‘भारत-अजरबैजान के बीच मतभेद रहे हैं’ जयशंकर के सामने खुलकर बोले अजरबैजान के विदेश मंत्री, रिश्ते सुधारने पर भी जोर

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Oct 24, 2026 - 17:27
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‘भारत-अजरबैजान के बीच मतभेद रहे हैं’ जयशंकर के सामने खुलकर बोले अजरबैजान के विदेश मंत्री, रिश्ते सुधारने पर भी जोर

‘भारत-अजरबैजान के बीच मतभेद रहे हैं’ जयशंकर के सामने खुलकर बोले अजरबैजान के विदेश मंत्री, रिश्ते सुधारने पर भी जोर

भारत और अजरबैजान के रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बायरामोव ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सामने दोनों देशों के बीच रहे मतभेदों को खुलकर स्वीकार किया। 23 अक्टूबर 2026 को बाकू में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में बायरामोव ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों पर भारत और अजरबैजान की राय अलग रही है। उनके मुताबिक, इन मतभेदों का असर द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संगठनों में दोनों देशों के सहयोग पर भी पड़ा। 

बायरामोव ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों ने इन मुद्दों पर खुलकर और विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने जयशंकर की यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि बातचीत से आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिलेंगे। भारत और अजरबैजान के बीच हाल के वर्षों में तनाव का एक प्रमुख कारण पाकिस्तान के प्रति अजरबैजान का समर्थन और मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के अलग-अलग रुख रहे हैं। इन घटनाक्रमों ने दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में दूरी पैदा की थी। 

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, पर्यटन और परिवहन संपर्क जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) में बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई और दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया। भारत की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण बताया गया। 

जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों देशों की ओर से सामने आए बयानों से संकेत मिलता है कि मतभेदों के बावजूद बातचीत और व्यावहारिक सहयोग के रास्ते खुले रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस यात्रा से संबंधों में कितना सुधार आता है, यह आने वाले समय में व्यापार, सुरक्षा सहयोग और राजनयिक संपर्कों में होने वाली प्रगति से स्पष्ट होगा। फिलहाल दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने और सहयोग के नए अवसर तलाशने पर जोर दिया है।

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