इंदौर में हेड कॉन्स्टेबल की संपत्ति पर लोकायुक्त का बड़ा खुलासा, ₹29.73 करोड़ की संपत्ति का अनुमान; 33 प्रॉपर्टी और 21 बैंक खातों की जानकारी
₹29.73 Crore in Assets Discovered in Indore Head Constable Probe; Lokayukta Finds 33 Properties and 21 Bank Accounts
इंदौर में हेड कॉन्स्टेबल की संपत्ति पर लोकायुक्त का बड़ा खुलासा, ₹29.73 करोड़ की संपत्ति का अनुमान; 33 प्रॉपर्टी और 21 बैंक खातों की जानकारी
मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस की जांच के दौरान एक हेड कॉन्स्टेबल से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है। पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC), इंदौर में तैनात हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान से जुड़े इंदौर और देवास के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की टीमों ने तलाशी अभियान चलाया। शुरुआती जांच में करीब ₹29.73 करोड़ की अनुमानित बाजार कीमत वाली संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज सामने आए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान कुल 33 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इनमें मकान, फ्लैट, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। इसके अलावा, लगभग नौ वाहनों के दस्तावेज और 21 बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि कुछ संपत्तियां हेड कॉन्स्टेबल के परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम पर दर्ज हैं। इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और खरीद में इस्तेमाल की गई रकम की जांच की जा रही है।
लोकायुक्त की शुरुआती पड़ताल में फिरोज खान की वेतन से हुई आय लगभग ₹75 लाख आंकी गई है, जबकि अन्य ज्ञात स्रोतों को मिलाकर कुल आय करीब ₹1.93 करोड़ बताई गई है। इसके मुकाबले, चल और अचल संपत्तियां खरीदने पर लगभग ₹12.95 करोड़ खर्च किए जाने का अनुमान है। जांच एजेंसी के अनुसार, ज्ञात आय और खर्च के बीच करीब ₹11 करोड़ का अंतर सामने आया है। अधिकारियों को कुछ कारोबारी फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिनके वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी है।
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और कारोबारी लेनदेन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संपत्तियां खरीदने के लिए धन कहां से आया। इस मामले में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच में सामने आए आंकड़े शुरुआती निष्कर्ष हैं और अंतिम जिम्मेदारी तथा दोष का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा। मामले में आगे होने वाले खुलासों पर अब सभी की नजर बनी हुई है।
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