प्लेन क्रैश में मौत हो गई। प्लेन में 8 लोग सवार थे, सभी की मौके पर ही मौत हो गई। तुर्किये के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि फाल्कन-50 विमान का मलबा अंकारा के पास हायमाना इलाके में मिला है। विमान में टेकऑफ के 30 मिनट बाद ही तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ। यह लीबियाई मिलिट्री डेलिगेशन अंकारा में तुर्किये के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर हाई लेवल बातचीत के लिए आया था और वापस लीबिया लौट रहा था। हादसे में मरने वालों में लीबिया के थल सेना प्रमुख जनरल अल-फितूरी घ्रैबिल, ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मोहम्मद अल-असावी दियाब, सैन्य फोटोग्राफर मोहम्मद ओमर अहमद महजूब और 3 क्रू मेंबर शामिल हैं। हादसे की 5 तस्वीरें... प्लेन ने इमरजेंसी लैंडिंग का मैसेज भेजा था लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुल-हामिद दबैबा ने फेसबुक पर बयान जारी कर जनरल अल-हद्दाद और अन्य अधिकारियों की मौत की पुष्टि की और इसे देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान बताया। तुर्किये के गृह मंत्री अली यरलीकाया के मुताबिक, विमान लोकल समय के मुताबिक रात करीब 8 बजे अंकारा के एसनबोगा एयरपोर्ट से उड़ा था और कुछ देर बाद संपर्क टूट गया। प्लेन ने हायमाना इलाके के पास आपात लैंडिंग का संकेत भेजा था, लेकिन इसके बाद कोई संपर्क नहीं हो सका। अंकारा एयरपोर्ट अस्थायी रूप से बंद स्थानीय टीवी चैनलों पर जारी सीसीटीवी फुटेज में रात के आसमान में तेज रोशनी और विस्फोट जैसा दृश्य दिखा। विमान का मलबा अंकारा से करीब 70 किलोमीटर दक्षिण हायमाना जिले के एक गांव के पास मिला। हादसे के बाद अंकारा एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजा गया। तुर्किये के न्याय मंत्रालय ने हादसे की जांच के लिए चार अधिकारियों की नियुक्ति की है। वहीं, लीबिया सरकार ने भी जांच में सहयोग के लिए अपनी टीम अंकारा भेजने का फैसला किया है। चश्मदीद बोले- ऐसा लगा जैसे बम फटा हो हायमाना के एक स्थानीय निवासी बुरहान चिचेक ने बताया कि उन्होंने जोरदार धमाके की आवाज सुनी। उन्होंने कहा- ऐसा लगा जैसे कोई बम फटा हो। तुर्किये की मीडिया में भी ऐसी तस्वीरें दिखाई गईं, जिनमें हादसे के समय आसमान में तेज रोशनी नजर आई। हादसे की सूचना मिलते ही अंकारा में लीबिया के राजदूत भी मौके पर पहुंचे। लीबिया सरकार के मंत्री वालिद अल्लाफी ने बताया कि तुर्की सरकार ने उन्हें तुरंत घटना की जानकारी दी और कहा कि तकनीकी खराबी के कारण विमान से संपर्क टूट गया था। मोहम्मद अल-हद्दाद अगस्त 2020 से लीबियाई सेना के चीफ ऑफ स्टाफ थे। उन्हें उस समय के प्रधानमंत्री फाएज़ अल-सर्राज ने इस पद पर नियुक्त किया था। लीबिया कई सालों से राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। देश दो हिस्सों में बंटा हुआ है एक तरफ त्रिपोली में UN समर्थित सरकार है, जिसकी अगुवाई अब्दुलहमीद दबीबा कर रहे हैं। वही दूसरी तरफ पूर्वी लीबिया में कमांडर खलीफा हफ्तार का प्रशासन है। 2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहे नेता मुअम्मर गद्दाफी की मौत के बाद से देश में अस्थिरता बनी हुई है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें... मेक्सिको में इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान प्लेन क्रैश:7 की मौत, फुटबॉल ग्राउंड पर लैंडिंग की कोशिश में विमान फैक्ट्री की छत से टकराया मेक्सिको में मंगलवार को इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान एक प्राइवेट जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई और 3 लापता हैं। हादसे का शिकार हुआ प्राइवेट प्लेन सोमवार को अकापुल्को से तोलुका एयरपोर्ट जा रहा था। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में नर्सिंग होम में धमाका, इमारत का हिस्सा ढहा; कई लोग घायल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य में फिलाडेल्फिया के पास ब्रिस्टल हेल्थ एंड रिहैब सेंटर नाम के नर्सिंग होम में मंगलवार दोपहर जोरदार धमाका हो गया। धमाके से इमारत का एक हिस्सा ढह गया और कई लोग घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों के अंदर फंसे होने की भी आशंका है। धमाका स्थानीय समय के मुताबिक, दोपहर करीब 2:17 बजे हुआ। इससे पहले नर्सिंग होम में गैस की गंध की शिकायत मिली थी, जिसके बाद गैस कंपनी की टीम जांच के लिए पहुंची थी। इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। घटनास्थल से काला धुआं उठता देखा गया और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बताया कि सभी निवासियों को बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि कोई लापता है या नहीं। गैस और बिजली की सप्लाई बंद कर दी गई है। हादसे की असली वजह जानने के लिए जांच जारी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य खबरें... एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की नई फाइल्स रिलीज हुईं:30 हजार पन्नों के दस्तावेज सामने आए; इनमें ट्रम्प का सैकड़ों बार जिक्र अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले में करीब 30 हजार पन्नों के नए दस्तावेज जारी किए हैं। इन फाइलों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का सैकड़ों बार जिक्र है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रम्प का नाम ज्यादातर बार किसी खबर या रिकॉर्ड के तौर पर दर्ज है, लेकिन कुछ दस्तावेज सीधे तौर पर ट्रम्प से जुड़े हैं। इनमें जनवरी 2020 का एक ईमेल भी शामिल है। इस ईमेल में कहा गया है कि ट्रम्प ने 1993 से 1996 के बीच एपस्टीन के निजी विमान से आठ उड़ानें भरी थीं। ईमेल के मुताबिक एक उड़ान में सिर्फ एपस्टीन, ट्रम्प और 20 साल के एक व्यक्ति थे। बाकी उड़ानों में ट्रम्प के साथ उनकी पूर्व पत्नी मार्ला मैपल्स, बेटी टिफनी और बेटे एरिक भी थे। पढ़ें पूरी खबर... प्लेन क्रैश- लीबिया के सेना प्रमुख समेत 8 की मौत:तकनीकी खराबी के चलते हादसा; तुर्किये से लीबिया लौट रहे थे तुर्किये की राजधानी अंकारा से मंगलवार रात उड़ान भरने के कुछ देर बाद निजी जेट प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में लीबिया के सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई। लीबियाई अधिकारियों के मुताबिक, विमान में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके चलते यह दुर्घटना हुई। यह लीबियाई सैन्य प्रतिनिधिमंडल अंकारा में तुर्किये के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत के लिए आया था और वापस लीबिया लौट रहा था। हादसे में मरने वालों में लीबिया के थल सेना प्रमुख जनरल अल-फितूरी घ्रैबिल, ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मोहम्मद अल-असावी दियाब, सैन्य फोटोग्राफर मोहम्मद ओमर अहमद महजूब और 3 क्रू मेंबर शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 11:54:05 +0530</pubDate>
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<title>ट्रम्प ने सालभर में ₹18 हजार करोड़ चंदा लिया:बदले में करोड़ों के फायदे दिए; लिस्ट में सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे 6 भारतवंशी शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर चंदा जुटाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच में सामने आया है कि चुनाव के बाद ट्रम्प और उनके करीबियों ने करीब 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपए) अलग-अलग फंड और योजनाओं के लिए इकट्ठा किए। यह रकम उनके इलेक्शन कैंपेन के लिए जुटाई गई राशि से भी ज्यादा है। इस जांच के मुताबिक, टाइम्स ने सरकारी कागजात, फंडिंग रिकॉर्ड और कई लोगों से बातचीत करके पता लगाया कि कम से कम 346 बड़े दानदाता ऐसे हैं, जिनमें से हर एक ने 2.5 लाख डॉलर या उससे ज्यादा का चंदा दिया। इन लोगों से ही करीब 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम आई। इनमें से लगभग 200 दानदाता ऐसे हैं, जिन्हें या जिनके कारोबार को ट्रम्प सरकार के फैसलों से फायदा मिला। इनमें सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे 6 भारतवंशी बिजनेसमैन शामिल हैं। इन फायदों में कई बातें शामिल हैं। किसी को राष्ट्रपति की तरफ से माफी मिली, किसी के खिलाफ चल रहे केस खत्म हो गए, किसी कंपनी को बड़े सरकारी ठेके मिल गए तो किसी को सीधे व्हाइट हाउस तक पहुंच मिली या सरकार में बड़ा पद दिया गया। हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि यह साबित करना मुश्किल है कि किसी ने पैसा दिया और बदले में सीधा फायदा मिला, लेकिन इतना जरूर है कि पैसे और फायदों का यह रिश्ता सवाल खड़े करता है। अब जानिए, ट्रम्प की टीम ने फंड कैसे जुटाया ट्रम्प की टीम ने पैसे जुटाने के लिए कई अलग-अलग रास्ते बनाए। इनमें सबसे बड़ा है MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) Inc., जो एक सुपर PAC है। PAC एक ऐसा संगठन होता है, जो राजनीति के लिए पैसा इकट्ठा करता है और उस पैसे से किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करता है। इसने नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच करीब 200 मिलियन डॉलर जुटाए। इसके अलावा ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए बनी कमेटी ने करीब 240 मिलियन डॉलर जुटाए, जो अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस में एक शानदार बॉलरूम बनाने के लिए भी चंदा लिया जा रहा है। ट्रम्प का कहना है कि इसके लिए करीब 350 मिलियन डॉलर जुट चुके हैं, हालांकि टाइम्स को करीब 100 मिलियन डॉलर के दानदाताओं की पुष्टि मिली है। यह पैसा &#039;ट्रस्ट फॉर दे नेशनल मॉल&#039; नाम के संगठन के जरिए लिया जा रहा है। दान देने वालों का नाम उजागर करना जरूरी नहीं इसके अलावा अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए बने संगठन &#039;अमेरिका250&#039;, व्हाइट हाउस हिस्टोरिकल एसोसिएशन और एक राजनीतिक समूह सिक्योरिंग अमेरिकन ग्रेटनेस के लिए भी पैसा जुटाया गया। इनमें से कई जगह दान देने वालों के नाम सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है, इसलिए पूरा सिस्टम काफी हद तक सीक्रेट बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प खुद इस पर नजर रखते हैं कि कौन कितना पैसा दे रहा है। उनकी फंडरेजिंग प्रमुख मेरिडिथ ओ’रूर्क उन्हें रेगुलर जानकारी देती हैं। कई लॉबिस्ट अपने क्लाइंट्स को सलाह देते हैं कि अगर ट्रम्प का ध्यान और पहुंच चाहिए तो इन संगठनों को दान देना फायदेमंद हो सकता है। दान के बदले कोई राजदूत बना, किसी को कॉन्ट्रैक्ट मिले रिपोर्ट में बताया गया है कि एक महिला ने MAGA Inc. को 25 लाख डॉलर दिए और कुछ महीनों बाद उसके पिता को जस्टिस डिपार्टमेंट से रिश्वत मामले में बहुत कम सजा मिली। इसी तरह एक इंजीनियरिंग कंपनी पार्सन्स ने बॉलरूम प्रोजेक्ट के लिए 25 लाख डॉलर दिए और वह ट्रम्प के गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे अरबों डॉलर के सरकारी ठेकों की दौड़ में है। वीडियो गेम कंपनी रोब्लॉक्स के CEO ने भी बड़ा दान दिया और ट्रम्प की AI से जुड़ी नीतियों की तारीफ की। एक दंपती ने शपथ समारोह और MAGA Inc. को मिलाकर करीब 15 लाख डॉलर से ज्यादा दिए और बाद में उनके बेटे को फिनलैंड में अमेरिकी राजदूत बना दिया गया। टेक कंपनी पैलेंटिर ने बॉलरूम के लिए 1 करोड़ डॉलर और &#039;अमेरिका250&#039; को 50 लाख डॉलर दिए। इसके बाद उसे ट्रम्प सरकार से सैकड़ों मिलियन डॉलर के सरकारी ठेके मिले, जिनमें इमिग्रेशन विभाग के लिए सॉफ्टवेयर बनाना भी शामिल है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह सब दान की वजह से नहीं हुआ। ट्रम्प ने खुद दाने वाले की व्हाइट हाउस में तारीफ की कैसीनो कारोबारी मिरियम एडेलसन के फाउंडेशन ने बॉलरूम के लिए करीब 2.5 करोड़ डॉलर देने का वादा किया। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में खुद उनकी तारीफ की और कहा कि उन्होंने उनके इलेक्शन कैंपेन में पहले भी बहुत पैसा दिया है। डिफेंस कंपनियों लॉकहीड मार्टीन और बोइंग ने भी शपथ समारोह और अन्य प्रोजेक्ट्स को लाखों डॉलर दिए। इसके बाद इन्हें फाइटर जेट और डिफेंस से जुड़े बड़े सरकारी फैसलों से फायदा मिला। कुछ मामलों में ट्रम्प ने दानदाताओं या उनसे जुड़े लोगों को राष्ट्रपति की माफी भी दी। एक इवेंट कंपनी के मालिक को, जिसकी कंपनी ने दान दिया था, बाद में ट्रम्प ने माफ कर दिया। इसी तरह MAGA Inc. को 10 लाख डॉलर देने वाली महिला के बेटे को टैक्स क्राइम के मामले में माफी मिल गई। क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों ने भी ट्रम्प सपोर्टेड ग्रुप्स को लाखों डॉलर दिए। इसके बाद सरकार ने उनके खिलाफ चल रहे कई केस और जांचें खत्म कर दीं और क्रिप्टो के फेवर में पॉलिसी अपनाईं। ऑयल, गैस और कोयला कंपनियों ने भी करोड़ों डॉलर दिए और बदले में पर्यावरण नियमों में ढील और ड्रिलिंग की इजाजत मिली। कई बिजनेसमैन ट्रम्प के साथ विदेश यात्रा पर गए कम से कम 100 बड़े दानदाता ऐसे हैं जो ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस में निजी डिनर में शामिल हुए, विदेश यात्राओं पर गए और राष्ट्रपति से सीधे मिले। कई बार सरकार की ओर से इन्हें सोशल मीडिया और प्रेस रिलीज में तारीफ के साथ दिखाया गया। व्हाइट हाउस ने इन सब आरोपों को नकारते हुए कहा है कि ट्रम्प का मकसद सिर्फ देश की भलाई है और दान देने वालों को शक की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कारोबारी और दानदाता डरते हैं कि अगर उन्होंने पैसा नहीं दिया तो कहीं राष्ट्रपति नाराज न हो जाएं। इसलिए कुछ लोग दान को एक तरह की सुरक्षा भी मानते हैं। ट्रम्प की टीम और ज्यादा फंड जुटाने की तैयारी में ट्रम्प की टीम आगे भी फंड जुटाने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में फिर बड़े डिनर रखे जाएंगे, जहां लाखों डॉलर देने वालों को ट्रम्प से मिलने का मौका मिलेगा। उनकी राष्ट्रपति लाइब्रेरी के लिए करीब 950 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना है। इसके अलावा &#039;फ्रीडम 250&#039; नाम से नया कैंपेन शुरू किया गया है, जिसमें अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने पर बड़े कार्यक्रम और स्मारक बनाने के लिए पैसा इकट्ठा किया जाएगा। कुल मिलाकर, न्यूयॉर्क टाइम्स की यह रिपोर्ट बताती है कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में चंदा जुटाने का तरीका और पैमाना दोनों ही असाधारण हैं। भले ही सीधा रिश्वत का सबूत न हो, लेकिन इतना जरूर है कि इससे अमेरिकी राजनीति में पारदर्शिता और नैतिकता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:36:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दिल्ली में VHP का बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन:बांग्लादेशी हिंदू युवक की मौत पर विरोध; युनूस सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन कर रहा है। VHP कार्यकर्ता सुबह 11 बजे से पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेश में 18 दिसंबर की रात हिंदू युवक दीपू चंद्र की हत्या कर दी गई थी। पहले यह दावा किया जा रहा था कि दीपू ने फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी, लेकिन शुरुआती जांच में इसका कोई सबूत नहीं मिला। इस बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया है। यह एक हफ्ते में दूसरी बार है, जब भारतीय उच्चायुक्त को बुलाया गया है। बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भारत विरोधी प्रदर्शनों और फिर मैमन सिंह जिले में दीपू की मॉब लिंचिंग को लेकर दोनों देशों के रिश्ते काफी बिगड़ गए हैं। । बांग्लादेश ने राजनयिक मिशनों पर हमले को लेकर चिंता जताई बांग्लादेश ने मंगलवार को भारत में अपने राजनयिक मिशनों पर हुए हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक इन्हीं घटनाओं के विरोध में भारत में तैनात भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया गया। ये घटनाएं नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुईं। बयान में कहा गया कि बांग्लादेश इस तरह की सोची-समझी हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं की कड़ी निंदा करता है। ऐसे कृत्य न सिर्फ राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं, बल्कि आपसी सम्मान, शांति और सहिष्णुता जैसे मूल्यों को भी कमजोर करते हैं। विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रणय वर्मा को भारत के अलग-अलग हिस्सों में स्थित बांग्लादेशी मिशनों के आसपास बन रही सुरक्षा स्थिति को लेकर बुलाया गया था। उनसे कहा गया कि भारत में मौजूद बांग्लादेश के सभी दूतावासों और संबंधित ठिकानों की सुरक्षा और कड़ी की जाए। तब बांग्लादेश ने आरोप लगाया था कि भारत में रहकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना लगातार ऐसे बयान दे रही हैं जिन्हें वह भड़काऊ मानता है।  बांग्लादेश बोला- भारत दूतावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करे बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने उच्चायुक्त से कहा कि इन घटनाओं से राजनयिक कर्मियों और दूतावासों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हुआ है। उसने भारत सरकार से अपील की कि वह इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। बयान में यह भी कहा गया कि बांग्लादेश सरकार ने भारत सरकार से इन घटनाओं की जांच कराने, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने और भारत में स्थित बांग्लादेश के राजनयिक मिशनों व उनसे जुड़ी सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। इन घटनाओं में 22 दिसंबर 2025 को सिलीगुड़ी में बांग्लादेश वीजा सेंटर में तोड़फोड़ और 20 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन शामिल है। बयान में कहा गया कि बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि भारत सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक जिम्मेदारियों के तहत तुरंत उचित कदम उठाएगी, ताकि राजनयिक कर्मियों और दूतावासों की गरिमा और सुरक्षा बनी रहे। इन्हीं सुरक्षा चिंताओं के चलते बांग्लादेश ने दिल्ली और सिलीगुड़ी में वीजा सेवाएं निलंबित कर दी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:36:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका के टेक्सास राज्य में मेक्सिकन नेवी का प्लेन क्रैश, 2 साल के बच्चे समेत 5 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के टेक्सास राज्य में सोमवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। मेक्सिकन नौसेना का एक विमान गैल्वेस्टन खाड़ी के पानी में गिर गया। इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें एक दो साल का बच्चा भी शामिल है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड्स ने इसकी पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि विमान में कुल आठ लोग सवार थे। इनमें से चार लोगों को जिंदा बचा लिया गया, जबकि एक इंसान अब भी लापता है, जिसकी तलाश जारी है। यह विमान आग में झुलसे हुए मरीजों को इलाज के लिए ले जा रहा था। इनमें बच्चे भी शामिल थे। विमान में मौजूद कुछ लोग एक संस्था से जुड़े थे, जो आग से झुलसे बच्चों की मदद करती है। गैल्वेस्टन काउंटी के शेरिफ ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, गोताखोर, ड्रोन टीम और दूसरी आपात सेवाएं मौके पर भेजी गईं। इसके तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। मेक्सिकन नौसेना ने भी हादसे की पुष्टि की है और कहा है कि वह अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। साथ ही ह्यूस्टन में मेक्सिकन दूतावास से भी संपर्क किया गया है। इस हादसे की जांच अब FAA और NTSB जैसी अमेरिकी एजेंसियां कर रही हैं, ताकि पता चल सके कि विमान कैसे और क्यों गिरा। फिलहाल हादसे की असली वजह साफ नहीं हो पाई है। बचाव दल लापता इंसान की तलाश में जुटा है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... ट्रम्प का दावा- उन्होंने 8 युद्ध रुकवाए, भारत-पाक के बीच परमाणु जंग भी टाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्होंने दुनिया में कई बड़े युद्ध और टकराव रुकवाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने दावा किया कि अब तक वह 8 युद्धों को सुलझा चुके हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध अभी भी ऐसा मुद्दा है, जिसे वह हल नहीं कर पाए हैं। ट्रम्प ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच बहुत ज्यादा नफरत है, जिस वजह से यह जंग खत्म कराना बेहद मुश्किल हो गया है। अपने बयानों में ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच बढ़ते तनाव को भी संभालने में मदद की है और हालात अब काफी हद तक नियंत्रण में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक संभावित परमाणु युद्ध को रोक दिया था। ट्रम्प के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि ट्रम्प ने करीब 1 करोड़ लोगों की जान बचाई, शायद उससे भी ज्यादा। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौरान हालात इतने खराब हो गए थे कि 8 विमान मार गिराए गए थे और युद्ध तेजी से भड़क रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब तक मैंने 8 युद्ध सुलझाए हैं। सिर्फ एक ही युद्ध है, जिसे मैं अब तक हल नहीं कर पाया हूं और वह रूस-यूक्रेन युद्ध है । अमेरिका ने H-1B और H-4 वीजा जांच सख्त की:अब सोशल मीडिया भी चेक किया जाएगा, कई महीनों के लिए इंटरव्यू टाले गए अमेरिका ने H-1B और H-4 वीजा के सभी आवेदकों की जांच सख्त कर दी है। 15 दिसंबर से अब वीजा प्रक्रिया में ऑनलाइन और सोशल मीडिया की जांच भी शामिल कर दी गई है। यह नियम दुनिया भर के सभी देशों के आवेदकों पर लागू होगा। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा कि यह कदम H-1B वीजा के दुरुपयोग और अवैध इमिग्रेशन पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारत में हजारों आवेदकों के तय वीजा इंटरव्यू टाल दिए गए हैं। कई इंटरव्यू अब मार्च से मई तक के लिए रीशेड्यूल किए गए हैं। इससे वे लोग ज्यादा परेशान हैं, जो इंटरव्यू के लिए पहले ही भारत आ चुके हैं और वीजा न होने के कारण अमेरिका वापस नहीं जा पा रहे। पढ़ें पूरी खबर... गाजा ₹9.3 लाख करोड़ में स्मार्ट सिटी बनेगी:ट्रम्प सरकार ₹5 लाख करोड़ देगी; यहां लग्जरी रिसॉर्ट होंगे और हाई स्पीड ट्रेन चलेगी अमेरिका ने युद्ध से तबाह हो चुके गाजा को दोबारा खड़ा करने के लिए एक बहुत बड़ी योजना पेश की है। इस योजना के तहत गाजा को करीब ₹9.3 लाख करोड़ (112 अरब डॉलर) की लागत से एक आधुनिक स्मार्ट सिटी में बदला जाएगा। इसमें से लगभग ₹5 लाख करोड़ (60 अरब डॉलर) की मदद अमेरिकी सरकार देगी। इस प्रोजेक्ट में लग्जरी रिसॉर्ट, बीच होटल और हाई-स्पीड ट्रेन जैसी सुविधाएं बनाने की बात कही गई है। इस योजना को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर और अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने तैयार किया है। इसे ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ नाम दिया गया है। इसका मकसद सिर्फ गाजा को मलबे से बाहर निकालना नहीं, बल्कि उसे एक आधुनिक, तकनीक से चलने वाला और अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाना है। निवेशक देशों के सामने इस प्रोजेक्ट को 32 स्लाइड की पावरपाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर... अमेरिका ने यौन अपराधी एपस्टीन का फर्जी वीडियो जारी किया:इसमें वो जेल में आत्महत्या की कोशिश कर रहा; बाद में हटाया अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) ने सोमवार रात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जेल में मौत से जुड़ा एक वीडियो जारी किया। यह वीडियो सिर्फ 12 सेकंड का था और इसमें जेल की कोठरी में एक आदमी आत्महत्या की कोशिश करता हुआ दिख रहा था। वीडियो का समय एपस्टीन की मौत से करीब दो घंटे पहले 10 अगस्त 2019 सुबह 4:29 बजे का बताया गया। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, थोड़ी ही देर में साफ हो गया कि यह वीडियो असली नहीं, बल्कि AI से बनाया गया फर्जी वीडियो है। यह 4chan वेबसाइट और यूट्यूब पर पहले से मौजूद था। 4chan ऑनलाइन इमेजबोर्ड वेबसाइट है, जहां लोग बिना नाम बताए पोस्ट कर सकते हैं। बाद में DOJ ने यह वीडिो अपनी वेबसाइट से तुरंत हटा लिया। शुरुआत में लोगों को लगा कि एपस्टीन की मौत का असली वीडियो सामने आ गया है, इसलिए सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। लेकिन ध्यान से देखने पर वीडियो में कई गड़बड़ियां दिखीं, जैसे जेल के कपड़े जमीन पर अजीब तरीके से पड़े होना और कोठरी का दरवाजा असली जेल से अलग दिखना। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:36:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>हसीना बोलीं&#45; बांग्लादेश में भारत विरोध के लिए यूनुस जिम्मेदार:उनके समर्थन से कट्टरपंथी हिंसा कर रहे, अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश में बढ़ती भारत विरोधी भावना के लिए अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को जिम्मेदार ठहराया है। ANI न्यूज एजेंसी से बात करते हुए हसीना ने भारत को बांग्लादेश का सबसे भरोसेमंद दोस्त बताया। उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार की नीतियों से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। अंतरिम सरकार भारत के खिलाफ बयान दे रही है और अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में नाकाम रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह बिल्कुल सही है। हसीना के मुताबिक, कुछ कट्टरपंथी ताकतें खुलकर हिंसा कर रही हैं, जिन्होंने भारतीय दूतावास, मीडिया दफ्तरों और अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। यूनुस सरकार ऐसे लोगों को संरक्षण दे रही है और यहां तक कि सजा पाए आतंकियों को भी रिहा किया गया है। कहा- बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता दक्षिण एशिया के लिए खतरा शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश इसलिए छोड़ा ताकि और खून-खराबा न हो, न कि इसलिए कि उन्हें कानून से डर था। उनका कहना है कि आज देश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है और हिंसा आम बात बन गई है। उन्होंने कट्टर इस्लामी संगठनों के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई और कहा कि यह न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए खतरा है। हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार बाहर की दुनिया को उदार चेहरा दिखा रही है, लेकिन देश के अंदर कट्टरपंथियों को ताकत दे रही है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर दिए जा रहे बयानों पर हसीना ने कहा कि पड़ोसी देश को धमकाना गैर-जिम्मेदाराना है और यह बांग्लादेशी जनता की सोच नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि लोकतंत्र लौटते ही ऐसे बयान खत्म हो जाएंगे। शेख हसीना ने कहा कि जब बांग्लादेश में फिर से चुनी हुई सरकार आएगी, तब भारत के साथ रिश्ते भी पहले जैसे मजबूत और दोस्ताना हो जाएंगे। उन्होंने भारत को मिले सहयोग और मेहमाननवाजी के लिए आभार भी जताया। शेख हसीना फिलहाल बांग्लादेश नहीं लौटेंगी हसीना ने बताया कि वह अभी अपने देश वापस नहीं जाएंगी। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उनके खिलाफ जो कार्रवाई हो रही है, वह न्याय नहीं बल्कि राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब तक बांग्लादेश में सही सरकार नहीं बनती और अदालतें स्वतंत्र नहीं होतीं, तब तक उनकी वापसी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आप मुझसे यह उम्मीद नहीं कर सकते कि मैं अपनी राजनीतिक हत्या के लिए लौटूं। उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस को चुनौती दी कि अगर उन्हें लगता है कि वे सही हैं, तो इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत हेग में ले जाएं। हसीना को भरोसा है कि कोई निष्पक्ष अदालत उन्हें निर्दोष साबित करेगी। हसीना ने उन्हें दी गई मौत की सजा को खारिज किया शेख हसीना ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह कोई न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन्हें बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है। उनका आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया और न ही अपनी पसंद के वकील रखने दिया गया। उन्होंने कहा कि इस ट्रिब्यूनल का इस्तेमाल अवामी लीग को खत्म करने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि नवंबर में बांग्लादेश की एक अदालत ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में शेख हसीना को &#039;मानवता के खिलाफ अपराध&#039; का दोषी ठहराया था। लोकल मीडिया के मुताबिक, उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई है। इस मामले में पूर्व पुलिस प्रमुख और पूर्व गृह मंत्री को भी दोषी ठहराया गया है। हसीना बोलीं- यूनुस सरकार की वैधता नहीं इन सबके बावजूद शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अब भी देश के संविधान पर भरोसा है। उनका कहना है कि जब लोकतंत्र वापस आएगा और अदालतें स्वतंत्र होंगी, तब सच्चा न्याय जरूर मिलेगा। हसीना ने मौजूदा अंतरिम सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी कोई लोकतांत्रिक वैधता नहीं है, क्योंकि उसे जनता ने चुना नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को अस्थिरता की ओर ले जाया जा रहा है। फरवरी में होने वाले चुनावों पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि अवामी लीग पर रोक लगाकर चुनाव कराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अवामी लीग के बिना चुनाव, चुनाव नहीं बल्कि सिर्फ ताजपोशी होगी। 
 ------------------ यह खबर भी पढ़ें... भारत में बांग्लादेश हाईकमीशन के बाहर प्रदर्शन:हिंदू युवक की हत्या का विरोध, विदेश मंत्रालय बोला- प्रदर्शन शांतिपूर्ण; ढाका ने कहा- हकीकत कुछ और भारत की राजधानी नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई-कमीशन के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। यह प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में किया गया था। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 12:09:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ऑस्ट्रेलिया के बीच पर हमला करने वाले बाप&#45;बेटे ने सीक्रेट जगह ट्रेनिंग ली थी, गोलीबारी से पहले 4 देसी बम फेंके थे</title>
