बंगाल SIR,गड़बड़ी वाले 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करने का निर्देश:सुप्रीम कोर्ट बोला- जांच पारदर्शी रहे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा कहा चुनाव आयोग गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक लगाए, ताकि लोगों को पता चल सके। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा- सिर्फ तर्क के आधार पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता है। वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन यह पारदर्शी और समय पर हो। चुनाव आयोग लोगों की परेशानी को समझे। कोर्ट रूम लाइव: याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल, चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी SIR पर पिछली मुख्य 4 सुनवाई 15 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा था- हम देश निकाला नहीं दे रहे चुनाव आयोग ने SC में कहा था- SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा- लिस्ट को सही रखना हमारा काम चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। पूरी खबर पढ़ें… 4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला- BLOs के काम के दबाव को कम करें सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि वे SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की उस याचिका पर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि समय पर काम ना कर पाने BLOs के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई न की जाए। पूरी खबर पढ़ें… 26 नवंबर: चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… ----------------- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…
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