ईरानी विदेश मंत्री बोले- प्रदर्शनकारियों ने पुलिसवालों को जिंदा जलाया:इजराइल पर साजिश का आरोप; हिंसा में 538 की मौत, 10 हजार से ज्यादा हिरासत में
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का आज 16वां दिन है। इस बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिसवालों को मारने और जिंदा जलाने का आरोप लगाया है। अराघची ने इसे इजराइली की खुफिया एजेंसी मोसाद की साजिश बताया। बीते दो हफ्तों से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। न्यूज एजेंसी AP ने प्रदर्शनकारियों के हवाले से बताया कि मरने वालों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी हैं। वहीं अल जजीरा की रिपोर्ट में 109 सुरक्षाकर्मियों को मारे जाने का दावा किया गया है। अराघची ने पुलिसवालों पर हमले का वीडियो भी शेयर किया है। ईरान में प्रदर्शन से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान में भारतीयों की गिरफ्तारी की खबर झूठी ईरान में प्रदर्शनों के बीच भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की खबरों को ईरान ने खारिज कर दिया है। भारत में ईरान के राजदूत ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही यह जानकारी पूरी तरह गलत है। राजदूत मोहम्मद फथाली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि कुछ विदेशी अकाउंट्स द्वारा ईरान के हालात को लेकर फैलाई जा रही खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी प्रदर्शनों के बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला किया तो वह अमेरिकी सैनिकों और इजराइल को निशाना बनाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ ने रविवार को कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, शिप्स और इजरायल हमारे टारगेट पर होंगे। यह बयान संसद के लाइव सत्र के दौरान दिया गया, जहां सांसद 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगा रहे थे। कालीबाफ ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हालात में मजबूती से काम किया है। प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सबसे सख्त तरीके से निपटा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। ईरानी संसद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है… ट्रम्प को ईरान पर हमले का प्लान बताया गया ईरान में जारी प्रदर्शन के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विकल्पों की ब्रीफिंग दी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करती है तो ट्रम्प सैन्य कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईरान आजादी की ओर देख रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।’ वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालीबाफ ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर हमला किया तो दोनों को सख्ती से जवाब देंगे। ईरानी राष्ट्रपति बोले- अमेरिका-इजराइल दंगे भड़का रहे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान में दंगे भड़काकर अराजकता और अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं। उन्होंने ईरानियों से दंगाइयों और आतंकवादियों से दूर रहने को कहा। पजशकियान का कहना है कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों की बात सुनेंगे। लेकिन दंगाइयों की नहीं, जो पूरे समाज को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। पजशकियान ने कहा, 'हम लोगों की समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन दंगाइयों को पूरे समाज को खत्म करने की इजाजत नहीं दे सकते।' ईरान के सरकारी टेलीविजन ने रविवार को राष्ट्रपति का एक इंटरव्यू टेलीकास्ट किया, जिसमें पजशकियान ने यह बातें कहीं। ईरान पर हमले की आशंका को लेकर इजराइल हाई अलर्ट पर ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका को लेकर इजराइल हाई अलर्ट पर है। रॉयटर्स ने इजराइली सूत्रों के हवाले से बताया है कि हालात को देखते हुए इजराइली सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता बढ़ाए हुए हैं। इजराइल और ईरान जून में 12 दिन की जंग लड़ चुके हैं, जिसमें अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे। शनिवार को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक इस बातचीत में ईरान में अमेरिकी दखल की संभावना पर चर्चा हुई। अमेरिकी अधिकारी ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के मुद्दों का खुलासा नहीं किया। ब्रिटेन में ईरानी दूतावास का झंडा उतारा ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुए। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने ईरानी दूतावास का इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले इस्तेमाल होने वाला झंडा फहरा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी ने शेर और सूरज के निशान वाला तिरंगा झंडा लगाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह झंडा कई मिनट तक दूतावास पर लगा रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया। यह झंडा ईरान में शाह के शासनकाल के दौरान इस्तेमाल किया जाता था। प्रदर्शन के दौरान ‘डेमोक्रेसी फॉर ईरान’ और ‘फ्री ईरान’ जैसे नारे लगे। लंदन पुलिस ने कहा कि झंडा हटाने की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकी जा सके और ईरानी दूतावास की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने बताया कि इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है। देश लौटने की तैयारी कर रहे रजा पहलवी
रजा पहलवी ने शनिवार को बताया था कि वह देश लौटकर चल रहे प्रदर्शनों में शामिल होंगे। 65 साल के रजा पहलवी करीब 50 साल से अमेरिका में निर्वासन में रह रहे हैं। शनिवार सुबह उन्होंने कहा कि वह अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में रजा पहलवी ने लिखा- मैं भी अपने देश लौटने की तैयारी कर रहा हूं ताकि हमारी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय मैं आप सबके साथ, ईरान की महान जनता के बीच खड़ा रह सकूं। मुझे पूरा भरोसा है कि वह दिन अब बहुत करीब है। क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं। ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी कारण क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है। ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। खामेनेई की अपील- ट्रम्प को खुश करने के लिए देश बर्बाद न करें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया था। ईरान के सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया। खामेनेई ने कहा कि ईरान 'विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों' को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं, जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं। खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने सभी दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाय वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने आगे कहा- इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है। जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।” ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है। ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा। ----------------- यह खबर भी पढ़ें... ट्रम्प का दावा- ईरानी शहर पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा:सिक्योरिटी फोर्स ने मशहद छोड़ा, यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक शहर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद पर अब प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है। मशहद की आबादी करीब 40 लाख है। यह शहर तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है। यह ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर है। पढ़ें पूरी खबर…
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