वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिकी राष्ट्रपति ने TrumpRx नाम की सरकारी वेबसाइट लॉन्च की, लोग कम कीमत पर दवाइयां खरीद सकेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को TrumpRx नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च की। ट्रम्प का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म अमेरिकियों को सस्ती दवाएं दिलाने में मदद करेगा और इससे हेल्थकेयर खर्च कम होगा। व्हाइट हाउस परिसर में वेबसाइट का अनावरण करते हुए ट्रम्प ने कहा, ‘आप बहुत सारा पैसा बचाने वाले हैं। यह पूरे हेल्थकेयर सिस्टम के लिए भी अच्छा है।’ TrumpRx सीधे दवाएं नहीं बेचती। यह वेबसाइट एक तरह से क्लीयरिंगहाउस की तरह काम करती है, जो यूजर्स को दवा कंपनियों की अपनी वेबसाइटों पर भेजती है, जहां वे दवाएं खरीद सकते हैं। इसके साथ ही रिटेल फार्मेसी में इस्तेमाल के लिए कूपन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर 40 से ज्यादा दवाएं शामिल हैं। इनमें वजन घटाने की चर्चित दवाएं ओजेम्पिक और वेगोवी भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस होती रही है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में महंगाई और जीवनयापन की लागत बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए दवाओं, हेल्थकेयर, घर, किराया और ग्रॉसरी की बढ़ती कीमतें एक बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। ट्रम्प ने कहा कि दवाओं पर मिलने वाली छूट फार्मास्युटिकल कंपनियों पर उनके व्यक्तिगत दबाव का नतीजा है। उनका कहना है कि अमेरिकी लंबे समय से दवाओं के लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि दूसरे देशों में वही दवाएं सस्ती मिलती हैं। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में दवाओं की कीमतें कम होने से कंपनियां दूसरे देशों में कीमतें बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा, “हम दुनिया को सब्सिडी देकर थक चुके हैं।” राष्ट्रपति ने पहली बार सितंबर में TrumpRx का जिक्र किया था। तब उन्होंने बताया था कि दवा कंपनियों के साथ 15 से ज्यादा समझौते किए गए हैं, जिनका मकसद अमेरिका में दवाओं की कीमतें विकसित देशों में सबसे कम दरों के बराबर लाना है। TrumpRx का लॉन्च कई बार टल चुका था। पिछले साल सेंटर फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज के प्रमुख मेहमत ओज ने कहा था कि वेबसाइट साल के अंत तक शुरू हो जाएगी, लेकिन बाद में जनवरी का प्रस्तावित लॉन्च भी टाल दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने हिजाब को मुस्लिम महिलाओं की पहचान बताया, आलोचक बोले- ईरान के हालात को नजरअंदाज कर रहे न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद में घिर गए हैं। 1 फरवरी को वर्ल्ड हिजाब डे के मौके पर उनके ऑफिस की ओर से किए गए एक पोस्ट को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह पोस्ट ईरान में महिलाओं पर लागू जबरन हिजाब कानूनों और वहां हो रहे दमन को नजरअंदाज करता है। मेयर के ऑफिस ऑफ इमिग्रेंट अफेयर्स की ओर से साझा किए गए पोस्ट में कहा गया था कि दुनिया भर की उन मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों की आस्था, पहचान और गर्व का जश्न मनाया जा रहा है, जो हिजाब पहनना चुनती हैं। इस पोस्ट की टाइमिंग और भाषा को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि ईरान में हिजाब पहनने से इनकार करने पर महिलाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है, पीटा जा रहा है और कई मामलों में उनकी जान तक चली गई है। ऐसे माहौल में हिजाब को गर्व और उत्सव के प्रतीक के रूप में पेश करना संवेदनहीन है। ईरानी-अमेरिकी पत्रकार और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने मेयर को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि न्यूयॉर्क जैसे शहर में रहते हुए भी उन्हें यह पोस्ट देखकर मानसिक पीड़ा हो रही है। उन्होंने लिखा कि ईरान में महिलाएं हिजाब और उससे जुड़ी इस्लामिक विचारधारा को न मानने पर जेल भेजी जा रही हैं, गोली मारी जा रही हैं, जबकि न्यूयॉर्क में उसी प्रतीक का जश्न मनाया जा रहा है। तुर्किेए-अमेरिकी अर्थशास्त्री और राजनीतिक वैज्ञानिक तैमूर कुरान ने कहा कि ईरान, तुर्किए और सऊदी अरब जैसे देशों में लाखों मुसलमान इसे गर्व नहीं बल्कि उत्पीड़न का प्रतीक मानते हैं। तैमूर कुरान ने यह भी कहा कि किसी एक धार्मिक परिधान की आधिकारिक रूप से प्रशंसा करना धार्मिक पक्षपात जैसा लग सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शहर प्रशासन अन्य धर्मों के प्रतीकों के साथ भी ऐसा ही करेगा। उनके मुताबिक, पहचान की राजनीति पहले ही अमेरिका में गहरे विभाजन पैदा कर चुकी है और यह पोस्ट उन तनावों को और बढ़ाती है।
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