वंदे मातरम् के संस्कृत शब्दों पर पेंटिंग्स बनी थीं:123 साल पहले तेजेंद्र मित्रा ने कैनवास पर उकेरा; कर्तव्य पथ के बैकग्राउंड में दिखेंगी

Jan 25, 2026 - 12:13
 0  0
वंदे मातरम् के संस्कृत शब्दों पर पेंटिंग्स बनी थीं:123 साल पहले तेजेंद्र मित्रा ने कैनवास पर उकेरा; कर्तव्य पथ के बैकग्राउंड में दिखेंगी
देश इस बार 77वां गणतंत्र दिवस वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के साथ मना रहा है। मुख्य परेड की थीम भी वंदे मातरम् पर रखी गई है। कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकलेंगी, जो 'स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत' थीम पर आधारित होंगी। इसी दौरान कर्तव्य पथ के बैकग्राउंड में तेजेंद्र कुमार मित्रा की 1923 में वंदे मातरम् पर आधारित पेंटिंग्स को दिखाया जाएगा। ये पेंटिंग्स 'वंदे मातरम् चित्राधार' नाम की एक किताब में संग्रहित की गईं थीं। इस वंदे मातरम् एल्बम को 1923 में कानपुर में प्रकाश पुस्तकालय के शिव नारायण मिश्रा वैद्य ने पब्लिश करवाया था। 16 जनवरी को दिल्ली के साउथ ब्लॉक में डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने गणतंत्र दिवस समारोह पर प्रेस ब्रीफिंग रखी थी। इसी दौरान उन्होंने बताया कि यह एक दुर्लभ और आउट ऑफ प्रिंट किताब है। इसमें अरविंद घोष के लिखे वंदेमातरम् गीत का पूरा अंग्रेजी अनुवाद भी है। तेजेंद्र की बनाई पेंटिंग्स वंदे मातरम् गीत के कुछ संस्कृत शब्दों को दर्शाती हैं। इनमें सुजलां, सुफलां जैसे शब्द शामिल हैं। पहले देखिए तेजेंद्र की बनाई पेंटिंग्स.... ये सभी पेंटिंग, वी सुंदरम के ब्लॉग स्पॉट से ली गई हैं। इसे 3 मई 2010 को लिखा गया था। सुंदरम तमिलनाडु कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 1994 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। ब्लॉग के मुताबिक... "7 सितंबर 1905 को बनारस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में वंदे मातरम् गीत गाए जाने की शताब्दी के उपलक्ष्य में 10 सितंबर 2006 को चेन्नई के रॉयपेट्टा में राजाजी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स ने एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया। सभा के तुरंत बाद, श्री श्री आचार्य (मंडयम श्रीनिवासचारियार के बेटे डॉ. पार्थसारथी ने वंदे मातरम् एल्बम नामक एक किताब दी, जो 1923 में कानपुर में प्रकाश पुस्तकालय के शिव नारायण मिश्रा वैद्य ने पब्लिश की थी। इस पुस्तक में तेजेंद्र कुमार मित्रा के बनाए दुर्लभ और सुंदर चित्र हैं, जिनमें वंदे मातरम् गीत के संस्कृत शब्दों को दिखाया गया है। इस दुर्लभ किताब के कुछ पन्ने ब्लॉग में प्रस्तुत कर रहा हूं।" कर्तव्य पथ पर लगी वंदे मातरम् की पेंटिंग्स किताब का पहला पन्ना... कैसे लिखा गया वंदे मातरम्... पढ़िए पूरी कहानी... ब्रिटिश सरकार ने 1857 की क्रांति के बाद भारत में ब्रिटिश राष्ट्रगान, 'गॉड सेव द क्वीन', लागू करने की कोशिश की। यह माहौल बनाने के लिए कि उनका राष्ट्रगान ही भारत का राष्ट्रगान है। अंग्रेजों ने इस गीत को कार्यक्रमों, सेना और स्कूलों में शामिल करने का फरमान जारी किया। इस पूरी कवायद से बंकिम चंद्र को बहुत गुस्सा आया। साल था 1876 था, भारतीय जनता ब्रिटिश राष्ट्रगान से नफरत करती थी। बंकिम चंद्र ने इस पर गहराई से विचार किया। उन्होंने महसूस किया कि पिछले हजार साल की गुलामी के कारण भारत कभी भी एक एकजुट देश नहीं रहा और इसलिए भारत का कोई राष्ट्रगान नहीं था 17 नवंबर 1875 को उन्होंने वंदे मातरम् नाम से छह भागों वाला गीत लिखा, जो देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत था और भारत को अपनी मातृभूमि के रूप में संबोधित करता था। अपने मित्रों को यह गीत सुनाने के बाद उन्होंने कहा कि यही भारतीयों का सच्चा राष्ट्रगान होना चाहिए। इसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1882 में 'आनंद मठ' उपन्यास लिखा। यानी इसे लिखने से पांच साल पहले वंदे मातरम् लिखा जा चुका था। आनंद मठ 'संन्यासी विद्रोह' पर आधारित था। इस उपन्यास में देशभक्त संन्यासियों को सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गाते हुए दिखाया गया। 1907 में फहराया गया था वंदे मातरम् लिखा ध्वज 1907 में भीकाजी कामा ने भारत का ध्वज फहराया था। इसमें हरा, पीला और लाल रंग था। इस पर 8 कमल बने थे। बीच में 'वन्दे मातरम्' लिखा था। सबसे नीचे की पट्‌टी पर सूर्य और चंद्रमा बना था। ----------------------------------- गणतंत्र दिवस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... 1857 के गुमनाम शहीद​​​​​​- 168 साल से सड़ रहे 282 शहीदों के कंकाल, अंग्रेजों ने कुएं में जिंदा दफनाया, हत्यारे अफसर के नाम पर अमृतसर में सड़क पंजाब में वाघा बॉर्डर से सिर्फ 35 किमी दूर अजनाला नाम का एक छोटा सा शहर है। यहां गुरुद्वारा सिंह सभा के कैंपस में एक कुआं है। इस कुएं को ‘शहीदों का कुआं या ‘कलियांवाला खोह’ के नाम से जाना जाता है। इसके पास ही रखे लोहे के बक्से में इंसानों की हड्डियां भरकर रखी गई हैं। ये हड्डियां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले 282 सैनिकों की हैं। पढ़ें पूरी खबर...

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0