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<description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर को हुए आतंकी हमले के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, इस हमले के आरोपी बाप-बेटे ने एक गांव के सीक्रेट इलाके में बंदूक चलाने की ट्रेनिंग ली थी। दस्तावेज में बताया गया है कि 50 साल के साजिद अकरम और उनके 24 साल के बेटे नवीद अकरम का एक वीडियो मिला है। इस वीडियो में दोनों राइफल और शॉटगन पकड़े हुए नजर आते हैं और ऐसे तरीके से चलते दिखते हैं जैसे किसी खास तरह की ट्रेनिंग ले रहे हों। कोर्ट के मुताबिक, दोनों वीडियो में गोली चलाते और रणनीति के साथ आगे बढ़ते दिखते हैं। बॉन्डी बीच पर उस समय हमला हुआ था जब वहां यहूदी परिवार हनुक्का का त्योहार मना रहे थे। तभी अचानक गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई। पुलिस ने मौके पर ही साजिद अकरम को मार गिराया था। उनके बेटे नवीद को गिरफ्तार कर लिया गया और अब उस पर आतंकवाद का मामला, 15 लोगों की हत्या और 40 लोगों की हत्या की कोशिश के आरोप लगे हैं। कोर्ट के कागजों में यह भी कहा गया है कि गोली चलाने से ठीक पहले पिता और बेटे ने भीड़ की ओर चार देसी बम फेंके थे, लेकिन किस्मत से वे फटे नहीं। इनमें तीन पाइप बम और एक टेनिस बॉल में रखा बम बताया गया है। जांच में सामने आया है कि ये सभी बम फट सकते थे। इसके अलावा, जिस गाड़ी से वे हमले के लिए आए थे उसकी डिक्की में एक और संदिग्ध बम रखा हुआ था। जांच एजेंसियों को कुछ वीडियो भी मिले हैं, जिन्हें दोनों ने खुद रिकॉर्ड किया था। इन वीडियो में वे धार्मिक कट्टर सोच से जुड़ी बातें करते दिखते हैं। एक वीडियो में वे इस्लामिक स्टेट के झंडे की तस्वीर के सामने खड़े होकर बयान देते हैं और अपने हमले को सही ठहराने की कोशिश करते नजर आते हैं। कोर्ट का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पिता और बेटे ने इस आतंकी हमले की कई महीनों तक बहुत सोच-समझकर योजना बनाई थी। उन्होंने पहले ट्रेनिंग ली, हथियार और बम जुटाए और फिर मौका देखकर इस हमले को अंजाम दिया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... इंडोनेशिया में बस एक्सीडेंट में 15 लोगों की मौत, 34 लोग सवार थे इंडोनेशिया के जावा आइलैंड पर आधी रात के बाद एक पैसेंजर बस हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बस में कुल 34 लोग सवार थे। ड्राइवर टोल रोड पर बस से कंट्रोल खो बैठा, जिसके बाद बस एक कंक्रीट की दीवार से टकराई, फिर पलटकर सड़क किनारे गिर गई। रेस्क्यू एजेंसी के प्रमुख बुडियोनों ने बताया कि यह इंटर स्टेट बस राजधानी जकार्ता से देश के ऐतिहासिक शहर योग्या जा रही थी। हादसा होते ही बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। मुनीर बोले- भारत से जंग में अल्लाह की मदद मिली:नहीं तो हालात बिगड़ जाते; मई में भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस तबाह किए थे पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत के साथ मई में हुए सैन्य संघर्ष में अल्लाह की मदद मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि हमने इसे महसूस किया‌, जिसकी वजह से हालात पूरी तरह बिगड़ने से बच गए। मुनीर ने यह बयान 10 दिसंबर को इस्लामाबाद में हुई नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस में दिया। उनके भाषण के वीडियो क्लिप रविवार को लोकल टीवी चैनलों पर दिखाए गए। भारत ने 7 मई को &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। पढ़ें पूरी खबर... एपस्टीन सेक्स स्कैंडल फाइल्स में ट्रम्प की फोटो फिर अपलोड:इसमें मेलानिया ट्रम्प की भी तस्वीर; सरकार ने कल 16 फाइलें वेबसाइट से हटाईं थीं अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) ने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में शामिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की फोटो को फिर से जारी कर दिया है। इसमें मेलानिया ट्रम्प की भी तस्वीर है। डिपार्टमेंट ने कहा है कि इस फोटो में एपस्टीन मामले के किसी भी पीड़ित को नहीं दिखाया गया है। न्यूयॉर्क के सरकारी वकीलों ने पहले इस तस्वीर पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि इससे पीड़ितों की पहचान उजागर होने का खतरा हो सकता था। इसलिए एहतियात के तौर पर इस तस्वीर समेत कुल 16 फाइलों को कल वेबसाइट से हटा दिया गया था। जांच के बाद ऐसा कोई खतरा नहीं मिला, इसलिए फोटो को बिना किसी बदलाव के दोबारा जारी कर दिया गया। इससे पहले CNN ने बताया था कि एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में से कई फाइलें वेबसाइट से हटा दी गई थीं। इनमें ट्रम्प की यह फोटो भी शामिल थी। कुछ अन्य फाइलों में आपत्तिजनक तस्वीरें और नोट्स थे। पढ़ें पूरी खबर... भारत में बांग्लादेश हाईकमीशन के बाहर प्रदर्शन:हिंदू युवक की हत्या का विरोध, विदेश मंत्रालय बोला- प्रदर्शन शांतिपूर्ण; ढाका ने कहा- हकीकत कुछ और भारत की राजधानी नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई-कमीशन के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। यह प्रदर्शन बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में किया गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि यह प्रदर्शन बेहद छोटा और शांतिपूर्ण था। इससे बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं था। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर बांग्लादेश के कुछ मीडिया संस्थानों में भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। हकीकत यह है कि प्रदर्शन में सिर्फ 20 से 25 युवा शामिल थे। बांग्लादेश ने भारत के इस बयान को खारिज करते हुए कहा है कि स्थिति इससे कहीं ज्यादा गंभीर थी। ढाका ने कहा कि इस घटना को भ्रामक प्रचार कहना ठीक नहीं है। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 12:09:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>मुनीर बोले&#45; भारत से संघर्ष में अल्लाह की मदद मिली:नहीं तो हालात बिगड़ जाते; मई में भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस तबाह किए थे</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भारत के साथ मई में हुए सैन्य संघर्ष में अल्लाह की मदद मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि हमने इसे महसूस किया‌, जिसकी वजह से हालात पूरी तरह बिगड़ने से बच गए। मुनीर ने यह बयान 10 दिसंबर को इस्लामाबाद में हुई नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस में दिया। उनके भाषण के वीडियो क्लिप रविवार को लोकल टीवी चैनलों पर दिखाए गए। भारत ने 7 मई को &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक भारी गोलीबारी और सैन्य टकराव हुआ, जो 10 मई को समझौते के बाद रुका। संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए थे। मुनीर बोले- इस्लामी देशों में पाकिस्तान का खास दर्जा अपने भाषण में मुनीर ने धार्मिक बातों पर जोर देते हुए पाकिस्तान की तुलना 1400 साल पहले पैगंबर मोहम्मद द्वारा स्थापित इस्लामी राज्य से की। उन्होंने कुरान की आयतें पढ़ीं और कहा कि इस्लामी दुनिया में पाकिस्तान को खास दर्जा मिला है। मुनीर ने कहा कि दुनिया में 57 इस्लामी देश हैं, लेकिन अल्लाह ने पाकिस्तान को हरमैन शरीफैन यानी मक्का और मदीना की हिफाजत का सम्मान दिया है। कहा- अफगानिस्तान TTP और पाकिस्तान में से एक को चुने मुनीर ने पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा हालात पर भी बात की और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से कहा कि वह पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुने। मुनीर का आरोप है कि पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले TTP के आतंकियों में करीब 70% अफगान हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या पाक नागरिकों के खून के लिए अफगानिस्तान जिम्मेदार नहीं है। मुनीर ने यह भी कहा कि किसी इस्लामी देश में जिहाद का ऐलान करने का अधिकार सिर्फ उस देश को होता है। बिना सरकार की इजाजत कोई फतवा जारी नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की ज्यादातर आंतरिक समस्याओं के लिए अफगानिस्तान से आए हुए लोग जिम्मेदार हैं। आसिम मुनीर पहले भी कट्टरपंथी बयान दे चुके हैं  आसिम मुनीर पहले भी कई बार कट्टरपंथी बयान दे चुके हैं। उन्होंने इसी साल अप्रैल में कहा था कि पाकिस्तान की नींव कलमे (इस्लाम धर्म का मूल मंत्र) पर रखी गई है। हम हर मामले में हिंदुओं से अलग हैं। हमारा धर्म अलग है, हमारे रीति-रिवाज अलग हैं। हमारी संस्कृति और सोच अलग है। यही टू-नेशन थ्योरी की नींव थी। हमारे पूर्वजों ने सोचा कि हम हिंदुओं से अलग हैं। हमारी सोच, हमारी महत्वाकांक्षाएं अलग हैं। इसी वजह से हम दो देश हैं, एक देश नहीं हैं। इस देश के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है। हम जानते हैं कि इसकी रक्षा कैसे करनी है। जनरल मुनीर ने कहा था- आज तक सिर्फ दो रियासतों की बुनियाद कलमे पर पड़ीं। पहली रियासत-ए-तैयबा, क्योंकि तैयबा को हमारे नबी (मोहम्मद साहब) ने नाम दिया था। आज उसे मदीना कहते हैं। वहीं, दूसरी रियासत 1300 साल बाद अल्लाह ने पाकिस्तान बनाई। 4 दिसंबर को CDF नियुक्त हुए पाकिस्तान सरकार ने 4 दिसंबर को आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त किया था। दोनों पदों पर उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। मुनीर पाकिस्तान के पहले सैन्य अधिकारी हैं जो एकसाथ CDF और COAS दोनों पद संभाल रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नियुक्ति की सिफारिश करते हुए राष्ट्रपति को समरी भेजी थी। मुनीर को इसी साल फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था। पाकिस्तानी संसद ने 12 नवंबर को सेना की ताकत बढ़ाने वाला 27वां संवैधानिक संशोधन पास किया था। इसके तहत मुनीर को CDF बनाया गया। इस पद के मिलते ही उन्हें पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की कमान भी मिल गई यानी वे देश के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। दरअसल 29 नवंबर 2022 को जनरल आसिम मुनीर को सेना प्रमुख नियुक्त किया गया था। उनका मूल कार्यकाल तीन साल का था, यानी 28 नवंबर 2025 को खत्म हो गया। ------------------- यह खबर भी पढ़ें... तोशाखाना केस- इमरान, बुशरा बीबी को 17-17 साल सजा:₹16.40 करोड़ का जुर्माना; ₹2 करोड़ की घड़ी को ₹5 लाख का बताया था पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PTI के संस्थापक इमरान खान तथा उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशाखाना केस-2 मामले में 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह फैसला शनिवार को फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की विशेष अदालत ने सुनाया। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 12:09:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>हादी हत्या मामला&#45; बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम:छात्र नेता बोले&#45; हत्यारों को गिरफ्तार करो, अनिश्चितकालीन धरने की धमकी; होम एडवाइजर से इस्तीफा मांगा</title>
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<description><![CDATA[ भारत और शेख हसीना के विरोधी बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग तेज हो गई है। इंकलाब मंच ने बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि अगर सरकार आज शाम तक हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार नहीं करती, तो शाहबाग चौराहे पर रविवार शाम से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। कल हादी के अंतिम संस्कार के बाद दोपहर 3 तीन बजे शाहबाग चौराहे पर हुए रैली में यह अल्टीमेटम जारी किया गया। रैली मे इंकलाब मंच ने करीब दो घंटे तक इलाके को ब्लॉक रखा। जाबेर ने होम एडवाइजर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधरी और मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी से 24 घंटे के अंदर इस्तीफा देने की मांग की। जाबेर ने सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखीं है, जिसमें पहली, हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी, और दूसरी अवामी लीग से जुड़े कथित सिविल-मिलिट्री इंटेलिजेंस एजेंटों की गिरफ्तारी है। जाबेर बोले- हत्या के पीछे पूरा सिंडिकेट, कोई नहीं बचेगा जाबेर ने सरकार से पूछा, &quot;आपने उस्मान हादी के हत्यारों को पकड़ने के लिए क्या किया?&quot; उन्होंने कहा कि यह हत्या एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरा एक सिंडिकेट है। जाबेर ने किसी राजनीतिक दल पर सीधे शक नहीं जताया, लेकिन कहा कि कोई भी दल संदेह से ऊपर नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि हादी सिर्फ अवामी लीग के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी समस्या था। उन्होंने चेतावनी दी कि हत्यारों का बचाव करने वालों और उनका सार्वजनिक समर्थन करने वालों को भी न्याय के दायरे में लाया जाए। दावा- अवामी लीग को सत्ता में लाने की साजिश हो रही जाबेर ने आगे आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को बाधित करने और शेख हसीना की अवामी लीग को फिर से सत्ता में लाने की साजिश चल रही है। उन्होंने हादी को &#039;जनता की आवाज&#039; और &#039;बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का प्रतीक&#039; बताया। साथ ही, समर्थकों से शांत रहने और तोड़फोड़ से बचने की अपील की। हादी का अंतिम संस्कार हुआ हादी के जनाजे में शनिवार को लाखों लोग शामिल हुए। हादी को बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया। इससे पहले दोपहर 2:30 बजे संसद भवन के साउथ प्लाजा में जनाजे की नमाज अदा की गई। इसी दौरान हादी के भाई अबू बक्र सिद्दीकी ने सवाल उठाया कि राजधानी में दिनदहाड़े हादी को गोली मारने के बाद उसके हत्यारे कैसे फरार हो गए? हादी के अंतिम संस्कार के बाद हजारों लोगों की भीड़ ने संसद में घुसने की कोशिश की है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। यूनुस बोले- हादी हमारे दिलों में बसे वहीं, संसद में नमाज के बाद अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि, “लाखों लोग आज यहां आए हैं। लोग सड़क पर लहरों की तरह उमड़ रहे हैं। लोग हादी के बारे में जानना चाहते हैं।&quot; उन्होंने आगे कहा कि हादी, हम आपको विदाई देने नहीं आए हैं। आप हमारे दिलों में बसे हैं। और हमेशा के लिए, जब तक बांग्लादेश अस्तित्व में रहेगा, आप सभी बांग्लादेशियों के दिलों में रहेंगे। इसे कोई नहीं मिटा सकता।”
 बांग्लादेश में हिंसा से भारतीय सेना अलर्ट पर हादी की मौत के विरोध में इंकलाब मंच और जमात के कट्‌टरपंथियों ने शुक्रवार को बेनापोल से भारत के बॉर्डर तक मार्च निकाला था। उनका कहना था कि पूर्व पीएम शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपा जाए। चटगांव में चंद्रनाथ मंदिर के बाहर कट्‌टरपंथियों ने धार्मिक नारेबाजी की। इधर भारतीय सेना भी एक्टिव हो गई है और बांग्लादेश के हालात पर नजर बनाए हुए है। ईस्टर्न कमांड प्रमुख ले. जनरल आरसी तिवारी ने गुरुवार शाम भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा किया है। दावा- आरोपी फैसल करीम भारत भागा उस्मान हादी की हत्या का मुख्य आरोपी फैसल करीम के भारत भागने का दावा किया जा रहा है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, हत्यारों को ट्रांसपोर्टेशन में सपोर्ट करने वाले आरोपी सिबियन डियू और संजय चिसिम ने अदालत में इसका खुलासा किया है। बांग्लादेशी सुरक्षाबलों के मुताबिक, आरोपी फैसल करीम हादी की हत्या से एक दिन पहले गर्लफ्रेंड के साथ एक रिसॉर्ट में गया था। वहां उसने गर्लफ्रेंड को कहा था- कल कुछ ऐसा होगा, जिससे बांग्लादेश हिल जाएगा। साथ ही हादी का वीडियो भी दिखाया था। मीडिया हाउस और अवामी लीग ऑफिस को प्रदर्शनकारियों ने फूंका था हादी की हत्या के विरोध में बांग्लादेश में 18 दिसंबर को कई जगह हिंसा हुई। उस्मान हादी के समर्थकों और छात्र संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ढाका के अंदर और बाहर के कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके अलावा, शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी के घर में तोड़फोड़ की गई और उसे आग लगा दी गई। 12 दिसंबर- हादी को बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारी उस्मान हादी को राजधानी ढाका में 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह रिक्शे पर जा रहे थे तभी बाइक सवार हमलावर ने उन्हें गोली मारी थी। हादी को तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, बाद में इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर रेफर किया गया था। जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले से कुछ घंटे पहले उस्मान हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप शेयर किया था, इसमें भारतीय इलाके (7 सिस्टर्स) शामिल थे। हादी ढाका से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले थे हादी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे और चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार थे। इंकलाब मंच अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद एक संगठन के रूप में उभरा। इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार काे गिरा दिया था। यह संगठन अवामी लीग को आतंकवादी करार देते हुए पूरी तरह खत्म करने और नौजवानों की सुरक्षा की मांग को लेकर सक्रिय रहा। यह संगठन राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा पर जोर देता है। मई 2025 में अवामी लीग को भंग करने और चुनावों में अयोग्य ठहराने में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 13:05:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:दक्षिण अफ्रीका में शराबखाने के पास सामूहिक गोलीबारी, 10 लोगों की मौत, 10 घायल</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, हमले का मकसद फिलहाल स्पष्ट नहीं है। गौतेंग प्रांत की पुलिस प्रवक्ता ब्रिगेडियर ब्रेंडा मुरीडिली ने बताया कि कुछ पीड़ितों को सड़कों पर अचानक गोली मारी गई। मृतकों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। यह गोलीबारी बेकर्सडाल के एक शराबखाने के पास हुई। घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की तलाश जारी है। यह इस महीने दक्षिण अफ्रीका में दूसरी बड़ी गोलीबारी की घटना है। इससे पहले 6 दिसंबर को राजधानी प्रिटोरिया के पास एक हॉस्टल में हुई फायरिंग में 12 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें एक तीन साल का बच्चा भी शामिल था। पुलिस के मुताबिक, उस हॉस्टल में अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। 6.3 करोड़ की आबादी वाले दक्षिण अफ्रीका में अपराध की दर बेहद अधिक है और यह दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां हत्या की दर सबसे ज्यादा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... जेलेंस्की बोले- अमेरिका और रूस के साथ तीन-पक्षीय बातचीत के लिए तैयार, लेकिन जमीन नहीं छोड़ेंगे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिका की तीन-पक्षीय वार्ता प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगर बातचीत से कैदियों की अदला-बदली हो सकती है या राष्ट्रीय नेताओं की बैठक का रास्ता साफ होता है, तो यूक्रेन इस प्रस्ताव का समर्थन करेगा। जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन के शीर्ष वार्ताकार रुस्तेम उमेरोव ने उन्हें अमेरिकी वार्ताकारों के साथ शुक्रवार को हुई हालिया चर्चाओं की जानकारी दी है, और शनिवार को एक नई दौर की बातचीत होनी है, जिसमें जंग के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण पर चर्चा की जाएगी। इसी बीच, रूसी विशेष दूत किरिल दमित्रिएव भी अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के लिए मियामी में मौजूद हैं। जेलेंस्की के अनुसार, अमेरिका अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर अमेरिका, यूक्रेन और रूस के बीच तीन-पक्षीय वार्ता का प्रस्ताव दे रहा है। उन्होंने कहा, &quot;अगर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक से नेताओं की बैठक पर सहमति बन जाए, तो मैं इसका विरोध नहीं कर सकता। हम ऐसे अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। देखते हैं आगे क्या होता है।&quot; जेलेंस्की ने साफ कहा कि यूक्रेन केवल उन प्रस्तावों का समर्थन करेगा जिनमें पूर्वी यूक्रेन के डॉनबास इलाके में अभी जो फ्रंटलाइन है, वह वैसी की वैसी रहे। यानी यूक्रेन को अपना जो हिस्सा अभी कंट्रोल में है, उसे छोड़ना नहीं पड़ेगा। वे कोई भी समझौता नहीं चाहते जिसमें उनका कब्जे वाला क्षेत्र रूस को देना पड़े। उन्होंने कहा, &quot;मेरे लिए न्यायपूर्ण विकल्प यही है कि हम वहीं खड़े रहें जहां अभी खड़े हैं।&quot; पूर्वी यूक्रेन में एक &#039;मुक्त आर्थिक क्षेत्र&#039; बनाने के अमेरिकी प्रस्ताव पर जेलेंस्की ने कहा कि यह फैसला यूक्रेन के लोगों को करना है। अंत में उन्होंने जोर दिया कि वे हर कदम पर सावधानी से काम कर रहे हैं ताकि जमीन बंटवारा समझौता न हो, बल्कि स्थायी शांति और विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी मिले। हादी हत्या मामला- बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम: छात्र नेता बोले- हत्यारों को गिरफ्तार करो भारत और शेख हसीना के विरोधी बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी की हत्या के मामले में न्याय की मांग तेज हो गई है। इंकलाब मंच ने बांग्लादेश सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि अगर सरकार आज शाम तक हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार नहीं करती, तो शाहबाग चौराहे पर रविवार शाम से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। कल हादी के अंतिम संस्कार के बाद दोपहर 3 तीन बजे शाहबाग चौराहे पर हुए रैली में यह अल्टीमेटम जारी किया गया। रैली मे इंकलाब मंच ने करीब दो घंटे तक इलाके को ब्लॉक रखा। पूरी खबर पढ़ें... ट्रम्प की यौन अपराधी के साथ वाली फोटो गायब:एपस्टीन से जुड़ी 16 फाइलें सरकार ने वेबसाइट से हटाईं; मेलानिया ट्रम्प भी तस्वीर में दिखीं अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में से 16 फाइलें शनिवार देर रात वेबसाइट से गायब हो गईं हैं।  रॉयटर्स के मुताबिक इन फाइलों में महिलाओं की पेंटिंग्स की तस्वीरें और एक फोटो शामिल थी, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जेफ्री एपस्टीन, मेलानिया ट्रम्प और गिस्लीन मैक्सवेल (एपस्टीन की गर्लफ्रेंड) साथ नजर आ रहे थे। जस्टिस डिपार्टमेंट ने इन फाइलों के हटने को लेकर अब तक कोई सफाई नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि फाइलें जानबूझकर हटाई गईं या तकनीकी गलती के कारण गायब हुईं।  अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच के तहत शुक्रवार रात ढाई बजे (भारतीय समय के मुताबिक) तीन लाख दस्तावेज जारी कर दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें... --------------- 20 दिसंबर के वर्ल्ड अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 13:05:19 +0530</pubDate>
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<title>न्यूजीलैंड में सिख समुदाय के नगर कीर्तन का विरोध:लोकल लोगों के ग्रुप ने रास्ता रोका; बैनर में लिखा&#45; ये न्यूजीलैंड है, इंडिया नहीं</title>
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<description><![CDATA[ न्यूजीलैंड में लोकल लोगों ने सिख समुदाय की तरफ से निकाले जा रहे नगर कीर्तन का विरोध कर दिया। उन्होंने नगर कीर्तन का रास्ता रोक दिया। इसके बाद आगे खड़े होकर हाका प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने &#039;दिस इज न्यूजीलैंड, नॉट इंडिया&#039; यानी यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं और &#039;न्यूजीलैंड को न्यूजीलैंड ही रहने दो, यह हमारी जमीन है, यही हमारा स्टैंड है&#039; के बैनर लहराए। यह प्रदर्शन शनिवार को हुआ। उस वक्त सिख समुदाय का नगर कीर्तन गुरुद्वारे लौट रहा था। हालांकि न्यूजीलैंड पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बीचबचाव किया और प्रदर्शनकारियों को हटा दिया। न्यूजीलैंड में सिखों के नगर कीर्तन और विरोध के 2 PHOTOS... सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला... गुरुद्वारे लौट रहा था नगर कीर्तन
शनिवार को न्यूजीलैंड के साउथ ऑकलैंड के उपनगर मनुरेवा में सिख समुदाय की तरफ से नगर कीर्तन निकाला जा रहा था। सिख लीडर सन्नी सिंह ने बताया कि यह नगर कीर्तन गुरुद्वारा नानकसर ठाठ इशर दरबार, मनुरेवा से शुरू हुआ था। इलाके में घूमने के बाद नगर कीर्तन गुरुद्वारे में लौट रहा था। गुरुद्वारे के करीब पहुंचते ही आए प्रदर्शनकारी
सन्नी सिंह के मुताबिक जब नगर कीर्तन गुरुद्वारे के करीब पहुंचा तो करीब 30 से 35 लोगों का लोकल ग्रुप वहां आ गया। यह लोग &#039;अपोस्टल बिशप&#039; ब्रायन तामाकी से जुड़े थे। तामाकी पेंटेकोस्टल संगठन, डेस्टिनी चर्च के प्रमुख हैं। इन लोगों ने आगे खड़े होकर नगर कीर्तन का रास्ता रोक दिया। उन्होंने वहां नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद उन्होंने हाका प्रदर्शन किया। उनके हाथ में बैनर भी पकड़े हुए थे। असमंजस में पड़ा सिख समुदाय, संयम रखा
इस दौरान न्यूजीलैंड के प्रदर्शनकारियों और उनकी नारेबाजी से सिख समुदाय के लोग असमंजस में पड़ गए क्योंकि विरोध की कोई ऐसी वजह नहीं थी। हालांकि सिख समुदाय ने पूरा संयम रखा और लोकल प्रदर्शनकारियों को आपस में भिड़ने का कोई मौका नहीं दिया। इसके बाद वहां पुलिस पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे से न भिड़ने के लिए कहा। कुछ देर के बाद प्रदर्शनकारियों का ग्रुप एक साइड हो गया और नगर कीर्तन गुरुद्वारे में चला गया। संगठन ने फेसबुक पर वीडियो कर लिखी आपत्तिजनक बातें... सार्वजनिक सड़कों पर खुलेआम तलवारें और खंजर लिए घूम रहे पुरुष
तामाकी की ओर से अपने फेसबुक पर इसका वीडियो और पोस्ट जारी किया गया। वीडियो फुटेज में दिखाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने &quot;एक सच्चा ईश्वर&quot;, &quot;यीशु-यीशु&quot; के नारे लगाए, जबकि सिख जुलूस में शामिल लोग बिना किसी प्रतिक्रिया के देखते रहे। तामाकी ने लिखा, &quot;मनुरेवा में सिख धार्मिक जुलूस के कारण कई घंटों से यातायात बंद है। सड़कें बंद। स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त। कारोबार प्रभावित। परिवार फंसे। और सबसे चौंकाने वाली बात? सार्वजनिक सड़कों पर खुलेआम तलवारें और खंजर लिए घूम रहे पुरुष। हाका नृत्य नफरत नहीं, यह एक लक्ष्मण रेखा है
तामाकी ने आगे लिखा- न्यूजीलैंड के लोग एक वाजिब सवाल पूछ रहे हैं। हमारी सड़कों पर धारदार हथियार लेकर घूमना कब से स्वीकार्य हो गया है? यह न्यूजीलैंड में सामान्य बात नहीं है। यह न्यूजीलैंड की जीवनशैली नहीं है। इन सबके बावजूद दक्षिण ऑकलैंड में सच्चे देशभक्त डटे रहे। कोई हिंसा नहीं। कोई दंगा नहीं। बस मेरे युवा आमने-सामने खड़े होकर हाका नृत्य कर रहे थे, ताकि एक स्पष्ट संदेश दिया जा सके- न्यूजीलैंड को न्यूजीलैंड ही रहने दो। आगे लिखा- हाका नृत्य नफरत नहीं है। यह एक लक्ष्मण रेखा है। यह एक चुनौती है। न्यूजीलैंड एक ईसाई राष्ट्र है। क्या है हाका प्रदर्शन, जो न्यूजीलैंड के लोगों ने किया... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 13:05:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका का सीरिया में &amp;apos;ऑपरेशन हॉकआई&amp;apos;:70 से ज्यादा ISIS ठिकाने तबाह किए; अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद एक्शन, ट्रम्प बोले&#45; वादा पूरा किया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने शुक्रवार को सीरिया में आतंकी संगठन ISIS से जुड़े 70 ठिकानों पर हवाई हमले कर उन्हें तबाह कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि यह कार्रवाई हाल ही में हुए उस हमले के जवाब में की गई जिसमें सीरिया में तैनात अमेरिका के दो सैनिक और एक ट्रांसलेटर मारे गए थे। इस मिलिट्री ऑपरेशन को &#039;ऑपरेशन हॉकआई&#039; नाम दिया गया है। यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि मारे गए सैनिक अमेरिका के आयोवा राज्य से थे, जिसे &#039;हॉकआई स्टेट&#039; कहा जाता है। अधिकारियों के मुताबिक जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें आतंकियों के ठहरने की जगह, हथियार रखने के गोदाम और दूसरी जगह शामिल हैं। ट्रम्प ने हमले पर रिएक्शन देते हुए कहा कि उन्होंने अपना वादा पूरा किया। अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले- ये बदले की कार्रवाई है अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन हमलों को बदले की कार्रवाई बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं है, बल्कि उन लोगों के खिलाफ जवाब है जिन्होंने अमेरिकी सैनिकों को मारा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लीडरशिप में अमेरिका अपने लोगों की रक्षा से कभी पीछे नहीं हटेगा। यह पूरा मामला 13 दिसंबर को शुरू हुआ, जब सीरिया में एक हमले में अमेरिका के दो सैनिक और उनके साथ काम कर रहा एक लोकल ट्रांसलेटर मारा गया था। इसके बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने कई छोटे ऑपरेशन चलाए, जिनमें करीब 23 लोगों को मार गिराया गया या गिरफ्तार किया गया। इन ऑपरेशन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सामान से अहम जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर अब यह बड़ा हवाई हमला किया गया। ट्रम्प बोले- अमेरिका हमलावरों को जवाब दे रहा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि सीरिया में अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बाद अब अमेरिका आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है। ट्रम्प ने बताया कि इस हफ्ते मारे गए बहादुर सैनिकों के शव पूरे सम्मान के साथ अमेरिका लाए गए और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने जो वादा किया था, उसे पूरा करते हुए अमेरिका अब उन आतंकियों को करारा जवाब दे रहा है, जो इस हमले के जिम्मेदार हैं।‌ अमेरिकी सेना सीरिया में ISIS के ठिकानों पर हमला कर रही है। ट्रम्प ने कहा कि सीरिया ने लंबे समय से बहुत खून-खराबा और हिंसा देखी है, लेकिन अगर ISIS को वहां से पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। सीरियाई सरकार इस कार्रवाई का समर्थन कर रही है। राष्ट्रपति ने आतंकियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी अमेरिका पर हमला करेगा या अमेरिका को धमकाएगा, उसे पहले से कहीं ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सीरिया में अभी भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये सैनिक कई सालों से ISIS के खिलाफ लड़ाई में लगे हुए हैं। 2014-15 के आसपास ISIS ने सीरिया और इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था और वहां अपनी खिलाफत बना ली थी। बाद में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य कार्रवाई और सीरिया में सत्ता बदलाव के बाद ISIS का ज्यादातर इलाका उससे छिन गया, लेकिन संगठन के बचे हुए लड़ाके अब भी खतरा बने हुए हैं। ऑपरेशन हॉकआई का मकसद इन बचे हुए आतंकियों को बड़ा झटका देना और यह सुनिश्चित करना है कि वे अमेरिकी सैनिकों या उनके सहयोगियों पर फिर हमला न कर सकें। इस हमले में अमेरिका के साथ जॉर्डन जैसे सहयोगी देश भी शामिल हुए। ISIS ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली थी हालांकि इस हमले को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। सीरिया सरकार के गृह मंत्रालय ने कहा है कि 13 दिसंबर का हमला करने वाला इंसान उनकी इंटरनल डिफेंस सर्विसेज से जुड़ा था। अमेरिकी और सीरियाई अधिकारियों ने भी माना है कि उस हमलावर के ISIS से सीधे संबंध पूरी तरह साफ नहीं हैं और ISIS ने इस हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली है। इसके बावजूद अमेरिका का कहना है कि जिन ठिकानों पर हमला हुआ, वे ISIS से जुड़े थे। मारे गए अमेरिकी सैनिकों की पहचान 25 साल के सार्जेंट &#039;एडगर ब्रायन टोरेस तोवार&#039; और 29 साल के सार्जेंट &#039;विलियम नाथानियल हॉवर्ड&#039; के तौर पर हुई है। दोनों आयोवा राज्य के रहने वाले थे और आयोवा नेशनल गार्ड में सर्विस दे रहे थे। अमेरिकी सेना के मुताबिक, वे सीरिया के पालमायरा इलाके में दुश्मन से मुठभेड़ के दौरान मारे गए। इस हमले में आयोवा नेशनल गार्ड के तीन और सैनिक घायल भी हुए, जिन्हें इलाज के लिए सुरक्षित जगह भेजा गया है। ISIS के खिलाफ ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व जारी आयोवा नेशनल गार्ड के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस समय उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता शहीद और घायल सैनिकों के परिवारों की मदद करना है। उन्होंने कहा कि पूरा आयोवा नेशनल गार्ड इस दुख की घड़ी में परिवारों के साथ खड़ा है। इस साल की शुरुआत में आयोवा नेशनल गार्ड के करीब 1,800 सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजा गया था। ये सभी ISIS के खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन का हिस्सा हैं, जिसे &#039;ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व&#039; कहा जाता है। फिलहाल अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह अपने सैनिकों पर हुए किसी भी हमले का कड़ा जवाब देगा और सीरिया में ISIS के बचे हुए नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश जारी रखेगा। ----------------- यह खबर भी पढ़ें... दावा-वेनेजुएला के साथ जंग की घोषणा कर सकते हैं ट्रम्प:अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- वेनेजुएला ने हमारी तेल कंपनियों को जबरन भगाया था; चुराई संपत्ति वापस करे अमेरिकी ब्रॉडकास्टर टकर कार्लसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के साथ युद्ध की घोषणा कर सकते हैं। टकर कार्लसन ने यह बात अपने ऑनलाइन शो ‘जजिंग फ्रीडम’ में कही। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Dec 2025 12:05:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>एपस्टीन सेक्स स्कैंडल में सबसे बड़ा खुलासा:लड़कियों के साथ हॉट&#45;टब में नहाते दिखे क्लिंटन, माइकल जैक्सन की भी तस्वीरें; 5 सेट में 3 लाख दस्तावेज जारी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच के तहत शुक्रवार रात ढाई बजे (भारतीय समय के मुताबिक) तीन लाख दस्तावेज जारी कर दिए हैं। इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, पॉप सिंगर माइकल जैक्सन, हॉलीवुड एक्टर क्रिस टकर, ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू जैसे दिग्गजों की तस्वीरें सामने आई हैं। कुछ फोटोज में क्लिंटन लड़कियों के साथ पूल में नहाते और पार्टी करते नजर आ रहे हैं। पहले ये सभी तस्वीरें 4 सेट में जारी की गईं। इसके कुछ घंटे बाद 1 और सेट जारी किया गया। इसमें कुल मिलाकर 3,500 से अधिक फाइलें हैं, जिनमें 2.5 GB से ज्यादा तस्वीरें और दस्तावेज शामिल हैं। हालांकि कई तस्वीरों में यह साफ नहीं है कि ये कहां ली गई हैं। एपस्टीन फाइल से जुड़ी तस्वीरें... इन खुलासों का असर कितना बड़ा होगा, यह अभी साफ नहीं है। वजह यह है कि दस्तावेजों की संख्या बहुत ज्यादा है और एपस्टीन से जुड़ी काफी तस्वीरें पहले भी सामने आ चुकी है। जस्टिस डिपार्टमेंट ने यह भी कहा है कि कुछ दस्तावेज अभी रोके गए हैं, क्योंकि कुछ जांचें चल रही हैं या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारण हैं। जेफ्री एपस्टीन एक फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी था, उसकी जेल में मौत हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 नवंबर को कानून पर दस्तखत कर एपस्टीन से जुड़े सभी दस्तावेजों को 30 दिन के भीतर जारी करने का आदेश दिया था। अब तक इन मशहूर हस्तियों की तस्वीरें आईं ट्रम्प के आदेश पर जारी हुए दस्तावेज जेफ्री एपस्टीन एक यौन अपराधी था, उसकी जेल में मौत हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 नवंबर को कानून पर दस्तखत कर एपस्टीन से जुड़े सभी दस्तावेजों को 30 दिन के भीतर जारी करने का आदेश दिया था। 19 दिसंबर तक 30 दिन की समय सीमा पूरी हो गई। अमेरिका का डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस शुक्रवार देर रात 2:30 बजे से यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइल्स रिलीज कर रहा है।  इससे जुड़ी फोटोज देखने और दूसरी जानकारियों के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Dec 2025 12:05:22 +0530</pubDate>
