सौरव दास और आशुतोष रांका के फोन जब्त, वकीलों से मिलने नहीं देने का आरोप; दिल्ली पुलिस पर CJP ने उठाए सवाल

CJP Alleges Phones Seized, Lawyers Denied Access to Saurav Das and Ashutosh Ranka After Detention

Oct 13, 2026 - 16:41
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सौरव दास और आशुतोष रांका के फोन जब्त, वकीलों से मिलने नहीं देने का आरोप; दिल्ली पुलिस पर CJP ने उठाए सवाल

सौरव दास और आशुतोष रांका के फोन जब्त, वकीलों से मिलने नहीं देने का

आरोप; दिल्ली पुलिस पर CJP ने उठाए सवाल

नई दिल्ली:

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान नेताओं के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें अपने वकीलों से मिलने की अनुमति भी नहीं दी गई। CJP की कानूनी टीम से जुड़ी रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर इन आरोपों को उठाते हुए हिरासत की कानूनी प्रक्रिया और वकील तक पहुंच को लेकर सवाल किए। 

यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला देते हुए कार्रवाई की। 10 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान से उतरने के बाद हिरासत में लिया गया था। 

CJP नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके फोन अपने पास रखे और उन्हें हिरासत के आधार से संबंधित दस्तावेज भी नहीं दिए। नेताओं ने यह आशंका भी जताई कि फोन के डेटा के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों नेताओं को अगले दिन कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद जमानती मुचलकों पर रिहा कर दिया गया था। फोन जब्त करने और वकीलों से मुलाकात रोकने से जुड़े आरोपों पर पुलिस का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा। 

इस घटना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस की निवारक कार्रवाई और हिरासत में लिए गए लोगों के कानूनी अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और आंदोलन जारी रखने की बात कही है। हालांकि, आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित सभी तथ्यों का निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और दिल्ली पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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