सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था; कोर्ट ने कहा- जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी

Mar 24, 2026 - 13:12
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सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था; कोर्ट ने कहा- जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।’ कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। जिन महिला अफसरों को गलत या मनमाने मूल्यांकन के कारण कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूरी पेंशन मिलेगी। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि इन अधिकारियों की 20 साल की न्यूनतम सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही वे इससे पहले ही सेवा से बाहर हो गई हों। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई की। सुचेता ईडन समेत अन्य महिला अधिकारियों ने याचिका लगाई थीं, जिनमें 2019 की नीति और आर्मर्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के फैसलों को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 3 राहत दी… 1. जिन SSC अफसरों को 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT (ट्रिब्यूनल) के फैसले के आधार पर पहले ही स्थायी कमीशन (PC) मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा। 2. जो महिला SSC अफसर (अपीलकर्ता) इस केस के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें मान लिया जाएगा कि उन्होंने 20 साल की जरूरी सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा। 3. वर्तमान में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा। यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है। कोर्ट रूम लाइव…. सीजेआई: आज 3 मामलों में फैसला सुनाया जा रहा है- आर्मी, नेवी और एयर फोर्स पर… इसके बाद सीजेआई ने एक-एक कर तीनों सेनाओं के मामलों पर आदेश सुनाया… आर्मी केस नेवी केस एयर फोर्स कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा… सेनाओं में महिला अफसरों की अभी क्या स्थिति है 1. थलसेना : महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे- इन्फैंट्री, आर्मर्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता। हालांकि, मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं। 2. वायुसेना और नौसेना : यहां महिला अफसरों को स्थाई कमीशन का विकल्प है। वायुसेना में महिलाएं कॉम्बैट रोल, जैसे- फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में शामिल हो सकती हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं वायुसेना में ही हेलिकॉप्टर से लेकर फाइटर जेट तक उड़ा सकती हैं। नौसेना में भी महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं दे सकती हैं। सेनाओं में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन केस की टाइमलाइन

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