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<title>ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू 5 लड़कियों की गोद में लेटे दिखे:एपस्टीन की गोद मे नजर आईं नाबालिग लड़कियां; सेक्स स्कैंडल की 25 PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में एपस्टीन सेक्स स्कैंडल के नए खुलासे में अमेरिका के पूर्व बिल क्लिंटन, पॉप सिंगर माइकल जैक्सन, हॉलीवुड एक्टर क्रिस टकर जैसे दिग्गजों की तस्वीरें सामने आई हैं। ये फाइल भारतीय समय के मुताबिक, शुक्रवार रात 2.30 बजे जारी की गईं। इनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन स्विमिंग पूल में महिलाओं के साथ नहाते दिख रहे हैं। वहीं, ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू 5 महिलाओं की गोद में लेटे हुए हैं। एपस्टीन की गोद में नाबालिग लड़कियां नजर आईं। एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की 25 PHOTOS... पहले क्लिंटन की 7 तस्वीरें.. ट्रम्प की भी तस्वीरें.. शाही परिवार से जुड़ी तस्वीरें.... माइकल जैक्सन की 2 तस्वीरें... अन्य सेलिब्रिटी की तस्वीरें... अरबपति रिचर्ड की तस्वीर... एपस्टीन की तस्वीरें... --------------------------- ये खबर भी पढ़ें... एपस्टीन सेक्स स्कैंडल में सबसे बड़ा खुलासा:लड़कियों के साथ पूल में नहाते दिखे क्लिंटन, माइकल जैक्सन की भी तस्वीरें; 4 सेट में 3 लाख दस्तावेज जारी अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी जांच के तहत शुक्रवार देर रात तीन लाख दस्तावेज जारी कर दिए हैं। शुरुआत में अमेरिका के पूर्व बिल क्लिंटन, पॉप सिंगर माइकल जैक्सन, हॉलीवुड एक्टर क्रिस टकर जैसे दिग्गजों की तस्वीरें सामने आई हैं। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<title>अमेरिका ने ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम सस्पेंड किया:दो यूनिवर्सिटी में गोलीबारी के बाद फैसला, 50 हजार लोगों पर असर पड़ेगा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने शुक्रवार को ग्रीन कार्ड लॉटरी या डाइवर्सिटी वीजा (DV1) प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया है। इसके जरिए अमेरीका में कम प्रतिनिधित्व वाले देशों के लोगों को ग्रीन कार्ड दिया जाता था। ये निर्णय 14 दिसंबर को ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी और 15 दिसंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की घर पर गोली मारकर हत्या के बाद लिया गया है। होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के निर्देश पर इस लॉटरी प्रोग्राम को रोका गया है ताकि कोई और अमेरिकी इस तरह की घटनाओं में घायल न हो। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में न्यूयॉर्क सिटी में ट्रक हमले के बाद भी ट्रम्प ने इस कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश की थी। जानिए क्या है ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम... ग्रीन कार्ड लॉटरी या डायवर्सिटी वीजा प्रोग्राम (DV1) एक ऐसा सिस्टम है जो हर साल लॉटरी के जरिए अमेरिका में कम प्रतिनिधित्व वाले देशों के लोगों को ग्रीन कार्ड देता है। इस प्रोग्राम के तहत हर साल लगभग 50,000 लोग चुने जाते हैं। यह लॉटरी सिस्टम 1990 में लागू किया गया था ताकि अमेरिका में विभिन्न देशों के लोगों को आने का मौका मिले। साल 2025 में इस लॉटरी के लिए करीब 20 मिलियन लोगों ने आवेदन किया था। इसमें विजेता लोगों के साथ उनके जीवनसाथी और बच्चे भी शामिल किए गए, जिससे कुल मिलाकर 131,000 से ज्यादा लोगों को चुना गया। इनकी प्रारंभिक जांच के बाद 50 हजार लोगों को चुना जाएगा। भारतीयों को इससे कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत, चीन, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश इसमें शामिल नहीं होते क्योंकि वहां से पहले से ही ज्यादा लोग अमेरिका आते हैं। ट्रम्प DV1 प्रोग्राम के विरोधी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से डायवर्सिटी वीजा (DV1) प्रोग्राम का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना था कि इस लॉटरी के जरिए आने वाले कुछ लोग अमेरिका में सुरक्षा या अन्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इससे पहले नवंबर में नेशनल गार्ड के सदस्यों पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें एक अफगानी व्यक्ति को बंदूकधारी पाया गया। उस घटना के बाद ट्रम्प प्रशासन ने अफगानिस्तान और अन्य देशों से आने वाले लोगों के लिए इमिग्रेशन नियम और कड़े कर दिए थे। अब 14 दिसंबर को ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी के बारे में जानिए... अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य के प्रोविडेंस शहर में ब्राउन यूनिवर्सिटी में 14 दिसंबर को हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने बताया कि इस मामले का मुख्य संदिग्ध 48 साल का क्लाउडियो नेवेस वैलेंते था। वह 2017 में डायवर्सिटी लॉटरी के जरिए अमेरिका आया था और उन्हें ग्रीन कार्ड मिला था। इस घटना में एला कुक (19) और मुहम्मद अजिज उमुर्जोकॉव (18) की मौत हुई और नौ अन्य घायल हुए थे। वैलेंते को 15 दिसंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के पुर्तगाली प्रोफेसर नूनो लोरेइरो की हत्या में शामिल माना जा रहा है। पुलिस ने छह दिन की तलाश के बाद वालेंटे को न्यू हैम्पशायर की एक स्टोरेज सुविधा में मृत पाया। उसके पास दो बंदूकें और एक बैग था। ब्राउन यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष क्रिस्टिना पैक्सन ने बताया कि वैलेंते 2000-2001 में यहां फिजिक्स में पीएचडी कर रहे थे, लेकिन अभी उनका विश्वविद्यालय से कोई सक्रिय संबंध नहीं था। ---------------------- ये खबर भी पढ़ें... ट्रम्प ने 19 देशों के लोगों की नागरिकता प्रक्रिया रोकी:ग्रीन कार्ड भी नहीं मिलेगा; नेशनल गार्ड्स पर अफगान शरणार्थी के हमले के बाद फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 19 देशों के नागरिकों को अमेरिकी नागरिकता और ग्रीन कार्ड देने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोक दी है। यह फैसला पिछले महीने व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर एक अफगान शरणार्थी की गोलीबारी के बाद लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 19:17:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>पुतिन बोले&#45; यूक्रेन NATO में शामिल होने की जिद छोड़े:तभी शांति आएगी, संपत्ति जब्त करने पर कहा&#45; यूरोपीय संघ चोरी नहीं, डकैती कर रहे</title>
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<description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार दोपहर सालाना ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस दौरान पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर अपनी पुरानी दलीलें दोहराईं। उन्होंने कहा, रूस शांति के रास्ते से युद्ध खत्म करने को तैयार है, लेकिन यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की जिद छोड़नी होगी। तभी शांति आएगी। वहीं, यूरोपीय संघ के रूस की संपत्ति जब्त करने के सवाल पर पुतिन ने कहा कि यूरोपीय संघ चोरी नहीं, डकैती कर रहा है। चोरी तो छिपकर होती है, ये सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन रूस अपनी संपत्ति वापस लेकर रहेगा। यह पुतिन का 22वां सालाना संवाद है। इस दौरान वह आम लोगों और मीडिया के सवालों के जवाब दे रहे हैं। साथ ही साल 2025 में सरकार के कामकाज और देश से जुड़े बड़े मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं। पुतिन की सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस हर साल आयोजित होती है। बीते दो हफ्तों में इस कार्यक्रम के लिए बनाए गए कॉल सेंटर्स में 24.9 लाख से ज्यादा सवाल पहुंचे हैं। पुतिन से पूछे गए सवाल-जवाब पढ़ें... सवालः रूस और यूक्रेन के बीच शांति कब आएगी? पुतिनः मैं इस संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीकों से खत्म करने के लिए तैयार और इच्छुक हूं। लेकिन कोई भी शांति समझौता उन्हीं शर्तों पर होगा, जिनका मैंने जून 2024 में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपने भाषण में जिक्र किया था। उस समय मैंने साफ कहा था कि यूक्रेन को डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों से अपनी पूरी सेना हटानी होगी और नाटो में शामिल होने की योजना छोड़नी होगी। मैंने यह भी कहा कि इस समय रूसी सेना पूरी अग्रिम पंक्ति पर आगे बढ़ रही है। कई कस्बे और गांव हमारे नियंत्रण में आने के करीब हैं, जिनमें डोनेट्स्क क्षेत्र का क्रास्नी लिमन भी शामिल है। हालांकि, इन दावों को लेकर यूक्रेन असहमति जता रहा है। सवाल: EU के रूसी संपत्तियों से यूक्रेन को फंड देने पर आप क्या कहेंगे? पुतिन: इसे चोरी नहीं डकैती कहना चाहिए। चोरी तो आमतौर पर छुपकर की जाती है, लेकिन यहां सब कुछ खुलेआम हो रहा है। मैं मानता हूं कि यह सीधी सेंधमारी है। जो देश इसमें शामिल हैं, उनके लिए इसके गंभीर नतीजे होंगे। इस कर्ज का बोझ आखिरकार EU देशों के बजट पर पड़ेगा और उनके लिए हालात मुश्किल हो जाएंगे। (EU में कई बार यह सवाल रखा गया है कि क्या 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जो रूसी संपत्तियां फ्रीज की गई थीं, उनका इस्तेमाल किया जाए या नहीं। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 250 अरब डॉलर बताई जाती है। लेकिन गुरुवार रात तक चली बातचीत के बाद भी EU के सदस्य देश इस पर सहमति नहीं बना पाए। आखिरकार उन्होंने एक दूसरा रास्ता चुना। जमी हुई रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल करने के बजाय, यूरोप ने शुक्रवार तड़के घोषणा की कि वह 2027 तक यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और सेना को फंड देने के लिए 90 अरब यूरो यानी करीब 105 अरब डॉलर का कर्ज देगा।) सवाल: अगर जल्दी शांति समझौता नहीं हुआ, तो अगले साल यूक्रेन और रूस में लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन हैं? पुतिन: मैं इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं मानता, क्योंकि मैंने यह युद्ध शुरू नहीं किया। मुझे लगता है कि ट्रम्प भी सच्चे मन से शांति के लिए प्रयास कर रहे हैं। जब मैं अगस्त में अंकोरेज में उनसे मिला, तो हमने अपने-अपने प्रस्ताव साझा किए और लगभग सहमति बन गई थी। शांति वार्ता में देरी पूरी तरह दूसरी तरफ यानी यूक्रेन की वजह से हो रही है। मैं हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से समझौता करने के लिए तैयार हूं। सवाल: पश्चिमी देश कह रहे हैं कि रूस यूरोप पर हमला कर सकता है। क्या यह सही है? पुतिन: रूस के यूरोप पर हमला करने की बातें पूरी तरह बकवास हैं। यह सब पश्चिमी नेताओं द्वारा फैलाया गया डर है। यूक्रेन में जो हालात बने हैं, वे उन्हीं नेताओं की नीतियों का नतीजा हैं। अब वे अपनी आर्थिक और सामाजिक नाकामियों को छिपाने के लिए रूस को दुश्मन के रूप में पेश कर रहे हैं। वे कहते हैं कि वे रूस से युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसका कोई आधार नहीं है।  पुतिन के टीवी सेट से रूस के नक्शे में क्रीमिया के अलावा यूक्रेन के चार पूर्वी इलाके रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भाषण के लिए बनाए गए टीवी सेट को लेकर एक साफ संदेश दिखता है। पुतिन के पीछे दीवार पर रूस का नक्शा लगाया गया है। अगर इसे ध्यान से देखें तो नक्शे में सिर्फ क्रीमिया ही नहीं, बल्कि यूक्रेन के चार पूर्वी इलाके डोनेट्स्क, लुहांस्क, जापोरिज्जिया और खेरसॉन भी दिखाए गए हैं। इन इलाकों को रूस ने साल 2022 में अपने साथ जोड़ने का दावा किया था। हालांकि, रूसी सेना अभी तक इन सभी क्षेत्रों पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाई है। इसके बावजूद पुतिन इन्हें रूस का हिस्सा बताता रहा है। टीवी सेट पर इन इलाकों को दिखाना यह संकेत देता है कि क्रेमलिन इन क्षेत्रों पर अपना दावा छोड़ने के मूड में नहीं है। शांति समझौते की बातचीत में जमीन का मुद्दा सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है और यह संकेत बताता है कि इस पर रूस फिलहाल कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें... भारत पहुंचे पुतिन, मोदी ने अपने आवास पर मेजबानी की:रूसी भाषा में लिखी भगवत गीता भेंट की, आज दोनों द्विपक्षीय बातचीत करेंगे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव किया। दोनों नेताओं ने एक दूसरे को गले लगाया। मोदी और पुतिन एक ही गाड़ी में बैठकर एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। यहां पीएम मोदी ने पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर रखा था। मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में लिखी भगवत गीता भी भेंट की। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 19:17:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>बांग्लादेश में जलते न्यूजरूम में पत्रकार 3 घंटे तक फंसे:आग से किताबें बचाती दिखी बच्ची, प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना का भी ऑफिस जलाया, PHOTOS</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के ऑफिस जला डाले। हमले के बाद करीब 25 पत्रकार 3 घंटे तक न्यूजरूम में फंसे रहे। प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के ऑफिस भी फूंक दिए। प्रोथोम आलो ऑफिस के परिसर के पास एक दुकान को भी आग लगा दी गई। इस घटना के बाद एक लड़की दुकान से किताबें बचाती दिखी। यह हिंसा गुरुवार को शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की। हादी 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार कर रहे थे जब उन्हें सिर में गोली मारी गई। बांग्लादेश में हिंसा की 20 तस्वीरें... हिंदू युवक को जलाया बांग्लादेश में कुछ लोगों ने एक हिंदू युवक को पहले पीट-पीटकर मार डाला, उसके बाद &#039;अल्लाह-हू-अकबर&#039; के नारे लगाते हुए युवक के शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी। डेली स्टार और प्रोथोम आलो का ऑफिस फूंका हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की। हमले के चलते प्रोथोम आलो और द डेली स्टार आज बंद रहेंगे। दोनों मीडिया संस्थानों की ऑनलाइन सेवाएं भी लगभग ठप हो गई हैं। सांस्कृतिक संगठन और भारतीय सहायक उच्चायुक्त पर भी हमला उस्मान हादी के समर्थकों और छात्र संगठनों ने ढाका के अंदर और बाहर के कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। चटगांव में भी कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। उन्होंने उच्चायोग पर ईंटें फेंकीं। सांस्कृतिक संगठन को भी आग के हवाले कर दिया गया। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का ऑफिस गिराया प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के ऑफिस में तोड़फोड़ और आगजनी की। ढाका यूनिवर्सिटी और सड़कों पर छात्रों का जुलूस ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने यूनिवर्सिटी परिसर में रैली निकाली। सड़कों पर धरना दिया। साथ ही &#039;मैं हादी हूं&#039; जैसे नारे लगाए। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में 2 न्यूज चैनल्स, अवामी लीग के ऑफिस फूंके: शेख हसीना विरोधी नेता हादी की मौत के बाद हिंसा, हिंदू युवक को जलाया बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़क गई है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार देर रात देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम अलो के ऑफिस में जबरन घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 19:17:15 +0530</pubDate>
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<title>बांग्लादेश में 2 न्यूज चैनल्स, अवामी लीग के ऑफिस फूंके:शेख हसीना विरोधी नेता हादी की मौत के बाद हिंसा, हिंदू युवक को जलाया</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़क गई है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार देर रात देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम अलो के ऑफिस में जबरन घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास में भी तोड़फोड़ की गई है और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के ऑफिस को भी जला दिया गया है। उस्मान हादी शेख हसीना के खिलाफ जुलाई 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान सिर में गोली मारी गई थी। इसके बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए सिंगापुर ले जाया गया था। 6 दिन बाद उनकी मौत हो गई। हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग, शव को पेड़ पर लटकाकर जलाया बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में धर्म का अपमान करने के आरोप में एक हिंदू युवक को पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को नग्न करके एक पेड़ से लटका कर आग लगा दी। पुलिस ने मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में की है पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुवार रात भालुका में हुई। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लोग &#039;अल्लाह-हू-अकबर&#039; के नारे लगाते दिख रहे हैं। हिंसा की 10 तस्वीरें... बांग्लादेश में हिंसा के बीच हादी बांग्लादेश गूगल पर ट्रेंड कर रहा है... सोर्स- गूगल ट्रेंड्स बांग्लादेश से जुड़ीं अपडेट्स के लिए नीचे लाइव लिंक से गुजर जाइये... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 13:28:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>अमेरिका के एपस्टीन सेक्स स्कैंडल में सबसे बड़ा खुलासा आज:कल 68 फोटो जारी हुई थीं, बिल गेट्स समेत 5 हस्तियों के नाम आए</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के कुख्यात एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़े मामले का आज सबसे बड़ा खुलासा हो सकता है। एपस्टीन फाइलों के रिलीज होते ही इस स्कैंडल में शामिल लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। माना जा रहा है कि दुनिया के प्रमुख बिजनेसमैन और नेताओं के नाम इन फाइलों में दर्ज हैं। फाइलों में हजारों पेज के दस्तावेज, 95 हजार तस्वीरें और बैंक रिकॉर्ड्स शामिल हैं। स्कैंडल से जुड़ी 68 नई तस्वीरें गुरुवार देर रात सामने आईं। इन तस्वीरों को गुरुवार देर रात अमेरिकी संसद की हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सांसदों ने रिलीज किया। इसमें अरबपति बिल गेट्स, गूगल बनाने वाले सर्गेई ब्रिन, फिल्ममेकर वुडी एलन, फिलॉस्फर नोम चॉम्स्की और ट्रम्प के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन समेत कई लोग नजर आ रहे हैं। एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी 3 अहम तस्वीरें... 1. पूर्व ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू 2. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 3. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन फाइलों में क्या-क्या सामने आएगा फाइलें जारी करने के बाद सरकार को जनता को कुछ बातें साफ-साफ बतानी होंगी। जैसे कि यह बताना होगा कि दस्तावेजों में कौन-कौन से हिस्से काले किए गए हैं और ऐसा क्यों किया गया। साथ ही यह भी बताना होगा कि किस तरह की सामग्री जनता के सामने रखी गई और किस तरह की सामग्री को जारी नहीं किया गया। इसके अलावा सरकार को उन सभी सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की पूरी सूची भी देनी होगी, जिनका नाम या किसी भी तरह का जिक्र इन फाइलों में आता है। यह सारी जानकारियां फाइलें जारी होने के 15 दिनों के अंदर सार्वजनिक करना जरूरी होगा। यह अभी साफ नहीं है कि वास्तव में कौन-कौन से दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे और उनमें से कितना नया होगा। पिछले करीब 20 सालों में एपस्टीन के यौन अपराधों से जुड़े हजारों दस्तावेज पहले ही दीवानी मुकदमों और सूचना के अधिकार जैसी मांगों के जरिए सामने आ चुके हैं। अब तक क्या-क्या जारी हो चुका है? एपस्टीन मामले से जुड़े बहुत सारे दस्तावेज पहले ही सामने आ चुके हैं। इनमें मैक्सवेल का 2021 का आपराधिक ट्रायल, जस्टिस डिपार्टमेंट की रिपोर्टें और कई दीवानी मुकदमों के कागजात शामिल हैं। इस साल की शुरुआत में जस्टिस डिपार्टमेंट और FBI में ट्रम्प के नियुक्त अधिकारियों ने एपस्टीन से जुड़ी कुछ सीक्रेट फाइलें जारी की थीं, लेकिन उनमें ज्यादातर जानकारी पहले से ही सार्वजनिक थी। इस रिलीज को लेकर ट्रम्प प्रशासन की कड़ी आलोचना भी हुई। जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस साल मैक्सवेल के साथ हुए अपने विवादित इंटरव्यू के सैकड़ों पन्ने भी जारी किए, जिसमें उसने अपने बचाव में बयान दिए और कुछ पीड़ितों की आलोचना तक की। हाल ही में हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सदस्यों ने 12 दिसंबर और 18 दिसंबर को एपस्टीन की संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज और तस्वीरें जारी की थीं। इन तस्वीरों में अरबपति बिल गेट्स भी नजर आए थे। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर &#039;#MeToo&#039; लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ----------------------- एपस्टीन केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की 68 नई तस्वीरें सामने आईं:अरबपति बिल गेट्स महिलाओं के साथ दिखे; डेमोक्रेट्स सांसदों ने जारी कीं; कल पूरी फाइल्स रिलीज होंगी एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़ी 68 नई तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों को गुरुवार देर रात अमेरिकी संसद की हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सांसदों ने रिलीज किया हैं। इनमें से दो तस्वीरों में अरबपति बिल गेट्स महिलाओं के साथ नजर आ रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:00:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>एपस्टीन सेक्स स्कैंडल की 68 नई तस्वीरें जारी:बिल गेट्स महिलाओं के साथ दिखे, गूगल बनाने वाले सर्गेई ब्रिन की भी फोटो आई</title>
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<description><![CDATA[ एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़ी 68 नई तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों को गुरुवार देर रात अमेरिकी संसद की हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सांसदों ने रिलीज किया है। इनमें से दो तस्वीरों में अरबपति बिल गेट्स महिलाओं के साथ नजर आ रहे हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि दोनों महिलाएं एक ही हैं या अलग-अलग। इसके अलावा गूगल बनाने वाले सर्गेई ब्रिन, फिल्ममेकर वुडी एलन, फिलॉस्फर नोम चॉम्स्की और ट्रम्प के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन समेत कई लोग नजर आ रहे हैं। यहां यह साफ कर दें कि इन तस्वीरों का यह मतलब नहीं है कि ये लोग किसी गलत काम में शामिल थे। इसकी जानकारी एपस्टीन फाइल्स के सामने आने के बाद ही आएगी। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट कल इस सेक्स स्कैंडल से जुड़ी सभी फाइलें रिलीज करने वाला है। इससे पहले 12 दिसंबर को 19 तस्वीरें जारी की गई थीं, जिनमें भी बिल गेट्स नजर आए थे। डेमोक्रेट सांसदों ने यह तस्वीरें रिलीज की... तस्वीरों में महिला के शरीर पर मैसेज लिखा दिखा नई तस्वीरों में महिला के शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हाथ से लिखे गए मैसेज दिखाई दे रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक यह मशहूर किताब लोलिता से लिए गए मैसेज हैं। एक तस्वीर में इस किताब की कॉपी भी पीछे नजर आती है। ‘लोलिता’ एक विवादित उपन्यास है। इसमें एक नाबालिग लड़की के शोषण की कहानी लिखी है। इसी वजह से महिला के शरीर पर इस किताब से जुड़े मैसेज को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं। इसे संवेदनशील मामला माना जा रहा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये सभी मैसेज एक ही महिला के शरीर पर लिखे गए हैं या अलग-अलग महिलाओं पर। तस्वीरें किस मकसद से ली गईं, इसकी भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। वॉट्सऐप चैट का एक स्क्रीनशॉट भी जारी जारी की गई तस्वीरों में एक स्क्रीनशॉट भी शामिल है, जिसमें किसी अनजान भेजने वाले की वॉट्सऐप चैट दिखती है। इन मैसेज में से एक में “फ्रेंड स्काउट” का जिक्र है और कहा गया है कि उसने ‘हर लड़की के बदले 1000 डॉलर’ मांगे हैं। इसे भेजने वाले का अगला मैसेज है, “मैं अब तुम्हें लड़कियां भेजूंगा”। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये मैसेज किसके है, किसे भेजे गए और ‘J’ किस व्यक्ति के लिए लिखा गया है। NYT के कॉलमिस्ट भी दिखे, अखबार ने बयान जारी किया न्यूयॉर्क टाइम्स के कॉलमिस्ट डेविड ब्रूक्स भी एक तस्वीर में दिखे हैं। ऐसा लगता है कि डेविड ब्रूक्स किसी लंच या डिनर कार्यक्रम में शामिल थे। वे गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई बिन के पास बैठे हुए दिखाई देते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक बयान में कहा कि यह कार्यक्रम 2011 में हुआ था, यानी उस समय के तीन साल बाद, जब जेफ्री एप्सटीन ने फ्लोरिडा में 18 साल से कम उम्र की नाबालिग से वेश्यावृत्ति के लिए संपर्क करने के आरोप में खुद को दोषी माना था। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, डेविड ब्रूक्स ने उस कार्यक्रम के बाद एप्सटीन से कभी कोई संपर्क नहीं किया। एपस्टीन के ठिकाने से 95 हजार तस्वीरें बरामद रिपब्लिकन-सांसदों के नेतृत्व वाली इस कमेटी को एप्स्टीन के ठिकाने से अब तक हजारों डॉक्यूमेंट, ईमेल और 95000 से ज्यादा तस्वीरें मिली हैं। रिपब्लिनक सांसदों ने डेमोक्रेट्स पर सिर्फ चुनिंदा तस्वीरें जारी करने का आरोप लगाया है, जिनका मकसद ट्रम्प को निशाना बनाना है। रिपब्लिनक सांसदों का कहना है कि दस्तावेजों में ट्रम्प के गलत काम करने का कोई सबूत नहीं है। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। --------------------------- एपस्टीन केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... एपस्टीन फाइलों में क्या हटाया, क्या छिपाया सब बताना होगा:कल खुलेगी सेक्स स्कैंडल फाइल, 95 हजार फोटो, बैंक रिकॉर्ड; पावरफुल लोगों की लिस्ट आएगी अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन 19 दिसंबर को जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी सारी फाइलें जनता के सामने रखेगा। इन फाइलों में हजारों पेज के दस्तावेज, 95 हजार तस्वीरें और बैंक रिकॉर्ड्स के अलावा कई प्रभावशाली हस्तियों के नाम भी हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<title>बांग्लादेश हिंसा&#45; 2 न्यूज चैनल्स, अवामी लीग के ऑफिस फूंके:शेख हसीना विरोधी नेता हादी की मौत के बाद हिंसा, हिंदू युवक को जलाया</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़क गई है। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार देर रात देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम अलो के ऑफिस में जबरन घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास में भी तोड़फोड़ की गई है और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के ऑफिस को भी जला दिया गया है। उस्मान हादी शेख हसीना के खिलाफ जुलाई 2024 में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान सिर में गोली मारी गई थी। इसके बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए सिंगापुर ले जाया गया था। 6 दिन बाद उनकी मौत हो गई। हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग, शव को पेड़ पर लटकाकर जलाया बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में धर्म का अपमान करने के आरोप में एक हिंदू युवक को पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसके शव को नग्न करके एक पेड़ से लटका कर आग लगा दी। पुलिस ने मृतक की पहचान दीपू चंद्र दास के रूप में की है पुलिस ने बताया कि यह घटना गुरुवार रात भालुका में हुई। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लोग &#039;अल्लाह-हू-अकबर&#039; के नारे लगाते दिख रहे हैं। हिंसा की तस्वीरें देखें... बांग्लादेश से जुड़ीं अपडेट्स के लिए नीचे लाइव लिंक से गुजर जाइये... ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 12:00:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प बोले&#45; &amp;apos;टैरिफ&amp;apos; मेरा फेवरेट अंग्रेजी शब्द:इससे 8 जंग रुकवाए, अमेरिका ने उम्मीद से ज्यादा पैसा कमाया; विपक्ष बोला&#45; राष्ट्रपति सिर्फ &amp;apos;मैं&amp;apos; &amp;apos;मैं&amp;apos; करते</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि टैरिफ अंग्रेजी का उनका फेवरेट शब्द है। ट्रम्प ने दावा किया कि इसकी मदद से उन्होंने अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में दुनिया भर में 8 युद्धों को रोका। ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के 11 महीने पूरे होने पर व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित किया। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता छोड़ते समय उन्हें एक बड़ा संकट सौंपा था। ट्रम्प ने अमेरिका में महंगाई के मुद्दे को नजरअंदाज करते हुए जोर दिया कि कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील और भारत सहित कई देशों पर लगाए गए टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है।उन्होंने कहा कि टैरिफ की वजह से अमेरिका ने उम्मीद से ज्यादा पैसा कमाया है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रम्प के भाषण की आलोचना की है। सांसद क्रिस वैन होलेन ने कहा कि आज रात ट्रम्प ने कितने झूठ बोले, इसका हिसाब रखना तो मुश्किल है। कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजॉम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज राष्ट्रपति के भाषण में सिर्फ एक शब्द सुनाई दिया, मैं मैं मैं मैं मैं मैं मैं मैं। ट्रम्प बोले- दुनिया अमेरिका का सम्मान करती ट्रम्प ने यह भी कहा कि अब दुनिया अमेरिका का मजाक नहीं उड़ाती, बल्कि उसका सम्मान करती है। ट्रम्प ने आगे कहा, “हमारा राष्ट्र मजबूत है। अमेरिका का सम्मान है, और हमारा देश पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा है। हम एक ऐसे आर्थिक उछाल के लिए तैयार हैं जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा।” ट्रम्प बोले- खास नीतियों से महंगाई कम कर रहा ट्रम्प ने अपने भाषण में महंगाई और जीवन यापन पर ज्यादा बात नहीं की। हालांकि उन्होंने कहा कि किराने का सामान, कारें और अन्य वस्तुओं की कीमतें नीचे आ रही हैं। अपनी खास नीतियों से बढ़ी महंगाई को वे ठीक कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने दावा किया कि ऊर्जा और भोजन की कीमतें अब नियंत्रण में आ रही हैं। हालांकि, आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भोजन और ऊर्जा की कीमतें अभी भी बढ़ रही हैं। ट्रम्प की टैरिफ नीतियों को भी कीमतें बढ़ाने का एक कारण बताया जा रहा है, हालांकि वे इन्हें देश के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत बताते हैं। अमेरिकियों का सलाना खर्च ₹8 लाख तक बढ़ा द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य पदार्थों की कीमतें अप्रैल से सितंबर 2025 तक 2.7% बढ़ीं, जिसमें बीफ 7% और केले 7% महंगे हुए हैं। अमेरिकियों का कहना है कि उनकी मासिक लागत में एवरेज 9 हजार रुपए से 66 हजार रुपए तक बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर, टैरिफ ने अमेरिकी परिवार के सलाना खर्च को एवरेज 2 से 8 लाख रुपए तक बढ़ा दिया है। ट्रम्प बोले- अवैध प्रवासी अमेरिकी नौकरियां छीन रहे भाषण में ट्रम्प ने प्रवासियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासी अमेरिकी नौकरियां छीन रहे हैं। आवास संकट पैदा कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का मुफ्त फायदा उठा रहे हैं, जिसका बोझ अमेरिकी करदाताओं पर पड़ता है। राष्ट्रपति ने प्रवासियों को अपराध और आर्थिक समस्याओं का जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा, उन्होंने मिनेसोटा राज्य में सोमाली समुदाय पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लिया है और अरबों डॉलर की हेराफेरी की है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक प्रवासी कृषि और निर्माण जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं और वे जितना लेते हैं, उससे अधिक टैक्स के रूप में लौटाते हैं। ट्रम्प ने 60 से ज्यादा बार जंग रुकवाने का दावा किया ट्रम्प मई में हुए भारत-पाक संघर्ष को रुकवाने का दावा करते आए हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी वजह से ही संघर्ष थमा है। अब तक वे अलग-अलग मंचों पर 60 से ज्यादा बार ये दावा कर चुके हैं। जबकि भारत लगातार कह रहा है कि सीजफायर में कोई तीसरा देश शामिल नहीं था और संघर्ष विराम भारत और पाकिस्तान की सीधी बातचीत के बाद हुआ। ट्रम्प भारत पर 50% लगा चुके अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है। ट्रम्प प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है। ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है। रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ। ट्रम्प का ऐलान- भारत पर टैरिफ कम करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 10 नवंबर को कहा था कि भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर लगे टैरिफ को धीरे-धीरे कम करेगा। ट्रम्प ने कहा, &#039;वे मुझसे अभी प्यार नहीं करते, लेकिन वे मुझसे फिर प्यार करेंगे। हमें एक अच्छा सौदा मिल रहा है।&#039; भारत पर टैरिफ कम करने के सवाल पर ट्रम्प ने कहा कि भारत पर ऊंचे टैरिफ रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाए गए थे, लेकिन अब भारत ने रूसी तेल की खरीद बहुत कम कर दी है। उन्होंने कहा, &#039;हां, हम टैरिफ कम करेंगे।&#039; -------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें...
