राजकोट में 1489 अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर:87000 वर्ग मीटर जमीन होगी खाली, 2,500 से ज्यादा निगम अधिकारी, पुलिसकर्मी तैनात
गुजरात के राजकोट शहर के जांगलेश्वर इलाके में सोमवार से अवैध कब्जा हटाने का एक बड़ा अभियान शुरू हो गया है। राजकोट महानगरपालिका (आरएमसी) यहां 1,489 अवैध मकानों और इमारतों पर बुलडोजर की कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी के आदेश मिलने के बाद शुरू की गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 2500 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। अब तक 1026 घर लोगों ने स्वयं खाली कर दिए हैं, जबकि शेष घरों के खाली होने पर निगरानी रखी जा रही है। दोपहर 3:30 बजे तक 953 घरों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। इस अभियान के तहत लगभग 87,000 वर्ग मीटर जमीन को खाली कराया जाएगा। सड़क किनारे का निर्माण हटाया जा रहा
म्युनिसिपल कमिश्नर तुषार सुमेरा ने बताया कि शनिवार को जंगलेश्वर क्षेत्र में अजी नदी पट और टीपी रोड पर स्थित 7 अवैध अतिक्रमणों पर पुलिस और नगर निगम द्वारा पैदल गश्त की गई। अतिक्रमणकारियों को घर-घर जाकर दो दिनों के भीतर अपने घर खाली करने के लिए राजी किया गया था। सुबह शुरू हुआ यह अभियान शाम 7 बजे तक चला। इस दौरान 224 लोगों ने स्वेच्छा से अपने अतिक्रमण खाली कर दिए। कमिश्नर तुषार सुमेरा ने आगे बताया कि नदी किनारे और सड़क पर हुआ निर्माण पूरी तरह अवैध है और इसे हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निगम की टीम पिछले पांच दिनों से घर-घर जाकर लोगों को समझा रही थी। प्रशासन ने लोगों को अपना सामान ले जाने के लिए ट्रैक्टर की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। क्षेत्र को 7 जोन में बांटा गया
इस अभियान के लिए पूरे जंगलेश्वर क्षेत्र को 7 जोन में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन में प्रथम श्रेणी के अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी, पर्यवेक्षक और फील्ड वर्कर तैनात किए गए हैं। इस अभियान में नगर निगम ने सूक्ष्म योजना बनाकर 260 से अधिक मशीनों का उपयोग किया है, जिनमें 64 से अधिक जेसीबी, 90 ट्रैक्टर, 7 हिताची, 50 ब्रेकर, 42 गैस कटर और 14 डंपर शामिल हैं। डिमॉलिशन की इस कार्रवाई से यहां दशकों से रह रहे लोगों में काफी गुस्सा है। अपना घर खोने वाली नासिमबेन कादरी ने भास्कर से कहा- हमारा घर गिर गया है, लेकिन हमें अभी तक क्वार्टर नहीं मिले हैं। हमारा सामान सड़क पर पड़ा है। मैं विधवा हूं और मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है। मैं कहां जाऊं? उन्होंने दो दिन की समय देकर मेरा मकान गिरा दिए। मेरी किराया देने की हालत भी नहीं है। हमें रहने के लिए कोई जगह भी नहीं दी गई है। हुसैनबेन नाम की एक महिला ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा- हमारे घर ढहा दिए गए हैं। अब हम रहने की जगह का इंतजाम कैसे करें? घर में छह सदस्य हैं। हमें नहीं पता कि कहां जाएं और क्या करें। अभी तो किराया भी 12-13 हजार तक बढ़ गया है। हमने अपना सामान किराए के मकान में रखा है। हमारी आय भी इतनी नहीं है कि किराया दे सकें। घर का खर्च कैसे चलाएंगे। वहीं, एक अन्य निवासी अनिताबेन ने कहा कि उनका परिवार 50 साल से यहां रह रहा है और उन्हें घर खाली करने का आदेश मिला है। उन्होंने कहा, 'आठ लोगों के परिवार को कोई भी किराए पर घर देने के लिए तैयार नहीं है। हम सड़क पर रहने की तैयारी कर रहे हैं।' ------------------------ गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... अहमदाबाद में 925 अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर:एक हजार से ज्यादा लोग हुए बेघर, लोगों ने तालाब पर भी कर लिया था निर्माण गुजरात के अहमदाबाद में चंडोला झील के बाद एक और मेगा डिमोलिशन की कार्रवाई हो रही है। शहर के पूर्वी इलाके में स्थित इसनपुर तालाब के आसपास का बने मकान-दुकान ढहाए जा रहे हैं। सोमवार सुबह से शुरू हुई अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई चार चरणों में होगी। पूरी खबर पढ़ें…
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