कालिंदी कुंज में चला एमसीडी का बुलडोजर:यमुना ओ-जोन में 300 से अधिक झुग्गियां तोड़ी, बेघर हुए परिवारों में कोहराम

Jun 17, 2026 - 00:26
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कालिंदी कुंज में चला एमसीडी का बुलडोजर:यमुना ओ-जोन में 300 से अधिक झुग्गियां तोड़ी, बेघर हुए परिवारों में कोहराम
दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में मंगलवार को प्रशासन का बुलडोजर पूरी ताकत के साथ गरजा। यमुना किनारे ओ-जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) में बसी 300 से अधिक अवैध झुग्गियों को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ध्वस्त कर दिया। मानसून से पहले यमुना के फ्लड प्लेन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए गए इस अभियान के दौरान इलाके में भारी तनाव की स्थिति रही। एमसीडी की टीम के साथ भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान तैनात किए गए थे] ताकि किसी भी तरह के विरोध को नियंत्रित किया जा सके। एमसीडी प्रशासन के अनुसार, यह इलाका यमुना तट से महज 300 मीटर की दूरी पर है और इसे ओ-जोन घोषित किया गया है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। निगम ने पहले ही इन अवैध ढांचों को खाली करने का नोटिस जारी किया था। सुबह जैसे ही जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंचीं, स्थानीय लोगों ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस बल के सामने उनकी एक न चली और कार्रवाई निर्बाध रूप से संपन्न हुई। कर्ज में डूबे परिवारों पर गिरी गाज इस कार्रवाई ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया है। स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने बताया, हमने 2017 में जमीन खरीदी थी, तब हमें नहीं पता था कि यह ओ-जोन में आता है। जिसने जमीन बेची, उसने धोखा किया। आज हम कर्ज लेकर बनाए गए अपने आशियाने को उजड़ते देख रहे हैं। वहीं, पीड़ित अक्षरा ने सवाल उठाया, हम 10 साल से यहां रह रहे हैं। प्रशासन उन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता जिन्होंने हमें बसाया, आज हम छोटे बच्चों और बीमारी के साथ कहां जाएं? सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की कार्रवाई अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार है। एक एमसीडी अधिकारी ने स्पष्ट किया, सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए यह कार्रवाई की गई है। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। मानसून के दौरान यमुना के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ रुख सख्त कर दिया है। कालिंदी कुंज की इस कार्रवाई ने उन लोगों में डर पैदा कर दिया है जो अभी भी यमुना के किनारे बसे हुए हैं।

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