दावा-वेनेजुएला के साथ जंग की घोषणा कर सकते हैं ट्रम्प: अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग- वेनेजुएला तेल अधिकार वापस लौटाए; तेल टैंकरों पर नाकाबंदी की अमेरिकी ब्रॉडकास्टर टकर कार्लसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के साथ युद्ध की घोषणा कर सकते हैं। टकर कार्लसन ने यह बात अपने ऑनलाइन शो ‘जजिंग फ्रीडम’ में कही। पूरी खबर पढ़ें.. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:26:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>दावा&#45;वेनेजुएला के साथ जंग की घोषणा कर सकते हैं ट्रम्प:अमेरिकी राष्ट्रपति बोले&#45; वेनेजुएला ने हमारी तेल कंपनियों को जबरन भगाया था; चुराई संपति वापस करे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी ब्रॉडकास्टर टकर कार्लसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प वेनेजुएला के साथ युद्ध की घोषणा कर सकते हैं। टकर कार्लसन ने यह बात अपने ऑनलाइन शो ‘जजिंग फ्रीडम’ में कही। उनके मुताबिक, एक अमेरिकी सांसद ने उन्हें बताया कि सांसदों को ट्रम्प के संबोधन से पहले एक बंद कमरे में ब्रीफिंग दी गई थी। इस ब्रीफिंग में कहा गया कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन सकती है और राष्ट्रपति इसे भाषण में सार्वजनिक कर सकते हैं। यह दावा ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला हमारे तेल और ऊर्जा अधिकारों को वापस जिन्हें अवैध रूप से छीन लिया गया था। ट्रम्प ने कहा कि वेनेजुएला ने 1976 में अमेरिकी तेल कंपनियों को जबरन भगाया था और उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली थी। वेनेजुएला के तेल टैंकरों पर ट्रम्प की नाकाबंदी ट्रम्प ने वेनेजुएला पर दबाव बढ़ाते हुए प्रतिबंधित तेल टैंकरों के वेनेजुएला आने-जाने पर पूरी नाकाबंदी का आदेश दिया है। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी नौसेना घेराबंदी से घिरा हुआ है। यह घेराबंदी और बढ़ेगी, जब तक कि वेनेजुएला अमेरिका से चुराए गए तेल, जमीन और दूसरी संपत्तियों को वापस नहीं लौटाता। वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के अधिकार छीने थे ट्रम्प का दावा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के तेल अधिकार अवैध रूप से छीन लिए थे। दरअसल, 1976 में वेनेजुएला की सरकार ने (राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज के समय) पूरे तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसका मतलब था कि विदेशी तेल कंपनियां (ज्यादातर अमेरिकी, जैसे एक्सॉन, गल्फ ऑयल, मोबिल आदि) जो दशकों से वहां तेल निकाल रही थीं, उनके सभी ऑपरेशंस और संपत्तियां वेनेजुएला की नई सरकारी कंपनी पेट्रोलियोस डे वेनेजुएला (PDVSA) के पास चली गईं। यह राष्ट्रीयकरण कानूनी तरीके से हुआ और कंपनियों को मुआवजा भी दिया गया, हालांकि कुछ कंपनियां इससे खुश नहीं थीं। उस समय अमेरिकी कंपनियों ने वेनेजुएला में तेल उद्योग को विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी, इसलिए कुछ लोग इसे अभी भी अमेरिकी संपत्ति कहते हैं। वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों की संपत्तियां जब्त की थी 2007 में ह्यूगो शावेज के राष्ट्रपति काल में, वेनेजुएला ने ओरिनोको बेल्ट (भारी तेल के बड़े भंडार) के प्रोजेक्ट्स में नई नीति लागू की। सरकार ने कहा कि PDVSA को सभी प्रोजेक्ट्स में बहुमत हिस्सेदारी (मेजॉरिटी स्टेक) मिलेगी। ज्यादातर विदेशी कंपनियां (जैसे शेवरॉन, टोटल आदि) ने यह शर्त मान ली और अल्पसंख्यक हिस्सेदार बनकर काम जारी रखा, लेकिन एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी अमेरिकी कंपनियों ने मना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि उनकी संपत्तियां जबरन छीन ली गईं और वे देश से बाहर कर दिए गए। ये कंपनियां इसे अवैध मानती हैं और अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) कोर्ट में केस लड़ती रहीं। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था तेल बेचने पर टिकी वेनेजुएला ज्यादातर पैसा तेल बेचकर ही कमाता है। इसी पैसों से वे खाना, दवाइयां और जरूरी चीजें खरीदते हैं। हालांकि उनके पास बहुत तेल है, लेकिन गलत नीतियों, अमेरिकी पाबंदियों और भ्रष्टाचार की वजह से तेल निकालने की क्षमता बहुत कम हो गई है। पहले अमेरिका उनका सबसे बड़ा ग्राहक था, लेकिन रिश्ते खराब होने के बाद अमेरिका ने खरीदना लगभग बंद कर दिया। अब वेनेजुएला का करीब 80% तेल चीन खरीदता है। थोड़ा-बहुत तेल अमेरिका और क्यूबा भी लेते हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला को सीक्रेट ऑपरेशन की धमकी दी थी अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में वेनेजुएला के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हो सकता है। ट्रम्प प्रशासन वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट भी करवा सकता है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत सीक्रेट ऑपरेशन से हो सकती है। हाल के हफ्तों में अमेरिकी सेना ने कैरेबियाई इलाके में बड़ी संख्या में जहाज, विमान और सैनिक तैनात किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है। वेनेजुएला के पास वॅारशिप तैनात किए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, USS ग्रेवली, USS जेसन डनहम और USS सैम्पसन नाम के तीन एजिस गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर वॅारशिप वेनेजुएला के तट पर तैनात हैं। तीनों वॅारशिप हवा, समुद्र, और पनडुब्बी हमलों से रक्षा करने में माहिर है। इनके साथ 4,000 सैनिक, P-8A पोसाइडन विमान और एक हमलावर पनडुब्बी भी शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:26:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:चीन का सीक्रेट प्रोजेक्ट&#45; सेमीकंडक्टर चिप मशीन का प्रोटोटाइप बनाया; यह इंसान के बाल से हजारों गुना पतले</title>
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<description><![CDATA[ चीन ने उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बेहद गोपनीय प्रोजेक्ट के तहत शेनझेन की एक हाई-सिक्योरिटी लैब में चीनी वैज्ञानिकों ने ऐसी मशीन का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जो एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने में सक्षम मानी जा रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोटोटाइप 2025 की शुरुआत में पूरा हुआ और फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। यह मशीन पूरी फैक्ट्री फ्लोर जितनी बड़ी है और इसे ASML के पूर्व इंजीनियर्स की एक टीम ने तैयार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस टीम ने डच कंपनी ASML की एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट लिथोग्राफी (EUV) मशीनों को रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए समझकर यह प्रोटोटाइप बनाया। EUV तकनीक चिप्स पर बेहद बारीक सर्किट बनाती है, जो इंसान के बाल से हजारों गुना पतले होते हैं। अब तक यह तकनीक सिर्फ पश्चिमी देशों के पास थी। चीन का यह प्रोटोटाइप EUV लाइट तो पैदा कर पा रहा है, लेकिन अभी पूरी तरह काम करने वाली चिप्स नहीं बना सका है। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता योजना का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत करीब छह साल पहले हुई थी। इस गोपनीय प्रोजेक्ट को चीन का ‘मैनहट्टन प्रोजेक्ट’ भी कहा जा रहा है। अभी अमेरिका चीन को उन्नत चिप्स देकर उसकी टेक्नोलॉजी और मिलिट्री पावर को नियंत्रित रखता है। अगर चीन खुद बना लेगा, तो अमेरिका की &#039;टेक कोल्ड वॉर&#039; की रणनीति कमजोर हो जाएगी। चीन की मिलिट्री (मिसाइल, ड्रोन, AI हथियार) बहुत मजबूत हो सकती है, जिससे ताइवान या दक्षिण चीन सागर जैसे इलाकों में तनाव बढ़ सकता है। EUV सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने की सबसे उन्नत मशीन है, जो दुनिया की सबसे छोटी और पावरफुल चिप्स (जैसे 7nm, 5nm, 3nm) बनाने में इस्तेमाल होती है। ये चिप्स स्मार्टफोन, कंप्यूटर, AI सिस्टम और मिलिट्री हथियारों को शक्तिशाली बनाती हैं। यह एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट लाइट (EUV लाइट) का इस्तेमाल करती है, जो बहुत छोटी वेवलेंथ (13.5 नेनोमीटर) वाली होती है। इस लाइट से सिलिकॉन वेफर पर बेहद बारीक सर्किट पैटर्न बनाए जाते हैं। ASML दुनिया की एकमात्र कंपनी है जो EUV मशीनें बनाती है, जिनकी कीमत करीब 250 मिलियन डॉलर होती है। अमेरिका ने 2018 से नीदरलैंड्स पर दबाव बनाकर चीन को ये मशीनें बेचने पर रोक लगवाई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रोजेक्ट की गोपनीयता बेहद सख्त है। इसमें शामिल इंजीनियर्स को फर्जी नामों से आईडी कार्ड दिए गए और आपसी पहचान भी दूसरे नामों से कराई गई। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... ट्रम्प बोले- &#039;टैरिफ&#039; मेरा फेवरेट अंग्रेजी शब्द: इसकी मदद से 8 जंग रुकवाईं; अमेरिका ने उम्मीद से ज्यादा पैसा कमाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कहा है कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 10 महीनों में दुनिया भर में 8 युद्धों को रोका।  उन्होंने इस सफलता का कारण उनकी टैरिफ नीति को बताया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने टैरिफ को अंग्रेजी का अपना सबसे पसंदीदा शब्द बताया और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता छोड़ते समय उन्हें एक बड़ा संकट सौंपा था। ट्रम्प ने अपने संबोधन में 2026 के लिए अपनी सरकार की योजनाएं पेश कीं और दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी ताकत को बहाल किया है, 10 महीनों में 8 युद्ध सुलझाए हैं, ईरान के परमाणु खतरे को खत्म किया है और गाजा में युद्ध समाप्त करके 3000 साल बाद पहली बार शांति लाए हैं। साथ ही सभी इजराइली बंधकों को मुक्त कराया। ट्रम्प ने महंगाई के मुद्दे को नजरअंदाज करते हुए जोर दिया कि कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील और भारत सहित कई देशों पर लगाए गए टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है।  उन्होंने कहा कि टैरिफ की वजह से अमेरिका ने अपेक्षा से ज्यादा पैसा कमाया है और इस साल पास किए गए रिपब्लिकन पार्टी के बड़े टैक्स कट बिल ने इसमें मदद की है।  ट्रम्प का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब उनकी व्यापार नीतियां वैश्विक स्तर पर विवाद का कारण बनी हुई हैं, लेकिन वे अपनी उपलब्धियों को लगातार उजागर कर रहे हैं।  ---------------------------- 17 दिसंबर के अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 11:26:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ऑस्ट्रेलिया आतंकी हमले पर पाकिस्तान बोला&#45; हमें बेवजह बदनाम किया:यह भारत&#45;इजराइल जैसे दुश्मनों की साजिश; यहां से सोशल मीडिया पर झूठ फैला</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में आतंकी हमले को लेकर उन्हें बेवजह बदनाम किया गया। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इसे भारत-इजराइल जैसे दुश्मन देशों की साजिश बताया। बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि हमलावर को पाकिस्तान से जोड़ने का मकसद देश की छवि को खराब करना था। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत और दस्तावेज के पाकिस्तान पर आरोप लगाए गए। तरार ने आरोप लगाया कि इस झूठी खबर को खासतौर पर भारत और इजराइल में सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए फैलाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि झूठी खबरों से पाकिस्तान को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कैसे होगी? क्या माफी मांगी जाएगी या कानूनी कार्रवाई की जाएगी? तरार ने ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जांच में पेशेवर रवैया अपनाया और बिना सबूत के किसी देश पर आरोप नहीं लगाए। आतंकी हमला करने वाला साजिद भारतीय था ऑस्ट्रेलिया में 14 दिसंबर को सिडनी के बॉन्डी बीच पर यहूदी लोगों पर हमला करने वाला आतंकी साजिद अकरम भारत का था। 50 साल का साजिद मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद का रहने वाला था। उसने हैदराबाद से B.Com किया और स्टूडेंट वीजा पर नौकरी की तलाश में नवंबर 1998 में ऑस्ट्रेलिया चला गया। बाद में उसने यूरोपीय मूल की महिला वेनेरा ग्रोसो से शादी की और वहीं स्थायी रूप से बस गया। साजिद के पास अब भी भारतीय पासपोर्ट था। साजिद के परिवार वालों ने 2 मीडिया हाउस से बताया है कि उन्होंने कई साल पहले ही साजिद से अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए थे, क्योंकि उसने एक ईसाई महिला से शादी कर ली थी। साजिद का बेटा नवीद अकरम (24 वर्षीय) ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं। साजिद की एक बेटी भी है। तेलंगाना पुलिस के मुताबिक पहले भारत में साजिद के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। आतंकी हमले में 15 लोगों की मौत हुई है, वहीं 40 से ज्यादा लोग घायल हैं। आतंकी साजिद भी पुलिस की फायरिंग में मारा गया, जबकि उसका बेटा घायल है। आखिरी बार 2022 में भारत आया था साजिद भारत में मौजूद साजिद के रिश्तेदारों के मुताबिक, पिछले 27 सालों में साजिद का परिवार से संपर्क बहुत कम रहा। वह ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद छह बार भारत आया। इसके पीछे संपत्ति और बुजुर्ग माता-पिता से जुड़े पारिवारिक कारण थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक साजिद आखिरी बार 2022 में भारत आया था। बताया गया है कि वह अपने पिता के निधन के समय भी भारत नहीं आया। परिवार का कहना है कि उन्हें साजिद या नवीद के कट्टरपंथी विचारों या गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। इससे पहले CNN ने फिलीपींस के अधिकारियों के हवाले से बताया था कि साजिद अकरम अपने बेटे नवीद के साथ पिछले महीने 1 नवंबर को फिलीपींस गया था। इस दौरान साजिद ने इंडियन जबकि उसके बेटे ने ऑस्ट्रेलियन पासपोर्ट का इस्तेमाल किया था। वो लोग एक महीने से हमले की तैयारी कर रहे थे। फिलीपींस के इस्लामी गढ़ दावो शहर गए थे आतंकी अधिकारियों के मुताबिक दोनों फिलीपींस के दावो शहर गए थे। दावो फिलीपींस के दक्षिण हिस्से में मिंडानाओ द्वीप पर है। मिंडानाओ में फिलीपींस की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है। यह इस्लामी उग्रवादी और विद्रोही संगठन का गढ़ माना जाता है। ये समुदाय अलग देश बनाने की मांग करते हैं। इसके अलावा आतंकियों की गाड़ी से इस्लामिक स्टेट के दो झंडे बरामद हुए थे, जिससे उनके ISIS से जुड़े होने का अनुमान लगाया जा रहा है। लाइसेंसी बंदूक से हमलावर ने गोलीबारी की थी पुलिस के मुताबिक, 50 साल के हमलावर साजिद अकरम के पास लाइसेंसी बंदूक थी, जिसका इस्तेमाल वह शिकार के लिए करता था। एनएसडब्ल्यू पुलिस कमिश्नर मल लैनयन ने कहा कि साजिद अकरम एक गन क्लब का सदस्य था और राज्य के कानून के तहत उसके पास लाइसेंस था। साजिद अकरम के पास कानूनी रूप से 6 बंदूकें थीं। गोलीबारी के लिए निकलने से पहले बाप-बेटे ने अपने परिवार को कहा था कि वह मछलियां पकड़ने जा रहे हैं। अकरम अपने परिवार के साथ एक किराए के घर में रहता था। हमले के बाद पुलिस ने इस मकान पर छापेमारी की। रिपोर्ट के मुताबिक साजिद अकरम फलों की दुकान चलाता था। -------------------------- ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... ऑस्ट्रेलिया का हीरो अहमद- आतंकी साजिद से निहत्था भिड़ा: राइफल छीनी, भाई से कहा- कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि लोगों को बचाते हुए मरा ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बॉन्डी बीच पर जश्न मना रहे लोगों पर दो आतंकियों ने हमला किया। इस दौरान 44 साल के अहमद अल-अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 18:00:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>कैथल की युवती की ऑस्ट्रेलिया में मौत:दिमाग की नस फटी, तीन महीने पहले पढ़ाई करने गई विदेश, परिवार ने लिया था कर्ज</title>
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<description><![CDATA[ कैथल के गांव सिरसल की लड़की वैशाली शर्मा की ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मौत हो गई। उसके दिमाग की से अचानक से नस फट गई। जैसे ही यह हादसा हुआ, आसपास के लोगों ने वहां की पुलिस को सूचना दी और लड़की को अस्पताल पहुंचाया गया, तो वहां उसकी हालत गंभीर थी। इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई। लड़की करीब तीन महीने पहले पढ़ाई करने के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थी। वैशाली शर्मा के पिता प्रीतम सिंह ने बताया कि 19 वर्षीय वैशाली 3 महीने पहले कैथल के गांव सिरसल से ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए गई थी। वह काफी समय से जिद कर रही थी कि उसे विदेश में जाकर पढ़ाई करनी है तो परिवार ने करीब साढे 20 लाख रुपए कर्ज पर लेकर लड़की को पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया भेज दिया। बीकॉम सेकेंड ईयर में पढ़ाई कर रही थी परिवार के लोगों ने बताया कि वैशाली इस समय बीकॉम सेकेंड ईयर में पढ़ाई कर रही थी। बीकॉम फर्स्ट ईयर के पढ़ाई वह कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कर चुकी है और उसने सेकेंड ईयर में सिडनी के कॉलेज में दाखिला लिया हुआ था। वहीं रहकर पढ़ाई कर रही थी। जैसे ही परिवार के सदस्यों के पास लड़की की मौत की सूचना पहुंची तो उन्हें गहरा आघात लगा। कर्ज लेकर विदेश भेजा  पिता प्रीतम सिंह ने बताया कि वैशाली के परिवार में उसकी दो छोटी बहनें हैं, जिनमें से एक की उम्र 11 साल है जो छठी कक्षा में पढ़ाई कर रही है, जबकि दूसरी बेटी की उम्र 9 साल है जो इस समय चौथी कक्षा में पढ़ रही है। परिवार ने कर्ज उठाकर लड़की को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश भेजा था। उनकी माता मीना देवी गृहिणी हैं। पिता प्रीतम सिंह ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि लड़की वहां पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी लग जाएगी, जिससे उन्होंने जो खर्चा लगाकर उसे विदेश भेजा है वह भी चुका देंगे और साथ में परिवार की हालत भी सुधर जाएगी। परिवार करता है खेती  पिता ने बताया कि उनके पास तीन एकड़ जमीन है। इस पर खेती करके परिवार का गुजर बसर होता है। अब बेटी से उम्मीद थी कि वह परिवार की दरिद्रता दूर करेगी, लेकिन अब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता ने बताया कि अब लड़की के शव को वापस लाने के लिए 65 हजार डॉलर (करीब 58.77 लाख रुपए) खर्च करने पड़ेंगे। परिवार ने सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है कि संकट की घड़ी में उनकी सहायता की जाए। अंतिम बार बातचीत में ठीक बताया  पिता ने बताया कि अंतिम बार जब उनकी लड़की से बातचीत हुई तो वह ठीक-ठाक थी और कह रही थी कि उसकी पढ़ाई लिखाई ठीक चल रही है। परिवार को चिंता की जरूरत नहीं है। अगले ही दिन उनके पास उसकी मौत की सूचना पहुंच गई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 18:00:46 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने बांग्लादेश हाई कमिश्नर को तलब किया:ढाका में वीजा एप्लीकेशन सेंटर भी बंद; बांग्लादेशी नेता ने 7 भारतीय राज्यों को तोड़ने की धमकी दी थी</title>
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<description><![CDATA[ भारत सरकार ने बुधवार को बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमिदुल्लाह को समन किया। यह कदम ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली एक हालिया धमकी के बाद उठाया गया। भारत ने इस मामले पर बांग्लादेश सरकार के सामने औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि भारत सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि धमकी किस तरह की थी या कहां से आई थी, लेकिन इसे एक गंभीर सुरक्षा चिंता के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच, ढाका में भारतीय वीजा एप्लीकेशन सेंटर को भी बुधवार दोपहर 2 बजे से बंद कर दिया गया। दरअसल, ‘जुलाई ओइक्या (जुलाई एकता)’ नाम के संगठन ने आज भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया था। यह मार्च दोपहर 3 बजे से शुरू होने वाला था। भारत सरकार को आशंका थी कि इस तरह के मार्च से भारतीय उच्चायोग के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने और सुरक्षा खतरे पैदा होने की संभावना थी। इससे एक दिन पहले, बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्लाह ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को अलग-थलग करने की धमकी दी थी। पुलिस ने 1 किमी पहले मार्च रोका “जुलाई ओइक्या” के बैनर तले लोगों के एक समूह को आज दोपहर ढाका के गुलशन इलाके में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च करते समय पुलिस ने रोक दिया। भारतीय उच्चायोग से करीब एक किलोमीटर पहले तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, लेकिन आगे उन्हें और कड़ी पुलिस नाकेबंदी का सामना करना पड़ा। आखिरकार प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए, नारे लगाए और लाउडस्पीकर के जरिए भाषण देने लगे। प्रदर्शनकारी अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान व उसके बाद भारत चले गए अन्य लोगों की वापसी की मांग कर रहे थे। 5 अगस्त 2024 से अब तक BNP, जमात और कई अन्य संगठनों ने भारतीय उच्चायोग की ओर 10 से ज्यादा लंबे मार्च आयोजित किए हैं। प्रदर्शन से जुड़ीं 4 तस्वीरें... अब्दुल्लाह ने भारत को बदला लेने की धमकी दी अब्दुल्लाह ने सोमवार को ढाका में एक रैली में कहा था कि अगर बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई तो बदले की आग सीमाओं के पार फैल जाएगी। उन्होंने बिना भारत का नाम लिए कहा, &quot;अगर आप हमें अस्थिर करने वालों को शरण दे रहे हैं, तो हम 7 सिस्टर्स के अलगाववादियों को भी शरण देंगे।&quot; उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बांग्लादेश भारत विरोधी ताकतों को पनाह देगा और उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारत से अलग कर देगा। रैली में मौजूद कुछ लोग उनकी इस बात पर तालियां बजाते दिखे। यह रैली पिछले हफ्ते इंकलाब मंच के कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी पर हुए जानलेवा हमले के बाद आयोजित की गई थी। यह संगठन हादी पर हुए हमले के लिए भारत और शेख हसीना की अवामी लीग को जिम्मेदार ठहरा रहा है। एक महीने पहले पूर्व बांग्लादेशी जनरल ने कहा था कि भारत के टुकड़े न होने तक बांग्लादेश को पूरी शांति नहीं मिलेगी। बांग्लादेश में हसीना विरोधी पर फायरिंग बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी को राजधानी ढाका में 12 दिसंबर को गोली मार दी गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हैं और चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। वह रिक्शे पर जा रहे थे तभी बाइक सवार हमलावर ने उन्हें गोली मार दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले से कुछ घंटे पहले उस्मान हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप शेयर किया था, इसमें भारतीय इलाके (7 सिस्टर्स) शामिल थे। भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में तख्तापलट के बाद भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। पिछले महीने बांग्लादेश की एक विशेष ट्राइब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। बांग्लादेश ने भारत से हसीना की जल्द प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। बांग्लादेश में चुनाव नजदीक आने के साथ भारत विरोधी बयानबाजी बढ़ रही है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर और दबाव पड़ रहा है। बांग्लादेश की मांग- शेख हसीना को सौंप दे बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने 14 दिसंबर को ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया। बांग्लादेश ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। अधिकारिक बयान के बांग्लादेश ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत सरकार एक फरार आरोपी को बयान देने की अनुमति दे रही है। बांग्लादेश का कहना है कि शेख हसीना के बयान भड़काऊ हैं और वे अपने समर्थकों से बांग्लादेश में हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की अपील कर रही हैं। सरकार के मुताबिक, ऐसे बयान आगामी संसदीय चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होंगे बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम इसका ऐलान किया। यह चुनाव पूर्व पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के डेढ़ साल बाद हो रहा है। 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद से वहां पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है। अगले साल होने वाले चुनाव में हसीना की पार्टी हिस्सा नहीं ले पाएगी। बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग का पंजीकरण चुनाव आयोग ने मई 2025 में निलंबित कर दिया था। पार्टी के बड़े नेताओं को अंतरिम सरकार गिरफ्तार कर चुकी है। अवामी लीग चुनाव लड़ने और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। छात्रों की पार्टी ने अमर बांग्लादेश पार्टी से गठजोट किया चुनाव से पहले छात्रों की राजनीतिक पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने जमात-ए-इस्लामी से टूटकर बनी अमर बांग्लादेश (AB) पार्टी और राष्ट्र संस्कृति आंदोलन के साथ मिलकर नया मोर्चा गणतांत्रिक संस्कार गठजोट बनाया है। NCP इसी साल फरवरी में बनी थी। पार्टी के छात्र नेताओं ने पिछले साल हसीना विरोधी प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। इन्हीं प्रदर्शनों के दबाव में शेख हसीना सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। NCP ने 125 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची भी जारी कर दी है। पार्टी के प्रमुख चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 से चुनाव लड़ेंगे। इस सूची में 14 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो अब तक किसी भी पार्टी से सबसे ज्यादा हैं। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में हसीना विरोधी पर फायरिंग, सिर में गोली लगी: कुछ घंटे पहले ग्रेटर बांग्लादेश का मैप शेयर किया, इसमें भारतीय इलाके शामिल बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी को राजधानी ढाका में शुक्रवार को गोली मार दी गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हैं और चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 18:00:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ट्रम्प ने 7 और देशों की नागरिकता प्रक्रिया रोकी:15 देशों पर आंशिक बैन, अब तक 39 देश इस लिस्ट में शामिल हुए; एथलीट&#45;राजनयिकों को छूट</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को 7 और देशों के लोगों के अमेरिका आने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया। इसके साथ ही फिलिस्तीनियों पर भी रोक लगा दिया है। यह फैसला पिछले महीने व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर एक अफगान शरणार्थी की गोलीबारी के बाद लिया गया है। साथ ही 15 दूसरे देशों पर आंशिक बैन (स्थायी निवास पर रोक) लगाए गए हैं। ट्रम्प ने मंगलवार को इसके लिए एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इससे अमेरिका आने पर पूर्ण या आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगने वाले देशों की संख्या 39 हो गई है। 19 देशों पर पहले से ही यात्रा प्रतिबंध लागू हैं। इनमें से 2 देश लाओस और सिएरा लियोन पर अब पूर्ण रोक लागू कर दी गई है। इससे पूर्ण प्रतिबंध वाले देशों की संख्या 7 हुई। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, कमजोर जांच प्रणाली और वीजा ओवरस्टे (वीजा खत्म होने के बाद भी रुकना) की उच्च दरों का हवाला देकर उठाया गया है। ये नए प्रतिबंध 1 जनवरी से लागू होंगे। घोषणा में स्थायी निवासियों, राजनयिकों, एथलीटों को छूट दी गई है। तुर्कमेनिस्तान से नॉन-इमिग्रेंट वीजा से बैन हटाया व्हाइट हाउस के फैक्ट-शीट के अनुसार, नए घोषणा में बुर्किना फासो, माली, नाइजर, साउथ सूडान और सीरिया पर पूरी यात्रा पाबंदी लगाई गई है। फिलिस्तीनियों पर भी पूरी रोक लगा दी गई है। इससे पहले गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा था कि अमेरिकी प्रशासन वर्तमान यात्रा प्रतिबंध को 19 से बढ़ाकर 30 से अधिक देशों तक विस्तार करने की योजना बना रहा है। उस समय उन्होंने सटीक संख्या या देशों के नाम नहीं बताए थे। अमेरिका अफगानिस्तान, म्यांमार, बुरुंडी, चाड, कांगो, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला, यमन पर पूरी यात्रा पाबंदी लगा चुका है नई घोषणा में 15 नए देशों पर आंशिक प्रवेश प्रतिबंध लगाए गए हैं। बुरींडी, क्यूबा, टोगो और वेनेजुएला पर आंशिक प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेंगे। तुर्कमेनिस्तान एकमात्र देश है जहां नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर प्रतिबंध हटा लिया गया है, हालांकि इमिग्रेंट वीजा पर रोक बरकरार है। एथलीट, राजनयिकों को बैन से छूट मामले-दर-मामले छूट का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन परिवार आधारित इमिग्रेंट वीजा की छूट को धोखाधड़ी के जोखिम के कारण सीमित कर दिया गया है। यह कदम उन देशों से आने वाले विदेशी नागरिकों को रोकने के लिए उठाया गया है जहां स्क्रीनिंग, जांच और जानकारी साझा करने में गंभीर कमियां हैं, ताकि अमेरिका की सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। वॉशिंगटन डीसी में हुई गोलीबारी के बाद अमेरिका ने इमीग्रेशन पर सख्ती बढ़ाई है। उन्होंने कानूनी और अवैध प्रवेश को रोकने, शरण आवेदनों पर रोक लगाने और बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान शुरू किया है। इन पर बैन नहीं... 
