ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह, भारत की NavIC नेविगेशन प्रणाली को मिलेगी नई मजबूती

ISRO Successfully Launches NVS-03 Satellite to Strengthen India’s Indigenous NavIC Navigation System

Nov 1, 2026 - 17:22
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ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह, भारत की NavIC नेविगेशन प्रणाली को मिलेगी नई मजबूती

ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह, भारत की NavIC नेविगेशन प्रणाली को मिलेगी नई मजबूती

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 30 अक्टूबर 2026 की रात श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। रात 11 बजकर 51 मिनट पर उड़ान भरने वाले इस रॉकेट ने उपग्रह को निर्धारित जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। यह GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान थी और भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष नेविगेशन कार्यक्रम के लिए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

NVS-03 भारत की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NavIC की दूसरी पीढ़ी का तीसरा उपग्रह है। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित एटॉमिक क्लॉक के साथ अन्य एटॉमिक क्लॉक भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, यह L1 सिग्नल बैंड के साथ L5 और S बैंड की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा। इन तकनीकी सुविधाओं से भारत की नेविगेशन सेवाओं की उपलब्धता, विश्वसनीयता और क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

NavIC यानी Navigation with Indian Constellation भारत की क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है। इसका उद्देश्य भारत के पूरे भूभाग और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसका इस्तेमाल परिवहन, समुद्री गतिविधियों, आपदा प्रबंधन, मोबाइल आधारित सेवाओं और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में किया जा सकता है। NVS-03 के सफल प्रक्षेपण से NavIC को आवश्यक न्यूनतम चार उपग्रहों की स्थिति हासिल करने में मदद मिली है। 

ISRO के अनुसार, प्रक्षेपण के बाद NVS-03 की पहली कक्षा सुधार प्रक्रिया 31 अक्टूबर को सफलतापूर्वक पूरी की गई और उपग्रह के सभी सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसे निर्धारित कक्षा में पहुंचाने के लिए आगे की प्रक्रियाएं की जाएंगी। इस मिशन से भारत की विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करने की दिशा में प्रगति होगी। हालांकि, उपग्रह को पूरी तरह सेवाओं के लिए तैयार होने में कक्षा स्थापना और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

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