उज्जैन के महाकाल मंदिर में आधी रात को गूंजे गोलियों के धमाके! हथियारबंद NSG कमांडो ने संभाला मोर्चा, जानिए क्या था पूरा मामला
Gunfire Echoes at Ujjain’s Mahakal Temple at Midnight; NSG Commandos Conduct Major Security Drill
उज्जैन के महाकाल मंदिर में आधी रात को गूंजे गोलियों के धमाके! हथियारबंद NSG कमांडो ने संभाला मोर्चा, जानिए क्या था पूरा मामला
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में गुरुवार देर रात अचानक सुरक्षा बलों की हलचल तेज हो गई। रात करीब 11 बजे से लेकर शुक्रवार तड़के 2 बजे तक हथियारों से लैस NSG के ब्लैक कैट कमांडो ने विशेष सुरक्षा अभ्यास किया। इस दौरान मंदिर परिसर और महाकाल लोक क्षेत्र में कमांडो की गतिविधियां देखने को मिलीं। गोलियों जैसी आवाजें और सुरक्षा बलों की तेज कार्रवाई देखकर लोगों के मन में कई सवाल उठे, लेकिन राहत की बात यह रही कि यह कोई वास्तविक आतंकी हमला नहीं था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG के करीब 150 कमांडो इस अभ्यास में शामिल हुए। मॉक ड्रिल के दौरान आतंकवादी हमले जैसी काल्पनिक स्थिति बनाई गई, ताकि सुरक्षा बल ऐसी आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई का अभ्यास कर सकें। कमांडो ने महाकाल लोक के मानसरोवर क्षेत्र से लेकर त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के आसपास के इलाकों में सुरक्षा प्रक्रिया का अभ्यास किया। इस दौरान स्थानीय पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल को भी परखा गया।
इस सुरक्षा अभ्यास का एक अहम उद्देश्य मंदिर परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों, आपातकालीन रास्तों तथा संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा तैयारियों का आकलन करना था। किसी संभावित संकट के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने और स्थिति पर जल्द नियंत्रण पाने की रणनीति का भी पूर्वाभ्यास किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की मॉक ड्रिल से सुरक्षा बलों की तत्परता और अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की क्षमता को बेहतर तरीके से जांचा जा सकता है।
दरअसल, वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन देश-विदेश से भक्त दर्शन के लिए आते हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी तैयारी के तहत किया गया यह अभ्यास किसी वास्तविक हमले की कार्रवाई नहीं, बल्कि संभावित खतरे से निपटने की रिहर्सल था। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य है कि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
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