ट्रम्प बोले- इमिग्रेशन नीतियों ने अमेरिकियों की जिंदगी खराब की है ट्रम्प का कहना है कि इन कदमों से अवैध और परेशानी पैदा करने वाली आबादी को कम किया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि दूसरी विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में इस तरह की सामाजिक समस्याएं नहीं थीं, लेकिन अब गलत इमिग्रेशन नीतियों की वजह से अपराध और अव्यवस्था बढ़ गई है। उनका मानना है कि तकनीकी तरक्की के बावजूद इमिग्रेशन की गलत नीतियों ने आम अमेरिकियों की जिंदगी खराब कर दी है। ट्रम्प ने साफ कहा, “इस समस्या का पूरा इलाज सिर्फ रिवर्स माइग्रेशन यानी लोगों को वापस उनके देश भेजना ही है।” पूर्ण बैन और आंशिक बैन में क्या अंतर है? अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक पूर्ण बैन का मतलब है कि उस देश के अधिकतर नागरिकों का अमेरिका में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है। इनमें टूरिस्ट वीजा, स्टूडेंट वीजा, वर्क वीजा और इमिग्रेंट वीजा चाहने वाले लोग शामिल होते हैं। वहीं, आंशिक बैन का मतलब है कि उस देश के नागरिकों पर कुछ खास प्रकार के वीजा या एंट्री पर रोक लगाई जाती है, बाकी पर नहीं। यानी इमिग्रेंट वीजा नहीं मिलेगा, लेकिन टूरिस्ट वीजा मिल सकता है। स्टूडेंट्स को परमिशन मिलेगी, लेकिन वर्क वीजा पर रोक रहेगी। अफगान शरणार्थी ने नेशनल गार्ड्स को गोली मारी थी अमेरिका में 26 नवंबर को व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स के 2 जवानों को गोली मार दी गई थी। हमले में दोनों की मौत हो गई थी। इस मामले में एक अफगान शरणार्थी को हिरासत में लिया गया। FBI अधिकारियों के मुताबिक, हमलावर 29 साल का रहमानुल्लाह लाकनवाल था। वह अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिका आया था। उसने 2024 में शरणार्थी के दर्जे के लिए अप्लाई किया था और उसे अप्रैल 2025 में मंजूरी मिली थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:53:21 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:मोजांबिक के राष्ट्रपति से मिली जॉर्जिया मेलोनी; हाइट में अंतर वाली तस्वीर वायरल</title>
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<description><![CDATA[ इटली प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मोजांबिक के राष्ट्रपति डेनियल फ्रांसिस्को चापो से पिछले हफ्ते रोम में हुई मुलाकात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हाइट के बड़े अंतर ने सबका ध्यान खींच लिया। मेलोनी राष्ट्रपति चापो से मिलने आगे बढ़ीं तो ऊपर देखकर थोड़ा हैरान हो गईं, फिर शरमाते हुए मुस्कुराईं और फोटो खिंचवाने के लिए पोज किया। 48 साल के राष्ट्रपति चापो की लंबाई करीब 6 फुट 8 इंच है, जबकि मेलोनी की लंबाई करीब 5 फुट 2 इंच है। इस बड़े अंतर की वजह से फोटोग्राफर्स को दोनों को एक ही फ्रेम में कैद करने में काफी मुश्किल हुई, कई फोटोग्राफर्स झुक गए, तो कुछ जमीन पर लेटकर तस्वीरें लेने लगे। राष्ट्रपति चापो बास्केटबॉल के शौकीन हैं और पहले भी अन्य विश्व नेताओं के साथ तस्वीरों में अपनी लंबाई की वजह से चर्चा में रह चुके हैं। यह बैठक मोजांबिक की आजादी की 50वीं वर्षगांठ और दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार और विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग पर बात की। इस प्लान में ऊर्जा तक पहुंच, सतत कृषि, व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने जैसे कई संयुक्त प्रोजेक्ट शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... ट्रम्प ने 7 और देशों पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगाया; 15 देशों के इमिग्रेंट वीजा पर रोक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को सात और देशों पर पूरी तरह से यात्रा पाबंदी लगा दी हैं। इसके साथ ही फिलिस्तीनियों पर भी बैन लगा दिया है। साथ ही 15 दूसरे देशों पर प्रवेश प्रतिबंध (स्थायी निवास) लगाए गए हैं। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, कमजोर जांच प्रणाली और वीजा ओवरस्टे की उच्च दरों का हवाला देकर उठाया गया है। इससे पहले 19 देशों पर पहले से ही यात्रा प्रतिबंध या प्रवेश सीमाएं लगाई गई थी। व्हाइट हाउस के फैक्ट-शीट के अनुसार, नए घोषणा में बुर्किना फासो, माली, नाइजर, साउथ सूडान और सीरिया पर पूरी यात्रा पाबंदी लगाई गई है। फिलिस्तीनियों पर भी पूरी रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, पहले आंशिक प्रतिबंध वाले लाओस और सिएरा लियोन पर अब पूरी पाबंदी लगा दी गई है। ये नए प्रतिबंध और सीमाएं 1 जनवरी से लागू होंगे। इससे पहले गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा था कि अमेरिकी प्रशासन वर्तमान यात्रा प्रतिबंध को 19 से बढ़ाकर 30 से अधिक देशों तक विस्तार करने की योजना बना रहा है। उस समय उन्होंने सटीक संख्या या देशों के नाम नहीं बताए थे। अमेरिका पहले से ही 12 देशों (अफगानिस्तान, बर्मा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन) पर पूरी यात्रा पाबंदी लगा चुका है। नई घोषणा में 15 नए देशों (अंगोला, एंटीगुआ एंड बारबुडा, बेनिन, कोट डी&#039;आइवोर (आइवरी कोस्ट), डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंजानिया, टोंगा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे) पर आंशिक प्रवेश प्रतिबंध लगाए गए हैं। बुरींडी, क्यूबा, टोगो और वेनेजुएला पर आंशिक प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेंगे। तुर्कमेनिस्तान एकमात्र देश है जहां नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर प्रतिबंध हटा लिया गया है, हालांकि इमिग्रेंट वीजा पर रोक बरकरार है। घोषणा में कानूनी स्थायी निवासियों, मौजूदा वीजा धारकों, राजनयिकों, एथलीटों और अमेरिकी राष्ट्रीय हित में प्रवेश करने वालों को छूट दी गई है, साथ ही मामले-दर-मामले छूट का प्रावधान भी रखा गया है, लेकिन परिवार आधारित इमिग्रेंट वीजा की छूट को धोखाधड़ी के जोखिम के कारण सीमित कर दिया गया है। मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान मिला: द ग्रेट ऑनर निशां पाने वाले पहले ग्लोबल लीडर बने; PM बोले- यहां अपनापन लगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया ने मंगलवार को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया। वे ‘द ग्रेट ऑनर निशां ऑफ इथियोपिया’ पाने वाले पहले ग्लोबल लीडर बन गए हैं। इस मौके पर पीएम ने कहा कि ये सम्मान मेरे लिए गौरव की बात है। उनके इथियोपिया दौरे का आज दूसरा दिन है। इससे पहले कल मोदी का इथियोपिया का नेशलन पैलेस में PM अबी अहमद अली ने औपचारिक स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि इथियोपिया आकर उन्हें बेहद खुशी महसूस हो रही है। पीएम ने कहा कि यह उनका पहला इथियोपिया दौरा है, लेकिन यहां पहुंचते ही अपनेपन का एहसास हुआ। पूरी खबर पढ़ें... एपस्टीन सेक्स स्कैंडल फाइल्स खुलने में 2 दिन बाकी: ट्रम्प का नाम आया, दुनियाभर के नेता-बिजनेसमैन में डर; क्या कोई भारतीय भी शामिल ट्रम्प प्रशासन 19 दिवंबर को कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकता है। इस दौरान एपस्टीन केस से जुड़े सभी ईमेल, तस्वीरें और डॉक्यूमेंट्स पब्लिक होंगे। इसका मकसद एपस्टीन के पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने लाना है। आरोप है कि इस नेटवर्क में नाबालिग लड़कियों का शोषण हुआ और दुनिया के कई बेहद ताकतवर लोग इससे जुड़े थे। इससे पहले इस केस से जुड़ीं 19 तस्वीरें 12 दिसंबर को पब्लिक हुई थीं। इसमें 3 तस्वीरें ट्रम्प की हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, अरबपति बिल गेट्स जैसे बड़ी हस्तियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक हुईं। पूरी खबर पढ़ें... ---------------------------------------------- 16 दिसंबर के अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:53:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च सम्मान मिला:द ग्रेट ऑनर निशां पाने वाले पहले ग्लोबल लीडर बने; PM बोले&#45; यहां अपनापन लगा</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया ने मंगलवार को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया। वे ‘द ग्रेट ऑनर निशां ऑफ इथियोपिया’ पाने वाले पहले ग्लोबल लीडर बन गए हैं। इस मौके पर पीएम ने कहा कि ये सम्मान मेरे लिए गौरव की बात है। उनके इथियोपिया दौरे का आज दूसरा दिन है। इससे पहले कल मोदी का इथियोपिया का नेशलन पैलेस में PM अबी अहमद अली ने औपचारिक स्वागत किया, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि इथियोपिया आकर उन्हें बेहद खुशी महसूस हो रही है। पीएम ने कहा कि यह उनका पहला इथियोपिया दौरा है, लेकिन यहां पहुंचते ही अपनेपन का एहसास हुआ। मोदी के इथियोपिया दौरे से जुड़ी 8 तस्वीरें... मोदी को खुद कार चलाकर होटल ले गए थे PM अली इथियोपिया के प्रधानमंत्री अहमद अली कल PM मोदी को अदीस अबाबा एयरपोर्ट पर लेने पहुंचे थे। दोनों नेताओं ने एयरपोर्ट पर ही अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान PM अहमद अली ने मोदी को पारंपरिक कॉफी भी पिलाई। इसके बाद अहमद अली खुद कार चलाकर मोदी को होटल ले गए। उन्होंने रास्ते में मोदी को साइंस म्यूजियम और मैत्री पार्क भी दिखाया। यह PM का पहला इथियोपिया दौरा है। वे यहां 2 दिन के राजकीय दौरे पर हैं। PM अली ने मोदी की सोच की तारीफ की इथियोपियाई प्रधानमंत्री अहमद अली ने मंगलवार को द्विपक्षीय बैठक के दौरान PM मोदी की सोच की तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा यह बात कहते हैं कि अफ्रीका के साथ साझेदारी उसकी जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भारत और इथियोपिया के बीच नई और मजबूत साझेदारी की जरूरत है। अहमद अली ने कहा कि देश में विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है और इसमें भारत सबसे बड़ा निवेशक बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि इथियोपिया में 615 से ज्यादा भारतीय कंपनियां निवेश कर रही हैं। बैठक में मोदी ने इथियोपिया के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप दोगुना करने का ऐलान किया। साथ ही पहलगाम आतंकी हमले पर संवेदना और आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। इथियोपिया का दूसरा बड़ा ट्रेड पार्टनर भारत भारत, इथियोपिया का दूसरा बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 5175 करोड़ रुपए का ट्रेड हुआ। इस दौरान भारत ने 4433 करोड़ रुपए और इथियोपिया ने 742 करोड़ रुपए का निर्यात किया। इथियोपिया, भारत से लोहा, स्टील, मेडिसन और फार्मास्युटिकल्स, मशीनरी और उपकरण आयात करता है। वहीं भारत, इथियोपिया से दालें, कीमती पत्थर, सब्जियां और बीज, चमड़ा और मसाले आयात करता है। भारत और इथियोपिया के बीच व्यापारिक रिश्तों की शुरुआत 1940 के दशक में हुई थी। आजादी से पहले ही दोनों के बीच कारोबार शुरू हो गया था। 1950 में राजनयिक संबंध बनने के बाद दोनों देशों में औपचारिक व्यापार शुरू हुआ। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... पहली बार इथियोपिया पहुंचे मोदी:PM अली ने नेशनल पैलेस में स्वागत किया, खुद कार चलाकर होटल ले गए थे; पीएम मोदी को सर्वोच्च सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जॉर्डन का दौरा पूरा करने के बाद इथियोपिया पहुंचे हैं। इथियोपिया के PM अबी अहमद अली ने नेशनल पैलेस में उनका औपचारिक स्वागत किया है। नेशनल पैलेस में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की। पूरी खबर यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 11:53:21 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने UN में पाकिस्तान को फटकार लगाई:इमरान खान को जेल, आसिम मुनीर को खुली छूट; राजदूत बोले&#45; PAK आतंकवाद का सेंटर</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत हरिश पर्वतनेनी ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति में जो उथल-पुथल चल रही है, उसका सीधा रिश्ता उसके सीमा-पार आतंकवाद से है। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जेल में डाल दिया गया, उनकी पार्टी पर रोक लगा दी गई, और 27वें संशोधन के जरिए सेना ने संविधान को अपने हिसाब से मोड़ दिया। भारत ने इसे ‘संवैधानिक तख्तापलट’ बताया। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान जिस तरह लोकतंत्र और कानून के साथ व्यवहार कर रहा है, वह उसकी गंभीर हालत को दिखाता है और उसी सोच के तहत वह लंबे समय से आतंकवाद को भी बढ़ावा देता रहा है। राजदूत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का सेंटर बताया। इमरान को लेकर UN रिपोर्ट का हवाला दिया UNSC में ‘लीडरशिप फॉर पीस’ विषय पर हुई डिबेट में राजदूत पर्वतनेनी ने कहा कि इमरान खान अगस्त 2023 से भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद हैं। विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उन पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की यातना पर विशेष रिपोर्टर एलिस जिल एडवर्ड्स की उस चिंता का भी जिक्र किया, जिसमें अदियाला जेल में इमरान खान के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया गया है। भारतीय राजदूत बोले- कश्मीर का जिक्र PAK के खतरनाक सोच को दिखाता भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर पर उसके दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं, थे, हैं और हमेशा रहेंगे। पर्वतनेनी ने आगे कहा कि पाकिस्तान का जम्मू-कश्मीर का अनावश्यक जिक्र करना उसके भारत को नुकसान पहुंचाने के खतरनाक सोच को दिखाता है। राजदूत ने पाकिस्तान को &quot;आतंकवाद का सेंटर&quot; करार देते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच का इस्तेमाल भारत और उसके लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि एक अस्थायी सुरक्षा परिषद सदस्य होने के बावजूद वह लोगों को बांटने वाल एजेंडा चला रहा है, जिससे वह अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सकता। आतंकवादी हमलों के चलते सिंधु जल संधि निलंबित हुआ वहीं, भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के अपने फैसले का मजबूती से बचाव किया। पर्वतनेनी ने कहा कि 65 साल पहले भारत ने सद्भावना से इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन करते हुए तीन युद्ध छेड़े और हजारों आतंकी हमले करवाए। पर्वतनेनी ने कहा, &#039;पिछले चार दशकों में आतंकवाद से हजारों भारतीयों की जान गई है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आतंकवादियों ने धर्म के आधार पर 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या की।&#039; इसी कारण भारत ने सिंधु जल संधि को तब तक निलंबित रखने का फैसला किया है, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद और हर तरह के आतंकवाद को खत्म नहीं कर देता। राजदूत ने साफ कहा कि भारत आतंकवाद का पूरी ताकत से मुकाबला करेगा। पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स मुनीर पाकिस्तान सरकार ने 4 दिसंबर को आसिम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) नियुक्त किया था। दोनों पदों पर उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। नियुक्ति को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंजूरी दी थी। मुनीर पाकिस्तान के पहले सैन्य अधिकारी हैं जो एकसाथ CDF और COAS दोनों पद संभालेंगे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नियुक्ति की सिफारिश करते हुए राष्ट्रपति को समरी भेजी थी। मुनीर को इसी साल फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया था। पाकिस्तानी संसद ने 12 नवंबर को सेना की ताकत बढ़ाने वाला 27वां संवैधानिक संशोधन पास किया था। इसके तहत मुनीर को CDF बनाया गया। इस पद के मिलते ही उन्हें पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की कमान भी मिल गई यानी वे देश के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं। इमरान खान 2 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं इमरान खान पर 100 से ज्यादा केस चल रहे हैं और वे अगस्त 2023 से जेल में हैं। भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें सरकारी गिफ्ट (तोशाखाना केस) बेचने और सरकारी सीक्रेट लीक करने जैसे आरोप शामिल हैं। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अल-कादिर ट्रस्ट के लिए पाकिस्तान सरकार की अरबों रुपए की जमीन को सस्ते में बेच दिया था। इस मामले में इमरान को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पूरे मुल्क में फौज के कई अहम ठिकानों पर हमले हुए थे।​​​ पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने अल-कादिर ट्रस्ट केस में दिसंबर 2023 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी और अन्य 6 व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया था। हालांकि जब इमरान के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ, उससे पहले से ही वे तोशाखाना केस में अडियाला जेल में बंद थे। ​​​​ ]]></description>
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<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 11:42:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>ऑस्ट्रेलियाई बीच पर आतंकी हमले में 3 भारतीय छात्र घायल:PM अल्बनीज बोले&#45; हमलावर ISIS से प्रेरित थे, इस्लामिक कट्टरता बड़ी समस्या; अब तक 15 मौतें</title>
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<description><![CDATA[ सिडनी आतंकी हमले में 3 भारतीय छात्र भी घायल हो गए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम दो छात्र इस समय अस्पताल में भर्ती हैं। PM एंथनी अल्बनीज ने रविवार को सिडनी में यहूदी समुदाय के एक कार्यक्रम में कहा कि हमलावरों की सोच इस्लामिक स्टेट (ISIS) से प्रभावित थी।  उन्होंने कहा कि इस आतंकी संगठन से जुड़ी कट्टर सोच ने उन्हें कट्टरपंथी बना दिया था। अल्बनीज ने माना कि इस्लाम की कट्टर व्याख्या एक गंभीर समस्या है।  ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में 14 दिसंबर को बॉन्डी बीच पर जश्न मना रहे यहूदी लोगों पर दो आतंकियों ने हमला कर दिया था। इसमें 15 लोगो की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इसके अलावा एक आतंकी की भी मौत हो गई थी। पुलिस को रविवार को जांच के दौरान ISIS से जुड़े झंडे और विस्फोटक सामग्री मिली थीं। शोक की 5 तस्वीरें... PM बोले- लोगों को मारना नफरत की विचारधारा अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) को बताया, “ऐसा लगता है कि यह इस्लामिक स्टेट विचारधारा से प्रेरित था। यह नफरत की विचारधारा है, जो एक दशक से अधिक समय से मौजूद है और इस मामले में बड़े पैमाने पर हत्या कर दी जाती है।” प्रधानमंत्री ने बताया कि हमलावरों में से एक की 2019 में जांच हुई थी, लेकिन तब उसे खतरे की श्रेणी में नहीं रखा गया था और उस पर निरंतर निगरानी नहीं की जा रही थी। अल्बनीज ने कहा, “अब यह जांच करना होगा कि क्या उसके बाद वह और अधिक कट्टर हो गया था।” उन्होंने देश में यहूदियों के खिलाफ नफरत (एंटीसेमिटिज्म) से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र किया। “हम इस पर पूरी ताकत से काम कर रहे हैं। लेकिन एंटीसेमिटिज्म बहुत पुरानी समस्या है।” पुलिस ने इसे आतंकवादी घटना घोषित किया है। यहूदियों पर आतंकी हमले से जुड़ी 3 तस्वीरें... लाइसेंसी बंदूक से हमलावर ने गोलीबारी की थी पुलिस के मुताबिक, 50 साल के हमलावर साजिद अकरम के पास लाइसेंसी बंदूक थी, जिसका इस्तेमाल वह शिकार के लिए करता था। एनएसडब्ल्यू पुलिस कमिश्नर मल लैनयन ने कहा कि साजिद अकरम एक गन क्लब का सदस्य था और राज्य के कानून के तहत उसके पास लाइसेंस था। साजिद अकरम के पास कानूनी रूप से 6 बंदूकें थी। गोलीबारी के लिए निकलने से पहले बाप-बेटे ने अपने परिवार को कहा था कि वह मछलियां पकड़ने जा रहे हैं। अकरम अपने परिवार के साथ एक किराए के घर में रहता था। हमले के बाद पुलिस ने इस मकान पर छापेमारी की। रिपोर्ट के मुताबिक साजिद अकरम फलों की दुकान चलाता था। 6 बंदूकें कानूनी रूप से रख सकता आतंकी साजिद के पास कैटेगरी AB फायरआर्म लाइसेंस था, जो रिक्रिएशनल हंटिंग (शिकार) के लिए जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस लाइसेंस से वह 6 बंदूकें कानूनी रूप से रख सकता था, और हमले में इस्तेमाल हुई बंदूकें इन्हीं में से लगती हैं। ऑस्ट्रेलिया में बंदूक कानून सख्त हैं, लेकिन 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद सेमी-ऑटोमैटिक हथियारों पर बैन लगा दिया गया था। फिर भी, मैनुअल एक्शन वाली बंदूकें जैसे बोल्ट-एक्शन राइफल्स और उनके वेरिएंट – जैसे स्ट्रेट पुल एक्शन, बेसिक लाइसेंस से मिल जाती हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट जेरार्ड डटन के मुताबिक, हमले के वीडियो में दिख रही राइफल एक स्ट्रेट पुल बोल्ट-एक्शन थी, जो पारंपरिक बोल्ट-एक्शन से थोड़ी तेज फायर करती है, लेकिन सेमी-ऑटोमैटिक नहीं है, इसलिए इसे सामान्य लाइसेंस से हासिल किया जा सकता था। ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख लोगों के पास 40 लाख बंदूकें ऑस्ट्रेलिया में बंदूक रखना आम है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, औसतन हर लाइसेंसधारी के पास 3-4 बंदूकें हैं। यहां 10 लाख लोगों के पास 40 लाख से ज्यादा बंदूकें हैं। कुछ लोग तो सैकड़ों बंदूकें रखते हैं। सिडनी में दो लोगों के पास 300 से ज्यादा बंदूकें हैं। एनएसडब्ल्यू में बंदूक लाइसेंस पाने के लिए 18 साल से ज्यादा उम्र, कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड न होना और वैध कारण जैसे स्पोर्ट शूटिंग, हंटिंग या पेस्ट कंट्रोल जरूरी है। इस हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट फिर चर्चा में है, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि मौजूदा नीतियां सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। प्रधानमंत्री और राज्य नेता बंदूक कानूनों को और सख्त करने पर सहमत हुए हैं। इसमें राष्ट्रीय फायरआर्म रजिस्टर जल्द लॉन्च करना, एक व्यक्ति द्वारा रखी जा सकने वाली बंदूकों की संख्या पर सीमा लगाना और कुछ तरह के हथियारों पर और प्रतिबंध शामिल हैं। स्ट्रेट पुल बोल्ट-एक्शन गन अमेरिका-यूरोप में भी फेमस स्ट्रेट पुल बोल्ट-एक्शन एक खास तरह की बोल्ट-एक्शन राइफल है। सामान्य बोल्ट-एक्शन राइफल में गोली लोड करने और खाली कारतूस निकालने के लिए बोल्ट हैंडल को ऊपर उठाना, पीछे खींचना, आगे धकेलना और फिर नीचे घुमाकर लॉक करना पड़ता है। इसमें बोल्ट को घुमाने (rotate) की जरूरत नहीं पड़ती। एक विशेष मैकेनिज्म (जैसे कैमिंग सिस्टम) अपने आप बोल्ट को लॉक और अनलॉक कर देता है। इससे राइफल को बहुत तेजी से रीलोड किया जा सकता है, खासकर फॉलो-अप शॉट्स (लगातार गोलियां चलाने) में। हाथ की मूवमेंट कम होने से निशाना कम बिगड़ता है। यह गन तेज ऑपरेशन के लिए बेहतर मानी जाती है। यह सेमी-ऑटोमैटिक जैसी स्पीड देती है। इसका ज्यादातर इस्तेमाल शिकार और बायथलॉन जैसे स्पोर्ट्स में बहुत लोकप्रिय है। यह यूरोप में काफी आम है और अमेरिका में हाल ही में पॉपुलर हो रही है। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई हीरो अहमद से मुलाकात की प्रधानमंत्री ने अस्पताल में ऑस्ट्रेलियाई हीरो कहे जाने वाले अहमद अल अहमद से मुलाकात की और कहा कि उस व्यक्ति से मिलना बहुत बड़ा सम्मान था जिसने बोंडी के हमलावरों में से एक पर घात लगाकर हमला किया और उससे राइफल छीन ली। कोगाराह के सेंट जॉर्ज अस्पताल के बाहर PM ने कहा, &quot;वह एक सच्चे ऑस्ट्रेलियाई नायक हैं।&quot; अहमद अंधाधुंध फायरिंग कर रहे आतंकी साजिद अकरम से निहत्थे भिड़ गए। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए पीछे से आतंकी पर झपट्टा मारा और उससे बंदूक छीन ली, जिससे कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका मिल गया। इस हमले में एक आतंकी समेत 16 लोगों की मौत हुई है। लोग अब अहमद को ‘ऑस्ट्रेलिया का नया हीरो’ कह रहे हैं। अहमद जब आतंकी साजिद से मुठभेड़ करने जा रहे थे, तब उनके भाई ने उन्हें रोका था। तब उन्होंने कहा था, &#039;अगर मुझे कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि मैं लोगों की जान बचाते हुए मारा गया।&#039; आतंकियों के पाकिस्तानी मूल के होने का शक इस घटना में शामिल दोनों आतंकियों की पहचान हो गई है। ये बाप-बेटे हैं। पुलिस को इनके पाकिस्तानी मूल के होने का शक है। आतंकियों ने रविवार को बॉन्डी बीच पर हनुक्का फेस्टिवल मना रहे लोगों पर फायरिंग की थी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने 50 साल के साजिद अकरम को मौके पर ही गोली मार दी, जिससे वो वहीं ढेर हो गया। वहीं, उसके साथ फायरिंग कर रहा उसका 24 साल का बेटा नवीद अकरम पुलिस की गोली से घायल हुआ, वह अस्पताल में गंभीर हालत में है। गोलियां बरसाने से पहले आतंकी ने मां से झूठ कहा था नवीद ने हमले से कुछ घंटे पहले अपनी मां से बात की थी। द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के मुताबिक, उसने अपनी मां से कहा था कि वह तैराकी करने गया है और अब खाने जा रहा है। सिडनी में पुलिस जब उनके घर को घेर रही थी, तब हमलावर की मां वेरेना ने मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि उनके बेटे नवीद ने उन्हें रविवार सुबह आखिरी बार फोन किया था। उस समय वह अपने पिता साजिद अकरम के साथ जर्विस बे में वीकेंड ट्रिप पर था। वेरेना ने कहा, “उसने मुझे रविवार को फोन किया और कहा, मम्मी, मैं अभी तैर कर आया हूं। मैंने स्कूबा डाइविंग की। अब हम खाने जा रहे हैं। फिर उसने कहा कि बहुत गर्मी है, इसलिए अब हम घर पर ही रहेंगे।” इसके कुछ ही घंटों बाद, साजिद और नवीद दोनों ने बॉन्डी बीच पर हनुक्का कार्यक्रम के दौरान गोलीबारी शुरू कर दी। मां बोली- हर मां चाहेगी उसका बेटा मेरे बेटे जैसा हो वेरेना ने कहा कि वह क्राइम साइट पर ली गई तस्वीरों में अपने बेटे को पहचान ही नहीं पाईं। उसे यकीन नहीं हो रहा कि उसका बेटा हिंसा में शामिल हो सकता है। उसने कहा, “उसके पास कोई बंदूक नहीं है। वह बाहर भी नहीं घूमता। वह दोस्तों के साथ नहीं रहता। वह शराब नहीं पीता, सिगरेट नहीं पीता। वह बुरी जगहों पर नहीं जाता। वह काम पर जाता है, घर आता है और बस यही उसकी जिंदगी है।” वेरने ने कहा कि कोई भी मां चाहेगी कि उसका बेटा मेरे बेटे जैसा हो। क्योंकि वह एक अच्छा लड़का है। उसने कहा कि नवीद करीब दो महीने से बेरोजगार था। जिस निर्माण कंपनी में वह ईंट लगाने का काम करता था, वह बंद हो गई थी। इसके बाद वह लगातार नई नौकरी की तलाश कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे की वजह अब भी पता लगाई जा रही है। इस घटना से पूरा ऑस्ट्रेलिया दहल गया है और देशभर में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ऑस्ट्रेलियाई मंत्री बोले- साजिद रेजिडेंट रिटर्न वीजा पर रह रहा था ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने खुलासा किया है कि साजिद अकरम 1998 में छात्र वीजा पर ऑस्ट्रेलिया आया था। उसने वेरेना नामक ऑस्ट्रेलियाई महिला से शादी की और अपना वीजा पार्टनर वीजा में बदल लिया। तब से वह रेजिडेंट रिटर्न वीजा पर था। यानी साजिद अकरम के पास ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता नहीं थी। बर्क ने यह नहीं बताया कि अकरम ऑस्ट्रेलिया में कहां से आकर बसा था। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि वह पाकिस्तान से आया था। अकरम के बेटे नवीद का जन्म 2001 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। वह एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है। अब तक हमले में मारे गए 9 लोगों की पहचान हो पाई है हनुक्का फेस्टिवल मना रहे यहूदियों को निशाना बनाया गया रविवार को घटना के वक्त यहूदी समुदाय के लोग हनुक्का फेस्टिवल मना रहे थे। यह यहूदियों का खास त्यौहार है, जो 14 दिसंबर से शुरू हुआ था। बॉन्डी बीच पर हुई सामूहिक गोलीबारी की घटना के बाद मेलबर्न में आयोजित होने वाला हनुक्का फेस्टिवल रद्द कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया की कुल यहूदी आबादी करीब 1,17,000-1,20,000 है, जिसमें से लगभग आधी (53,000 से 60,000) मेलबर्न शहर में रहती है। 2021 जनगणना में विक्टोरिया (जिसमें मेलबर्न मुख्य है) में 46,000 यहूदी दर्ज हुए, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि असली संख्या 60,000 के करीब है। दुनियाभर के नेताओं ने शोक जताया.... भारतीय PM नरेंद्र मोदी: मैं ऑस्ट्रेलिया में हुए भयानक आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें यहूदी त्योहार हनुक्का के पहले दिन जश्न मना रहे लोगों को निशाना बनाया गया। भारत की जनता की ओर से मैं उन परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति और संवेदनाएं जताता हूं जिन्होंने अपने करीबी लोगों को खोया। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करता है। ब्रिटिश PM कीर स्टार्मर: गोलीबारी की खबर बेहद परेशान करने वाली है। यह यहूदी विरोधी आतंकी हमला है। हम इसकी निंदा करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प: हम पीड़ितों के लिए प्रार्थना ही कर सकते हैं। यह बहुत ही भयानक घटना थी। लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्हें गर्व से त्योहार मनाना चाहिए, और उन्हें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि वे कौन हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू: ऑस्ट्रेलियाई सरकार की नीतियों इस हमले के लिए जिम्मेदार है। सरकार की नीतियों ने आग में घी डालने का काम किया। हमने पहले चेतावनी दी थी, लेकिन जरुरी कदम नहीं उठाए गए। यहूदियों पर हमले की लोकेशन.... --------------------------------------- ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... ऑस्ट्रेलिया का हीरो अहमद- आतंकी साजिद से निहत्था भिड़ा: राइफल छीनी, भाई से कहा- कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि लोगों को बचाते हुए मरा ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बॉन्डी बीच पर जश्न मना रहे लोगों पर दो आतंकियों ने हमला किया। इस दौरान 44 साल के अहमद अल-अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 11:42:00 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ब्राजील में भीषण तूफान के कारण स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की रेप्लिका गिरी</title>
