10 राज्य-UT डेडलाइन तक फाइनल वोटर-लिस्ट पब्लिश करने से चूके:लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने मतदाता सूची जारी की; राजस्थान-यूपी और बंगाल में डेट बढ़ी

Feb 15, 2026 - 12:18
 0  0
10 राज्य-UT डेडलाइन तक फाइनल वोटर-लिस्ट पब्लिश करने से चूके:लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने मतदाता सूची जारी की; राजस्थान-यूपी और बंगाल में डेट बढ़ी
देश के नौ राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 7 फरवरी तक अपनी फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश नहीं कर सके। हालांकि, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने शनिवार को अपनी फाइनल इलेक्टोरल रोल प्रकाशित कर दी। पुडुचेरी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश की फाइनल वोटर लिस्ट में 9,44,211 मतदाता के नाम हैं। वहीं, लक्षद्वीप में कुल 57,607 मतदाता सूचीबद्ध किए गए हैं। 12 राज्यों-UT में वोटर लिस्ट के SIR में करीब 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग (EC) के मुताबिक कुछ राज्यों में काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसकी वजह यह रही कि वहां तय कार्यक्रम का ठीक से पालन नहीं किया गया। कई जगह निचले स्तर पर कामकाज में कमी रही, कुछ मामलों में राजनीतिक दखल भी हुआ और कुछ मुद्दे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए। इन कारणों से पूरी प्रक्रिया में देरी हुई। राजस्थान को भी शनिवार को अंतिम सूची जारी करनी थी, लेकिन पब्लिश डेट बढ़ाकर 21 फरवरी कर दी गई है। इससे पहले पश्चिम बंगाल की भी डेडलाइन बढ़ाकर 28 फरवरी और यूपी की 10 अप्रैल कर दी गई थी। 10 फरवरी: असम में फाइनल लिस्ट पब्लिश चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को असम में हुए स्पेशल रिवीजन (SR) 2026 के तहत फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी। EC के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की तुलना में 2.43 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। अब राज्य में कुल 2,49,58,139 वोटर्स रजिस्टर्ड हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाताओं की संख्या 2,52,01,624 थी। स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया के बाद लिस्ट में 2,43,485 नाम हटाए गए हैं। अब फाइनल लिस्ट में 1,24,82,213 पुरुष, 1,24,75,583 महिलाएं और 343 थर्ड-जेंडर शामिल हैं। SIR के बारे में जानें… यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है। जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं। 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। --------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे, बंगाल में फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की डेडलाइन बढ़ाई सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वह इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0