साफ हवा नहीं, तो एयर प्यूरीफायर पर टैक्स क्यों:सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल; गडकरी ने माना- 40% पॉल्यूशन ट्रांसपोर्ट सेक्टर से फैल रहा

Dec 25, 2025 - 13:34
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साफ हवा नहीं, तो एयर प्यूरीफायर पर टैक्स क्यों:सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल; गडकरी ने माना- 40% पॉल्यूशन ट्रांसपोर्ट सेक्टर से फैल रहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और अधिकारियों से पूछा कि जब राजधानी में हवा की स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी हुई है तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार लोगों को साफ हवा उपलब्ध नहीं करा पा रही तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स ही कम कर दें। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गडेला की डिवीजन बेंच ने कहा कि हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार है। ऐसे हालात में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम मानकर 18% GST लगाना ठीक नहीं है। कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में रखा जाए और इन पर GST 18% से घटाकर 5% किया जाए। अपील में कहा गया कि खराब AQI के समय में एयर प्यूरीफायर अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। मामले की अगली सुनवाई 26 दिसंबर को होगी। वहीं, सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली में दो से तीन दिन रहने पर मुझे इन्फेक्शन हो जाता है। प्रदूषण का 40% हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर ही फैला रहा है, जिसका मैं मंत्री हूं। पॉल्यूशन पर दिल्ली हाईकोर्ट के 3 कमेंट बेंच ने सुझाव दिया कि 15 दिन या किसी तय अवधि के लिए ही सही, टैक्स राहत पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि वह सिर्फ लंबी तारीखें नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में ठोस प्रस्ताव चाहती है। PIL में क्या मांग की गई है? यह याचिका एडवोकेट कपिल मदान ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि मेडिकल डिवाइस रूल्स और 2020 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार एयर प्यूरीफायर “मेडिकल डिवाइस” की परिभाषा में आते हैं। याचिका में दलील दी गई है कि जब अधिकांश मेडिकल डिवाइस पर 5% GST लगता है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST तर्कसंगत नहीं है। याचिकाकर्ता ने WHO और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह का हवाला देते हुए कहा कि खराब से गंभीर AQI के दौरान, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए एयर प्यूरीफायर को सुरक्षा उपकरण के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इन्हें लग्जरी मानकर ऊंचा टैक्स लगाना लोगों के स्वास्थ्य अधिकार पर अतिरिक्त बोझ डालता है। वकील ने कहा- इस पर फैसला जीएसटी काउंसिल लेगी लंच के बाद सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच के सामने जवाब दाखिल किया। उन्होंने कहा कि मामले में फैसला GST काउंसिल लेगी। कोर्ट रूम में दी गई दलीलें... दिल्ली में GRAP 4 को हटाया गया कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR में हवा में कुछ सुधार के बाद GRAP स्टेज-4 के तहत लगाई गई पाबंदियों को हटा दिया है। वहीं, GRAP 3 के तहत आने वाली पाबंदियां लागू रहेंगी। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, आज इंडिया गेट के आसपास AQI 354 रहा। AAP ने कहा- कोई तो ऐसा है जो सच बोल रहा है AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने नितिन गडकरी के बयान पर कहा- मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं कि कम से कम एक नेता तो ऐसा है जो आम लोगों की आवाज उठा रहा है और सच बोल रहा है। मुझे लगता है कि पिछले तीन महीनों में दिल्ली की लगभग 60 प्रतिशत आबादी बीमार पड़ गई है। उन्होंने कहा कि नितिन गडकरी का बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार के इस दावे का खंडन करता है कि प्रदूषण का फेफड़ों की बीमारी से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार ने राज्यसभा में कहा था- AQI–फेफड़े की बीमारी में कनेक्शन नहीं केंद्र सरकार ने 20 दिसंबर को राज्यसभा में कहा था कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के ऊंचे स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाले ठोस वैज्ञानिक आंकड़े नहीं हैं। यह जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी थी। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सवाल किया था कि क्या दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक खतरनाक AQI रहने से फेफड़ों की क्षमता कम हो रही है।। वहीं, मेडिकल जर्नल ऑफ एडवांस्ड रिसर्च इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि खराब हवा के कारण फेफड़ों के काम करने की क्षमता घट रही है। पूरी खबर पढ़ें... 14 दिसंबर को दिल्ली का AQI 500 पहुंच गया था वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर कम हुआ तो दिल्ली में हवा थम गई। इसके चलते राजधानी 14 दिसंबर को ठंड, स्मॉग और प्रदूषण के ट्रिपल अटैक की चपेट में आ गई। ग्रैप-4 लागू होने के बावजूद वजीरपुर और रोहिणी इलाकों में AQI 500 के लेवल तक पहुंच गया था। प्रदूषक कण वातावरण में फंसे रहे और राजधानी गैस चेंबर बन गई। प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में कक्षा पांचवीं तक क्लासेस केवल ऑनलाइन लगाने के आदेश दिए। 14 दिसंबर को ही इस साल का सबसे घना कोहरा भी छाया। अक्षरधाम समेत कई इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर तक सिमट गई थी। पूरी खबर पढ़ें... -------------- ये खबर भी पढ़ें... LG बोले– दिल्ली में प्रदूषण के लिए AAP जिम्मेदार:केजरीवाल ने मेरा नंबर ब्लॉक किया; AAP का जवाब- आपकी करतूतों के कई वीडियो-कागजात हमारे पास दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल को मंगलवार को पत्र लिखा। एलजी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में हवा की खराब स्थिति के लिए केजरीवाल सरकार जिम्मेदार है। केजरीवाल ने दिल्ली के वायु प्रदूषण को कभी गंभीरता से नहीं लिया। इसी सोच और रवैये के चलते हवा लगातार खराब होती चली गई। पूरी खबर पढ़ें...

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