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<description><![CDATA[ ब्राजील के गुआइबा शहर में आए भीषण तूफान के कारण स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की लगभग 40 मीटर ऊंची रेप्लिका गिर गई। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। यह स्टैच्यू एक फास्ट-फूड आउटलेट के पास लगी थी। तेज हवाओं के बल से प्रतिमा झुक गई और फिर गिरकर टूट गई। टक्कर से प्रतिमा का सिर चकनाचूर हो गया। गिरते समय का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस तूफान से राज्य के कई इलाकों में ओले गिरे, छतें उड़ गईं, पेड़ गिरे, बिजली गुल हुई और कुछ सड़कें बाढ़ से प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने पहले ही तेज हवा और बारिश की चेतावनी जारी की थी, और मंगलवार से मौसम सुधारने की उम्मीद है, हालांकि कुछ बारिश जारी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... मेक्सिको में प्लेन फैक्ट्री से टकराई, 7 की मौत, 3 लापता; इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश में हादसा मेक्सिको में सोमवार को एक छोटा विमान इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इसमें सात लोगों की मौत हो गई जबकि 3 लापता हैं। यह प्राइवेट जेट एकापुल्को से टोलुका एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रहा था, लेकिन इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश में सैन मेटियो एटेंको इलाके में क्रैश हो गया। विमान ने एक फुटबॉल फील्ड पर लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन पास की एक फैक्ट्री की मेटल छत से टकरा गया, जिससे आग लग गई। आग की वजह से इलाके के करीब 130 लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया। दुर्घटना की जांच चल रही है, और शुरुआती रिपोर्ट्स में इंजन फेलियर की बात कही जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्राइवेट जेट में 8 पैसेंजर्स और 2 क्रू मेंबर थे। फिलहाल 7 लोगों के शव मिले हैं। बाकी लोगों की तलाश जारी है। -------------------------------- 15 दिसंबर के अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 11:42:00 +0530</pubDate>
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<title>ऑस्ट्रेलिया का हीरो अहमद&#45; आतंकी साजिद से निहत्था भिड़ा:राइफल छीनी, भाई से कहा&#45; कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि लोगों को बचाते हुए मरा</title>
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<description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बॉन्डी बीच पर जश्न मना रहे लोगों पर दो आतंकियों ने हमला किया। इस दौरान 44 साल के अहमद अल-अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई। अहमद अंधाधुंध फायरिंग कर रहे आतंकी साजिद अकरम से निहत्थे भिड़ गए। उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए पीछे से आतंकी पर झपट्टा मारा और उससे बंदूक छीन ली, जिससे कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका मिल गया। लोग उन्हें ‘ऑस्ट्रेलिया का नया हीरो’ कह रहे हैं। अहमद जब आतंकी साजिद से मुठभेड़ करने जा रहे थे, तब उनके भाई ने उन्हें रोका था। तब अहमद ने कहा था, &#039;अगर मुझे कुछ हुआ तो परिवार को बताना कि मैं लोगों की जान बचाते हुए गया।&#039; अब पढ़िए अहमद ने कैसे लोगों की जान बचाई... अहमद हनुक्का उत्सव में शामिल होने आए थे अहमद अल अहमद बॉन्डी बीच पर अपने चचेरे भाई जोजाय अलकंज के साथ हनुक्का उत्सव में शामिल होने आए थे। दोनों कॉफी पीने बाहर निकले थे। कुछ ही मिनटों बाद ताबड़तोड़ गोलीबारी की आवाजें सुनाई दी। अहमद ने देखा की दो लोग भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहे हैं। लोग चीखते-चिल्लाते भाग रहे थे। अहमद और जोजाय कारों के पीछे छिप गए। जोजाय डर से कांप रहे थे, अहमद ने उन्हें शांत करते हुए हमलावरों से निपटने की बात कही। अहमद ने आतंकी साजिद को धक्का मारकर दूर गिराया जोजाय ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन अहमद ने उनकी बात नहीं सुनी। वे कारों के पीछे से हमलावरों की गतिविधियों पर नजर रखने लगे। अहमद निहत्थे थे, लेकिन अपनी जान की परवाह किए बिना मौका मिलते ही सीधे हमलावर की ओर दौड़े। उन्होंने पीछे से झपट्टा मारकर 50 साल के आतंकी साजिद अकरम की राइफल छीन ली और उसे धक्का मारकर दूर गिरा दिया। अहमद ने राइफल आतंकी पर तान दी, जिससे डरकर वो पीछे की ओर भागने लगा। उन्होंने आतंकी से गन छीनकर कई लोगों की जान बचाई। आतंकियों की गोलियों से घायल हुए अहमद ने राइफल को एक पेड़ के पास रख दिया, लेकिन तभी दूसरी तरफ से आतंकी के बेटे नवीद अकरम ने उन पर हमला कर दिया। दो गोलियां अहमद के बाएं कंधे में लगीं। वे बेहोश होकर गिर पड़े। अहमद के चचेरे भाई मुस्तफा ने बताया कि अहमद को बंदूक चलानी नहीं आती थी, इसलिए शायद वह हमलावर पर बंदूक नहीं चला पाए। वह बस आतंकी को डराते रहे, लेकिन तब तक पीछे से उन्हें गोली लग गई। अहमद ने मुस्तफा से कहा कि उसे नहीं पता कि उस क्षण उसे क्या हुआ था, ईश्वर ने उसे ऐसी शक्ति दी जो उसने पहले कभी नहीं महसूस हुई। अहमद ने कहा कि उसे हर कीमत पर लोगों को बचाना था। अहमद की हालत स्थिर, बोले- फिर करना पड़े तो दोबारा करूंगा
अहमद फिलहाल सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी सर्जरी हो चुकी है और वे ठीक हो रहे हैं। अस्पताल से अहमद की तस्वीर सामने आई है। उन्होंने कहा है कि अगर दोबारा मौका मिला तो वह फिर वही साहसिक कदम उठाएंगे।
उनके पिता ने बताया कि अहमद अच्छे मूड में हैं। मैं भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा हूं कि मेरे बेटे ने निर्दोष लोगों को हत्यारों से बचाया। वहीं, जब अहमद की मां को जब पता चला कि उनके बेटे ने अपनी जान पर खेलकर लोगों की जानें बचाई हैं, तो वे रोने लगीं।
 गृहयुद्ध में सीरिया से भागकर ऑस्ट्रेलिया आए थे अहमद अहमद मुस्लिम समुदाय से हैं। वह 2006 में गृहयुद्ध के कारण सीरिया से भागकर ऑस्ट्रेलिया आए थे। उनकी एक तंबाकू की दुकान है। अहमद पांच और छह साल की दो बेटियों के पिता हैं। अहमद के वकील ने मीडिया को बताया कि 2019 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया था, क्योंकि एनएसडब्ल्यू पुलिस ने उन पर चोरी का सामान रखने का आरोप लगाया था। बाद में आरोप हट गए और 2022 में उन्हें नागरिकता मिली। नागरिकता मिलने के बाद अहमद खुद को ऑस्ट्रेलियाई समाज का कर्जदार मानते हैं। फिलहाल वह एक तंबाकू की दुकान चलाकर अपना गुजारा करते हैं। अहमद के वकील ने कहा कि अहमद एक अच्छे नागरिक हैं और कड़ी मेहनत करते हैं। अब उनकी बहादुरी के इनाम के रूप में वे अहमद के बुजुर्ग माता-पिता को भी नागरिकता दिलाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से इसके लिए अपील भी की है। ट्रम्प बोले- बहादुर व्यक्ति ने लोगों को बचाया, मेरे मन में बहुत सम्मान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अहमद की बहादुरी की तारीफ की। ट्रम्प ने कहा, &#039;ऑस्ट्रेलिया में एक बहादुर व्यक्ति ने हमलावरों में से एक पर सीधे हमला किया। उन्होंने कई लोगों की जान बचाई, जिस व्यक्ति ने ऐसा किया, उसके प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है।&quot; ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा, &#039;ऑस्ट्रेलियाई लोग खतरे में भी दौड़कर दूसरों की मदद करते हैं। ये हीरो हैं और उनकी बहादुरी ने जानें बचाईं।&#039; न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने भी कहा कि इस मुश्किल और दुख की घड़ी में भी ऑस्ट्रेलियाई बहादुर हैं, जो अजनबियों के लिए जान जोखिम में डालते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि उनकी बहादुरी की वजह से आज रात कई लोगों की जान बची है। लोगों ने फंडिंग कर अहमद के लिए ₹3.43 करोड़ जुटाए लोगों ने अहमद के लिए 570,000 डॉलर (₹3.43 करोड़) से अधिक की फंडिंग जुटाई है। ऑस्ट्रेलिया की क्राउडफंडिंग साइट GoFundMe पर करीब 5700 लोगों ने एक कैंपेन चलाया था। दानदाताओं में अमेरिकी अरबपति बिल एकमैन भी शामिल हैं, जिन्होंने 100,000 डॉलर का दान दिया है। पूरे देश में लोग अहमद की सेहत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और उम्मीद है कि वे जल्द अपनी बेटियों और परिवार के पास लौटेंगे। ऑस्ट्रेलियाई मंत्री बोले- आतंकी साजिद रेजिडेंट रिटर्न वीजा पर रह रहा था ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने खुलासा किया है कि आतंकी साजिद अकरम 1998 में छात्र वीजा पर ऑस्ट्रेलिया आया था। उसने वेरेना नामक ऑस्ट्रेलियाई महिला से शादी की और अपना वीजा पार्टनर वीजा में बदल लिया। तब से वह रेजिडेंट रिटर्न वीजा पर था। यानी साजिद अकरम के पास ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता नहीं थी। बर्क ने यह नहीं बताया कि अकरम ऑस्ट्रेलिया में कहां से आकर बसा था। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि वह पाकिस्तान से आया था। अकरम के बेटे नवीद का जन्म 2001 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। वह एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है। यहूदियों पर हमले की लोकेशन हनुक्का फेस्टिवल मना रहे यहूदियों को निशाना बनाया गया रविवार को घटना के वक्त यहूदी समुदाय के लोग हनुक्का फेस्टिवल मना रहे थे। यह यहूदियों का खास त्यौहार है, जो 14 दिसंबर से शुरू हुआ था। बॉन्डी बीच पर हुई सामूहिक गोलीबारी की घटना के बाद मेलबर्न में आयोजित होने वाला हनुक्का फेस्टिवल रद्द कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया की कुल यहूदी आबादी करीब 1,17,000-1,20,000 है, जिसमें से लगभग आधी (53,000 से 60,000) मेलबर्न शहर में रहती है। 2021 जनगणना में विक्टोरिया (जिसमें मेलबर्न मुख्य है) में 46,000 यहूदी दर्ज हुए, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि असली संख्या 60,000 के करीब है। ------------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... ऑस्ट्रेलियाई पुलिस को शक- आतंकी बाप-बेटे पाकिस्तानी मूल के: अब तक 16 की मौत; कल बीच पर त्योहार मना रहे यहूदियों पर फायरिंग की थी ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बॉन्डी बीच पर हुए आतंकी हमले को लेकर पुलिस ने बताया है कि दोनों आतंकी बाप-बेटे हैं। इनके पाकिस्तानी मूल के होने का शक है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 18:02:36 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:हॉन्गकॉन्ग में चीन विरोधी मीडिया टायकून दोषी, देश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप था</title>
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<description><![CDATA[ हॉन्गकॉन्ग में पूर्व मीडिया कारोबानी जिमी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में दोषी ठहराया गया है। अब उन्हें उम्रकैद की सजा मिल सकती है। 78 साल के लाई चीन के विरोधी और लोकतंत्र के समर्थक रहे हैं। लाइ पहले ‘एपल डेली’ अखबार चलाते थे। यह अखबार हांगकांग सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का खुलकर विरोध करता रहा है। जिमी लाई को अगस्त 2020 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। यह कानून 2019 में हुए बड़े सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के बाद लाया गया था। 5 साल बाद कोर्ट ने लाई को विदेशी ताकतों से सांठगांठ करने की साजिश रचने और अपने अखबार के जरिए देशद्रोही खबरें प्रकाशित करने का दोषी पाया। हालांकि लाई ने सभी आरोपों से इनकार किया था और खुद को निर्दोष बताया था। कोर्ट के फैसले को बीजिंग के अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की कसौटी के तौर पर भी देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्होंने जिमी लाई का मामला चीन के सामने उठाया था। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा है कि उनकी सरकार जिमी लाई की रिहाई को प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि जिमी लाई ब्रिटिश नागरिक हैं। हॉन्गकॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था, जो 1997 में चीन के नियंत्रण में आया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... ईरान बोला- हिजबुल्लाह को इजराइल के खिलाफ समर्थन देते रहेंगे; बड़े पैमाने पर हथियार और पैसा दे रहा ईरान और लेबनान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर हिजबुल्लाह संगठन को लेकर। दरअसल, ईरान लंबे समय से हिजबुल्लाह को अपना करीबी सहयोगी मानता है और इसे इजराइल के खिलाफ “प्रतिरोध मोर्चे” का सबसे मजबूत हिस्सा बताता है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने रविवार को साफ कहा कि ईरान हिजबुल्लाह को इजराइल से मुकाबला करने में पूरी ताकत से समर्थन देता रहेगा। इसका मतलब है कि ईरान हिजबुल्लाह को हथियार, पैसा और दूसरी मदद देना जारी रखेगा, क्योंकि वह इसे क्षेत्र में इजराइल के खिलाफ अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। ईरान इसी तरह गाजा के हमास और यमन के हूती विद्रोहियों को भी समर्थन देता है, जिसे वह “प्रतिरोध अक्ष” कहता है। दूसरी तरफ, लेबनान पर अमेरिका और इजराइल का दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को हथियार डालने पर मजबूर करे, खासकर दक्षिणी लेबनान में जहां हिजबुल्लाह का बहुत प्रभाव है। हाल की इजराइल के साथ एक साल से ज्यादा चली लड़ाई और सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिरने से हिजबुल्लाह काफी कमजोर हो गया है। ईरान हिजबुल्लाह को रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन, एंटी-टैंक हथियार और एक्सप्लोसिव्स सप्लाई करता है। पहले सीरिया के रास्ते जमीन से हथियार पहुंचते थे, लेकिन 2024 में असद के गिरने के बाद यह रूट बंद हो गया। अब ईरान हवाई जहाज, समुद्री जहाज (यूरोपीय पोर्ट्स तक कवर के रूप में) और इराक के रास्ते छोटी मात्रा में हथियार भेजने की कोशिश कर रहा है। 2024 की इजरायल के साथ लड़ाई में हिजबुल्लाह के ज्यादातर हथियार नष्ट हो गए, इसलिए ईरान अब उसे फिर से हथियार देकर री-आर्म करने में लगा है। ईरान के इसी समर्थन से लेबनान नाराज है। हाल ही में वेलायती ने कहा था कि लेबनान के लिए हिजबुल्लाह का होना रोजी-रोटी से भी ज्यादा जरूरी है, जिस पर लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ राजी बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर जवाब दिया कि लेबनान के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी संप्रभुता, आजादी और अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है। ईरान ने बातचीत के लिए राजी को तेहरान बुलाया भी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। 
14 दिसंबर के वर्ल्ड अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<title>राहुल आज जर्मनी जाएंगे, अफसरों&#45;भारतीय समुदाय से मिलेंगे:नेता प्रतिपक्ष की 6 महीने में 5वीं विदेश यात्रा; भाजपा ने कहा था&#45; वे लीडर ऑफ पर्यटन</title>
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<description><![CDATA[ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी के दौरे पर रहेंगे। वहां वे जर्मन सरकार के अफसरों और भारतीय समुदाय से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी का पिछले 6 महीनों में यह 5वां विदेश दौरा है। इससे पहले जुलाई से लेकर सितंबर के बीच वे लंदन, मलेशिया, ब्राजील, कोलंबिया की यात्रा पर गए थे। राहुल का जर्मनी दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब देश में संसद का शीतकालीन सत्र (1 से 19 दिसंबर तक) चल रहा है। इसको लेकर भाजपा ने राहुल के जर्मनी दौरे पर निशाना साधा था। राहुल के पिछले 6 महीनों की विदेश यात्राएं... ऐसा रहेगा जर्मनी दौरे का शेड्यूल राहुल गांधी 17 दिसंबर को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में होने वाले इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वे यूरोप के विभिन्न देशों से आए IOC के नेताओं से मुलाकात करेंगे। IOC ने इस दौरे को पार्टी के वैश्विक संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल बताया है। IOC ने कहा कि राहुल बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान यूरोप में IOC के लोकल ब्रांच के सभी प्रमुख NRI मुद्दों, कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और पार्टी की विचारधारा को विस्तार देने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। IOC ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष औसाफ खान ने कहा कि संगठन गांधी की मेजबानी कर सम्मानित महसूस कर रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा जैसे सीनियर नेता भी मौजूद रहेंगे। पिछले 5 साल में राहुल गांधी की विदेश यात्राएं जो विवादों में रहीं... ----------------- ये खबर भी पढ़ें... CRPF ने कहा था- राहुल गांधी सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं मानते: बिना बताए विदेश जाते हैं केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने सितंबर 2025 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगाया था। CRPF ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कहा था कि राहुल गांधी जनवरी से सितंबर के बीच बिना सूचना दिए 6 बार विदेश गए। इस दौरान वे इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया की यात्रा पर थे। पढ़ें पूरी खबर... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 11:30:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>PM मोदी जॉर्डन के लिए रवाना:7 साल बाद PM उनके मेहमान; भारत यहां से 40% फर्टिलाइजर खरीदता है</title>
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<description><![CDATA[ पीएम मोदी आज सुबह जॉर्डन के लिए रवाना हो गए हैं। मोदी 15 से 18 दिसंबर तक जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की त्रिपक्षीय यात्रा पर रहेंगे। मोदी जॉर्डन किंग अब्दुल्ला द्वितीय इन्न अल हुसैन के निमंत्रण पर जा रहे हैं। मोदी 15-16 दिसंबर तक जॉर्डन में रहेंगे। इस दौरान वह भारत-जॉर्डन संबंधों पर जॉर्डन किंग अब्दुल्ला के साथ बातचीत करेंगे। यह यात्रा भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने पर हो रही है। मोदी 16 दिसंबर को जॉर्डन से इथियोपिया जाएंगे। जॉर्डन किंग से मिलने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट गए थे मोदी तारीख- 10 फरवरी 2018, जगह- जॉर्डन। इस दिन पीएम मोदी फिलिस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे थे। उस समय भारत से फिलिस्तीन जाने की कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसी वजह से मोदी का विमान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में उतरा। यह यात्रा केवल 2 घंटे की ट्रांजिट विजिट थी। आमतौर पर ऐसे स्टॉप पर सिर्फ औपचारिक अधिकारी मिलते हैं, लेकिन इतने कम समय के बावजूद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला मोदी से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की मुलाकात एयरपोर्ट के पास ही हुई। इस छोटी सी मुलाकात के करीब 15 दिन बाद जॉर्डन किंग अब्दुल्ला भारत दौरे पर पहुंचे। उनके आने पर मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे। अब 7 साल बाद एक बार फिर मोदी जॉर्डन जा रहे हैं। स्टोरी में जानिए मोदी का यह दौरा खास क्यों है… भारत-जॉर्डन रिश्ते के 75 साल पूरे भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, जिसके 2025 में 75 साल पूरे हो गए हैं। मोदी इसी मौके पर जॉर्डन जा रहे हैं। भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपए था। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है। भारत, जॉर्डन से बड़ी मात्रा में रॉक फॉस्फेट और फर्टिलाइजर का कच्चा माल खरीदता है। भारत के कुल रॉक फॉस्फेट आयात में जॉर्डन की हिस्सेदारी करीब 40% है। दूसरी तरफ जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और उद्योगों से जुड़े उत्पादों का आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। IMEC कॉरिडोर पर भी चर्चा संभव भारत में साल 2023 में G20 समिट के दौरान पहली बार इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का ऐलान हुआ। यह एक इंटरनेशनल ट्रेड रूट का प्लान है, जिसके जरिए भारत का सामान मिडिल ईस्ट से होते हुए यूरोप तक पहुंचाया जाएगा। IMEC को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का विकल्प बताया जा रहा है। BRI भी एक इंटरनेशनल रूट है जिसमें एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने का प्लान है। इसकी शुरुआत 2013 में हो चुकी है। IMEC के ऐलान के करीब 1 महीने बाद 7 अक्टूबर को हमास ने इजराइल पर हमला शुरू कर दिया। इससे IMEC के भविष्य पर सवाल उठाए जाने लगे। 2 साल बाद गाजा जंग के रुकते ही एक बार फिर ये कॉरिडोर चर्चा में आ गया है। जॉर्डन और इजराइल में काम बाकी IMEC कॉरिडोर में भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और जर्मनी शामिल हैं। इसका मकसद यूरोप, मिडिल ईस्ट और भारत के बीच व्यापार को बढ़ाने के लिए एक ट्रेड रूट तैयार करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत यूरोप, मिडिल-ईस्ट और भारत को समुद्री और रेल मार्ग के जरिए जोड़ा जाएगा। सऊदी अरब में 1200 किमी का रेलमार्ग पहले ही तैयार है। जॉर्डन से लेकर इजराइल तक रेलमार्ग पर काम होना बाकी है। इसमें तेजी लाने के लिए मोदी के दौरे को अहम माना जा रहा है। यूरोप तक जल्दी पहुंचेगा भारत का सामान IMEC को यूरोप और साउथ एशिया को सीधा जोड़ने वाला नया ट्रेड रूट माना जा रहा है। अभी भारत से यूरोप तक कार्गो स्वेज कैनाल और लाल सागर से होकर गुजरता है। यह समुद्री रूट लंबा और भीड़भाड़ वाला है। इसमें समय भी ज्यादा लगता है। IMEC कॉरिडोर की कुल लंबाई 6 हजार किलोमीटर है। इसमें यूरोप से इजराइल और UAE से भारत के बीच 3500 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग भी शामिल है। भारत से कार्गो पहले समुद्री रास्ते से UAE या सऊदी अरब पहुंचेगा। वहां से रेल के जरिए जॉर्डन और इजराइल होते हुए सीधे यूरोप तक भेज दिया जाएगा। अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरिडोर के बनने के बाद भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने में करीब 40% समय बचेगा। साथ ही लागत में भी 30% की कमी आएगी। जॉर्डन किंग मोहम्मद साहब के सबसे करीबी वंशज जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। उनका संबंध सीधे हाशिमी वंश से है। मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे। कुरैश कबीले की एक शाखा बनू हाशिम थी। इसी बनू हाशिम से हाशिमी वंश शुरू हुआ, जिसे इस्लाम में सबसे प्रतिष्ठित वंश माना जाता है। पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा, उनके दामाद हजरत अली, उनके बेटे हसन और हुसैन आगे चलकर कई पीढ़ियों बाद मक्का के शरीफ बने। मक्का के शरीफ ही बाद में हाशिमी राजवंश के शासक बने। जॉर्डन के शासक हाशिमी राजवंश से आते हैं। इस राजवंश ने करीब 700 साल तक मक्का पर शासन किया। पहले जॉर्डन के राजा शरीफ हुसैन बिन अली थे। मौजूदा राजा अब्दुल्ला द्वितीय, उन्हीं के पड़पोते हैं। इस तरह उनका वंश सीधे पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ता है। जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा बनने की प्रक्रिया संविधान में तय है। जॉर्डन का संविधान कहता है कि सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी राजवंश से ही होगा और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलेगी। जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता देश जहां तेल नहीं जॉर्डन मिडिल ईस्ट का इकलौता देश है, जिसे ‘नो ऑयल’ देश कहा जाता है। हालांकि इजराइल, लेबनान, यमन और बहरीन जैसे देशों में भी तेल का उत्पादन लगभग न के बराबर होता है, लेकिन इन देशों में थोड़ा बहुत तेल होने या भविष्य में ज्यादा तेल होने की संभावना है। इसलिए ये देश नो ऑयल देश नहीं कहे जाते। दरअसल, मिडिल ईस्ट के जिन देशों में तेल के विशाल भंडार हैं, वहां करोड़ों साल पहले समुद्र मौजूद था। समुद्री जीव मरने के बाद वहां के तलछटी चट्टानों में कीचड़, रेत और मिट्टी के साथ दबकर तेल में बदल गए। दूसरी तरफ जॉर्डन का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तानी और पहाड़ी चट्टानों से बना है, जो समुद्र के नीचे नहीं था, इसलिए यहां तेल बनने की प्रक्रिया नहीं हो पाई। तेल न होने के बावजूद जॉर्डन के पास फॉस्फेट और पोटाश अच्छी मात्रा में है। ये दोनों उर्वरकों में इस्तेमाल होते हैं और जॉर्डन की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हैं। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें... दुनिया के 5 ताकतवर देशों का ग्रुप बना रहे ट्रम्प: इसमें भारत, रूस और चीन शामिल होंगे, G7 को C5 से रिप्लेस करने का प्लान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत, रूस, चीन और जापान के साथ एक नया ग्रुप कोर फाइव (C5) लाने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी वेबसाइट पॉलीटिको के मुताबिक यह मंच ग्रुप सेवन (G7) देशों की जगह लेगा। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 11:30:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:ईरान बोला&#45; हिजबुल्लाह को इजराइल के खिलाफ समर्थन देते रहेंगे; बड़े पैमाने पर हथियार और पैसा दे रहा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और लेबनान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर हिजबुल्लाह संगठन को लेकर। दरअसल, ईरान लंबे समय से हिजबुल्लाह को अपना करीबी सहयोगी मानता है और इसे इजराइल के खिलाफ “प्रतिरोध मोर्चे” का सबसे मजबूत हिस्सा बताता है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने रविवार को साफ कहा कि ईरान हिजबुल्लाह को इजराइल से मुकाबला करने में पूरी ताकत से समर्थन देता रहेगा। इसका मतलब है कि ईरान हिजबुल्लाह को हथियार, पैसा और दूसरी मदद देना जारी रखेगा, क्योंकि वह इसे क्षेत्र में इजराइल के खिलाफ अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानता है। ईरान इसी तरह गाजा के हमास और यमन के हूती विद्रोहियों को भी समर्थन देता है, जिसे वह “प्रतिरोध अक्ष” कहता है। दूसरी तरफ, लेबनान पर अमेरिका और इजराइल का दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को हथियार डालने पर मजबूर करे, खासकर दक्षिणी लेबनान में जहां हिजबुल्लाह का बहुत प्रभाव है। हाल की इजराइल के साथ एक साल से ज्यादा चली लड़ाई और सीरिया में बशर अल-असद की सरकार गिरने से हिजबुल्लाह काफी कमजोर हो गया है। ईरान हिजबुल्लाह को रॉकेट, मिसाइल, ड्रोन, एंटी-टैंक हथियार और एक्सप्लोसिव्स सप्लाई करता है। पहले सीरिया के रास्ते जमीन से हथियार पहुंचते थे, लेकिन 2024 में असद के गिरने के बाद यह रूट बंद हो गया। अब ईरान हवाई जहाज, समुद्री जहाज (यूरोपीय पोर्ट्स तक कवर के रूप में) और इराक के रास्ते छोटी मात्रा में हथियार भेजने की कोशिश कर रहा है। 2024 की इजरायल के साथ लड़ाई में हिजबुल्लाह के ज्यादातर हथियार नष्ट हो गए, इसलिए ईरान अब उसे फिर से हथियार देकर री-आर्म करने में लगा है। ईरान के इसी समर्थन से लेबनान नाराज है। हाल ही में वेलायती ने कहा था कि लेबनान के लिए हिजबुल्लाह का होना रोजी-रोटी से भी ज्यादा जरूरी है, जिस पर लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ राजी बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर जवाब दिया कि लेबनान के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसकी संप्रभुता, आजादी और अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है। ईरान ने बातचीत के लिए राजी को तेहरान बुलाया भी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 11:30:27 +0530</pubDate>
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<title>ऑस्ट्रेलिया में समुद्र किनारे त्योहार मना रहे यहूदियों पर फायरिंग:10 की मौत; पुलिस ने हमलावर को गोली मारी, बीच पर लाशें बिखरी दिखीं</title>
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<description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हनुक्का त्योहार मना रहे यहूदियों पर दो हमलवारों ने फायरिंग की। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रविवार दोपहर नॉर्थ बॉन्डी बीच पर बड़ी संख्या में लोग रेत पर दौड़ते हुए नजर आए। इसी दौरान तेज गोलियों की आवाजें भी सुनाई दीं। एक दूसरे वीडियो में काले कपड़े पहने दो युवक दिखाई दिए, जो सड़क पर खड़े होकर राइफल जैसे हथियारों से फायरिंग कर रहे थे। पुलिस ने हमलावर माने जा रहे एक शख्स को गोली मार दी, जबकि दूसरे हमलावर माने जा रहे व्यक्ति को पकड़ लिया गया। फिलहाल दोनों पुलिस की हिरासत में हैं। मास शूटिंग से जुड़ीं 10 तस्वीरें... 
