UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक:केंद्र को नया ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश; देशभर में नियमों का विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इनका देशभर में विरोध हो रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के 4 अहम कमेंट्स- पहले इस पूरे मामले को समझें UGC के नए कानून का नाम है- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। कोर्ट रूम LIVE गिरिराज सिंह ने रोक का श्रेय मोदी को दिया, X ने भ्रामक बताया केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक के फैसले पर पीएम मोदी और अमित शाह का आभार जताया। हालांकि X ने इस बयान पर कम्युनिटी नोट लगाया। जिसमें लिखा कि नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। पोस्ट करने वाले ने मोदी और शाह को इसका श्रेय दिया, जो वास्तविकता से परे है। राज्यों में UGC के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन… यूपी: UGC के नए नियमों पर रोक, वाराणसी में उड़े रंग-गुलाल, बरेली में भीम आर्मी ने अलंकार अग्निहोत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से UGC के नए नियमों पर रोक के बाद यूपी मे 3 दिनों से चल रहा विरोध-प्रदर्शन जश्न में बदल गया। वाराणसी में छात्रों ने रंग-गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे को बधाई दी। नियमों के खिलाफ इस्तीफा देने वाले बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने कहा- UGC के नए नियम सवर्ण समाज के लिए काला कानून है। उधर, बरेली में भीम आर्मी ने अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: पटना में 'काला कानून वापस लो' के पोस्टर के साथ विरोध, लोग बोले- सवर्णों को बेड़ियों से नहीं कुचल सकते पटना में UGC के खिलाफ राजपूत करणी सेना ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि इस तरह के बिल से सरकार सवर्णों को बेड़ियों से नहीं कुचल सकती। लोगों ने ‘काला कानून वापस लो’ के पोस्टर के साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पूरी खबर पढ़ें… हरियाणा: हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने UGC के खिलाफ लिखा- तुम्हारे पापों की गठरी का बोझ कौन उठाएगा हरियाणा में UGC एक्ट को लेकर विरोध तेज हो गया हैं। ओलिंपियन रेसलर योगेश्वर दत्त और बॉक्सर विजेंद्र सिंह के बाद अब हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा का नाम भी विरोध करने वालों की लिस्ट में जुड़ गया है। उन्होंने UGC बायकॉट के नाम से सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाते हुए पोस्ट डाली है। इसमें लिखा- जो अंग्रेज नहीं कर पाए, आज तुमने करके दिखाया। इस देश का जहर पचाने को अब कौन मसीहा आएगा? पूरी खबर पढ़ें… मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह ने UGC के नए नियमों पर दी सफाई, कहा- फर्जी शिकायत पर सजा का प्रावधान कमेटी ने नहीं हटाया था UGC के नए नियम को लेकर कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने फेसबुक पर लिखकर स्पष्ट किया कि समिति ने न तो ‘फर्जी शिकायत पर सजा' वाले प्रावधान को हटाने की कोई सिफारिश की थी, न ही सामान्य वर्ग के छात्रों को नियमों से बाहर रखने की। उनका कहना है कि दोनों फैसले UGC ने अपनी मर्जी से लिए हैं। दरअसल, नए नियमों में जिस 'इक्विटी कमेटी' के गठन को अनिवार्य किया गया है, उसकी सिफारिश संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने की थी। दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में कुल 30 सदस्य हैं, जिनमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 9 सांसद शामिल हैं। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें… 5 सवाल-जवाब में, UGC ने नए नियम क्यों बनाए सवाल-1: UGC ने कॉलेज में जातीय भेदभाव को लेकर नए नियम क्यों बनाए? जवाब: 17 दिसंबर 2012 से UGC से मान्यता प्राप्त सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में जातीय भेदभाव रोकने के लिए कुछ नियम लागू किए गए थे। ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस’ नाम के ये नियम सिर्फ सुझाव और जागरूकता के लिए थे। इनमें कोई सजा या अनिवार्यता नहीं थी। 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रोहित वेमुला ने जातीय उत्पीड़न के चलते आत्महत्या कर ली। इसी तरह 22 मई 2019 को महाराष्ट्र में दलित डॉक्टर पायल तडवी ने भी आत्महत्या कर ली। 29 अगस्त 2019 को रोहित वेमुला और पायल तडवी के परिजनों ने कॉलेज में जातीय भेदभाव के नियमों को सख्त बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। इसी साल IIT ने एक स्टडी की, जिसमें पाया गया कि ‘ऐतिहासिक रूप से वंचित जातियों के 75% छात्र कॉलेज में भेदभाव का सामना करते हैं।’ जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने UGC को जातीय भेदभाव की शिकायतों का डेटा इकठ्ठा करने को कहा, साथ ही नए नियम बनाने का निर्देश दिया। फरवरी 2025 में फीडबैक लेने के लिए इन नए नियमों का एक ड्राफ्ट जारी किया गया। ‘ऑल इंडिया OBC स्टूडेंट यूनियन’ का कहना था कि ड्राफ्ट के तहत यूनिवर्सिटीज में जातिगत भेदभाव की परिभाषा में OBC को शामिल नहीं किया गया है, साथ ही कॉलेज में भेदभाव के मामलों पर कार्रवाई के लिए जो इक्वलिटी कमेटी बनाई जानी हैं, उनमें भी OBC मेंबर शामिल करने का प्रावधान नहीं है। ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की झूठी शिकायत करने पर दंड का प्रावधान था। इस पर कहा गया कि इससे भेदभाव का सामना कर रहे स्टूडेंट्स शिकायत करने से डरेंगे। ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की कोई स्पष्ट परिभाषा भी नहीं थी। संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा संबंधी मामलों की संसदीय समिति ने ड्राफ्ट की समीक्षा करने के बाद इसे 8 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार को सौंपा। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह इस समिति के चेयरमैन थे। समिति ने UGC को अपनी सिफारिशें दीं, जिनमें कहा गया कि भेदभाव वाले नियम की परिभाषा और इक्विटी कमेटी में OBC को भी शामिल किया जाए। इसके बाद UGC ने ड्राफ्ट में कई बदलाव करके 13 जनवरी 2026 को नए नियम नोटिफाई कर दिए। 15 जनवरी से ये नियम UGC से मान्यता प्राप्त सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में लागू हो गए हैं। सवाल-2: नए नियमों के तहत क्या-क्या बड़े बदलाव हुए? जवाब: प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस 2026 में 3 बड़े बदलाव हुए हैं… 1. जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा दी गई : इसमें कहा गया है, 'जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, पैदाइश के स्थान, विकलांगता के आधार पर कोई भी अनुचित या पक्षपाती व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।’ जबकि ड्राफ्ट में जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी। 2. परिभाषा में OBC को भी शामिल किया गया: इसमें 'SC/ST के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि ड्राफ्ट में OBC को शामिल नहीं किया गया था। 3. झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटाया गया : ड्राफ्ट में झूठी शिकायतों को कम करने के लिए प्रावधान था। इसमें कहा गया था कि अगर झूठी या जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी के खिलाफ शिकायत की गई, तो शिकायत करने वाले को आर्थिक दंड या कॉलेज से सस्पेंड भी किया जा सकता है। अब लागू हुए फाइनल नियमों से ये प्रावधान हटा लिया गया है। सवाल-3: जातीय भेदभाव की शिकायत पर कार्रवाई कैसे होगी? जवाब: नए नियमों में जातीय भेदभाव की शिकायत पर कार्रवाई के कुछ प्रावधान हैं… सवाल 4: नए नियमों का विरोध क्यों किया जा रहा? जवाब: UGC के इन नए नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया पर #UGCRollback और #ShameOnUGC जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। विरोध करने वाले लोग नियमों में 4 तरह की खामियां बता रहे हैं… सवाल-5: क्या सरकार इन नियमों को वापस ले सकती है? जवाब: UGC रेगुलेशन के खिलाफ एक ईमेल कैंपेन चलाया जा रहा है। इसके तहत UGC और शिक्षा मंत्रालय को सामूहिक रूप से ईमेल भेजकर कहा जाएगा कि वह इन रेगुलेशंस को वापस लें। UGC के पूर्व चेयरमैन रहे एम जगदीश कुमार का कहना है कि ये नियम हायर एजुकेशन में बराबरी लाने और भेदभाव खत्म करने के लिए बनाए गए हैं और इनका मकसद सभी छात्रों के हितों की रक्षा करना है। वहीं UGC के मौजूदा चेयरमैन विनीत जोशी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि मोदी सरकार में सवर्ण समाज को 10% आरक्षण मिला है और UGC के नियम संविधान के आर्टिकल 14 के मुताबिक हैं, इसलिए किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव का सवाल नहीं उठता। तमिलनाडु CM ने UGC के नए नियमों का समर्थन किया तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने UGC के नए नियमों का समर्थन करते हुए केंद्र की सराहना की है। स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- UGC नियम 2026 भले ही देर से उठाया गया कदम है लेकिन भेदभाव और उदासीनता में डूबी हाइअर एजुकेशन सिस्टम में सुधार की दिशा में अच्छा फैसला है।
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