मंदसौर में स्कॉर्पियो के गुप्त खानों से मिले ₹1.29 करोड़, सरपंच समेत तीन लोग गिरफ्तार

₹1.29 Crore Cash Found in Hidden Compartments of Scorpio in Madhya Pradesh’s Mandsaur; Sarpanch Among Three Detained

Oct 15, 2026 - 10:18
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मंदसौर में स्कॉर्पियो के गुप्त खानों से मिले ₹1.29 करोड़, सरपंच समेत तीन लोग गिरफ्तार

मंदसौर में स्कॉर्पियो के गुप्त खानों से मिले ₹1.29 करोड़, सरपंच समेत तीन लोग गिरफ्तार

मंदसौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना रजिस्ट्रेशन नंबर वाली काली महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन से ₹1 करोड़ 29 लाख की नकदी बरामद की है। इस मामले में बरखेड़ा उदा गांव के सरपंच भवानी शंकर मीणा समेत तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक वाहन में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकदी छिपाकर रखी गई है। इसके बाद शामगढ़, सुवासरा और भानपुरा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। 

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान सरपंच के घर के पीछे बने परिसर में काली स्कॉर्पियो खड़ी मिली। वहां मौजूद तीन व्यक्तियों से पूछताछ की गई, लेकिन नकदी और वाहन के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर उन्हें वाहन समेत शामगढ़ थाने लाया गया। इसके बाद गाड़ी की बारीकी से जांच के लिए मैकेनिक की मदद ली गई। जांच के दौरान वाहन की बॉडी में बनाए गए गुप्त खानों से नोटों के बंडल बरामद हुए। गिनती करने पर कुल रकम ₹1.29 करोड़ निकली। 

इस मामले में हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान भवानी शंकर मीणा, मोहम्मद इस्लाम और सूर्य प्रकाश के रूप में हुई है। भवानी शंकर मीणा बरखेड़ा उदा गांव के सरपंच हैं, जबकि मोहम्मद इस्लाम और सूर्य प्रकाश उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने नकदी के साथ करीब ₹20 लाख कीमत की स्कॉर्पियो भी जब्त की है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी रकम किसकी है, कहां से लाई गई थी और इसे किस जगह ले जाया जाना था। 

पुलिस को आशंका है कि बरामद नकदी का संबंध मादक पदार्थों की तस्करी या अन्य अवैध गतिविधियों से हो सकता है, लेकिन इस संबंध की अभी पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने नकदी के स्रोत की जांच के लिए आयकर विभाग को भी सूचना देने की बात कही है। फिलहाल तीनों व्यक्तियों से पूछताछ जारी है और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता को दोष साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 

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