 यहूदियों पर हमले की लोकेशन
 सिडनी में मास शूटिंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 15:47:21 +0530</pubDate>
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<title>दलाई लामा का पुनर्जन्म &amp;apos;स्वतंत्र देश&amp;apos; में होगा:धर्मशाला में तिब्बती धार्मिक सम्मेलन: चीन की​ दखल खारिज, उत्तराधिकार पर दिया स्पष्ट संदेश</title>
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<description><![CDATA[ तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने अपने उत्तराधिकारी के संबंध में चीन को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उनका पुनर्जन्म चीन के राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर किसी &#039;स्वतंत्र देश&#039; में होगा। दलाई लामा ने यह बात 2 जुलाई को धर्मशाला में आयोजित 15वें तिब्बती धार्मिक सम्मेलन में 180 से अधिक बौद्ध नेताओं को भेजे गए एक पूर्व-रिकॉर्डेड वीडियो संदेश में कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि दलाई लामा संस्था बनी रहेगी और पुनर्जन्म की मान्यता का अधिकार केवल गादेन फोड्रंग ट्रस्ट के पास है। निर्वासित तिब्बती सरकार, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग ने भी चीन के हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पुनर्जन्म तिब्बती परंपरा का एक आंतरिक मामला है और इस पर अंतिम निर्णय दलाई लामा का ही होगा। तिब्बती चीन द्वारा नियुक्त किसी को नहीं मानेंगे 6 जुलाई को अपने 90वें जन्मदिन पर भी दलाई लामा ने इस बात को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तिब्बती बौद्ध चीन द्वारा नियुक्त किसी भी पुनर्जन्म को स्वीकार नहीं करेंगे। इस बीच, तिब्बती युवा कांग्रेस (TYC) ने चीन समर्थित पंचेन लामा ग्यालत्सेन नोरबू के एक बयान की कड़ी निंदा की। तिब्बती धर्म पर बीजिंग की साजिश नोरबू ने 8 दिसंबर को शिगात्से में कहा था कि पुनर्जन्म चीनी कानून और अनुमोदन के अनुसार होगा। TYC ने इसे तिब्बती धर्म पर बीजिंग की साजिश करार दिया। TYC ने अपने प्रेस बयान में कहा कि यह सदियों पुरानी तिब्बती परंपराओं का अपमान है। संगठन ने आरोप लगाया कि यह चीन की &#039;राज्य-प्रायोजित&#039; योजना है, जिसके तहत वह अपना दलाई लामा थोपना चाहता है। पंचेन लामा के लापता होने का मुद्दा TYC ने 1995 में दलाई लामा द्वारा चुने गए 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा के 30 साल से लापता होने का मुद्दा भी उठाया। गेधुन चोएक्यी न्यिमा को छह साल की उम्र में उनके परिवार सहित गायब कर दिया गया था। TYC ने चेतावनी दी कि तिब्बती और बौद्ध दुनिया चीन द्वारा की गई किसी भी नियुक्ति को अस्वीकार करेगी। उन्होंने विभिन्न सरकारों से पंचेन लामा का पता बताने और धार्मिक मामलों में चीन के हस्तक्षेप को बंद करने की मांग की। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 15:47:21 +0530</pubDate>
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<title>लश्कर कमांडर अब्दुल रउफ बोला&#45; दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे:पाकिस्तान ने भारत को सबक सिखाया, 50 साल तक हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज अब्दुल रउफ ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया है। उसने कहा कि हम दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे। यह वीडियो नवंबर का है, लेकिन अभी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। रउफ ने कहा, “मक्की साहब कहते थे, हम एक दिन दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे और ये होकर रहेगा। गजवा-ए-हिंद होकर रहेगा। हम एक दिन ये निजाम बदल देंगे और इस मुल्क में शरिया की हुकूमत लेकर आएंगे। हम जीती हुई कौम हैं।” रउफ ने दावा किया कि भारतीय वायुसेना पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी और पाकिस्तान इस्लामी देशों में इकलौती परमाणु शक्ति है। रऊफ ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत अगले 50 साल तक पाकिस्तान पर हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा। वीडियो में रउफ ने जिस मक्की का नाम लिया है, वह मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का साला है। पिछले साल दिसंबर में दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई थी। रऊफ, लश्कर सरगना हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है। अब्दुल रऊफ पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखा है। रऊफ बोला- कश्मीर की लड़ाई खत्म नहीं हुई वीडियो में रऊफ ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कम होने की बातों को खारिज करते हुए कहा कि कश्मीर की लड़ाई खत्म नहीं हुई है। रऊफ ने चेतावनी दी कि जो लोग इसके उलट सोचते हैं, वे गलत हैं। रऊफ ने लश्कर चीफ हाफिज सईद के साले अब्दुल रहमान मक्की का हवाला देते हुए दावा किया कि हमारा मकसद दिल्ली पर हुकूमत करना है। इसके अलावा रऊफ ने भारत की सैन्य ताकत को कमजोर बताते हुए कहा कि उनके राफेल लड़ाकू विमान, एस-400 मिसाइल सिस्टम और ड्रोन कुछ नहीं कर सकते। पाकिस्तानी सेना ने रउफ को आम आदमी बताया था अब्दुल रउफ 1999 से लश्कर-ए-तैयबा का मेंबर है और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन का प्रमुख है। आंतकियों के जनाजे में अब्दुर रऊफ के मौजूद होने की बात सामने आने के बाद, पाकिस्तानी सेना ने उसे &#039;आम आदमी&#039; बताकर बचाने की कोशिश की थी। भारत ने 7 मई को पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 9 आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की थी। इस दौरान रऊफ पाकिस्तानी अफसरों के साथ मारे गए आतंकियों की जनाजे की नमाज पढ़ता हुआ नजर आया था। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया था आतंकियों के जनाजे की नमाज पढ़ाने वाला इंसान एक मौलवी है और पाकिस्तान मार्कजी मुस्लिम लीग (PMML) का मेंबर है। उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है। उन्होंने रऊफ का ID नंबर (35202-5400413-9) और जन्म तारीख (25 मार्च 1973) का जिक्र किया था। लेकिन ये डिटेल अमेरिका के स्पेशली डेजिग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स लिस्ट में मौजूद हाफिज अब्दुर रऊफ की डिटेल से पूरी तरह मेल खाती है। लश्कर आतंकी ने आसिम मुनीर से कहा था- मोदी को सबक सिखाओ इससे पहले भी कई लश्कर आतंकी भारत को धमकी दे चुके हैं। लश्कर आतंकी और पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने सितंबर में एक वीडियो में भारत और पीएम मोदी को धमकी दी थी। कसूरी ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसीम मुनीर से कहा कि वह पीएम मोदी को 10 मई 2025 की तरह सबक सिखाएं। कसूरी ने पाकिस्तान में हाल ही में आई बाढ़ के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। सैफुल्लाह कसूरी भी हाफिज सईद का करीबी है। आतंकी बोला- ईंट का जवाब पत्थर से देंगे कसूरी ने लोगों से समर्थन मांगते हुए कहा , &quot;हम मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन हमारा मनोबल ऊंचा है। हम अपने लोगों के नरम हैं, लेकिन अपने दुश्मनों के लिए उतने ही खतरनाक हैं। हमारे दुश्मनों को यह नहीं सोचना चाहिए कि हम कमजोर हैं, हम पूरी ताकत से जवाब देंगे।&quot; कसूरी ने आगे कहा, &quot;भारत जो भी कदम उठा रहे हैं, उसे उसकी कीमत चुकानी होगी। हर जख्म का बदला लेंगे और ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। हम हर कीमत पर अपनी धरती, अपनी जमीन की हिफाजत करेगें।&quot; लश्कर डिप्टी बोला था- हिंदुस्तान और हिंदुओं का सफाया होगा कसूरी भारत से हिंदुओं का सफाया करने की धमकी दे चुका है। एक वीडियो में वह कहता है, &quot;हमारे काफिले न रुकेंगे, न थमेंगे और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक पूरे हिंदुस्तान पर &#039;ला इलाहा इलल्लाह&#039; (अल्लाह के अलावा कोई दूसरा नहीं) के परचम लहरा नहीं देते।&quot; कसूरी आगे कहता है, &quot;ये वक्त आने वाला है, कोई नाउम्मीदी नहीं। हम जिस मैदान में खड़े हुए हैं, अपने दुश्मन को चारो खाने चित्त किया है। ये हिंदू हमारे सामने क्या है। हिंदुस्तान का हिंदू मिट जाएगा और इस्लाम का राज आने वाला है। &quot; पहलगाम हमले के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर भारत ने पहलगाम हमले का जबाव देते हुए 6-7 मई की रात 1:05 बजे पाकिस्तान और PoK में एयर स्ट्राइक की। इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इसमें 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। हमले में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर की फैमिली के 10 सदस्य और 4 सहयोगी मारे गए। भारत ने 24 मिसाइलें दागीं। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें... रूसी मीडिया ने पाकिस्तानी PM से जुड़ा वीडियो डिलीट किया: 40 मिनट तक इंतजार करते रहे शहबाज, फिर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुसे थे पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की मीटिंग में जबरन घुसने वाला वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने सोशल मीडिया से हटा दिया है। रशिया टुडे का कहना है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 14:19:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>इजराइल का दावा&#45; हमास के नंबर&#45;2 चीफ राएद को मारा:गाजा में कार पर एयरस्ट्राइक की; नेतन्याहू बोले&#45; इजराइली सैनिकों की मौत का बदला लिया</title>
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<description><![CDATA[ गाजा सिटी में इजराइली हमले में हमास के सेकेंड-इन-कमांड राएद सईद की मौत हो गई है। इजराइली सेना (IDF) ने शनिवार को यह दावा किया कि उसने गाजा सिटी में एक कार को निशाना बनाकर यह हमला किया। हालांकि, हमास ने अब तक राएद सईद की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। राएद, हमास अल-कासिम ब्रिगेड का प्रमुख कमांडर था। अल जजीरा की रिपोर्ट्स के अनुसार इजराइली सेना ने कहा कि सईद हमास के हथियार बनाने वाले नेटवर्क का प्रमुख था और अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हुए हमलों की साजिश बनाने वालों में भी शामिल था। हमास के सूत्रों के मुताबिक राएद गाजा सिटी बटालियन का पूर्व प्रमुख भी रहा था। इजराइल का आरोप है कि सईद सीजफायर के बावजूद हमास की क्षमताओं को फिर से मजबूत करने और हथियार बनाने का काम कर रहा था, जो समझौते का उल्लंघन है। यह हमला हमास के इजराइली सैनिकों पर हमले के बाद हुआ। इसमें 2 इजराइली सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सईद को निशाना बनाने का आदेश दिया था। अब नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने सैनिकों की मौत का बदला ले लिया। इजराइल बोला- सईद के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि हमें रियल-टाइम में खुफिया जानकारी मिली कि सईद गाजा शहर के पश्चिमी हिस्से में यात्रा कर रहा था। हमने मौका हाथ से निकलने से पहले उसे मारने के लिए तुरंत कार्रवाई की। अरब के खुफिया अधिकारियों के मुताबिक राएद पिछले 2 साल के दौरान ज्यादातर समय गाजा सिटी के नीचे बनी हमास की सुरंग में छिपा रहा। हमास बोला- इजराइली ड्रोन ने सिविलियन गाड़ी को निशाना बनाया दूसरी ओर हमास ने सईद की मौत की पुष्टि नहीं की है। संगठन का कहना है कि इजराइली ड्रोन ने गाजा सिटी के पश्चिम में नबुलसी जंक्शन के पास एक सिविलियन गाड़ी को निशाना बनाया। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में पांच लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए। सीजफायर के बाद भी इजराइल के हमले जारी अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा प्रशासन का कहना है कि यह हमला अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर का उल्लंघन है। सीजफायर के बाद से इजराइल ने गाजा में करीब 800 से ज्यादा हमले किए, जिनमें कम से कम 386 लोगों की मौत हुई। अक्टूबर में अमेरिका और उसके सहयोगियों की मध्यस्थता से यह सीजफायर हुआ था। इसके तहत गाजा में बचे हुए आखिरी 20 बंधकों को रिहा किया गया और बदले में करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों और बंदियों को छोड़ा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प सीजफायर के अगले चरण को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस चरण में हमास से हथियार छोड़ने की उम्मीद की जा रही है और इसके बदले गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी होनी है। लेकिन हमास अपने सभी हथियार छोड़ने को तैयार नहीं हुआ है। इजराइल ने गाजा में हमास के PM को मारा था सईद से पहले इजराइल ने मार्च 2025 में हमास के प्रधानमंत्री इस्साम दिब अब्दुल्ला अल-दालीस को मार गिराया था। अब्दुल्ला ने जुलाई 2024 में रूही मुश्ताहा की मौत के बाद उसकी जगह ली थी। अब्दुल्ला गाजा में हमास की सरकार चलाता था। उसके पास हमास के संगठन और लड़ाकों की गतिविधियों की जिम्मेदारी भी थी। इससे पहले इजराइल ने हवाई हमलों में हमास के 3 दूसरे लीडर्स को भी मार गिराया था। इनमें हमास के कमांडर और पॉलिटिकल लीडर महमूद मारजूक अहमद अबू-वत्फा, बहजत हसन मोहम्मद अबू-सल्तान और अहमद ओमर अब्दुल्ला अल-हाता शामिल थे। एक साल पहले हमास चीफ सिनवार मारा गया था IDF ने 16 अक्टूबर 2024 को रूटीन ऑपरेशन में दक्षिणी गाजा की एक इमारत पर हमला कर मास्टरमाइंड हमास चीफ याह्या सिनवार को भी मार गिराया था। IDF ने बताया था कि सिनवार राफा के ताल अल-सुल्तान इलाके में छिपा था। जब ये फुटेज ली जा रही थी, तब हमें पता नहीं था कि वह सिनवार है। उसके हाथ में गोली लगी थी और वह घायल था। हमें लगा था कि वो कोई आम हमास लड़ाका है। इसके बाद IDF ने इमारत पर बमबारी की, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शवों की जांच के दौरान पता चला कि वह सिनवार है। हगारी ने कहा कि उसके पास से बुलेटप्रूफ जैकेट, ग्रेनेड और 40,000 इजराइली करेंसी मिली थी। इजराइल ने गाजा का नया नक्शा बनाया, 50% जमीन पर कब्जा इजराइल ने गाजा की 50% से ज्यादा जमीन पर कब्जा करके उसे अपना इलाका घोषित कर दिया है। इजराइली सेना प्रमुख ऐयाल जमीर ने गाजा सीजफायर प्लान में जिस &#039;यलो लाइन&#039; का जिक्र है, उसे नई बॉर्डर बताया है। उन्होंने सोमवार को गाजा में तैनात सैनिकों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह लाइन अब इजराइल की &#039;सुरक्षा सीमा&#039; की तरह काम करेगी और सेना इससे पीछे नहीं हटेगी। जमीर ने कहा कि इजराइल अपनी मौजूदा सैन्य पोजिशन नहीं छोड़ेगा। इन पोजिशन्स की वजह से इजराइल गाजा के आधे से ज्यादा हिस्से को कंट्रोल कर रहा है। इसमें गाजा की ज्यादातर खेती की जाने वाली जमीन है। इसके अलावा इसी हिस्से में मिस्र से लगने वाला बॉर्डर क्रॉसिंग (राफा) भी शामिल है। इजराइली सरकार ने आर्मी चीफ जमीर के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की। एक अधिकारी ने इतना कहा कि इजराइली सेना ‘सीजफायर की शर्तों के अनुसार’ तैनात है और आरोप लगाया कि हमास ही सीजफायर तोड़ रहा है। इजराइल से गाजा में बिना रोकटोक मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें इजराइल से गाजा में बिना रोकटोक मानवीय सहायता की अनुमति देने, UN ठिकानों पर हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की गई है। इजराइल ने युद्धविराम के बावजूद सहायता ट्रकों की आवाजाही पर रोक लगाई हुई है, जिससे गाजा में मानवीय संकट और गहरा गया है। दो साल से अधिक समय से जारी इजराइल-हमास युद्ध के बीच यह घटना नाजुक शांति के लिए एक और चुनौती मानी जा रही है। जंग के 2 साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। इन दो सालों में गाजा की 98% खेती की जमीन बंजर हो गई है। अब सिर्फ 232 हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ बची है। यहां फिर से खेती शुरू करने में 25 साल लगेंगे। जंग की वजह से गाजा के 23 लाख लोगों में से 90% बेघर हो गए हैं। ये बिना पानी-बिजली के तंबुओं में रह रहे हैं और आधे से ज्यादा भुखमरी झेल रहे हैं। 80% इलाका मिलिट्री जोन बन चुका है। UN की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर लग सकते हैं। 80% इमारतें तबाह हो गई हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 66 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए उत्तर और दक्षिण गाजा से भगाए गए लाखों लोग अब टेंटों में बिना पानी, बिजली और दवा के दिन गुजार रहे हैं। यूएन एजेंसियों के मुताबिक, आधे से ज्यादा लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। अब तक 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचि बद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है। -------------------------------- इजराइल-हमास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें.... इजराइल ने सुरंग में फंसे 40 हमास लड़ाकों को मारा: पिछले 9 महीनों से फंसे थे; इजराइल बाहर निकलने नहीं दे रहा इजराइल ने दावा किया है कि उसने सुरंग में फंसे 40 हमास लड़कों को मार दिया है। ये लड़ाके गाजा के दक्षिणी शहर राफा की सुरंगों में मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 14:19:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
<media:keywords>इजराइल, का, दावा-, हमास, के, नंबर-2, चीफ, राएद, को, मारा:गाजा, में, कार, पर, एयरस्ट्राइक, की, नेतन्याहू, बोले-, इजराइली, सैनिकों, की, मौत, का, बदला, लिया</media:keywords>
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<title>सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर ISIS का हमला:3 की मौत, ट्रम्प बोले&#45; मुंहतोड़ जवाब दूंगा; असद के हटने के बाद अमेरिकी सेना पर पहला हमला</title>
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<description><![CDATA[ मध्य सीरिया के शहर पल्मायरा में शनिवार को इस्लामिक स्टेट ISIS के एक हमलावर ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया। हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी सैनिक ISIS के खिलाफ चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों के तहत एक बैठक में शामिल थे। हमलावर को मौके पर मौजूद सीरियाई बलों ने मार गिराया। सीरियाई मीडिया के मुताबिक, इस हमले में सीरियाई सुरक्षा बलों के कुछ सदस्य भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को हेलिकॉप्टर के जरिए अल-तनफ स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ले जाया गया। अमेरिकी बलों पर यह हमला बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद पहली बार हुआ है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार समूह के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जाएगी। ट्रम्प ने मुंहतोड़ जवाब देने और बदला लेने की बात कही। सीरिया में ISIS के स्लीपर सेल अब भी एक्टिव ISIS को 2019 में क्षेत्रीय रूप से हराया जा चुका है, लेकिन संगठन के स्लीपर सेल अब भी सीरिया और इराक में सक्रिय बताए जाते हैं। अनुमान है कि ISIS के पास 5,000 से 7,000 लड़ाके अब भी मौजूद हैं। पूर्वी सीरिया में अमेरिका के सैकड़ों सैनिक तैनात हैं, जो ISIS के डेवलपमेंट को रोकने के लिए गठबंधन का हिस्सा हैं। दिसंबर 2024 में तख्तापलट के बाद अहमद अल-शरा ने अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर सत्ता संभाली थी। असद के पतन के बाद सीरिया के नए अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में अमेरिका से संबंध सुधरे हैं। हाल ही में सीरिया ISIS विरोधी गठबंधन में शामिल हुआ है। ट्रम्प बोले- यह अमेरिका और सीरिया दोनों पर हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस हमले को आईएस का अमेरिका और सीरिया दोनों पर हमला बताया और कहा कि इसके लिए बहुत गंभीर बदला लिया जाएगा। ट्रम्प ने बताया कि सीरियाई राष्ट्रपति अल-शरा इस घटना से बहुत दुखी और गुस्से में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घायल अमेरिकी सैनिकों की हालत में सुधार है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलावर सीरियाई सुरक्षा बलों का सदस्य था, जिसे चरमपंथी विचारों के कारण हटाया जा रहा था। हालांकि, सीरियाई अधिकारियों ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिका ने सीरिया में 1 हजार सैनिक तैनात कर रखे अमेरिका ने 2014 से सीरिया में सैनिक तैनात कर रहा है। पहले यह तैनाती ईरान समर्थित मिलिशिया और रूसी खतरे के कारण थी, लेकिन अब मुख्य फोकस सिर्फ ISIS पर है। इसी समय ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत ISIS को हराने का अभियान शुरू हुआ। हालांकि ISIS को 2019 में क्षेत्रीय रूप से हरा दिया गया, लेकिन उसके स्लीपर सेल अब भी हमले करते रहते हैं। दिसंबर 2025 तक, अमेरिका के लगभग 1,000 सैनिक (पहले 2,000 थे, लेकिन 2025 में कमी की गई) पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीरिया में तैनात हैं। ये सैनिक कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) के साथ मिलकर काम करते हैं। ये स्थानीय बलों को ट्रेनिंग देते हैं, ISIS के ठिकानों पर हवाई हमले करते हैं और उसके डेवलपमेंट को रोकते हैं। अमेरिकी सैनिक अब सीरियाई सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त ऑपरेशन भी कर रहे हैं। अमेरिका ने 2025 में सैनिकों की संख्या घटाई है, लेकिन पूर्ण वापसी नहीं हुई है।
 अमेरिका और सीरिया के संबंध में सुधार हो रहे अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ। मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी। हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले। 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया। असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे। अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। ट्रम्प ने अल-शरा को मजबूत नेता बताया था जून और जुलाई 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने कार्यकारी आदेशों के जरिए प्रतिबंधों में और ढील दी, हालांकि असद और उसके करीबी सहयोगियों पर प्रतिबंध बरकरार रखे गए। सितंबर 2025 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध बहाल हुए। नवंबर 2025 में शरा ने व्हाइट हाउस का दौरा किया, जो किसी सीरियाई नेता का पहला आधिकारिक व्हाइट हाउस दौरा था। इस दौरान ट्रम्प ने शरा को “मजबूत नेता” बताया। अमेरिका ने सीरिया को वाशिंगटन में दूतावास खोलने की अनुमति दी और 2019 के प्रतिबंधों को 180 दिनों के लिए निलंबित किया। सत्ता छोड़ रूस भाग गए थे असद सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे के बाद राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर रूस भाग गए थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने असद और उनके परिवार को राजीतिक शरण दी थी। रूस ने कहा था कि सीरिया के राष्ट्रपति को शरण देना पुतिन का निजी फैसला था। हालांकि, यह जानकारी नहीं दी गई कि असद को कहां ठहराया गया। राष्ट्रपति असद के देश छोड़ने के बाद सीरियाई नागरिक उनके आवास में घुस गए थे। नागरिकों ने राष्ट्रपति भवन में लूटपाट की और वहां मौजूद सामान अपने साथ ले गए थे। अल-जुलानी के नाम से जाना जाता था अल-शरा अहमद अल-शरा ने 2003 में मेडिकल की पढ़ाई छोड़ अल कायदा नेताओं के संपर्क में आया। उसे अमेरिकी सेना ने 2005 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद अल-शरा ने अल कायदा की सीरिया शाखा जबात अल-नुस्र का गठन किया। 2016 में वह अल कायदा से अलग हो गया और हयात तहरीर अल-शाम (HTS) की स्थापना की। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के पतन के बाद जुलानी ने सत्ता संभाली। इसके बाद दुनिया को उसके असली नाम का पता चला। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 11:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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<title>इजराइल का दावा&#45; हमास के नंबर&#45;2 चीफ राएद को मारा:गाजा में कार को निशाना बनाकर हमला किया; मार्च में हमास PM को मारा था</title>
