पीएम मोदी ने केंद्रीय राज्यमंत्री के घर पोंगल मनाया:बोले- तमिल संस्कृति साझी विरासत, पोंगल प्रकृति-परिवार के साथ संतुलन बनाता है

Jan 16, 2026 - 12:47
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पीएम मोदी ने केंद्रीय राज्यमंत्री के घर पोंगल मनाया:बोले- तमिल संस्कृति साझी विरासत, पोंगल प्रकृति-परिवार के साथ संतुलन बनाता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार सुबह केंद्रीय राज्यमंत्री एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल समारोह में शामिल हुए। पीएम ने पूजा की। उन्होंने गाय को भी भोजन खिलाया। पीएम ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है। तमिल संस्कृति सदियों को जोड़ती है। आज पोंगल एक ग्लोबल त्योहार बन गया है। पीएम मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया में तमिल समुदाय और जो लोग तमिल संस्कृति को पसंद करते हैं। पोंगल को बहुत उत्साह से मनाते हैं और मुझे उनमें से एक होने पर गर्व है। मोदी ने कहा कि पोंगल का त्योहार हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच एक अच्छा संतुलन बनाए रखने का महत्व सिखाता है। जमीन और सूरज के प्रति हमारी कृतज्ञता दिखाता है। समारोह की 5 तस्वीरें… पीएम के संबोधन की 6 मुख्य बातें… पोंगल क्या होता है? पोंगल तमिल समुदाय का प्रमुख फसल उत्सव है। यह पर्व सूर्य देव, प्रकृति, पशु और किसानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। यह हर साल 14–17 जनवरी के बीच मकर संक्रांति के आसपास मनाया जाता है। इसे मुख्य दिनों में भोगी पोंगल, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कानूम पोंगल होते हैं। पोंगल के दौरान मुख्य रूप से नए चावल से पारंपरिक व्यंजन पकाए जाते हैं। इनमें सक्कराई पोंगल (मीठा) और वें पोंगल (नमकीन) शामिल होते हैं। इनके साथ नारियल चटनी, सांभर, वड़ा, पायसम, केला और मौसमी फल परोसे जाते हैं। मीठी और नमकीन को परंपरा के मुताबिक खुली जगह में मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। दूध-चावल के उफनने को समृद्धि का शुभ संकेत माना जाता है। ………………………. पीएम मोदी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोदी जर्मन चांसलर से मिले, साथ मिलकर पतंग उड़ाई: पीएम ने कहा- भारत-जर्मनी करीबी सहयोगी, भारत में 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने 12 जनवरी को गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में साथ में पतंग उड़ाई थी। पीएम ने कहा था कि भारत-जर्मनी करीबी सहयोगी हैं। इसीलिए आज भारत में 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां हैं। यह जर्मनी के भारत के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। पूरी खबर पढ़ें…

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