दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिए सिरसा के प्रदर्शनकारी सिख:संसद तक पैदल मार्च निकाल रहे थे, सजा पूरी कर चुके सिखों की रिहाई की मांग

May 9, 2026 - 08:44
 0  2
दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिए सिरसा के प्रदर्शनकारी सिख:संसद तक पैदल मार्च निकाल रहे थे, सजा पूरी कर चुके सिखों की रिहाई की मांग
सिरसा के प्रदर्शनकारियों सिखों आज (गुरुवार को) दिल्ली में हिरासत में लिया गया है। सूत्रों की मानें तो सिरसा ही नहीं हरियाणा व पंजाब से भी करीब 100 सिख प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। सभी को चार वैन में बैठाकर ले जाया गया है। जानकारी के अनुसार, ये सभी 1984 के सिख दंगों के बंदियों की रिहाई की मांग के लिए दिल्ली गए थे। पहले सभी प्रदर्शनकारी दिल्ली स्थित श्री बंगला साहिब गुरघर में एकत्रित हुए। वहां से सभी ने काले कपड़े या जैकेट पहनकर हाथों में हथकड़ी डालकर पैदल मार्च निकालते हुए संसद तक जाने का फैसला लिया। जैसे ही प्रदर्शनकारी गुरुघर से बाहर रोड पर हाथों में हथकड़ी डालकर पैदल मार्च निकालने लगे। तभी दिल्ली पुलिस वहां आ पहुंची और 100 से ज्यादा सिख प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान उन्होंने रोष जताया और दिल्ली की बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने, आज भी हम बेड़ियों में हैं, बंदी सिंह रिहा करो के नारे लगाए। इस पैदल मार्च में सिरसा से किसान नेता लखविंद्र सिंह और अंग्रेजी सिंह कोटली, दलजीत सिह रंगा, सरदूल सिहं भटटी एवं तिरलोक सिंह खैरा शामिल रहे। यहां देखिए फोटो… बंदी सजा पूरी कर चुके, सरकार नहीं कर रही रिहा किसान नेता लखविंद्र सिंह ने बताया, अभी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया हुआ है। इससे सभी प्रदर्शनकारियों में रोष का माहौल है। वे सभी शांतिपूर्ण तरीके से पैदल मार्च कर संसद जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने धक्काशाही करते हुए हिरासत में लिया है। उनकी मांग है कि सिख दंगों के जो आरोपी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और उनको 35 साल होने को गए। आज भी जेल में हैं। संविधान के अनुसार उनकी सजा पूरी हो चुकी है, परंतु सरकार उनको रिहा नहीं कर रही। उन्होंने मांग है कि सभी सिख बंदियों को रिहा किया जाए। 1984 सिख दंगों में 3 हजार से ज्यादा सिखों की हुई थी हत्या बता दें कि, 1984 का सिख नरसंहार भारत के इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जो सिख समुदाय के लिए गहरे दर्द और त्रासदी के रूप में आज भी ताजा है। यह नरसंहार 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद शुरू हुआ था। अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली समेत 110 शहरों में लगभग 3000 से अधिक सिखों की हत्या कर दी गई थी। 1 नवंबर का दिन 40वीं बरसी एवं बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इंदिरा गांधी की हत्या की खबर फैलते ही दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा की आग भड़क उठी। भीड़ ने घरों, गुरुद्वारों, दुकानों और संपत्तियों को निशाना बनाना शुरू किया, सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मार डाला और संपत्तियों को जला दिया। कई जगहों पर ट्रेन के डिब्बों में सिखों को जलाया गया और उनके घरों को तबाह कर दिया गया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0