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<description><![CDATA[ गाजा सिटी में इजराइली हमले में हमास के सेकेंड-इन-कमांड राएद सईद की मौत हो गई है। इजराइली सेना (IDF) ने शनिवार को यह दावा किया कि उसने गाजा सिटी में एक कार को निशाना बनाकर यह हमला किया। हालांकि, हमास ने अब तक राएद सईद की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। राएद, हमास अल-कासिम ब्रिगेड का प्रमुख कमांडर था। अल जजीरा की रिपोर्ट्स के अनुसार इजराइली सेना ने कहा कि सईद हमास के हथियार बनाने वाले नेटवर्क का प्रमुख था और अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हुए हमलों की साजिश बनाने वालों में भी शामिल था। हमास के सूत्रों के मुताबिक राएद गाजा सिटी बटालियन का पूर्व प्रमुख भी रहा था। इजराइल का आरोप है कि सईद सीजफायर के बावजूद हमास की क्षमताओं को फिर से मजबूत करने और हथियार बनाने का काम कर रहा था, जो समझौते का उल्लंघन है। यह हमला हमास के इजराइली सैनिकों पर हमले के बाद हुआ। इसमें दो इजराइली सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सईद को निशाना बनाने का आदेश दिया था। इजराइल बोला- सईद के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि हमें रियल-टाइम में खुफिया जानकारी मिली कि सईद गाजा शहर के पश्चिमी हिस्से में यात्रा कर रहा था। हमने मौका हाथ से निकलने से पहले उसे मारने के लिए तुरंत कार्रवाई की। अरब के खुफिया अधिकारियों के मुताबिक राएद पिछले 2 साल के दौरान ज्यादातर समय गाजा सिटी के नीचे बनी हमास की सुरंग में छिपा रहा। हमास बोला- इजराइली ड्रोन ने सिविलियन गाड़ी को निशाना बनाया दूसरी ओर हमास ने सईद की मौत की पुष्टि नहीं की है। संगठन का कहना है कि इजराइली ड्रोन ने गाजा सिटी के पश्चिम में नबुलसी जंक्शन के पास एक सिविलियन गाड़ी को निशाना बनाया। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में पांच लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा प्रशासन का कहना है कि यह हमला अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर का उल्लंघन है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक युद्धविराम के बाद से इजराइल ने गाजा में करीब 800 से ज्यादा हमले किए, जिनमें कम से कम 386 लोगों की मौत हुई। इजराइल ने गाजा में हमास के PM को मारा था सईद से पहले इजराइल ने मार्च 2025 में हमास के प्रधानमंत्री इस्साम दिब अब्दुल्ला अल-दालीस को मार गिराया था। अब्दुल्ला ने जुलाई 2024 में रूही मुश्ताहा की मौत के बाद उसकी जगह ली थी। अब्दुल्ला गाजा में हमास की सरकार चलाता था। उसके पास हमास के संगठन और लड़ाकों की गतिविधियों की जिम्मेदारी भी थी। इससे पहले इजराइल ने हवाई हमलों में हमास के 3 दूसरे लीडर्स को भी मार गिराया था। इनमें हमास के कमांडर और पॉलिटिकल लीडर महमूद मारजूक अहमद अबू-वत्फा, बहजत हसन मोहम्मद अबू-सल्तान और अहमद ओमर अब्दुल्ला अल-हाता शामिल थे। एक साल पहले हमास चीफ सिनवार मारा गया था IDF ने 16 अक्टूबर 2024 को रूटीन ऑपरेशन में दक्षिणी गाजा की एक इमारत पर हमला कर मास्टरमाइंड हमास चीफ याह्या सिनवार को भी मार गिराया था। IDF ने बताया था कि सिनवार राफा के ताल अल-सुल्तान इलाके में छिपा था। जब ये फुटेज ली जा रही थी, तब हमें पता नहीं था कि वह सिनवार है। उसके हाथ में गोली लगी थी और वह घायल था। हमें लगा था कि वो कोई आम हमास लड़ाका है। इसके बाद IDF ने इमारत पर बमबारी की, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शवों की जांच के दौरान पता चला कि वह सिनवार है। हगारी ने कहा कि उसके पास से बुलेटप्रूफ जैकेट, ग्रेनेड और 40,000 इजराइली करेंसी मिली थी। इजराइल ने गाजा का नया नक्शा बनाया, 50% जमीन पर कब्जा इजराइल ने गाजा की 50% से ज्यादा जमीन पर कब्जा करके उसे अपना इलाका घोषित कर दिया है। इजराइली सेना प्रमुख ऐयाल जमीर ने गाजा सीजफायर प्लान में जिस &#039;यलो लाइन&#039; का जिक्र है, उसे नई बॉर्डर बताया है। उन्होंने सोमवार को गाजा में तैनात सैनिकों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह लाइन अब इजराइल की &#039;सुरक्षा सीमा&#039; की तरह काम करेगी और सेना इससे पीछे नहीं हटेगी। जमीर ने कहा कि इजराइल अपनी मौजूदा सैन्य पोजिशन नहीं छोड़ेगा। इन पोजिशन्स की वजह से इजराइल गाजा के आधे से ज्यादा हिस्से को कंट्रोल कर रहा है। इसमें गाजा की ज्यादातर खेती की जाने वाली जमीन है। इसके अलावा इसी हिस्से में मिस्र से लगने वाला बॉर्डर क्रॉसिंग (राफा) भी शामिल है। इजराइली सरकार ने आर्मी चीफ जमीर के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की। एक अधिकारी ने इतना कहा कि इजराइली सेना ‘सीजफायर की शर्तों के अनुसार’ तैनात है और आरोप लगाया कि हमास ही सीजफायर तोड़ रहा है। इजराइल से गाजा में बिना रोकटोक मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को भारी बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें इजराइल से गाजा में बिना रोकटोक मानवीय सहायता की अनुमति देने, UN ठिकानों पर हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की गई है। इजराइल ने युद्धविराम के बावजूद सहायता ट्रकों की आवाजाही पर रोक लगाई हुई है, जिससे गाजा में मानवीय संकट और गहरा गया है। दो साल से अधिक समय से जारी इजराइल-हमास युद्ध के बीच यह घटना नाजुक शांति के लिए एक और चुनौती मानी जा रही है। जंग के 2 साल बीते, खंडहर हुआ गाजा हमास के हमले से शुरू हुए गाजा युद्ध के दो साल से ज्यादा हो गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल में घुसपैठ की और करीब 251 लोगों को बंधक बना लिया। जवाब में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुरंत जंग का ऐलान किया और हमास पर हमले शुरू कर दिए। इन दो सालों में गाजा की 98% खेती की जमीन बंजर हो गई है। अब सिर्फ 232 हेक्टेयर जमीन ही उपजाऊ बची है। यहां फिर से खेती शुरू करने में 25 साल लगेंगे। जंग की वजह से गाजा के 23 लाख लोगों में से 90% बेघर हो गए हैं। ये बिना पानी-बिजली के तंबुओं में रह रहे हैं और आधे से ज्यादा भुखमरी झेल रहे हैं। 80% इलाका मिलिट्री जोन बन चुका है। UN की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में जमा 510 लाख टन मलबा हटाने में 10 साल और 1.2 ट्रिलियन डॉलर लग सकते हैं। 80% इमारतें तबाह हो गई हैं, जिससे 4.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 66 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए उत्तर और दक्षिण गाजा से भगाए गए लाखों लोग अब टेंटों में बिना पानी, बिजली और दवा के दिन गुजार रहे हैं। यूएन एजेंसियों के मुताबिक, आधे से ज्यादा लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। अब तक 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, इनमें 18,430 बच्चे (लगभग 31%) शामिल हैं। गाजा में करीब 39,384 बच्चे सूचि बद्ध हैं जिनके माता या पिता में से कोई एक मारा गया है। वहीं, 17,000 फिलिस्तीनी बच्चे माता-पिता दोनों खो चुके हैं। राहत एजेंसियां कहती हैं- यह अब शहर नहीं, जिंदा बचे लोगों का कैंप मात्र है। -------------------------------- इजराइल-हमास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें.... इजराइल ने सुरंग में फंसे 40 हमास लड़ाकों को मारा: पिछले 9 महीनों से फंसे थे; इजराइल बाहर निकलने नहीं दे रहा इजराइल ने दावा किया है कि उसने सुरंग में फंसे 40 हमास लड़कों को मार दिया है। ये लड़ाके गाजा के दक्षिणी शहर राफा की सुरंगों में मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 11:45:12 +0530</pubDate>
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<title>वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में ट्रक में विस्फोट, 1 की मौत; कई इमारतों को नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के इडाहो राज्य के ल्यूइस्टन शहर में शनिवार सुबह एक ट्रक में अचानक विस्फोट हो गया। इसमें 61 साल के डगलस पीटरसन की मौत हो गई। यह घटना ट्रक में रखे प्रोपेन गैस के रिसाव से हुआ। ट्रक में पेट्रोल और प्रोपेन टैंक जैसे ज्वलनशील सामान रखे हुए थे। विस्फोट से ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास की इमारतों को नुकसान पहुंचा। हालांकि विस्फोट के बाद आग नहीं लगी। घटना के तुरंत बाद पुलिस विभाग और फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे इस क्षेत्र से दूर रहें ताकि जांच टीम और इमरजेंसी क्रू अपना काम सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकें। फिलहाल जनता के लिए कोई खतरा नहीं बताया गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें... अमेरिका के यूनिवर्सिटी में फाइनल एग्जाम के दौरान गोलीबारी, 2 की मौत, 8 घायल अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में शनिवार को गोलीबारी हुई। इसमें दो लोग मारे गए और आठ गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रोविडेंस के मेयर ने बताया कि घटना विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग और फिजिक्स विभाग में हुई, जहां फाइनल एग्जाम के दौरान छात्र मौजूद थे। मेयर ने बताया कि गोलीबारी की सूचना दोपहर करीब 4 बजे मिली और हमलावर इमारत से भाग निकला। पुलिस अभी भी उसकी तलाश कर रही है। शुरुआत में विश्वविद्यालय ने एक व्यक्ति को हिरासत में लेने की सूचना दी थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया गया कि उसका घटना से कोई संबंध नहीं था और वह निर्दोष है। इलाके में शेल्टर-इन-प्लेस ऑर्डर लागू है, जिसके तहत लोगों को घरों में रहने और दरवाजे बंद रखने की सलाह दी गई है। पुलिस और एफबीआई की टीम कैंपस और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उन्हें घटना की ब्रिफिंग मिली है और वे पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्थिति पर नजर रखने और एफबीआई की मदद की पेशकश करते हुए पीड़ितों के लिए प्रार्थना की अपील की। ब्राउन यूनिवर्सिटी एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जहां लगभग 7,300 स्नातक और 3,000 से अधिक स्नातकोत्तर छात्र पढ़ते हैं। इजराइल का दावा- हमास के नंबर-2 चीफ राएद को मारा: गाजा में कार को निशाना बनाकर पर हमला; मार्च में हमास PM को मारा था गाजा सिटी में इजराइली हमले में हमास के सेकेंड-इन-कमांड राएद सईद की मौत हो गई है। इजराइली सेना (IDF) ने शनिवार को यह दावा किया कि उसने गाजा सिटी में एक कार को निशाना बनाकर यह हमला किया। हालांकि, हमास ने अब तक राएद सईद की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूरी खबर पढ़ें... सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर ISIS का हमला: 3 की मौत, ट्रम्प बोले- मुंहतोड़ जवाब दूंगा; असद के हटने के बाद अमेरिकी सेना पर पहला हमला मध्य सीरिया के शहर पल्मायरा में शनिवार को इस्लामिक स्टेट ISIS के एक हमलावर ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया। हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी सैनिक ISIS के खिलाफ चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों के तहत एक बैठक में शामिल थे। हमलावर को मौके पर मौजूद सीरियाई बलों ने मार गिराया। पूरी खबर पढ़ें... ----------------------------------- 13 दिसंबर के अपडेट्स यहां पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 11:45:12 +0530</pubDate>
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<title>ज्यादा गेंहू उपज से तुर्किये में 100फीट चौड़े गड्ढे बने:खेतों में अब तक 684 सिंकहोल की पहचान हुई; ग्राउंड वाटर लेवल घटने से जमीन धंस रही</title>
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<description><![CDATA[ तुर्किये का अन्न भंडार कहा जाने वाला कोन्या मैदान इन दिनों एक गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। यहां तुर्किये का सबसे ज्यादा गेहूं उगाया जाता है। कोन्या मैदान का कुल कृषि क्षेत्र लगभग 2.6 मिलियन हेक्टेयर है, जो तुर्किये के कुल कृषि क्षेत्र का 11.2% है। क्षमता से ज्यादा उपज और ग्राउंड वाटर के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण यह इलाका सूखा का सामना कर रहा है। इससे जमीनों में सैकड़ों गड्ढे (सिंकहोल) बन रहे हैं, जो खेतों को बर्बाद कर रहे हैं। तुर्किये की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD की नई रिपोर्ट के अनुसार, कोन्या बेसिन में अब तक 684 ऐसे गड्ढों की पहचान की गई है। जबकि कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के सिंकहोल रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2017 में 299 सिंकहोल थे, जो 2021 तक बढ़कर 2,550 हो गए। साल 2025 में करीब 20 नए बड़े सिंकहोल बनने की पुष्टि हुई है। इन गड्ढों की गहराई 30 मीटर से ज्यादा और चौड़ाई 100 फीट तक बताई जा रही है। प्रशासन की अनदेखी के कारण संकट बढ़ा यह संकट अचानक नहीं आया है, बल्कि पिछले 20 साल से किसानों और प्रशासन की अनदेखी के कारण यह धीरे-धीरे बढ़ी है। 2025 में यह समस्या और तेज हुई है, क्योंकि सूखा और भूजल दोहन काफी बढ़ गया है। AFAD की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ करापिनार जिले में 534 सिंकहोल हैं, और ये मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह इंसानों के कारण आई आपदा है, लापरवाही ने इसे और बढ़ावा दिया है। सिंकहोल बनने के तीन अहम कारण जानिए भूवैज्ञानिक संरचना: कोन्या मैदान की भूवैज्ञानिक संरचना &#039;कार्स्ट&#039; टाइप की है, मतलब यह मैदान कार्बोनेट और जिप्सम जैसी घुलनशील चट्टानों से बना है। ये चट्टानें हजारों सालों में पानी में घुलकर गड्ढे बनाती हैं। पहले यहां सिंकहोल बहुत कम बनते थे, लेकिन ग्राउंड वाटर के कम होने से मैदान सहारा खो देती हैं और अचानक ढह जाती हैं, जिससे सतह पर बड़े गड्ढे बन जाते हैं। बारिश में कमी: तुर्किये में पिछले 15 सालों में वाटर लेवल सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। जलवायु परिवर्तन ने बारिश को कम कर दिया, जिससे जल भंडार रिचार्ज नहीं हो पाते। ग्राउंड वाटर का स्तर घटना: कोन्या में चुकंदर, मक्का और अन्य पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं चल रहे हैं। 1970 के दशक से कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर लेवल 60 मीटर तक गिर चुका है। अवैध कुओं और अनियंत्रित पंपिंग ने जमीन को कमजोर कर दिया है, जिससे जमीन अचानक धंस रही है। 
एक्सपर्ट्स की चेतावनी- सिंकहोल की संख्या तेजी से बढ़ेगी एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर मौजूदा स्थिति जारी रही तो सिंकहोल की संख्या और तेजी से बढ़ेगी। कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता के मुताबिक अगर ग्राउंड वाटर के इस्तेमाल पर लगाम नहीं लगाया तो यह संकट और गहराएगा। AFAD अब जोखिम वाले इलाकों का नक्शा बना रही है और 1,850 क्षेत्रों में धसाव के संकेत मिले हैं। भविष्य में, अगर जलवायु परिवर्तन से सूखा जारी रहा, तो न केवल कोन्या बल्कि पड़ोसी करामन और अक्सराय जैसे इलाके भी प्रभावित होंगे। हालांकि, सरकार अवैध कुओं पर रोक लगा रही है और बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में कदम उठा रही है। सिंकहोल से तुर्किये में पलायन बढ़ने का खतरा यह संकट तुर्की की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण पर गहरा असर डालेगा। कोन्या मैदान देश का &#039;अन्न भंडार&#039; है, जहां गेहूं और अन्य अनाज का बड़ा हिस्सा पैदा होता है। सिंकहोल से हजारों हेक्टेयर खेत बर्बाद हो रहे हैं, जिससे किसान जोखिम वाली जमीन छोड़ने को मजबूर हैं। इससे अनाज उत्पादन घट सकता है, जो आयात पर निर्भर तुर्की के लिए समस्या बढ़ाएगा। आर्थिक रूप से, कृषि क्षेत्र में नुकसान करोड़ों डॉलर का हो सकता है, और किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से, भूजल की कमी से जैव विविधता प्रभावित हो रही है, और सिंकहोल जानवरों और मनुष्यों के लिए खतरा हैं। सामाजिक रूप से, ग्रामीण समुदायों का पलायन बढ़ सकता है, जो शहरीकरण की समस्या पैदा करेगा। हालांकि, सरकार की निगरानी और जोखिम मैपिंग से कुछ हद तक बचाव संभव है। ---------------------------------------- ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 17:58:34 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान में रणवीर सिंह&#45;अक्षय खन्ना पर FIR की मांग:फिल्म धुरंधर में भुट्टो की पार्टी को आतंकवाद समर्थक दिखाने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में कराची की एक अदालत में भारतीय फिल्म ‘धुरंधर’ के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के झंडे और पार्टी रैलियों के फुटेज का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही फिल्म पर पीपीपी को आतंकवाद का समर्थन करने वाली पार्टी के रूप में दिखाने का भी आरोप लगाया गया है। यह याचिका पीपीपी के कार्यकर्ता मोहम्मद आमिर ने कराची के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट (साउथ) में दाखिल की है। याचिका में मांग की गई है कि फिल्म के निर्देशक, निर्माता, कलाकार और फिल्म के प्रचार व निर्माण से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। याचिका में फिल्म के लीड एक्टर रणवीर सिंह समेत अन्य कलाकार संजय दत्त, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेनी, निर्देशक आदित्य धर, निर्माता लोकेश धर और ज्योति किशोर देशपांडे के नाम शामिल हैं। याचिका में कहा- पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाया याचिकाकर्ता के अनुसार, फिल्म के आधिकारिक ट्रेलर में बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों और PPP से जुड़े दृश्य बिना किसी कानूनी अनुमति के दिखाए गए हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म में PPP को आतंकियों के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी के रूप में पेश किया गया है। साथ ही कराची के लियारी इलाके को &#039;आतंकियों का युद्ध क्षेत्र&#039; बताया गया है, जो याचिकाकर्ता के मुताबिक मानहानिकारक, भ्रामक और पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, इसलिए याचिकाकर्ता कोर्ट पहुंचा मोहम्मद आमिर ने कहा कि यह फिल्म PPP, उसके नेताओं और समर्थकों के खिलाफ नफरत फैलाने, अपमान करने और उकसाने का काम करता है। उन्होंने पाकिस्तान दंड संहिता की धाराओं 499, 500, 502, 504, 505, 153-ए और 109 का हवाला दिया है। ये धाराएं मानहानि, आपराधिक धमकी, दंगा भड़काने और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने से जुड़ी हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने पहले दरख्शां थाने के एसएचओ को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो मामला दर्ज किया और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की। इसी वजह से उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। खाड़ी देशों में बैन के चलते धुरंधर की रिलीज अटकी बॉलीवुड फिल्म धुरंधर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हालांकि मिडिल ईस्ट के कई देशों में इस फिल्म पर बैन लगा दिया गया है। धुरंधर को बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई में रिलीज की अनुमति नहीं मिली। बताया जा रहा है कि इन देशों में फिल्म को ‘पाकिस्तान विरोधी’ माना गया है। इसी वजह से खाड़ी देशों की सेंसर अथॉरिटीज ने फिल्म के कंटेंट को मंजूरी नहीं दी। पाकिस्तान से जुड़ी फिल्मों पर खाड़ी देशों की रोक यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय फिल्म को इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी पाकिस्तान से जुड़ी थीम वाली कई भारतीय फिल्मों पर खाड़ी देशों में रोक लग चुकी है। 2024 में ऋतिक रोशन और दीपिका पादुकोण की फिल्म फाइटर को भी खाड़ी देशों में परेशानी झेलनी पड़ी थी। शुरुआत में यूएई को छोड़कर बाकी सभी खाड़ी देशों में फिल्म पर बैन लगा दिया गया था। पाकिस्तान से जुड़े कुछ वर्गों ने फिल्म में पुलवामा हमले को दिखाए जाने पर आपत्ति जताई थी और इसे ‘पाकिस्तान विरोधी प्रचार’ बताया था। इसके बाद रिलीज के एक दिन बाद ही यूएई में भी फाइटर को सस्पेंड कर दिया गया। इसी साल अक्षय कुमार की स्काई फोर्स और जॉन अब्राहम की द डिप्लोमैट को भी पाकिस्तान से जुड़े कंटेंट की वजह से कई मिडिल ईस्ट देशों में बैन का सामना करना पड़ा था। धुरंधर 8 दिनों में 200 करोड़ के पार  धुरंधर को रिलीज हुए 8 दिन बीत चुके हैं और कमाई के मामले में फिल्म लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। महज 8 दिनों में ही इस फिल्म ने 200 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया था। फिल्म की कहानी से लेकर विलेन की भूमिका में अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। सैकनिल्क के मुताबिक, ‘धुरंधर’ ने अब तक इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 240.11 करोड़ रुपए की शानदार कमाई कर ली है। फिल्म ने शुक्रवार को 32 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया। यह फिल्म 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और तभी से इसकी कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है। धुरंधर का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन &#039;धुरंधर&#039; की कहानी क्या है? आदित्य धर की निर्देशित &#039;धुरंधर&#039; हमजा नाम के एक भारतीय स्पाई एजेंट की कहानी है, जो रहमान डकैत के गिरोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान में घुसपैठ करता है। यह फिल्म 2001 के संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमले जैसी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। धुरंधर फिल्म गूगल पर ट्रेंड कर रही है... गूगल सर्च- ट्रेंड ------------------------- ये खबर भी पढ़ें... धुरंधर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: 8 दिनों में 200 करोड़ के पार, रेड 2 और सिकंदर जैसी फिल्मों को छोड़ा पीछे ‘धुरंधर’ को रिलीज हुए 8 दिन बीत चुके हैं और कमाई के मामले में फिल्म लगातार रिकॉर्ड तोड़ रही है। महज 8 दिनों में ही इस फिल्म ने 200 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया था। फिल्म की कहानी से लेकर विलेन की भूमिका में अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 17:58:34 +0530</pubDate>
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<title>बांग्लादेश में हसीना विरोधी पर फायरिंग, सिर में गोली लगी:कुछ घंटे पहले ग्रेटर बांग्लादेश का मैप शेयर किया, इसमें भारतीय इलाके शामिल</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी को राजधानी ढाका में शुक्रवार को गोली मार दी गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादी इस्लामी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हैं और चुनाव में ढाका से निर्दलीय उम्मीदवार हैं। वह रिक्शे पर जा रहे थे तभी बाइक सवार हमलावर ने उन्हें गोली मार दी। बांग्लादेश में 11 दिसंबर को चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ था। इसके एक ही दिन बाद यह हमला हुआ। हादी को तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि गोली उनके सिर में गोली लगी और हालत बेहद नाज़ुक है। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमले से कुछ घंटे पहले उस्मान हादी ने ग्रेटर बांग्लादेश का एक मैप शेयर किया था, इसमें भारतीय इलाके (7 सिस्टर्स) शामिल थे। उस्मान हादी की सोशल मीडिया पर पोस्ट सीसीटीवी फुटेज में गोलीबारी रिकॉर्ड पुलिस के मुताबिक, हादी को दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर बिजयनगर इलाके में रिक्शे पर देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि एक मोटरसाइकिल पीछे से रिक्शे के पास आई, फिर दाईं ओर आकर रुकी और पीछे बैठे व्यक्ति ने बिल्कुल नजदीक से हादी पर गोली चला दी। बाइक पर सवार दोनों लोगों ने हेलमेट पहन रखे थे। पूरी घटना कुछ ही सेकंड में हुई और हमलावर तुरंत मौके से फरार हो गए। इंकलाब मंच के कार्यकर्ता मोहम्मद रफी, जो हादी के पीछे एक दूसरे रिक्शे पर थे, ने बताया कि जुमे की नमाज के बाद वे लोग दोपहर का खाना खाने हाईकोर्ट इलाके की ओर जा रहे थे। बिजयनगर पहुंचते ही मोटरसाइकिल पर आए दो लोगों ने हादी पर गोली चला दी और भाग गए। हादी को करीब 2 बजकर 40 मिनट पर ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया और बाद में उन्हें एवरकेयर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। जान बचना मुश्किल, 2 बार कार्डियक अरेस्ट हुआ ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल असदुज्जामान ने बताया कि हादी की अस्पताल में सर्जरी की गई। उनके सिर में गोली लगी थी और सीने व पैर में भी चोटें थीं। पैर की चोट शायद गोली लगने के बाद रिक्शे से गिरने के कारण हुई। एक और डॉक्टर जाहिद राइहान ने बताया कि हादी की हालत बेहद नाजुक है और अभी भी वे खतरे में हैं। उन्हें दो बार कार्डियक अरेस्ट हुआ है और बहुत ज्यादा खून बह चुका है। सर्जरी पूरी होने के बाद भी उनकी हालत को लेकर कोई उम्मीद जताना मुश्किल है। वह अभी भी सबसे गंभीर स्थिति में हैं, हालांकि जीवित हैं। डॉक्टर ने बताया कि गोली एक तरफ से घुसी और दूसरी तरफ से निकल गई, लेकिन कुछ छोटे-छोटे टुकड़े दिमाग के अंदर रह गए थे। ऑपरेशन के दौरान ऐसे कुछ टुकड़ों को निकाला गया, जो बहुत छोटे थे। यूनुस बोले- चुनावी माहौल में ऐसी हिंसा स्वीकार नहीं इस घटना पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में इस तरह की हिंसा स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह देश के शांत राजनीतिक वातावरण के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। यूनुस ने सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द हमलावरों की पहचान कर कड़ी सजा दी जाए। इस बीच, पाल्टन थाना प्रभारी मुस्तफा कमाल खान ने बताया कि रात 11 बजकर 45 मिनट तक इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ था और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि हालांकि, इस थाने की कई टीमें और अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियां हमलावरों को पकड़ने के लिए काम कर रही हैं और इस मामले को बहुत ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। हादी को पहले भी मौत की धमकियां मिलीं शरीफ उस्मान हादी एक प्रमुख बांग्लादेशी राजनीतिक कार्यकर्ता, लेखक और दक्षिणपंथी इस्लामी संगठन &#039;इंकलाब मंच&#039; के प्रवक्ता हैं। उन्हें नवंबर 2025 में भी फेसबुक पर 30 विदेशी नंबरों से मौत की धमकियां मिली थी। वह जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन के बाद उभरे एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। हादी बांग्लादेश की सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों पर कई किताबें लिख चुके हैं, जो जुलाई प्रदर्शनों से पहले देश की सांस्कृतिक चुनौतियों पर केंद्रित हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने अवामी लीग पर छात्रों की हत्याओं का आरोप लगाया। इसके अलावा, इस्लामिक क्राइम्स ट्रिब्यूनल के शेख हसीना को मौत की सजा देने पर हादी ने इसे एक मिसाल बताया। हादी आगामी संसदीय चुनावों में ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र (मोटीझील, शाहबाग, रामना, पलटन और शाहजहांपुर) से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके थे। इंकलाब मंच ने शेख हसीना की सरकार गिराई थी इंकलाब मंच अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद एक संगठन के रूप में उभरा। इसने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग की सरकार गिरा दिया था। यह संगठन अवामी लीग को आतंकवादी करार देते हुए पूरी तरह खत्म करने और नौजवानों की सुरक्षा की मांग को लेकर सक्रिय रहा। यह संगठन राष्ट्रीय स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा पर जोर देता है। मई 2025 में अवामी लीग को भंग करने और चुनावों में अयोग्य ठहराने में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चुनाव आयोग ने एक दिन पहले ही 13वें संसदीय चुनाव की तारीख का ऐलान किया था। ऐसे में यह हमला राजनीतिक हिंसा की आशंका बढ़ा रहा। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होंगे बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम इसका ऐलान किया। यह चुनाव पूर्व पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के डेढ़ साल बाद हो रहा है। 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद से वहां पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है। अगले साल होने वाले चुनाव में हसीना की पार्टी हिस्सा नहीं ले पाएगी। बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग का पंजीकरण चुनाव आयोग ने मई 2025 में निलंबित कर दिया था। पार्टी के बड़े नेताओं को अंतरिम सरकार गिरफ्तार कर चुकी है। अवामी लीग चुनाव लड़ने और राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। छात्रों की पार्टी NCP और जमात के टूटे धड़े ने मिलाया हाथ चुनाव से पहले छात्रों की राजनीतिक पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने जमात-ए-इस्लामी से टूटकर बनी अमर बांग्लादेश (AB) पार्टी और राष्ट्र संस्कृति आंदोलन के साथ मिलकर नया मोर्चा गणतांत्रिक संस्कार गठजोट बनाया है। NCP इसी साल फरवरी में बनी थी। पार्टी के छात्र नेताओं ने पिछले साल हसीना विरोधी प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। इन्हीं प्रदर्शनों के दबाव में 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। NCP संयोजक नाहिद इस्लाम ने कहा कि गठबंधन दो साल की कोशिशों का नतीजा है। NCP ने 125 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची भी जारी कर दी है। पार्टी के प्रमुख चेहरे नाहिद इस्लाम ढाका-11 से चुनाव लड़ेंगे। इस सूची में 14 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो अब तक किसी भी पार्टी से सबसे ज्यादा हैं। NCP जल्द ही बाकी सीटों पर भी उम्मीदवारों के नाम घोषित करेगी। उस्मान हादी गूगल पर ट्रेंड कर रहे हैं... गूगल सर्च- ट्रेंड ------------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव:तख्तापलट के डेढ़ साल बाद वोटिंग; क्या हसीना की पार्टी चुनाव लड़ पाएगी बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम इसका ऐलान किया। यह चुनाव पूर्व पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के डेढ़ साल बाद हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें... ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 17:58:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>TejTak</dc:creator>
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