सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर ISIS का हमला:3 की मौत, ट्रम्प बोले- मुंहतोड़ जवाब दूंगा; असद के हटने के बाद अमेरिकी सेना पर पहला हमला

Dec 14, 2025 - 11:45
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सीरिया में अमेरिकी सैनिकों पर ISIS का हमला:3 की मौत, ट्रम्प बोले- मुंहतोड़ जवाब दूंगा; असद के हटने के बाद अमेरिकी सेना पर पहला हमला
मध्य सीरिया के शहर पल्मायरा में शनिवार को इस्लामिक स्टेट ISIS के एक हमलावर ने अमेरिकी सैनिकों पर हमला किया। हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी सैनिक ISIS के खिलाफ चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियानों के तहत एक बैठक में शामिल थे। हमलावर को मौके पर मौजूद सीरियाई बलों ने मार गिराया। सीरियाई मीडिया के मुताबिक, इस हमले में सीरियाई सुरक्षा बलों के कुछ सदस्य भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को हेलिकॉप्टर के जरिए अल-तनफ स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ले जाया गया। अमेरिकी बलों पर यह हमला बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद पहली बार हुआ है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार समूह के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जाएगी। ट्रम्प ने मुंहतोड़ जवाब देने और बदला लेने की बात कही। सीरिया में ISIS के स्लीपर सेल अब भी एक्टिव ISIS को 2019 में क्षेत्रीय रूप से हराया जा चुका है, लेकिन संगठन के स्लीपर सेल अब भी सीरिया और इराक में सक्रिय बताए जाते हैं। अनुमान है कि ISIS के पास 5,000 से 7,000 लड़ाके अब भी मौजूद हैं। पूर्वी सीरिया में अमेरिका के सैकड़ों सैनिक तैनात हैं, जो ISIS के डेवलपमेंट को रोकने के लिए गठबंधन का हिस्सा हैं। दिसंबर 2024 में तख्तापलट के बाद अहमद अल-शरा ने अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर सत्ता संभाली थी। असद के पतन के बाद सीरिया के नए अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व में अमेरिका से संबंध सुधरे हैं। हाल ही में सीरिया ISIS विरोधी गठबंधन में शामिल हुआ है। ट्रम्प बोले- यह अमेरिका और सीरिया दोनों पर हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस हमले को आईएस का अमेरिका और सीरिया दोनों पर हमला बताया और कहा कि इसके लिए बहुत गंभीर बदला लिया जाएगा। ट्रम्प ने बताया कि सीरियाई राष्ट्रपति अल-शरा इस घटना से बहुत दुखी और गुस्से में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घायल अमेरिकी सैनिकों की हालत में सुधार है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलावर सीरियाई सुरक्षा बलों का सदस्य था, जिसे चरमपंथी विचारों के कारण हटाया जा रहा था। हालांकि, सीरियाई अधिकारियों ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिका ने सीरिया में 1 हजार सैनिक तैनात कर रखे अमेरिका ने 2014 से सीरिया में सैनिक तैनात कर रहा है। पहले यह तैनाती ईरान समर्थित मिलिशिया और रूसी खतरे के कारण थी, लेकिन अब मुख्य फोकस सिर्फ ISIS पर है। इसी समय ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत ISIS को हराने का अभियान शुरू हुआ। हालांकि ISIS को 2019 में क्षेत्रीय रूप से हरा दिया गया, लेकिन उसके स्लीपर सेल अब भी हमले करते रहते हैं। दिसंबर 2025 तक, अमेरिका के लगभग 1,000 सैनिक (पहले 2,000 थे, लेकिन 2025 में कमी की गई) पूर्वी और उत्तर-पूर्वी सीरिया में तैनात हैं। ये सैनिक कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) के साथ मिलकर काम करते हैं। ये स्थानीय बलों को ट्रेनिंग देते हैं, ISIS के ठिकानों पर हवाई हमले करते हैं और उसके डेवलपमेंट को रोकते हैं। अमेरिकी सैनिक अब सीरियाई सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त ऑपरेशन भी कर रहे हैं। अमेरिका ने 2025 में सैनिकों की संख्या घटाई है, लेकिन पूर्ण वापसी नहीं हुई है। अमेरिका और सीरिया के संबंध में सुधार हो रहे अमेरिका और सीरिया के संबंध दशकों तक तनावपूर्ण रहे, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता गिरने के बाद इनमें तेजी से सुधार हुआ। मई 2025 में सऊदी अरब में ट्रम्प और शरा की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद अमेरिका ने सीरिया पर लगे अधिकांश प्रतिबंध हटाने की घोषणा की। अमेरिका और सीरिया के राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1835 में हुई थी। हालांकि, 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के बाद हालात बदले। 2012 में अमेरिका ने दमिश्क से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक राज्य घोषित किया। असद सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन, रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल और ईरान और हिजबुल्लाह को समर्थन देने के आरोप लगे। अमेरिका ने सीरियाई विपक्ष का समर्थन किया और 2014 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। इसके तहत पूर्वी सीरिया में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए। ट्रम्प ने अल-शरा को मजबूत नेता बताया था जून और जुलाई 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने कार्यकारी आदेशों के जरिए प्रतिबंधों में और ढील दी, हालांकि असद और उसके करीबी सहयोगियों पर प्रतिबंध बरकरार रखे गए। सितंबर 2025 में दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध बहाल हुए। नवंबर 2025 में शरा ने व्हाइट हाउस का दौरा किया, जो किसी सीरियाई नेता का पहला आधिकारिक व्हाइट हाउस दौरा था। इस दौरान ट्रम्प ने शरा को “मजबूत नेता” बताया। अमेरिका ने सीरिया को वाशिंगटन में दूतावास खोलने की अनुमति दी और 2019 के प्रतिबंधों को 180 दिनों के लिए निलंबित किया। सत्ता छोड़ रूस भाग गए थे असद सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे के बाद राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर रूस भाग गए थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने असद और उनके परिवार को राजीतिक शरण दी थी। रूस ने कहा था कि सीरिया के राष्ट्रपति को शरण देना पुतिन का निजी फैसला था। हालांकि, यह जानकारी नहीं दी गई कि असद को कहां ठहराया गया। राष्ट्रपति असद के देश छोड़ने के बाद सीरियाई नागरिक उनके आवास में घुस गए थे। नागरिकों ने राष्ट्रपति भवन में लूटपाट की और वहां मौजूद सामान अपने साथ ले गए थे। अल-जुलानी के नाम से जाना जाता था अल-शरा अहमद अल-शरा ने 2003 में मेडिकल की पढ़ाई छोड़ अल कायदा नेताओं के संपर्क में आया। उसे अमेरिकी सेना ने 2005 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल से छूटने के बाद अल-शरा ने अल कायदा की सीरिया शाखा जबात अल-नुस्र का गठन किया। 2016 में वह अल कायदा से अलग हो गया और हयात तहरीर अल-शाम (HTS) की स्थापना की। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के पतन के बाद जुलानी ने सत्ता संभाली। इसके बाद दुनिया को उसके असली नाम का पता चला।

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